18 Kadam to follow Baba

 


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18 Kadam to follow Baba

   

01.01.20 

अव्यक्त स्थिति का अनुभव करने के लिए विशेष होमवर्क
जैसे साकार में ब्रह्मा बाप अन्य सब जिम्मेवारियाँ होते हुए भी आकारी और निराकारी स्थिति का अनुभव कराते रहे, ऐसे आप बच्चे भी साकार रूप में रहते फरिश्तेपनन का अनुभव करो आरै कराओ। जो भी सम्पर्क में आते हैं उन्हें ईश्वरीय स्नेह, श्रेष्ठ ज्ञान और श्रेष्ठ चरित्रों का साक्षात्कार तो होता है लेकिन अभी अव्यक्त स्थिति का साक्षात्कार कराओ।

 

02.01.20 चाहे कोई भी साधारण कर्म भी कर रहे हो तो भी बीच-बीच में अव्यक्त स्थिति बनाने का अटेन्शन रहे। कोई भी कार्य करो तो सदैव बापदादा को अपना साथी समझकर डबल फोर्स से कार्य करो तो स्मृति बहुत सहज रहेगी। स्थूल कारोबार का प्रोग्राम बनाते बुद्धि का प्रोग्राम भी सेट कर लो तो समय की बचत हो जायेगी।
 
03.01.20

कोई भी कर्म करते सदैव यही स्मृति रहे कि हर कर्म में बापदादा मेरे साथ भी है और हमारे इस अलौकिक जीवन का हाथ उनके हाथ में है अर्थात् जीवन उनके हवाले है। फिर जिम्मेवारी उनकी हो जाती है। सभी बोझ बाप के ऊपर रख अपने को हल्का कर दो तो कर्मयोगी फरिश्ता बन जायेंगे।
 

04.01.20 आप रूहानी रॉयल आत्मायें हो इसलिए मुख से कभी व्यर्थ वा साधारण बोल न निकलें। हर बोल युक्तियुक्त हो, व्यर्थ भाव से परे अव्यक्त भाव वाला ही अव्यक्ति स्थिति का अनुभव कर सकेंगें
05.01.20 आपके सामने कोई कितना भी व्यर्थ बोले लेकिन आप व्यर्थ को समर्थ में परिवर्तन कर दो। व्यर्थ को अपनी बुद्धि में स्वीकार नहीं करो। अगर एक भी व्यर्थ बोल स्वीकार कर लिया तो एक व्यर्थ अनेक व्यर्थ को जन्म देगा। अपने बोल पर भी पूरा ध्यान दो, ''कम बोलो, धीरे बोलो और मीठा बोलो'' तो अव्यक्त स्थिति सहज बन जायेगी।
06.01.20 चलते-फिरते अपने को निराकारी आत्मा और कर्म करते अव्यक्त फरिश्ता समझो तो साक्षी दृष्टा बन जायेंगे। इस देह की दुनिया में कुछ भी होता रहे, लेकिन फरिश्ता ऊपर से साक्षी हो सब पार्ट देखते, सकाश अर्थात् सहयोग देता है। सकाश देना ही निभाना है।
07.01.20 अव्यक्त स्थिति का अनुभव करने के लिए देह, सम्बन्ध वा पदार्थ का कोई भी लगाव नीचे न लाये। जो वायदा है यह तन, मन, धन सब तेरा तो लगाव कैसे हो सकता! फरिश्ता बनने के लिए यह प्रैक्टिकल अभ्यास करो कि यह सब सेवा अर्थ है, अमानत है, मैं ट्रस्टी हूँ।
08.01.20 बाप को अव्यक्त रूप में सदा साथी अनुभव करना और सदा उमंग-उत्साह और खुशी में झूमते रहना। कोई बात नीचे ऊपर भी हो तो भी ड्रामा का खेल समझकर बहुत अच्छा, बहुत अच्छा करते अच्छा बनना और अच्छे बनने के वायब्रेशन से निगेटिव को पा@जिटिव में बदल देना।
09.01.20 मन की एकाग्रता ही एकरस स्थिति का अनुभव करायेगी। एकाग्रता की शक्ति द्वारा अव्यक्त फरिश्ता स्थिति का सहज अनुभव कर सkोंगे। एकाग्रता अर्थात् मन को जहाँ चाहो, जैसे चाहो, जितना समय चाहो उतना समय एकाग्र कर लो। मन वश में हो।
10.01.20 हम ब्रह्मण सो फरिश्ता हैं, यह कम्बाइन्ड रुप की अनुभूति विश्व के आगे साक्षात्कार मूर्त बनायेगी। ब्रह्मण सो फरिश्ता इस स्मृति द्वारा चलते-फिरते अपने को व्यक्त शरीर, व्यक्त देश में पार्ट बजाते हुए भी ब्रह्मा बाप के साथी अव्यक्त वतन के फरिश्ते, अव्यक्त रूपधारी अनुभव करेंगे।
11.01.20 फरिश्ता वा अव्यक्त जीवन की विशेषता है - इच्छा मात्रम् अविद्या। देवताई जीवन में तो इच्छा की बात ही नहीं। जब ब्रह्मण जीवन सो फरिश्ता जीवन बन जाती अर्थात् कर्मातीत स्थिति को प्राhत हो जाते तब किसी भी शुद्ध कर्म, व्यर्थ कर्म, विकर्म वा पिछला कर्म, किसी भी कर्म के बन्धन में नहीं बंध सकते।
12.01.20 ब्रह्मा बाप से प्यार है तो प्यार की निशानियां प्रैक्टिकल में दिखानी है। जैसे ब्रह्मा बाप का नम्बरवन प्यार मुरली से रहा जिससे मुरलीधर बना। तो जिससे ब्रह्मा बाप का प्यार था और अभी भी है उससे सदा प्यार दिखाई दे। हर मुरली को बहुत प्यार से पढ़कर उसका स्वरूप बनना है।
 
