01.12.2016  का महत्व


ओमशान्ति . आज सतगुरुवार है और तारीख है 1.12.16. यह हमें क्या याद दिला रहा है ?

१ याने  नंबर वन में आने का लक्ष्य ; १२ याने संगम युग की अंतिम घड़ी का सूचक है अर्थात बारह बजने जा रहा है  ; १६ याने सोलह कला संपूर्ण बनने का पुरुषार्थ |

२०१६ के जनवरी मास में सभी ब्राह्मणों ने इस वर्ष में १६ कला संपूर्ण बनने की दृढ़ प्रतिज्ञा ली थी और कईयों ने एड़ी चोटी का जोर भी लगाया होगा उनको जरुर अपनी स्थिति और चाल चलन में परिवर्तन वा फर्क महसूस हुआ होगा और वे इसी तरह आगे भी पुरुषार्थ को और तीव्र कर बापदादा की आशाओं को पूर्ण करने के निमित्त बनेंगे |

अभी २०१७ नया वर्ष शुरू होने जा रहा है, हलचल के माहोल भी सारे विश्व में बढ़ रहा है जिसका बापदादा समय प्रति समय अपने महावाक्यों के द्वारा इशारा भी देते रहते हैं जिसे संसार के कलियुगी मनुष्य की भांति हम ब्राह्मण बच्चे भी हलके में ले लेते हैं |

१८ जनवरी  जिसे हम अव्यक्त दिवस, सम्पूर्णता व संपन्नता  दिवस, बाप समान बनने का दिवस के रूप में मनाते है, गीता के १८ वा अध्याय समाप्ति के रूप में देखते हैं, सारा  मास ही योग तपस्या में व्यतीत करते हैं तो वही १८ जनवरी पुनः अगले मास आ रहा है | तो हम क्या करेंगे ? सभी यही दृढ़ संकल्प लेंगे कि हमें किसी भी हालत में, चाहे कैसी भी परिस्थिति क्यों न आये, क्या, क्यों, कैसे के प्रश्नों से उठकर ब्रह्मा बाप समान संपूर्ण बनकर अव्यक्त बापदादा को गिफ्ट जरुर देंगे  | हर कोई समझे कि यही बापदादा के पालना का रिटर्न है  | अभी भी २०१६ का पूरा दिसम्बर  मास शेष है अविनाशी कमाई जमा करने के लिए ( वर्तमान गवर्नमेंट ने भी विनाशी काली कमाई को सफ़ेद या पुराने को नया करने का यही समय दिया हुआ है ) और जनवरी मास तो है ही तपस्या मास | तो अब बीती को बीती कर जो शेष समय हाथ में है उसको पूरा सफल करने में अपनी सारी उर्जा और will power लगा देनी है | बाबा के सामने सच्चे दिल से संकल्प लेंगे तो बाबा भी ख़ुशी ख़ुशी मदद करने के लिए बंधायमान है | बाप दादा , एडवांस पार्टी, प्रकृति और विश्व की आत्माएं भी तो हमारे संपूर्ण स्टेज के साक्षात्कार की आश लगाये बैठे हैं  तो उनकी यह आश तो हमें ही पूर्ण करनी होगी ना | अब हताश, नैराश्य, आलस्य, अलबेलापन को त्याग उठो और वो करो जो आज तक नहीं किया हो, खुद ही अपनी कमी कमजोरियों को चेक कर परिवर्तन करने का पुरुषार्थ करें | हम दूसरों को कहते है  अभी नहीं तो कभी नहीं अब यह हमारे लिए भी लागू होता दिखाई दे रहा है क्यों कि समय बहुत कम होता जा रहा है |

जितना हो सके आवाज से परे रहने का पुरुषार्थ करें, ज्यादा जानकारियों के पीछे भागने के बजाय अपने आत्मिक स्वरुप अथवा साइलेंस में टिकने का अभ्यास करें, साइंस के साधनों के भी अधिक अधीन न हो जाएँ, खुद की ही स्थिति नहीं बनी है तो दूसरों पर कैसे प्रभाव डाल सकेंगे | ऐसा अनुभव हो रहा है कि अब सेवा को और सूक्ष्म और शक्तिशाली बनाने की आवश्यकता है जो केवल और केवल अपनी अव्यक्त स्थिति और शक्तिशाली मनसा के द्वारा ही संभव है | स्थूल सेवा तो बहुत की और कर भी रहे हैं पर अब समयानुसार अपनी स्थिति द्वारा , चाल-चलन द्वारा सेवा पर ज्यादा से ज्यादा फोकस करना होगा तो आने वाले समय में स्वयं के साथ साथ दूसरों को भी सेफ कर सकेंगे, कम समय में और कम मेहनत में बेहद की सेवा कर सकेंगे, कैचींग पॉवर से प्यासी आत्माओं के आवश्यकताओं को पहले से ही भापकर उनकी इच्छा कामनाओं को पूर्ण कर सकेंगे | देखने में यह आता है कि ज्ञान के व सेवा के विस्तार के चक्कर में हम अपना बेसिक पाठ , दिनचर्या अथवा धारणाएं जो हम कोर्स के दौरान सुनते हैं जिसमें आत्मा का पहला पाठ है, अमृत वेला योग, मुरली क्लास अथवा मुरलियों का मनन चिंतन, अन्न शुद्धि इत्यादि उसको ही फॉलो करने में अलबेला हो जाते है इसलिए स्थिति मजबूत नहीं बन पाती है और फिर सारा दिन संघर्ष में बीतता है | आगे चल खुद के पुरुषार्थ के लिए समय नहीं मिलेगा  इसलिए जितना भी समय शेष है उसमें अपने कमियो को दूर कर भरपूर हो जाना है तभी दूसरो को भरपूर कर  सकेंगे । शब्दों को ज्यादा विस्तार न देक अब पूर्ण विराम |  

सभी को नए वर्ष में बाप समान १६ कला संपूर्ण बन बापदादा की आशाओं को पूर्ण करने के लिए शुभ भावना शुभ कामनाएं |
ओम शान्ति