15-10-04   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


एक को प्रत्यक्ष करने के लिए एकरस स्थिति बनाओ, स्वमान में रहो, सबको सम्मान दो

आज बापदादा हर एक बच्चे के मस्तक में तीन भाग्य के सितारे चमकते हुए देख रहे है। एक परमात्म पालना का भाग्य, परमात्म पढ़ाई का भाग्य, परमात्म वरदानों का भाग्य। ऐसे तीन सितारे सभी के मस्तक बीच देख रहे है। आप भी अपने भाग्य के चमकते हुए सितारों को देख रहे हो? दिखाई देते है? ऐसे श्रेष्ठ भाग्य के सितारे सारे विश्व में और किसी के भी मस्तक में चमकते हुए नहीं नजर आयेगे। यह भाग्य के सितारे तो सभी के मस्तक में चमक रहे हैं, लेकिन चमक में कहाँ-कहाँ अन्तर दिखाई दे रहा है। कोई की चमक बहुत शक्तिशाली है, कोई की चमक मध्यम है। भाग्य विधाता ने भाग्य सभी बच्चो को एक समान दिया है। कोई को स्पेशल नहीं दिया है। पालना भी एक जैसी, पढाई भी एक साथ, वरदान भी एक ही जैसा सबको मिला है। सारे विश्व के कोने-कोने में पढाई सदा एक ही होती है। यह कमाल है जो एक ही मुरली, एक ही डेट और अमृतवेले का समय भी अपने- अपने देश के हिसाब से होते भी, है एक ही, वरदान भी एक ही है। स्लोगन भी एक ही है। फर्क होता है क्या? अमेरिका और लण्डन में फर्क होता है? नहीं होता है। तो अन्तर क्यों?

अमृतवेले की पालना चारों ओर बापदादा एक ही करते है। निरन्तर याद की विधि भी सबको एक ही मिलती है, फिर नम्बरवार क्यों? विधि एक और सिद्धि की प्राप्ति में अन्तर क्यों? बापदादा का चारों ओर के बच्चों से प्यार भी एक जैसा ही है। बापदादा के प्यार में चाहे पुरुषार्थ प्रमाण नम्बर में लास्ट नम्बर भी हो लेकिन बापदादा का प्यार लास्ट नम्बर में भी वही है। और ही प्यार के साथ लास्ट नम्बर में रहम भी है कि यह लास्ट भी फास्ट, फर्स्ट हो जाए। आप सभी जो दूर-दूर से पहुँचे हो, कैसे पहुँचे हो? परमात्म प्यार खींच के लाया है ना! प्यार की डोरी में खिच के आ गये। तो बापदादा का सबसे प्यार है। ऐसे समझते हो या क्वेश्चन उठता है कि मेरे से प्यार है या कम है? बापदादा का प्यार हर एक बच्चे से एक दो से ज्यादा है। और यह परमात्म प्यार ही सब बच्चों की विशेष पालना का आधार है। हर एक क्या समझते हैं - मेरा प्यार बाप से ज्यादा है कि दूसरे का प्यार ज्यादा है, मेरा कम है? ऐसे समझते हैं? ऐसे समझते हो ना कि मेरा प्यार है? मेरा प्यार है, है ना ऐसे? पाण्डव ऐसे हैं? हर एक कहेगा मेरा बाबा, यह नहीं कहेगा सेन्टर इन्वार्ज का बाबा, दादी का बाबा, जानकी दादी का बाबा, कहेगे? नहीं। मेरा बाबा कहेगे। जब मेरा कह दिया और बाप ने भी मेरा कह दिया, बस एक मेरा शब्द में ही बच्चे बाप के बन गये और बाप बच्चों का बन गया। मेहनत लगी क्या? मेहनत लगी? थोड़ी- थोड़ी? नहीं लगी? कभी-कभी तो लगती है? नहीं लगती? लगती है। फिर मेहनत लगती है तो क्या करते हो? थक जाते हो? दिल से, मुहब्बत से कहो मेरा बाबा, तो मेहनत मुहब्बत में बदल जायेगी। मेरा बाबा कहने से ही बाप के पास आवाज पहुँच जाता है और बाप एकस्ट्रा मदद देते हैं। लेकिन है दिल का सौदा, जबान का सौदा नहीं है। दिल का सौदा है। तो दिल का सौदा करने में होशियार हो ना? आता है ना? पीछे वालों को आता है? तभी तो पहुँचे हो। लेकिन सबसे दूरदेशी कौन? अमेरिका? अमेरिका वाले दूरदेशी वाले है या बाप दूरदेशी है? अमेरिका तो इस दुनिया में है। बाप तो दूसरी दुनिया से आता है। तो सबसे दूरदेशी कौन? अमेरिका नहीं। सबसे दूरदेशी बापदादा है। एक आकार वतन से आता, एक परमधाम से आता, तो अमेरिका उसके आगे क्या है? कुछ भी नहीं।

तो आज दूरदेशी बाप इस साकार दुनिया के दूरदेशी बच्चो से मिल रहे हैं। नशा है ना? आज हमारे लिए बापदादा आये हैं। भारतवासी तो बाप के हैं ही लेकिन डबल विदेशियों को देख बापदादा विशेष खुश होते हैं। क्यों खुश होते हैं? बापदादा ने देखा है भारत में तो बाप आये है इसीलिए भारतवासियों को यह नशा एकस्ट्रा है लेकिन डबल फरिनर्स से प्यार इसलिए है कि भिन्न-भिन्न कल्चर होते हुए भी ब्राह्मण कल्चर में परिवर्तन हो गये। हो गये ना? अभी तो संकल्प नहीं आता - यह भारत का कल्चर है, हमारा कल्चर तो और है? नहीं। अभी बापदादा रिजल्ट में देखते हैं, सब एक कल्चर के हो गये हैं। चाहे कहाँ के भी हैं, साकार शरीर के लिए देश भिन्न-भिन्न है लेकिन आत्मा ब्राह्मण कल्वर की है और एक बात बापदादा को डबल फौरेनर्स की बहुत अच्छी लगती है, पता है कौनसी? (जल्दी सेवा करने लग गये हैं) और बोलो? (नौकरी भी करते हैं, सेवा भी करते हैं) ऐसे तो इण्डिया में भी करते हैं। इण्डिया में भी नौकरी करते हैं। (कुछ भी होता है तो सच्चाई से अपनी कमज़ोरी को बता देते हैं, स्पष्टवादी हैं) अच्छा, इण्डिया स्पष्टवादी नहीं है?

बापदादा ने यह देखा है कि चाहे दूर रहते हैं लेकिन बाप के प्यार के कारण प्यार में मैजारिटी पास है। भारत को तो भाग्य है ही लेकिन दूर रहते प्यार में सब पास हैं। अगर बापदादा पूछेगा तो प्यार में परसेंटेज है क्या? बाप से प्यार की सबजेक्ट में परसेन्टेज है? जो समझते हैं प्यार में 100 परसेन्ट है वह हाथ उठाओ। (सभी ने हाथ उठाया) अच्छा - 100 परसेन्ट ? भारतवासी नहीं उठा रहे हैं? देखो, भारत को तो सबसे बड़ा भाग्य मिला है कि बाप भारत में ही आये हैं। इसमें बाप को अमेरिका पसन्द नहीं आई, लेकिन भारत पसन्द आया है। यह (अमेरिका की गायत्री बहन) सामने बैठी है इसलिए अमेरिका कह रहे हैं। लेकिन दूर होते भी प्यार अच्छा है। प्राब्लम आती भी है लेकिन फिर भी बाबा-बाबा कहके मिटा लेते हैं।

प्यार में तो बापदादा ने भी पास कर लिया और अभी किसमें पास होना है? होना भी है ना! हैं भी और होना भी है। तो वर्तमान समय के प्रमाण बापदादा यही चाहते हैं कि हर एक बच्चे में स्व-परिवर्तन के शक्ति की परसेन्टेज, जैसे प्यार की शक्ति में सबने हाथ उठाया, सभी ने हाथ उठाया ना! इतनी ही स्व-परिवर्तन की तीव्र गति है? इसमें आधा हाथ उठेगा या पूरा? क्या उठेगा? परिवर्तन करते भी हो लेकिन समय लगता है। समय की समीपता के प्रमाण स्व-परिवर्तन की शक्ति ऐसी तीव्र होनी चाहिए जैसे कागज के ऊपर बिन्दी लगाओ तो कितने में लगती है? कितना समय लगता है? बिन्दी लगाने में कितना समय लगता है? सेकण्ड भी नहीं। ठीक है ना! तो ऐसी तीव्र गति है ? इसमें आधा हाथ उठेगा। समय की रफ्तार तेज है, स्व-परिवर्तन की शक्ति ऐसे तीव होनी है और जब परिवर्तन कहते हैं तो परिवर्तन के आगे पहले स्व शब्द सदा याद रखो। परिवर्तन नहीं, स्व-परिवर्तन। बापदादा को याद है कि बच्चों ने बाप से एक वर्ष के लिए वायदा किया था कि संस्कार परिवर्तन से संसार परिवर्तन करेंगे। याद है? वर्ष मनाया था - संस्कार परिवर्तन से संसार परिवर्तन। तो संसार की गति तो अति में जा रही है। लेकिन संस्कार परिवर्तन उसकी गति इतनी फास्ट है? वैसे फॉरेन की विशेषता है, कॉमन रूप से, फॉरन फास्ट चलता, फास्ट करता। तो बाप पूछते हैं कि संस्कार परिवर्तन में फास्ट हैं? तो बापदादा स्व-परिवर्तन की रफ्तार अभी तीव्र देखने चाहते हैं। सभी पूछते हो ना! बापदादा क्या चाहते हैं? आपस में रूहरिहान करते हो ना, तो एक दो से पूछते हो बापदादा क्या चाहते हैं? तो बापदादा यह चाहते हैं। सेकण्ड में बिन्दी लगे। जैसे कागज में बिन्दी लगती है ना, उससे भी फास्ट, परिवर्तन में जो व्यर्थ है उसमें बिन्दी लगे। बिन्दी लगाने आती है? आती है ना! लेकिन कभी-कभी क्वेश्चन मार्क हो जाता है। लगाते बिन्दी हैं और बन जाता है क्वेश्चन मार्क। यह क्यों, यह क्या? यह क्यों और क्या, यह बिन्दी को क्वेश्चन मार्क में बदल देता है। बापदादा ने पहले भी कहा था - व्हाई-व्हाई नहीं करो, क्या करो? फ्लाई या वाह! वाह! करो या फ्लाई करो। व्हाई-व्हाई नहीं करो। व्हाई-व्हाई करना जल्दी आता है ना! आ जाता है? जब व्हाई आवे ना तो उसको वाह! वाह! कर लो। कोई भी कुछ करता है, कहता है, वाह! ड्रामा वाह ! यह क्यों करता है, यह क्यों कहता, नहीं। यह करे तो मैं करू, नहीं।

आजकल बापदादा ने देखा है, सुना दूँ। परिवर्तन करना है ना। तो आजकल रिजल्ट में चाहे फॉरन में चाहे इण्डिया में दोनों तरफ एक बात की लहर है, वह क्या? यह होना चाहिए, यह मिलना चाहिए, यह इसको करना चाहिए, जो मैं सोचता हूँ, कहता हूँ वह होना चाहिए। यह चाहिए, चाहिए जो संकल्प मात्र में भी होता है, यह वेस्ट थॉटस, बेस्ट बनने नहीं देता है। बापदादा ने सभी का वेस्ट का चार्ट थोडे समय का नोट किया है। चेक किया है। बापदादा के पास तो पॉवरफुल मशीनरी है ना। आप जैसा कंप्यूटर नहीं है, आपका कम्प्यूटर तो गाली भी देता है। लेकिन बापदादा के पास चेकिंग मशीनरी बहुत फास्ट है। तो बापदादा ने देखा मैजारिटी का वेस्ट संकल्प सारे दिन में बीच-बीच में चलता है। क्या होता है, यह वेस्ट संकल्प का वजन भारी होता है और बेस्ट थॉटस का वजन कम होता है। तो यह जो बीच-बीच में वेस्ट थॉटस चलते हैं वह दिमाग को भारी कर देते हैं। पुरुषार्थ को भारी कर देते हैं, बोझ है ना तो वह अपने तरफ खींच लेता है। इसलिए शुभ संकल्प जो स्व-उन्नति की लिफ्ट है, सीढ़ी भी नहीं है लिफ्ट है वह कम होने के कारण, मेहनत की सीढी चढनी पडती है। बस दो शब्द याद करो वेस्ट को खत्म करने के लिए अमृतवेले से लेके रात तक दो शब्द संकल्प में, बोल में और कर्म में, कार्य में लगाओ। प्रैक्टिकल में लाओ। वह दो शब्द है - स्वमान और सम्मान। स्वमान में रहना है और सम्मान देना है। कोई कैसा भी है, हमें सम्मान देना है। सम्मान देना, स्वमान में स्थित होना है। दोनों का बैलेन्स चाहिए। कभी स्वमान में ज्यादा रहते, कभी सम्मान देने में कमी पड जाती है। ऐसे नहीं कि कोई सम्मान दे तो मैं सम्मान दूँ, नहीं। मुझे दाता बनना है। शिव शक्ति, पाण्डव सेना, दाता के बच्चे दाता हैं। वह दे तो मैं दूँ, वह तो बिजनेस हो गया, दाता नहीं हुआ। तो आप बिजनेसमैन हो कि दाता हो? दाता कभी लेवता नहीं होता। अपने वृत्ति और दृष्टि में यही लभ्य रखो मुझे, औरों को नहीं, मुझे सदा हर एक के प्रति अर्थात् सर्व के प्रति चाहे अज्ञानी है, चाहे ज्ञानी है, अज्ञानियों के प्रति फिर भी शुभभावना रखते हो लेकिन ज्ञानी तू आत्माओं प्रति आपस में हर समय शुभ भावना, शुभ कामना रहे। वृत्ति ऐसी बन जाये, दृष्टि ऐसी बन जाये। बस दृष्टि में जैसे स्थूल बिन्दी है, कभी बिन्दी गायब होती है क्या! आखो में से अगर बिन्दी गायब हो जाये तो क्या बन जायेंगे? देख सकेंगे? तो जैसे आँखों में बिन्दी है, वैसे आत्मा वा बाप बिन्दी नयनों में समाई हो। जैसे देखने वाली बिन्दी कभी गायब नहीं होती, ऐसे आत्मा वा बाप के स्मृति की बिन्दी वृत्ति से, दृष्टि से गायब नहीं हो। फॉलो फादर करना है ना ! तो जैसे बाप की दृष्टि वा वृत्ति में हर बच्चे के लिए स्वमान है, सम्मान है ऐसे ही अपनी दृष्टि वृत्ति में स्वमान, सम्मान। सम्मान देने से जो मन में आता है कि यह बदल जाये, यह नहीं करे, यह ऐसा हो, वह शिक्षा से नहीं होगा लेकिन सम्मान दो तो जो मन में संकल्प रहता है, यह हो, यह बदले, यह ऐसा करे, वह करने लग जायेंगे। वृत्ति से बदलेंगे, बोलने से नहीं बदलते। तो क्या करेंगे? स्वमान और सम्मान, दोनों याद रहेगा ना या सिर्फ स्वमान याद रहेगा? सम्मान देना अर्थात् सम्मान लेना। किसी को भी मान देना समझो माननीय बनना है। आत्मिक प्यार की निशानी है - दूसरे की कमी को अपनी शुभ भावना, शुभ कामना से परिवर्तन करना। बापदादा ने अभी लास्ट सन्देश भी भेजा था कि वर्तमान समय अपना स्वरूप मर्सीफुल बनाओ, रहमदिल। लास्ट जन्म में भी आपके जड चित्र मर्सीफुल बन भक्तों पर रहम कर रहे हैं। जब चित्र इतने मर्सीफुल हैं तो चैतन्य में क्या होगा? चैतन्य तो रहम की खान है। रहम की खान बन जाओ। जो भी आवे रहम, यही प्यार की निशानी है। करना है ना? या सिर्फ सुनना है? करना ही है, बनना ही है। तो बापदादा क्या चाहते हैं, इसका उत्तर दे रहे हैं। प्रश्र करते हैं ना, तो बापदादा उत्तर दे रहे हैं।

बाकी बापदादा को खुशी है, कितने देशों से देखो आये हैं? भिन्न- भिन्न देशों से एक मधुबन में पहुँच गये हैं। बापदादा ने अगले वर्ष एक काम दिया था, याद है? याद है? किसको याद है? पाण्डव, शक्तियाँ? बापदादा ने कहा कि इस वर्ष, एक वर्ष हो गया तो वारिस और माइक बाप के सामने लाना है। कितने वारिस निकाले हैं? बोलो, आस्ट्रेलिया? कितने वारिस निकले हैं? अमेरिका कितने वारिस निकले हैं? माइक तैयार हो रहे हैं? ऐसे? लेकिन बाबा के सामने नहीं आये हैं। आप तो आ गये लेकिन माइक और वारिस नहीं आये हैं। आये हैं? किसी देश का नया वारिस आया है? पुराने तो हैं ही। हाथ उठाओ कोई भी देश। कितने देश आये हैं? यह वारिस बनके आई है, (कोलम्बिया की एक बहन ने हाथ उठाया) मुबारक हो। बहुत अच्छा। और कहाँ से आये हैं? (एक ब्राजील से आया है) मुबारक हो। और कहाँ से आये हैं? (कैनाडा से, अर्जनटीना से, हॉगकाँग से. अमेरिका से, न्यूजीलैण्ड से, जर्मनी से नये-नये बच्चे हाथ उठा रहे हैं) बहुत अच्छा, मुबारक हो। हाँगकांग से 4 निकले हैं। अच्छा पक्के वारिस हैं? अच्छा, ब्राह्मण बनके आये हैं। बहुत अच्छा सेवा में वृद्धि की है, यह तो बहुत अच्छा। वर्तमान समय सेवा में वृद्धि अच्छी हो रही है, चाहे भारत में, चाहे फॉरिन में लेकिन बापदादा चाहते हैं ऐसी कोई निमित्त आत्मा बनाओ जो कोई विशेष कार्य करके दिखाये। ऐसा कोई सहयोगी बने जो अब तक करने चाहते हैं वह करके दिखावे। प्रोग्राम्स तो बहुत किये हैं, जहाँ भी प्रोग्राम्स किये हैं उन सर्व प्रोग्राम्स की सभी तरफ वालों को बापदादा बधाई देते हैं। अभी कोई और नवीनता दिखाओ। जो आपकी तरफ से आपके समान बाप को प्रत्यक्ष करे। परमात्मा की पढाई है, यह मुख से निकले। बाबा-बाबा शब्द दिल से निकले। सहयोगी बनते हैं, लेकिन अभी एक बात जो रही है कि यही एक है, यही एक है, यही एक है यह आवाज फैले। ब्रह्माकुमारियाँ काम अच्छा कर रही हैं, कर सकती हैं, यहाँ तक तो आये हैं लेकिन यही एक है और परमात्म ज्ञान है। बाप को प्रत्यक्ष करने वाला बेधडक बोले। आप बोलते हो परमात्मा कार्य करा रहा है, परमात्मा का कार्य है लेकिन वह कहे कि जिस परमात्मा बाप को सभी पुकार रहे हैं, वह ज्ञान है। अभी यह अनुभव कराओ। जैचे आपके दिल में हर समय क्या है? बाबा, बाबा, बाबा ऐसे कोई ग्रूप निकले। अच्छा है, कर सकते हैं, यहाँ तक तो ठीक है। परिवर्तन हुआ है। लेकिन लास्ट परिवर्तन है - एक है, एक है, एक है। वह होगा जब ब्राह्मण परिवार एकरस स्थिति वाले हो जायें। अभी स्थिति बदलती रहती है। एकरस स्थिति एक को प्रत्यक्ष करेगी। ठीक है ना! तो डबल फॉरिनर्स एक्सैम्पल बनो। सम्मान देने में, स्वमान में रहने में एक्सैम्पुल बनो, नम्बर ले लो। चारों ओर जैसे मोहजीत परिवार का दृष्टान्त बताते हैं ना, जो चपरासी भी, नौकर भी सब मोहजीत। वैसे कहाँ भी जाये अमेरिका जाये, औस्ट्रलिया जाये, हर देश में एकरस, एकमत, स्वमान में रहने वाले, सम्मान देने वाले, इसमें नम्बर लो। ले सकते हैं ना? लो। लेना है नम्बर? यह बैठी है ना, (निर्मला बहन) नम्बर लो। नम्बर लेकर दिखाओ फिर बापदादा दो बारी आयेंगे। (सभी ने ताली बजाई) ताली बजाओ लेकिन पहले रिजल्ट देखेंगे। अच्छा - सब उड रहे हो ना। उडती कला वाले हो ना! नीचे ऊपर नहीं, थक जायेंगे। उडते रहो, उड़ाते रही। अच्छा।

बापदादा ने देखा है - जो नहीं पहुँच सके हैं, उन बच्चों ने यादप्यार तो सबने भेजी है लेकिन पत्र भी बहुतों ने भेजे हैं। दूर बैठे भी देख रहे हैं। लेकिन बाप कहते हैं वह दूर नहीं है, दिल पर है। तो सबसे ज्यादा समीप दिल होती है। इसलिए चाहे कहाँ भी बैठे हैं, नहीं भी देख रहे हैं, दिल से देख रहे हैं, साधन से नहीं देख सकते, दिल से तो देख सकते हैं। तो दिल से देखने वाले, दूर बैठने वाले, सभी बाप के दिलतख्त पर हैं। यादप्यार दिल से भेजा है, समाचार भी आपने भेजे हैं, बापदादा सभी को यादप्यार के साथ-साथ यही वरदान दे रहे हैं - बीती को बीती कर बिन्दी लगाए, बिन्दी बन, बिन्दू बाप को याद करो। यही सभी के याद वा समाचारों का रेसपान्ड बापदादा दे रहे हैं। फर्स्ट चांस डबल फॉरिनर्स ने लिया है, तो फर्स्ट में आना पडेगा। बापदादा खुश है। फॉलो फ़ादर, सदा खुश रहना। अच्छा -

चारों ओर के बाप के नयनों में समाये हुए, नयनों के नूर बच्चों को सदा एकरस स्थिति में स्थित रहने वाले बच्चों को, सदा भाग्य का सितारा चमकने वाले भाग्यवान बच्चों को, सदा स्वमान और सम्मान साथ-साथ रखने बाले बच्चों को, सदा पुरूषार्थ की तीव्र रफ्तार करने वाले बच्चों को बापदादा का यादप्यार, दुआयें और नमस्ते।

दादियों से:- आदि रत्न तो बहुत थोड़े रह गये हैं। (मनोहर दादी ने बहुत-बहुत याद दिया है, वह कानपुर में बैठी है) अच्छा किया, त्याग किया है लेकिन बहुत आत्माओं की दुआयें ले ली। अच्छा, सभी दादियों को देखके खुश होते हैं ना। अच्छा पार्ट बजाए रही है।

(सभा से):- बापदादा देख रहे हैं तो यह भी देख रहे हैं। देखने में आ रहा है ना। अच्छा है देखो इण्डिया वालों ने त्याग तो किया ना। आप डबल फॉरिनर्स को चांस दिया। अच्छा है सबके चेहरे हर्षित हो रहे हैं। अभी ऐसे ही हर्षित रखना। अभी अपना फोटो देख रहे हो ना। अभी का फोटो अपना दिखाई दे रहा है तो सदा ऐसे रहेगा! सदा रहेगा कि बदलेगा? सदा अपने को बापदादा के सन्मुख देखना। साथ देखो। तो सदा ऐसा ही चेहरा रहेगा। अच्छा है, मेहनत तो सभी बहुत कर रहे हैं। और प्यार भी सभी का बहुत अच्छा है। अभी चलते फिरते साधारण नहीं दिखाई दो, फरिश्ते दिखाई दो। अच्छा दादियाँ सभी सेवा की लगन मे, याद की लगन में रहने वाली हैं। सब बहुत अच्छे हैं।

विदेश की बड़ी बहनों से:- मीटिंग अच्छी चल रही है, अभी प्लैन को प्रैक्टिकल में लाना। लेकिन अच्छा करते हैं, आपस में सभी की राय सलाह लेने से दुआयें मिल जाती है। एक अपना लक्ष्य दूसरी दुआयें, तो डबल काम करती है। बाकी हर एक अपना- अपना सम्भाल रहे हैं, अच्छा चल रहा है, चलता रहेगा, उसकी मुबारक हो। सब अच्छा चल रहा है ना। अनुभवी भी हो गये हैं। अनुभव से औरों को भी अनुभवी बना रहे हैं। निर्विघ्न चल रहा है इसकी मुबारक। और उमंग भी सेवा का अच्छा है। बापदादा ने भी समाचार सुना, अफ्रीका के उमंग-उत्साह की मुबारक हो। पहला नम्बर शुरू किया है, उसकी मुबारक। ऐसे सभी को नम्बरवार करना है लेकिन पहले पान का बीडा उठाया है, अच्छा है। प्लैन भी अच्छा है। (अफ्रीका में 55 देश हैं, उसमें से अभी तक 1 तु देशों में सेन्टर हैं, 41 देशों में 2 वर्ष के अन्दर सन्देश देने का प्लैन बनाया है) वहाँ के हैण्डस निकालके वहाँ सेवा कराना, यह प्लैन बहुत अच्छा है क्योंकि और कहाँ से हैण्डस कम ही मिलते हैं और वहाँ से वहाँ के अनुभवी होते हैं।

(निजार भाई ने अफ्रीका के भाई-बहिनों की तरफ से बापदादा को संकल्प पत्र दिया - हमसब संकल्प लेते हैं कि 2006 मम्मा के दिन तक अफ्रीका के सभी देशों में सन्देश देंगे, ताकि कोई का उल्हना न रहे) अच्छा है, बहुत अच्छा। ऐसे ही सभी जो भी रहे हुए हैं, उन्हों को सन्देश देना। यह प्लैन सबसे अच्छा लगा और सहज विधि हो गई ना। हैण्डस भी मिले और सेवा भी बढ गई। अभी सभी को करना है। (लोकल लोग सेवा करते हैं तो रेसपाण्ड अच्छा मिलता है) बहुत अच्छा, मुबारक हो।


 


 

02-11-04   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


स्व-उपकारी बन अपकारी पर भी उपकार करो, सर्व शक्ति, सर्व गुण सम्पन्न सम्मान दाता बनो

आज स्नेह के सागर अपने चारों ओर के स्नेही बच्चों को देख हर्षित हो रहे हैं। चाहे साकार रूप में सन्मुख हैं, चाहे स्थूल रूप में दूर बैठे है लेकिन स्नेह, सभी को बाप के पास बैठे हैं - यह अनुभव करा रहा है। हर बच्चे का स्नेह बाप को समीप अनुभव करा रहा है। आप सभी बच्चे भी बाप के स्नेह में सम्मुख पहुँचे हो। बापदादा ने देखा कि हर एक बच्चे के दिल में बापदादा का स्नेह समाया हुआ है। हर एक के दिल में मेरा बाबा इसी स्नेह का गीत बज रहा है। स्नेह ही इस देह और देह के सम्बन्ध से न्यारा बना रहा है। स्नेह ही मायाजीत बना रहा है। जहाँ दिल का स्नेह है वहाँ माया दूर से ही भाग जाती है। स्नेह की सबजेक्ट में सर्व बच्चे पास हैं। एक है स्नेह, दूसरा है सर्वशक्तिवान बाप द्वारा सर्वशक्तियों का खज़ाना।

तो आज बापदादा एक तरफ तो स्नेह को देख रहे हैं, दूसरे तरफ शक्ति सेना की शक्तियों को देख रहे हैं। जितना स्नेह समाया हुआ है उतना ही सर्व शक्तियां भी समाई हुई है? बापदादा ने सभी बच्चो को एक जैसी सर्व शक्तियाँ दी है, मास्टर सर्वशक्तिवान बनाया है। किसको सर्वशक्तिवान, किसको शक्तिवान नहीं बनाया है हाजिर कहे, जिस भी शक्ति का आह्वान करो, जैसा समय, जैसी परिस्थिति वैसे शक्ति कार्य में लगा सको। ऐसे अधिकारी आत्मायें बने हो? क्योंकि बाप ने वर्सा दिया और वर्से को आपने अपना बनाया, अपना बनाया है ना! तो अपने पर अधिकार होता है। जिस समय जिस विधि से आवश्यकता हो, उस समय कार्य में लग जाए। मानो समाने के शक्ति की आपको आवश्यकता है और आर्डर करते हो समाने की शक्ति को, तो आपका आर्डर मान जी हाजिर हो जाती है? हो जाती है तो कांध हिलाओ, हाथ हिलाओ। कभी-कभी होती है या सदा होती है? समाने की शक्ति हाजिर होती है लेकिन 10 बारी समा लिया और 11 वें बारी थोडा नीचे ऊपर होता है? सदा और सहज हाजिर हो जाए, समय बीतने के बाद नहीं आवे, करने तो यह चाहते थे लेकिन हो गया, यह ऐसा नहीं हो। इसको कहा जाता है सर्व शक्तियों के अधिकारी। यह अधिकार बापदादा ने तो सबको दिया है, लेकिन देखने में आता है कि सदा अधिकारी बनने में नम्बरवार हो जाते हैं। सदा और सहज हो, नेचुरल हो, नेचर हो, उसकी विधि है, जैसे बाप को हजूर भी कहा जाता है, कहते हैं हजूर हाजिर है। हाजिर हजूर कहते हैं। तो जो बच्चा हजूर की हर श्रीमत पर हाजिर हजूर कर चलता है उसके आगे सर्व शक्तियाँ भी हजूर हाजिर करती है। हर आज्ञा में जी हाजिर, हर कदम में जी हाजिर। अगर हर श्रीमत में जी हाजिर नहीं हैं तो हर शक्ति भी हर समय हाजिर हक नहीं कर सकती है। अगर कभी-कभी बाप की श्रीमत वा आज्ञा का पालन करते हैं, तो शक्तियां भी आपका कभी-कभी हाजिर होने का आर्डर पालन करती है। उस समय अधिकारी के बजाए अधीन बन जाते हैं। तो बापदादा ने यह रिजल्ट चेक की, तो क्या देखा? नम्बरवार हैं। सभी नम्बरवन नहीं है, नम्बरवार हैं और सदा सहज नहीं हैं। कभी- कभी सहज हो जाते, कभी थोडा मुश्किल शक्ति इमर्ज होती है।

बापदादा हर एक बच्चे को बाप समान देखने चाहते हैं। नम्बरवार नहीं देखने चाहते हैं और आप सभी का लक्ष्य भी है बाप समान बनने का। समान बनने का लक्ष्य है वा नम्बरवार बनने का लक्ष्य है? अगर पूछेंगे तो सब कहेंगे समान बनना है। तो चेक करो - एक सर्व शक्तियाँ हैं? सर्व पर अण्डरलाइन करो। सर्व गुण है? बाप समान स्थिति है? कभी स्वयं की स्थिति, कभी कोई परस्थिति विजय तो नहीं प्राप्त कर लेती' पर स्थिति अगर विजय प्राप्त कर लेती है तो उसका कारण जानते हो ना? स्थिति कमज़ोर है तब परिस्थिति वार कर सकती है। सदा स्व स्थिति विजयी रहे, उसका साधन है सदा स्वमान और सम्मान का बैलेन्स। स्वमानधारी आत्मा स्वत: ही सम्मान देने वाला दाता है। वास्तव में किसी को भी सम्मान देना, देना नहीं है, सम्मान देना मान लेना है। सम्मान देने वाला सबके दिल में माननीय स्वत: ही बन जाता है। ब्रह्मा बाप को देखा - आदि देव होते हुए, ड़ामा की फर्स्ट आत्मा होते हुए सदा बच्चों को सम्मान दिया। अपने से भी ज्यादा बच्चों का मान आत्माओं द्वारा दिलाया। इसलिए हर एक बच्चे के दिल में ब्रह्मा बाप माननीय बने। तो मान दिया या मान लिया? सम्मान देना अर्थात् दूसरे के दिल में दिल के स्नेह का बीज बोना। विश्व के आगे भी विश्व कल्याणकारी आत्मा हैं, यह तब अनुभव करते जब आत्माओं को स्नेह से सम्मान देते हो।

तो बापदादा ने वर्तमान समय में आवश्यकता देखी सम्मान एक दो को देने की। सम्मान देने वाला ही विधाता आत्मा दिखाई देता है। सम्मान देने वाले ही बापदादा की श्रीमत (शुभ भावना, शुभ कामना) मानने वाले आज्ञाकारी बच्चे हैं। सम्मान देना ही ईश्वरीय परिवार का दिल का प्यार है। सम्मान वाला स्वमान में सहजही स्थित हो सकता है। क्यों? जिन आत्माओं को सम्मान देता है उन आत्माओं द्वारा जो दुआयें दिल की मिलती है, वह दुआओं का भण्डार स्वमान सहज और स्वतः ही याद दिलाता है। इसलिए बापदादा चारों ओर के बच्चों को विशेष अण्डरलाइन करा रहे हैं - सम्मान दाता बनो।

बापदादा के पास जो भी बच्चा जैसा भी आया, कमज़ोर आया, संस्कार के वश आया, पापों का बोझ लेके आया, कड़े सस्कार लेकर आया, बापदादा ने हर बच्चे को किस नजर से देखा! मेरा सिकीलधा लाडला बच्चा है, ईश्वरीय परिवार का बच्चा है। तो सम्मान दिया और आप स्वमानधारी बन गये। तो फॉलो फादर। अगर सहज सर्वगुण सम्पन्न बनना चाहते हो तो सम्मान दाता बनो। समझा! सहज है ना? सहज है या मुश्किल है? टीचर्स क्या समझती हैं, सहज है? कोई को देना सहज है, कोई को मुश्किल है या सभी को देना सहज है? आपका टाइटल है - सर्व उपकारी। अपकार करने वाले पर भी उपकार करने वाले। तो चेक करो - सर्व उपकारी दृष्टि, वृत्ति, स्मृति रहती है? दूसरे पर उपकार करना, स्वयं पर ही उपकार करना है। तो क्या करना है? सम्मान देना है ना! अलग- अलग बातों में धारणा करने के लिए जो मेहनत करते हो, उससे छूट जायेंगे क्योकि बापदादा देख रहे हैं, कि समय की गति तीव्र हो रही है। समय इन्तजार कर रहा है, तो आप सभी को इन्तजाम करना है। समय का इन्तजार समाप्त करना है। क्या इन्तजाम करना है? अपने सम्पूर्णता और समानता की गति तीव्र करनी है। कर रहे हैं नहीं, तीव्रगति को चेक करो - तीव्रगति है?

