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AVYAKT MURLI

16 / 10 / 75

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16-10-75  ओम शान्ति   अव्यक्त बापदादा  मधुबन 

संकल्प शक्ति को कंट्रोल कर सिद्धि-स्वरूप बनने की युक्तियाँ

ज्ञानवान और योगी वत्सों को संगठन रूप से एक संकल्प और एक विचार वाला बनने की विधि बताने वाले बापदादा बोले -

सदा बाप-समान निराकारी स्थिति में स्थित होते हुए इस साकार शरीर का आधार लेकर इस कर्म-क्षेत्र पर कर्मयोगी बनकर हर कर्म करते हो?जबकि नाम ही हैकर्मयोगी। यह नाम ही सिद्ध करता है कि योगी हैं अर्थात् निराकारी आत्मिक स्वरूप में स्थित होकर कर्म करने वाले हैं। कर्म के बिना तो एक सेकेण्ड भी रह नहीं सकते। कर्म-इन्द्रियों का आधार लेने का अर्थ ही है-निरन्तर कर्म करना। तो जैसे कर्म के बिना रह नहीं सकते,वैसे ही याद अर्थात् योग के बिना भी एक सेकेण्ड रह नहीं सकते। इसलिए कर्म के साथ योगी नाम भी साथ-साथ ही है। जैसे कर्म स्वत: ही चलते रहते हैं,कर्मेन्द्रियों को नेचुरल अभ्यास है। ऐसे ही बुद्धि को याद का नेचुरल अभ्यास होना चाहिए। इन कर्मेन्द्रियों का आदि-अनादि अपना-अपना कार्य है। हाथ को हिलाने व पाँव को चलाने में कोई मेहनत नहीं करनी पड़तीउसी प्रमाण ब्राह्मण जीवन का तथा इस संगमयुगी जीवन में बुद्धि का निजी कार्य व जन्म का कार्य याद है। जो जीवन का निजी कार्य होता है वह नेचुरल और सहज ही होता है। तो क्या ऐसे अपने को सहज कर्मयोगी अनुभव करते हो या यह मुश्किल लगता हैअपना कार्य कभी भी मुश्किल नहीं लगता है,दूसरे का मुश्किल लगता है। यह तो कल्प-कल्प का अपना कार्य है। फिर भी यदि मुश्किल लगता है अर्थात् निरन्तर कर्मयोगी स्थिति अनुभव नहीं होती है तो इसका कारण क्या है?

अगर योग नहीं लगता तो अवश्य ही इन्द्रियों द्वारा अल्पकाल के सुख प्राप्त कराने वाले और सदाकाल की प्राप्ति से वंचित कराने वालेकोई-न-कोई भोग भोगने में लगे हुए हैं। इसलिए अपने निजी कार्य को भूले हुए हैं। जैसे आजकल के सम्पत्ति वाले वा कलियुगी राजा जब भोग-विलास में व्यस्त हो जाते हैं तो अपना निजी कार्यराज्य करना व अपना अधिकार भूल जाते हैंऐसे ही आत्मा भी भोग भोगने में व्यस्त होने के कारण योग भूल जाती है अर्थात् अपना अधिकार भूल जाती हैजब तक अल्पकाल के भोग भोगने में मस्त हैं। तो जहाँ भोग है वहाँ योग नहीं। इसी कारण मुश्किल लगता है।

वर्तमान समय माया ब्राह्मण बच्चों की बुद्धि पर ही पहला वार करती है। पहले बुद्धि का कनेक्शन तोड़ देती है। जैसे जब कोई दुश्मन वार करता है तो पहले टेलीफोनरेडियो आदि के कनेक्शन तोड़ देते हैं। लाइट और पानी का कनेक्शन तोड़ देते हैं फिर वार करते हैंऐसे ही माया भी पहले बुद्धि का कनेक्शन तोड़ देती है जिससे लाइटमाइट,शक्तियाँ और ज्ञान का संग ऑटोमेटिकली बन्द हो जाता है। अर्थात् मूर्छित बना देती है। अर्थात् स्वयं के स्वरूप की स्मृति से वंचित कर देती है व बेहोश कर देती है। उसके लिए सदैव बुद्धि पर अटेन्शन का पहरा चाहिए। तब ही निरन्तर कर्मयोगी सहज बन पायेंगे।

