04-09-05   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


शिक्षा के साथ क्षमा और रहम को अपना लो। दुआयें दो, दुआयें लो तो आपका घर आश्रम बन जायेगा

आज बापदादा सर्व बच्चों के मस्तक में प्युरिटी की रेखायें देख रहे हैं क्योंकि ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन ही है पवित्रता। पवित्रता की रेखायें कौन-सी हैं, जानते हो? पवित्रता सर्व को प्रिय है। पवित्रता सुख, शान्ति, प्रेम, आनन्द की जननी है। पवित्रता मानव का सच्चा श्रृंगार है। पवित्रता नहीं तो मानव जीवन का मूल्य नहीं। जैसे देखते हो देवतायें पवित्र हैं, इसलिए ही माननीय और पूजनीय हैं। पवित्रता नहीं तो मानव जीवन को आजकल देख रहे हो। बापदादा ने आप सभी बच्चों को बाह्मण जन्म का वरदान यही दिया - पवित्र भव, योगी भव। जिस आत्मा में पवित्रता है, उसकी चाल, चलन, चेहरा चमकता है इसलिए पवित्रता ही जीवन को श्रेष्ठ बनाने वाली है। वास्तव में आपसब बच्चों का आदि स्वरूप ही पवित्रता है। अनादि स्वरूप भी पवित्रता है। ऐसी पवित्र आत्माओं की विशेषतायें उनकी जीवन में सदा पवित्रता की पर्सनैलिटी दिखाई देती है। पवित्रता की रियलिटी, पवित्रता की रॉयल्टी चेहरे और चाल में दिखाई देती है। यह रेखायें जीवन का श्रृंगार है। रीयल्टी है मेरा अनादि-आदि स्वरूप पवित्र है, यह स्मृति समर्थ बना देती है। रॉयल्टी है - स्वयं भी स्वमान में और हर एक को सम्मान देकर चलने वाला। पर्सनैलिटी है सदा सन्तुष्टता और प्रसन्नता। स्वयं भी सन्तुष्ट और अन्य को भी सन्तुष्ट करने वाले। पवित्रता से प्राप्तियाँ भी बहुत है। बापदादा ने आप सभी बच्चों को क्या-क्या प्राप्ति कराई है, वह जानते हो ना ! कितने खज़ानों से भरपूर किया है। अगर प्राप्तियों को स्मृति में रखें तो भरपूर हो जायें।

सबसे पहला खज़ाना दिया है - ज्ञान का खज़ाना। जिससे जीवन में रहते दुख-अशान्ति से मुक्त हो जाते। व्यर्थ संकल्प, निगेटिव संकल्प, विकल्प, विकर्म से मुक्त हो जाते हैं। अगर कोई भी व्यर्थ संकल्प व विकल्प आता भी है, तो ज्ञान के बल से विजयी बन जाते हैं। दूसरा खज़ाना है - याद, योग। जिससे शक्तियों की प्राप्ति होती है और शक्तियों के आधार से सर्व समस्याओं को, सर्व विघ्नों को सहज पार कर लेते हैं। तीसरा खज़ाना है - धारणाओं का, जिससे सर्वगुणों की प्राप्ति होती है। और चौथा खज़ाना है - सेवा का। सेवा करने से, जिसकी सेवा करते हो उसकी दुआयें मिलती है, खुशी प्राप्त होती हैं।

इतने खज़ाने बाप से आप सभी बच्चों को प्राप्त होते हैं। बाप सभी को एक जैसे ही खज़ाने देते हैं। कोई को कम, कोई को ज्यादा नहीं देते हैं। लेकिन लेनेवालों में फर्क हो जाता है। कोई बच्चे तो खज़ाने को प्राप्त कर खाते, पीते, मौज करते और फिर मौज में खत्म कर देते हैं। और कोई बच्चे खाते, पीते, मौज करते जमा भी करते हैं। और कोई बच्चे कार्य में भी लगाते और बढाते भी जाते हैं। बढाने की चाबी है- खज़ाने को स्व के प्रति और दूसरों के प्रति यूज करना। जो यूज करता है वह बढ़ाता है। तो अपने आपसे पूछो कि यह विशेष खज़ाने जमा हैं? जमा हैं? क्या कहेंगे? हाँ या थोड़ा-थोड़ा? जिसके पास यह खज़ाने जमा हैं वह सदा भरपूर रहता है। देखो कोई भी चीज़ भरपूर रहती है ना, तो हलचल नही होती है। अगर भरपूर नहीं होती तो हलचल होती है, हिलती है। कोई भी चीज़ को अगर पूरी रीति से भर नहीं दो तो वह हिलती है, तो यहाँ भी अगर सर्व खज़ानों से भरपूर नही हैं, तो हलचल होती है। सदा यह नशा रहे कि बाप के खज़ाने मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है। बाप ने दिया, आपने लिया तो सब खज़ाने किसके हुए? आपके हो गये ना। तो जिसके पास खज़ाने हैं, वह कितना नशे में रहता है? जैसे छोटा-सा राजा का लड़का राजकुमार होता है। पता भी नही होता है कि बाप के पास क्या-क्या खज़ाना है लेकिन नशा रहता है कि बाप के खज़ाने मेरे खज़ाने हैं और खज़ाने की खुशी में रहता है। अगर खुशी कम रहती है तो उसका कारण क्या होता है? बाप ने तो खज़ाने दिये हैं, सुना। लेकिन एक हैं सुननेवाले, दूसरे हैं समानेवाले। जो समानेवाले हैं वह नशे में रहते हैं।