बाकी स्नेह से नये-नये बच्चे भी पहुँचे हैं, बापदादा नये-नये बच्चों को देख खुश होते हैं। जो पहले बारी आये हैं वह हाथ उठाओ। बहुत हैं। भले पधारे बाप के घर में, अपने घर में, मुबारक हो।

सेवा का टर्न कर्नाटक:- कर्नाटक वाले उठो। सेवा के गोल्डन चांस की मुबारक हो। देखो पहला नम्बर लिया है तो पहला नम्बर ही रहना है ना! पुरुषार्थ में, विजयी बनने में सबसे पहला नम्बर लेने वाले। दूसरा नम्बर नहीं लेना, पहला नम्बर। है हिम्मत! हिम्मत है? तो हिम्मत आपकी और हजार गुणा मदद बाप की। अच्छा चांस लिया है। अपने पुण्य का खाता बहुत-बहुत जमा कर लिया। अच्छा कर्नाटक ने मेगा प्रोग्राम किया है? नहीं किया है, क्यों? क्यों नहीं किया? कर्नाटक को सबमें पहला नम्बर लेना चाहिए। (बैंगलोर में करेंगे) अच्छा, जिन्होंने भी बडा प्रोग्राम किया है वह उठो। कितने प्रोग्राम हो गये हैं? (8 - 10 हो चुके हैं) तो बापदादा बड़े प्रोग्राम की बडी मुबारक दे रहे हैं। जोन कितने हैं! हर एक जोन को बडा प्रोग्राम करना चाहिए क्योकि आपके शहर में उल्हना देने वाले उल्हना नहीं देगे। बडे प्रोग्राम में आप एडवरटाइज भी बडी करते हो ना, चाहे मीडिया द्वारा, चाहे पोस्टर, होर्डिग आदि भिन्न-भिन्न साधन अपनाते हो तो उल्हना कम हो जायेगा। बापदादा को यह सेवा पसन्द है लेकिन लेकिन है। प्रोग्राम तो बड़े किये उसकी तो मुबारक है ही लेकिन हर प्रोग्राम से कम से कम 108 की माला तो तैयार होनी चाहिए। वह कहाँ हुई है? कम से कम 108, ज्यादा से ज्यादा 16 हजार। लेकिन इतनी जो एनर्जी लगाई, इतना सम्पत्ति लगाई, उसकी रिजल्ट कम से कम 1०8 तो तैयार हों। सबकी एड्रेस तो आपके पास रहनी चाहिए। बड़े प्रोग्राम में जो भी लाने वाले हैं, उन्हों के पास उनका परिचय तो रहता ही है तो उन्हों को फिर से समीप लाना चाहिए। ऐसे नहीं कि हमने कर लिया, लेकिन जो भी कार्य किया जाता है उसका फल तो निकलना चाहिए ना। तो हर एक बड़े प्रोग्राम करने वालो को यह रिजल्ट बापदादा को देनी है। चाहे भिन्न-भिन्न सेन्टर पर जाये, किस शहर का भी हो वहाँ जाए, लेकिन रिजल्ट निकलनी चाहिए। ठीक है ना, हो तो सकता है ना! थोडा अटेंशन देगे तो निकल आयेगे 18 तो कुछ भी नहीं हैं। लेकिन रिजल्ट बापदादा देखने चाहते हैं, कम से कम स्टूडेंट तो बने। सहयोग में आगे आवे, कौन-कौन कितने निकालते हैं, वह बापदादा इस सीजन में रिजल्ट देखने चाहते हैं। ठीक है ना? पाण्डव ठीक है? तो देखेंगे नम्बरवन कौन है? कितने भी निकालो, निकालो जरूर। क्या है, प्रोग्राम हो जाते हैं लेकिन आगे का सम्पर्क वह थोडा अटेंशन कम हो जाता है और निकालना कोई मुश्किल नहीं है। बाकी बापदादा बच्चों की हिम्मत देख खुश हैं। समझा। अच्छा -

इन्दौर हॉस्टल तथा सभा में उपस्थित सभी कुमारियों से:- बहुत कुमारियाँ आई हैं, जितनी भी कुमारियाँ आई हैं, उनमें से हैण्डस कितने निकलेंगे? कुमारियाँ बापदादा के राइट हैण्डस बन सकती हैं। गोल्डन चांस है। तो कितनी संख्या है! मालूम है, कितनी कुमारियाँ हैं। (5 -6 सौ) इन्हों का नाम नोट करना और यह रिजल्ट देखना कि इतनी सारी कुमारियों में से राइट हैण्ड कितनी बनीं! हाथ उठाओ, सेंटर पर रहने वाली नहीं उठाओ। जो राइट हैण्ड बनेगी वह हाथ उठाओ। इन्हों का वीडियो निकालो। क्योकि आप लोगों को मालूम है कि सेंटर खोलने के निमंत्रण बहुत है लेकिन हैण्डस कम हैं। तो आपकी तो माँगनी है। इसलिए कुमारियों को जल्दी से जल्दी सेवा के राइट हैण्ड बनना चाहिए। जो छोटी-छोटी है उनकी बात छोड़ो, लेकिन जो सेवा कर सकती हैं उन्हों को समय के प्रमाण जल्दी तैयार हो जाना चाहिए। दहेज आपका तैयार है, सेन्टर दहेज है, वर तो है ही और दहेज भी तैयार है। तो तैयारी करो। करेगी ना! हाँ, बडी-बड़ी तो निकल सकती है। जो समझती है जल्द से जल्दी निकल सकती है, वह हाथ उठाओ। देखो, कितनी कुमारियाँ हाथ उठा रही हैं। वीडियो निकल रहा है। अच्छा - मुबारक हो, इनएडवास मुबारक हो। अच्छा।

सभी तरफ से जो भी स्नेही बच्चे बापदादा को दिल में याद कर रहे हैं, वा पत्र, ईमेल द्वारा याद भेजी है, उन चारों ओर के बच्चों को बापदादा दूर नहीं देख रहे हैं लेकिन दिलतख्त पर देख रहे हैं। सबसे समीप दिल है। तो बापदादा दिल से याद भेजने वालों को और याद भेजी नहीं लेकिन याद में हैं, उन सबको भी दिलतख्तनशीन देख रहे हैं। रेसपान्ड दे रहे हैं। दूर बैठे भी नम्बरवन तीव्र पुरुषार्थी भव।

अच्छा - अभी सभी एक सेकण्ड में, एक सेकण्ड एक मिनट नहीं, एक सेकण्ड में मैं फरिश्तासो देवता हूँ - यह मंसा ड़िल सेकण्ड में अनुभव करो। ऐसी ड़िल दिन में एक सेकण्ड में बार-बार करो। जैसे शारीरिक ड़िल शरीर को शक्तिशाली बनाती, वैसे यह मन की ड़िल मन को शक्तिशाली बनाने वाली है। मै फरिश्ता हूँ, इस पुरानी दुनिया, पुरानी देह, पुराने देह के सस्कार से न्यारी फरिश्ता आत्मा हूँ। अच्छा -

चारों ओर के अति स्नेही, सदा स्नेह के सागर में लवलीन आत्माओं को, सदा सर्व शक्तियों के अधिकारी श्रेष्ठ आत्माओं को, सदा बाप समान बनने बाले बाप के प्यारे आत्माओं को, सदा स्वमान में रहने वाली हर आत्मा को सम्मान देने वाली, सर्व के माननीय माननेवाली आत्माओं को, सदा सर्व उपकारी आत्माओं को बापदादा का दिल का यावधार और दिल की दुआयें स्वीकार हो। और साथ-साथ विश्व के मालिक आत्माओं को नमस्ते।

दादिजी से:- सम्मान देने में नम्बरवन पास है। अच्छा है, सब दादियों से मधुबन की रौनक है। (सभा से) इन सभी को दादियों से रौनक अच्छी लगती है ना। जैसे दादियों की रौनक से मधुबन में रौनक हो जाती है, ऐसे आप सभी दादी नहीं, दीदियाँ और दादे तो हो। तो सभी दीदियाँ और सभी दादायें, सभी को यह सोचना है, करना है, जहाँ भी रहते हो उस स्थान में रौनक हो। जैसे दादियों से रौनक है, वैसे हर स्थान में रौनक हो क्योकि दादी के पीछे दीदियाँ तो हो ना, कम नहीं हो। दादे भी हैं, दीदियाँ भी है। तो किसी भी सेंटर पर रूखापन नहीं होना चाहिए, रौनक होनी चाहिए। आप एक-एक विश्व में रौनक करने वाली आत्मायें हो। तो जिस भी स्थान पर हो वह रौनक का स्थान नजर आवे। ठीक है ना? क्योंकि दुनिया में हद की रौनक है और आप एक एक से बेहद की रौनक है। स्वय खुशी, शान्ति और अतीन्द्रिय सुख की रौनक में होंगे तो स्थान भी रौनक में आ जायेगा क्योंकि स्थिति से स्थान में वायुमण्डल फैलता है। तो सभी को चेक करना है - कि जहाँ हम रहते हैं, वहाँ रौनक है? उदासी तो नहीं है? सब खुशी में नाच रहे हैं? ऐसे है ना! आप दादियों का तो यही काम है ना! फॉलो दीदियाँ और दादायें। अच्छा।

आज इस वर्ष के इन्डियन सीजन का आदि है। तो आप सभी आदि में आ गये हैं। अच्छा है। बापदादा ने यह हाल आपके लिए ही बनाया है। आप नहीं होते हो ना तो हाल की रौनक नहीं होती है। (बाबा आते हैं तो रौनक हो जाती है) बाबा आवे और यह नहीं हों तो! (दादी को रौनक चाहिए, अच्छा है।

ओम शान्ति ।



 

30-11-04   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


अभी अपने चलन और चेहरे द्वारा ब्रह्मा बाप समान अव्यक्त रूप दिखाओ, साक्षात्कार मूर्त बनो

आज भाग्य विधाता बाप अपने चारों ओर के श्रेष्ठ भाग्यवान बच्चों को देख हर्षित हो रहे हैं। सारे कल्प में ऐसा श्रेष्ठ भाग्य किसी का भी हो नहीं सकता। कल्प-कल्प के आप बच्चे ही इस भाग्य का अधिकार प्राप्त करते हो। याद है - अपना कल्प-कल्प के अधिकार का भाग्य? यह भाग्य सर्व श्रेष्ठ भाग्य क्यों है? क्योंकि स्वय भाग्यविधाता ने इस श्रेष्ठ भाग्य का दिव्य जन्म आप बच्चों को दिया है। जिसका जन्म ही भाग्य विधाता द्वारा है, उससे श्रेष्ठ भाग्य और हो ही नहीं सकता। अपने भाग्य का नशा स्मृति में रहता है? अपने भाग्य की लिस्ट निकालो तो कितनी बड़ी लिस्ट है? अप्राप्त कोई वस्तु नहीं आप ब्राह्मणों के भाग्यवान जीवन में। सबके मन में अपने भाग्य की लिस्ट स्मृति में आ गई! स्मृति में लाओ, आ गई स्मृति में? दिल क्या गीत गाती? वाह भाग्य विधाता! और वाह मेरा भाग्य। इस श्रेष्ठ भाग्य की विशेषता यही है - एक भगवान द्वारा तीन सम्बन्ध की प्राप्ति है। एक द्वारा एक में तीन सम्बन्ध, जो जीवन में विशेष सम्बन्ध गाये हुए हैं - बाप, शिक्षक, सतगुरु, किसी को भी एक द्वारा तीन विशेष सम्बन्ध और प्राप्ति नहीं है। आप फलक से कहते हो हमारा बाप भी है, शिक्षक भी है तो सतगुरु भी है। बाप द्वारा सर्व खज़ानों की खान प्राप्त है। खज़ानों की लिस्ट भी स्मृति में आई! स्मृति में लाओ क्या-क्या खज़ाना बाप द्वारा मिल गया! मिल गया है या मिलना है? क्या कहेंगे? बालक सो मालिक है ही। शिक्षक द्वारा शिक्षा से श्रेष्ठ पद की प्राप्ति हो गई। वैसे भी देखा जाए दुनिया में भी सबसे श्रेष्ठ पद राज्य पद गाया जाता है, तो आप तो डबल राजे बन गये हो। वर्तमान स्वराज्य अधिकारी और भविष्य में अनेक जन्म राज्य पद अधिकारी। पढ़ाई एक जन्म की, वह भी छोटा सा जन्म और पद की प्राप्ति अनेक जन्म, और राज्य भी अखण्ड, अटल, निर्विघ्न राज्य। अभी भी स्वराज्य अधिकारी बेफिकर बादशाह हो, है? बेफिकर बादशाह बने हो? जो बेफिकर है वह हाथ उठाओ। बेफिकर, थोडा भी फिकर नहीं है? देखना, जब कोई पपेट शो सामने आता है फिर फिकर होता है? माया का पपेट शो सामने आता है या नहीं? फिर थोडा-थोड़ा फिकर होता है? नहीं होता? थोडा चिंता, चिंतन चलता है या नहीं चलता है? वैसे श्रेष्ठ भाग्य अभी से बेफिकर बादशाह बनाता है। यह थोडी बहुत जो बाते आती है वह और ही आगे के लिए अनुभवी, परिपक्व बनाने वाली हैं।

अभी तो सभी इन भिन्न-भिन्न बातों के अनुभवी हो गये हो ना। घबराते तो नहीं हैं ना? आराम से साक्षी की सीट पर बैठ यह पपेट शो देखो, कार्टून शो देखो। है कुछ भी नहीं, कार्टून है। अभी तो मजबूत हो गये हो ना! अभी मजबूत हैं ? या कभी-कभी घबराते हो? यह कागज का शेर बनकर आते हैं। है कागज का लेकिन शेर बनके आते हैं। अभी समय प्रमाण अनुभवीमूर्त बन समय को, प्रकृति को, माया को चैलेन्ज करो - आओ, हम विजयी हैं। विजयी की चैलेन्ज करो। (बीच-बीच में खासी आ रही है) आज बाजा थोडा खराब है, मिलना तो है ना!

बापदादा के पास दो ग्रूप बार-बार आते हैं, किसलिए आते हैं? दोनों ग्रूप बापदादा को कहते हैं - हम तैयार हैं। एक यह समय, प्रकृति और माया। माया समझ गई है अब हमारा राज्य जाने वाला है। और दूसरा ग्रूप है - एडवांस पार्टी। दोनों ग्रूप डेट पूछ रहे हैं। फॉरेन में तो एक साल पहले डेट फिक्स करते हो ना? और यहाँ 6 मास पहले? भारत में फास्ट जाते हैं, 15 दिन में भी कोई प्रोग्राम की डेट हो जाती है। तो समाप्ति, सम्पन्नता, बाप के समान बनने की डेट कौन सी है? वह बापदादा से पूछते हैं। यह डेट अभी आप ब्राह्मणों को फिक्स करनी है। हो सकती है? डेट फिक्स हो सकती है? पाण्डव बोलो, तीनों ही बोलो। (बापदादा निर्वेर भाई, रमेश भाई, बृजमोहन भाई से पूछ रहे हैं) डेट फिक्स हो सकती है? बोलो - हो सकती है? कि अचानक होनी है? ड्रामा में फिक्स है लेकिन उसको प्रैक्टिकल में लाना है या नहीं? वह क्या? बताओ। होनी है? अचानक होगा? डेट फिक्स नहीं होगी ? पहली लाइन वाले बताओ होगी? जो कहते हैं ड्रामा को प्रैक्टिकल में लाने के लिए मन में डेट का संकल्प करना पडेगा, वह हाथ उठाओ। करना पड़ेगा? यह नहीं उठा रहे है? अचानक होगी? डेट फिक्स कर सकते हैं? पीछे वालों ने समझ लिया अचानक होना है यह राइट है लेकिन अपने को तैयार करने के लिए लक्ष्य जरूर रखना पडेगा। बिना लक्ष्य के सम्पन्न बनने में अलबेलापन आ जाता है। आप देखो जब डेट फिक्स करते हो तभी सफलता मिलती है। कोई भी प्रोग्राम की डेट फिक्स करते हो ना? बनना ही है, यह संकल्प तो करना पडेगा ना! या नहीं, ड़ामा में आपेही हो जायेगा? क्या समझते हो? पहली लाइन वाले बताओ। प्रेम (देहरादून) सुनाओ। करना पडेगा, करना पड़ेगा? जयन्ती बोलो, करना पडेगा। वह कब होगी? अन्त में होगी जब समय आ जायेगा! समय सम्पन्न बनायेगा या आप समय को समीप लायेगे?

बापदादा ने देखा है कि स्मृति में ज्ञान भी रहता है, नशा भी रहता है, निश्चय भी रहता है, लेकिन अभी एडीशन चाहिए - चलन और चेहरे से दिखाई दे। बुद्धि में याद सब रहता है, मति में भी आता है लेकिन अब स्वरूप में आवे। जब साधारण रूप में भी अगर कोई बडे आक्यूपेशन वाला है या कोई साहूकार का बच्चा एड्यूकेटेड है तो उसकी चलन से दिखाई पड़ता है कि यह कुछ है। उनका कुछ न कुछ न्यारापन दिखाई देता है। तो इतना बड़ा भाग्य, वर्सा भी है, पढाई और पद भी है। स्वराज्य तो अभी भी है ना! प्राप्तिया भी सब हैं, लेकिन चलन और चेहरे से भाग्य का सितारा मस्तक में चमकता हुआ दिखाई दे, वह अभी एडीशन चाहिए। अभी लोगों को आप श्रेष्ठ भाग्यवान आत्माओं द्वारा यह अनुभव होना है, चाहिए नहीं, होना है कि यह हमारे इष्टदेव है, इष्टदेवियाँ हैं। यह हमारे हैं। जैसे ब्रह्मा बाप में देखा - साधारण तन में होते भी आदि के समय भी ब्रह्मा बाप में क्या दिखाई देता था, कृष्ण दिखाई देता था ना। आदि वालों को अनुभव है ना! तो जैसे आदि में ब्रह्मा बाप द्वारा कृष्ण दिखाई देता था ऐसे ही लास्ट में क्या दिखाई देता था? अव्यक्त रूप दिखाई देता था ना! चलन में, चेहरे में दिखाई दिया ना! अभी बापदादा विशेष निमित्त बच्चों को यह होमवर्क दे रहा है कि अभी ब्रह्मा बाप समान अव्यक्त रूप दिखाई दे। चलन और चेहरे से कम से कम 108 माला के दाने तो दिखाई देवे। बापदादा नाम नहीं चाहते हैं, नाम नहीं बताते हैं - 108 कौन हैं लेकिन उनकी चलन और चेहरा स्वत: ही प्रत्यक्ष हो। यह होमवर्क बापदादा निमित्त बच्चों को विशेष दे रहा है। हो सकता है? अच्छा कितना समय चाहिए? ऐसे नहीं समझना कि जो पीछे आये हैं, टाइम की बात नहीं है, कोई समझे हमको तो थोड़ा वर्ष ही हुआ है। कोई भी लास्ट सो फास्ट और फास्ट सो फर्स्ट जा सकता है, यह भी बापदादा की चैलेन्ज है, कर सकते हो। कोई भी कर सकते हो। लास्ट वाला भी हो सकता है। सिर्फ लक्ष्य पक्का रखो - करना ही है, होना ही है।

डबल फॉरेनर्स हाथ उठाओ। तो डबल फॉरेनर्स क्या करेंगे? डबल चांस लेंगे ना। बापदादा नाम नहीं एनाउन्स करेगा लेकिन उनका चेहरा बतायेगा - यह है। हिम्मत है? पहली लाइन को बापदादा देख रहा है। है, हिम्मत है? अगर हिम्मत है तो हाथ उठाओ। हिम्मत है तो? पीछे वाले भी उठा सकते हैं। जो ओटे सो अर्जुन। अच्छा - बापदादा रिजल्ट देखने के लिए, क्या-क्या पुरुषार्थ कर रहे हैं, कौन-कौन कर रहा है वह रिजल्ट देखने के लिए 6 मास दे रहे हैं। 6 मास रिजल्ट देखेंगे फिर फाइनल करेंगे। ठीक है? क्योंकि देखा जाता है कि अभी समय की रफ्तार तेज जा रही है, रचना को तेज नहीं जाना चाहिए, रचता को तेज होना चाहिए। अभी थोड़ा फास्ट करो, उडो अभी। चल रहे हैं नहीं, उड़ रहे हैं। जवाब में बहुत अच्छे जवाब देते हैं कि हम ही तो हैं ना! और कौन होगा! बापदादा खुश होते हैं। लेकिन अब लोग (आत्माये) जो हैं ना, वह कुछ देखने चाहते हैं। बापदादा को याद है जब आदि में आप बच्चे सेवा में निकले थे तो बच्चों से भी साक्षात्कार होते थे, अभी सेवा और स्वरूप दोनो तरफ अटेन्शन चाहिए। तो क्या सुना! अब साक्षात्कार मूर्त बनो। साक्षात् ब्रह्मा बाप बनो। अच्छा।

आज नये-नये बच्चे भी बहुत आये हैं। अपने स्नेह की शक्ति से सभी पहुँच गए हो इसलिए बापदादा विशेष जो नये-नये बच्चे आगे हैं, उन्हों को हर एक को नाम सहित पदमगुणा मुबारक दे रहे हैं, साथ में वरदाता वरदान दे रहे हैं - सदा ब्राह्मण जीवन में जीते रहो, उडते रहो। अच्छा।

सेवा का टर्न पंजाब:- पंजाब वाले उठो। बहुत अच्छा। यह भी विधि अच्छी बनाई है, हर जोन को चांस मिल जाता है। एक तो यज्ञ सेवा द्वारा एक-एक कदम में पदमगुणा कमाई जमा हो जाती है क्योकि मैजॉरिटी कोई भी कर्म करते यज्ञ सेवा याद रहती और यज्ञ सेवा याद आने से यज्ञ रचता बाप तो याद आता ही है। तो सेवा में भी ज्यादा से ज्यादा पुण्य का खाता जमा कर लेते हैं और जो सच्चे पुरुषार्थी बच्चे हैं वह अपने याद के चार्ट को सहज और निरन्तर बना सकते हैं क्योकि यहाँ एक तो महारथियों का संग है, संग का रंग सहज लग सकता है। अटेनशन है तो यह जो 8-10 दिन मिलते हैं इसमें बहुत अच्छी प्रोग्रेस कर सकते हैं। कॉमन रीति से सेवा की तो इतना लाभ नहीं है, लेकिन चांस है एक सहज निरन्तर योगी बनने का, पुण्य का खाता जमा करने का, और बडे ते बडे परिवार के नशे में, खुशी में रहने का। तो पंजाब वालों को चांस मिला है, हर जोन को मिलता है लेकिन लक्ष्य रखो कि तीनों ही फायदे हुए! कितना पुण्य का खाता जमा किया? सहज याद की प्रोग्रेस कितनी की? और संगठन या परिवार के स्नेह, समीपता का कितना अनुभव किया? यह तीन ही बातों का रिजल्ट हर एक को अपना निकालना चाहिए। ड्रामा में चांस तो मिलता है लेकिन चांस लेने वाले चांसलर बनो। तो पंजाब वाले तो होशियार हैं ना! अच्छा है। अच्छी संख्या में भी आये हो, और सेवा भी खुली दिल से मिली है। आने वाली संख्या भी अच्छी आई है। अच्छा है संगठन अच्छा है।

(आज दो विंग - ग्राम विकास विंग और महिला विंग मीटिंग के लिए आगे हैं)

महिला विंग:- इसमें मैजारिटी टीचर्स हैं क्या? टीचर्स हाथ उठाओ। अच्छा चांस है। सेवा की सेवा और सेवा के पहले मेवा। संगठन का और बाप से मिलन का मजा लेना। तो सेवा और मेवा दोनो मिल गया। अच्छा है। अभी कोई नया प्लैन बनाया? जो भी चाहे महिलाओं का है, चाहे किसी भी वर्ग के ग्रुप्स बने हुए हैं। तो हर एक ग्रूप कुछ विशेष प्रैक्टिकल चलन और चेहरे पर कोई न कोई गुण या शक्ति का बीड़ा उठाये तो हम यह ग्रुप, महिलाग्रूप इस गुण या शक्ति का प्रैक्टिकल प्रत्यक्ष रूप में लायेंगे। ऐसे हर एक वर्ग वाले कोई न कोई अपने विशेष फिक्स करें और उसकी आपस में जैसे सर्विस की रिजल्ट नोट करते हो ना, ऐसे आपस में चाहे लिखापढी हो, चाहे संगठन हो, यह भी चेक करते रहें। तो पहले आप लोग करके दिखाना। महिला विंग करके दिखाओ। ठीक है ना। हर एक विंग को क न कुछ अपना प्लैन बनाना है और समय फिक्स करे कि इतने समय में इतनी परसेन्टेज प्रैक्टिकल में लानी है। फिर जो बापदादा चाहते हैं ना, चलन और चित्र पर आवे, वह आ जायेगा। तो यह प्लैन बना करके बापदादा को देना। हर एक विंग क्या करेगा? सेवा का प्लैन जैसे नोट करते हो ना, वैसे यह करके देना। ठीक है ना! करके देना। अच्छा है छोटा-छोटा संगठन कमाल कर सकता है। ठीक है। क्या समझती हो टीचर्स? कर सकते हैं? कर सकते हैं? तो प्लैन बनाना। अच्छा। मुबारक हो सेवा की।

ग्राम विकास विंग:- अभी तक ग्राम विकास वालों ने कितने गाँव परिवर्तन किया है? कितने गाँव में किया है? (7 गाँव में किया है, एक गाँव में 75 परसेन्ट तक काम हुआ है। इस मीटिंग में भी प्रोग्राम बनाया है - समय की पुकार - स्वच्छ स्वर्णिम ग्राम्य भारत इस प्रोजेक्ट के अन्तर्गत गाँव-गाँव को व्यसन मुक्त और स्वच्छ बनाने की सेवा करेंगे) अच्छा है - प्रैक्टिकल है ना। इसकी टोटल रिजल्ट जो है प्रेसीडेंट, प्राइममिनिस्टर के पास जाती है? (अभी नहीं भेजी है) भेजनी चाहिए क्योंकि यह जो गाँव-गाँव में प्रैक्टिकल कर रहे हो, यह तो गवर्मेन्ट का ही काम है लेकिन आप सहयोगी बन रहे हो तो रिजल्ट देख करके अच्छा मानेंगे। एक ऐसा बुलेटिन तैयार करो जिससे गवर्मेन्ट के सभी मुख्य लोगों को वह बुलेटिन जाये, किताब नहीं, मैगजीन नहीं, शार्ट में टोटल रिजल्ट सब तरफ की भेजनी चाहिए। अच्छा है - मुबारक हो। अच्छा - (बीच-बीच में खासी आ रही है) आज बाजा शान्ति चाहता है।

अच्छा -बापदादा के पास, चारों ओर के सेवा की रिजल्ट भी आती रहती है और विशेष आजकल कोई भी कोना रह नहीं जाए - सबको सन्देश मिल जाए, यह प्लैन जो प्रैक्टिकल में कर रहे हैं, उसकी रिजल्ट भी अच्छी है। बापदादा के पास डबल विदेशी बच्चों के समाचार मिले हैं और जिन्होंने भी मेगा प्रोग्राम (भारत में) किये हैं, उन्हों का समाचार भी सब मिला है। चारों ओर सेवा की रिजल्ट सफलता पूर्वक निकली है। तो बच्चों ने जैसे सेवा में सन्देश देने की रिजल्ट में सफलता प्राप्त की है ऐसे ही वाणी द्वारा, सम्पर्क द्वारा और साथ-साथ अपने चेहरे द्वारा साक्षात्कार फरिश्ते रूप का कराते चलो।

अच्छा - जो पहले बारी आये है वह हाथ उठाओ। बहुत है। अच्छा है टू लेट के बोर्ड के पहले आ गये हो, अच्छा है, चांस लो। कमाल करके दिखाओ। हिम्मत रखो, बापदादा की मदद हर बच्चे के साथ है। अच्छा- बापदादा चारों ओर के साकार सम्मूख बैठे हुए बच्चों को और अपने-अपने स्थान पर, देश में बाप से मिलन मनाने वाले चारों ओर के बच्चों को बहुत-बहुत सेवा की, स्नेह की और पुरूषार्थ की मुबारक तो दे रहे हैं लेकिन पुकषार्थ में तीव्र पुरुषार्थी बन अब आत्माओं को दुःख अशान्ति से छुडाने का और तीव्र पुरुषार्थ करो। दुःख, अशान्ति, भ्रष्टाचार अति में जा रहा है, अभी अति का अन्त कर सभी को मुक्तिधाम का वर्सा बाप से दिलाओ। ऐसे सदा दृढ संकल्प वाले बच्चों को याद प्यार और नमस्ते।

ओम शान्ति ।



 

15-12-04   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


बापदादा की विशेष आशा - हर एक बच्चा दुआयें दे और दुआयें ले

आज बापदादा अपने चारों ओर के बेफिक्र बादशाहों की सभा को देख रहे हैं। यह राजसभा सारे कल्प में इस समय ही है। रूहानी फखुर में रहते हो इसलिए बेफिक्र बादशाह हो। सवेरे उठते हैं तो भी बेफिक्र, चलते फिरते, कर्म करते भी बेफिक्र और सोते हो तो भी बेफिक्र नींद में सोते हो। ऐसे अनुभव करते हो ना! बेफिक्र हैं? बने हैं वा बन रहे हैं? बन गये हैं ना! बेफिक्र और बादशाह हो, स्वराज्य अधिकारी इन कर्मेन्द्रियों के ऊपर राज्य करने वाले बेफिक्र बादशाह हो अर्थात् स्वराज्य अधिकारी हो। तो ऐसी सभा आप बच्चों की ही है। कोई फिक्र है? है कोई फिक्र? क्योंकि अपने सारे फिक्र बाप को दे दिये हैं। तो बोझ उतर गया ना। फिक्र खत्म और बेफिक्र बादशाह बन अमूल्य जीवन अनुभव कर रहे हो। सबके सिर पर पवित्रता के लाइट का ताज स्वत: ही चमकता है। बेफिक्र के ऊपर लाइट का ताज है, अगर कोई फिकर करते हो, कोई बोझ अपने ऊपर उठा लेते हो तो मालूम है सिर पर क्या आ जाता है? बोझ के टोकरे आ जाते हैं। तो सोचो ताज और टोकरे दोनों सामने लाओ, क्या अच्छा लगता? टोकरे अच्छे लगते या लाइट का ताज अच्छा लगता? बोलो, टीचर्स क्या अच्छा लगता है? ताज अच्छा लगता है ना! सभी कर्मेन्द्रियों के ऊपर राज्य करने वाले बादशाह हो। पवित्रता लाइट का ताजधारी बनाती है इसलिए आपके यादगार जड़चित्रों में डबल ताज दिखाया है । द्वापर से लेकर बादशाह तो बहुत बने हैं, राजे तो बहुत बने हैं लेकिन डबल ताजधारी कोई नहीं बना। बेफिक्र बादशाह स्वराज्य अधिकारी भी कोई नहीं बना क्योंकि पवित्रता की शक्ति मायाजीत, कर्मेन्द्रियजीत विजयी बना देती है। बेफिक्र बादशाह की निशानी है - सदा स्वयं भी सन्तुष्ट और औरों को भी सन्तुष्ट करने वाले। कभी भी कोई अप्राप्ति है ही नहीं जो असनुष्ट हो। जहाँ अप्राप्ति है वहाँ असन्तुष्टता है। जहाँ प्राप्ति है वहाँ सन्तुष्टता है। ऐसे बने हो? चेक करो - सदा सर्वप्राप्ति स्वरूप, सन्तुष्ट हैं? गायन भी है- अप्राप्त नहीं कोई वस्तु देवताओं के नहीं लेकिन ब्राह्मणों के खज़ाने में। सन्तुष्टता जीवन का श्रेष्ठ श्रृंगार है, श्रेष्ठ वैल्यू है। तो सन्तुष्ट आत्मायें हो ना!