ऐसा अभ्यास करो जो जहाँ बुद्धि को लगाना चाहे वहाँ स्थित हो जायें। संकल्प किया और स्थित हुआ। यह रूहानी ड्रिल सदैव बुद्धि द्वारा करते रहो। अभी-अभी परम- धाम निवासीअभी-अभी सूक्ष्म अव्यक्त फरिश्ता बन जायें और अभी-अभी साकार कर्मेन्द्रियों का आधार लेकर कर्मयोगी बन जायें। इसको कहा जाता है - संकल्प शक्ति को कन्ट्रोल करना। संकल्प को रचना कहेंगे और आप उसके रचयिता हो। जितना समय जो संकल्प चाहिए उतना ही समय वह चले। जहाँ बुद्धि लगाना चाहेवहाँ ही लगे। इसको कहा जाता है - अधिकारी। यह प्रैक्टिस अभी कम है। इसलिये यह अभ्यास करो,अपने आप ही अपना प्रोग्राम बनाओ और अपने को चेक करो कि जितना समय निश्चित कियाक्या उतना ही समय वह स्टेज रही?

हठयोगी अपनी किसी कर्मेन्द्रिय कोकोई टाँग को या बाँह को एकाग्र करने के लिए कोई टाइम निश्चित करते हैं कि इतना समय एक टाँग व एक हाथ नीचे करेंगे व ऊपर करेंगेसिर नीचे करेंगे अथवा ऊपर करेंगे। लेकिन यह राँग कापी की है। बाप ने सिखाया है बुद्धि में एक संकल्प धारण करके बैठो। उसकी उल्टी कॉपी कर एक टाँग ऊपर कर लेते हैं। बाप कहते हैं कि एक संकल्प में स्थित हो जाओवह फिर एक टाँग पर स्थित हो जाते हैं। बाप कहते हैं कि सदा ज्ञान-सूर्य के सम्मुख रहो,विमुख न बनो। वह फिर स्थूल सूर्य की तरफ मुख कर बैठते हैं। तो उल्टी कॉपी कर ली ना?यथार्थ बुद्धि-योग का अभ्यास अभी तुम सीख रहे हो। वह हठ से करते,आप अधिकार से करते हो। इसलिये वह मुश्किल है,यह सहज है। अभी उसके अभ्यास को बढ़ाते जाओ। एक सेकेण्ड में सब एक मत हो जायें। जब संगठन का एक संकल्प,एक स्मृति होगी,और सबका एक स्वरूप होगा तब इस संगठन की जय-जयकार का नाम बाला होगा।

जैसे स्थूल कार्य व सेवा में विचारों का मेल करते हो अर्थात् सब एक विचार वाले हो जाते हो तब ही कार्य सफल होता हैऐसे ही संगठन रूप में सब एक संकल्प स्वरूप हो जाये। बीज-रूप स्मृति चाहे व स्थिति चाहे तो सब बीज-रूप में स्थित हो जायें। ऐसे जब एक स्मृति-स्वरूप हो जायेंगे। तब हर संकल्प की सिद्धि अनुभव करेंगे व सिद्धि-स्वरूप हो जायेंगे। जो सोचेंगेऔर जो बोलेंगे वही प्रैक्टिकल में देखेंगे। इसको कहते हैं - सिद्धि-स्वरूप। यही जयजयकार की निशानी है। इसी का ही यादगार है - कलियुगी पर्वत,उसे एक साथ में ही अंगुली देना। यह संकल्प ही अंगुली है। तो अभी ऐसे प्रोग्राम्स बनाओ।

