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AVYAKT MURLI

11 / 02 / 75

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   11-02-75   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन 

माया से युद्ध करने वाले पाण्डवों के लिए धारणाएं

पाण्डव पति शिव बाबा बोले -

पाण्डवों के लिये जो कल्प पहले का गायन है, क्या वह सब विशेषतायें वर्तमान समय जीवन में अनुभव होती हैं? यह जो गायन है कि उन्होंने पहाड़ों पर स्वयं को गलाया-इसका रहस्य क्या है? किस बात में गलाया? सूक्ष्म बात का ही यादगार स्थूल रूप में होता है। जैसे चैतन्य का यादगार स्थूल में होता है, वैसे ही सूक्ष्म को स्पष्ट करने के लिये दृष्टान्त दिया जाता है। स्वयं को सफलता मूर्त बनाने के निमित्त पुरूषार्थियों के पुरूषार्थ में जो विघ्न सामने आते हैं, उन विघ्नों के कारण क्या स्वयं को सफलतामूर्त नहीं बना सकते हैं? या बार-बार उसी स्वभाव व संस्कार के कारण असफलता होती है जिसको निजी संस्कार व नेचर कहा जाता है। तो ऐसे निजी संस्कारों को गलाना अर्थात् स्वयं को गलाना कि देखने या सम्पर्क में आने वाले यह महसूस करें कि इस आत्मा ने स्वयं को गलाया है। इसमें सफलता है!

ड्रामा प्रमाण जितना सहजयोगी, श्रेष्ठ योगी और सफलतामूर्त बनने की सेल्वेशन प्राप्त है, उतना ही रिटर्न दिया है? वातावरण की भी सेल्वेशन है तो इसका रिटर्न वातावरण को पॉवरफुल बनाकर रखने में, सहयोगी बनने में रिटर्न दो। साथ-साथ श्रेष्ठ संग है, यह भी सेलवेशन है तो जो भी आत्मायें अपना भाग्य प्राप्त करने के लिए आती हैं उन्हों को भी अपने संग की श्रेष्ठता का अनुभव हो। यह है रिटर्न। सब अनुभव करें कि यह सब आत्मायें संग के रंग में रंगी हुई हैं। श्रेष्ठ बनेंगे रूहानी संग से और अपने चरित्रों द्वारा। अपने कर्मयोगी की स्टेज द्वारा और अपने गुणमूर्त स्वरूप द्वारा आने वाली आत्माओं का इग्जॉम्पल बन, साधन बन उनकी सहज प्राप्ति का साधन बन जाओ। आपका प्रैक्टिकल साकार स्वरूप का सैम्पल देख उनमें विशेष उमंग उत्साह रहे। सदैव हर बात में यही संकल्प रखना चाहिए कि हर कार्य में, हर प्रैक्टिकल सबूत के पहले हम सैम्पल है। हर ब्त में हम सैम्पल हैं। जब ऐसा लक्ष्य आगे रखेंगे तब ही पुरूषार्थ की गति को तीव्र कर सकेंगे। भले ही आराम के साधन प्राप्त हैं, परन्तु आराम पसन्द नहीं बन जाना है। पुरूषार्थ में भी आराम पसन्द न होना अर्थात् अलबेला न होना है। आराम के साधनों का एडवान्टेज (लाभ) सदाकाल की प्राप्ति का विघ्न रूप नहीं बनाना। यह अटेन्शन रखना है। अगर किसी भी प्रकार की सिद्धि अथवा प्राप्ति को स्वीकार किया तो वहाँ कम हो जायेगा। साधन मिलते हुए भी उसका त्याग। प्राप्ति होते हुए भी त्याग करना उसको ही त्याग कहा जाता है। जब कि है ही अप्राप्ति, उसको त्याग दो तो यह मजबूरी हुई न कि त्याग। इतना अटेन्शन, अपने ऊपर रखते हो अथवा सहजयोग का यह अर्थ समझते हो कि सहज साधनों द्वारा योगी बनना है। हर बात में अटेन्शन रहे। रिटर्न देना अर्थात् आगे के लिए कट करना। खत्म करना। माइनस हो रहा है अथवा प्लस, हो रहा है यह चेक (जाँच) करना है। अच्छा।

