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AVYAKT MURLI

22 / 09 / 75

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22-09-75   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन

 

*स्वमान में स्थित होना ही सर्व खजानें और खुशी की चाबी है*

 

सर्व आत्माओं के शुभ-चिन्तक, अविनाशी ज्ञान, शक्ति और खुशी के खज़ाने देने वाले विदेही शिव बाबा बोले -

 

आज की सभा स्वमान में स्थित रहने वाली, सर्व को स्व-भावना से देखने व हर आत्मा के प्रति शुभ कामना रखने वाली है। यह तीनों ही बातें स्वयं के प्रति स्वमान, औरों के प्रति स्व की भावना और सदा शुभ कामना ऐसी स्थिति सदा सहज रहती है? सहज उसमें स्थित रहना और मेहनत से उस स्थिति में स्थित होना इसका फर्क तो जानते ही हो। वर्तमान समय यह स्थिति सदा सहज और स्वत: होनी चाहिए। अपने को चेक करे कि सदा और स्वत: ही वह स्थिति क्यों नहीं हो पाती? इसका मूल कारण है कि स्वमान में स्थित नहीं रहते। स्वमान एक शब्द प्रैक्टिकल जीवन में धारण हो जाय तो सहज ही सम्पूर्णता को पा सकते हैं।

 

स्वमान में स्थित होने से स्वत: ही सर्व प्रति स्व की भावना व शुभ कामना हो जायेगी। यह स्वमान में स्थित होना पहला पाठ है। स्वमान में स्थित होना ही जीवन की पहेली को हल करने का साधन है। आदि से लेकर अभी तक इस पहेली को हल करने में ही लगे हुए हो कि मैं कौन हूँ? शुरू में जब स्थापना का कार्य आरम्भ हुआ था तो सबको क्या सुनाते थे-व्हाट एम आई अर्थात् मैं कौन हूँ? यह बात इतनी पक्की स्मृति में थी कि सब लोग जानते थे कि इन सबका एक ही पाठ है कि व्हाट एम आई? वही एक पाठ अब तक चल रहा है। इसलिए इसको पहेली कहा जाता है। इस इतनी-सी छोटी पहेली ने ऊंचे-से-ऊंचे ब्राह्मणों को भी पराजित कर दिया है। पजल अर्थात् व्याकुल, भ्रमित कर दिया है। अर्थात् सम्पूर्ण रीति से हल नहीं कर पाये हैं। स्वमान के बजाय देह-अभिमान व अन्य आत्माओं के प्रति अभिमान की दृष्टि हो जाती है तो क्या कहे? क्या यह पहेली हल कर ली है अथवा अभी तक भी हल कर ही रहे हैं।

 

मैं कौन हूँ इस एक शब्द के उत्तर में सारा ज्ञान समाया हुआ है। यह एक शब्द ही खुशी के खज़ाने सर्व, शक्तियों के खज़ाने, ज्ञान धन के खज़ाने, श्वांस और समय के खज़ाने की चाबी है। चाबी तो मिल गई है न? जिस दिन आपका जन्म हुआ तो सर्व ब्राह्मणों को बर्थ डे पर गिफ्ट मिलती है ना? तो यह बर्थ डे की गिफ्ट जो बाप ने दी है, उसको सदा यूज़ (काम में लाना) करते रहो। तो सर्व खज़ानों से सम्पन्न सदा के लिये बन सकते हो। ऐसे सर्व खज़ानों से सम्पन्न आत्मा के दिल के खुशी की उमंगों में हर समय कौन-सा  आवाज निकलता है? मुख का आवाज नहीं, लेकिन दिल का आवाज क्या निकलता है? जो शुरू में ब्रह्मा बाप के दिल का आवाज था - कौन-सा ? वाह रे मैं! जैसे औरों की वाह-वाह की जाती है ना - वैसे वाह रे मैं! यह स्वमान के शब्द हैं, न कि देह-अभिमान के।

 