संगठन रूप में एक स्मृति-स्वरूप होने से वायुमण्डल पॉवरफुल हो जायेगा। लगन की अग्नि की भट्ठी अनुभव होगी जिसके वाइब्रेशन्स  चारों ओर फैलेंगे। जैसे एटम बम एक स्थान पर छोड़ने से चारों ओर उसके अंश फैल जाते हैं - वह एटम बम हैऔर यह आत्मिक बम है। इसका प्रभाव अनेक आत्माओं को आकर्षित करेगा और सहज ही प्रजा की वृद्धि हो जायेगी। जैसे उस एटम बम का बहुत काल के लिये धरनी पर प्रभाव पड़ जाता हैवैसे ही चैतन्य जीवन की धरनियों पर बहुत करके बेहद के वैराग्य का प्रभाव पड़ेगा। इसलिये सहज प्रजा बन जायेगी। अच्छा।

ऐसे रूहानी ड्रिल के अभ्यासीसदा अधिकारीविश्व-कल्याणीहर संकल्प को सिद्ध कर सिद्धि-स्वरूप आत्माओंऐसे बाप-समान प्रकृति को अधीन कर चलाने वाले और ऐसे सर्व समर्थ बच्चों को बापदादा का याद-प्यार और गुडमोर्निंग । अच्छा।

 

 

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QUIZ QUESTIONS

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 प्रश्न 1 :- जहाँ भोग है, वहाँ योग नहीं इस वाक्य का अर्थ स्पष्ट कीजिये।

 प्रश्न 2 :- कर्मयोगी नाम को सिद्ध करने के लिए क्या क्या करते हैं?

 प्रश्न 3 :- निरंतर कर्मयोगी कैसे बन सकते हैं? माया किस तरह से विघ्न डालती है?

 प्रश्न 4 :- जितना समय जो संकल्प चाहिए, क्या समय वह स्टेज रही? कैसे चेक करेंगे?

 प्रश्न 5 :- ,'सब एक विचार वाले हो जाये और कार्य सफल हो जाये।' इस के प्रति बापदादा ने क्या समझानी दी?

 

 

       FILL IN THE BLANKS:-    

{  चैतन्य, परमधाम, अग्नि, अव्यक्त, सेकण्ड, छोड़ने, साकार, वैराग्य, अंश, वायब्रेशन्स, फैलेंगे, बढ़ाते, धरनी, अभ्यास, स्थान }

 1   अभी-अभी _______ निवासी, अभी-अभी सूक्ष्म ________ फरिश्ता बन जाये और अभी-अभी _______ कर्मेन्द्रियों का आधार लेकर कर्मयोगी बन जायें।

 2  लगन की _______ की भट्टी अनुभव होगी जिसके _______  चारों ओर _________

 3  जैसे उस एटम बम का बहुत काल के लिए _______ पर प्रभाव पड़ जाता है, वैसे ही _______ जीवन की धरनियों पर बहुत करके बेहद के _______ का प्रभाव पड़ेगा।

 4  अभी उसके ______ को _______ जाओ। एक ________ में सब एक मत हो जायें।

 5  जैसे एटम बम एक ______ पर  _______ से चारों ओर उसके _______ फैल जाते हैं - वह एटम बम है, और यह आत्मिक बम है।

 

 

सही गलत वाक्यो को चिन्हित करे:-

 1  :- अपना कार्य कभी भी मुश्किल नहीं लगता है, दूसरे का मुश्किल लगता है।

 2  :- सहज बुद्धि-योग का अभ्यास अभी तुम देख रहे हो। वह हठ से करते, आप अधिकार से करते हो। इसलिये वह मुश्किल है, यह सहज है।

 3  :- जब संगठन का संकल्प, एक स्मृति होगा, और सबका एक स्वरूप होगा तब इस संगठन की जय-जयकार का नाम बाला होगा।

 4  :- इसका प्रभाव अनेक आत्माओं को अनाकर्षित करेगा और सहज सहज ही प्रजा की वृद्धि हो जाएगी।

 5   :- इन कर्मिन्द्रियों का आदि-अनादि अपना-अपना कार्य है।

 

 

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QUIZ ANSWERS

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 प्रश्न 1 :-  जहाँ भोग है, वहाँ योग नहीं इस वाक्य का अर्थ स्पष्ट कीजिये।