09-09-75   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन 

ग्लानि को गायन समझकर रहमदिल बनो

अपकारियों पर भी उपकार करने का गुण सिखाने वाले, सब के कल्याणकारी शिव बाबा सौभाग्यशाली बनने वाले बच्चों से बोले

अपने चमकते हुए तकदीर के सितारे को देखते हो? तकदीर का सितारा सदा चमकता रहता है अथवा कभी चमकता है और कभी चमक कम हो जाती है अर्थात् घटनाओं रूपी घटा के बीच छिप जाता है? या कभी इन स्थूल सितारों के समान, जैसे स्थूल सितारे स्थान बदली करते हैं वैसे स्थिति बदली तो नहीं होती है? या तकदीर की लकीर अभी चढ़ती कला और अभी-अभी ठहरती कला व गिरती कला ऐसे बदलती तो नहीं है? क्योंकि संगम युग पर तकदीर की रेखा परिवर्तन करने वाला बाप सम्मुख पार्ट बजा रहे हैं। ऐसे तकदीर बनाने वाले बाप के डायरेक्ट बच्चे-उन्हों की तकदीर श्रेष्ठ और अविनाशी चाहिए। ऐसी तकदीर अन्य कोई भी आत्मा नहीं बना सकती है। ऐसे तकदीरवान अपने को अनुभव करते हो?

श्रेष्ठ तकदीर बनाने वालों की निशानी क्या होगी? जानते हो? ऐसा तकदीरवान हर संकल्प में, हर बोल में, कर्म में फालोफादर करता होगा। संकल्प भी बाप समान विश्व कल्याण की सेवा अर्थ होगा। हर बोल में नम्रता, निर्माणता और उतनी ही महानता होगी। स्मृति स्वरूप में एक तरफ बेहद का मालिकपन, दूसरी तरफ विश्व की सेवाधारी आत्मा होगी। एक तरफ अधिकारीपन का नशा, दूसरी तरफ सर्व के प्रति सत्कारी, हर आत्मा के प्रति बाप समान दाता और वरदाता, चाहे दुश्मन हो, किसी भी जन्म के हिसाबकिताब चुक्तु करने के निमित्त बनी हुई आत्मा हो - ऐसी श्रेष्ठ स्थिति से गिराने के निमित्त बनी हुई आत्मा को भी, संस्कारों के टक्कर खाने वाली आत्मा को भी, घृणा वृत्ति रखने वाली आत्मा को भी, सर्व आत्माओं के प्रति दाता व वरदाता। ठुकराने वाली आत्मा भी कल्याणकारी आत्मा अनुभव हो, ग्लानि के बोल व निन्दा के बोल भी महिमा व गायन योग्य अनुभव हों तथा ग्लानि गायन अनुभव हो। जैसे द्वापर में आप सबने बाप की ग्लानि का, लेकिन बाप ने ग्लानि भी गायन समझ कर स्वीकार की और ग्लानि के रिटर्न में भक्ति का फल-ज्ञान दिया, न कि घृणा और ही रहम-दिल बने। ऐसे फालो फादर। ऐसे फालो फादर करने वाले ही श्रेष्ठ तकदीरवान बनते है। जैसे बाप से विमुख बनी हुई आत्माओं को अपना बना कर अपने से ऊंच प्रालब्ध प्राप्त करते हैं - ऐसे श्रेष्ठ तकदीर-वान बच्चे बाप समान हर आत्मा को अपने से भी आगे बढ़ाने की शुभ भावना रखते हुए विश्व-कल्याणकारी बनेंगे। इसको कहा जाता है निरन्तर योगीपन के लक्षण।