आज नये-नये बच्चे भी आये हैं। बापदादा आप लक्की बच्चों को आप सबके भाग्य की मुबारक दे रहे हैं। अपने भाग्य को पहचाना। पहचाना है? परमात्म-प्यार, अविनाशी प्यार जो सिर्फ एक जन्म नहीं चलता, अनेक जन्म सदा ही प्यार कायम रहता है क्योकि यह जो समय चल रहा है, यह समय भी संगमयुग भाग्यवान युग है। सतयुग को भी भाग्यवान कहते हैं लेकिन वर्तमान संगमयुग का समय उससे भी भाग्यवान है। क्यों? इस सगमयुग में ही बाप द्वारा अखण्ड भाग्य का वरदान, वर्सा प्राप्त होता है। तो ऐसे संगमयुग में, भाग्यवान समय में आप सभी अपना भाग्य लेने के लिए पहुँच गये हो। बापदादा बच्चों को बहुत एक सहज पुरुषार्थ की विधि सुनाते हैं - सहज चाहते हो ना। मुश्किल तो नहीं चाहते हो ना। इन बच्चों को तो भाग्य की सहज विधि मिल गई है। मिली है ना? सबसे सहज, और कुछ भी नही करना, सिर्फ एक बात करना। एक बात तो कर सकते हो ना ! हाँ करो या ना करो। कहो हाँ जो। तो सबसे सहज विधि है - अमृतवेले से लेके सबको जो भी मिले, उससे दुआयें लो और दुआयें दो। चाहे क्रोधी भी आवे, लेकिन आप उसको भी दुआयें दो और दुआयें लो क्योंकि दुआयें तीव्र पुरुषार्थ का बहुत सहज यन्त्र है। जैसे साइन्स में रॉकेट है ना, तो कितना जल्दी कार्य कर लेता है। ऐसे दुआयें देना और दुआयें लेना, यह भी एक बहुत सहज साधन है आगे बढ़ने का। अमृतवेले बाप से सहज याद से दुआयें लो और सारा दिन दुआयें दो और दुआयें लो। यह कर सकते हो? कर सकते हो तो हाथ उठाओ। कोई बददुआ दे तो क्या करेंगे? आपको बार-बार तंग करे तो? देखो, आप परमात्मा के बच्चे दाता के बच्चे दाता हो ना ? मास्टर दाता तो हो। तो दाता का काम क्या होता है? देना। तो सबसे अच्छी चीज़ है दुआयें देना। कैसा भी व्यक्ति हो, लेकिन है तो आपका भाई-बहन। परमात्मा के बच्चे तो भाई-बहन हो ना। तो परमात्मा का बच्चा है, मेरा ईश्वरीय भाई है, ईश्वरीय बहन है, उसको क्या देंगे? बददुआ देंगे क्या? बाप कभी बद्दुआ देता है? देगा? देता है? हाँ या ना? हाँ-ना करो। बहुत खुश रहेंगे। क्यों? अगर बद्दुआ वाले को भी आप दुआ देंगे, वह दे न दे, लेकिन आप दुआ लेंगे, तो दु:ख क्यों होगा। बापदादा आप आये हुए बच्चों को एक वरदान देता है- वरदान याद रखेंगे तो सदा खुश रहेंगे। वरदान सुनेंगे? सुनेंगे।

वरदान है- अगर आपको कोई दुख दे तो भी आप दुख लेना नहीं। वह दे लेकिन आप नही लेना। क्योंकि देनेवाले ने दे दिया, लेकिन लेनेवाले तो आप हो ना। देनेवाला, लेनेवाला नहीं है। अगर वह बुरी चीज़ देता है, दुख देता है, अशान्ति देता है, तो बुरी चीज़ है ना। आपको दुख पसन्द है? नहीं पसन्द है ना। तो बुरी चीज़ हो गई ना। तो बुरी चीज़ ली जाती है क्या? कोई आपको बुरी चीज़ देवे तो आप ले लेंगे? लेंगे? नही लेंगे। तो लेते क्यों हो? ले तो लेते हो ना। अगर दुख ले लेते हो तो दुःखी कौन होता है? आप होते हो या वह होता है? लेने वाला ज्यादा दु:खी होता है। अगर अभी से दु:ख लेंगे नहीं तो आधा दु:ख तो आपका दूर हो गया। लेंगे ही नहीं ना। और आप दु:ख के बजाए उसको सुख देंगे तो दुआयें मिलेगी ना। तो सुखी भी रहेंगे और दुआओं का खज़ाना भी भरपूर होता जायेगा। हर आत्मा से, कैसी भी हो आप दुआयें लो।

शुभभावना, शुभकामना रखो। कभी-कभी क्या होता है? कोई ऐसा काम करता है ना, तो कोशिश करते हैं शिक्षा देने की। इसको ठीक कर दूँ, शिक्षा देते हो। शिक्षा दो लेकिन शिक्षा देने की सर्वोत्तम विधि है कि क्षमा का रूप बनके शिक्षा दो। सिर्फ शिक्षा नहीं दो, रहम-क्षमा भी करो और शिक्षा भी दो। दो शब्द याद रखो - शिक्षा और क्षमा-रहम। अगर रहमदिल बनके उसको शिक्षा देंगे तो आपकी शिक्षा काम करेगी। अगर रहमदिल बनके नहीं देंगे, तो शिक्षा एक कान से सुनेंगे दूसरे कान से निकल जायेगी। शिक्षा धारण नहीं होगी। ऐसे है ना? अनुभव है? आप भी किसीका शिक्षक तो नही बन जाते? शिक्षक बनना जल्दी आता है लेकिन क्षमा करना, दोनों साथ-साथ चाहिए। अभी से रहम। रहम करने की विधि है शुभभावना, शुभकामना। जैसे कहते हैं ना सच्चा प्यार पत्थर को भी पानी कर देता है, ऐसे ही क्षमा स्वरूप से शिक्षा देने से आपका कार्य जो चाहते हो, यह नही करे, यह नहीं हो, वह प्रत्यक्ष दिखाई देगा। आपके रहमदिल बन शिक्षा देने का प्रभाव उसकी कठोरदिल भी परिवर्तन हो जायेगी। तो क्या वरदान मिला? न दुःख देना, न दु:ख लेना। पसन्द है? पसन्द है तो अभी लेना नहीं। गलती नही करना। जब बाप दु:ख नहीं देता तो फालो फादर तो करना है ना? कर रहे हैं। कभी-कभी थोड़ा डाँट देते हो। डाँटना नहीं। रहम करो। रहम के साथ शिक्षा दो। बार-बार किसको डाँटने से और ही आत्मा जो है ना, वह दुश्मन बन जाती है। घृणा आ जाती है। परमात्म बच्चे हो ना। तो जैसे बाप पतित को भी पावन बनाने वाला है, तो आप दुःखी को सुख नही दे सकते हो? अभी जाकर ट्रायल करना, ट्रायल करेंगे ना। तो पहले चैरिटी बिगन्स एट होम। परिवार में अगर कोई दु:ख देवे, तो भी दु:ख लेना नहीं। दुआयें देना, रहमदिल बनना। पहले घरवालों पर करो। आपके घर का प्रभाव मोहल्ले में पड़ेगा, मोहल्ले का प्रभाव देश में पड़ेगा, १ देश का प्रभाव विश्व में पड़ेगा। सहज है ना। अपने परिवार में शुरू करो क्योंकि देखो एक भी अगर क्रोध करता है तो घर का वातावरण क्या हो जाता है? घर लगता है या युद्ध का मैदान लगता है? उस समय अच्छा लगता है? नहीं लगता है ना ?