तो मैं कौन हूँ की चाबी को या तो लगाना नहीं आता या फिर रखना नहीं आता (रटना तो आता है) रखना नहीं आता। इसलिये समय पर याद नहीं आता। इस चाबी को चुराने के लिए माया भी चारों ओर घूमती है कि कहीं यह एक सेकेण्ड भी अलबेलेपन के झुटके में आयें तो यह चाबी चोरी कर लें। जैसे आजकल के डाकू बेहोश कर देते हैं वैसे ही माया भी स्वमान का होश अर्थात् स्मृति को गायब कर बेहोश बना देती है। इसलिए सदा स्वमान के होश में रहो। अमृतवेले स्वयं को ही स्वयं यह पाठ पक्का कराओ अर्थात् रिवाइज कराओ कि - मैं कौन हूँ? अमृत वेले से ही इस चाबी को अपने कार्य में लगाओ। और अनेक प्रकार के खज़ाने जो सुनाये हैं उनको बार-बार देखो कि क्या-क्या खज़ाना मिला है और समय प्रमाण इन सब खज़ानों को अपने जीवन में यूज़ करो। जैसे कल सुनाया कि सिर्फ बैंक बैलेन्स नहीं बनाओ लेकिन उसे काम में लगाओ। तो सहज ही जैसी स्मृति वैसी स्थिति हो जायेगी।

 

जैसे कल्प पहले के यादगार शास्त्र में लिखा हुआ है - बाप के लिये कहते हैं कि मैं कौन हूँ तो सर्व में श्रेष्ठ का वर्णन किया है। ऐसे ही जैसे बाप का ऊंचेसे- ऊंचे भगवान का गायन है, तो भगवान बाप क्या गायन करते हैं - ऊंचे-से- ऊंचे बच्चे। ऐसे अपने ऊंच अर्थात् श्रेष्ठ स्वमान को सदा याद रखो कि ऊंचे बाप के भी बालक सो मालिक हैं। स्वयं बाप हम श्रेष्ठ आत्माओं की माला सुमिरण करते हैं। बाप की महिमा आत्मायें करती हैं, लेकिन आप श्रेष्ठ आत्माओं की महिमा स्वयं बाप करते हैं। सर्व श्रेष्ठ आत्माओं के सहयोग के बिना तो बाप भी कुछ नहीं कर सकता। तो आप ऐसे श्रेष्ठ स्वमान वाले हो। बाप को सर्व-सम्बन्धों से प्रख्यात करने वाले व बाप का परिचय देने वाली आप श्रेष्ठ आत्माएँ हो। हर कल्प में ऊंचे से ऊंचे बाप के साथ उंचे से ऊंचे पार्ट बजाने वाली हो। सबसे बड़े स्वमान की बात तो यह है कि जो संगम युग पर बाप को भी अपने स्नेह और सम्बन्ध की डोर में बांधने वाले हो। बाप को भी साकार में आप समान बनाने वाले हो। बाप निराकार रूप में आप समान बनाते हैं और आप निराकार को साकार में आने में उसे आप समान बनाते हो और आप स्वयं बाप की सर्व महिमा के समान बनते हो। इसलिये बाप भी कहते हैं - मास्टर हो। तो अब समझा कि मैं कौन हूँ? - जो हूँ, जैसा हूँ, वैसा ही अपने को जानने से सदा स्वमान में रहेगे और देह-अभिमान से स्वत: ही परे रहेगे। स्वमान के आगे देह-अभिमान आ ही नहीं सकता। तो अपने बर्थ डे की गिफ्ट को सदा अपने पास सम्भाल कर रखो। अलबेलेपन में भूल न जाओ। इससे ही स्वत: सहज और सदा सर्व प्रति स्व की भावना और शुभ-कामना रहेगी। समझा? पहेली तो सहज है ना? समझदार के लिये सहज है और अलबेली आत्माओं के लिये गुह्य है। आप सब तो बेहद के समझदार बच्चे हो ना? सिर्फ समझदार नहीं लेकिन बेहद के समझदार बच्चे हो। अच्छा।

 

ऐसे विशाल बुद्धि सर्व में बेहद बुद्धि को धारण करने वाले, सर्व आत्माओं को अनेक प्रकार के हदों से निकालने वाले ऐसे बेहद के बुद्धिमान, बेहद समझदार, बेहद की वैराग्य वृत्ति वाले, सदा बेहद की स्थिति और स्थान में रहने वाले ऐसी सर्वश्रेष्ठ आत्माओं को बेहद के बाप का याद-प्यार और नमस्ते।

 

इस मुरली के विशेष तत्व

 