13.01.20 सारा दिन हर आत्मा के प्रति शुभ भावना और श्रेष्ठ भाव को धारण करने का विशेष अटेन्शन रख अशुभ भाव को शुभ भाव में, अशुभ भावना को शुभ भावना में परिवर्तन कर खुशनुमा स्थिति में रहो तो अव्यक्त स्थिति का अनुभव सहज होता रहेगा।
14.01.20 पूरा ही दिन सर्व के प्रति कल्याण की भावना, सदा स्नेह और सहयोग देने की भावना, हिम्मत-हुल्लास बढ़ाने की भावना, अपनेपन की भावना और आत्मिक स्वरूप की भावना रखना है। यही भावना अव्यक्त स्थिति बनाने का आधार है।
 
15.01.20 अपने हर संकल्प को हर कार्य को अव्यक्त बल से अव्यक्त रूप द्वारा वेरीफाय कराना है। बापदादा को अव्यक्त रूप से सदा सम्मुख और साथ रखकर हर संकल्प, हर कार्य करना है। साथी' और साथ' के अनुभव से बाप समान साक्षी अर्थात् न्यारा और प्यारा बनना है।
 
16.01.20 अभ्यास करो कि इस स्थूल देह में प्रवेश कर कर्मेन्द्रियों से कार्य कर रहे हैं। जब चाहे प्रवेश करो और जब चाहे न्यारे हो जाओ। एक सेकेण्ड में धारण करो और एक सेकेण्ड में देह के भान को छोड़ देही बन जाओ, यही अभ्यास अव्यक्त स्थिति का आधार है।
17.01.20 कोई भी कर्म करो, बोल बोलो वा संकल्प करो तो पहले चेक करो कि यह ब्रह्मा बाप समान है! ब्रह्मा बाप की विशेषता विशेष यही रही - जो सोचा वो किया, जो कहा वो किया। ऐसे फालो फादर। अपने स्वमान की स्मृति से, बाप के साथ की समर्थी से, दृढ़ता और निश्चय की शक्ति से श्रेष्ठ पोजीशन पर रह आपोजीशन को समाप्त कर दो तो अव्यक्त स्थिति सहज बन जायेगी।
18.01.20 जैसे ब्रह्मा बाप ने निश्चय के आधार पर, रुहानी नशे के आधार पर, निश्चित भावी के ज्ञाता बन सेकेण्ड में सब सफल कर दिया। अपने लिए कुछ नहीं रखा। तो स्नेह की निशानी है सब कुछ सफल करो। सफल करने का अर्थ है श्रेष्ठ तरफ लगाना।
 