ऐसी ऊंची मंज़िल को प्राप्त करने वाले जो बोल और भाव को परिवर्तन कर दें अर्थात् निन्दा को भी स्तुति में परिवर्तन कर दें, ग्लानि को गायन में परिवर्तित कर दे, ठुकराने को सत्कार में परिवर्तित कर दें, अपमान को स्व-अभिमान में परिवर्तित कर दें व अपकार को उपकार में परिवर्तित कर दें व माया के विघ्नों को बाप की लगन में मग्न होने का साधन समझ परिवर्तित कर दें - ऐसे बाप समान सदा विजयी अष्ट रत्न बनते हैं। और भक्तों के इष्ट बनते हैं। ऐसी स्थिति को पहुँचे हो? या सिर्फ स्नेही आत्माओं के प्रति सहयोगी आत्मायें बने हो? होपलेस केस में व ना-उम्मीदवार को उम्मीदों का सितारा बनाना-कमाल इसी बात में है। ऐसी कमाल दिखाने वाले बने हो? या सिर्फ बाप की कमाल देख हर्षित होने वाले बने हो? जब कि फॉलो फादर है तो कमाल करने वाला बनना है न कि देखकर हर्षित होने वाला बनना है। समझा? इसको कहा जाता है फॉलो फादर।

जैसा समय वैसे अपने कदम को बढ़ाना चाहिए। जब अन्तिम समय समझते हो तो अपनी स्थिति भी अन्तिम सम्पूर्ण स्टेज वाली समझते हो? समय अन्तिम और पुरूषार्थ की रफ्तार व स्थिति मध्यम होगी तो रिजल्ट क्या होगी? स्वर्ग के सुखों की प्रालब्ध मध्यम पुरूषार्थ वाले सतयुग के मध्य में प्राप्त करेंगे - ऐसा लक्ष्य तो नहीं है ना? लक्ष्य फर्स्ट जन्म में आने का है तो लक्षण भी फर्स्ट क्लास चाहिए। समय प्रमाण और लक्ष्य प्रमाण पुरूषार्थ को चेक करो। अच्छा!

ऐसे बाप के समान सर्व के सत्कारी, बाप के वर्से के अधिकारी, हर ना-उम्मीदवार को उम्मीदों का सितारा बनाने की कमाल करो। 86 संकल्प और कदम में फॉलो फादर करने वाले, श्रेष्ठ तकदीर बनाने वाले तकदीर के सितारे, निरन्तर बाप की याद और सेवा में तत्पर रहने वाले सदा विजयी बच्चों को बापदादा का याद-प्यार और नमस्ते।

इस मुरली के विशेष तथ्य

1. श्रेष्ठ तकदीर बनाने वाले बच्चे की निशानी यह होगी कि वह हर संकल्प में, हर बोल में और हर कर्म में फॉलोफादर होगा।

2. जैसे बाप बे-मुख बनी आत्माओं को अपना बना कर उनका अपने से ऊंच प्रालब्ध बनाते है ऐसे ही श्रेष्ठ तकदीरवान बच्चे भी हर आत्मा को अपने से भी आगे बढ़ाने की शुभ भावना रखते हुए विश्व-कल्याणकारी बनते हैं।

3. माया के विघ्नों को बाप की लगन में मग्न होने का साधन समझ परिवर्तित कर दें - ऐसे विजयी वत्स ही अष्ट रत्न बनते हैं।

 

 

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QUIZ QUESTIONS

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 प्रश्न 1 :- श्रेष्ठ तकदीर बनाने वाली आत्माओं की निशानी क्या होगी?

 प्रश्न 2 :- सदा विजयी अष्ट रत्न और भक्तों के इष्ट बनने का सहज साधन क्या है?

 प्रश्न 3 :- कल्प पहले का गायन है पाण्डवों ने पहाड़ों पर स्वयं को गलाया-इसका रहस्य क्या है? क्या वह सब विशेषतायें वर्तमान समय जीवन में अनुभव होती हैं?

 प्रश्न 4 :- निरन्तर योगीपन के क्या लक्षण होते हैं?

 प्रश्न 5 :- हर प्रैक्टिकल सबूत के पहले हम सैम्पल है यह लक्ष्य क्यों रखना है ? सहज साधनों द्वारा योगी कैसे बनना है।?