आप लोगों के लिए भी है (आज वी. आई.पी. के साथ मधुबन वाले समर्पित भाई-बहनें भी सामने बैठे हैं)। अपने-अपने साथियों से, अपने-अपने कार्यकर्ताओं से न दुख लेना, न दु:ख देना। दुआयें देना और दुआयें लेना। अगर आप अधिकार से ऐसे समय पर भी दिल से मेरा बाबा कहेंगे, परमात्मा बाबा, मेरा बाबा, तो कहावत है कि भगवान सदा हाजिर है। अगर आपने दिल से, अधिकार रूप में ऐसे समय पर मेरा बाबा कहा, तो बाप जरूर हाजिर हो जायेगा। क्योंकि बाप किसलिए है? बच्चों के लिए तो है। और अधिकारी बच्चे को बाप सहयोग नहीं दे, यह हो ही नहीं सकता है। असम्भव। तो परिवर्तन करके जाना। जैसे आये वैसे नही जाना, परिवर्तन करके ही जाना। क्योंकि टेखो, इतना खर्चा करके आये हो, टिकट तो लगी ना। खर्चा भी किया, समय भी दिया, तो उसकी वैल्यू तो रखेंगे ना। तो वैल्यू है- स्वपरिवर्तन से पहले घर का परिवर्तन, फिर विश्व का, देश का परिवर्तन। आपका घर आश्रम बन जाये। घर नहीं, आश्रम। वैसे भी आश्रम ही कहते हैं, गृहस्थ आश्रम, लेकिन आज आश्रम नहीं हैं। आश्रम अलग है, घर अलग है। तो घर को आश्रम बनाना। दुआयें देना और लेना, यह आश्रम का कार्य है। आपका घर मन्दिर बन जायेगा। मन्दिर में मूर्ति क्या करती है? दुआयें देती है ना। मूर्ति के आगे जाकर क्या कहते हैं? दुआ दो। मर्सी, मर्सी कहके चिल्लाते हैं। तो आपको भी क्या देना है? दुआ। ईश्वरीय प्यार दो, आत्मिक प्यार। शरीर का प्यार नहीं, आत्मिक प्यार। आज प्यार है तो स्वार्थ का प्यार है। सच्ची दिल का प्यार नहीं है। स्वार्थ होगा तो प्यार देंगे, स्वार्थ नहीं होगा तो डोंट-केयर। तो आप क्या करेंगे? आत्मिक प्यार देना, दुआ देना, दुख न लेना, न दु:ख देना। देखो आपको चांस मिला है, बापदादा को भी ख़ुशी है। इतने जो भी सब आये हैं, (भारत के करीब २५० वी.आई.पी रिट्रीट में आये हुए हैं)| इतने घर तो आश्रम बनेंगे ना। बनायेंगे ना? पक्का? कि थोड़ा-थोडा कच्चा? जो समझते हैं कुछ भी हो जाए, थोडा सहन तो करना पडेगा, समाने की शक्ति कार्य में लगानी पड़ेगी, लेकिन सहनशक्ति का फल बड़ा मीठा होता है। सहन करना पड़ता है लेकिन फल बड़ा मीठा होता है। तो जो पक्का वायदा करते हैं, घर-घर को स्वर्ग बनायेंगे, मन्दिर बनायेंगे, आश्रम बनायेंगे, वह हाथ उठाओ। देखा-देखी में नहीं उठाना क्योंकि बापदादा हिसाब लेगा ना फिर। देखकर नहीं उठाना। सच्चा-सच्चा मन का हाथ, मन से हाथ उठाओ। अच्छा। दादियाँ, इनको इसकी क्या प्राइज देंगे? हाँ बोलो, दादी इतने मन्दिर बन जायेंगे तो आप उसको क्या प्राइज देंगी? (अपने घरवालों को ले आवे)। यह तो प्राइज नहीं दी, यह तो काम सुना दिया। (बाबा जो आज्ञा करेंगे)। देखो, प्राइज तो आपको मिल जायेगी, कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन -लेकिन है? लेकिन बोलो। आप जाने के बाद अपनी धारणा से परिवर्तन करना और 15 दिन के बाद, मास के बाद अपनी रिजल्ट लिखना। जो एक मास भी दुख नही लेगा, न देगा, उसको बहुत अच्छी प्राइज देंगे। अगर आप आयेंगे तो मुबारक है, अगर नहीं आ सकेंगे तो भी सेंटर पर भेजेंगे।

आज विशेष इन्हों के प्रति आना हुआ है ना तो कमाल करके दिखाना। परमात्म बच्चे हो, कमाल नहीं करेंगे तो क्या करेंगे ? धमाल नहीं करना, कमाल करना। अगर कोई गलती से आपके पास बुरा संकल्प आ जाये, तो क्या करेंगे? आयेगा तो सही, क्योंकि आपने बहुत समय बुराई को पाल के रखा है, तो देखो, पशु जिसे पालते हैं उसको अगर दूर भी छोड़कर आते हैं, तो वह फिर वापस आ जाता है। तो मानो आपने हाथ तो उठाया, बहुत अच्छा किया लेकिन गलती से कोई कमज़ोरी आ जाए, तो क्या करेंगे? कमज़ोरी लाने देंगे? देखो, इसकी भी विधि बताते हैं। आपने वायदा तो किया ना, बुराई दे दिया ना। बुराई बाप को दे दी ना। अच्छा कोई को कोई चीज़ दे देते हैं, फिर अगर गलती से आपके पास आ जाती है तो आप क्या करेंगे? अपने पास रखेंगे कि वापस करेंगे? वापस करेंगे ना? तो अगर आपके पास थोड़ी क्रोध की रेखा, लोभ की, मोह की, अभिमान की, गलती से आ भी जाये, क्योंकि बहुत समय रखा है, तो उसे वापस कर देना। बाबा, बाबा आप अपनी चीज़ आप सम्भालो, मेरी नहीं है। बाप तो सागर है ना। सागर में समा देना। आप यूज नहीं करना क्योंकि अमानत हो गई ना, तो अमानत में खयानत नहीं की जाती है। बाप को दे दो, बाबा आप जानो, यह जाने। मैं नहीं यूज करूँगा। छोटे बच्चों को भी आप सिखाते हो, मिट्टी नहीं खाना। सिखाते हो ना ? और बच्चा फिर मिट्टी खा लेता है। उसको मिट्टी अच्छी लगती है फिर आप क्या करते हो? बार-बार उसके हाथ को छुड़ाते हो या खाने देते हो? छुड़ाते हो ना। तो यहाँ अपने मन को छुड़ाना। मन में ही तो आयेगा ना। तो अपने मन का मालिक बनके इस चीज़ को छोड़ना। विधि ठीक है ना। करेंगे तो सहज हो जायेगा। हिम्मत नहीं छोडना। आपकी हिम्मत का एक कदम और हजार कदम बाप की मदद का है ही। अनुभव करके देखना। हिम्मत नहीं हारना, दिलशिकस्त नहीं होना। सर्वशक्तिवान के बच्चे हैं, दिलशिकस्त नहीं होना। हिम्मत नहीं हारना, दृढ़सकल्प करना, सफलता आपका जन्मसिद्ध अधिकार है।