बापदादा ऐसे बेफिक्र बादशाह बच्चों को देख खुश होते हैं। वाह मेरे बेफिक्र बादशाह वाह! वाह! वाह! हो ना! हाथ उठाओ जो बेफिक्र हैं। बेफिक्र? फिकर नहीं आता? कभी तो आता है? नहीं? अच्छा है। बेफिक्र बनने की विधि बहुत सहज है, मुश्किल नहीं है। सिर्फ एक शब्द की मात्रा का थोड़ा-सा अन्तर है। वह शब्द है - मेरे को तेरे में परिवर्तन करो। मेरा नहीं तेरा । तो हिन्दी भाषा में मेरा भी लिखो और तेरा भी लिखो तो क्या फर्क होता है, में और ते का? लेकिन फर्क इतना हो जाता है। तो आप सब मेरे-मेरे वाले हो या तेरे-तेरे वाले हो? मेरे को तेरे में परिवर्तन कर लिया? नहीं किया हो तो कर लो। मेरा-मेरा अर्थात् दास बनने वाला, उदास बनने वाला। माया के दास बन जाते हैं ना तो उदास तो होंगे ना! उदासी अर्थात् माया के दासी बनने वाले। तो आप मायाजीत हो, माया के दास नहीं। तो उदासी आती है? कभी-कभी टेस्ट कर लेते हो, क्योकि 63 जन्म उदास रहने का अभ्यास है ना! तो कभी-कभी वह इमर्ज हो जाती है। इसलिए बापदादा ने क्या कहा? हर एक बच्चा बेफिक्र बादशाह है। अगर अभी भी कहाँ कोने में कोई फिकर रख दिया हो तो दे दो। अपने पास बोझ क्यों रखते हो? बोझ रखने की आदत पड़ गई है? जब बाप कहते हैं बोझ मेरे को दे दो, आप लाइट हो जाओ, डबल लाइट। डबल लाइट अच्छा या बोझ अच्छा? तो अच्छी तरह से चेक करना। अमृतवेले जब उठो तो चेक करना कि विशेष वर्तमान समय सबकॉनशस में भी कोई बोझ तो नहीं है? सबकॉनशस तो क्या स्वप्न मात्र भी बोझ का अनुभव नहीं हो। पसन्द तो डबल लाइट है ना! तो विशेष यह होम वर्क दे रहे हैं, अमृतवेले चेक करना। चेक करना तो आता है ना, लेकिन चेक के साथ, सिर्फ चेक नहीं करना चेंज भी करना। मेरे को तेरे में चेंज कर देना। मेरा, तेरा। तो चेक करो और चेंज करो क्योकि बापदादा बार-बार सुना रहे हैं - समय और स्वयं दोनों को देखो। समय की रफ्तार भी देखो और स्वयं की रफ्तार भी देखो। फिर यह नहीं कहना कि हमको तो पता ही नहीं था, समय इतना तेज चला गया। कई बच्चे समझते हैं कि अभी थोड़ा ढीला पुरुषार्थ अगर है भी तो अन्त में तेज कर लेंगे। लेकिन बहुतकाल का अभ्यास अन्त में सहयोगी बनेगा। बादशाह बनके तो देखो। बने हैं लेकिन कोई बने हैं, कोई नहीं बने हैं। चल रहे हैं, कर रहे हैं, सम्पन्न हो जायेंगे...। अब चलना नहीं है, करना नहीं है, उड़ना है। अभी उड़ने की रफ्तार चाहिए। पंख तो मिल गये है ना! उमंग-उत्साह और हिम्मत के पंख सबको मिले हैं और बाप का वरदान भी है, याद है वरदान? हिम्मत का एक कदम आपका और हजार कदम मदद बाप की, क्योंकि बाप का बच्चों से दिल का प्यार है। तो प्यार वाले बच्चों की बाप मेहनत नहीं देख सकते। मुहब्बत में रहो तो मेहनत समाप्त हो जायेगी। मेहनत अच्छी लगती है क्या? थक तो गये हो। 63 जन्म भटकते, भटकते मेहनत करते थक गये थे और बाप ने अपनी मुहब्बत से भटकने के बजाए तीन तख्तके मालिक बना दिया। तीन तख्त जानते हो? जानते क्या हो लेकिन तख्त निवासी हो। अकालतख्त निवासी भी हो, बापदादा के दिलतख्त नशीन भी हो और भविष्य विश्व राज्य के तख्तनशीन भी हो। तो बापदादा सभी बच्चों को तख्तनशीन देख रहे हैं। ऐसा परमात्म दिलतख्त सारे कल्प में अनुभव नहीं कर सकेंगे। क्या समझते हैं पाण्डव? बादशाह हैं? हाथ उठा रहे हैं। तख्त नहीं छोडना। देहभान में आये अर्थात् मिट्टी में आ गये। यह देह मिट्टी है। तख्त नशीन बने तो बादशाह बने।

बापदादा सभी बच्चों के पुरुषार्थ का चार्ट चेक करते हैं। चार ही सबजेक्ट में कौन-कौन कहाँ तक पहुचा है? तो बापदादा ने हर एक बच्चे का चार्ट चेक किया कि बापदादा ने जो भी खज़ाने दिये है वह सर्व खज़ाने कहा तक जमा किये हैं? तो जमा का खाता चेक किया क्योंकि खज़ाने बाप ने सबको एक जैसे, एक जितना दिया है, कोई को कम, कोई को ज्यादा नहीं दिया है। खज़ाने जमा होने की निशानी क्या है? खज़ाने का तो मालूम ही है ना, सबसे बडा खज़ाना है श्रेष्ठ संकल्प का खज़ाना। संकल्प भी खज़ाना है, तो वर्तमान समय भी बहुत बडा खज़ाना है क्योकि वर्तमान समय में जो कुछ प्राप्त करने चाहे, जो वरदान लेने चाहे, जितना अपने को श्रेष्ठ बनाने चाहे, उतना अभी बना सकते हैं। अब नहीं तो कब नहीं। जैसे संकल्प के खज़ाने को व्यर्थ गँवना अर्थात् अपने प्राप्तियों को गँवाना। ऐसे ही समय के एक सेकण्ड को भी व्यर्थ गँवाया, सफल नहीं किया तो बहुत गँवाया। साथ में ज्ञान का खज़ाना, गुणों का खज़ाना, शक्तियों का खज़ाना और हर आत्मा और परमात्मा द्वारा दुआओं का खज़ाना। सबसे सहज है पुरुषार्थ में दुआयें दो और दुआयें लो। सुख दो और सुख लो, न दुःख दो न दुख लो। ऐसे नहीं कि दुःख दिया नहीं लेकिन ले लो तो भी दुखी तो होंगे ना! तो दुआयें दो, सुख दो और सुख लो। दुआयें देना आता है? आता है? लेना भी आता है? जिसको दुआयें लेना और देना आता है वह हाथ उठाओ। अच्छा - सभी को आता है? अच्छा - डबल फॉरेनर्स को भी आता है? मुबारक है । देने आता है लेने आता है तो मुबारक है। सभी को मुबारक है, अगर लेने भी आता और देने भी आता फिर और चाहिए क्या। दुआयें लेते जाओ दुआयें देते जाओ, सम्पन्न हो जायेंगे। कोई बददुआ देवे तो क्या करेंगे? लेंगे? बददुआ आपको देता है तो आप क्या करेंगे? लेंगे? अगर बद-दुआ मानो ले लिया तो आपके अन्दर स्वच्छता रही? बद-दुआ तो खराब चीज है ना! आपने ले ली, अपने अन्दर स्वीकार कर ली तो आपका अन्दर स्वच्छ तो नहीं रहा ना! अगर जरा भी डिफेक्ट रहा तो परफेक्ट नहीं बन सकते। अगर खराब चीज़ कोई देवे तो क्या आप ले लेंगे? कोई बहुत सुन्दर फल हो लेकिन आपको खराब हुआ दे देवे, फल तो बढिया है फिर ले लेंगे? नहीं लेंगे ना कि कहेंगे अच्छा तो है, चलो दिया है तो ले ले। कभी भी कोई बद-दुआ दे तो आप मन में अन्दर धारण नहीं करो। समझ में आता है यह बद-दुआ है लेकिन बद-दुआ अन्दर धारण नहीं करो, नहीं तो डिफेक्ट हो जायेगा। तो अभी यह वर्ष, अभी थोड़े दिन पड़े हैं पुराने वर्ष में लेकिन अपने दिल में दृढ़ संकल्प करो, अभी भी किसकी बद-दुआ मन में हो तो निकाल दो और कल से दुआ देंगे, दुआ लेंगे। मंजूर है? पसन्द है? पसन्द है या करना ही है? पसन्द तो है लेकिन जो समझते है करना ही है, कुछ भी हो जाये, लेकिन करना ही है, वह हाथ उठाओ। करना ही है।

जो स्नेही सहयोगी आज आये हैं वह हाथ उठाओ। तो जो स्नेही सहयोगी आये हैं, बापदादा उन्हों को मुबारक दे रहे हैं क्योंकि सहयोगी तो हो, स्नेही भी हो लेकिन आज एक और कदम उठाके बाप के घर में वा अपने घर में आये हो, तो अपने घर में आने की मुबारक है। अच्छा जो स्नेही सहयोगी आये हैं वह भी समझते हैं कि दुआयें देंगे और लेंगे? समझते हो? हिम्मत रखते हो? जो स्नेही सहयोगी हिम्मत रखते हैं, मदद मिलेगी, लम्बा हाथ उठाओ। अच्छा। फिर तो आप भी सम्पन्न हो जायेंगे, मुबारक हो। अच्छा जो गाडली स्टूडेंट रेग्युलर हैं, चाहे ब्राह्मण जीवन में बापदादा से मिलने पहली बार आये हैं लेकिन अपने को ब्राह्मण समझते हैं, रेग्युलर स्टूडेंट समझते हैं वह अगर समझते हैं कि करना ही है, वह हाथ उठाओ। दुआ देंगे, दुआ लेंगे? करेंगे? टीचर्स उठा रही हैं? यह कैबिन वाले नहीं उठा रहे हैं। यह समझते हैं हम तो देते ही है। अभी करना ही है। कुछ भी हो जाए, हिम्मत रखो। दृढ संकल्प रखो। अगर मानो कभी बद-दुआ का प्रभाव पड भी जावे ना तो 10 गुणा दुआयें ज्यादा दे करके उसको खत्म कर देना। एक बद-दुआ के प्रभाव को 10 गुणा दुआयें देके हल्का कर देना फिर हिम्मत आ जायेगी। नुकसान तो अपने को होता है ना, दूसरा तो बद-दुआ देके चला गया लेकिन जिसने बद-टुआ समा ली, दुःखी कौन होता है? लेने वाला या देने वाला? देने वाला भी होता है लेकिन लेने वाला ज्यादा होता है। देने वाला तो अलबेला होता है।

आज बापदादा अपने दिल की विशेष आशा सुनार हे हैं। बापदादा की सभी बच्चों के प्रति, एक-एक बच्चे के प्रति चाहे देश, चाहे विदेश में हैं, चाहे सहयोगी हैं क्योकि सहयोगियों को भी परिचय तो मिला है ना। तो जब परिचय मिला है तो परिचय से प्राप्ति तो करनी चाहिए ना। तो बापदादा की यही आशा है कि हर बच्चा दुआयें देता रहे। दुआओं का खज़ाना जितना जमा कर सको उतना करते जाओ क्योंकि इस समय जितनी दुआयें इकट्ठी करेंगे, जमा करेंगे उतना ही जब आप पूज्य बनेंगे तो आत्माओं को दुआयें दे सकेंगे। सिर्फ अभी दुआयें आपको नहीं देनी है, द्वापर से लेके भक्तों को भी दुआयें देनी है। तो इतना दुआओं का स्टॉक जमा करना है। राजा बच्चे हो ना। बापदादा हर एक बच्चे को राजा बच्चा देखते हैं। कम नहीं। अच्छा।

सेवा का टर्न दिल्ली ज़ोन:- अच्छा दिल्ली वाले सभी उठो। दिल्ली का नाम सुन करके सब खुश होते हो ना! क्योंकि कल्प-कल्प की आपकी राजधानी है। वैसे देखो ड्रामा में राजधानी दिल्ली तो है ही लेकिन सेवा की आरम्भ भी दिल्ली से हुई। आदि से लेकर भिन्न-भिन्न सेवाओं की नई-नई इन्वेनशन भी दिल्ली वालों ने निकाली है। औरों ने भी निकाली है लेकिन दिल्लीवालों ने भी निकाली है। यह यज्ञ सेवा का चांस मिला है। यज्ञ सेवा का फल बहुत बडा है क्योंकि यज्ञ सेवा अर्थात् ब्राह्मण आत्माओं की सेवा। भक्ति में तो 8 - 10 ब्राह्मणों को भोजन खिलाया, कुछ किया तो समझते हैं बडा पुण्य हो गया लाकन यहाँ दस हजार, 12 हजार, 8 हजार ब्राह्मणों की सेवा का चांस मिलता है। यज्ञ पिता के यज्ञ की सेवा है। ब्रह्मा भोजन का, यज्ञ का कणा-कणा बहुत वैल्यूबुल है और आप ब्राह्मणों को वह ब्रह्मा भोजन कितना प्यार से प्राप्त होता है। यह ब्रह्मा भोजन कम नहीं है। जिसके भी भाग्य में ब्रह्मा भोजन होता है उनको पता नहीं होता है कि इसका फल क्या मिलना है लेकिन मिलता जरूर है। इसलिए भक्ति में भी कहते हैं शिव के भण्डारे भरपूर काल कटक सब दूर। तो खाने वाले को कितना फल होगा। अच्छा है, दिल्ली में सेवा के प्लैन तो बनाते रहते हैं लेकिन एक विशेषता बापदादा ने सुनी, जो अच्छी लगी कि दिल्लीवालों ने अपने निमित्त बने हुए प्रेसिडेंट की सेवा बहुत अच्छी की है और वह निमित्त बन औरों को भी मैसेज देता रहता है। तो अच्छा माइक तैयार किया है ना, पॉवरफुल। अभी दिल्ली वालों को सेवा का और नया प्लैन निकालना चाहिए। वा कोई भी जोन, बॉम्बे भी कर सकता, हर एक जोन में कोई न कोई प्लैन की इन्वेंशन करने वाला है। अभी मेगाप्रोग्राम भी हो गये, वह भी कॉमन हो गये, देखो, यह विशेष आपके दादी की इन्वेनशन थी। और कितना सहज हो रहा है। पहले समझते थे लाख को इकट्ठा करना बहुत मेहनत की बात है लेकिन अभी जहाँ भी हुआ है, बडी दिल से किया है और बड़ी सफलता मिली है। बापदादा नाम नहीं लेते लेकिन रिजल्ट देखी गई कि जितनी बडी दिल से किया है उतनी सफलता मिली है। सफलता तो मिलनी है ही। सफलता तो ब्राह्मण आत्माओ के गले का हार है। जन्म सिद्ध अधिकार है। तो दिल्ली वालो को अभी कुछ नया करना चाहिए। दिल्ली वाले ठीक है ना! इबेबान करने वाले भी बहुत है। अच्छा है। हर एक वर्ग वालों ने जो भी सेवा अभी तक की है, अच्छी की है। अभी और अच्छे ते अच्छी करेंगे। अच्छी की है और अच्छे ते अच्छी होती रहेगी। आखिर साइलेन्स की शक्ति को साइंस की शक्ति पर विजय तो प्राप्त करनी ही है। अभी साइंस वाले भी सम्पर्क में आ रहे हैं। जो भी सम्बन्ध-सम्पर्क में आते हैं, परिचय मिल गया है, समझते हैं कार्य अच्छा है, उन्हों को ज्ञान का कणा-दाना भी बुद्धि में स्वीकार हुआ, उसका फल जरूर मिलेगा। ज्ञान का कणा-दाना भी विनाश नहीं होता है, अविनाशी फल है। अभी दिल्ली वालों ने समझा ना - क्या करना है? और माइक तैयार करो। चार-पाँच तैयार किया है, बापदादा के पास लिस्ट पँहुची है लेकिन और तैयार करो। सभी जोन जो आज आये हैं। सेवा का सबूत लेके आये हैं ना।

स्नेही सहयोगी जो आये हैं ना वह उठो, थोडा-सा खडे हो जाओ। बैठे-बैठे तो थक गये होगे अभी थोडा खड़े हो जाओ। अच्छा - बहुत अच्छे- अच्छे आये हैं। आप लोगों को पता है कि आप किसके मैसेन्जर बने हुए हो? गॉडली मैसेन्जर बने हुए हो। गॉड का परिचय देते हो ना! तो गॉडली मैसेन्जर हो। इतनी भी सेवा करते हो उसका फल आपका निश्चित है, कोई टाल नहीं सकता। खुशखबरी यह है कि आप जो गॉडली मैसेन्जर बन औरों को सन्देश देते हो उनको अपनी नई दुनिया की गेटपास तो मिल गई है। केवल गेट पास मिली है, अभी सीट की पास लेनी है। अच्छा है जो भी मिलता है उनको रास्ता तो दिखाते हो ना। तो पुण्य का काम तो कर रहे हो ना! तो पुण्य का खाता कभी खत्म नहीं होता है। तो पुण्य आत्मायें तो बन गये हो लेकिन अभी सिर्फ पुण्य आत्मा नहीं बनना, थोड़े में खुश होने वाले हो क्या! थोडे में खुश होने वाले हो या सब कुछ लेना है? सब कुछ लेना है। तो पुण्य आत्मा तो बने हो, पुण्य का काम किया है ना, कर रहे हो अभी भी करते रहेंगे लेकिन जो बाप चाहता है कि मेरे बच्चे राजा बच्चे बन जायें, स्वराज्य अधिकारी बन जायें। तो बनेंगे ना? बनना है ना! बनना है? कांध तो हिलाओ। बहुत अच्छा किया। आप मेहमान नहीं हो, गेस्ट नहीं हो, होस्ट हो। अपने घर में आये हो। इतना बड़ा घर आपका अच्छा लगा ना! अपना घर अच्छा लगा तो अभी आते रहना। यहाँ रिवाज है, जो आते हैं ना और उसको जाना तो पड़ता है, तो जब जाते हैं ना तो उसको दादी गो सून, कम सून की टोली खिलाती है। आपको भी मिलेगी। तो गो सून कम सून, अपने घर में आते रहना, क्योंकि आना ही है। आना ही है ना! बहुत अच्छा। सभी बच्चे भी आपको देख करके खुश हो रहे हैं क्योंकि सेवा का प्रत्यक्ष सबूत लाये हैं ना, तो सभी खुश हो रहे हैं। जिन्होंने भी आपको लाया है वह खुश हो रहे हैं और दस हजार ब्राह्मण आत्माओं के द्वारा आपको मुबारक हो, मुबारक हो। सब ठीक है? आराम से हैं? भले पधारे। फर्स्ट ग्रूप में आये हो। फर्स्ट ग्रूप का भी तो महत्व होता है ना! अच्छा - बैठ जाओ, थक गये होंगे।

बिजनेस विंग - बिजनेस विंग वाले उठो। बिजनेस विंग वालों ने कौन-सा माइक तैयार किया है? किया है? किया है ना? क्योकि बिजनेस वालों को बिजनेस करने, कराने की आदत तो है ना। तो बाप से बिजनेस कराना भी बिजनेस ग्रूप को सहज है। अच्छा है। बापदादा ने देखा है कि जब से वर्गों की सेवा के लिए वर्ग बने हैं, तो हर एक को सेवा का विस्तार करने का उमंग-उत्साह अच्छा है। अभी और भी बापदादा ने तो कहा ना, हर बात में बापदादा को और तीव्रता चाहिए। पुरुषार्थ में भी तो सेवा में भी। भागदौड तो कर रहे हैं, समाचार मिलता रहता है लेकिन अभी समय की रफ्तार समान थोड़ा और रफ्तार को तेज करो क्योंकि अचानक कुछ भी हो सकता है। तो उल्हना नहीं रह जाए। बापदादा को यही है कि कोई भी आत्मा का उल्हना नहीं रह जाए कि हमें तो मालूम ही नहीं है। बाकी बापदादा को सेवा के समाचार मिलते रहते हैं। अच्छा कर रहे हैं। अपने-अपने एरिया में कोई न कोई प्रोग्राम बनाते ही होंगे ना! चारों ओर धूम मचालो। प्रभु सन्देश, प्रभु सन्देश की धूम मचा दो। अच्छा।

सोशल विंग:- सोशल विंग वालों ने जो भी सोशल वर्कर्स है उन सबके जो भी स्थान बने हुए है, उन्ही को सन्देश दे दिया है? जो भी जिस भी स्टेट से आते हो, उस स्टेट वालों की जिम्मेवारी है कि उस स्टेट में आपके वर्ग का कोई सन्देश से रह नहीं जाए। करते तो हो, बापदादा को मालूम है, चारों ओर प्रोग्राम बने हुए भी होते हैं लेकिन हर स्टेट के जो हर वर्ग वाले हैं उनको कम से कम अपनी स्टेट में ऐसी सेवा करनी चाहिए जो कोई रह नहीं जाये। तो हर स्थान पर कर तो रहे हो, होता रहता है। बापदादा ने कहा, रिपोर्ट पहुँचती है, कर रहे हैं और थोडा तेज करो क्योंकि बापदादा समय की रफ्तार को देख इशारा दे रहा है। बाकी अच्छी सेवा कर रहे हो । मुबारक हो। और भी अच्छे ते अच्छी करते रहेंगे।

ट्रांसपोर्ट विंग:- कितनी आत्माओं को मंज़िल तक पँहुचाया है? क्योंकि ट्रांसपोर्ट की तो जिम्मेवारी है मंज़िल पर पहुँचाना। बापदादा खुश है, सेवा का उमंग अच्छा है। सबको अच्छा चांस मिल जाता है । सेवा की मीटिंग भी हो जाती और फिर मिलन भी हो जाता, डबल कमाई हो जाती है। सभी वर्ग वाले होशियार हैं, डबल चांस वाले हैं। अभी मंसा सेवा को भी और तीव्र करो क्योंकि वाणी की सेवा से सारे विश्व तक पहुँचने में टाइम लगता है लेकिन मंसा सेवा फास्ट सेवा है और पॉवरफुल भी है और मेहनत भी कम है, सिर्फ पॉवरफुल स्टेज बनानी है। तो सदैव मंसा, वाचा, कर्मणा तीनों सेवा इन्हीं कर सकते हो, एक समय में। कर्मणा अर्थात् सम्बन्ध-सम्पर्क में जो आते हैं उन्हों के सम्बन्ध में आना भी कर्मणा है। सम्बन्ध द्वारा भी बहुत सेवा होती है। तो सभी वर्ग वालों को जैसे और प्लैन बनाते हो, सेवा के साधन बनाते हो, ऐसे अपने- अपने वर्ग में मंसा सेवा की भी कोई विधि बनाओ जो विशेष मंसा सेवा भी आत्माओं की हो। अच्छा। मुबारक है, अच्छी सेवा है। बापदादा ने कह दिया है सभी वर्गों की रिजल्ट अच्छी है।

यूथ ग्रुप:- यूथ ग्रूप को मुबारक हो। देखो, थोडे समय में आर्डर मिलने से पहुँच गये हो। इसकी विशेष मुबारक है। अच्छा यहाँ तो आये लेकिन मंसा सेवा की? जो विशेष आत्मायें आनी थी उन्हीं की यहाँ बैठे मंसा सेवा की? कारण अकारण आ नहीं सके लेकिन मंसा सेवा से उन आत्माओं को कुछ पहुँचाया कि सिर्फ मीटिंग की? वह आत्मायें भी याद तो करती होगी, आना था, पहुँचना था। अच्छा है यूथ ग्रूप और बढता जाए । तो भारत की समस्या खत्म हो जाए। यूथ का कर्तव्य है अपने-अपने स्थान के यूथ को ब्राह्मण यूथ बनावे। भ्रष्टाचार से बचायें, श्रेष्ठाचारी बनायें। अभी देखो गवर्मेन्ट तक भी आवाज पहुँचा है लेकिन स्पष्ट रिजल्ट उनकी बुद्धि में क्लीयर हो जाए, तो उन्हों को और नजदीक लाना पडेगा। हर शहर के, स्थान के जो भ्रष्टाचार, झगड़ा करने वाले यूथ ग्रूप है उन्हों की सेवा का कुछ न कुछ तरीका बनाना चाहिए। कोई ऐसा यूथ का परिवर्तन करके दिखाओ। हर एक शहर में यूथ ग्रूप तो होता ही है ना, तो हर एक शहर वाले कोई दो तीन यूथ ग्रूप को परिवर्तन करके दिखावे जो सबके ध्यान पर आ जाये। जैसे जेल में सेवा की थी तो कई परिवर्तन हुए जो जहाँ-तहाँ अनुभव सुनाते थे, ऐसे ही कोई यूथ ग्रूप की जो एसोशियेशन है उसका परिवर्तन करके दिखाओ। और वह यूथ, दूसरे यूथ को अनुभव सुनावे। कर रहे हैं, अच्छा है। लेकिन अभी ऐसा कोई एक्साम्पल निकालो, जो अति झगडालू हो, उसको ठीक करके दिखाओ, नामीग्रामी हो। है ना हिम्मत? ऐसा कोई परिवर्तन करके दिखाओ, जैसे बापदादा कहते हैं ना माइक बनाओ, वैसे आप झगडालू को शान्तिमय बनाके एक्साम्पल दिखाओ, ऐसा तप बनाके यहाँ लाना। देखो कितने यूथ आये है, बहुत है। अच्छे- अच्छे है और सब तरफ के हैं। फरिनर्स भी है। अच्छा है। अभी कोई आवाज फैलाओ। थोड़ा- थोडा सेवा तो कर रहे हो, खाली तो नहीं बैठे हो लेकिन कोई ऐसे जैसे बॉम्ब डालते हैं ना तो आवाज हो जाता है, ऐसे कोई आत्मिक बॉम्ब लगाओ। एटम बॉम्ब नहीं, आत्म बॉम्ब। अच्छा - मुबारक हो बहुत। टाइम पर पहुँचने की मुबारक हो। अच्छा।

डबल विदेशी:- हाथ हिलाओ। सभी ने देखा। डबल विदेशियों को बापदादा सदा डबल मुबारक देते हैं क्योंकि मैजारिटी डबल विदेशियों की विशेषता है कि वह डबल कार्य कर रहे हैं। लौकिक भी कर रहे हैं और सेन्टर भी चला रहे हैं। चाहे सेन्टर चला रहे हैं, चाहे सेन्टर पर सहयोगी है लेकिन मैजारिटी डबल काम कर रहे हैं। वैसे भारत में भी है लेकिन यहाँ मैजारिटी ऐसे हैं। और बापदादा कभी-कभी जानबूझ के सीन देखते हैं, बापदादा के पास नेचरल टी. वी. है, यह टी. वी. नहीं। देखते हैं कैसे भागते हैं, नाश्ता किया, यह किया वह किया, भागा। अच्छा लगता है। ऐसे ही पुरुषार्थ में भी डबल मार्क्स लेना। लेने वाले हैं और परिवर्तन किया भी है और करने का उमंग भी अच्छा है। बापदादा को डबल विदेशियों की नेचरल नेचर एक बहुत अच्छी लगती है कि साफ दिल है। जो भी होगा छिपायेंगे नहीं, स्पष्ट। गिरेंगे तो भी स्पष्ट, चढेंगे तो भी स्पष्ट। तो साफ दिल बापदादा को प्रिय लगती है। अच्छा है। डबल मुबारक हो। आप लोगों को भी देखकर सभी खुश होते हैं। अगर कोई भी टर्न में डबल विदेशी नहीं होते हैं ना तो संगठन में कमी लगती है इसलिए बहुत अच्छा है। हर ग्रूप में आते रहे। शोभा है ना। हर एक बच्चा इस दरबार का श्रृंगार है। तो उडते रहना, चलना नहीं, दौडना नहीं, हाई जम्प नहीं देना, उड़ना। उड़ने वाले। देखो डबल विदेशी स्थूल में भी उड़ने के बिना पहुँच नहीं सकते हैं, उडके ही आना पडता है। तो इस सम्पन्न बनने की मंज़िल पर पहुँचने में भी उड़ती कला में रहना। अच्छा - मुबारक हो। अच्छा -

ऐसे नहीं कि जो किसी भी वर्ग में नहीं उठे उन्हों को मुबारक नहीं है, उन्हों को पदमगुणा मुबारक है। और जो दूर बैठे सुन रहे हैं, देख रहे हैं, कोई सुनने वाले हैं, कोई देखने और सुनने वाले हैं, दोनो को, चारों ओर के बच्चों को बहुत-बहुत-बहुत-बहुत मुबारक और याद क्योंकि हर सीजन में, हर टर्न में सभी पत्र बहुत भेजते हैं। तो बापदादा को वह पत्र पहुँचते हैं, ऐसे ही नहीं जाते हैं, पहुँचते हैं। कोई प्यार के पत्र भेजते, कोई अपने पुरुषार्थ के पत्र भेजते, कोई सेवा के पत्र भेजते, कोई प्रॉमिस के पत्र भेजते हैं, प्रॉमिस भी बहुत अच्छी- अच्छी करते हैं। तो बापदादा के पास सब प्रकार के और सब तरफ से पत्र पहुँच जाते हैं। आपके मुआफिक बापदादा पत्र बैठ पढते तो नहीं हैं लेकिन पहुँच जाते हैं दिल में। पत्रों का पोस्ट आफिस बापदादा की दिल में है, तो वहाँ पहुँच जाते हैं।

अच्छा - बापदादा की आशा अण्डरलाइन की? जिसने की वह हाथ उठाओ, कर ली। अच्छा। बापदादा ने 6 मास का होम वर्क भी दिया है, याद है? टीचर्स को याद है? लेकिन यह दृढ संकल्प की रिजल्ट एक मास की देखेंगे क्योंकि नया वर्ष तो जल्दी शुरू होने वाला है। 6 मास का होम वर्क अपना है, यह एक मास दृढ संकल्प की रिजल्ट देखेंगे। ठीक है ना? टीचर्स एक मास ठीक है? पाण्डव ठीक है?

अच्छा - जो पहली बारी मधुबन में पहुँचे हैं, वह हाथ उठाओ। बहुत अच्छा। देखो, बापदादा को सदा नये बच्चे बहुत प्यारे लगते हैं। लेकिन नये बच्चे जैसे वृक्ष होता है ना, उसमें जो छोटे-छोटे पत्ते निकलते हैं वह चिडियों को बहुत प्यारे लगते हैं, ऐसे नये-नये जो बच्चे हैं तो माया को भी नये बच्चे बहुत प्यारे लगते हैं। इसलिए हर एक जो नये हैं, वह हर रोज अपने नवीनता को चेक करना, आज के दिन अपने में क्या नवीनता लाई? कौन सा विशेष गुण, कौन सी शक्ति अपने में विशेष धारण की? तो चेक करते रहेंगे, स्वयं को परिपक्व करते रहेंगे तो सेफ रहेंगे। अमर रहेंगे। तो अमर रहना, अमर पद पाना ही है। अच्छा।

चारों ओर के बेफिक्र बावशाहों को, सदा रूहानी फूखुर में रहने वाले श्रेष्ठ आत्माओं को, सदा प्राप्त हुए खज़ानों को जमा खाते में बढ़ाने बाले तीव्र पुरुषार्थी आत्माओं को, सदा एक समय में तीनों प्रकार की सेवा करने वाले श्रेष्ठ सेवाधारी बच्चों को बापदादा का यादप्यार, पदम-पदम-पदमगुणा यादप्यार और नमस्ते।

जयपुर में 19 तारीख को मेगा प्रोग्राम है, उसका समाचार बापदादा ने सुना

बापदादा ने समाचार सुना कि राजस्थान की राजधानी में मेगा प्रोग्राम हो रहा है। पूना का भी बहुत अच्छा हुआ। मैंगलोर का भी बहुत अच्छा हुआ। सभी जगह का तो बता दिया बहुत अच्छा हुआ। अभी जो होने वाला है, वह भी अच्छा होगा। अच्छा - जयपुर का मेला और ही राजस्थान में आवाज ज्यादा फैलायेगा क्योंकि जहाँ हेडक्वार्टर है, तो हेडक्वार्टर का आवाज भी हेड होना चाहिए ना। तो अच्छा है, आपस में मीटिंग कर रहे हैं सभी मिल करके करेंगे, सफलता तो गले का हार है ही। तो हिम्मत है और विशेष मधुबन की मदद है। बापदादा की तो मदद है ही। इसलिए सदा सफलता है, इस निशि्चत निश्चय से बढ़ते चलो। ठीक है ना! पूने वालो को भी बहुत-बहुत मुबारक हो और मैंगलोर में तो छोटे-छोटियों ने कमाल कर दिखाई। तो छोटों ने सुभानअल्ला का प्रैक्टिकल सबूत दिखाया। इसलिए सभी को मुबारक हो । मुबारक हो।

अच्छा ओम शान्ति ।



 

31-12-04   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


इस वर्ष के आरम्भ से बेहद का वैराग्य इमर्ज करो, यही मुक्तिधाम के गेट की चाबी है

आज नवयुग रचता बापदादा अपने बच्चों से नव वर्ष मनाने के लिए, परमात्म मिलन मनाने के लिए बच्चों के स्नेह में अपने दूरदेश से साकार वतन में मिलन मनाने आये हैं। दुनिया में तो नववर्ष की मुबारक एक दो को देते हैं। लेकिन बापदादा आप बच्चों को नवयुग और नये वर्ष की, दोनों की मुबारक दे रहे हैं। नया वर्ष तो एक दिन मनाने का है। नवयुग तो आप संगम पर सदा मनाते रहते। आप सभी भी परमात्म प्यार की आकर्षण में खींचते हुए यहाँ पहुँच गये हो। लेकिन सबसे दूरदेश से आने वाला कौन? डबल विदेशी? वह तो फिर भी इस साकार देश में ही है लेकिन बापदादा दूरदेशी कितना दूर से आये हैं? हिसाब निकाल सकते हैं, कितने माइल से आये हैं? तो दूरदेशी बापदादा चारों ओर के बच्चों को चाहे सामने डायमण्ड हाल में बैठे हैं, चाहे मधुबन में बैठे हैं, चाहे ज्ञान सरोवर में बैठे हैं, गैलरी में बैठे हैं, आप सबके साथ जो दूर बैठे देश विदेश में बापदादा से मिलन मना रहे हैं, बापदादा देख रहे हैं सभी कितने प्यार से, दूर से देख भी रहे हैं, सुन भी रहे हैं। तो चारों ओर के बच्चों को नवयुग और नये वर्ष की पदमगुणा मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो। बच्चों को तो नवयुग नयनों के सामने है ना! बस आज संगम पर है, कल अपने नवयुग में राज्य अधिकारी बन राज्य करेंगे। इतना नजदीक अनुभव हो रहा है? आज और कल की ही तो बात है। कल था, कल फिर से होना है। अपने नवयुग की, गोल्डन युग की गोल्डन ड्रेस सामने दिखाई दे रही है? कितनी सुन्दर है! स्पष्ट दिखाई दे रही है ना! आज साधारण ड्रेस में हैं और कल नवयुग की सुन्दर ड्रेस में चमकते हुए दिखाई देंगे। नववर्ष में तो एक दिन के लिए एक दो को गिफ्ट देते हैं। लेकिन नवयुग रचता बापदादा ने आप सबको गोल्डन वर्ल्ड की सौगात दी है, जो अनेक जन्म चलने वाली है। विनाशी सौगात नहीं है। अविनाशी सौगात बाप ने आप बच्चों को दे दी है। याद है ना! भूल तो नहीं गये हो ना! सेकण्ड में आ जा सकते हो। अभी-अभी संगम पर, अभी-अभी अपनी गोल्डन दुनिया में पहुँच जाते हो कि देरी लगती है? अपना राज्य स्मृति में आ जाता है ना!

