Day 18

सदा परमात्म प्यार में लवलीन रहो तो प्यार स्वरूप, मास्टर प्यार के सागर बन जायेंगे। प्यार करना नहीं पड़ेगा, प्यार का स्वरूप बन जायेंगे। सारा दिन प्यार की लहरें स्वत: ही उछलेंगी। जितना-जितना ज्ञान सूर्य की किरणें वा प्रकाश बढ़ता जायेगा उतना ही ज्यादा प्यार की लहरें उछलेंगी।

Day 17

ब्रह्मा बाप समान किसी भी बात के विस्तार में न जाकर, विस्तार को बिन्दी लगाए बिन्दी में समा दो, बिन्दी बन जाओ, बिन्दी लगा दो, बिन्दी में समा जाओ तो सारा विस्तार, सारी जाल सेकण्ड में समा जायेगी और समय बच जायेगा, मेहनत से छूट जायेंगे। बिन्दी बन बिन्दी में लवलीन हो जायेंगे। 
 

Day 16

जैसे ब्रह्मा बाप सदा परमात्म प्यार में लवलीन रहे। बाप के सिवाए और कुछ दिखाई नहीं दिया। संकल्प में भी बाबा, बोल में भी बाबा, कर्म में भी बाप का साथ, ऐसी लवलीन स्थिति में रह कोई भी शब्द बोलेंगे तो वह स्नेह के बोल, दूसरी आत्मा को भी स्नेह में बाँध देंगे। ऐसे लवलीन स्थिति में रहो तो एक बाबा शब्द ही जादू मंत्र का काम करेगा।


Day 15

जैसे ब्रह्मा बाप ने बीजरूप स्टेज अर्थात् पावरफुल स्टेज का विशेष अभ्यास करके पूरे विश्व को सकाश दी। ऐसे फालो फादर करो क्योंकि यह स्टेज लाइट हाउस, माइट हाउस का कार्य करती है। जैसे बीज द्वारा स्वत: ही सारे वृक्ष को पानी मिल जाता है, ऐसे जब बीजरूप स्टेज पर स्थित होंगे तो आटोमेटिकली विश्व को लाइट का पानी मिलेगा।

Day 14

फरिश्ता जीवन बन्धनमुक्त जीवन है भल सेवा का बन्धन है, लेकिन इतना फास्ट गति है जो जितना भी करे, उतना करते हुए भी सदा फ्री हैं, जितना ही प्यारा, उतना ही न्यारा। सदा ही स्वतंत्रता की स्थिति का अनुभव हो क्योंकि शरीर और कर्म के अधीन नहीं हैं।

Day 13

ब्रह्मा बाप से प्यार है तो ब्रह्मा बाप समान फरिश्ता बनो। सदैव अपना लाइट का फरिश्ता स्वरूप सामने दिखाई दे कि ऐसा बनना है और भविष्य रूप भी दिखाई दे। अब यह छोड़ा और वह लिया। जब ऐसी अनुभूति हो तब समझो कि सम्पूर्णता के समीप हैं। 

Day 12

जैसे ब्रह्मा बाप ने अनेक मेरे मेरे को एक मेरे में समा दिया। मेरा तो एक बाबा दूसरा न कोई। ऐसे फालो फादर करो। इससे एकाग्रता की शक्ति बढ़ेगी। फिर जहाँ चाहो, जैसे चाहो, जितना समय चाहो उतना और ऐसा मन एकाग्र हो जायेगा। इस एकाग्रता की शक्ति से स्वत: ही एकरस फरिश्ता स्वरूप की अनुभूति होगी।

Day 11

अभी तीव्र पुरुषार्थ का यही लक्ष्य रखो कि मैं डबल लाइट फरिश्ता हूँ, चलते-फिरते फरिश्ता स्वरूप की अनुभूति को बढ़ाओ। अशरीरीपन का अभ्यास करो। सेकण्ड में कोई भी संकल्पों को समाप्त करने में, संस्कार स्वभाव में डबल लाइट रहो।

Day 10

नम्बरवन ब्रह्मा की आत्मा के साथ आप सभी को भी फरिश्ता बन अव्यक्त वतन में जाकर फिर परमधाम में चलना है इसलिए मन की एकाग्रता पर विशेष अटेन्शन दो, ऑर्डर से मन को चलाओ। हर बात में, वृत्ति में, दृष्टि में, कर्म में न्यारापन अनुभव हो। फरिश्तेपन की अनुभूति स्वयं भी करो और औरों को भी कराओ

Day 09

जैसे ब्रह्मा बाप को चलता-फिरता फरिश्ता, देहभान रहित अनुभव किया। कर्म करते, बातचीत करते, डायरेक्शन देते, उमंग-उत्साह बढ़ाते भी देह से न्यारा, सूक्ष्म प्रकाश रूप की अनुभूति कराई, ऐसे फॉलो फादर करो। सदा देह-भान से न्यारे रहो, हर एक को न्यारा रूप दिखाई दे, इसको कहा जाता है देह में रहते फरिश्ता स्थिति।