 उत्तर 1 :-  बापदादा कहते हैं :-

          अगर योग नहीं लगता है तो अवश्य ही इंद्रियों द्वारा अल्पकाल के सुख प्राप्त करने वाले और सदाकाल की प्राप्ति से वंचित कराने वाले कोई न कोई भोग भोगने में लगे हुए हैं। इसलिए अपने निजी कार्य को भूले हुए हैं।

          जैसे आजकल के संपत्ति वाले वा कलयुगी राजा जब चौसठ भोग विलास में मस्त हो जाते हैं तो अपना निजी कार्य, राज्य करना व अपना अधिकार भूल जाते हैं।

          ऐसे ही आत्मा भी भोग भोगने में व्यस्त होने के कारण योग भूल जाते हैं अर्थात अपना अधिकार भूल जाते हैं।  तो जहाँ भोग है वहाँ योग नहीं। इसी कारण मुश्किल लगता है।

 

 प्रश्न 2 :- कर्मयोगी नाम को सिद्ध करने के लिए क्या क्या करते हैं?

 उत्तर 2 :-  बाबा ने कहा कि :-

          यह नाम ही सिद्ध करता है कि योगी है अर्थात निराकारी आत्मिक स्वरूप में स्थित होकर कर्म करने वाले हैं। कर्म के बिना तो एक सेकण्ड भी रह नहीं सकते।

          कर्म- इंद्रियों का आधार लेने का अर्थ ही है निरंतर कर्म करना। तो जैसे कर्म के बिना रह नहीं सकते, वैसे ही याद अर्थात योग के बिना भी एक सेकण्ड रह नहीं सकते।        

          इसलिए कर्म स्वतः ही चलते रहते हैं, कर्मेन्द्रियों को नेचुरल अभ्यास है। ऐसे ही बुद्धि को योग का नेचुरल अभ्यास होना चाहिए।

 

 प्रश्न 3 :- निरंतर कर्मयोगी कैसे बन सकते हैं? माया किस तरह से विघ्न डालती है?

 उत्तर 3 :-बापदादा ने समझानी दी हैं कि :-

          वर्तमान समय माया बच्चों की बुद्धि पर ही पहला वार करती है। पहले बुद्धि का कनेक्शन तोड़ देती है। जैसे जब कोई दुश्मन वार करता है तो पहले टेलीफोन, रेडियो आदि के कनेक्शन तोड़ देती है। लाइट और पानी का कनेक्शन तोड़ देते हैं फिर वार करते हैं।

          ऐसे ही माया पहले बुद्धि का कनेक्शन तोड़ देती जिससे लाइट, माइट, शक्तियां और ज्ञान का संग ऑटोमेटिकली बंद हो जाता है। अर्थात मूर्छित बना बना देती है। अर्थात स्वयं के स्वरूप की स्मृति से वंचित कर देती है व बेहोश कर देती है।

          उसके लिए सदैव बुद्धि पर अटेंशन का पहरा चाहिए। तब ही निरंतर कर्मयोगी सहज बन पाएंगे।

          ऐसे अभ्यास करो जो जहाँ बुद्धि को लगाना चाहे वहाँ स्थित हो जाये। संकल्प किया और स्थित हुआ।

 

 प्रश्न 4 :- जितना समय जो संकल्प चाहिए, क्या उतने समय वह स्टेज रही? कैसे चेक करेंगे?

 उत्तर 4 :-बाबा ने समझाया हैं कि :-

          जहाँ बुद्धि लगाना चाहे, वहां ही लगे। इसको कहा जाता है अधिकारी यह प्रैक्टिस अभी कम है। इसलिए यह अभ्यास करो, अपने आप ही अपना प्रोग्राम बनाओ और अपने को चेक करो कि जितना समय निश्चित किया, क्या इतना ही समय वह स्टेज रही?

          हठयोगी अपनी किसी कर्मिन्द्रीय को, कोई टांग को या बाह को एकाग्र करने के लिए कोई टाइम निश्चित करते हैं की इतना टाइम एक टांग व एक हाथ निचे करेंगे अथवा ऊपर करेंगे। लेकिन यह रॉंग कॉपी है।

          बाबा ने सिखाया है बुद्धि में एक संकल्प लेके बैठो। उसकी उल्टी कॉपी एक टांग  ऊपर कर लेते हैं। बाबा कहते हैं सदा ज्ञानसूर्य के सन्मुख रहो, विमुख न बनो।

 

 प्रश्न 5 :- ,'सब एक विचार वाले हो जाये और कार्य सफल हो जाये।' इस के प्रति बापदादा ने क्या समझानी दी?