आज के दिन को विदाई का दिन कहा जाता है और 12 बजे के बाद बधाई का दिन कहा जायेगा। तो विदाई के दिन, वर्ष की विदाई के साथ-साथ आप सबने वर्ष के साथ और किसको विदाई दी? चेक किया सदा के लिए विदाई दी वा थोड़े समय के लिए विदाई दी? बापदादा ने पहले भी कहा है कि समय की रफ्तार तीव्रगति से जा रही है तो सारे वर्ष की रिजल्ट में चेक किया कि क्या मेरे पुरुषार्थ की रफ्तार तीव्र रही? या कब कैसे, कब कैसे रही? दुनिया की हालतों को देखते हुए अब अपने विशेष दो स्वरूपों को इमर्ज करो, वह दो स्वरूप है - एक सर्व प्रति रहमदिल और कल्याणकारी और दूसरा हर आत्मा के प्रति सदा दाता के बच्चे मास्टरदाता। विश्व की आत्मायें बड़ी शक्तिहीन, दुःखी, अशान्त चिल्ला रही है। बाप के आगे, आप पूज्य आत्माओं के आगे पुकार रही है - कुछ घडियों के लिए भी सुख दे दो, शान्ति दे दो। खुशी दे दो, हिम्मत दे दो। बाप तो बच्चों के दुःख, परेशानी को देख नहीं सकते, सुन नहीं सकते। क्या आप सभी पूज्य आत्माओं को रहम नहीं आता ! माँग रहे हैं - दो, दो, दो। तो दाता के बच्चे कुछ अंचली तो दे दो। बाप भी आप बच्चों को साथी बना के, मास्टर दाता बनाके, अपने राइट हैण्ड बनाके यही इशारा देते हैं - इतनी विश्व की आत्मायें सभी को मुक्ति दिलानी है। मुक्तिधाम में जाना है। तो हे दाता के बच्चे अपने श्रेष्ठ संकल्प द्वारा, मंसा शक्तिद्वारा, चाहे वाणी द्वारा, चाहे सम्बन्ध-सम्पर्क द्वारा, चाहे शुभभावना-शुभकामना द्वारा, चाहे वायब्रेशन वायुमण्डल द्वारा किसी भी युक्ति से मुक्ति दिलाओ। चिल्ला रहे हैं मुक्ति दो, बापदादा अपने राइट हैण्डस को कहते हैं रहम करो।

अभी तक हिसाब निकालो। चाहे मेगा प्रोग्राम किया है, चाहे कान्फ्रेन्स की है, चाहे भारत में या विदेश में सेंटर भी खोले हैं लेकिन टोटल विश्व के आत्माओं की संख्या के हिसाब से कितनी परसेन्ट में आत्माओं को मुक्ति का रास्ता बताया है? सिर्फ भारत कल्याणकारी हो या विदेश में जो भी 5 खण्ड हैं, तो जहाँ-जहाँ सेवाकेन्द्र खोले हैं वहाँ के कल्याणकारी हो वा विश्व कल्याणकारी हो? विश्व का कल्याण करने के लिए हर एक बच्चे को बाप का हैण्ड, राइड हैण्ड बनना है । किसको भी कुछ दिया जाता है तो किससे दिया जाता है? हाथों से दिया जाता है ना। तो बापदादा के आप हैण्डस हो ना, हाथ हो ना। तो बापदादा राइट हैण्डस से पूछते हैं, कितनी परसेन्ट का कल्याण किया है? कितनी परसेन्ट का किया है? सुनाओ, हिसाब निकालो। पाण्डव हिसाब करने में होशियार हैं ना? इसीलिए बापदादा कहते हैं अब स्व-पुरुषार्थ और सेवा के भिन्न-भिन्न विधियों द्वारा पुरुषार्थ तीव्र करो। स्व की स्थिति में भी चार बातें विशेष चेक करो - इसको कहेंगे तीव्र पुरुषार्थ।

एक बात - पहले यह चेक करो कि निमित्त भाव है? कोई भी रॉयल रूप का मैं पन तो नहीं है? मेरापन तो नहीं है? साधारण लोगों का मैं और मेरा भी साधारण है, मोटा है लेकिन ब्राह्मण जीवन का मेरा और मैं पन सूक्ष्म और रॉयल है। उसकी भाषा मालूम है क्या है? यह तो होता ही है, यह तो चलता ही है। यह तो होना ही है। चल रहे हैं, देख रहे हैं। तो एक निमित्त भाव, हर बात में निमित्त हैं। चाहे सेवा में, चाहे स्थिति में, चाहे सम्बन्ध-सम्पर्क में, चेहरा और चलन निमित्त भाव का हो। और उसकी दूसरी विशेषता होगी - निर्मान भावना। निमित्त और निर्मान भाव से निर्माण करना। तो तीन बातें सुनी - निमित्त, निर्मान और निर्माण और चौथी बात है - निर्वाण। जब चाहे निर्वाणधाम में पहुँच जायें। निर्वाण स्थिति में स्थित हो जायें क्योंकि स्वयं निर्वाण स्थिति में होंगे तब दूसरों को निर्वाणधाम में पहुँचा सकेंगे। अभी सभी मुक्ति चाहते हैं छुडाओ, छुडाओ चिल्ला रहे हैं। तो यह चार बातें अच्छी परसेन्ट में प्रैक्टिकल जीवन में होना अर्थात् तीव्र पुरुषार्थी। तब बापदादा कहेंगे वाह। वाह! बच्चे वाह! आप भी कहो वाह! बाबा वाह! वाह! ड्रामा वाह! वाह! पुरुषार्थ वाह! लेकिन पता है अभी क्या करते हो? पता है? कभी वाह! कहते हो कभी व्हाई कहते हो। वाह! के बजाए व्हाई, और व्हाई हो जाता है हाय। तो व्हाई नहीं, वाह! आपको भी क्या अच्छा लगता है, वाह। अच्छा लगता है या व्हाई? क्या अच्छा लगता है वाह। कभी प्लाई नहीं करते हो? गलती से भी आ जाता है। डबल फारेनर्स व्हाई-व्हाई कहते हैं? कभी-कभी कह देते हो?

जो डबल फारेनर्स कभी भी व्हाई नहीं कहते वह हाथ उठाओ। बहुत थोडे हैं। अच्छा - भारतवासी जो वाह! वाह! के बजाए क्यो-क्या कहते है वह हाथ उठाओ। क्यो-क्या कहते हो? किसने छुट्टी दी है आपको? सस्कारो ने? पुराने सस्कारो ने आपको व्हाई की छुट्टी दे दी है और बाप कहते है वाह! वाह! कहो। व्हाई-व्हाई नहीं। तो अभी नये वर्ष में क्या करेंगे? वाह। वाह! करेंगे? या कभी-कभी व्हाई कहने की छुट्टी दे दे? व्हाई अच्छा नहीं है। जैसे वाई हो जाती है ना, तो खराब हो जाता है ना। तो व्हाई वाई है, यह नहीं करो। वाह! वाह! कितना अच्छा लगता है। हाँ बोलो, वाह। वाह! वाह!

अच्छा - तो दूरदेश में सुन रहे हैं, देख रहे हैं - भारत में भी विदेश में भी, उन बच्चों से भी पूछते हैं वाह! वाह! करते हो या व्हाई, व्हाई करते हो? अभी विदाई का दिन है ना! आज वर्ष के विदाई का लास्ट डे है। तो सभी संकल्प करो - व्हाई नहीं कहेंगे। सोचेंगे भी नहीं। क्वेशचन मार्क नहीं, आश्चर्य की मात्रा नहीं, बिन्दी। क्वेश्चन मार्क लिखो, कितना टेढा है और बिन्दी कितनी सहज है। बस नयनों में बाप बिन्दू को समा दो। जैसे नयनों में देखने की बिन्दी समाई हुई है ना! ऐसे ही सदा नयनों में बिन्दू बाप को समा लो। समाने आता है? आता है या फिट नहीं होती है? नीचे ऊपर हो जाती है ' तो क्या करेंगे? विदाई किसको देंगे? व्हाई को? कभी भी आमर्य की निशानी भी नहीं आवे, यह कैसे! यह भी होता है क्या! होना तो नहीं चाहिए, क्यो होता है! क्येसन मार्क नहीं, आर्ब्य की मात्रा भी नहीं। बस बाप और मैं। कई बच्चे कहते हैं यह तो चलता ही है ना! बापदादा को बहुत रमणीक बातें रूहरिहान में कहते हैं, सामने तो कह नहीं सकते हैं ना। तो रूहरिहान में सबकुछ कह देते हैं। अच्छा कुछ भी चलता है लेकिन आपको चलना नहीं है, आपको उडना है तो चलने की बातें क्यों देखते हो, उडो और उडाओ। शुभ भावना, शुभ कामना ऐसी शक्तिशाली है जो बीच में सिर्फ व्हाई नहीं आवे, सिवाए शुभ भावना, शुभ कामना के, तो इतनी पावरफुल है जो किसी अशुभ भावना वाले को भी शुभ भावना में बदल सकते हो। सेकण्ड नम्बर - अगर बदल नहीं सकते हो तो भी आपकी शुभ भावना, शुभ कामना अविनाशी है, कभी-कभी वाली नहीं, अविनाशी है तो आपके ऊपर अशुभ भावना का प्रभाव नहीं पड सकता है। क्वेश्चन में चले जाते हो, यह क्यों हो रहा है? यह कब तक चलेगा? कैसे चलेगा? इससे शुभ भावना की शक्ति कम हो जाती है। नहीं तो शुभ भावना, शुभ कामना इस संकल्प शक्ति में बहुत शक्ति है। देखो, आप सभी आये बापदादा के पास। पहला दिन याद करो, बापदादा ने क्या किया? चाहे पतित आये, चाहे पापी आये, चाहे साधारण आये, भिन्न- भिन्न वृत्ति वाले, भिन्न-भिन्न भावना वाले आये, बापदादा ने क्या किया? शुभ भावना रखी ना! मेरे हो, मास्टर सर्वशक्तिवान हो, दिलतख्त नशीन हो, यह शुभ भावना रखी ना, शुभ कामना रखी ना, उससे ही तो बाप के बन गये ना। बाप ने कहा क्या कि हे पापी क्यों आये हो? शुभ भावना रखी, मेरे बच्चे, मास्टर सर्व शक्तिवान बच्चे, जब बाप ने आप सबके ऊपर शुभ भावना रखी, शुभ कामना रखी तो आपके दिल ने क्या कहा? मेरा बाबा। बाप ने क्या कहा? मेरे बच्चे। ऐसे ही अगर शुभ भावना, शुभ कामना रखेगे तो क्या दिखाई देगा? मेरा कल्प पहले वाला मीठा भाई, मेरी सिकीलधी बहन। परिवर्तन हो जायेगा।

तो इस वर्ष में कुछ करके दिखाना। सिर्फ हाथ नहीं उठाना। हाथ उठाना बहुत सहज है। मन का हाथ उठाना क्योंकि बहुत काम रहा हुआ है। बापदादा तो नजर करते हैं, विश्व की आत्माओ के ऊपर तो बहुत तरस पडता है। अब प्रकृति भी तंग हो गई है। प्रकृति खुद तंग हो गई है, तो क्या करें? आत्माओं को तंग कर रही है। और बाप बच्चों को देखके तरस में आ जाते हैं। आप सबको तरस नहीं आता? सिर्फ खबर सुनकर चुप हो जाते हो, बस, इतनी आत्मायें चली गईं। वो आत्मायें सन्देश से तो वंचित रह गई। अभी तो दाता बनो, रहमदिल बनो। यह तब होगा, रहम तब आयेगा जब इस वर्ष के आरम्भ से अपने में बेहद की वैराग्य वृत्ति इमर्ज करो। बेहद की वैराग्य वृत्ति। यह देह की, देहभान की स्मृति, यह भी बेहद के वैराग्य की कमी है। छोटी-छोटी हद की बातें स्थिति को डगमग करती है, कारण? बेहद की वैराग्य वृत्ति कम है, लगाव है। वैराग्य नहीं है लगाव है। जब बिल्कुल बेहद के वैरागी बन जायेंगे, वत्ति में भी वैरागी, दृष्टि में भी बेहद के वैरागी, सम्बन्ध-सम्पर्क में, सेवा में सबमें बेहद के वैरागी... तभी मुक्तिधाम का दरवाजा खुलेगा। अभी तो जो आत्मायें आ रही हैं फिर जन्म लेंगी, फिर दु:खी होगी। अब मुक्तिधाम का गेट खोलने के निमित्त तो आप हो ना? ब्रह्मा बाप के साथी हो ना! तो बेहद की वैराग्य वृत्ति है गेट खोलने की चाबी। अभी चाबी नहीं लगी है, चाबी तैयार ही नहीं की है। ब्रह्मा बाप भी इन्तजार कर रहा है, एडवांस पार्टी भी इन्तजार कर रही है, प्रकृति भी इन्तजार कर रही है, तंग हो गई है बहुत। माया भी अपने दिन गिनती कर रही है । अभी बोलो हे मास्टर सर्वशक्तिवान, बोलो क्या करना है?

इस वर्ष में कोई नवीनता तो करेंगे ना! नया वर्ष कहते हैं तो नवीनता तो करेंगे ना। अभी बेहद के वैराग्य की, मुक्तिधाम जाने की चाबी तैयार करो। आप सभी को भी तो पहले मुक्तिधाम में जाना है ना। ब्रह्मा बाप से वायदा किया है - साथ चलेंगे, साथ आयेंगे, साथ में राज्य करेंगे, साथ में भक्ति करेंगे। तो अभी तैयारी करो, इस वर्ष में करेंगे कि दूसरा वर्ष चाहिए? जो समझते हैं इस वर्ष में अटेंशन प्लीज, बार-बार करेंगे वह हाथ उठाओ। करेंगे? फिर तो एडवांस पार्टी आपको बहुत मुबारक देगी। वह भी थक गये हैं। अच्छा - टीचर्स क्या कहती हैं? पहली लाइन क्या कहती है? पहले तो पहली लाइन के पाण्डव और पहली लाइन की शक्तियाँ जो करेंगे वह हाथ उठाओ। आधा हाथ नहीं, आधा उठायेंगे तो कहेंगे आधा करेंगे। लम्बा हाथ उठाओ। अच्छा। मुबारक हो, मुबारक हो। अच्छा - डबल विदेशी हाथ उठाओ। एक दो में देखो किसने नहीं उठाया है। अच्छा, यह सिन्धी ग्रूप भी हाथ उठा रहा है, कमाल है। आप भी करेंगे? सिन्धी ग्रूप करेंगे? तब तो डबल मुबारक हो। बहुत अच्छा। एक दो को साथ देकर, शुभभावना का इशारा देते, हाथ में हाथ मिलाते करना ही है। अच्छा। (सभा में कोई ने आवाज की) सब बैठ जाओ, नथिंग न्यू।

मधुबन निवासी:-मधुबन वाले हाथ उठाओ, अच्छा ऊपर भी जो सुन रहे हैं वह हाथ उठा रहे हैं। देश-विदेश वाले हाथ उठा रहे हैं। अच्छा है। संगठन में शक्ति है, एक दो को शुभ भावना का इशारा, बोलना नहीं, बोलेंगे तो झगडा हो जायेगा। शुभ भावना का इशारा दो। शुभ भावना का इशारा देना जानते हो ना, शुभ भावना का इशारा दे सकते हो?

अच्छा - बापदादा खुश है जो बापदादा ने डायमण्ड हाल बनवाया है, उसको सफल कर रहे हैं इसीलिए सफलता भव। हर सेकण्ड को, हर संकल्प को, हर बोल को, हर कदम को, हर वस्तु को सफल करो और सफल कराओ। 12 बजे के बाद इस नये वर्ष में बापदादा की तरफ से पहला वरदान अपने को देना - सफलता भव। संकल्प भी असफल नहीं हो क्योकि आपका एक शुभ संकल्प विश्व का कल्याण करने वाला है। इतना अमूल्य है। एक-एक सेकण्ड विश्व कल्याण का आधार है। इसीलिए सफल करो सफलता मूर्त बनो। बस यह चेक करो सेकण्ड जो बीता, संकल्प जो चला, सफल हुआ? तो सभी आज मैजारिटी पट में बैठे है, यह पटरानियाँ हैं, यह कोच रानियाँ है, कोच राने हैं, कुर्सी राने और कुर्सी रानियाँ और आप पटरानी हो। मजा है ना। थक तो नहीं गये हैं? क्योंकि आज लम्बा समय है ना! और तीन बजे से लेके जगह पकड लेते हैं। बापदादा सब देखता रहता है। जो 3 - 4 बजे से हाल में आये हैं वह हाथ उठाओ। टीवी. में देखो कितने हैं? सारे ही हाथ उठा रहे हैं। कोई 3 बजे कोई 4 बजे आये। तीन बजे आने वालों को त्रिलोकीनाथ का वरदान है। भक्ति में बहुत किया है ना, तो साल में एक बारी यहाँ भी कर लेते हैं। अपने राज्य में यह नहीं होगा। लेकिन वहाँ न बाप आयेगा, न आप आयेंगे। बैठेगे कहाँ। अभी मजा ले लो। पट में नहीं बैठे हो, बापदादा तो आपको दिलतख्त पर देख रहे हैं। लेकिन दृश्य बहुत अच्छा लग रहा है। सब बिन्दु होकर बैठे हैं। सर्दी लग रही है? सर्दी भाग गई ना! अच्छा। (आज हाल में 15 - 16 हजार भाई बहने बैठे है)

अभी- अभी एक सेकण्ड में बिन्दु बन बिन्दु बाप को याद करो और जो भी कोई बाते हो उसको बिन्दु लगाओ। लगा सकते हो? बस एक सेकण्ड में मैं बाबा का, बाबा मेरा। '' अच्छा।

सेवा का टर्न- महाराष्ट्र: अच्छा - हर जोन को सेवा का गोल्डन चांस मिलता है। इन 15 - 2० दिनो में सच्चे ब्राह्मणों की सेवा कर अपने पुण्य की कोठियाँ भर देते हैँ क्योंकि अच्छी सेवा करते हैँ तो सबके दिल से क्या निकलता है? बहुत अच्छा, बहुत अच्छा, बहुत अच्छा। तो यह दुआयें पुण्य के खाते में जमा हो जाती है। तो किसी को भी पुण्य का खाता जमा करना सहज है, योगबल से तो होता ही है लेकिन यह कर्म करते भी अगर पुण्य का खाता जमा करना है तो कर्मयोगी स्थिति में यज्ञ सेवा करो तो आपका खाता भरपूर हो ही जायेगा। यह सहज विधि है। महाराष्ट्र तो है, महाराष्ट्र की संख्या भी महा है। सेंटर्स भी ज्यादा हैं, गीता पाठशालायें तो बेशुमार हैं। अच्छा है। बापदादा तो देखते हैं जो भी अपने स्व-इच्छा से अपने को सेवा में जीवन सहित समर्पण करते हैं, उन सभी समर्पित बच्चों को शरीर निर्वाह का साधन अवश्य सहज प्राप्त होता है। खाओ, पिओ प्रभु के गुण गाओ। सेवा करते हैं, भाषण करते हैं, कोर्स कराते हैं, यह क्या है? प्रभु के गुण ही तो गाते हैं। और दाल रोटी देने के लिए तो बापदादा बँधा हुआ है। 36 प्रकार का भोजन नहीं खिलायेगा, वह कभी-कभी खिला देगा। तो बहुत अच्छा - चाहे ट्रस्टी बनके भी सेवा कर रहे हैं, अगर ट्रस्टी है, सच्चे ट्रस्टी, मतलब के ट्रस्टी नहीं, सच्चे ट्रस्टी हैं तो बापदादा कभी भूखा नहीं रख सकता। दाल रोटी जरूर खिलायेगा क्योकि बापदादा भूखा रहता है क्या? जब बापदादा भूखा नहीं रहता, सभी भोग लगाते हैं। आप सभी भोग लगाते हैं ना, चतुराई तो नहीं करते, एक गिट्टी खिलाओ, बाकी भूल जाओ, नहीं। अगर ट्रस्टी हैं तो भी बापदादा बँधा हुआ है। तो महाराष्ट्र जितने महा है उतने वारिस भी महान है? है ना!

अभी इस वर्ष में बापदादा सभी जोन में कितने-कितने वारिस क्वालिटी हैं, वह लिस्ट बनायेंगे, उन वारिसों की सेरीमनी करेंगे। टीचर्स तो जानती हैं ना! देखेंगे, इसमें नम्बरवन कौन सा जोन है? महाराष्ट्र होगा ना! बहुत अच्छा। पक्के वारिस कौन हैं, कितने हैं? और इस वर्ष में यह जो मेगा प्रोग्राम किया है वह तो बहुत अच्छा किया। कितने प्रोग्राम हुए हैं? कहाँ- कहाँ हुए हैं? (15 - 16 हुए हैं) बापदादा ने देखा कोई-कोई प्रोग्राम तो जोन ने मिलकर किया है लेकिन कोई-कोई प्रोग्राम एक सेंटर या आसपास उसके कनेक्शन वालों ने किया है, वह कौन-से हैं? (मैंगलोर, सम्बलपुर, विलासपुर, पूना, मेहसाना) तो कमाल की ना उन्होंने। वह आये हैं 7 कौन आयें है? पूना वाले उठो। पूना की टीचर्स उठो। पूना ने भी कमाल की। ठीक है। सर्तिफिकेट अच्छा लिया। अच्छा - मेहसाना। कर लिया है? मुबारक हो। बिलासपुर के भाई आये हैं, उनको भी मुबारक हो। सम्भलपुर वाला कोई है? थोड़े- थोडे आये हैं, उसको भी मुबारक है, हिम्मत रखकर किया और सफलता पाई। तो सफलता की मुबारक हो। अच्छा। यह तो हुआ, अभी बापदादा क्या चाहते हैं? सभी वर्गों की सेवा तो हुई लेकिन अभी बापदादा चाहते हैं कि हर वर्ग ने जो भी आदि से अन्त तक सेवा की है, जैसे बापदादा ने माइक बुलाये, थे तो नम्बरवार माइक, सभी पावरफुल नहीं थे, थोडे मीडियम थे। लेकिन अभी बापदादा यह चाहते हैं कि इतना समय जो वर्ग की सेवा की, उसमें आई पी या वीआईपी हर जोन से कितने निकले हैं जो कहे कि नॉलेज को मैं मानता हूँ। सिर्फ यह महिमा नहीं करे - यह कार्य बहुत अच्छा है और कोई कर नहीं सकता, यह नहीं कहे लेकिन नॉलेज को मानता हूँ। ऐसे नॉलेजफुल ग्रूप बापदादा देखने चाहते है। क्लीयर हुआ। तो इस वर्ष में लास्ट टर्न आयेगा ना उसमें हर वर्ग वाले जो ऐसे आई .पी. हों, वी. आई पी. का तो भाग्य थोडा पीछे हैं लेकिन आई .पी. जो नॉलेज को मानता हो, ऐसा ग्रूप बापदादा के सामने लाओ। वह सेवा करे। उनको सेवा के निमित्त बनायेंगे। ठीक है! अभी अगले वर्ष का यह होम वर्क है वर्ग वालों को क्योंकि कोई न कोई वर्ग तो आता ही है।

कल्चरल विंग:- अच्छा - कल्चरल वाले जब कल्चरल दिखाते हो तो उसमें और क्या सिद्ध करते हो? जो भी कल्चरल करते हो उसमें आपके चलन चेहरे और कर्म से क्या कैरेक्टर दिखाई देता है, यह श्रेष्ठ कैरेक्टर वाले हैं, यह दिखाई देता है? हाँ करो या ना? हाँ तो हाथ हिलाओ। अच्छा दोनो लक्ष्य रखते हो। क्योंकि कल्चरल प्रोग्राम तो सभी करते हैं लेकिन आप जो कल्चरल दिखाते हो या प्रोग्राम करते हो उसमें सिर्फ कल्चरल नहीं हो लेकिन नैतिक मूल्य भी समाये हुए हों, कैरेक्टर हो। उससे क्या होगा' देखने वालों को सहज ही आकर्षण होगी कि हम भी कैरेक्टर धारण करें। तो इस विधि से, क्योंकि कई ज्ञान सुनने नहीं चाहते हैं, सीधा ज्ञान नहीं सुनेंगे लेकिन आपके कल्चरल से वह कैरेक्टर सीख जाये। ऐसा कर भी रहे हो और भी लक्ष्य रखो कि कम से कम देखने वाले जो हैं उनको नैतिक वैल्यू का इशारा तो मिले, आकर्षण तो हो, हमको करना है। बाकी अच्छा कर रहे हैं। जो भी वर्ग कर रहे हैं बापदादा हर वर्ग के पुरुषार्थ और रिजल्ट को देख खुश हैं। और इस वर्गीकरण की सेवा के बाद कई भाई-बहिनों को चांस मिला है, सेवा के क्षेत्र में आगे आने में और बिजी रहते हैं। इसलिए बापदादा को वर्गों की सेवा अच्छी लगती है। सभी कर रहे हैं। कभी कोई वर्ग आता है, कभी कोई वर्ग आता है तो सभी ठीक है? बहुत ठीक या ठीक है? बहुत ठीक? तीव्र पुरुषार्थी या पुरुषार्थी क्या है? अच्छा चल रहे हैं या उड रहे हैं? क्या कहेंगे? अभी उड़ना है और उड़ाना है। चलने का टाइम पूरा हो गया। जैसे बैलगाड़ी का सीजन पूरा हो गया, कारें आ गई है। पहले तो बैलगाड़ियों में ही जाते थे। तो अभी चलने का समय पूरा हुआ, अभी उडना है। अच्छा।

ज्यूरिस्ट विंग:- अच्छा - अच्छे-अच्छे आये हैं, मुबारक हो। जज और वकील तो आवाज बुलन्द करने वाले होते हैं ना, तो अभी ऐसा कोई प्रैक्टिकल का प्लैन बनाओ जो आप भी स्पिरिचुअलिटी का आवाज बुलन्द दिखाओ। जो सबकी नजर में आये कि साधारण वकील, साधारण जज और स्पिरिचुअल जज या वकील में कितना अन्तर है। हो जायेगा, बापदादा ने सुना - गीता के भगवान का भी सोच रहे हैं। सोचो। इसमे कोई को निमित्त बनाना पड़ेगा। कोई जज हो, कोई धर्मात्मा हो, दोनो ग्रूप में से दो चार को तैयार करो, सेवा में, मैदान में आना पड़ेगा। आपस में मीटिंग करो, सभी जज और रिलीजस वाले मिलकर मीटिंग करके कोई प्लैन सोचो। दोनों ही मिलकर राय करो। फिर कुछ कर सकेंगे। हो जायेगा, होना तो है ही। मुबारक हो। जो भी आये हैं, उन्हों को भी विशेष मुबारक हो।

डबल विदेशी तो शान्तिवन वा मधुबन का विशेष श्रृंगार हैं। बापदादा देखते हैं एक-एक बच्चा विशेष डबल हीरो है। रत्न भी है और हीरो पार्ट बजाने वाले भी हैं। तो हर एक विदेशी डबल हीरो है। देखो कितने देशों में और वहाँ से ही तैयार होके वहाँ ही सेवा कर रहे हैं। कितने देशों से आये हुए हैं? (45 देशों से) अच्छा, 45 देश वाले हाथ उठाओ। जो भिन्न- भिन्न देश से आये हैं, उनमें से एक-एक हाथ उठाओ। छोटा बच्चा भी हाथ हिला रहा है। मुबारक हो। अच्छा। 45 देश वालों को पदमापदम मुबारक हो। (छोटेबच्चों की रिट्रीट चल रही है) सभी देखो यह बच्चों का ग्रूप कितना अच्छा है। कितने देश के बच्चे हैं? (15 देश के 28 बच्चे हैं) गीत सुनाओ। (बच्चों ने गीत गाया मैं बाबा का, बाबा मेरा) अच्छा - सभी बच्चे अमृतवेला करते हो? जो बच्चे अमृतवेला करते हैं वह हाथ उठाओ। अच्छा जो कभी-कभी करते हैं वह हाथ उठाओ। कभी-कभी वाले ज्यादा हैं। अच्छा लडाई-झगड़ा करते हो? जो लड़ाई नहीं करता है वह हाथ उठाओ। तो अभी यहाँ से जाने के बाद लडाई नहीं करना क्योंकि बह्माकुमार हो ना। तो ब्रह्माकुमार, बाबा मेरा, मै बाबा का कहा तो लडाई नहीं करना है। नहीं तो बाबा मेरा नहीं होगा। अभी लडाई करेंगे?(नहीं) अभी परिवर्तन करेंगे। अभी टीचर्स सब रिपोर्ट देना तो लडाई-झगडा किया है या नहीं किया? बाकी मुबारक हो। अच्छा है, फिर भी पुरुषार्थ अच्छा किया है इसलिए पदमगुणा मुबारक हो। (विदेश का यूथ ग्रूप भी आया है) (मेरा बाबा का साइन बोर्ड दिखा रहे हैं) बहुत अच्छा, ताली बजाओ। बापदादा ने सुना तो रिजल्ट में यूथ ग्रूप ने पुरुषार्थ में बहुत गुह्यता लाई है। तो यह पुरुषार्थ में जो सूक्षम में गये, तो सदा पुरुषार्थ में आगे से आगे बढते रहना, पीछे नहीं होना', आगे बढ़ते रहना और उडते रहना। मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो। अच्छा -

(दादी जानकी ने बापदादा से पूछा- विश्व की करोड़ों आत्माओं को इस साल में मेसेज कैसे मिले, मेरा बाबा है यह अनुभव कैसे हो: उसके लिए क्या प्लान बनें?)