1.      पहला पाठ मैं कौन हूँ जानना ही जीवन की पहेली को हल करना है। इस एक प्रश्न के उत्तर में सारा ज्ञान समाया हुआ है। यह एक शब्द ही खुशी के खज़ाने, सर्व शक्तियों के खज़ाने, ज्ञान-धन के खज़ाने, श्वांस और समय के खज़ाने की चाबी है। यह सर्व ब्राह्मणों के जन्म दिन की पहली सौगात है।

 

 

 

15-10-75   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन

 

 

 

*टीचर बनना अर्थात् सौभाग्य की लॉटरी लेना*

 

 

 

पाण्डव शिव-शक्ति सेना तथा टीचर्स प्रति अव्यक्त बापदादा के अव्यक्त मधुर महावाक्य: -

 

आप हर कर्म करके दिखाने के निमित्त हैं। हर टीचर के पीछे देख कर चलने वाले, करने वाले, आगे बढ़ने वालों की कितनी बड़ी लाइन होती है? तो टीचर सही लाइन पर चलाने के निमित्त है। वह रूकती है तो सारी लाइन रूक जाती है, तुम्हारी लाइन की जिम्मेवारी है। ऐसी जिम्मेवारी समझ कर चले तो हर कर्म कैसा करेंगे? वैसे भी कहा जाता है - ज़िम्मेवारी बड़े से बड़ा टीचर है। जैसे टीचर लाइफ बनाते हैं ना, वैसे जिम्मेवारी भी लाइफ बनाने की शिक्षा देती है। तो हर टीचर के ऊपर इतनी विशाल जिम्मेवारी है। ऐसा समझने से भी अपने ऊपर अटेन्शन रहेगा। अब अटेन्शन रहेगा तो बाप और सेवा के सिवा और कुछ बुद्धि में रहेगा ही नहीं। जिम्मेवारी बड़ापन लाती है। यदि जिम्मेवारी नहीं तो बचपन हो जाता है। जिम्मेवारी होने से अलबेलापन समाप्त हो जाता है। टीचर को हर संकल्प, हर कदम पीछे, सोचना चाहिए कि मेरे पीछे कितनी जिम्मेवारी है। ऐसे भी नहीं कि यह जिम्मेवारी भारी करेगी-बोझ रहेगा। नहीं, जितनी यह जिम्मेवारी उठायेगे उतना जो अनेकों की आशीर्वाद मिलती है तो वह बोझ खुशी में बदल जाता है। वह बोझ महसूस नहीं होता, हल्के रहते हैं। जैसे ब्रह्मा बाप निमित्त बने वैसे आप सब निमित्त हैं। तो आप सबको ब्रह्मा बाबा को फॉलो करना चाहिए। जिम्मेवारी और हल्कापन दोनों का बैलेन्स था, ऐसे ही फॉलो फादर। टीचर्स का स्लोगन फॉलो फादर। फॉलो फादर नहीं तो सफल टीचर्स नहीं। टीचर का पहला सर्टिफिकेट है स्वयं संतुष्ट रहना और दूसरों को सन्तुष्ट करना। फर्स्ट नम्बर टीचर की निशानी सन्तुष्ट रहना और सन्तुष्ट करना। टीचर सन्तुष्ट क्यों नहीं रहेगी? टीचर्स को चांस कितने हैं? एक चांस समर्पण होने का, दूसरा सेवा का चान्स, तीसरा निमित्त बनने से अपने ऊपर अटेन्शन का चान्स और चौथा जितनों को आप-समान बनायेंगी, उसमें पुरूषार्थ की सफलता का चान्स। सबसे ज्यादा पुरूषार्थ में नम्बर लेने का चान्स। आने वाले स्टुडेण्ट को तो हंस बगुला इकठ्ठा रहना पड़ता है। टीचर्स को वातावरण का भी चान्स अच्छा मिलता है। तो टीचर बनना अर्थात् लॉटरी लेना। टीचर्स का ड्रामा में बहुत अच्छा पार्ट है। टीचर्स को अपने भाग्य को देख खुश होना चाहिए। अपने प्राप्ति की लिस्ट सामने रखो कि क्या मिला है? कितना मिला है? वह देखते हो? अमृत वेले रूह-रूहान सब करती हो? जो रूह-रूहान करने से रस का अनुभव कर लेते हैं वह सारे दिन में सफल रहेगे। अलबेले तो नहीं रहते। सदा अपने ऊपर अटेन्शन रहता है और रस भी आता है? एक है नियम निभाने वाले, दूसरे प्राप्ति करने वाले। आप सब तो प्राप्ति करने वाली हो ना?