 उत्तर 5 :-बाबा ने समझानी दी कि :-

          जैसे स्थूल कार्य व सेवाओं में विचारों का मेल करते हो अर्थात सब एक विचार वाले हो जाते हैं तो तब ही कार्य सफल होता है, ऐसे ही संगठन रूप में सब एक संकल्प स्वरूप हो जाये।

          बीज-रूपचाहे व स्थिति चाहे तो सब बीज-रूप में स्थित हो जाये। ऐसे जब एक स्मृति-स्वरूप हो जायंगे। स्मृति तब हर संकल्प की सिद्धि अनुभव करेंगे व सिद्धि-स्वरूप हो जायेंगे।

          जो सोचेंगे, और जो बोलेंगे वही प्रक्टिकल में देखेंगे।

          इसको कहते हैं -  सिद्धि-स्वरूप। यही जय जयकार की निशानी है। इसी का ही यादगार है -- कलयुगी पर्वत, उसे एक साथ में ही अंगुली देना। यह संकल्प ही अंगुली है। तो अभी ऐसे प्रोग्राम्स (प्रोग्राम्स) बनाओ।

 

 

       FILL IN THE BLANKS:-    

{ चैतन्य, परमधाम, अग्नि, अव्यक्त, सेकण्ड, छोड़ने, साकार, वैराग्य, अंश, वायब्रेशन्स, फैलेंगे, बढ़ाते, धरनी, अभ्यास, स्थान }

 1  'अभी-अभी _______ निवासी, अभी-अभी सूक्ष्म ______ फरिश्ता बन जाये और अभी-अभी _______ कर्मेन्द्रियों का आधार लेकर कर्मयोगी बन जायें।

    परमधाम / अव्यक्त / साकार

 

  लगन की ________ की भट्टी अनुभव होगी जिसके _______ चारों ओर  ________

    अग्नि / वायब्रेशन्स / फैलेंगे

 3   जैसे उस एटम बम का बहुत काल के लिए _______ पर प्रभाव पड़ जाता है, वैसा ही _______ जीवन की धरनियों पर बहुत करके बेहद के _______ का प्रभाव पड़ेगा।

    चैतन्य / धरनी / वैराग्य

 

 4  अभी उसके _______ को ________ जाओ। एक _______ में सब एक मत हो जायें।

    अभ्यास / बढ़ाते / सेकण्ड

 

 5  जैसे एटम बम एक _______ पर _______ से चारों ओर उसके ______ फैल जाते हैं - वह एटम बम है, और यह आत्मिक बम है।   

    स्थान / छोड़ने / अंश

 

 

सही गलत वाक्यो को चिन्हित करे:- 】 【】      

 

 1  :- अपना कार्य कभी भी मुश्किल नहीं लगता है, दूसरे का मुश्किल लगता है।

 

 2  :-  सहज बुद्धि-योग का अभ्यास अभी तुम देख रहे हो। वह हठ से करते, आप अधिकार से करते हो। इसलिये वह मुश्किल है, यह सहज है। 

  यथार्थ बुद्धि-योग का अभ्यास अभी तुम सीख रहे हो। वह हठ से करते,आप अधिकार से करते हो। इसलिये वह मुश्किल है, यह सहज है।

 3  :- जब संगठन का एक संकल्प, एक स्मृति होगा, और सबका एक स्वरूप होगा तब इस संगठन की जय-जयकार का नाम बाला होगा।

 

 4  :- इसका प्रभाव अनेक आत्माओं को अनाकर्षित करेगा और सहज ही प्रजा की वृद्धि हो जाएगी।

  इसका प्रभाव अनेक आत्माओं को आकर्षित करेगा और सहज ही प्रजा की वृद्धि हो जाएगी।

 

 5   :-  इन कर्मिन्द्रियों का आदि-अनादि अपना-अपना कार्य है।