बहुत अच्छा किया। अच्छा अभी क्या करना है? इसको कहते हैं वी. आई .पी. ग्रुप। देखो, आपको टाइटल अच्छा मिला है। अभी वी.आई.पी. नही बनना, वी.वी आई.पी.। वी.आई.पी. तो कॉमन है, लेकिन वी.वी.आई.पी। विशेष आत्मा आई पी। अच्छा। आज मधुबन निवासियों को चांस मिला है। यह सभी मधुबन निवासी आप सब आये हुए भाई-बहनों को बहुत थैंक्स दे रहे हैं कि आपके कारण मधुबन निवासी भी मिले क्योंकि आपका ग्रूप छोटा है। नहीं तो बहुत हजारों का ग्रुप होता है।

तो एक मास के बाद अपने सेन्टर की तरफ से रिजल्ट लिखना। फिर प्राइज जरूर देंगे। अच्छा। अच्छा, अभी क्या करना है? (जोन वाइज मिलना है)

दिल्ली जोन- दिल्ली निवासियों को तो सेवा का चांस बहुत अच्छा है क्योंकि दिल्ली की जो भी सेवायें होती हैं, वह विश्व में फैलती है। दिल्ली का आवाज विश्व तक पहुँचता है। तो दिल्ली से अभी कितने आये हैं? (५०) तो जब दिल्ली में ५० घर आश्रम बन जायेंगे तो नाम कितना होगा। वायुमण्डल तो बदलेगा ना क्योंकि कोशिश तो सब करते हैं कि घर-घर में हर आत्मा शान्त हो जाए, सुखी हो जाए। तो जब दुआ देंगे और लेंगे तो घर में सुख और शान्ति का वायब्रेशन होगा और वह आवाज वायुमण्डल में फैलेगा। एक तो घर आश्रम बनेगा और वायुमण्डल भी फैलेगा। डबल सेवा हो जायेगी। तो क्या बनेंगे? दिल्ली वाले नम्बर वन बनेंगे या दो भी चलेगा? एक नम्बर लेना है या दो भी चलेगा? (एक नम्बर लेना है) अच्छा, फिर तो सब ताली बजाओ। बहुत अच्छा हिम्मतवान बच्चों को बापदादा की पदमगुणा मदद है ही है। अच्छा।

पंजाव-हरियाणा, हिमाचल, जम्बू कश्मीर और उत्तरांचल- अच्छा है| पंजाब में नदियाँ बहुत है। तो नदियों का काम क्या है? नदियाँ सभी को शीतलता देती है। तो आप परमात्म बच्चे पंजाब में शीतलता, शान्ति का वायुमण्डल फैलायेंगे। वैसे पंजाब को शेर भी कहते हैं। पंजाब शेर है, तो शेर किससे डरता नहीं है, डराता है। डरता नहीं है तो आप भी माया से डरना नहीं। मास्टर सर्वशक्तिवान बन सामना करना, ठीक है। इतनी ताकत है पंजाब में? करेंगे? चाहे उत्तरांचल हो, चाहे क्या भी हो, सभी करेंगे? तो हिम्मते बच्चे मददे बाप। कुछ भी आवे, मेरा बाबा कहने से सब खत्म हो जायेगा। दिल से कहना, सिर्फ मुख से नही, मन से कहेंगे तो सब दु:ख दूर हो जायेंगे। अच्छा।

आन्ध्र प्रदेश- (करीब ४० हैं) सदा अपने को, हम विजयीरत्न हैं क्योंकि परमात्मा का साथ है तो परमात्मा जिसका साथी है वह सदा विजयी है ही है। तो सदा अपने को परमात्म साथी पाण्डव अनुभव करना। विजय आपके गले का हार है, यही सदा स्मृति में रखना। गले में विजय की माला पिरोई हुई है। यह निश्चय और नशा रखना। ठीक है ना ! अभी आन्ध्रा नम्बर लेना। वह कहते हैं नम्बरवन और आप भी नम्बरवन बनना है तो नंबरटू बनके क्या करेंगे। तो आप भी नम्बरवन बनना। विन करेंगे तो वन होंगे। विन करना आता है ना, तो विन, वन। अच्छा।

मुम्बई और महाराष्ट्र- महाराष्ट्र का अर्थ ही है महान, महान हो ना। अभी बाप की याद और सेवा द्वारा अपने को महान बनाये औरों को भी महान बनाना। जैसा नाम है ना महाराष्ट्र। तो कोई महान कार्य करेंगे ना। तो महान बनना ही है, और महान कार्य करके दिखाना है। ऐसे पक्के हैं? पक्के? महान तो पक्के ही होते हैं। बापदादा को खुशी है हर एक जो भी आये हैं वह हिम्मतवाले हैं। घबराने वाले नहीं हैं। इमलिए मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो।

कर्नाटक- कर्नाटक वालों को बापदादा कहते हैं, देखो नाम है, कर-नाटक, नाटक कर। तो इस सृष्टि को भी नाटक कहते हैं, बेहद का ड्रामा। इसमें कर्नाटक वाले क्या बजायेंगे? हीरो पार्ट बजाएंगे? हीरो। अच्छा इसके लिए क्या करना पडेगा। बहुत छोटी-सी बात है, जीरो का याद करना तो हीरो बन जायेंगे। सहज है ना। और जीरो स्वयं आत्मा भी है, और जीरो बाप भी है, तो जीरो को याद करना, हीरो बन पार्ट बजाना, ठीक है ना। बहुत अच्छा। भले आये। मुबारक हो।

तामिलनाडु- देखो पाण्डव भी पाँच थे| आप अगर थोडे हैं, कोई हर्जा नही। लेकिन पाँच पाण्डव थाडे होते भी विजयी बन गये। तो आप आये थोड़े हो लेकिन विजयीरत्न हैं, और सदा विजयी रहेंगे, संख्या कम है तो कोई हर्जा नहीं लेकिन विजयी हैं, विजयी रहेंगे। तो विजय का वरदान आप सबका विशेष है। ठीक है, विजयी बनेंगे।