उसके लिए कोई ग्रूप बनाओ, ऐसा कोई छोटा ग्रुप बनाओ जो इस बात पर मनन करे क्योंकि विधियाँ तो सुनाई, हर एक को चाहे मंसा संकल्प द्वारा, चाहे वृत्ति वायब्रेशन द्वारा, चाहे वाणी द्वारा, चाहे सम्बन्ध सम्पर्क द्वारा हर एक को लक्ष्य रखना है कि सारे दिन में कितनी आत्माओं की सेवा की? चाहे मंसा की, चाहे वृत्ति वायब्रेशन से की, वाणी द्रारा की, प्रोग्राम द्वारा की या सम्बन्ध सम्पर्क से की या चलन चेहरे से की, हर एक को नोट करना चाहिए कि मेरे सेवा की रिजल्ट सारे दिन की क्या रही? और एक ग्रूप बनाओ जो सोचे, सेवा के बिना रह नहीं सके। उसको देख कर सब फॉलो करेंगे। लेकिन स्व स्थिति और सेवा की स्थिति दोनों का बैलेन्स हो। फिर सेवा बहुत बढ़ेगी और दूसरों को भी उमंग आयेगा कि बैलेन्स है। सिर्फ सेवा करते हैं तो कहते है, यह तो बोलने वाले है ही। लेकिन ऐसा छोटा ग्रुप बनाओ जो यह पान का बीड़ा उठावे कि हम स्व- स्थिति और सेवा की विधियों से सेवा करेंगे। एक एक्साम्पल हो ग्रुप, फिर वह जैसे कहते हैं ना एक दीपक से दीवाली हो जाती है, वैसे एक ग्रुप से वृद्धि होती जायेगी। अच्छा।

सभी को वर्ष का होम वर्क तो याद है ना, जो बापदादा ने कहा कि इस वर्ष में क्या विदाई देनी है और बधाई मनानी है, वह याद है ना? अभी बापदादा भी देखेंगे एक मास की रिजल्ट में सिर्फ यहाँ यह लिखे कि इतनी परसेंटेज सेवा की, 40 परसेन्ट, 80 परसेन्ट, 20 परसेन्ट, 10 परसेन्ट.. सिर्फ परसेन्टेज लिखे लम्बा-चौडा पत्र नहीं लिखे, फिर बापदादा फर्स्ट नम्बर वालों को इनाम देंगे। लेकिन बैलेन्स स्व और सेवा का बैलेन्स, सन्तुष्टता प्रसनता का बैलेन्स। ठीक है। सब रिजल्ट लिखेंगे, सिर्फ परसेंटेज लिखना मीठी दादी, योगयुक्त दादी, लम्बा नहीं लिखना, बस परसेनटेज लिखना क्योंकि पढने का टाइम नहीं होता है। फिर सारे ब्राह्यण परिवार में जो एक मास की रिजल्ट भेजेंगे और नम्बरवन आयेंगे उसको बापदादा इनाम देंगे। ठीक है? पसन्द है? समझ में आया? माताओं को समझ में आया? टीचर्स को समझ में आया? पीछे वालों को समझ में आया? हाथ उठाओ पीछे वाले। अच्छा -

अभी चारों ओर के सर्व नये युग के मालिक बच्चों को, चारों ओर के नये वर्ष मनाने के उमंग-उत्साह वाले बच्चों को सदा उडते रहना और उडाते रहना, ऐसे उडती कला वाले बच्चों को, सदा तीव्र पुकपार्थ द्वारा विजय माला के मणके बनने वाले विजयी रत्नों को बापदादा का नये वर्ष और नये युग की दुआओं के साथ-साथ पदम गुणा थालियाँ भर-भर के मुबारक हो, मुबारक हो। एक हाथ की ताली बजाओ। अच्छा।

दादीजी से:- तबियत कैसी भी है लेकिन सम्भाल रही हो बहुत अच्छा। अच्छा सम्भाल रही हो। आपकी दादियों की युनिटी और चेहरा और चलन उसको देख करके सबकी पालना हो रही है। बाप का तो पहले दिन से हाथ और साथ है ही है। अच्छा- (जानकी दादी से) विदेश ठीक है ? राजस्थान की जो टीचर्स आई हैं वह उठे।

राजस्थान की तीन बहनें:- त्रिमूर्ति आई हैं। सहज हो गया ना! सहज हुआ, हिम्मत बढी? अभी तो नहीं कहेंगी बड़ा मुश्किल है। अभी 10 गुणा करके दिखाना। राजस्थान को परिस्तान बनाना ही है। इसीलिए हिम्मत रखकर बढ़ते चलो। अभी आवाज फैलाना। अभी आवाज फैलाया है, अभी जिन वी.आई.पी. की एड्रेसेज हैं उनको स्नेह मिलन में बुलाओ, अभी लोहा गर्म है उसमें जो भी बनाने चाहे बन जायेगा। तो हर एक स्थान जो भी जयपुर में नजदीक है, उसमें बुलाओ। और वैसे भी राजस्थान में बीच-बीच में स्नेह मिलन रखो, बह्माभोजन खिलाओ। ब्राह्मणों का तो रखना ही है लेकिन वी.आई.पीज का रखो। आईपीज को खड़ा करो तो राजस्थान आगे जायेगा। बाकी अच्छा कर लिया, मुबारक हो, सहज हो गया। मुबारक हो। (बाबा को मुबारक हो) दादियों को मुबारक दो। अच्छा किया। ऐसे ही मिलकर करना, इस साल में दो तीन प्रोग्राम करो। कभी यह करे, कभी यह करे। अच्छा।

निर्मलशांता दादी से:- आपकी शक्ल सुहानी (सुन्दर) लग रही है। बीमार नहीं लग रही है। (बीमार थोडे ही हूँ) अच्छा है। बहुत अच्छा। (रुक्मणि बहन से) - यह भी बहुत अच्छी मेहनत करती है। थक तो नहीं गई। बहुत अच्छी दिल से सेवा की, उसकी मुबारक है, मुबारक है।

रात्रि 12 बजे के पश्चात् बापदादा ने सभी बच्चे को नये वर्ष 2005 की बधाइयाँ दी

चारों ओर के सभी सिकीलधे, लाडले, तख्तनशीन, स्वराज्य अधिकारी बच्चों को नये वर्ष और नव युग की बधाइयाँ हो, बधाइयाँ हों। सदा ही इस वर्ष सबको बधाइयाँ देनी हैं और बधाइयाँ लेनी हैं - इसी लक्ष्य से लक्षण धारण कर उड़ते रहना, उड़ाते रहना। मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो ।



 

18-01-05   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


सेकण्ड में देहभान से मुक्त हो जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो और मास्टर मुक्ति-जीवनमुक्ति दाता बनो

आज बापदादा चारों ओर के लक्की और लवली बच्चों को देख रहे हैं। हर एक बच्चा स्नेह में समाया हुआ है। यह परमात्म स्नेह अलौकिक स्नेह है। इस स्नेह ने ही बच्चों को बाप का बनाया है। स्नेह ने ही सहज विजयी बनाया है। आज अमृतवेले से चारों ओर के हर बच्चे ने अपने स्नेह की माला बाप को पहनाई क्योंकि हर बच्चा जानता है कि यह परमात्म स्नेह क्या से क्या बना देता है। स्नेह की अनुभूति अनेक परमात्म खज़ाने के मालिक बनाने वाली है और सर्व परमात्म खज़ानों की गोल्डन चाबी बाप ने सर्व बच्चों को दी है। जानते हो ना! वह गोल्डन चाबी क्या है? वह गोल्डन चाबी है - '' मेंरा बाबा। मेंरा बाबा कहा और सर्व खज़ानों के अधिकारी बन गये। सर्व प्राप्तियों के अधिकार से सम्पन्न बन गये, सर्व शक्तियों से समर्थ बन गये, मास्टर सर्वशक्तिवान आत्मायें बन गये। ऐसे सम्पन्न आत्माओं के दिल से क्या गीत निकलता? अप्राप्त नहीं कोई वस्तु हम ब्राह्मणों के खज़ाने में।

आज के दिन को स्मृति दिवस कहते हो, आज सभी बच्चों को विशेष आदि देव ब्रह्मा बाप ज्यादा स्मृति में आ रहा है। ब्रह्मा बाप आप ब्राह्मण बच्चों को देख हर्षित होते हैं, क्यों? हर ब्राह्मण बच्चा कोटों में काई भाग्यवान बच्चा है। अपने भाग्य को जानते हो ना! बापदादा हर बच्चे के मस्तक में चमकता हुआ भाग्य का सितारा देख हर्षित होते हैं। आज का स्मृति दिवस विशेष बापदादा ने विश्व सेवा की जिम्मेवारी का ताज बच्चों को अर्पण किया। तो यह स्मृति दिवस आप बच्चों के राज्य तिलक का दिवस है। बच्चों के विशेष साकार स्वरूप में विल पावर्स विल करने का दिन है। सन शोज फादर इस कहावत को साकार करने का दिवस है। बापदादा बच्चों के निमित्त बन निःस्वार्थ विश्व सेवा को देख खुश होते हैं। बापदादा करावनहार हो, करनहार बच्चों के हर कदम को देख खुश होते है क्योंकि सेवा की सफलता का विशेष आधार ही है - करावनहार बाप मुझ करनहार आत्मा द्वारा करा रहा है। मैं आत्मा निमित्त हूँ क्योंकि निमित्त भाव से निर्मान स्थिति स्वत: हो जाती है। मैं पन जो देहभान में लाता है वह स्वत: ही निर्मान भाव से समाप्त हो जाता है। इस ब्राह्मण जीवन में सबसे ज्यादा विघ्न रूप बनता है तो देहभान का मैं-पन। करावनहार करा रहा है, मैं निमित्त करनहार बन कर रहा हूँ, तो सहज देह-अभिमान मुक्त बन जाते हैं और जीवनमुक्ति का मज़ा अनुभव करते हैं। भविष्य में जीवनमुक्ति तो प्राप्त होनी है लेकिन अब संगमयुग पर जीवनमुक्ति का अलौकिक आनंद और ही अलौकिक है। जैसे ब्रह्मा बाप को देखा - कर्म करते कर्म के बंधन से न्यारे। जीवन में होते कमल पुष्प समान न्यारे और प्यारे। इतने बडे परिवार की जिम्मेवारी, जीवन की जिम्मेवारी, योगी बनाने की जिम्मेवारी, फरिश्ता सो देवता बनाने की जिम्मेवारी होते हुए भी बेफिकर बादशाह। इसी को ही जीवनमुक्त स्थिति कहा जाता है। इसीलिए भक्ति मार्ग में भी ब्रह्मा का आसन कमल पुष्प दिखाते हैं। कमल आसनधारी दिखाते हैं। तो आप सभी बच्चों को भी संगम पर ही जीवनमुक्ति का अनुभव करना ही है। बापदादा से मुक्ति जीवनमुक्ति का वर्सा इस समय ही प्राप्त होता है। इस समय ही मास्टर मुक्ति जीवनमुक्ति दाता बनना है। बने हैं और बनना है। मुक्ति जीवनमुक्ति के मास्टर दाता बनने की विधि है - सेकण्ड में देह-भान मुक्त बन जायें। इस अभ्यास की अभी आवश्यकता है। मन के ऊपर ऐसी कंट्रोलिंग पावर हो, जैसे यह स्थूल कर्मेन्द्रियाँ, हाथ है, पाँव है, उसको जब चाहो जैसे चाहो वैसे कर सकते हो, टाइम लगता है क्या! अभी सोचो हाथ को ऊपर करना है, टाइम लगेगा? कर सकते हो ना। अभी बापदादा कहे हाथ ऊपर करो, तो कर लेंगे ना। करो नहीं, कर सकते हो। ऐसे मन के ऊपर इतना कंट्रोल हो, जहाँ एकाग्र करने चाहो, वहाँ एकाग्र हो जाए। मन चाहे हाथ, पाँव से सूक्ष्म है लेकिन है तो आपका ना। मेरा मन कहते हो ना, तेरा मन तो नहीं कहते हो ना! तो जैसे स्थूल कर्मेन्द्रियाँ कंट्रोल में रहती हैं, ऐसे ही मन-बुद्धि-संस्कार कंट्रोल में हो तब कहेंगे नम्बरवन विजयी। साइन्स वाले तो राकेट द्वारा वा अपने साधनों द्वारा इसी लोक तक पहुँचते हैं, ज्यादा से ज्यादा ग्रह तक पहुँचते हैं। लेकिन आप ब्राह्मण आत्मायें तीनो लोक तक पहुँच सकते हो 1 सेकण्ड में सूक्ष्म लोक, निराकारी लोक और स्थूल में मधुबन तक तो पहुँच सकते हो ना। अगर मन को आर्डर करो मधुबन में पहुँचना है तो सेकंड में पहुँच सकते हो? तन से नहीं, मन से। आर्डर करो सूक्ष्मवतन जाना है, निराकारी वतन में जाना है तो तीनो लोकों में जब चाहे मन को पहुँचा सकते हो? है प्रैक्टिस? अभी इस अभ्यास की आवश्यकता ज्यादा है। बापदादा ने देखा है अभ्यास तो करते हो लेकिन जब चाहे, जितना समय चाहे एकाग्र हो जाए, अचल हो जाए, हलचल में नहीं आये, इसके ऊपर और अटेंशन। जो गायन है मन जीत जगत जीत, अभी कभी-कभी मन धोखा भी दे देता है।

तो बापदादा आज के समर्थ दिवस पर यही समर्थी विशेष अटेशंन में दे रहे हैं। हे स्वराज्य अधिकारी बच्चे, अभी इस विशेष अभ्यास को चलते-फिरते चेक करो क्योंकि समय प्रमाण अभी अचानक के खेल बहुत देखेंगे। इसके लिए एकाग्रता की शक्ति आवश्यक है। एकाग्रता की शक्ति से दृढता की शक्ति भी सहज आ जाती है और दृढता सफलता स्वत: प्राप्त कराती है। तो विशेष समर्थ दिवस पर इस समर्थी का अभ्यास विशेष अटेंशन में रखो। इसीलिए भक्ति मार्ग में भी कहते हैं मन के हारे हार, मन के जीते जीत। तो जब मेरा मन कहते हो, तो मेरे के मालिक बन शक्तियों की लगाम से विजय प्राप्त करो। इस नये वर्ष में इस होमवर्क पर विशेष अटेंशन। इसी को ही कहा जाता है योगी तो हो लेकिन अभी प्रयोगी बनो।

बाकी आज के दिन की स्नेह की रूहरिहान, स्नेह के उल्हने और समान बनने के उमंग-उत्साह तीनों प्रकार की रूहरिहान बापदादा के पास पहुंची है। चारों ओर के बच्चों की स्नेह भरी यादें, स्नेह भरा प्यार बापदादा के पास पहुँचा। पत्र भी पहुँचे तो रूहरिहान भी पहुँची, सन्देश भी पहुँचे, बापदादा ने बच्चों का स्नेह स्वीकार किया। दिल से रिटर्न में यादप्यार भी दिया। दिल की दुआयें भी दी। एक-एक का नाम तो नहीं ले सकते हैं ना। बहुत हैं। लेकिन कोने कोने, गाँव गाँव, शहर शहर सब तरफ के बच्चों का, बाँधेलियों का, विलाप करने वालों का सबका यादप्यार पहुँचा, अब बापदादा यही कहते स्नेह के रिटर्न में अब अपने आपको टर्न करो, परिवर्तन करो। अब स्टेज पर अपना सम्पन्न स्वरूप प्रत्यक्ष करो। आपकी सम्पन्नता से दुःख और अशान्ति की समाप्ति होनी है। अभी अपने भाई-बहिनों को ज्यादा दुःख देखने नहीं दो। इस दुःख, अशान्ति से मुक्ति दिलाओ। बहुत भयभीत हैं। क्या करें, क्या होगा., इस अंधकार में भटक रहे हैं। अब आत्माओं को रोशनी का रास्ता दिखाओ। उमंग आता है? रहम आता है? अभी बेहद को देखो। बेहद में दृष्टि डालो। अच्छा। होमवर्क तो याद रहेगा ना! भूल नहीं जाना। प्राइज देंगे। जो एक मास में मन को बिल्कुल कंट्रोलिंग पावर से पूरा मास जहाँ चाहे, जब चाहे वहाँ एकाग्र कर सके, इस चार्ट की रिजल्ट में इनाम देंगे। ठीक है? कौन इनाम लेंगे? पाण्डव, पाण्डव पहले। मुबारक हो पाण्डवों को और शक्तियाँ? ए वन। पाण्डव नम्बरवन तो शक्तियां ए वन। शक्तियाँ ए वन नहीं होगी तो पाण्डव ए वन। अभी थोड़ी रफ्तार तीव्र करो। आराम वाली नहीं। तीव गति से ही आत्माओं का दुख दर्द समाप्त होगा। रहम की छत्रछाया आत्माओं के ऊपर डालो। अच्छा।

सेवा का टर्न - तामिलनाडु, ईस्टर्न और नेपाल:- जिनका टर्न है वह सब उठो। बहुत बडा ग्रुप है (5000 हैं) 5 हजार सेवा का गोल्डन चांस लेने वाले। अच्छी चतुराई की है। 15 दिन सेवा करेंगे और 21 जन्म पुण्य का खाता जमा करेंगे। होशियार हो गये ना! अच्छा है। ब्रह्मा बाप के प्रत्यक्षता की भूमि तो कलकत्ता ही है ना! तो कलकत्ता वाले हाथ उठाओ। अच्छा - कलकत्ता वालों की विशेष जिम्मेवारी है, बतायें। अच्छा ब्रह्मा बाप के प्रत्यक्ष होने की भूमि कलकत्ता है, तो बापदादा के प्रत्यक्ष होने की भूमि कौन सी होगी? कलकत्ता होगी? क्या करेंगे? बडा प्रोग्राम तो कर लिया। अभी क्या करेंगे? कोई कमाल करके दिखाओ। जहाँ से आदि हुई, वहाँ समाप्ति भी हो। सभी कलकत्ता की भूमि को प्रणाम करें, वाह! कलकत्ता निवासी वाह! ऐसा कोई कमाल का प्रोग्राम बनाओ। नया कुछ बनाओ। मेगा प्रोग्राम अभी बहुत हो गये। अभी कोई नया प्रोग्राम बनाओ। अच्छा है, बापदादा बच्चों को पुण्य का खाता जमा करने की विधि देख करके खुश होते हैं। यह भी गोल्डन चास है। अच्छा है। नेपाल और तामिलनाडु भी है, देखो कलकत्ता में जब प्रवेशता हुई तो नेपाल का कनेक्शन तो पहले ही था। इसलिए नेपाल को भी कमाल करनी पडेगी। नेपाल वाले उठो। नेपाल वालों को राज्य अधिकारी, राजवंशी आत्माओं का कल्याण ज्यादा करना है। कोई पुराने राज वंशावली से मधुबन तक आये हैं? अभी उन्हों को और ज्यादा नजदीक लाओ। कनेक्शन तो अच्छा है लेकिन अभी रिलेशन में लाओ। अच्छा है। नेपाल भी सेवा तो अच्छी कर रहे हैं। अच्छा। नेपाल वालों को मुबारक है और स बढ़ायेगे। राज वंशावली को मधुबन तक लायेगे। अच्छा। तामिलनाडु वाले उठो - बहुत पीछे बैठे है। हाथ हिलाओ। तामिलनाडु क्या करेगा? सेवा का विस्तार तो अच्छा किया है। रोजी बच्ची को याद तो करते हैं ना! फाउण्डेशन अच्छा डाला है। अभी उसको आप सभी निमित्त बन और बढ़ा रहे हैं। बढ़ा रहे हो ना! क्या नहीं कर सकते हो। जो चाहो शुभ संकल्प करो, सब कर सकते हो। हिम्मत आपकी और मदद बाप की। हिम्मत वाले तो हैं। हिम्मत अच्छी है, मदद भी बाप की है और हिम्मत करेंगे तो और मदद मिलती रहेगी। बाकी रोजी बच्ची के बाद अच्छा सम्भाल लिया और आगे भी आपस में मिलकर रोजी बच्ची को रिटर्न देंगे। अच्छा फाउण्डेशन डाला है। सब खुश हैं? जो सदा खुश हैं, वह हाथ उठाओ। खुश नहीं, सदा खुश? अच्छा है। खुश रहना और खुशी बाँटना। अच्छा। आसाम है, उड़ीसा है, बिहार भी है, बंगलादेश भी है, तो इतने सब इकट्ठे हो। उड़ीसा वाले भी अच्छी सेवा कर रहे हैं, बिहार वाले भी कर रहे हैं तो इस जोन को नम्बरवन जाना है। कितने हैण्ड्स होंगे। 6-7 स्थान के हैण्ड्स, तो कितने हैण्ड्स हो गये। तो बापदादा राइट हैण्ड्स को देख करके खुश हैं। जितना बड़ा जोन है, इतनी बडी कमाल करके दिखाना। आप तो 6-7 जगह पर आवाज फैला दो तो आवाज आपेही फैल जायेगा। बंगाल से भी आवाज हो, उड़ीसा से भी आवाज हो, नेपाल से भी आवाज हो, आसाम से भी आवाज हो, तो सब कोने से आवाज आये, तो कितना बडा आवाज हो जायेगा। कमाल करो कुछ। सबसे बड़े ते बड़ा जोन, इसमें इतने स्टेट इकट्ठे हैं। महाराष्ट्र, गुजरात में भी हैं, तीनों ही स्थान बड़े हैं, अभी कमाल करके दिखाओ।

एज्यूकेशन विंग:- एज्यूकेशन वालों ने नये प्लैन कोई बनाये हैं? नया कुछ बनाया है? अच्छा है। एज्यूकेशन तो विशेष है। एज्युकेशन में अगर आपने कोई भी स्थान में कोई भी एक क्लास का क्लास परिवर्तन करके दिखाया तो गवर्मेंट को कितनी खुशी होगी। जैसे गाँव वाले कोई गाँव को अपनाते हैं ना, वैसे आप किसी भी युनिवर्सिटी में या कालेज में, स्कूल में क्लास, पूरे क्लास को चेंज करके दिखाओ, मेजारिटी। चलो कुछ थोडे रह जाए, वह बात दूसरी है लेकिन कोई क्लास प्रैक्टिकल में परिवर्तन करके दिखाओ तो गवर्मेंट तक आवाज जायेगा। बहुत अच्छा किया है, मुबारक हो। (प्लैन सुनाया)

बहुत अच्छा इनएडवांस मुबारक। अच्छा है देखो (साउथ गुजरात के वाइस चांसलर से) यह एक निमित्त बना, अनेक आत्माओं के प्रति तो आपको कितनी दुआयें मिलेगी। जो स्टूडेंट परिवर्तन होंगे उसकी दुआयें आपको शेयर में मिलेंगी। तो आप शेयर होल्डर हो गये। परमात्मा के शेयर होल्डर, वह शेयर नहीं, नीचे ऊपर होने वाले नहीं। अच्छा निमित्त बना है। अभी कमाल करके दिखाओ। कोई क्लास का क्लास मैजारिटी परिवर्तन करके दिखाओ। अच्छा है, आपस में राय करते आगे बढते चलो। जो भी कोई सैलवेशन चाहिए, आपस में मीटिंग करके कर लो। होगा, करना ही है, बढ़ना ही है। अच्छा।

डबल विदेशी:- बापदादा कहते हैं डबल विदेशी अर्थात् डबल पुरुषार्थ में आगे बढने वाले। जैसे डबल विदेशी टाइटल है ना, निशानी है ना आपकी। ऐसे ही डबल विदेशी नम्बरवन लेने में भी डबल रफ्तार से आगे बढ़ने वाले। अच्छा है, हर ग्रूप में बापदादा डबल विदेशियों को देख करके खुश होते हैं क्योंकि भारतवासी आप सबको देख करके खुश होते हैं। बापदादा भी विश्व कल्याणकारी टाइटल को देख करके खुश होते हैं। अभी डबल विदेशी क्या प्लैन बना रहे हो? बापदादा को खुशी हुई, अफ्रीका वाले तीव पुरुषार्थ कर रहे हैं। तो आप सभी भी आस-पास जो आपके भाई बहन रह गये हैं, उन्हों को सन्देश देने का उमंग-उत्साह रखो। उल्हना नहीं रह जाए। वृद्धि हो रही है और होती भी रहेगी लेकिन अभी उल्हना पूरा करना है। यह विशेषता तो डबल विदेशियों की सुनाते ही है कि भोले बाप को राजी करने का जो साधन है - सच्ची दिल पर साहेब राजी, वह डबल विदेशियों की विशेषता है। बाप को राजी करना बहुत होशियारी से आता है। सच्ची दिल बाप को क्यों प्रिय लगती है? क्योंकि बाप को कहते ही है सत्य। गॉड इज ट्रुथ कहते हैं ना! तो बापदादा को साफ दिल, सच्ची दिल वाले बहुत प्रिय है। ऐसे है ना! साफ दिल है, सच्ची दिल है। सत्यता ही ब्राह्मण जीवन की महानता है। इसलिए डबल विदेशियों को बापदादा सदा याद करते हैं। भिन्न भिन्न देश में आत्माओं को संदेश देने के निमित्त बन गये। देखो कितने देशों के आते हैं? तो इन सभी देशों का कल्याण तो हुआ है ना। तो बापदादा, यहाँ तो आप निमित्त आये हुए हैं लेकिन चारों ओर के डबल विदेशी बच्चों को, निमित्त बने हुए बच्चों को मुबारक दे रहे हैं, बधाई दे रहे हैं, उड़ते रहो और उडाते रहो। उडती कला सर्व का भला हो ही जाना है। सभी रिफ्रेश हो रहे हैं? रिफ्रेश हुए? सदा अमर रहेगी या मधुबन में ही आधा छोडकर जायेंगे? साथ रहेगी, सदा रहेगी? अमर भव का वरदान है ना! तो जो परिवर्तन किया है वह सदा बढ़ता रहेगा। अमर रहेगा। अच्छा। बापदादा खुश हैं और आप भी खुश हैं औरो को भी खुशी देना। अच्छा।

ज्ञान सरोवर को 10 साल हुआ है

अच्छा। अच्छा है, ज्ञान सरोवर ने एक विशेषता आरम्भ की, जबसे ज्ञान सरोवर शुरू हुआ है तो वी.आई.पी, आई.पी. के विशेष विधि पूर्वक प्रोग्राम्स शुरू हुए हैं। हर वर्ग के प्रोग्राम्स एक दो के पीछे चलते रहते हैं। और देखा गया है कि ज्ञान सरोवर में आने वाली आत्माओं की स्थूल सेवा और अलौकिक सेवा बहुत अच्छी रुचि से करते हैं। इसलिए ज्ञान सरोवर वालों को बापदादा विशेष मुबारक देते हैं कि सेवा की रिजल्ट से सब खुश होकर जाते हैं और खुशी खुशी से और साथियों को साथ ले आते हैं। चारों ओर आवाज फैलाने के निमित्त ज्ञान सरोवर बना है। तो मुबारक है और सदा मुबारक लेते रहना। अच्छा।

अभी एक सेकण्ड में मन को एकाग्र कर सकते हो? सब एक सेकण्ड में बिन्दु रूप में स्थित हो जाओ। (बापदादा ने ड़िल कराई) अच्छा - एसा अभ्यास चलते फिरते करते रहो।

चारों ओर के स्नेही, लवलीन आत्माओं को, सदा रहमदिल बन हर आत्मा को दुःख अशान्ति से मुक्त करने वाले श्रेष्ठ आत्माओं को, सदा अपन मन, बुद्धि, संस्कार को कंट्रोलिंग पावर द्वारा कंट्रोल में रखने बाले महावीर आत्माओं को, सदा संगमयुग के जीवनमुक्त स्थिति को अनुभव करने वाले बाप समान आत्माओं को बापदादा का पदमगुणा यादप्यार और नमस्ते।

मोहिनी बहन से:- यह भी अपने शरीर को चलाना सीख गई है। चलता रहेगा।

शान्तामणि दादी से:- यह भी बहुत अच्छा चला रही है।

सभी दादियों को देखते हुए:- आप आदि रत्नों की शोभा है। हाजिर होना ही शोभा है। अगर काई आप में से हाजिर नहीं होता तो खाली-खाली लगता है। आदि रत्नों की यह विशेषता है। जहाँ भी जायेंगे, सबको खुशी हो जाती है। बोलो, नहीं बोलो सिर्फ हाजिर होना ही खुशी है। तबियत को तो चलाना आ गया है। आ गया है ना? सभी की तबियतें तो थोडा बहुत खिटखिट करती हैं। फिर भी चलाना आ गया है।

दादी जी से:- बहुत अच्छा पार्ट बजा रही हो। बापदादा देखते हैं शरीर का नॉलेज भी आ गया है। कैसा भी शरीर हो लेकिन चलाना आ गया है, यह बापदादा देखते खुश होते हैं। आदि रत्न कम नहीं है। आदि रत्न हैं ना तो एक एक आदि रत्न की विशेषता है।

निर्मलशांता दादी से:- बहुत ही अच्छा पार्ट बजा रही है। दर्द तो नहीं पड़ता ना। (बाबा को मिलकर दर्द होगा तो भी चला जायेगा) आपका नाम सुनकर सभी खुश हो जाते हैं, परदादी। तो परदादी का नाम सुनके खुश हो जाते हैं। बहुत अच्छा। अच्छा ठीक है ना, तबियत अच्छी है। बहुत अच्छा। अभी तो ठण्डी को जीत लिया। विजयी बन गई। बहुत अच्छा।

ओम शान्ति।



 

03-02-05   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


सेवा करते उपराम और बेहद द्वारा एवररेडी बन, बह्मा बाप समान सम्पन्न बनो

आज ग्रेट ग्रेट ग्रैण्ड फादर अपने चारों ओर के कोटों में कोई और कोई में भी कोई बच्चों के भाग्य को देख हर्षित हो रहेहैं। इतना विशेष भाग्य और किसी को भी मिल नहीं सकता। हर एक बच्चे की विशेषता को देख हर्षित होते हैं। जिन बच्चों ने बापदादा से दिल से सम्बन्ध जोड़ा उन हर एक बच्चों में कोई न कोई विशेषता जरूर है। सबसे पहली विशेषता साधारण रूप में आयें हुए बाप को पहचान "मेरा बाबा" मान लिया। यह पहचान सबसे बडी विशेषता है। दिल से माना मेरा बाबा, बाप ने माना मेरा बच्चा। जो बड़े-बडे फिलासोफर साइंसदान धर्मात्मा नहीं पहचान सके, वह साधारण बच्चों ने पहचान अपना अधिकार ले लिया। कोई भी आकर इस सभा के बच्चों को देखे तो समझ नहीं सकेंगे कि इन भोली भोली माताओं ने, इन साधारण बच्चों ने इतने बडे बाप को पहचान लिया। तो यह विशेषता - पहचानना, बाप को पहचान अपना बनाना, यह आप कोटों में कोई बच्चों का भाग्य है। सभी बच्चों ने जो भी सम्मुख बैठे हैं वा दूर बैठे सन्मुख अनुभव कर रहे हैं, तो सभी बच्चों ने दिल से पहचान लिया है! पहचान लिया है कि पहचान रहे हैं? जिसने पहचान लिया है वह हाथ उठाओ। (सभी ने हाथ उठाया) पहचान लिया? अच्छा। तो बापदादा पहचानने के विशेषता की हर एक बच्चे को मुबारक दे रहे हैं। वाह भाग्यवान बच्चे वाह! पहचानने का तीसरा नेत्र प्राप्त कर लिया। बच्चों के दिल का गीत बापदादा सुनते रहते हैं, कौन सा गीत? पाना था वो पा लिया। बाप भी कहते ओ लाडले बच्चे, जो बाप से लेना था वो ले लिया। हर एक बच्चा अनेक रूहानी खज़ानों के बालक सो मालिक बन गयें।

तो आज बापदादा खज़ानों के मालिक बच्चों के खज़ाना का पोतामेल देख रहे थे। बाप ने खज़ाना तो सबको एक जैसा, एक जितना दिया है। किसको पदम, किसको लाख नहीं दिया है। लेकिन खज़ानों को जानना और प्राप्त करना, जीवन में समाना इसमें नम्बरवार हैं। बापदादा आजकल बार-बार भिन्न-भिन्न प्रकार से बच्चों को अटेंशन दिला रहे हैं - समय की समीपता को देख अपने आपको सूक्ष्म विशाल बुद्धि से चेक करो क्या मिला, क्या लिया और निरन्तर उन खज़ानों में पलते रहते है? चेकिंग बहुत आवश्यक है क्योकि माया वर्तमान समय भिन्न-भिन्न रॉयल प्रकार के अलबेलापन और रॉयल आलस्य के रूप में ट्रायल करती रहती है। इसलिए अपनी चेकिंग सदा करते चलो। इतने अटेंशन से, अलबेले रूप से चेकिंग नहीं - बुरा नहीं किया, दुख नहीं दिया. बुरी दृष्टि नहीं हुई, यह चेकिंग तो हुई लेकिन अच्छे ते अच्छा क्या किया? सदा आत्मिक दृष्टि नेचरल रही? या विस्मृति स्मृति का खेल किया? कितनो को शुभ भावना, शुभ कामना, दुआयें दी? ऐसे जमा का खाता कितना और कैसे रहा? क्योंकि अच्छी तरह से जानते हो कि जमा का खाता सिर्फ अभी कर सकते हैं। यह समय, फुल सीजन खाता जमा करने की है। फिर सारा समय जमा प्रमाण राज्य भाग्य और पूज्य देवी-देवता बनने का है। जमा कम तो राज्य भाग्य भी कम और पूज्य बनने में भी नम्बरवार होता है। जमा कम तो पूजा भी कम, विधिपूर्वक जमा नहीं तो पूजा भी विधिपूर्वक नहीं, कभी-कभी विधिपूर्वक है तो पूजा भी और पद भी कभी-कभी है। इसलिए बापदादा का हर एक बच्चे से अति प्यार है, तो बापदादा यही चाहते कि हर एक बच्चा सम्पन्न बने, समान बने। सेवा करो लेकिन सेवा में भी उपराम बेहद।

बापदादा ने देखा है मैजारिटी बच्चों की योंग अर्थात् याद की सबजेक्ट में रुचि वा अटेंशन कम होता है, सेवा में ज्यादा है। लेकिन बिना याद के सेवा में ज्यादा है तो उसमें हद आ जाती है। उपराम वृत्ति नहीं होती। नाम और मान का, पोजीशन का मिक्स हो जाता है। बेहद की वृत्ति कम हो जाती है। इसलिए बापदादा चाहते है कि कोटो में कोई, कोई में कोई मेरे बच्चे अभी से एवररेडी हो जायें, क्यों? कई सोचते है समय आने पर हो जायेंगे। लेकिन समय आपकी क्रियेंशन है, क्या क्रियेंशन को अपना शिक्षक बनायेंगे? दूसरी बात जानते हो कि बहुतकाल का हिसाब है, बहुतकाल की सम्पन्नता बहुतकाल की प्राप्ति कराती है। तो अभी समय की समीपता प्रमाण बहुतकाल का जमा होना आवश्यक है फिर उल्हना नहीं देना कि हमने तो समझा बहुतकाल में समय पडा है। अभी से बहुतकाल का अटेंशन रखो। समझा! अटेंशन प्लीज़।

बापदादा यही चाहते कि बच्चे में भी किमी भी एक सब्जेक्ट की कमी नहीं रह जाए। ब्रह्मा बाप से तो प्यार है ना! प्यार का रिटर्न तो देंगे ना! तो प्यार का रिटर्न है - अपनी कमी को चेक करो और रिटर्न दो, टर्न करो। अपने आपको टर्न करना, यह रिटर्न है। तो रिटर्न देने की हिम्मत है? हाथ तो उठा लेते हो, बहुत खुश कर लेते हो। हाथ देखकर तो बापदादा खुश हो जाते हैं, अभी दिल में पक्का-पक्का एक परसेन्ट भी कच्चा नहीं, पक्का व्रत लो - रिटर्न देना ही है। अपने आपको टर्न करना है।

अभी शिवरात्रि आ रही है ना! तो सभी बच्चों को बाप की जयन्ती सो अपनी जयन्ती मनाने का उमंग बहुत प्यार से आता है। अच्छे-अच्छे प्रोग्राम बना रहे हैं। सेवा के प्लैन तो बहुत अच्छे बनाते हो, बापदादा खुश होता है। लेकिन, लेकिन कहना अच्छा नहीं लगता है। जगत अम्बा माँ लेकिन शब्द को कहती थी, सिन्धी भाषा में, ले-किन, किन कहते हैं किचडे को। तो लेकिन कहना माना कुछ न कुछ किचडा लेना। तो लेकिन कहना अच्छा नहीं लगता है। कहना पडता है। जैसे और सेवा के प्लैन बनाये भी है और बनायेंगे भी लेकिन इस व्रत लेने का भी प्रोग्राम बनाना। रिटर्न देना ही है क्योंकि जब बापदादा या कोई पूछते हैं कैसे हैं? तो मैजारिटी का यही उत्तर आता है, हैं तो बहुत अच्छे लेकिन जितना बापदादा कहते हैं उतना नहीं। अभी यह उत्तर होना चाहिए जो बापदादा चाहते हैं वही है। नोट करो बापदादा क्या चाहता है, वह लिस्ट निकालो और चेक करो बापदादा यह चाहता है, वह है या नहीं है? दुनिया वाले आप पूर्वजो द्वारा मुक्ति चाहते हैं, चिल्ला रहे हैं, मुक्ति दो, मुक्ति दो। जब तक मैजारिटी बच्चे अपने पुराने संस्कार, जिसको आप नेचर कहते हो, नेचरल नहीं नेचर, उसमें कुछ भी थोडा रहा हुआ है. मुक्त नहीं हुए है तो सर्व आत्माओं को मुक्ति नहीं मिल सकती। तो बाप दादा कहते हैं - हे मुक्तिदाता के बच्चे मास्टर मुक्तिदाता अभी अपने को मुक्त करो तो सर्व आत्माओं के लिए मुक्ति का द्वार खुल जाए। सुनाया था ना - गेट की चाबी क्या है, बेहद का वैराग्य। कार्य सब करो लेकिन जैसे भाषणों में कहते हो प्रवृत्ति वालों को कमल पुष्प समान बनो, ऐसे सब कुछ करते, कर्त्तापन से मुक्त, न्यारे, न साधनों के वश, न पोजीशन के। कुछ न कुछ मिल जाए यह पोजीशन नहीं आपोजीशन है माया की। न्यारे और बाप के प्यारे। मुश्किल है क्या, न्यारे और प्यारे बनना? जिसको मुश्किल लगता है वह हाथ उठाओ। (किसी ने हाथ नहीं उठाया) किसको भी मुश्किल नहीं लगता है फिर तो शिवरात्रि तक सब सम्पन्न हो जायेंगे। जब मुश्किल नहीं है तो बनना ही है। ब्रह्मा बाप समान बनना ही है। संकल्प में भी, बोल में भी, सेवा में भी, सम्बन्ध-सम्पर्क में भी, सबमें ब्रह्मा बाप समान।

अच्छा जो समझते हैं, ब्रह्मा बाप और दादा, ग्रेट ग्रेट ग्रैण्ड फादर, उससे मेरा बहुत-बहुत 100 परसेन्ट से भी ज्यादा प्यार है, वह हाथ उठाओ। खुश नहीं करना, सिर्फ अभी- अभी खुश नहीं करना। सभी ने उठाया है। टी.वी. में निकाल रहे हो ना। शिवरात्रि पर यह टी.वी. देखेंगे और हिसाब लेंगे। ठीक है! जरा भी समानता में अन्तर नहीं हो। प्यार के पीछे कुर्बान करना, क्या बडी बात है। दुनिया वाले तो अशुद्ध प्यार के पीछे जीवन भी देने के लिए तैयार हो जाते हैं। बापदादा तो सिर्फ कहते हैं, किचडा दे दो बस। अच्छी चीज नहीं दो, किचडा दे दो। कमज़ोरी, कमी क्या है? किचडा है ना! किचडा कुर्बान करना क्या बड़ी बात है! परिस्थिति समाप्त हो जाए, स्व-स्थिति श्रेष्ठ हो जाए। बताते तो यही हैं ना, क्या करें परिस्थिति ऐसी थी। तो हिलाने वाली परस्थिति का नाम ही नहीं हो, ऐसी स्व-स्थिति शक्तिशाली हो। समाप्ति का पर्दा खुले तो सब क्या दिखाई देवें? फरिश्ते चमक रहे हैं। सभी बच्चे चमकते हुए दिखाई दें। इसीलिए अभी पर्दा खुलना रुका हुआ है। दुनिया वाले चिल्ला रहे हैं, पर्दा खोलो, पर्दा खोलो। तो अपना प्लैन आप ही बनाओ। बना हुआ प्लैन देते हैं ना तो फिर कई बातें होती है। अपना प्लैन अपनी हिम्मत से बनाओ। दृढ़ता की चाबी लगाओ तो सफलता मिलनी ही है। दृढ संकल्प करते हो और बापदादा खुश होते हैं वाह बच्चे वाह! दृढ़ संकल्प किया लेकिन दृढ़ता में फिर थोड़ा- थोडा अलबेलापन मिक्स हो जाता है। इसीलिए सफलता भी कभी आधी, कभी पौनी परसेंटेज में हो जाती है। जैसे प्यार 100 परसेन्ट है वैसे पुरुषार्थ में सम्पन्नता, यह भी 100 परसेन्ट हो। ज्यादा भले हो, कम नहीं हो। पसन्द है? पसन्द है ना? शिवरात्रि पर जलवा दिखायेंगे ना! बनना ही है। हम नहीं बनेगे तो कौन बनेगा! यह निश्चय रखो, हम ही थे, हम ही है और फिर भी हम ही होंगे। यह निश्चय विजयी बना देगा। पर-दर्शन नहीं करना, अपने को ही देखना। कई बच्चे रूहरिहान करते हैं ना, कहते हैं बस इसको थोडा सा ठीक कर दो, फिर मै ठीक हो जाऊँगा। इसे थोडा बदली कर दो तो मैं भी बदली हो जाऊँगा लेकिन न वह बदलेगा न आप बदलेंगे। स्वयं को बदलेंगे तो वह भी बदल जायेंगा। कोई भी आधार नहीं रखो, यह हो तो यह हो। मुझे करना ही है। अच्छा - शिवरात्रि अभी आनी है ना!