 

इस मुरली का सार

 

1. जिम्मेवारी बड़े से बड़ा टीचर है। जैसे टीचर लाइफ बनाते हैं वैसे जिम्मेवारी भी लाइफ बनाने की शिक्षा देती है। जिम्मेवारी बड़ापन लाती है और इससे अलबेलापन समाप्त हो जाता है।

 

2. टीचर्स का स्लोगन है - फॉलो फादर। फॉलो फादर नहीं तो सफल टीचर

 

 

 

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QUIZ QUESTIONS

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प्रश्न 1 :-किस चाबी के बारे आज बाबा ने समझाया है?

प्रश्न 2:- टीचर्स की जिम्मेवारी के बारे में आज बाबा के महावाक्य क्या है?

प्रश्न 3:- टीचर्स की चांस के बारे में आज की मुरली द्वारा विस्तार कीजिए।

प्रश्न 4प्रश्न 5:-आज मुरली में किस पहेली को हल करने के बारे में सूचना दी है? इसको पहेली क्यों कहते है? विस्तार कीजिए।

 

FILL IN THE BLANKS:-

{ आत्माओं, सर्टिफिकेट, बांधने, सर्व, स्वयं, सहयोग, टीचर, श्रेष्ठ, स्वमान, प्रख्यात, डोर, लेकिन, दूसरों, महिमा, सम्बन्धों }

1  _____ का पहला _____ है स्वयं संतुष्ट रहना और _____ को सन्तुष्ट करना।

2 सर्व _____ _____ के _____ के बिना तो बाप भी कुछ नहीं कर सकता।

3.सबसे बड़े _____ की बात तो यह है कि जो संगम युग पर बाप को भी अपने स्नेह और सम्बन्ध की _____ में _____ वाले हो।

4 बाप की _____ आत्मायें करती हैं, _____ आप श्रेष्ठ आत्माओं की महिमा _____ बाप करते हैं।

5.बाप को _____-_____ से _____ करने वाले व बाप का परिचय देने वाली आप श्रेष्ठ आत्माएँ हो।

 

 

सही गलत वाक्यो को चिन्हित करे:-

1:- फॉलो फादर नहीं तो सफल टीचर्स नहीं।

2 :- जो रूह-रूहान करने से रस का पान कर लेते हैं वह सारे दिन में सफल रहेगे।

3 :- फर्स्ट नम्बर टीचर की निशानी सन्तुष्ट रहना और सन्तुष्ट करना।

4 :- स्वमान के आगे देह-अभिमान आ ही नहीं सकता।

5 :-स्वयं ब्रह्मा हम श्रेष्ठ आत्माओं की माला सुमिरण करते हैं।

 

 

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QUIZ ANSWERS

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प्रश्न 1:-किस चाबी के बारे आज बाबा ने समझाया है?

उत्तर 1:- मैं कौन हूँ ये चाबी के बारे में आज बाबा ने निम्न बातें समझायी-

इस एक शब्द के उत्तर में सारा ज्ञान समाया हुआ है। यह एक शब्द ही खुशी के खज़ाने सर्व, शक्तियों के खज़ाने, ज्ञान धन के खज़ाने, श्वांस और समय के खज़ाने की चाबी है। चाबी तो मिल गई है न?

जिस दिन आपका जन्म हुआ तो सर्व ब्राह्मणों को बर्थ डे पर गिफ्ट मिलती है ना? तो यह बर्थ डे की गिफ्ट जो बाप ने दी है, उसको सदा यूज़ (काम में लाना) करते रहो।* तो सर्व खज़ानों से सम्पन्न सदा के लिये बन सकते हो।

ऐसे सर्व खज़ानों से सम्पन्न आत्मा के दिल के खुशी की उमंगों में हर समय कौन-सा आवाज निकलता है?

मुख का आवाज नहीं, लेकिन दिल का आवाज क्या निकलता है?

जो शुरू में ब्रह्मा बाप के दिल का आवाज था - कौन-सा ?