Day 8

ब्रह्मा बाप समान फरिश्ता स्थिति का अनुभव करने के लिए कर्म करते बीच-बीच में निराकारी और फरिश्ता स्वरूप यह मन की एक्सरसाइज़ करो। जैसे ब्रह्मा बाप को साकार रूप में देखा, सदा डबल लाइट रहे, सेवा का भी बोझ नहीं रहा। ऐसे फॉलो फादर करो तो सहज ही बाप समान बन जायेंगे।

Day 7

ब्रह्मा बाप के समान आपके यह नयन रूहानियत का अनुभव कराये, चलन बाप के चरित्रों का साक्षात्कार कराये, मस्तक मस्तकमणि का साक्षात्कार कराये, यह अव्यक्ति सूरत दिव्य, अलौकिक स्थिति का प्रत्यक्ष रूप दिखाए| इसके लिए अपनी अंतर्मुखी, अलौकिक वा रूहानी स्थिति में सदाकाल रहने का अभ्यास करों।
 

Day 6

जैसे ब्रह्मा बाप साधारण रूप में होतें असाधारण वा अलौकिक स्थिति में रहे| ऐसे फॉलो फादर| जैसे सितारों के संगठन में जो विशेष सितारें होते हैं उनकी चमक, झलक दूर से ही न्यारी और प्यारी लगती हैं| ऐसे आप सितारें भी असाधारण आत्माओं के बीच विशेष आत्माएं दिखाई दो|

Day 5

लौकिकता में अलौकिकता की स्मृति रहे| लौकिक में रहते हुए भी हम लोगो से न्यारे हैं| अपने को आत्मिक रूप से न्यारा समझना हैं| कर्त्तव्य से न्यारा होना तो सहज हैं, उससे दुनिया को प्यारे नहीं लगेंगे, लेकिन जब शरीर से न्यारी आत्मा रूप में कार्य करेंगे तो सबको प्यारे लगेंगे , इसे ही अलौकिक स्थिति कहा जाता हैं

Day 4
 

सेवा का प्रत्यक्षफल दिखाने के लिए जैसे ब्रह्मा बाप ने अपनी रूहानी स्थिति द्वारा सेवा की, ऐसे आप बच्चे भी अब अपनी रूहानी स्थिति को प्रत्यक्ष करो। रूह आत्मा को भी कहते हैं और रूह इसेन्स को भी कहते हैं। तो रूहानी स्थिति में रहने से दोनों ही हो जायेंगे। दिव्य गुणों की आकर्षण अर्थात् इसेन्स वह रूह भी होगा और आत्मिक स्वरूप भी दिखाई देगा।

Day 3
अन्तर्मुख स्थिति में रहकर फिर बाहरमुखता में आना, इस अभ्यास के लिए अपने ऊपर व्यक्तिगत अटेन्शन रखने की आवश्यकता है। जब आप अन्तर्मुख स्थिति में रहेंगे तो बाहरमुखता की बातें डिस्टर्ब नहीं करेंगी क्योंकि देह-अभिमान से गैर हाज़िर रहेंगे।

Day 2

अन्तर्मुख स्थिति द्वारा हर एक के दिल के राज़ को जानकर उन्हें राज़ी करो। इसके लिए साधारण रूप में असाधारण स्थिति का अनुभव स्वयं भी करो और औरों को भी कराओ। बाहरमुखता में आने समय अन्तर्मुखता की स्थिति को भी साथ-साथ रखो।

Day 1
समय प्रमाण तीन शब्द सदा याद रखो - अन्तर्मुख, अव्यक्त और अलौकिक, अभी तक कुछ लौकिकपन मिक्स है लेकिन जब बिल्कुल अलौकिक अन्तर्मुखी बन जायेंगे तो अव्यक्त फरिश्ते नज़र आयेंगे। रूहानी वा अलौकिक स्थिति में रहने के लिए अन्तर्मुखी बनो। 


Message from Madhuban : (in Sakar Murli 1 Jan 2019)

यह अव्यक्ति मास हम सभी ब्रह्मा वत्सों के लिए विशेष वरदानी मास है, इसमें हम अन्तर्मुखी बन साकार ब्रह्मा बाप के समान बनने का लक्ष्य रख तीव्र पुरुषार्थ करते हैं, इसके लिए इस जनवरी मास में रोज़ की मुरली के नीचे विशेष पुरुषार्थ की एक प्वाइंट लिख रहे हैं, कृपया सभी इसी अनुसार अटेन्शन रख पूरा दिन इस पर मनन चिंतन करते अव्यक्त वतन की सैर करें.