       FILL IN THE BLANKS:-    

{ प्लस, यादगार, ग्लानि, सूक्ष्म, गायन, उपकार, सहज, सौभाग्यशाली, चेक (जाँच), कल्याणकारी, रहमदिल, साधन, इग्जॉम्पल, अटेन्शन }

 1   ______ बात का ही  _________ स्थूल रूप में होती है।

 2  अपकारियों पर भी  _________ करने का गुण सिखाने वाले, सब के _________ शिव बाबा  _________ बनने वाले बच्चों से बोले।

 3  __________ को________ समझकर ________ बनो।

 4  अपने कर्मयोगी की स्टेज द्वारा और अपने गुणमूर्त स्वरूप द्वारा आने वाली आत्माओं का _______ बन, साधन बन उनकी _______ प्राप्ति का _______ बन जाओ।

 5  हर बात में _______ रहे। रिटर्न देना अर्थात् आगे के लिए कट करना। खत्म करना। माइनस हो रहा है अथवा , _______ हो रहा है यह ________ करना है।

 

 

सही गलत वाक्यो को चिन्हित करे:-

 1  :- आराम के साधनों का एडवान्टेज (लाभ) सदाकाल की प्राप्ति का विघ्न रूप बनाना हैं।

 2  :- अगर किसी भी प्रकार की सिद्धि अथवा प्राप्ति को स्वीकार किया तो वहाँ कम हो जायेगा।

 3  :- संगम युग पर तकदीर की रेखा परिवर्तन करने वाला बाप सम्मुख पार्ट बजा रहे हैं। ऐसे तकदीर बनाने वाले बाप के इन डायरेक्ट बच्चे-उन्हों की तकदीर श्रेष्ठ और अविनाशी चाहिए। ऐसी तकदीर अन्य कोई भी आत्मा बना सकती है।

 4  :- फॉलो फादर है तो कमाल करने वाला बनना है न कि देखकर हर्षित होने वाला बनना है।

 5   :- लक्ष्य फर्स्ट जन्म में आने का है तो लक्षण भी फर्स्ट क्लास चाहिए। समय प्रमाण और लक्ष्य प्रमाण पुरूषार्थ को चेक करो।

 

 

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QUIZ ANSWERS

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 प्रश्न 1 :- श्रेष्ठ तकदीर बनाने वाली आत्माओं की निशानी क्या होगी?

 उत्तर 1 :- तकदीरवान आत्माओं की निशानी बाबा ने मुरली मे बहुत सहज कर बताई है। वो आत्माएं  :-

           हर संकल्प में, हर बोल में, कर्म में फालोफादर करता होगा।

          संकल्प भी बाप समान विश्व कल्याण की सेवा अर्थ होगा।

          हर बोल में नम्रता, निर्माणता और उतनी ही महानता होगी।

          स्मृति स्वरूप में एक तरफ बेहद का मालिकपन, दूसरी तरफ विश्व की सेवाधारी आत्मा होगी।

          एक तरफ अधिकारीपन का नशा, दूसरी तरफ सर्व के प्रति सत्कारी, हर आत्मा के प्रति बाप समान दाता और वरदाता, चाहे दुश्मन हो, किसी भी जन्म के हिसाबकिताब चुक्तु करने के निमित्त बनी हुई आत्माहो।

          श्रेष्ठ स्थिति से गिराने के निमित्त बनी हुई आत्मा को भी, संस्कारों के टक्कर खाने वाली आत्मा को भी, घृणा वृत्ति रखने वाली आत्मा को भी, सर्व आत्माओं के प्रति दाता व वरदाता।

          ठुकराने वाली आत्मा भी कल्याणकारी आत्मा अनुभव हो, ग्लानि के बोल व निन्दा के बोल भी महिमा व गायन योग्य अनुभव हों।

          ग्लानि गायन अनुभव हो। ऐसी निशानी अनुभव करने वाली श्रेष्ठ तकदीर बनाने वाली आत्माएं हैं।

 

 प्रश्न 2 :- सदा विजयी अष्ट रत्न और भक्तों के इष्ट बनने का सहज साधन क्या है?