वाह रे मैं! जैसे औरों की वाह-वाह की जाती है ना - वैसे वाह रे मैं! यह स्वमान के शब्द हैं, न कि देह-अभिमान के।

❼.तो मैं कौन हूँ की चाबी को या तो लगाना नहीं आता या फिर रखना नहीं आता (रटना तो आता है) रखना नहीं आता। इसलिये समय पर याद नहीं आता।

इस चाबी को चुराने के लिए माया भी चारों ओर घूमती है कि कहीं यह एक सेकेण्ड भी अलबेलेपन के झुटके में आयें तो यह चाबी चोरी कर लें।

जैसे आजकल के डाकू बेहोश कर देते हैं वैसे ही माया भी स्वमान का होश अर्थात् स्मृति को गायब कर बेहोश बना देती है। *इसलिए सदा स्वमान के होश में रहो।

अमृतवेले स्वयं को ही स्वयं यह पाठ पक्का कराओ अर्थात् रिवाइज कराओ कि - मैं कौन हूँ?* अमृतवेले से ही इस चाबी को अपने कार्य में लगाओ।

 

प्रश्न 2 :-टीचर्स की जिम्मेवारी के बारे में आज बाबा के महावाक्य क्या है?

उत्तर 2:-टीचर्स की जिम्मेवारी के बारे में आज बाबा के महावाक्य निम्न है -

आप हर कर्म करके दिखाने के निमित्त हैं। हर टीचर के पीछे देख कर चलने वाले, करने वाले, आगे बढ़ने वालों की कितनी बड़ी लाइन होती है?  

तो टीचर सही लाइन पर चलाने के निमित्त है। वह रूकती है तो सारी लाइन रूक जाती है, तुम्हारी लाइन की जिम्मेवारी है।

ऐसी जिम्मेवारी समझ कर चले तो हर कर्म कैसा करेंगे?

वैसे भी कहा जाता है - ज़िम्मेवारी बड़े से बड़ा टीचर है।

जैसे टीचर लाइफ बनाते हैं ना, वैसे जिम्मेवारी भी लाइफ बनाने की शिक्षा देती है।

तो हर टीचर के ऊपर इतनी विशाल जिम्मेवारी है। ऐसा समझने से भी अपने ऊपर अटेन्शन रहेगा।

अब अटेन्शन रहेगा तो बाप और सेवा के सिवा और कुछ बुद्धि में रहेगा ही नहीं।

जिम्मेवारी बड़ापन लाती है। यदि जिम्मेवारी नहीं तो बचपन हो जाता है। जिम्मेवारी होने से अलबेलापन समाप्त हो जाता है।

टीचर को हर संकल्प, हर कदम पीछे, सोचना चाहिए कि मेरे पीछे कितनी जिम्मेवारी है।

ऐसे भी नहीं कि यह जिम्मेवारी भारी करेगी-बोझ रहेगा। नहीं, जितनी यह जिम्मेवारी उठायेगे उतना जो अनेकों की आशीर्वाद मिलती है तो वह बोझ खुशी में बदल जाता है।* वह बोझ महसूस नहीं होता, हल्के रहते हैं।

❶❶ जैसे ब्रह्मा बाप निमित्त बने वैसे आप सब निमित्त हैं। तो आप सबको ब्रह्मा बाबा को फॉलो करना चाहिए। जिम्मेवारी और हल्कापन दोनों का बैलेन्स था, ऐसे ही फॉलो फादर।

 

प्रश्न 3 -टीचर्स की चांस के बारे में आज की मुरली द्वारा विस्तार कीजिए।

उत्तर 3 :-टीचर्स का एक चांस समर्पण होने का, दूसरा सेवा का चान्स, तीसरा निमित्त बनने से अपने ऊपर अटेन्शन का चान्स और चौथा जितनों को आप-समान बनायेंगी, उसमें पुरूषार्थ की सफलता का चान्स। सबसे ज्यादा पुरूषार्थ में नम्बर लेने का चान्स। आने वाले स्टुडेण्ट को तो हंस बगुला इकठ्ठा रहना पड़ता है। टीचर्स को वातावरण का भी चान्स अच्छा मिलता है।

 

प्रश्न 4:- स्वमान में स्थित होने के संबन्ध आज बाबा के इशारा क्या है?

उत्तर 4:- स्वमान में स्थित होने के संबन्ध बाबा इशारा देते है कि -

आज की सभा स्वमान में स्थित रहने वाली, सर्व को स्व-भावना से देखने व हर आत्मा के प्रति शुभ कामना रखने वाली है।

यह तीनों ही बातें स्वयं के प्रति स्वमान, औरों के प्रति स्व की भावना और सदा शुभ कामना ऐसी स्थिति सदा सहज रहती है?