अच्छा, जो पहले बारी आये हैं - वह हाथ उठाओ। तो जो पहली बारी आये हैं उन्हों के लिए विशेष बापदादा कहते हैं कि ऐसे समय पर आये हो जब समय बहुत कम बचा है लेकिन पुरुषार्थ इतना तीव्र करो जो लास्ट सो फास्ट, फास्ट सो फर्स्ट नम्बर आ जाओ क्योंकि अभी चेयर्स गेम चल रही है। अभी किसकी जीत है, वह आउट नहीं हुआ है। लेट तो आये हो लेकिन फास्ट चलने से पहुँच जायेंगे। सिर्फ अपने आपको अमृतवेले अमर भव का वरदान याद दिलाना। अच्छा - सभी कोई दूर से कोई नजदीक से आये हैं। बापदादा कहते हैं भले पधारे अपने घर में। संगठन अच्छा लगता है। टी वी में देखते हो ना, सभा कुल होने से कितना अच्छा लगता है। अच्छा। तो एवररेडी? एवररेडी का पाठ पढ़ेंगे ना। अच्छा।

सेवा का टर्न इंदौर जोन:- इन्दौर वाले उठो, हाथ हिलाओ। बहुत आये हैं। बहुत अच्छा। चांस लेना यह भी बहुत श्रेष्ठ तकदीर बनाना है। तकदीरवान हो जो चांस मिला भी है और लिया भी है। बापदादा तो सदा कहते हैं कि यह 15 - 20 दिन हर जोन को जो गोल्डन चांस मिलता है, यह बहुत-बहुत स्वमान, स्व-स्थिति और पुण्य का खाता जमा करने का चांस है। तो सभी ने उमंग- उत्साह से सेवा की है, उसकी मुबारक है। अच्छा है इन्दौर तो सदा अन्तर्मुख रहता होगा, इन-डोर है ना, डोर के अन्दर रहने वाले तो अन्तर्मुखी हो गये ना। तो अन्तर्मुखी सदा सुखी होता है। तो इन्दौर निवासियों को नेचरल वरदान हो गया - अन्तर्मुखी सदा सुखी। तो कमाई जमा की? ज्यादा में ज्यादा की या थोड़ी की? सबने बहुत कमाई की' अच्छा। एक ब्राह्मण को खिलाते हैं, सेवा करते हैं उसका भी पुण्य मानते हैं। आपने तो कितने ब्राह्मणों की सेवा की। तो आपके पुण्य का खाता बहुत बड़ा जमा हो गया। और सच्चे ब्राह्मणों की सेवा की। तो पुण्य का खाता भी इतना महान हो गया। अच्छा है। उमंग-उत्साह से स्व-उन्नति कर रहे हैं, करते रहना और आगे उड़ते रहना। अच्छा।

मेडीकल विंग:- अच्छा किया है, इन्होंने अपने विंग में विशेष धारणा बहुत अच्छी रखी है। दया, दुआ एवम दवा। दया, दुआ, दवा तो कितना अच्छा रखा है। तो चेक करना - दया भाव रहा? तंग होके तो सेवा नहीं की? कोई ऐसा पेशेन्ट आ जाए तंग तो नहीं होते! दुआ भी दो, दवा भी दो तो सदा के लिए पेशेन्ट नहीं, पेशेन्स हो जाए। पेशेन्स में आ जाए। देखो, जो डाक्टर्स होते हैं ना उनको नेक्स्ट गॉड कहते हैं, तो आपकी सेवा का कितना महत्त्व है, टाइटिल मिला है नेक्स्ट गाड। इसीलिए लक्ष्य अच्छा रखा है दया और दुआ। दवाई देना तो कार्य है ही। जो भी पेशेन्ट आवे, रोता आवे और मुस्कराते जावे तब कहेंगे दया और दुआ की। चिल्लाता आवे और आराम से जायें। अच्छा है। मेंडिकल विंग का तो सबूत है, डाक्टर बैठा है ना (डा. सतीष गुप्ता) मेडिकल विंग ने सबूत दिया है, गवर्मेंट तक आवाज पहुँचा है। बापदादा चाहता है ऐसे हर एक विंग का गवर्मेंट तक आवाज जाये। देखो, प्रेजीडेंट ने भी कहा कि ब्रह्माकुमारियाँ बिना खर्चे के हार्ट ठीक कर देती है। तो यह भी आवाज फैला ना। गवर्मेंट तक आवाज जरूर जाना चाहिए। गवर्मेंट तक जाने का मतलब है कि वह आवाज ऑटोमेटिक फैलेगा। जैसे पहले आप लोग क्या करते थे, कोई न कोई नेता को बुला लेते थे और टी वी में निकलता था। अभी तो टीवी आपकी हो गई है लेकिन पहले बुलाते थे तो नाम होवे। टी वी वाले आवे, आवाज फैले। अभी इससे ऊपर चले गयें है, अभी टीवी. वाले आपको और ही पूछने के लिए आते हैं, आप क्या करते हो, कैसे करते हो। तो फर्क हुआ ना। तो गवर्मेंट तक पहुँचने से आवाज फैल जाता है। तो अच्छा कर रहे हैं, मुबारक हो।

स्पोर्ट विंग:- अच्छा। (मम्मा, बाबा, दीदी, दादी का फोटो बैडमिंटन खेलते हुए दिखा रहे हैं) चित्र दिखा रहे हैं। अच्छा सभी को दिखाओ। अच्छा है - कोई न कोई ऐसी आत्माओं को सन्देश दो जो वह माइक बनके आवाज फैलायें। प्रोग्राम बनाया है ना अच्छा है। बापदादा चाहते हैं जैसे स्पोर्ट में जो गाये हुए नामीग्रामी हैं, वह माइक बने। इतना पुरुषार्थ करो। हर एक वर्ग का जो सबसे विशेष गाया हुआ है, वह आपका माइक बने। आपको माइक बनने की आवश्यकता नहीं पडेगी। हर एक वर्ग वाला यह कोशिश करो भिन्न-भिन्न सबजेक्ट होती हैं, उसमें से कोई नामीग्रामी ढूंढो उसको अनुभव कराओ और वह अपना अनुभव सुनाये। आपको खर्चा भी नहीं करना पड़ेगा, मेहनत भी नहीं करनी पड़ेगी। हर वर्ग को ऐसे करना चाहिए। साधारण की तो कर ही रहे हो। यह मेगा प्रोग्राम कर रहे हो तो जनरल आ रहे हैं लेकिन अभी थोडा क्वालिटी की सेवा करो। हर एक वर्ग ऐसा एक दो माइक तैयार करो क्योंकि अभी तो काफी समय हो गया है, वर्ग वाले सेवा कर रहे हैं, परिचय तो अभी काफी हो गया है। अभी एक एक कोई ऐसा तैयार करो, चलो रेग्युलर स्टूडेंट नहीं हो लेकिन माइक तो बने क्योंकि ऐसी आत्मायें रेग्युलर स्टूडेंट मुश्किल बनते हैं, अनुभव तो सुनावें। तो इस वर्ष यह करना। हर एक वर्ग कोशिश करो और फिर उन्हों का संगठन हो जाए, छोटा संगठन, बडा नहीं। तो एक दो को देख करके भी उमंग आता है। ठीक है ना! तो पहले कौन करेगा? आप करेंगे। अच्छा इन एडवांस मुबारक हो।

सिक्यूरिटी विंग:- (बैनर दिखा रहे है) लक्ष्य तो अच्छा रखा है, इन्होंने लक्ष्य रखा है, सुरक्षा, सेवा, सम्पूर्ण समर्पण। सम्पूर्ण समर्पण हो गया तो फिर तो सम्पूर्ण हो ही जायेंगे। अच्छा लक्ष्य रखा है। अपने को समर्पण करना अर्थात् निमित्त और निर्माण बनना। निमित्त और निर्माण बनने से सफलता तो है ही। अच्छा है, आप लोगों को तो अन्त तक सेवा करनी पडेगी। अन्त के समय आपकी सेवा ज्यादा होगी। अच्छा है हर एक विंग लक्ष्य को दोहराते रहना। लिखा तो सभी ने अच्छा है, लक्ष्य को लक्षण बनाके ही छोडना है। आज तो लथ्य दिखाया है, अभी लक्षण देखेंगे। सभी विंग ने अच्छा लक्ष्य रखा है। अच्छा - कोई मिलेट्री वाले तैयार कर रहे हो? सिक्यूरिटी के हर ग्रूप में कनेक्शन रखो। चाहे देश के लिए, चाहे आत्माओं के लिए जो सिक्युरेटी डिपार्टमेंट है उन सबकी सेवा हो क्योंकि यह समय पर बहुत काम में आने हैं। जैसा समय नाजुक होगा तो आपको उन्हों की मदद से आवाज फैलाने में बहुत अच्छा होगा। कनेक्शन सबसे रखो। जो भी शाखायें है, उन्हों से भी सम्पर्क रखो। सेवाधारी बहुत होते है ना तो समय पर सेवाधारी काम में आवे। अच्छा है फिर भी बापदादा देखते हैं हर वर्ग कोशिश अच्छी कर रहे हैं। अच्छा, मुबारक हो।

स्पार्क ग्रुप:- (मूल्यनिष्ठ समाज की रचना करने का लक्ष्य रख अभियान निकालने का सोचा है, जिसमें हर जोन हर विंग इसी के अन्तर्गत सेवा करे, साथ- साथ अन्तिम समय की तैयारियाँ तथा संस्कार परिवर्तन के विषय पर गहन अनुभूति कराने का लक्ष्य रखा है)

बहुत अच्छा, घर घर में आवाज फैल जायेगा। और ऐसा ग्रुप तैयार करो जो गवर्मेंट तक भी आवाज जाये, यह अभियान करायेंगे तो आवाज जायेगा। अच्छा सोचा है। संख्या तो बहुत है। सब रिजल्ट निकालना, फिर बापदादा और मुबारक देंगे। अच्छा है यह उमंग-उत्साह, अपने पुरुषार्थ में भी उमंग-उत्साह बढ़ायेगा। सिर्फ सेवा में ही नहीं, साथ में अपने पुरुषार्थ में भी उमंग-उत्साह बढता जाए, सेवा भी बढती जाए। बाकी अच्छा किया है, मुबारक हो।

यूथ ग्रुप भी सेवा करके आयें हैं:- सेवा में खुशी का मेवा खाया क्योंकि सेवा का मेवा मिलता है खुशी, उमंग-उत्साह। तो सिर्फ सेवा की, सेवा के साथ मेवा खाया, कितनी खुशी रही? खुश रहे और खुशी बाँटी यह मेवा खाया और मेवा खिलाया। ऐसे ही आगे बढते चलो। अच्छा किया है । मेहनत अच्छी की है। मेहनत की मुबारक और आगे बढने की भी मुबारक हो। अच्छा।

डबल विदेशी:- कितने देशों से हैं? (35 देशों से) अच्छा है डबल विदेशियों से मधुबन सज जाता है। चाहे ज्ञान सरोवर में रहो, चाहे नीचे रहो लेकिन आप मधुबन के डबल श्रृंगार हो। सब आपको देखकर खुश होते हैं। और बापदादा ने सुनाया कि जब स्थापना हुई तो बापदादा का एक टाइटल नहीं था, और जब विदेश सेवा हुई है तो प्रैक्टिकल में वह टाइटल आ गया। वह कौन-सा टाइटल? विश्व कल्याणकारी। तो अभी विश्व में कोने-कोने में सेवाकेन्द्र हैं। हर खण्ड में अनेक सेवाकेन्द्र हैं। एक यू.के., यूरोप में कितने होंगे, आस्ट्रेलिया में कितने होंगे? तो विश्व कल्याणकारी का टाइटल डबल फॉरिन सेवा से सिद्ध हुआ और आप जानते हो ना - बापदादा को एक डबल फरिनर्स की विशेषता बहुत अच्छी लगती है। जानते हो? सच्चाई सफाई। बता देते हैं। हिम्मत थोडी- थोड़ी भले कम हो लेकिन बता देते हैं । छिपाने की आदत नहीं है। तो सच्चाई बाप को प्रिय है। सत्यता, महानता को प्राप्त कराने वाली होती है। बहुत अच्छा किया है, जिस देश से निकले उसी देश के सेवाधारी बन गये। नहीं तो भारतवासी बच्चों को कितनी भाषायें सीखनी पडती। पहले तो यह पढ़ाई पढनी पडती लेकिन आप आये सेवाधारी बन गये। सेवा का सबूत भी लाते हो इसकी बहुत-बहुत-बहुत मुबारक। और सभी ओ. के. रहने वाले, ओ .के. कभी नहीं भूलना। अच्छे हैं, अच्छे ते अच्छे रहना ही है। विदेश को नम्बरवन लेना है। विन करके वन लेना है। ठीक है ना! विन करने वाले वन नम्बर लेने वाले। ठीक है? ऐसे हैं? टू नम्बर नहीं ना! वन। विन और वन। अच्छे हैं, सभी को प्यारे लगते हैं। आपको सब देखने चाहते हैं। बापदादा ने तो देख लिया, अभी घूम जाओ जो सब आपको देखें। देखों, दर्शनीय मूर्त बन गये। (जयन्ती बहन से) यह ठीक है! अच्छा है। अच्छा।

जिब्राल्टर सबसे छोटा बच्चा है, बहुत अच्छा निमित्त बन आगे जा रहे हैं:-

बहुत अच्छा। सबसे नम्बरवन जाना। अच्छा। सभी अपनी- अपनी सेवा कर रहे हैं, करते रहेंगे, सबको उडाते रहेंगे।

मधुबन निवासियों से:- मधुबन वाले हाथ उठाओ। बहुत है। मधुबन वाले होस्ट हैं और तो गेस्ट होकर आते हैं चले जाते हैं लेकिन मधुबन वाले होस्ट हैं। नियरेस्ट भी हैं, डियरेस्ट भी हैं। मधुबन वालों को देखकर सब खुश होते हैं ना। किसी भी स्थान पर मधुबन वाले जाते हैं तो किस नजर से देखते हैं। वाह मधुबन से आये हैं। क्योंकि मधुबन नाम सुनने से मधुबन का बाबा याद आ जाता है। इसलिए मधुबन वालों का महत्व है। है महत्व? खुश होते हो ना! ऐसा प्रेमपूर्वक पालना का स्थान कोटों में कोई को ही मिला है। सब चाहते हैं मधुबन में ही रह जाए, रह सकते हैं क्या। आप रह रहे हो। तो अच्छा है। मधुबन वाले भूलते नहीं हैं, समझते हैं हमारे को पूछा नहीं लेकिन बापदादा सदा दिल में पूछते हैं। पहले मधुबन वाले। मधुबन वाले नहीं हों तो आयेंगे कहाँ! सेवा के निमित्त तो है ना! सेवाधारी कितने भी मिले, फिर भी फाउण्डेशन तो मधुबन वाले हैं। तो जो ऊपर ज्ञान सरोवर में, पाण्डव भवन में है, उन सबको भी बापदादा दिल की दुआयें और यादप्यार दे रहे हैं। यहाँ जो टोली देते हैं वह ऊपर मधुबन में मिलती है? तो मधुबन वालों को टोली भी मिलती, बोली भी मिलती। दोनो मिलती है। अच्छा।

ग्लोबल हॉस्पिटल वालों से:- सभी हॉस्पिटल वाले ठीक है क्योंकि हॉस्पिटल का भी विशेष पार्ट है ना। आते हैं नीचे। अच्छा थोड़े आते हैं। हॉस्पिटल वाले भी अच्छी सेवा कर रहे हैं। देखो आईवेल में तो फिर भी हॉस्पिटल ही काम में आती है ना। और जब से हॉस्पिटल खुली है तब से सबकी नजर में यह आया है कि ब्रह्माकुमारियाँ सिर्फ ज्ञान नहीं देती, लेकिन समय पर मदद भी करती है, सोशल सेवा भी करती है। तो हॉस्पिटल के बाद आबू में यह वायुमण्डल बदली हो गया। पहले जिस नजर से देखते थे, अभी उस नजर से नहीं देखते हैं। अभी सहयोग की नजर से देखते हैं। ज्ञान माने या नहीं माने लेकिन सहयोग की नज़र से देखते हैं तो हॉस्पिटल वालों ने सेवा की ना। अच्छा है।

अच्छा - आज की बात याद रही? सम्पन्न बनना ही है, कुछ भी हो जाए, सम्पन्न बनना ही है। यह धुन लग जाए, सम्पन्न बनना है, समान बनना है। अच्छा।

चारों ओर के कोटों में कोई, कोई में भी कोई भाग्यवान, भगवान के बच्चे श्रेष्ठ आत्मायें, सदा तीब्र पुकपार्थ द्वारा जो सोचा वह किया, श्रेष्ठ सोचना, श्रेष्ठ करना, लक्ष्य और लक्षण को समान बनाना, ऐसे विशेष आत्माओं को सदा बहुतकाल के पुरुषार्थ द्वारा राज्य भाग्य और पूज्य बनने बाले श्रेष्ठ आत्माओं को, सदा बाप के स्नेह का रिटर्न अपने को टर्न करने वाले नम्बरबन, विन करने वाले भाग्यवान बच्चों को बापदादा का यादप्यार और नमस्ते।

दादीजी से:- आपका नाम ही सेवा कर रहा है। दादी, दादी कहके ही सेवा हो रही है। अच्छा सभी सहयोगी और स्नेही नम्बरवन हैं। स्नेही भी हैं, राजयोगी भी हैं। ग्रूप अच्छा है।

(रतनमोहिनी दादी कल रीवा (म.प्र) के मिनी मेगा प्रोग्राम में जा रही हैं) सेवा तो बहुत अच्छी चल रही है। अच्छा है उमंग-उत्साह से करते हैं, रेसपान्स भी मिलता है, अच्छा है सबको याद देना।

जयन्ती बहन से:- प्रक्रितिजीत हो गई ना। प्रकृति तो नटखट है ही। लास्ट जन्म की है ना। इसलिए नटखट तो करती है लेकिन प्रकृति जीत होके उड़ते चलो, बापदादा की और परिवार की भी दुआयें बहुत है। तो दुआयें भी दवाई का काम कर रही है।

डा. हंसा रावल से:- सेवा में बहुत अच्छा फल मिलता है। प्रत्यक्षफल मिलता है खुशी, समीपता। तो यह फल लेने वाले, होशियार हो।

ओम शान्ति।



 

20-02-05   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


दिल से मेंरा बाबा कहो और सर्व अविनाशी खज़ानों के मालिक बन बेफिक्र बादशाह बनो

आज भाग्य विधाता बापदादा अपने सर्व बच्चों के मस्तक बीच भाग्य की रेखायें देख रहे हैं। हर एक बच्चे के मस्तक में चमकते हुए दिव्य सितारे की रेखा दिखाई दे रही हैं। हर एक के नयनों में स्नेह और शक्ति की रेखा देख रहे हैं। मुख में श्रेष्ठ मधुर वाणी की रेखा देख रहे हैं। होठों पर मीठे मुस्कान की रेखा चमक रही है। दिल में दिलाराम के स्नेह में लवलीन की रेखा देख रहे हैं। हाथों में सदा सर्व खज़ानों के सम्पन्नता की रेखा देख रहे हैं। पांव में हर कदम में पदम की रेखा देख रहे हैं। ऐसा श्रेष्ठ भाग्य सारे कल्प में किसी का नहीं होता, जो आप बच्चों को इस संगमयुग में भाग्य प्राप्त हुआ है। ऐसा अपना भाग्य अनुभव करते हो? इतने श्रेष्ठ भाग्य का रूहानी नशा अनुभव करते हो? दिल में स्वतः गीत बजता है - वाह मेरा भाग्य! यह संगमयुग का भाग्य अविनाशी भाग्य हो जाता। क्यों? अविनाशी बाप द्वारा अविनाशी भाग्य प्राप्त हुआ है। लेकिन प्राप्त इस संगम पर ही होता है। इस संगमयुग पर ही अनुभूति करते हो, यह विशेष संगमयुग की प्राप्ति अति श्रेष्ठ है। तो ऐसे श्रेष्ठ भाग्य का अनुभव सदा इमर्ज रहता है या कभी मर्ज, कभी इमर्ज रहता है? और पुरुषार्थ क्या किया? इतने बडे भाग्य की प्राप्ति के लिए पुरुषार्थ कितना सहज हुआ। सिर्फ दिल से जाना, माना और अपना बनाया मेरा बाबा। दिल से पहचाना, मैं बाबा का, बाबा मेरा। मेरा मानना और अधिकारी बन जाना। अधिकार भी कितना बडा है! सोचो, कोई पूछे क्या-क्या मिला है? तो क्या कहेंगे? जो पाना था वह पा लिया। अप्राप्त नहीं कोई वस्तु परमात्म खज़ाने में। ऐसे प्राप्ति स्वरूप का अनुभव कर लिया वा कर रहे हैं? भविष्य की बात अलग है, इस संगमगुग का ही प्राप्ति स्वरूप का अनुभव है। अगर संगमयुग पर अनुभव नहीं किया तो भविष्य में भी नहीं हो सकता। क्यों? भविष्य प्रालब्ध है लेकिन प्रालब्ध इस पुरुषार्थ के श्रेष्ठ कर्म से बनती है। ऐसे नहीं कि लास्ट में अनुभव स्वरूप बनेंगे। संगमयुग के बहुतकाल का यह अनुभव है। जीवनमुक्त का विशेष अनुभव अब का है। बेफिक्र बादशाह बनने का अनुभव अब है। तो सभी बेफिक्र बादशाह हो कि फिकर है? जो बेफिक्र बादशाह बने हैं वह हाथ उठाओ। बन गये हैं कि बन रहे हैं? बन गये हैं ना! क्या फिकर है? जब दाता के बच्चे बन गये तो फिकर क्या रह गया? मेरा बाबा माना और फिकर की अनेक टोकरियों का बोझ उतर गया। बोझ है क्या? हैं? प्रकृति का खेल भी देखते हो, माया का खेल भी देखते हो लेकिन बेफिक्र बादशाह होकर, साक्षी होकर खेल देखते हो। दुनिया वाले तो डरते हैं, पता नहीं क्या होगा! आपको डर है? डरते हो? निक्षय और निश्चिंत हैं जो होगा वह अच्छे ते अच्छा होगा। क्यों? त्रिकालदर्शी बन कर दृश्य को देखते हो। आज क्या है, कल क्या होने वाला है, इसको अच्छी तरह से जान गये हो, नॉलेजफुल हो ना! संगम के बाद क्या होना है, आप सबके आगे स्पष्ट है ना! नव युग आना ही है। दुनिया वाले कहेंगे, आयेगा? क्वेश्चन है आयेगा? और आप क्या कहते हैं? आया ही पडा है। इसलिए क्या होगा, क्वेश्चन नहीं है। पता है - स्वर्ण युग आना ही है। रात के बाद अब संगम प्रभात है, अमृतवेला है, अमृतवेले के बाद दिन आना ही है। निश्चय जिसको भी होगा वह निश्चिन्त, कोई चिंता नहीं होगी, बेफिकर। विश्व रचता द्वारा रचना की स्पष्ट नॉलेज मिल गई है।

बापदादा देख रहे हैं सभी बच्चे स्नेह के, सहयोग के और सम्पर्क के प्यार में बँधे हुए अपने घर में पहुच गये हैं। बापदादा सभी स्नेही बच्चों को, सहयोगी बच्चों को, सम्पर्क वाले बच्चों को अपने अधिकार लेने के लिए अपने घर में पहुँचने की मुबारक दे रहे हैं। मुबारक हो, मुबारक हो। बापदादा का प्यार बच्चों से ज्यादा है वा बच्चों का बापदादा से ज्यादा है? किसका है? आपका या बाप का? बाप कहते बच्चों का ज्यादा है। देखो, बच्चों का प्यार है तब तो कहाँ-कहाँ से पहुँच गये हैं ना! कितने देशों से आये हैं? (50 देशों से) 50 देशो से आयें हैं। लेकिन सबसे दूर से दूर कौन आया है? अमेरिका वाले दूर से आये हैं? आप भी दूर से आये हैं लेकिन बापदादा तो परमधाम से आया है। उसकी भेंट में अमेरिका क्या है! अमेरिका दूर है या परमधाम दूर है? सबसे दूरदेशी बापदादा है। बच्चे याद करते और बाप हाजिर हो जाते हैं।

अभी बाप बच्चों से क्या चाहते हैं? पूछते हैं ना - बाप क्या चाहते हैं? तो बापदादा यही मीठे-मीठे बच्चों से चाहते हैं कि एक-एक बच्चा स्वराज्य अधिकारी राजा हो। सभी राजा हो? स्वराज्य है? स्व पर राज्य तो है ना। जो समझते हैं स्वराज्य अधिकारी राजा बना हूँ, वह हाथ उठाओ। बहुत अच्छा। बापदादा को बच्चों को देखकर प्यार आता कि 63 जन्म बहुत मेहनत की है, दुःख- अशान्ति से दूर होने की। तो बाप यही चाहते हैं कि हर बच्चा अभी स्वराज्य अधिकारी बने। मन-बुद्धि-संस्कार का मालिक बने, राजा बने। जब चाहे, जहाँ चाहे, जैसे चाहे वैसे मन-बुद्धि-संस्कार को परिवर्तन कर सके। टेंशन फ्री लाइफ का अनुभव सदा इमर्ज हो। बापदादा देखते हैं कभी मर्ज भी हो जाता है। सोचते हैं यह नहीं करना है, यह राइट है, यह रांग है, लेकिन सोचते है स्वरूप में नहीं लाते हैं। सोचना माना मर्ज रहना, स्वरूप में लाना अर्थात् इमर्ज होना। समय के लिए तो नहीं इन्तजार कर रहे हो ना! कभी-कभी करते हैं। रूहरिहान करते हैं ना तो कई बच्चे कहते हैं, समय आने पर ठीक हो जायेंगे। समय तो आपकी रचना है। आप तो मास्टर रचता हो ना! तो मास्टर रचता, रचना के आधार पर नहीं चलते। समय को समाप्ति के नजदीक आप मास्टर रचता को लाना है।

एक सेकण्ड में मन के मालिक बन मन को आर्डर कर सकते हो? कर सकते हो? मन को एकाग्र कर सकते हो? फुलस्टॉप लगा सकते हो कि लगायेंगे फुलस्टॉप और लग जायेगा क्वेश्चन मार्क? क्यों, क्या, कैसे यह क्या, वह क्या, आश्चर्य की मात्रा भी नहीं। फुलस्टॉप, सेकण्ड में पॉइंट बन जाओ। और कोई मेहनत नहीं है, एक शब्द सिर्फ अभ्यास में लाओ पॉइंट। पॉइंट स्वरूप बनना हैं, वेस्ट को पॉइंट लगानी हैं और महावाक्य जो सुनते हो उस पॉइंट पर मनन करना है, और कोई भी तकलीफ नहीं हैं। पॉइंट याद रखो, पॉइंट लगाओ, पॉइंट बन जाओ। यह अभ्यास सारे दिन में बीच-बीच में करो, कितने भी बिजी हो लेकिन यह ट्रायल करो एक सेकण्ड में पॉइंट बन सकते हो? एक सेकण्ड में पॉइंट लगा सकते हो? जब यह अध्यास बार-बार का होगा तब ही आने वाले अन्तिम समय में कुल प्पॉइंट्स ले सकेंगे। पास विद ऑनर बन जायेंगे। यही परमात्म पढ़ाई है, यही परमात्म पालना है।

तो जो भी आये हैं, चाहे पहली बारी आने वाले हैं, जो पहली बारी मिलन मनाने के लिए आये हैं वह हाथ उठाओ। बहुत आये हैं। वेलकम। जैसे अभी पहले बारी आये हो ना, तो पहला नम्बर भी लेना। चांस हैं, आप सोचेंगे हम तो अभी- अभी पहले बारी आये हैं, हमारे से पहले वाले तो बहुत हैं लेकिन ड्रामा में यह चांस रखा हुआ है कि लास्ट सो फास्ट और फास्ट सो फर्स्ट हो सकते हो। चांस हैं और चांस लेने वालो को बापदादा चांसलर कहते हैं। तो चांसलर बनी। बनना हैं चांसलर? चांसलर बनना है? जो समझते हैं चांसलर बनेंगे, वह हाथ उठाओ। चांसलर बनेंगे? वाह! मुबारक हो। बापदादा ने देखा यहाँ तो जो भी आये हैं वह सब हाथ उठा रहे हैं, मैजारिटी उठा रहे हैं, मुबारक हो, मुबारक हो। बापदादा ने आप सभी आने वाले मीठे-मीठे, प्यारे-प्यारे बच्चों को विशेष याद किया है, क्यों याद किया? (आज सभा में देश-विदेश के बहुत से वी.आई.पीज बैठे हैं) क्यों निमन्त्रण दिया? पता है? दखो, निमन्त्रण तो बहुतों को मिला लेकिन आने वाले आप पहुँच गये हो। क्यों बापदादा ने याद किया? क्योंकि बापदादा जानते हैं कि जो भी आयें हैं वह स्नेही, सहयोगी से सहजयोगी बनने वाली क्वालिटी हैं। अगर हिम्मत रखेंगे तो आप सहजयोगी बन औरों को भी सहज योग का मैसेन्जर बन मैसेज दे सकते हो। मैसेज देना अर्थात् गॉडली मैसेन्जर बनना। आत्माओं को दुःख, अशान्ति से छुडाना। फिर भी आपके ही भाई-बहनें हैं ना। तो अपने भाई वा बहनों को गॉडली मैंसेज देना अर्थात् मुक्त करना। इसकी दुआयें बहुत मिलती है। किसी भी आत्मा को दुख, अशान्ति से छुडाने की दुआयें बहुत मिलती है और दुआयें मिलने से अतीन्द्रिय सुख आन्तरिक खुशी की फीलिंग बहुत आती है। क्यों? क्योंकि खुशी बांटी ना तो खुशी बांटने से खुशी बढती है। सभी खुश हो? विशेष बापदादा मेहमानों से नहीं, अधिकारियों से पूछते हैं। अपने को मेहमान नहीं समझना, अधिकारी हैं। तो सभी खुश हैं? हाँ आप आने वालों से पूछते हैं, कहने में आता है मेहमान लेकिन मेहमान नहीं हो, महान बन महान बनाने वाले हो। तो पूछो खुश हैं? खुश हैं तो हाथ हिलाओ। सभी खुश हैं, अभी जाकरके क्या करेंगे? खुशी बांटेगे ना! सबको खूब खुशी बांटना। जितनी बांटेगे उतनी बढेगी, ठीक हैं। अच्छा - खूब ताली बजाओ। (सभी ने खूब तालिया बजाई) जैसे अभी ताली बजाई, ऐसे सदा खुशी की तालियाँ आटोमेटिक बजती रहे। अच्छा।