19.01.20 जैसे ब्रह्मा बाप ने निश्चय के आधार पर, रुहानी नशे के आधार पर, निश्चित भावी के ज्ञाता बन सेकेण्ड में सब सफल कर दिया। अपने लिए कुछ नहीं रखा। तो स्नेह की निशानी है सब कुछ सफल करो। सफल करने का अर्थ है श्रेष्ठ तरफ लगाना।
 
   
20.01.20 हर समय नवीनता का अनुभव करते औरों को भी नये उमंग-उत्साह में लाना। खुशी में नाचना और बाप के गुणों के गीत गाना। मधुरता की मिठाई से स्वयं का मुख मीठा करते दूसरों को भी मधुर बोल, मधुर संस्कार, मधुर स्वभाव द्वारा मुख मीठा कराना।    
21.01.20 अव्यक्त स्थिति में रहने के लिए बाप की श्रीमत है बच्चे, सोचो कम, कर्तव्य अधिक करो।" सर्व उलझनों को समाप्त कर उज्जवल बनो। पुरानी बातों अथवा पुराने संस्कारों रूपी अस्थियों को सम्पूर्ण स्थिति के सागर में समा दो। पुरानी बातें ऐसे भूल जाएं जैसे पुराने जन्म की बातें भूल जाती हैं।    
22.01.20 बुद्धि रुपी पांव पृथ्वी पर न रहें। जैसे कहावत है कि फरिश्तों के पांव पृथ्वी पर नहीं होते। ऐसे बुद्धि इस देह रुपी पृथ्वी अर्थात् प्रकृति की आकर्षण से परे रहे। प्रकृति को अधीन करने वाले बनो न कि अधीन होने वाले।    
23.01.20 चेक करो - जो भी संकल्प उठता है वह स्वयं वा सर्व के प्रति कल्याण का है? सेकेण्ड में कितने संकल्प उठे - उसमें कितने सफल हुए और कितने असफल हुए? संकल्प और कर्म में अन्तर न हो। संकल्प जीवन का अमूल्य खजाना है। जैसे स्थूल खजाने को व्यर्थ नहीं करते वैसे एक संकल्प भी व्यर्थ न जाये।    
24.01.20 लगाव की रस्सियों को चेक करो। बुद्धि कहीं कच्चे धागों में भी अटकी हुई तो नहीं है? कोई सूक्ष्म बंधन भी न हो, अपनी देह से भी लगाव न हो - ऐसे स्वतन्त्र अर्थात् स्पष्ट बनने के लिए बेहद के वैरागी बनो तब अव्यक्त स्थिति में स्थित रह सकेंगे।
 
   
25.01.20 सम्पूर्ण फरिश्ता वा अव्यक्त फरिश्ता की डिग्री लेने के लिए सर्व गुणों में फुल बनो। नॉलेजफुल के साथसाथ फेथफुल, पावरफुल, सक्सेसफुल बनो। अभी नाजुक समय में नाज़ों से चलना छोड़ विकर्मो और व्यर्थ कर्मो को अपने विकराल रूप (शक्ति रूप) से समाप्त करो।    
26.01.20 यदि किसी भी प्रकार का भारीपन अथवा बोझ है तो आत्मिक एक्सरसाइज़ करो। अभी-अभी कर्मयोगी अर्थात् साकारी स्वरूपधारी बन साकार सृष्टि का पार्ट बजाओ, अभी-अभी आकारी फरिश्ता बन आकारी वतनवासी अव्यक्त रूप का अनुभव करो, अभी-अभी निराकारी बन मूलवतनवासी का अनुभव करो, इस एक्सरसाइज़ से हल्के हो जायेंगे, भारीपन खत्म हो जायेगा।
 
   
27.01.20      
28.01.20      
29.01.20      
30.01.20      

 

 

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