सहज उसमें स्थित रहना और मेहनत से उस स्थिति में स्थित होना इसका फर्क तो जानते ही हो।

वर्तमान समय यह स्थिति सदा सहज और स्वत: होनी चाहिए। अपने को चेक करे कि सदा और स्वत: ही वह स्थिति क्यों नहीं हो पाती? इसका मूल कारण है कि स्वमान में स्थित नहीं रहते।

स्वमान एक शब्द प्रैक्टिकल जीवन में धारण हो जाय तो सहज ही सम्पूर्णता को पा सकते हैं।

स्वमान में स्थित होने से स्वत: ही सर्व प्रति स्व की भावना व शुभ कामना हो जायेगी। यह स्वमान में स्थित होना पहला पाठ है।

स्वमान में स्थित होना ही जीवन की पहेली को हल करने का साधन है।

 

प्रश्न 5:-आज मुरली में किस पहेली को हल करने के बारे में सूचना दी है? इसको पहेली क्यों कहते है? विस्तार कीजिए।

उत्तर 5 :-आदि से लेकर अभी तक इस पहेली को हल करने में ही लगे हुए हो कि मैं कौन हूँ?

शुरू में जब स्थापना का कार्य आरम्भ हुआ था तो सबको क्या सुनाते थे-व्हाट एम आई अर्थात् मैं कौन हूँ? यह बात इतनी पक्की स्मृति में थी कि सब लोग जानते थे कि इन सबका एक ही पाठ है कि व्हाट एम आई? वही एक पाठ अब तक चल रहा है। इसलिए इसको पहेली कहा जाता है।

 इस इतनी-सी छोटी पहेली ने ऊंचे-से-ऊंचे ब्राह्मणों को भी पराजित कर दिया है। पजल अर्थात् व्याकुल, भ्रमित कर दिया है। अर्थात् सम्पूर्ण रीति से हल नहीं कर पाये हैं। स्वमान के बजाय देह-अभिमान व अन्य आत्माओं के प्रति अभिमान की दृष्टि हो जाती है तो क्या कहे? क्या यह पहेली हल कर ली है अथवा अभी तक भी हल कर ही रहे हैं।

 

 

FILL IN THE BLANKS:-

{ आत्माओं, सर्टिफिकेट, बांधने, सर्व, स्वयं, सहयोग, टीचर, श्रेष्ठ, स्वमान, प्रख्यात, डोर, लेकिन, दूसरों, महिमा, सम्बन्धों }

1 _____ का पहला _____ है स्वयं संतुष्ट रहना और _____ को सन्तुष्ट करना।

 टीचर /सर्टिफिकेट / दूसरों

 

2 सर्व _____ _____ के _____ के बिना तो बाप भी कुछ नहीं कर सकता।

श्रेष्ठ / आत्माओं / सहयोग

 

3 सबसे बड़े _____ की बात तो यह है कि जो संगम युग पर बाप को भी अपने स्नेह और सम्बन्ध की _____ में _____ वाले हो।*

 स्वमान /डोर / बांधने

 

4 बाप की _____ आत्मायें करती हैं, _____ आप श्रेष्ठ आत्माओं की महिमा _____ बाप करते हैं।

महिमा / लेकिन / स्वयं

 

5 बाप को _____-_____ से _____ करने वाले व बाप का परिचय देने वाली आप श्रेष्ठ आत्माएँ हो।

 सर्व / सम्बन्धों /प्रख्यात

 

 

सही गलत वाक्यो को चिन्हित करे:- 【✖】 【✔】

1:-फॉलो फादर नहीं तो सफल टीचर्स नहीं।

2:-जो रूह-रूहान करने से रस का पान कर लेते हैं वह सारे दिन में सफल रहेंगे।

जो रूह-रूहान करने से रस का अनुभव कर लेते हैं वह सारे दिन में सफल रहेगे।

 

3 :-फर्स्ट नम्बर टीचर की निशानी सन्तुष्ट रहना और सन्तुष्ट करना।

 

4 :-स्वमान के आगे देह-अभिमान आ ही नहीं सकता।

 

5:-स्वयं ब्रह्मा हम श्रेष्ठ आत्माओं की माला सुमिरण करते हैं।

स्वयं बाप हम श्रेष्ठ आत्माओं की माला सुमिरण करते हैं।