गुजरात- बापदादा आप सबके मस्तक में क्या देख रहें हैं? बापदादा आपके मस्तक में तीन बिन्दुओं का तिलक देख रहें हैं। वह तीन बिन्दियाँ हैं, एक आप आत्मा बिन्दी, बिन्दी हो ना। बाप भी बिन्दी, और जो कुछ ड्रामा में बीत जाता है तो उसको फुलस्टॉप लगाया जाता है, तो फुलस्टॉप भी बिन्दी होता है ना। तो आप सबके मस्तक में तीन बिन्दुओं का तिलक देख रहें हैं। अभी रोज अमृतवेले उठकर बापदादा से मिलन मनायें शक्ति लें, दुआयें लें, अपने आपको तीन बिन्दुओं का तिलक लगाना। तिलक मस्तक में ही लगाया जाता है क्योंकि मस्तक स्मृति का स्थान है। तो आप स्मृति का, तीन बिन्दुओं का रोज तिलक लगाना। तिलक लगाना आता है ना। अभी यह तिलक लगाना तो सारा दिन बहुत सहयोग मिलेगा। तिलकधारी बन ताजधारी बन जायेंगे, तख्तधारी बन जायेंगे। अच्छा।

ईस्टर्न- ईस्ट से क्या निकलता है? सूर्य निकलता है। तो आप ईस्टर्न जोन की तरफ से आये हो तो क्या जाकर करेंगे? ज्ञानसूर्य उदय हो चुका है, इसका परिचय सबको देना। जैसे सूर्य सबको सकाश देता है ना, रोशनी देता है ना, ऐसे आप भी मास्टर हो ना। आप मास्टर ज्ञानसूर्य हो गये तो आप क्या करेंगे? सबको रोशनी देना, सकाश देना। यह है ईस्टर्न जोन का कार्य। ठीक है? बहुत अच्छा। वैसे ईस्टर्न से ही ब्रह्मा बाप निकला, लक्की है। तो आप लोग तो डबल लकी हो गये। स्थान भी लकी आत्मायें भी लकी। अच्छा। बहुत अच्छा।

राजस्थान- नाम ही है राजस्थान। तो राजस्थान में राजायें रहते थे। अभी तो नहीं हैं लेकिन रहते थे। तो आप भी राजा बनके जा रहे हैं। राजा बने? स्वराज्य। स्वराज्य का तिलक लगाया ना। तो हमेशा यही याद रखना कि हम राजस्थान के स्वराज्य अधिकारी हैं। जो स्वराज्य अधिकारी बनता है वह विश्व का राज्य अधिकारी अन्डस्टुड बनता है। तो स्वराज्य कभी ढीला नहीं करना, राजा तो राजा होता है ना। कभी भी कोई कमेंन्द्रियों के वश नहीं होना। राजा बनके ऑर्डर करना, राजा बनके कायदे से चलाना। तो राजस्थान को स्वराज्य अधिकारी का वरदान है। ठीक है ना 'स्वराज्य है ना पक्का'। देखो राजस्थान बहुत नजदीक है तो जो नियरेस्ट होता है वह डियरेस्ट होता है। तो ऐसे ही अपने को अनुभव करना। अच्छा।

यूपी:- तीन हैं। तीन तो त्रिमूर्ति गाई हुई है। तो एक है मास्टर ब्रह्मा, मास्टर विष्णु, मास्टर शंकर, त्रिमूर्ति हो गई। बहुत अच्छा। देखो, परमात्मा भी त्रिमूर्ति शिव कहलाया जाता है। तो आप त्रिमूर्ति भी कमाल करके दिखायेंगे। बापदादा हमेशा छोटा जो होता है ना उसको समान बाप कहते हैं। तो आपकी संख्या थोडी है लेकिन हैं बाप समान। अभी दूसरी बारी अपना ज्यादा संगठन बनाके आना। बनायेंगे ना ? आप समान बनाके फिर बड़े संगठन से प्राइज आके लेना। अच्छा।

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़:- अच्छा है। आप सभी इन्दौर और भोपाल दोनों ऐसी कमाल करके दिखाना जो अबतक किसने की नहीं हो क्योंकि इन्दौर ब्रह्मा बाप ने अपने संकल्प से स्थापन किया था। इन्दौर की विशेषता है, ब्रह्मा बाप की नजर इन्दौर के ऊपर पड़ी थी। तो इन्दौर वाले और भोपाल वाले, हैं तो मध्यप्रदेश। लेकिन ऐसी कमाल करके दिखाना, कम-से-कम एक कमाल यह करना, इजी है कोई-न-कोई ऐसा माइक तैयार करो जिसकी आवाज सुनकर सभी पर, अनेकों के ऊपर, प्रभाव पड़े। अनेकों का कल्याण करने के निमित्त बन जाए। जैसे देखो एक माइक कितना कार्य कर रहा है, कितने सुन रहे हैं। तो ऐसा अथॉरिटी वाला बोल हो, जो अनेक सुन करके परिवर्तन हो जाए, उसको बापदादा कहते हैं माइक। तो कम-से-कम एक माइक तैयार करके आना। ठीक है? कमाल करना। बस सिर्फ मेरा बाबा, मेरी सेवा, यह याद रखना तो सब काम हो जायेगा। अच्छा।

श्रीलंका, मलेशिया, यू.एस.ए.:- देखो विदेश की भी सौगात देख ली ना। श्रीलंका में सेवा बहुत अच्छी की है। बापदादा ने समाचार सुना कि प्रकृति के जल सुनामी की हालत में श्रीलंका वालों ने बहुत सहयोग दिया, आध्यात्मिक भी और चीजों का भी। और बापदादा ने बहुत अच्छी खबर सुनी है कि वहाँ सेवाकेन्द्र खोलने की कोशिश कर रहे हैं, जहाँ आपदायें आई थी, तो यह भी अच्छा प्लैन बना रहे हैं और श्रीलंका का नाम सुन करके तो रावण को जीतने का संकल्प आता है। तो श्रीलंका में रावण का नामनिशान नहीं रहे, रावण वह नहीं, यह 5 बुराईयाँ ही रावण है। 5 विकार नारी में भी है, 5 विकार नर में भी है, तो दोनों का मिला हुआ १० शीश वाला रावण दिखाते हैं। बाकी १० शीशवाला मनुष्य सोयेगा कैसे, खायेगा कैसे, लेकिन यह बुराईयों का सूचक है। तो लंका निवासी बहुत अच्छा प्लैन बना रहें हैं और सारे ब्राह्मण परिवार आपके सहयोगी हैं, बापदादा तो है ही। पहले बापदादा फिर सर्व परिवार भी इस सेवा के सहयोगी हैं। अच्छी उन्नति कर रहे हैं। इसके लिए मुबारक है, पदमगुणा मुबारक। अच्छा।