 उत्तर 2 :-  सदा ऊंची अष्ट रत्न और भक्तों के इष्ट बनना ऐसी ऊंची मंज़िल को प्राप्त करने वाले बच्चों की विशेषता होगी कि

           बोल और भाव को परिवर्तन कर दें अर्थात्          

           निन्दा को भी स्तुति में परिवर्तन कर दें,         

           ग्लानि को गायन में परिवर्तित कर दे,

           ठुकराने को सत्कार में परिवर्तित कर दें,

           अपमान को स्व-अभिमान में परिवर्तित कर दें

           अपकार को उपकार में परिवर्तित कर दें 

           माया के विघ्नों को बाप की लगन में मग्न होने का साधन समझ परिवर्तित कर दें - ऐसे बाप समान सदा विजयी अष्ट रत्न बनते है, और भक्तों के इष्ट भी बनते हैं।

 

 प्रश्न 3 :- कल्प पहले का गायन है पाण्डवों ने पहाड़ों पर स्वयं को गलाया-इसका रहस्य क्या है? क्या वह सब विशेषतायें वर्तमान समय जीवन में अनुभव होती हैं?

 उत्तर 3 :- पाण्डवों के लिये कल्प पहले का गायन है, उन्होंने पहाड़ों पर स्वयं को गलाया है।

          सूक्ष्म बात का ही यादगार स्थूल रूप में होता है। जैसे चैतन्य का यादगार स्थूल में होता है, वैसे ही सूक्ष्म को स्पष्ट करने के लिये दृष्टान्त दिया जाता है।

          स्वयं को सफलता मूर्त बनाने के निमित्त पुरूषार्थियों के पुरूषार्थ में जो विघ्न सामने आते हैं, स्वयं को सफलतामूर्त नहीं बना सके या बार-बार उसी स्वभाव व संस्कार के कारण असफलता होती है इसको निजी संस्कार व नेचर कहा जाता है।

          ऐसे निजी संस्कारों को गलाना अर्थात् स्वयं को गलाना कि देखने या सम्पर्क में आने वाले यह महसूस करें कि इस आत्मा ने स्वयं को गलाया है। इसमें सफलता है!

 

 प्रश्न 4 :- निरन्तर योगीपन के क्या लक्षण होते हैं?

 उत्तर 4 :- बाबा हम बच्चों को द्वापर युग का उदाहरण देकर समझाते हैं।

          जैसे द्वापर में हम बच्चों ने बाप की ग्लानि की, लेकिन बाप ने ग्लानि भी गायन समझ कर स्वीकार की।

          ग्लानि के रिटर्न में भक्ति का फल-ज्ञान दिया, न कि घृणा और ही रहम-दिल बने।

          ऐसे फालो फादर करने वाले ही श्रेष्ठ तकदीरवान बनते है।

          बाप से विमुख बनी हुई आत्माओं को अपना बना कर अपने से ऊंच प्रालब्ध प्राप्त करते हैं - ऐसे श्रेष्ठ तकदीर-वान बच्चे बाप समान हर आत्मा को अपने से भी आगे बढ़ाने की शुभ भावना रखते हुए विश्व-कल्याणकारी बनेंगे। इसको कहा जाता है निरन्तर योगीपन के लक्षण।

 

 प्रश्न 5 :- हर प्रैक्टिकल सबूत के पहले हम सैम्पल है यह लक्ष्य क्यों रखना है ? सहज साधनों द्वारा योगी कैसे बनना है।?

