गीत  - बाबा मिलन  पर


तर्ज़:   तारों से सजके अपने सूरज से देखो धरती चली मिलने

किरणों से सजके अपने बच्चों से देखो बाबा आए हैं मिलने

निराकार वो रहता ब्रहमलोक आए धरती के आँगन में,

कितना सुहाना यह मिलन है देखो

बाप और बच्चों का संगम अब देखो

न होगी ऐसी कोई महफ़िल जहाँ भगवान स्वयं  आएँ

किरणों से सजके अपने बच्चों से देखो बाबा आए हैं मिलने
 

डाले  रुहानी दृष्टि हम सब पर

प्यार लुटाए वो प्यार का सागर

ख़ुशनसीबी है हमारी जो हम प्रभु को हैं पाएँ

किरणों से सजके अपने बच्चों से देखो बाबा आए हैं मिलने
 

इतने सुनहरे पल हैं ये हम सब के

भगवान को देखें हम आज जी भर के

थम जाए ये वक़्त यहीं पर मिलन यूँ हीं मनाते रहें

किरणों से सजके अपने बच्चों से देखो बाबा आए हैं मिलने
 

हृदय को मोहने गुल-ए-गुलज़ार में आएँ

ज्ञान के अनमोल ख़ज़ाने वो लुटाएँ

दिल व जान से सिक व प्रेम से चैतन्य में आएँ हैं मिलने

किरणों से सजके अपने बच्चों से देखो बाबा आए हैं मिलने

ओम शान्ति