मलेशिया में भी सेवा का उमंग बहुत है। बापदादा के पास तो सब समाचार भी आते हैं। और अभी-अभी याद भी भेजी है ना। तो मलेशिया में सर्विस का शौक अच्छा है और सेंटर के पीछे सेन्टर खोलते ही जाते हैं और सफलता भी मिलती जाती है इसीलिए मलेशिया वाली सभी ब्राह्मण आत्माओं को जिन्होंने भी यादप्यार भेजा है, पत्र भेजा है, उन सभी बच्चों को पदमगुणा दुआयें और यादप्यार। अच्छा।

आप सभी मधुबन निवासी अपने भाई-बहनों को देखकर बहुत खुश हुए ना। खुश हैं? आप लोगों ने मधुबन में रौनक कर दी। बापदादा कहतें है कि बच्चे मधुबन का श्रृंगार हैं। तो मधुबन वाले, देखो आप लोगों को देखकर बहुत खुश हो रहें हैं। सेवा का चांस दिया तो कितना पुण्य जमा हो गया, इसीलिए खुश हो रहे हैं। अच्छा। यह भी आज का मिलन ड्रामा में नूँधा हुआ था जो रिपीट हुआ और हर कल्प रिपीट होता रहेगा। अच्छा।

चारों ओर के देश विदेश के बच्चों की याद बापदादा को मिली है। चाहे फोन द्वारा याद भेजी है, चाहे पत्र द्वारा, चाहे दिल में याद किया है, तो बापदादा सभी बच्चों को चाहे भारत के, चाहे विदेश के रिटर्न में दुआयें और यादप्यार पदमगुणा दे रहें हैं। चारों ओर के परमात्म प्यार के अधिकारी बच्चों को, चारों ओर सर्व खज़ानों से भरपूर, निर्विघ्न, निर्विकल्प, निरव्यर्थ संकल्प रहने वाली श्रेष्ठ आत्माओं को, साथ-साथ सर्व परिवर्तन करने और कराने के उमंग-उत्साह में उड़ने वाले बच्चों को, साथ-साथ बापदादा को सच्ची दिल का समाचार देनेवाले सच्चे दिलवाले बच्चों को विशेष दिलाराम के रूप में, बाप के रूप में, शिक्षक के रूप में, सतगुरू के रूप में पदमगुणा यादप्यार और नमस्ते।

बी.के. गाइड और सेवाधारी- बापदादा सेवाधारी बच्चों को सेवा की मुबारक दे रहे हैं। बहुत अच्छी-अच्छी आत्मायें लाई हैं, हिम्मत वाली लाई हैं, और हिम्मत का प्रत्यक्ष प्रमाण दिखलाने वाली आत्मायें लाई है, इसलिए जो भी जितनों को भी लाये हैं, उतने पदमगुणा मुबारक हो। अच्छा है। गोल्डन चांस भी मिल गया। सेवा का प्रत्यक्ष फल तो मिल गया। ऐसे ही सारे विश्व को बाप के प्यार, बाप के सन्देश का जरूर कार्य करते रहेंगे। करना ही है। है ही इसीलिए निमित्त। तो सच्चे-सच्चे पण्डे तो आप हो। कितनी अच्छी यात्रा करा दी है। बापदादा बच्चों की सेवाको देख खुश होते हैं। तो देख लिया, अच्छे हैं, महारथी हैं, सेवा में महारथी बनके आये हैं। अच्छा। टीचर्स को भी अच्छा चांस मिला है। पाण्डवों को भी अच्छा चांस मिला है।

दादियों से:- दादियों को देख करके सभी खुश हो रहे हो ना। दादियों को प्यार मिला, सबको मिला। अच्छा है, आप सभी निमित्त बने हुए को देख करके हर्षित होते हैं।

मुन्नी बहन से:- निमित्त बने हुए कार्य को अच्छी तरह से चला रही हो, चलाती रहेगी।

 

आप सभी भी निमित्त हो। सबकी नजर पहले मधुबन निवासियों के ऊपर पडती है। मधुबन में निमित्त बनना अर्थात् लाइट हाउस बनना, लाइट देना।

नीलू बहन से:- अच्छा पार्ट बजा रही हो और निर्संकल्प होकर बजाती रहो। बापदादा आपके दिल की बातें जानते हैं।

(दादी रतनमोहिनी ने जापान, हांगकांग, मनीला के भाई-वहनों की याद दी), वहाँ सेवा करके वापस आई हैं - सेवा में कितनो की दुआये मिलती है। दुआये देकर भी आते हो और दुआये लेकर भी आते हो। रिफ्रेश होना अर्थात् दिल में शक्तियो की ज्वाला जग जाती है। सब खुश भी होते है और आपकी सेवा का प्रत्यक्ष फल आपको भी मिल जाता है।

तीनों वड़े भाईयों से - सेवा का फल आपको भी मिल जाता है। तीनो ही मिलके यज्ञ की कई कारोबार सम्भाल रहे हो, सम्भालते रहना, तीनो मिलके। एकने कहा दूसरे ने हो जी किया। ऐसा है ना! बापदादा खुश होते है, जब मिल करके कोई कार्य सफल करते हो। कर रहे हो, करते रहेगे। अच्छा।

(मदुरई के मेगा प्रोग्राम का समाचार बापदादा को सुनाया और सभी की याद दी) बापदादा ने कहा मदुरई व तामिलनाडु के सभी भाई-बहनों को भी बहुत-बहुत याद देना।

(निवैर भाई आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैण्ड सेवा पर जाने की छुट्टी ले रहे हैं) - आस्ट्रेलिया को थोड़ा बल भरना। आस्ट्रेलिया नम्बरवन था। अभी हो रहा है, हो जायेगा। आत्मायें बहुत अच्छी हिम्मत कर आगे बढ रही हैं, लेकिन गुप्त है। अच्छा।