 उत्तर 5 :- बाबा हमें हर प्रैक्टिकल सबूत के पहले हम सैम्पल है यह लक्ष्य रखने की श्रीमत देते है।

          हम बच्चों के प्रैक्टिकल साकार स्वरूप का सैम्पल देख बाकी आत्माओं मे विशेष उमंग उत्साह रहेगा।

          सदैव हर बात में यही संकल्प रखना चाहिए कि हर कार्य में, हर प्रैक्टिकल सबूत के पहले हम सैम्पल है।

          हर ब्त में हम सैम्पल हैं। जब ऐसा लक्ष्य आगे रखेंगे तब ही पुरूषार्थ की गति को तीव्र कर सकेंगे।

          भले ही आराम के साधन प्राप्त हैं, परन्तु आराम पसन्द नहीं बन जाना है।

          पुरूषार्थ में भी आराम पसन्द न होना अर्थात् अलबेला न होना है।

          आराम के साधनों का एडवान्टेज (लाभ) सदाकाल की प्राप्ति का विघ्न रूप नहीं बनाना हैं।

          साधन मिलते हुए भी उसका त्याग। प्राप्ति होते हुए भी त्याग करना उसको ही त्याग कहा जाता है।

जब कि है ही अप्राप्ति, उसको त्याग दो तो यह मजबूरी हुई न कि त्याग।

इतना अटेन्शन, अपने ऊपर रख्खें।  

         सहजयोग का अर्थ है कि सहज साधनों द्वारा योगी बनना है। तब ही पुरूषार्थ की गति को तीव्र कर सकेंगे।

 

       FILL IN THE BLANKS:-    

{ प्लस, यादगार, ग्लानि, सूक्ष्म, गायन, उपकार, सहज, सौभाग्यशाली, चेक (जाँच), कल्याणकारी, रहमदिल, साधन, इग्जॉम्पल, अटेन्शन }

 1   ________ बात का ही  __________ स्थूल रूप में होती है।

    सूक्ष्म /  यादगार

 

 2  अपकारियों पर भी  __________ करने का गुण सिखाने वाले, सब के_________ शिव बाबा  __________ बनने वाले बच्चों से बोले।

 

    उपकार /  कल्याणकारी /  सौभाग्यशाली

 

 3  ________ को ________ समझकर __________ बनो।

    ग्लानि /  गायन /  रहमदिल

 

 4  अपने कर्मयोगी की स्टेज द्वारा और अपने गुणमूर्त स्वरूप द्वारा आने वाली आत्माओं का ________ बन, साधन बन उनकी ________ प्राप्ति का ________ बन जाओ।

    इग्जॉम्पल /  सहज /  साधन

 

 5  हर बात में ________ रहे। रिटर्न देना अर्थात् आगे के लिए कट करना। खत्म करना। माइनस हो रहा है अथवा , _______ हो रहा है यह ________ करना है।

    अटेन्शन /  प्लस /  चेक (जाँच)

 

 

सही गलत वाक्यो को चिन्हित करे:- 】【

 1  :- आराम के साधनों का एडवान्टेज (लाभ) सदाकाल की प्राप्ति का विघ्न रूप बनाना हैं।

 आराम के साधनों का एडवान्टेज (लाभ) सदाकाल की प्राप्ति का विघ्न रूप नहीं बनाना हैं।

 

 2  :- अगर किसी भी प्रकार की सिद्धि अथवा प्राप्ति को स्वीकार किया तो वहाँ कम हो जायेगा।

 

 3  :- संगम युग पर तकदीर की रेखा परिवर्तन करने वाला बाप सम्मुख पार्ट बजा रहे हैं। ऐसे तकदीर बनाने वाले बाप के इन डायरेक्ट बच्चे-उन्हों की तकदीर श्रेष्ठ और अविनाशी चाहिए। ऐसी तकदीर अन्य कोई भी आत्मा बना सकती है।

  संगम युग पर तकदीर की रेखा परिवर्तन करने वाला बाप सम्मुख पार्ट बजा रहे हैं। ऐसे तकदीर बनाने वाले बाप के डायरेक्ट बच्चे-उन्हों की तकदीर श्रेष्ठ और अविनाशी चाहिए। ऐसी तकदीर अन्य कोई भी आत्मा नहीं बना सकती है।

 

 4  :- फॉलो फादर है तो कमाल करने वाला बनना है न कि देखकर हर्षित होने वाला बनना है।

 

 5   :- लक्ष्य फर्स्ट जन्म में आने का है तो लक्षण भी फर्स्ट क्लास चाहिए। समय प्रमाण और लक्ष्य प्रमाण पुरूषार्थ को चेक करो।