सेवा का टर्न - भोपाल जोन:- भोपाल वाले उठो। सेवा का चांस लेने में कितने पदम, कदम में जमा किये? जमा किया? क्योंकि यहाँ तो सेवा और यज्ञ पिता की याद रहती है। यज्ञ सेवा करते हो तो यज्ञ पिता की याद तो स्वतः आती है। यहाँ क्या किया? दो काम थे ना, बस, और तो कोई काम नहीं था। बाप को याद करना और सेवा करना और कोई ड्यूटी थी क्या? यही थी ना! सेवा करना अर्थात् शक्तिशाली मेवा खाना। तो बहुत अच्छी सेवा की, अपने लिए भी दुआयें जमा किया और दूसरों को भी आराम दिया अर्थात् बाप की याद दिलाई। तो अच्छा गोल्डन चांस लिया और यहाँ का जमा किया हुआ वहाँ जाके स्वयं प्रति भी बढाना और दूसरों को भी बांटना। अच्छा है। इसमें टीचर्स हाथ उठाओ।

बापदादा सदा टीचर्स को कहते हैं, टीचर्स अर्थात् जिसके फीचर्स से फ्यूचर दिखाई दे। ऐसी टीचर्स हो ना! आपको देखकर स्वर्ग के सुख की फीलिंग आये। शान्ति की अनुभूति हो। चलते-फिरते फरिश्ते दिखाई दें। ऐसी टीचर्स हो ना। अच्छा है। चाहे प्रवृत्ति में रहने वाले हैं, चाहे सेवा के निमित्त बने हुए हैं लेकिन सभी बापदादा समान बनने वाले निष्चयबुद्धि विजयी हैं। तो सेवा करना बहुत अच्छा लगा ना। सन्तुष्ट रहे? रहे तो हाथ हिलाओ। बहुत अच्छा, मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो।

मीडिया विंग:- (बैनर दिखा रहे हैं मूल्य निष्ठ मीडिया, सत्यता, निर्भयता, दिव्यता परमात्म प्रत्यक्षता) अच्छा लक्ष्य रखा है, मीडिया अर्थात् बापदादा की प्रत्यक्षता का आवाज फैलाने वाले। प्रत्यक्षता का विशेष साधन मीडिया है क्योंकि लोग कहते हैं कि आपका आवाज इतना चारों ओंर नहीं फैला है, तो मीडिया ऐसा साधन है जो चारो ओर आवाज फैला सकते हैं। अभी थोडा- थोडा आवाज फैलाया है इसलिए अभी ऐसा वायुमण्डल बनाओ जो हर मीडिया के साधन वाले स्वयं ऑफर करे कि हमें कुछ सेवा दो। कनेक्शन रख रहे हो लेकिन कनेक्शन वालों को रिलेशन वाला बनाओ, जिससे वह खुद समझें कि हमारी भी जिम्मेवारी है। कर रहे हैं । करते रहेंगे और अवश्य आवाज फैलना ही है। फैलाने वाले होशियार हैं तो आवाज फैलेगा ना! शुरू किया है, अच्छा किया है, अभी उसको बढ़ाओ। (दादी जी की इच्छा है - एक करोड लोगों को सन्देश मिले, तो इस शिव जयन्ती पर वह सन्देश सबको मिल जाये, ऐसा प्लैन बनाया है, और भी कई प्लैन बापदादा को सुनाये) मुबारक हो। प्रैक्टिकल में करेंगे फिर गिफ़्ट भी देंगे, अभी मुबारक हो।

साइंटिस्ट एवम इंजीनियर विंग:- (बैनर दिखाया निमित्त, निर्मानता से नवनिर्माण, ज्ञान विज्ञान जागृति अभियान) अच्छा बनाया है। अभी साइंटिस्ट और इंजीनियर डिपार्टमेंट को ऐसा कुछ करके दिखाना हैं जो लोगों को अनुभव हो कि साईलेन्स की शक्ति साइंस को भी रिफाइन और प्रगति में ला सकती है। साइंस और साइलेन्स का मिलन क्या-क्या कर सकता है, वह विशेष पहले पॉइंट्स निकालो और फिर वह फैलाओ। साइंस वालों को पता पडे कि साइलेन्स हमारे साइंस में क्या सहयोग दे सकती हैं, क्या उन्नति हो सकती है, ऐसा अनुभव स्वयं करो भी और कराओ भी। अच्छा हैं बापदादा खुश हैं, हर एक वर्ग काम में तो लगा हुआ है, मनन करना शुरू है, अभी मनन से मक्खन निकालो। कोई ऐसे विशेष अनुभव उन्हीं के सामने रखो क्योंकि आजकल प्रैक्टिकल अनुभव का प्रभाव ज्यादा पडता है। टॉपिक पर भाषण करते हो लेकिन भाषण में भी विशेष प्रैक्टिकल अनुभव सुनाने का लक्ष्य रखो। बाकी अच्छा कर रहे हैं, अच्छा है, यह भी चांस मिल जाता है, विधि अच्छी बनाई है। अच्छा - मुबारक हो, किया है उसकी भी मुबारक, और आगे करेंगे उसकी इन एडवांस मुबारक हो। (इस विंग के सदस्यों ने दो गुण विशेष धारणा के लिए रखे हैं निमित्त भाव और निर्मान) बहुत अच्छा किया है, करते रहना और लक्ष्य को पक्का रखना।

प्राशासक वर्ग:- अच्छा आप लोगों ने भी प्लैन बनाये हैं और बनाते ही रहते हैं। अच्छा है अगर प्रशासक परिवर्तन हो जाए तो सब परिवर्तन हो सकते हैं क्योंकि कहावत है यथा राजा तथा प्रजा। तो अगर सभी तरफ प्रशासक अपने जीवन में परिवर्तन करे तो औरों को भी परिवर्तन करने के निमित्त बना सकते हैं, क्योंकि हर देश में प्रशासन करने वाले तो होते ही हैं। तो हर देश में विशेष उन्हों को परिवर्तन का सन्देश देकर योग्य बनाओ औरो को परिवर्तन करने के। बाकी अच्छी सेवा है, बहुतों का फायदा कर सकते हो। एक अनेकों के निमित्त बनने वाले होते हैं इसलिए कर भी रहे हो और, और भी तीव्रगति से परिवर्तन का प्लैन प्रैक्टिकल में लाओ। आवश्यकता है इस वर्ग की। सबकी नजर आज इसी वर्ग के ऊपर है। तो निमित्त बने हो, निर्माण करेंगे ही। अच्छा।

डबल विदेशी:- डबल विदेशी विश्व के कोने-कोने में सन्देश देने का कार्य बहुत अच्छा कर रहे हैं। बापदादा सुनते हैं 50 देशों से आयें हैं, तो 50 देशों में सन्देश वाहक बैठे हैं। सन्देश देने का कार्य कर रहे हैं और अभी प्लैन भी अच्छा बना रहे हैं कि जहाँ भी सन्देश नहीं पहुँचा हैं वहाँ निमित्त बनना ही हैं। कर भी रहे हैं यह भी ब्रापदादा के पास पहुंचता हैं, अभी उमंग-उत्साह हैं और जहाँ उमंग-उत्साह हैं वहाँ सफलता है ही है। तो डबल विदेशी कौन हो? सफलता के सितारे हो। हैं ना! सफलता के सितारे हैं। अच्छा कर रहे हैं। एक-एक के दिल का आवाज बापदादा तक पहुँचता रहता है। यह करें, यह करें, यह भी करें, वह भी करें, उमंग-उत्साह अच्छा हैं और सफलता तो होनी ही है। आपके चरणों में. गले में सफलता है ही है। और आप सबको देख करके सभी खुश भी होते हैं। आपका आह्वान करते हैं, डबल विदेशी जरूर होने चाहिए। लाडले हो गये हो ना। तो बहुत अच्छा कर रहे हो, करते रहेंगे। उड रहे हो, उडाते रहेंगे। सब टीचर्स बहुत उमंग में हैं ना। देखो आपके उमंग-उत्साह से यह महान अधिकारी आत्मायें भी पहुँच गई हैं। ग्रुप अच्छा लाया है। जिन्होंने भी लाया है उनको मुबारक है। क्वालिटी अच्छी लाये हैं। अभी और आवाज फैलेगा जरूर। अच्छा, मुबारक हो, मुबारक हो। मुबारक हो। अच्छा।

चारों ओर के चाहे साकार रूप में सामने हैं, चाहे दूर बैठे भी दिल के नजदीक हैं, ऐसे सदा श्रेष्ठ भाग्यवान आत्माओं को, सदा निमित्त बन निर्माण का कार्य सफल करने वाले विशेष आत्माओं को, सदा बाप के समान बनने के उमंग-उत्साह में आगे बढने वाले हिम्मतवान बच्चों को, सदा हर कदम में पदमों की कमाई जमा करने वाले बहुत-बहुत वर्ल्ड में पदमगुणा धनवान, भरपूर आत्माओं को बापदादा का यादप्यार और नमस्ते।

दादी और दादी जानकी जी से:- आप (दादी) रूप हो और यह (दादी जानकी) बसन्त है। आप दृष्टि से ही काम उतार देती हो। ऐसे ऊपर हाथ करके नाचती हैं ना। अच्छा है। (सबको हल्का बना देती हैं) अच्छा है, आपके साथी भी अच्छे हैं ना। अच्छा है, वायुमण्डल बनाना, यह भी सबसे ऊँचे ते ऊँची सेवा है। आप आदि रत्नों से वायुमण्डल बनता है। चाहे बोलो, चाहे नहीं बोली लेकिन वायुमण्डल बनाने वाले हो। देखो, कितनी सेवा कर रही हो। (मनोहर दादी से) बहुत अच्छा सभी को हँसा देती हो, यह सेवा बहुत अच्छी करती हो। अच्छा है, (मुन्नी बहन से) बिजी रहती हो, बिजी रखने में भी होशियार हो। (नीलू बहन से) बहुत अच्छा पार्ट बजा रही हो। (ईशू दादी से) यह गुप्त रहती है लेकिन वाइब्रेशन अच्छा बनाती है। बहुत अच्छा (निर्मलशान्ता दादी से) अभी प्रकृतिजीत बन गई। अभी प्रकृति के वश नहीं, प्रकृतिजीत। देखो संगठन में कितनी अच्छी लग रही हो। सबसे फ्रेश तो आप लग रही हो। सबको हाथ हिलाओ। (रुकमणी बहन से) ठीक हो, सेवा प्यार से करती हो।

डबल विदेशी निमित्त बड़ी बहनों से:- अच्छा सर्विस का सबूत दे रहे हैं। इससे ही आवाज फैलेगा। अनुभव सुनाने से औरों का भी अनुभव बढ़ता है। तो बापदादा खुश हैं, फॉरिन की सेवा में निमित्त बनने वाले अच्छे उमंग-उत्साह से सेवा में बिजी रहते हैं। गये देश से हैं लेकिन विदेश वालों की सेवा ऐसे ही निमित्त बनके कर रहे हैं जैसे वहाँ के ही हैं। अपनेपन की भासना देते हो। और सब तरफ के हैं। एक तरफ के नहीं हैं, लण्डन के या अमेरिका के नहीं, बेहद सेवाधारी हैं। जिम्मेवारी तो विश्व की है ना। तो बापदादा मुबारक दे रहे हैं। कर रहे हो, आगे और अच्छे ते अच्छा उड़ते और उड़ाते रहेंगे। अच्छा।

डबल विदेशी मेहमानों से:-

1. बापदादा ने आप सभी को क्यों याद किया? क्यों किया? क्योंकि आपको गॉडली मैसेन्जर बनना हैं। मैसेज तो समझ गये हो ना! मैसेज क्या है, याद करो। यह मैसेज तो जानते हो ना! सबको बाप की याद दिलाते रहो, बस। सहज है ना। मुश्किल तो नहीं लगता? याद में रहो और याद दिलाओं। बहुत अच्छा किया जो पहुँच गये।

2. अपने को बाप के अर्थात् परमात्मा के जन्म सिद्ध अधिकार के अधिकारी समझते हो ना? समझते हो? पूरा अधिकार लेने वाले हो ना! हाफ नहीं फुल। आप मेहमान नहीं, महान बन औरों को महान बनाने वाले हो। खुशी है ना! खुश हैं? एवरहैपी? अभी एवरहैपी रहना, खुशी नहीं गवानी हैं। सदा मुस्कराते रहो। मुस्कराना अच्छा हैं ना! तो एवरहैपी ग्रूप। ओके एवरहैपी ग्रूप, वेरीगुड। बहुत अच्छा।

3. सभी होली और हैपी हंस हो। हंस का काम क्या होता है? हंस में निर्णय शक्ति बहुत होती है। तो आप भी होली हैपी हंस व्यर्थ को समाप्त करने वाले और समर्थ बन समर्थ बनाने वाले हो। सभी एवरहैपी? एवर-एवर हैपी। अभी कभी दुःख को आने नहीं देना। दुःख को डायवोर्स दे दिया, तभी तो दूसरों का दुःख निवारण करेंगे ना! तो सुखी रहना है और सुख देना है। यह काम करेंगे ना! यहाँ से जो सुख मिला है वह जमा रखना। कभी भी कुछ भी हो ना - बाबा, मीठा पाया, दुख दे दो, अपने पास नहीं रखना। खराब चीज़ रखी जाती है क्या? तो दुःख खराब है ना! तो दुःख निकाल दो, सुखी रहो। तो यह है सुखी ग्रूप और सुखदाई ग्रूप। चलते-फिरते सुख देते रहो। कितना आपको दुआयें मिलेंगी। तो यह ग्रूप ब्लैसिंग के पात्र हैं। (पर्सनल) खुश हैं ना! अभी मुस्कराओ। बस मुस्कराते रहना। खुशी में नाचो।

डबल विदेशी मुख्य भाई-बहनें जिन्होंने सेवा की:- सभी ने बहुत अच्छी सेवा की, उसकी बहुत-बहुत मुबारक। ऐसे ही सेवा करते रहना। अच्छा ग्रूप है। (एक बुक बना रहे हैं) बापदादा ने समाचार सुना था। अच्छा सबको महावाक्य मिलेंगे, महान बन जायेंगे। तो इसमें ऐसा जादू भरना जो किताब खोले तो जादू लग जाए। खुशी में नाचने लग जायें। अच्छी मेहनत कर रहे हो, बापदादा खुश है।

अफ्रीका के मुख्य भाई-बहने वहाँ की सेवा का समाचार सुना रहे हैं - बहुत अच्छा। बापदादा की दुआयें हैं। प्लैन बहुत अच्छा है। मुबारक हो। अच्छा, यह निमित्त बना है, दोनों ही अच्छे निमित्त हो। इतनी का कल्याण किया है, यह भी बहुत बड़ा पुण्य है। पुण्यात्मा बन गये। साथी दोनों ही ठीक हैं। बहुत अच्छा। (वेदान्ती बहन से) यह भी सहयोग अच्छा दे रही है। (जयन्ती बहन से) यह बैकबोन है।

अच्छा। ओम शान्ति।



 

07-03-05   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


सम्पूर्ण पवित्रता का व्रत रखना और मैं-पन को समर्पित करना ही शिव जयन्ती मनाना है

आज विशेष शिव बाप अपने सालिग्राम बच्चों का बर्थ डे मनाने आये हैं। आप बच्चे बाप का जन्म दिन मनाने आये हो और बापदादा बच्चों का बर्थ डे मनाने आये हैं क्योंकि बाप का बच्चों से बहुत प्यार है। बाप अवतरित होते ही यज्ञ रचते हैं और यज्ञ में ब्राह्मणों के बिना यज्ञ सम्पन्न नहीँ होता है। इसलिए यह बर्थ डे अलौकिक है, न्यारा और प्यारा है। ऐसा बर्थ डे जो बाप और बच्चों का इकठ्ठा हो यह सारे कल्प में न हुआ है, न कभी हो सकता है। बाप है निराकार, एक तरफ निराकार है दूसरे तरफ जन्म मनाते हैं। एक ही शिव बाप है जिसको अपना शरीर नहीँ होता इसलिए ब्रह्मा बाप के तन में अवतरित होते हैं, यह अवतरित होना ही जयन्ती के रूप में मनाते है। तो आप सभी बाप का जन्म दिन मनाने आये हो वा अपना मनाने आये हो? मुबारक देने आये हो वा मुबारक लेने आये हो? यह साथ-साथ का वायदा बच्चों से बाप का है। अभी भी संगम पर कम्बाइण्ड साथ है, अवतरण भी साथ है, परिवर्तन करने का कार्य भी साथ है और घर परमधाम में चलने में भी साथ-साथ है। यह है बाप और बच्चों के प्यार का स्वरूप।

शिव जयन्ती भगत भी मनाते है लेकिन वह सिर्फ पुकारते हैं, गीत गाते हैं। आप पुकारते नहीं, आपका मनाना अर्थात् समान बनना। मनाना अर्थात् सदा उमंग-उत्साह से उडते रहना। इसीलिए इसको उत्सव कहते है। उत्सव का अर्थ ही है उत्साह में रहना। तो सदा उत्सव अर्थात् उत्साह में रहने वाले हो ना! सदा है या कभी-कभी है? वैसे देखा जाए तो ब्राह्मण जीवन का श्वास ही है - उमंग-उत्साह। जैसे श्वास के बिना रह नहीँ सकते हैं, ऐसे ब्राह्मण आत्माये उमंग-उत्साह के बिना ब्राह्मण जीवन में रह नहीँ सकते हैं। ऐसे अनुभव करते हो ना? देखो विशेष जयन्ती मनाने के लिए कहाँ-कहाँ से, दूर-दूर से भाग करके आये हैं। बापदादा को अपने जन्म दिन की इतनी खुशी नहीँ है जितनी बच्चों के जन्म दिन की है। इसलिए बापदादा एक-एक बच्चे को पदमगुणा खुशी की थालियां भर- भर के मुबारक दे रहे है। मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो।

बापदादा को आज के दिन सच्चे भगत भी बहुत याद आ रहे हैं। वह व्रत रखते हैं एक दिन का और आपने व्रत रखा है सारे जीवन में सम्पूर्ण पवित्र बनने का। वह खाने का व्रत रखते हैं. आपने भी मन के भोजन व्यर्थ संकल्प, निगेटिव संकल्प, अपवित्र संकल्पो का व्रत रखा है। पक्का व्रत रखा है ना? यह डबल फोरेनेर्स आगे आगे बैठे हैं। यह कुमार बोलो, कुमारों ने व्रत रखा है, पक्का? कच्चा नहीँ। माया सुन रही है। सब झण्डिया हिला रहे है ना तो माया देख रही है, झण्डियां हिला रहे हैं। जब व्रत रखते हैं - पवित्र बनना ही है, तो व्रत रखना अर्थात् श्रेष्ठ वृत्ति बनाना। तो जैसी वृत्ति होती है वैसे ही दृष्टि, कृति स्वत: ही बन जाती है। तो ऐसा व्रत रखा है ना? पवित्र शुभ वृत्ति, पवित्र शुभ दृष्टि, जब एक दो को देखते हो तो क्या देखते हो? फेस को देखते हो या भृकुटी के बीच चमकती हुई आत्मा को देखते हो? कोई बच्चे ने पूछा कि जब बात करना होता है, काम करना होता है तो फेस को देख करके ही बात करनी पड़ती है, आंखो के तरफ ही नज़र जाती है, तो कभी-कभी फेस को देख करके थोडा वृत्ति बदल जाती है। बापदादा कहते है आंखो के साथ-साथ भृकुटी भी है, तो भृकुटी के बीच आत्मा को देख बात नहीं कर सकते हैं! अभी बापदादा सामने बैठे बच्चों के आंखो में देख रहे है या भृकुटी में देख रहे है, मालूम पडता है? साथ-साथ ही तो है। तो फेस में देखो लेकिन फेस में भृकुटी में चमकता हुआ सितारा देखो। तो यह व्रत लो, लिया है लेकिन और अटेन्शन दौ। आत्मा को देख बात करना है, आत्मा से आत्मा बात कर रहा है। आत्मा देख रहा है। तो वृत्ति सदा ही शुभ रहेगी और साथ-साथ दूसरा फायदा है जैसी वृत्ति वैसा वायुमण्डल बनता है। वायुमण्डल श्रेष्ठ बनाने से स्वयं के पुरुषार्थ के साथ-साथ सेवा भी हो जाती है। तो डबल फायदा है ना! ऐसी अपनी श्रेष्ठ वृत्ति बनाओ जो कैसा भी विकारी, पतित आपके वृत्ति के वायुमण्डल से परिवर्तन हो जाए। ऐसा व्रत सदा स्मृति में रहे. स्वरूप में रहे।

आजकल बापदादा ने बच्चों का चार्ट देखा, अपने वृत्ति से वायुमण्डल बनाने के बजाए कहाँ-कहाँ, कभी-कभी दूसरों के वायुमण्डल का प्रभाव पड़ जाता है। कारण क्या होता? बच्चे रूहरिहान में बहुत मीठी-मीठी बातें करते हैं, कहते हैं इसकी विशेषता अच्छी लगती है, इनका सहयोग बहुत अच्छा मिलता है, लेकिन विशेषता प्रभु की देन है। ब्राह्मण जीवन में जो भी प्राप्ति है, जो भी विशेषता है, सब प्रभु प्रसाद है, प्रभु देन है। तो दाता को भूल जाए, लेवता को याद करे! प्रसाद कभी किसका पर्सनल गाया नहीँ जाता, प्रभु प्रसाद कहा जाता है। फलाने का प्रसाद नहीँ कहा जाता है। सहयोग मिलता है, अच्छी बात है लेकिन सहयोग दिलाने वाला दाता तो नहीँ भूले ना! तो पक्का-पक्का बर्थ डे का व्रत रखा है? वृत्ति बदल गई है? सम्पन्न पवित्रता, यह सच्चा-सच्चा व्रत लेना वा प्रतिज्ञा करना। चेक करो - बड़े-बड़े विकार का व्रत तो रखा है लेकिन छोटे-छोटे उनके बाल-बच्चों से मुक्त हैं? वैसे भी देखो जीवन में प्रवृत्ति वालों का बच्चों से ज्यादा पोत्रे- धोत्रे से प्यार होता है। माताओं का प्यार होता है ना। तो बड़े बड़े रूप से तो जीत लिया लेकिन छोटे-छोटे सूक्ष्म स्वरूप में वार तो नहीं करते? जैसे कई कहते हैं - आसक्ति नहीं है लेकिन अच्छा लगता है। यह चीज ज्यादा अच्छी लगती है लेकिन आसक्ति नहीं है। विशेष अच्छा क्यों लगता? तो चेक करो छोटे-छोटे रूप में भी अपवित्रता का अंश तो नहीँ रह गया हैं? क्योंकि अंश से कभी वंश पैदा हो सकता है। कोई भी विकार चाहे छोटे रूप में, चाहे बड़े रूप में आने का निमित्त एक शब्द का भाव है, वह एक शब्द है - मैं। बॉडीकानसेस का मैं। इस एक मैं शब्द से अभिमान भी आता है और अभिमान अगर पूरा नहीँ होता तो क्रोध भी आता है क्योंकि अभिमान की निशानी है - वह एक शब्द भी अपने अपमान का सहन नहीँ कर सकता, इसलिए क्रोध आ जाता। तो भगत तो बलि चढाते हैं लेकिन आप आज के दिन जो भी हद का मैं पन हो, उसको बाप को देकर समर्पित करो। यह नहीँ सोचो करना तो है, बनना तो है... तो तो नहीँ करना। समर्थ हो और समर्थ बन समाप्ति करो। कोई नई बात नहीँ हैं, कितने कल्प, कितने बार सम्पूर्ण बने हो, याद है? कोई नई बात नहीँ हैं। कल्प- कल्प बने हो, बनी हुई बन रही है, सिर्फ रिपीट करना है। बनी को बनाना है, इसलिए कहा जाता है बना बनाया ड़ामा। बना हुआ है सिर्फ अभी रिपीट करना अर्थात् बनाना है। मुश्किल है कि सहज है? बापदादा समझते है संगमयुग का वरदान है - सहज पुरुषार्थ। इस जन्म में सहज पुरुषार्थ के वरदान से 21 जन्म सहज जीवन स्वत: ही प्राप्त होगी। बापदादा हर बच्चे को मेहनत से मुक्त करने आये हैं। 63 जन्म मेहनत की, एक जन्म परमात्म प्यार, मुहब्बत से मेहनत से मुक्त हो जाओ। जहाँ मुहब्बत है वहाँ मेहनत नहीँ, जहाँ मेहनत है वहाँ मुहब्बत नहीँ। तो बापदादा सहज पुरुषार्थी भव का वरदान दे रहा है और मुक्त होने का साधन है - मुहब्बत, बाप से दिल का प्यार। प्यार में लवलीन और महामन्त्र है - मनमना भव का मन्त्र। तो यन्त्र को काम में लगाओ। काम में लगाना तो आता है ना। बापदादा ने देखा संगमयुग में परमात्म प्यार द्वारा, बापदादा द्वारा कितनी शक्तियां मिली हैं, गुण मिले हैं, ज्ञान मिला है, खुशी मिली है, इन सब प्रभु देन को, खज़ानों को समय पर कार्य में लगाओ।

तो बापदादा क्या चाहते हैं, सुना? हर एक बच्चा सहज पुरुषार्थी, सहज भी, तीव्र भी। द्रढ़ता को यूज करो। बनना ही है, हम नहीँ बनेंगे तो कौन बनेगा। हम ही थे, हम ही हैं और हर कल्प हम ही होंगे। इतना दृढ निच्च्य स्वयं में धारण करना ही है। करेंगे नहीँ कहना, करना ही हैं। होना ही है। हुआ पड़ा है।

बापदादा देश विदेश के बच्चों को देख खुश है। लेकिन सिर्फ आप सामने सम्मुख वालों को नहीँ देख रहे हैं, चारों ओर के देश और विदेश के बच्चों को देख रहे हैं। मैजारिटी जहाँ-तहॉ से बर्थ डे की मुबारक आई हैं, कार्ड भी मिले हैं, ई-मेल भी मिलै हैं, दिल का संकल्प भी मिला है। बाप भी बच्चों के गीत गाते हैं, आप लोग गीत गाते हो ना - बाबा आपने कर दी कमाल, तो बाप भी गीत गाते हैं मीठे बच्चों ने कर दी कमाल। बापदादा सदा कहते हैं कि आप तो सन्मुख बैठे हो लेकिन दूर वाले भी बापदादा के दिल पर बैठे हैं। आज चारो ओर बच्चों के संकल्प में है - मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो। बापदादा के कानो में आवाज पहुंच रहा है और मन में संकल्प पहुंच रहे हैं । यह निमित्त कार्ड हैं, पत्र हैं लेकिन बहुत बडे हीरे से भी ज्यादा मूल्यवान गिफ्ट हैं। सभी सुन रहे हैं, हर्षित हो रहे हैं। तो सभी ने अपना बर्थ डे मना लिया। चाहे दो साल का हो, चाहे एक साल का हो, चाहे एक सप्ताह का हो, लेकिन यज्ञ की स्थापना का बर्थ डे है। तो सभी ब्राह्मण यज्ञ निवासी तो हैं ही। इसलिए सभी बच्चों को बहुत-बहुत दिल का यादप्यार भी है, दुआयें भी हैं, सदा दुआओं में ही पलते रहो, उड़ते रहो। दुआयें देना और लेना सहज है ना! सहज है? जो समझते है सहज है, वह हाथ उठाओ। झण्डियां हिलाओ। तो दुआयें छोडते तो नहीं? सबसे सहज पुरुषार्थ ही है - दुआयें देना, दुआयें लेना। इसमें योग भी आ जाता, ज्ञान भी आ जाता, धारणा भी आ जाती, सेवा भी आ जाती। चारों ही सबजैक्ट आ जाती है दुआयें देने और लेने में ।

तो डबल फारेनर्स दुआयें देना और लेना सहज है ना! सहज है? 2० साल वाले जो आये है वह हाथ उठाओ। आपको तो 2० साल हुए हैं लेकिन बापदादा आप सबको पदम गुणा मुबारक दे रहे हैं । कितने देशों के आये है? (69 देशों के) मुबारक हो 69 वाँ बर्थ डे मनाने के लिए 69 देशों से आये हैं । कितना अच्छा है। आने में तकलीफ तो नहीँ हुई ना। सहज आ गये ना! जहाँ मुहब्बत है वहाँ कुछ मेहनत नहीँ। तो आज का विशेष वरदान क्या याद रखेगें? सहज पुरुषार्थी। सहज कार्य जल्दी-जल्दी किया ही जाता है। मेहनत का काम मुश्किल होता है ना तो टाइम लगता है। तो सभी कौन हो? सहज पुरुषार्थी। बोलो, याद रखना। अपने देश में जाके मेहनत में नहीँ लग जाना। अगर कोई मेहनत का काम आवे भीं तो दिल से कहना, बाबा, मेंरा बाबा, तो मेहनत खत्म हो जायेगी। अच्छा। मना लिया ना! बाप ने भी मना लिया. आपने भी मना लिया। अच्छा।

डबल विदेशी 6 ग्रुप में अलग अलग भट्टियाँ कर रहे हैं

कुमारियोंसे - एक-एक कुमारी 1०० ब्राह्मणों से उत्तम है। तो चेक करना जो गायन है हर एक कुमारी को कम से कम 1०० ब्राह्मण जरूर बनाने पड़ेगे। बनायेंगे? बनाना है। हाँ तो हाथ हिलाओ। कितने समय में बनायेंगे? समय नजदीक है ना, तो आप बताओ कितना समय चाहिए? रिजल्ट भेजनी पडेगी। (एक साल में) एक साल! आपको एक साल कलियुगी दुनिया में रहना है! चलो, आपके मुख में गुलाबजामुन। तो 6 मास में 5० बनाना, एक साल में 1००, तो 6 मास में 5०, 6 मास के बाद रिपोर्ट भेजना, पसन्द है? क्या नहीँ कर सकते हो, जो चाहो वह कर सकते हो। अच्छा है कुमारियोँ का ग्रुप अच्छा है। बापदादा कुमारियोँ को देख विशेष खुश होता है क्योंकि कुमारियां सेवा में सहयोगी नम्बरवन बन सकती हैं। अच्छा। बहुत अच्छा किया है।

कुमार ग्रुप - (गीत गाया - मै बाबा का, बाबा मेरा) अच्छा है, कुमार, डबल कुमार हो गये हो। एक दुनिया के हिसाब से भी कुमार हो और इस ब्राह्मण जीवन में भी ब्रह्माकुमार हो। तो डबल कुमार हो। तो डबल काम करना पडेगा। करेंगे? हुआ ही पड़ा है। दृढ़ संकल्प किया और सफलता हुई पडी है। अच्छा। सभी ने बहुत अच्छे बैनर बनाये हैं। (हर ग्रुप अपना- अपना बैनर बापदादा को दिखा रहा है)

माताओं से - बहुत अच्छा। बापदादा देख रहे हैं माताओं में बहुत अच्छा उमंग-उत्साह है। इसलिए बापदादा ने माताओं को ही निमित्त बनाया है। बहुत अच्छा बापदादा को पसन्द है।

अधर कुमार - अधर कुमार भी कमाल करेंगे। हर एक अधरकुमार अपना परिवर्तन का अनुभव सुनाकर सभी को बाप के समीप का बना सकते हैं क्योंकि दुनिया वाले समझते हैं कि अधरकुमार जीवन बहुत मुश्किल है लेकिन आप सभी नं मुश्किल को सहज बनाया है। बस सिर्फ अपना अनुभव सुनाते जाओ, ऐसे मुश्किल को मिटा सकते हो। एक शब्द का अन्तर करने से, गृहस्थी से ट्रस्टी बनने से मुश्किल से सहज हो जाता है। तो ऐसे अधरकुमार सेवा में सफलता प्राप्त है और होती रहेगी। अच्छा।

युगलों से - (बैनर दिखा रहे है) लक्ष्मी-नारायण का सिम्बल अच्छा बनाया है। आप तो विजयी रत्नो में हैं। साथ रहते न्यारे और प्यारे। युगलों को बापदादा कहते हैं यह कमल पुथ समान न्यारे और प्यारे हैं । रहते भी साकार में आपस में परिवार में रहते लेकिन मन से सदा बाप के साथ रहते हैं । बहुत अच्छा। सभी डबल फारेनर्स ने रिफ्रेशमेंट अच्छी ली है, अभी ली हुई रिफ्रेशमेंट औरो को देनी है। मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो।