मधुबन निवासी समर्पित भाई-बहनों ने बापदादा से मुलाकात

मधुबन निवासी बच्चों को, जो भी ब्राह्मण हैं वह सभी किस नजर से देखते हैं। जानते हो ना। मधुबन नियासियों को सभी बहुत विशेष नजर से देखते हैं। जैसे स्थान विशेष है, हेडक्वार्टर कहा जाता है। ऐसे ही हर एक मधुबन निवासियों को उसी नजर से देखते हैं। यह विशेष आत्मायें हैं। और आज तो विशेष समर्पित भाई-बहन बैठे हो। समर्पित अर्थात् तन-मन-वस्तु चाहे किसी भी रूप में है, साधन के रूप में है या धन के रूप में है। लेकिन समर्पित अर्थात् जो भी है वह बाप के अर्पण हो गया। उसी को ही समर्पित कहा जाता है। समर्पित अर्थात् जिसमें मेरापन का अंश भी नहीं। कभी गलती से भी मेरापन नहीं है। समर्पित का अर्थ ही है- मेरा एक बाबा, बाप के साथ दादा तो है ही। समर्पित अर्थात् साकार रूप में कर्म में ब्रह्मा बाप समान और निराकारी श्रेष्ठ योग की स्थिति में निराकार शिव बाप के समान। तो ऐसे अपने को समझते हो? न हद का मैंपन, न हद का मेरापन। स्थान भी देखो चाहे पाण्डव भवन है, चाहे शान्तिवन है, चाहे ज्ञान सरोवर है, चाहे हॉस्पिटल है, लेकिन स्थान भी बेहद के मिले हैं। संगठन भी बेहद का मिला है। ऐसे बेहद की स्थिति अनुभव करते हो? जो समझते हैं कि बेहद की स्थिति रहती है, हद का मैं और मेरापन नहीं है, वह हाथ उठाओ। मेरापन नहीं है? फिर तो मधुबन निवासी मैजारिटी पास है। तो दादियों द्वारा पास सर्टीफिकेट मिला है? हाँ सभी कहते हैं, मेरे में मेरापन नहीं है, मैपन नहीं है। आपने (दादी से) सर्टीफिकेट दिया है? (नहीं)| जिन्होंने हाथ उठाया है वो लिखकर दे देवे तो पक्का हो जायेगा। फिर तो बाप समान बन गये ना। देखो, तीन सर्टिफिकेट लेने हैं। एक स्वयं को साक्षी होकर सर्टीफिकेट देना। हाथ उठाने से नही, हाथ तो सभी उठा लेते हैं। कोई भी क्वेश्चन में उठा लेते हैं। मन का हाथ उठे। एक अपने आपको साक्षीदृष्टा बन सर्टिफिकेट दो। और दूसरा- जिन साथियों के साथ कार्य करते हो उनका सर्टिफिकेट चाहिए। तीसरा- दादियों का चाहिए। चौथा- बाप का चाहिए क्योंकि बाप तो सबके मन की गति को देखते हैं। मुख की गति नहीं, मन की गति को देखते हैं। अच्छा है, हिम्मत रखी है हाथ उठाने की, तो हिम्मत को कायम रखना। प्रत्यक्ष रूप में दिखाई देवे कि मधुबन निवासी हर एक सर्टीफिकेट लेने वाला है क्योंकि मधुबन का वायुमण्डल छिपता नहीं है। मधुबन वाले समीप रहते हैं, बाप की पालना, विशेष आत्माओं की पालना मिल रही है। अभी बापदादा मधुबन निवासियों से एक बात चाहते हैं, हर शख्स जो भी सेवा अर्थ निमित्त है, उस सेवा में वायुमण्डल ऐसे स्पष्ट दिखाई दे, जैसे फरिश्ते कर्मयोगी बनके कर्म कर रहे हैं क्योंकि सभी की नजर मधुबन निवासियों की तरफ जाती है। मधुबन में क्या हो रहा है, मधुबन वाले क्या कर रहे हैं। मधुबन में आप नही रहते हो लेकिन वर्ल्ड की स्टेज पर रहते हो। तो स्टेज पर स्वत: ही सभी की नजर जाती है। अच्छा है सेवा में मैजारिटी का सर्टिफिकेट बहुत अच्छा है समान बनने में। अभी बनना है, यह लक्ष्य रखना है। बाप जैसी चलन हो, चेहरा हो, तभी बाप प्रत्यक्ष होगा। तो अभी मधुबन निवासियों को हर संकल्प, बोल....बोल में भी समानता चाहिए। और कर्म, आपस में सम्बन्ध-सम्पर्क, सबमें समानता। यह विशेष अटेन्शन देना है। साधारण है, समानता लानी है। सेवा का बल चला रहा है लेकिन चारों ही सबजेक्ट में अपने को चेक करो। फिर अपने को सर्टीफिकेट दो। अच्छा। आज विशेष मिलना तो हुआ ना। बाप ने तो आपकी आशा पूर्ण की, अभी बाप की आशा पूर्ण करना।

समर्पण होना यह छोटी-सी बात नहीं है। समर्पित उसको कहा जायेगा जो बाप समान सभी सबजेक्ट में हो। बाकी विशेष तो हो ही। मधुबन की सभी आत्माओं को हर एक बहुत बड़े रिगार्ड सै देखते हैं। मधुबन के हैं, मधुबन के हैं। तो काई कमाल करके दिखाना, आपस में छोटा-छोटा संगठन का प्रोग्राम बनाके बाप समान किस-किस बात में हैं. किसमे थोड़ा-सा रहा हुआ है, यह चेक करो। वास्तव में चेकिंग जितनी अपने आप गहरी कर सकते हो, यथार्थ कर सकते हो वैसा दूसरा नही कर सकता। बाकी सभी अच्छी तरह से रह रहे हो ना, कोई कमी तो नहीं है| यह भी भाग्य है। भाग्य ने आपको मधुबन निवासी बनाया है। तो सब खुश हैं? खुश रहत हो कि बीच-बीच में थोडे नाराज़ हा जाते हो? अपने आपको रियलाइज़ करो। रियलाइज अर्थात् मैं जो हूँ, जैसा हूँ, वैसे अपने को समझना। आत्मा हूँ, यह कॉमन है, लेकिन चलते-फिरते महूससता आत्म-अभिमानी की रहती है? इसको कहेंगे रियलाइजेशन। संस्कार है, संस्कार का ज्ञान है, नॉलेज है, संस्कार समाप्त हुए हैं, परिवर्तन हुए हैं व नहीं? यह अपने को महसूस हो, यह नहीं है, यह ठीक है, यह नहीं ठीक है। दूसरा महसूस करायेगा तो महसूस नहीं होता है। तो अपने आपको रियलाइज करने का पाठ पढ़ाना। जैसे सप्ताह कोर्स करते हो ना आत्मा, परमात्मा, योग, ड्रामा, ऐसे अपने आपको रियलाइज करना। अभी रियलाइजेशन का समय है। जो बाप चाहता है वह कर रहा हूँ? सम्बन्ध-सम्पर्क में भी रियलाइज करो, शुभभावना, शुभकामना है? ठीक है। रियलाइजेशन कोर्स अपने आपको कराओ। यह दूसरा नहीं करा सकता। सब कोर्स किया, अभी लास्ट कोर्स है रियलाइजेशन कोर्स। अपने को चलाना नहीं, चलता है, है ही। समय धोखा नहीं दे देवे ना, मधुबन निवासी हो। तो साथ चलने वाले हो ना। बीच में अटकने वाले तो नहीं हो ना। तो रियलाइजेशन कोर्स अपने आपका शुरू करो। एक-एक बात में रियलाइज करो। अच्छा। मिल तो लिया, अभी क्या करना है।