सेन्टर वासी - (बैनर - प्रेम और दया की ज्योति जगा कर रखेंगे) बहुत अच्छा संकल्प लिया है। अपने पर भी दया दृष्टि, साथियोँ के ऊपर भी दया दृष्टि और सर्व के ऊपर भी दया दृष्टि। ईश्वरीय लव चुम्बक है, तो आपके पास ईश्वरीय लव का चुम्बक है। किसी भी आत्मा को ईश्वरीय लव के चुम्बक से बाप का बना सकते हो। बापदादा सेन्टर पर रहने वालों को विशेष दिल की दुआयें देते हैं, जो आप सभी ने विश्व में नाम बाला किया है। कोने-कोने में ब्रह्माकुमारीज का नाम तो फैलाया है ना! और बापदादा को बहुत अच्छी बात लगती है कि जैसे डबल विदेशी हो, वैसे डबल जॉब करने वाले हो। मैजारिटी लौकिक जॉब भी करते हैं तो अलौकिक जॉब भी करते हैं और बापदादा देखते हैं, बापदादा की टीवी. बहुत बडी है, ऐसी बड़ी टी.वी. यहाँ नहीँ है। तो बापदादा देखते हैं कैसे फटाफट क्लास करते, नाश्ता खड़े-खड़े करते, जॉब में टाइम पर पहुंचते, कमाल करते हैं। बापदादा देखते-देखते दिल का प्यार देते रहते हैं। बहुत अच्छा, सेवा के निमित्त बने हो और निमित्त बनने की गिफ्ट बाप सदा विशेष दृष्टि देते रहते है। बहुत अच्छा लक्ष्य रखा हैं, अच्छे हो, अच्छे रहेंगे, अच्छे बनायेंगे।

आई. टी. ग्रुप

सेवा का कोई नया प्लैन बनाया है? (व्रह्माकुमारीज वेबसाइट को और अच्छा बवनाना है, जो विश्व में वापदादा को प्रत्यक्ष करने की सेवा में यूज किया जा सके) जो बनाया है, वह प्रैक्टिकल करके रिजल्ट लिखना। जैसे अफ्रीका वालो ने रिजल्ट लिखी ना, ऐसे आप लोग भी रिजल्ट भेजना। मुबारक हो बनाया, उमंग है, उत्साह है। जहाँ उमंग-उत्साह है, वहाँ सफलता है ही है। बहुत अच्छा किया।

सेवा का टर्न राजस्थान और यु. पी. जोन

अच्छा है, रूहानी लश्कर है। बहुत अच्छा, सेवा दिल से की भी है और सभी को सन्तुष्ट भी किया है। तो जो सन्तुष्ट करता है उसको दिल से जो सन्तुष्टता की लहरे पहुचती हैं, उससे बहुत खुशी होती है। तो बहुत खुशी मिली है ना। आपने स्थूल सेवा की और सभी भाई बहिनों ने आपको खुशी की सौगात दी है। सन्तुष्टता सबसे बडी खुशी की खुराक है। सारा ग्रुप सन्तुष्टमणियोँ का हो गया। सन्तुष्ट करने वाले सन्तुष्टमणि। सन्तुष्टमणियोँ को बापदादा और सारे परिवार की मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो।

अच्छा - भारत की मातायें देख रही है, हमारा नाम नहीँ लिया बाबा ने। बापदादा कहते है कि जहाँ भी मातायें होती है ना, तो माताओं की विशेषता है कि उस स्थान का भण्डारा और भण्डारी भरपूर होती है। माताओं को वरदान है, फुरी- फुरी (बूंद-बूंद) तलाब भरने का। तो मातायें बहुत भाग्यवान है, बाप की भण्डारी भर देती है। भण्डारा भी भर जाता है। इसलिए माताओं को बहुत-बहुत मुबारक है। अच्छा - भाई भी कम नहीं है। देखो जहाँ भाई हैं ना, वहाँ सेवा को चार चाँद लग जाते हैं। भाइयोँ द्वारा आलराउण्ड सेवा होती है। भण्डारा भरपूर तो करते ही है, लेकिन सेवा बढाने के निमित्त विशेष भाई निमित्त बनते हैं। तो सेवा की रौनक बढाने वाले भाई हैं। इसलिए बापदादा सभी माताओं को, सभी भाइयोँ को बहुत-बहुत मुबारक दे रहे हैं। भले पधारे अपने घर में। देखो हाल की रौनक कौन बढाता है ' आप बच्चे जब आते हैं तो डायमण्ड हाल, डायमण्ड बन जाता है। अच्छा दृश्य लगता है। अच्छा है दादी को डायमण्ड हाल बहुत पसन्द आ गया है। अच्छा, नचाती अच्छा है। खुश हो जाते हो ना, जब दादी आके नचाती है तो खुश हो जाते हैं। बहुत अच्छा। अभी एक सेकण्ड में ड्रिल कर सकते हो? कर सकते हो ना। अच्छा।

चारों ओर के सदा उमंग-उत्साह में रहने वाले श्रेष्ठ बच्चों को, सदा सहज पुरुषार्थी संगमयुग के सर्व बरदानी बच्चों को, सदा बाप और मैं आत्मा इसी स्मृति से मैं बोलने वाले, मैं आत्मा, सदा सर्व आत्माओं को अपने वृत्ति से वायुमण्डल का सहयोग देने वाले ऐसे मास्टर सर्वशक्तिवान बच्चों को बापदादा का यादप्यार, दुआयें, मुबारक और नमस्ते।

दादियोंसे:-

आप सबसे मधुबन की रौनक है। विशेष आज बाप के साथ उसी समय अवतरण तो आपका भी है। विशेष आप सबका है, आदि रत्नो का आदि समय में अवतरण है। तो आप लोगों को विशेष मुबारक है। हैपी बर्थ डे है। एक गीत है ना - आप मधुबन की रौनक हैं। आदि से कुछ तो चल गये, लेकिन आप अमर हो। (बाबा की दुआयें है, सबकी दुआयें है) यह अच्छा है, ऊपर ही हाथ जाता है नीचे नहीं जाता है। अच्छा है। दादियोँ को देखकर सभी खुश होते हो ना!

निर्वेर भाई, रमेश भाई से:-

अच्छा है, पाण्डवों के बिना भी गति नहीँ है। चाहे पाण्डव चाहे शक्तियां सबका संगठन, संगठन बना रहा है।

डबल विदेशी बडी बहेनोंसे:-

सभी ने मेहनत अच्छी की है। ग्रुप-ग्रुप बनाया है ना तो मेहनत अच्छी की है। और यहाँ वायुमण्डल भी अच्छा है, संगठन की भी शक्ति है, तो सबको रिफ्रेशमेंट अच्छी मिल जाती है और आप निमित्त बन जाते हो। अच्छा है। दूर-दूर रहते हैं ना, तो संगठन की जो शक्ति होती है वह भी बहुत अच्छी है। इतना सारा परिवार इकट्ठा होता है तो हर एक की विशेषता का प्रभाव तो पडता है। अच्छा प्लैन बनाया है। बापदादा खुश है। सबकी खुशबू आप ले लेते हो। वह खुश होते हैं आपको दुआयें मिलती हैं । अच्छा है, यह जो सभी इकट्ठे हो जाते हो यह बहुत अच्छा है, आपस में लेन देन भी हो जाती है और रिफ्रेशमेंट भी हो जाती है। एक दो की विशेषता जो अच्छी पसन्द आती है, उसको यूज करते है, इससे सगठन अच्छा हो जाता है। यह ठीक है।

जयन्ती बहन से:-

अभी थोडा-थोड़ा सेवा में पार्ट लिया क्योंकि खुशी मिलेगी। सबकी दुआयें, वह भी दवा का काम करेगी। बहुत अच्छा।

डा. निर्मला बहन श्री लंका जा रही हैं, वहाँ रिट्रीट है अच्छा है उन्हों को रिफ्रेशमेंट चाहिए।

काठमांडू नेपाल की किरन बहन से:-

प्रकृतिजीत हो, शिव शक्ति हो, यह थोडा बहुत हिसाब-किताब है, सब चला जायेगा। मजबूत रहना और सभी नेपाल निवासियो को याद देना, घबराना नहीँ।

बापदादा ने अपने हस्तों से शिव ध्वज फहराया और उऐर 69वीं शिव जयन्ती की बधाइयां दी

आप सबके दिल में तो बाप की याद का झण्डा लहरा ही रहा है। अभी सारे विध में जो कोने-कोने में सेवा कर रहे हो, उसकी सफलता निकलनी है जो चारों ओर से यही आवाज आयेगा मेरा बाबा आ गया। यही है, यही है, यही है। वह दिन भी दूर नहीँ है, आना ही है, होना ही है, हुआ ही पडा है। ऐसे ऐसे माइक तैयार हो रहे हैं। आप माइट देगे और वह माइक बापदादा को प्रत्यक्ष करेंगे। करना है ना। (बापदादा कोई वी.आई.पी. माइक को सभा में देखकर बोले) यह माइक बैठी है ना। बढिया माइक है। ऐसें माइक निकालेंगे जो आपको सिर्फ दृष्टि देनी पडेगी। वही दिन आ रहा है, आ रहा है, आ रहा है 1 अच्छा। ओम शान्ति।



25-03-05   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


मास्टर सूर्य बन अनुभूति की किरणें फैलाओ, विधाता बनो, तपस्वी बनो

आज बापदादा अपने चारों ओर के होलीहंस बच्चों से होली मनाने के लिए आये हैं। बच्चे भी प्यार की डोर में बंधे हुए होली मनाने के लिए पहुंच गये हैं। मिलन मनाने के लिए कितने प्यार से पहुंच गये हैं । बापदादा सर्व बच्चों के भाग्य को देख रहे थे कितना बड़ा भाग्य, जितने ही होलीएस्ट हैं उतने ही हाइएस्ट भी हैं। सारे ल्प में देखो आप सबके भाग्य से ऊंचा भाग्य और किसी का नहीं है। जानते हो ना अपने भाग्य को? वर्तमान समय भी परमात्म पालना, परमात्म पढ़ाई और परमात्म वरदानों से पल रहे हो। भविष्य में भी विश्व के राज्य धिकारी बनते हो। बनना ही है, निश्चित है, निश्चय ही है। बाद में भी जब पूज्य बनते हो तो आप श्रेष्ठ आत्माओं जैसी पूजा विधिपूर्वक और किसी की भी नहीं होती है। तो वर्तमान, भविष्य और पूज्य स्वरूप में हाइएस्ट अर्थात् ऊंचे ते ऊंचे हैं। आपके जड़ चित्र उन्हों की भी हर कर्म की पूजा होती है। अनेक धर्म पिता, महान आत्मायें हुए हैं लेकिन ऐसे विधि पूर्वक पूजा आप ऊंचे ते ऊंचे परमात्म बच्चों की होती है क्योंकि इस समय हर कर्म में कर्मयोगी बन कर्म करने की विधि का फल पूजा भी विधिपूर्वक होती है। इस संगम समय के पुरूषार्थ की प्रालब्ध मिलती है। तो ऊंचे ते ऊंचे भगवन आप बच्चों को भी ऊंचे ते ऊंची प्राप्ति कराते हैं।

होली अर्थात् पवित्रता, होलीएस्ट भी हो तो हाइएस्ट भी हो। इस ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन ही पवित्रता है। संकल्प मात्र भी अपवित्रता श्रेष्ठ बनने नहीं देती। पवित्रता ही सुख, शान्ति की जननी है। पवित्रता सर्व प्राप्तियों की चाबी है। इसलिए आप सबका स्लोगन यही है -``पवित्र बनो, योगी बनो।'' जो होली भी यादगार है, उसमें भी देखो पहले जलाते हैं फिर मनाते हैं। जलाने के बिना नहीं मनाते हैं। अपवित्रता को जलाना, योग के अग्नि द्वारा अपवित्रता को जलाते हो, उसका यादगार वह आग में जलाते हैं और जलाने के बाद जब पवित्र बनते हैं तो खुशियों में मनाते हैं। पवित्र बनने का यादगार मिलन मनाते हैं क्योंकि आप सभी भी जब अपवित्रता को जलाते हो, परमात्म संग के रंग में लाल हो जाते हो तो सर्व आत्माओं के प्रति शुभ भावना शुभ कामना का मिलन मनाते हो। इसका यादगार मंगल मिलन मनाते हैं। इसलिए बापदादा सभी बच्चों को यही स्मृति दिलाते हैं कि सदा हर एक से दुआयें लो और दुआयें दो। अपने दुआओं की शुभ भावना से मंगल मिलन मनाओ क्योंकि अगर कोई बद-दुआ देता भी है, वह तो परवश है अपवित्रता से लेकिन अगर आप बद-दुआ को मन में समाते हो तो क्या खुश रहते हो? सुखी रहते हो? कि व्यर्थ संकल्पों का क्यों, क्या, कैसे, कौन.. इस दु:ख का अनुभव करते हो। बद-दुआ लेना अर्थात् अपने को भी दु:ख और अशान्ति अनुभव कराना। जो बापदादा की श्रीमत है सुख दो और सुख लो, उस श्रीमत का उल्घंन हो जाता है। तो अभी सभी बच्चे दुआ लेना और दुआ देना सीख गये हो ना! सीखा है?

प्रतिज्ञा और दृढ़ता, दृढ़ता से प्रतिज्ञा करो - सुख देना है और सुख लेना है। दुआ देनी है, लेनी है। है प्रतिज्ञा, हिम्मत है? जिसमें हिम्मत है आज से दृढ़ता का संकल्प लेते हैं दुआ लेंगे, दुआ देंगे, वह हाथ उठाओ। पक्का? पक्का? कच्चा नहीं होना। कच्चे बनेंगे ना - तो कच्चे फल को चिड़िया बहुत खाती है। दृढ़ता सफलता की चाबी है। सभी के पास चाबी है? है चाबी? चाबी कायम है, माया चोरी तो नहीं कर लेती? उसको भी चाबी से प्यार है। सदैव संकल्प करते हुए यह संकल्प इमर्ज करो, मर्ज नहीं, इमर्ज। इमर्ज करो मुझे करना ही है। बनना ही है। होना ही है। हुआ ही पड़ा है। इसको कहा जाता है निश्चयबुद्धि, विजयन्ती। ड्रामा विजय का बना ही पड़ा है। सिर्फ रिपीट करना है। बना बनाया ड्रामा है। बना हुआ है, रिपीट कर बनाना है। मुश्किल है? कभी-कभी मुश्किल हो जाता है! मुश्किल क्यों होता है? अपने आप ही सहज को मुश्किल कर देते हो। छोटी सी गलती कर लेते हो - पता है कौन सी गलती करते हो? बापदादा को उस समय बच्चों पर बहुत रहम क्या कहें, प्यार आता है। क्या प्यार आता है? एक तरफ तो कहते कि बाप हमारे कम्बाइन्ड है, है कम्बाइन्ड? कम्बाइन्ड है?साथ नहीं कम्बाइन्ड। कम्बाइन्ड है? डबल फारेनर्स कम्बाइन्ड है? पीछे वाले कम्बाइन्ड है? गैलरी वाले कम्बाइन्ड है?

अच्छा आज तो बापदादा को समाचार मिला कि मधुबन निवासी पाण्डव भवन, ज्ञान सरोवर और यहाँ वाले भी अलग हाल में सुन रहे हैं। तो उन्हों से भी बापदादा पूछ रहे हैं कि बापदादा कम्बाइन्ड हैं? हाथ उठा रहे हैं। जब कम्बाइन्ड है, सर्व शक्तिवान बापदादा कम्बाइन्ड है फिर अकेले क्यों बन जाते? अगर आप कमज़ोर भी हो तो बापदादा तो सर्वशक्तिवान है ना! अकेले बन जाते हो तब ही कमज़ोर बन जाते हो। कम्बाइन्ड रूप में रहो। बापदादा हर एक बच्चे के हर समय सहयोगी हैं। शिव बाप परमधाम से आये क्यों हैं? किसलिए आये हैं?बच्चों के सहयोगी बनने के लिए आये हैं। देखो ब्रह्मा बाप भी व्यक्त से अव्यक्त हुए किसलिए? साकार शरीर से अव्यक्त रूप में ज्यादा से ज्यादा सहयोग दे सकते हैं। तो जब बापदादा सहयोग देने के लिए आफर कर रहे हैं तो अकेले क्यों बन जाते? मेहनत में क्यों लग जाते? 63 जन्म तो मेहनत की है ना! क्या वह मेहनत के संस्कार अभी भी खींचते हैं क्या? मुहब्बत में रहो, लव में लीन रहो। मुहब्बत मेहनत से मुक्त कराने वाली है। मेहनत अच्छी लगती है क्या? क्या आदत से मजबूर हो जाते हो? सहज योगी हैं, बापदादा विशेष बच्चों के लिए परमधाम से सौगात लाये हैं, पता है क्या सौगात लाये हैं? तिली पर भिस्त लाया है। (हथेली पर स्वर्ग लाये हैं) आपका चित्र भी है ना। राज्य भाग्य लाये हैं बच्चों के लिए। इसलिए बापदादा को मेहनत अच्छी नहीं लगती।

बापदादा हर बच्चे को मेहनत मुक्त, मुहब्बत में मगन देखने चाहते हैं। तो मेहनत वा माया की युद्ध से मुक्त बनने का आज संकल्प द्वारा होली जलायेंगे? जलायेंगे? जलाना माना नाम-निशान गुम। कोई भी चीज़ जलाते हैं तो नाम-निशान खत्म हो जाता है ना! तो ऐसी होली मनायेंगे? मनायेंगे? हाथ तो हिला रहे हैं। बापदादा हाथ देख करके खुश हो रहा है। लेकिन, लेकिन है? लेकिन बोलें क्या कि नहीं? मन का हाथ हिलाना। यह हाथ हिलाना तो बहुत इजी है। अगर मन ने माना करना ही है तो हुआ ही पड़ा है। नये-नये भी बहुत आये हैं। जो पहले बारी मिलन मनाने के लिए आये हैं, वह हाथ उठाओ। डबल फारेनर्स में भी हैं।

अभी जो भी पहले बारी आये हैं, बापदादा विशेष उन्हों को अपना भाग्य बनाने की मुबारक दे रहे हैं। लेकिन यह मुबारक स्मृति में रखना और सदा यह लक्ष्य रखो क्योंकि फाइनल रिजल्ट आउट नहीं हुई है। सबको चांस है, लास्ट में आने वाले भी, पहले वालों से लास्ट में आये हो ना, तो लास्ट वाले लास्ट सो फास्ट और फास्ट सो फर्स्ट आ सकते हैं। छुट्टी है, जा सकते हो। यह सदा याद रखना मुझे अर्थात् मुझ आत्मा को फास्ट और फर्स्ट क्लास में आना ही है। हॉ, वी.आई.पी बहुत आये हैं ना, टाइटल वी.आई.पी का है। जो वी.आई.पी आये हैं वह लम्बा हाथ उठाओ। वेलकम। अपने घर में आने की वेलकम, भले पधारे। अभी तो परिचय के लिए वी.आई.पी. कहते हैं लेकिन अभी वी.आई.पी से वी.वी.वी. आई.पी बनना है। देखो देवतायें आपके जड़ चित्र वी.वी.वी. आई.पी हैं तो आपको भी पूर्वज जैसा बनना ही है। बापदादा बच्चों को देखकर खुश होते हैं। रिलेशन में आये। जो वी.आई.पी आये हैं उठो। बैठे-बैठे थक भी गये होंगे, थोड़ा उठो। अच्छा।

मातायें जो पहली बार मिल रही है, वह उठो। यह सब पहली बारी आये हैं। अच्छा पाण्डव जो पहले बारी आये हैं वह उठो। बापदादा को खुशी है, क्यों? बच्चों ने सेवा अच्छी की है। सेवा का सबूत बापदादा ने देखा। इस सीजन में मैजारिटी हर ग्रुप में पहले बारी मिलने वाले आधा से भी ज्यादा हैं। इसलिए जिन बच्चों ने मेगा प्रोग्राम किया वा अपने-अपने स्थान में सेवा की है और सबूत दिया है उन सभी बच्चों को बापदादा सेवा की मुबारक, दिल की दुआयें दे रहे हैं। अभी आगे क्या करना है?

दादी ने सन्देश भेजा, आगे क्या करना है? तो बापदादा बच्चों को देख खुश तो है ही लेकिन आगे के लिए जो भी सम्बन्ध-सम्पर्क में आये हैं उन आत्माओं की विशेष ग्रुप-ग्रुप में हर सेन्टर वाले बुलाकर उनका फाउण्डेशन पक्का करने की पालना करो। रिलेशन तो जोड़ दिया, सम्बन्ध जोड़ा, चाहे कभी-कभी आने वाले, चाहे रेगुलर आने वाले, चाहे सम्पर्क में आये, चाहे सम्बन्ध में आये, लेकिन रिलेशन के साथ-साथ आत्माओं का बाप के साथ कनेक्शन ऐसा मजबूत करो जो ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़े इन्हों को। माया से बार-बार युद्ध नहीं करनी पड़े। मन की लगन ऐसी पक्की करो जो विघ्न आ नहीं सके। जहाँ बाप से लगन है वहाँ विघ्न नहीं आ सकता। असम्भव है। इसलिए सन्देश देने की सेवा करो लेकिन जो सेवा का फल निकला है उस फल को मजबूत बनाओ, पक्का बनाओ। कच्चा फल नहीं रह जाये क्योंकि समय फास्ट जा रहा है। समय का कोई भरोसा नहीं, कब भी क्या भी हो सकता है और अचानक होना है। बापदादा को पता भी है कब होना है लेकिन बतायेंगे नहीं क्योंकि अचानक पेपर होना है। इसलिए जमा का खाता बहुत बढ़ाओ।

वर्तमान समय बापदादा दो बातों पर बार-बार अटेन्शन दिला रहे हैं - एक स्टॉप, बिन्दी लगाओ, प्वाइंट लगाओ। दूसरा - स्टॉक जमा करो। दोनों जरूरी हैं। तीन खज़ाने विशेष जमा करो - एक अपने पुरूषार्थ की प्रालब्ध अर्थात् प्रत्यक्ष फल, वह जमा करो। दूसरा - सदा सन्तुष्ट रहना, सन्तुष्ट करना। सिर्फ रहना नहीं, करना भी। उसके फल स्वरूप दुआयें जमा करो। दुआओं का खाता कभी-कभी कोई बच्चे जमा करते हैं लेकिन चलते-चलते कोई छोटी-मोटी बात में कनफ्यूज हो करके, हिम्मतहीन हो करके जमा हुए खज़ाने में भी लकीर लगा देते हैं। तो दुआओं का खाता भी जमा हो। उसकी विधि सन्तुष्ट रहना, सन्तुष्ट करना। तीसरा - सेवा द्वारा सेवा का फल जमा करना या खज़ाना जमा करना और सेवा में भी विशेष निमित्त भाव, निर्मान भाव, निर्मल वाणी। बेहद की सेवा। मेरा नहीं, बाबा। बाबा करावनहार मुझ करनहार से करा रहा है, यह है बेहद की सेवा। यह तीनों खाते चेक करो -तीनों ही खाते जमा हैं? मेरापन का अभाव हो। इच्छा मात्रम् अविद्या। सोचते हैं इस वर्ष में क्या करना है? सीजन पूरी हो रही है अब 6 मास क्या करना है? तो एक तो खाते जमा करना, चेक करना अच्छी तरह से। कहाँ कोने में भी हद की इच्छा तो नहीं है? मैं और मेरापन तो नहीं है? लेवता तो नहीं है? विधाता बनो, लेवता नहीं। न नाम, न मान, न शान, किसी के भी लेवता नहीं, दाता, विधाता बनो।

अभी दु:ख बहुत-बहुत बढ़ रहा है, बढ़ता रहेगा। इसलिए मास्टर सूर्य बन अनुभूति की किरणें फैलाओ। जैसे सूर्य एक ही समय में कितनी प्राप्तियां कराता है, एक प्राप्ति नहीं कराता। सिर्फ रोशनी नहीं देता, पावर भी देता है। अनेक प्राप्तियां कराता है। ऐसे आप सभी इन 6 मास में ज्ञान सूर्य बन सुख की, खुशी की, शान्ति की, सहयोग की किरणें फैलाओ। अनुभूति कराओ। आपकी सूरत को देखते ही दु:ख की लहर में कम से कम मुस्कान आ जाये। आपकी दृष्टि से हिम्मत आ जाये। तो यह अटेन्शन देना है। विधाता बनना है, तपस्वी बनना है। ऐसी तपस्या करो जो तपस्या की ज्वाला कोई न कोई अनुभूति कराये। सिर्फ वाणी नहीं सुनें, अनुभूति कराओ। अनुभूति अमर होती है। सिर्फ वाणी थोड़ा समय अच्छी लगती है सदा याद नहीं रहती। इसलिए अनुभव की अथॉरिटी बन अनुभव कराओ। जो भी सम्बन्ध-सम्पर्क में आ रहे हैं उन्हों को हिम्मत, उमंग-उत्साह अपने सहयोग से बापदादा के कनेक्शन से दिलाओ। ज्यादा मेहनत नहीं कराओ। न खुद मेहनत करो न औरों को कराओ। निमित्त हैं ना! तो वायब्रेशन ऐसे उमंग-उत्साह का बनाओ जो गम्भीर भी उमंग-उत्साह में आ जाये। मन नाचने लगे खुशी में। सुना क्या करना है? देखेंगे रिजल्ट। किस स्थान ने कितनी आत्माओं को दृढ़ बनाया, खुद दृढ़ बने, कितनी आत्माओं को दृढ़ बनाया, साधारण पोतामेल नहीं देखेंगे, भूल नहीं की, झूठ नहीं बोला, कोई विकर्म नहीं किया, लेकिन कितनी आत्माओं को उमंग-उत्साह में लाया, अनुभूति कराई, दृढ़ता की चाबी दी। ठीक है ना, करना ही है ना। बापदादा भी क्यों कहे कि करेंगे! नहीं, करना ही है। आप नहीं करेंगे तो कौन करेगा? पीछे आने वाले? आप ही कल्प-कल्प बाप से अधिकारी बने थे, बने हैं और हर कल्प बनेंगे। ऐसा दृढ़ता पूर्वक बच्चों का संगठन बापदादा को देखना ही है। ठीक है ना! हाथ उठाओ, बनना ही है, मन का हाथ उठाओ। दृढ़ निश्चय का हाथ उठाओ। यह तो सब पास हो गये हैं। पास हैं ना? अच्छा।

सभी खुश हैं? प्रबन्ध से ज्यादा आ गये हैं। (23 हजार से भी अधिक पहुंच गये हैं) कोई बात नहीं, जब ज्यादा आयेंगे तो दादी का संकल्प चलेगा ना, बढ़ाने का। भले आये। अच्छा है - हाल को कभी तो छोटा होना ही चाहिए। होना चाहिए ना! पहली लाइन वाले होना चाहिए ना। तब तो बनायेंगे ना! ड्रामा में वृद्धि होनी ही है। सेवाधारी थक तो नहीं जाते? किसका टर्न है अभी? गुजरात का है। गुजरात तो बड़ा है। गुजरात वाले उठो। आधा हाल तो गुजरात है। (7 हजार हैं) तो गुजरात के सेवाधारी बहुत आये हैं इसलिए सेवा लेने वाले भी बहुत आ गये हैं। थक तो नहीं गये? नहीं। मातायें, मातायें रोटी बेल-बेल कर थक गई? नहीं थकी। सबसे मेहनत का काम है रोटी बनाना। गुजरात वालों को वरदान है - जैसे देश के हिसाब से समीप है, ऐसे ही बापदादा के दिल के भी समीप रहना है। रहते भी हैं, रहना भी है। बापदादा ने देखा कि कभी भी कोई भी आवश्यकता में गुजरात हाज़िर हो जाता है। तो हाज़िर होने वाली आत्माओं के लिए बापदादा भी सदा हाज़िर है।

अच्छा - आज बापदादा को सन्देश ज्ञान सरोवर, पाण्डव भवन और शान्तिवन वालों ने दिया है कि हमें दूर बैठे नजदीक देखना। तो बापदादा सभी स्थान निवासी शार्ट में सभी तरफ के मधुबन निवासी चाहे बहनें, चाहे भाई सभी को सम्मुख देख रहे हैं। दूर नहीं है, दिल पर हैं और बापदादा दिल से याद प्यार दे रहे हैं। वैसे तो दिखाई नहीं देते, आज विशेष दिखाई दे रहे हैं। अच्छा।

डबल विदेशी:- हाथ हिलाओ। बापदादा ने सभी डबल विदेशी बच्चों की जो रिफ्रेशमेंट हुई है, वह देखा। चार्ट अच्छा बनाया है। अच्छा किया है और अच्छे ते अच्छे ही रहना है। कभी भी कोई पूछे - हालचाल क्या है?तो सभी का एक ही जवाब हो - कुशल हाल है, फरिश्ते की चाल है। ठीक है ना। पसन्द है? ऐसे नहीं, अमेरिका अफ्रीका में जाकर बदल जाओ। बदलना नहीं और उड़ना है और उड़ाना है। उमंग उत्साह के पंख सदा हैं ही। दूसरों को भी उमंग-उत्साह के पंख लगाने हैं। यह अच्छा है, बापदादा सब समाचार सुनते रहते हैं। मधुबन का लाभ अच्छे ते अच्छा उठाने का प्रोग्राम बनाते हैं, यह देखके सुनके बापदादा खुश होते हैं। सिर्फ अमर भव का वरदान भूलना नहीं, अमर भव। 60 देशों से आये हैं। 60 देशों के एक-एक भिन्न-भिन्न देश वाले हाथ उठाओ, देखें 60 हैं, जो आस्ट्रेलिया से आये, अफ्रीका से आये, अमेरिका से आयें, वह हाथ उठाओ। भले पधारे। अच्छा है बापदादा और सर्व ब्राह्मण परिवार भी आप सबको देखके खुश होते हैं। क्यों जितने देशों में आप कर रहे हो, उतने देशों की भाषा सीखने के लिए भारतवासियों को सहयोग दे दिया आपने। इसीलिए आप सबको देखके खुश होते हैं। अच्छे, उमंग-उत्साह में हैं और सदा रहने वाले हैं। सब टीचर्स ठीक हैं ना! बहुत मेहनत की कि उमंग-उत्साह में रहे? अच्छा प्रोग्राम बनाते हैं, बापदादा खुश होते हैं। अभी बापदादा डबल विदेशियों से एक बात चाहते हैं - सुनायें?

बापदादा ने सुना है कि डबल विदेशी ईमेल बड़े लम्बे-लम्बे करते हैं। जनक बच्ची को बहुत बिजी कर दिया है। रात को जागना पड़ता है। तो यह भी शार्टकट करते जाओ, लम्बा नहीं। ठीक है ना! शार्ट तो हो सकता है। तो ठीक है? शार्ट करेंगे? भले समाचार भेजो लेकिन शार्ट, 3-4 लाइन, ज्यादा में ज्यादा 5 लाइन में। हो सकता है ना! जो शार्टकट करेंगे वह हाथ उठाओ। जो करते ही नहीं हैं वह हाथ नहीं उठाते हैं, होशियार हैं। अच्छा है। अच्छा।

माताओं को भावना और प्यार की मुबारक हो विशेष। पाण्डवों को सदा नम्बरवन और विन करने की मुबारक हो और आये हुए निशानी वी.आई.पी. उन सभी बच्चों को भी सदा हर कदम में उमंग-उत्साह द्वारा आगे कनेक्शन बढ़ाने की, कदम में पदम की कमाई जमा करने की मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो।

अच्छा - चारों ओर के दिलतख्तनशीन बच्चों को, दूर बैठे भी परमात्म प्यार का अनुभव करने वाले बच्चों को, सदा होली अर्थात् पवित्रता का फाउण्डेशन दृढ़ करने वाले, स्वप्न मात्र भी अपवित्रता के अंशमात्र से भी दूर रहने वाले महावीर, महावीरनी बच्चों को, सदा हर समय सर्व जमा का खाता, जमा करने वाले सम्पन्न बच्चों को, सदा सन्तुष्टमणि बन सन्तुष्ट रहने और सन्तुष्ट करने वाले बाप समान बच्चों को बापदादा का यादप्यार, दुआयें और नमस्ते।

दादियों से:- दादियां तो गुरू भाई हैं ना, तो साथ में बैठो। तो भाई साथ में बैठते हैं। अच्छा है। बापदादा रोज़ स्नेह की मालिश करते हैं। निमित्त है ना! यह मालिश चला रही है। अच्छा है - आप सभी का एक्जैम्पुल देख करके सभी को हिम्मत आती है। निमित्त दादियों के समान सेवा में, निमित्त भाव में आगे बढ़ना है। अच्छा है आप लोगों का यह जो पक्का निश्चय है ना - करावनहार करा रहा है, चलाने वाला चला रहा है। यह निमित्त भाव सेवा करा रहा है। मैं पन है? कुछ भी मैं पन आता है? अच्छा है। सारे विश्व के आगे निमित्त एक्जैम्पुल है ना। तो बापदादा भी सदा विशेष प्यार और दुआयें देते ही रहते हैं। अच्छा। बहुत आये हैं तो अच्छा है ना! लास्ट टर्न फास्ट गया है। अच्छा।

डबल विदेशी मुख्य टीचर्स बहिनों से:- सभी मिलके सभी की पालना करने के निमित्त बनते हो यह बहुत अच्छा पार्ट बजाते हो। खुद भी रिफ्रेश हो जाते हो और दूसरों को भी रिफ्रेश कर देते हो। अच्छा प्रोग्राम बनाते हो। बापदादा को पसन्द है। खुद रिफ्रेश होंगे तब तो रिफ्रेश करेंगे। बहुत अच्छा। सभी ने रिफ्रेशमेंट अच्छी की। बापदादा खुश है। बहुत अच्छा।