दृष्टि लेनी है तो दृष्टि में बापदादा को सदा रखना है। ऐसे ही दृष्टि नहीं लेनी है। दृष्टि लेना अर्थात् दृष्टि में बाप को समाना। ऐसी दृष्टि लेना। अच्छा।

ओम शान्ति।



21-10-05   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


"सम्पूर्ण और सम्पन्न बनने की डेट फिक्स कर समय प्रमाण अब एवररेडी बनो"

आज बापदादा चारों ओर के बच्चों के तीन रूप देख रहे हैं। जैसे बाप के विशेष तीन सम्बन्ध याद रहते हैं वैसे बच्चों के भी तीन रूप देख हर्षित हो रहे हैं। अपने तीनों ही रूप जानते हो ना। इस समय सभी बच्चे ब्राह्मण रूप में हैं और ब्राह्मण सो लास्ट स्टेज, ब्राह्मण सो फरिश्ता है फिर फरिश्ता सो देवता हो। सबसे विशेष वर्तमान ब्राह्मण जीवन है। ब्राह्मण जीवन अमूल्य है। ब्राह्मण जीवन की विशेषता है प्युरिटी। प्युरिटी ही ब्राह्मण जीवन की रीयल्टी है। प्युरिटी ही ब्राह्मण जीवन की पर्सनैलिटी है। प्युरिटी ही सुख शान्ति की जननी है। जितनी प्युरिटी होगी उतनी सुख और शान्ति जीवन की नेचुरल और नेचर होगी। और प्योर आत्माओं का लक्ष्य है ब्राह्मण सो देवता नहीं लेकिन पहले फरिश्ता बनने का है, फरिश्ता सो देवता है। तो ब्राह्मण सो फरिश्ता, फरिश्ता सो देवता। यह तीन रूप बापदादा सभी बच्चों का देख रहे हैं। आप सभी को अपने तीन रूप सामने आ गये? आ गये? ब्राह्मण तो बन गये, अभी लक्ष्य है फरिश्ता बनने का। यही लक्ष्य है ना! है? फरिश्ता बनना ही है, चेक करो फरिश्तेपन की विशेषतायें जीवन में कितनी दिखाई देती हैं? फरिश्ता अर्थात् जिसका पुराने संसार और पुराने संस्कार से कोई नाता नहीं। फरिश्ता अर्थात् सिर्फ समस्या के समय डबल लाइट नहीं, लेकिन सदा मन्सा-वाचा, संबंध-सम्पर्क में डबल लाइट, हल्का। हल्की चीज़ अच्छी लगती है वा बोझ वाली चीज़ अच्छी लगती है ? क्या अच्छा लगता है? हल्का पसन्द है ना? फरिश्ता अर्थात् जो सर्व का, थोड़ों का नहीं, सर्व का प्यारा और न्यारा हो। सिर्फ प्यारा नहीं, जितना प्यारा उतना ही न्यारा हो। फरिश्ता की निशानी है, वह सर्व का प्रिय होगा। जो भी देखेंगे, जो भी मिलेंगे, जो भी संबंध में आयेंगे, सम्पर्क में आयेंगे वह अनुभव करेंगे कि यह मेरा है। जैसे बाप के लिए सभी अनुभव करते हैं, मेरा है। अनुभव करते हैं ना? ऐसे फरिश्ता अर्थात् हर एक अनुभव करे यह मेरा है। अपनापन का अनुभव हो क्योंकि हल्का होगा ना तो हल्कापन प्रिय बना देता है सबका। सारा ब्राह्मण परिवार अनुभव करे कि यह मेरा है। भारीपन नहीं हो क्योंकि फरिश्ते का अर्थ ही है डबल लाइट। फरिश्ता अर्थात् संकल्प, बोल, कर्म, संबंध, सम्पर्क में बेहद हो। हद नहीं हो। सब अपने हैं और मैं सबका हूँ। जहाँ ज्यादा अपनापन होता है ना वहाँ हल्कापन होता है। संस्कार में भी हल्कापन, तो चेक करो कितना परसेन्ट फरिश्ता स्टेज तक पहुंचे हैं? चेक करना आता है? चेकर भी बन गये हो, मेकर भी बन गये हो। मुबारक हो।

बापदादा ने आप सबके होम वर्क की रिजल्ट देखी। होमवर्क की रिजल्ट लिखी है ना सभी ने। तो रिजल्ट में क्या देखा? बापदादा की शुभ आश है कि कम-से-कम वर्तमान समय सभी बातों में, सात बातें लिखी है ना। कम-से-कम वर्तमान समय प्रमाण मैजारिटी की 75 परसेन्ट जरूर होनी चाहिए। सातों ही बातों में। कोई किसमें कम है, कोई किसमें कम है लेकिन बापदादा की यही शुभ आशा है कि अब समय को देखते हुए जो महारथी समझते हैं अपने को, उन्हों की स्टेज तो 95 परसेन्ट होनी चाहिए। होनी चाहिए ना ? पाण्डव होनी चाहिए? चलो थोड़ा दूसरा नम्बर है तो भी 75 परसेन्ट होनी चाहिए। क्या समझती हैं दादियां? 95 परसेन्ट है? आगे लाइन वाले सभी क्या समझते हैं? 95 परसेन्ट है? और आपकी कितनी होनी चाहिए? 75 परसेन्ट? आप भी 75 समझते हो? अच्छा कल विनाश हो जाए तो? 75 परसेन्ट में जायेंगे? 75 परसेन्ट होगा तो वन वन वन में नहीं आयेंगे। फिर क्या करेंगे? चलो, बापदादा आज के दिन, आज विशेष है ना, तो आज के दिन को बीती सो बीती करते हैं, ठीक है? अच्छा जो कल से 75 कह रहे हैं ना, तो चलो 95 नहीं, 85 तक तो आयेंगे? आयेंगे। परसों अगर विनाश करें, तो 85 तक होंगे? पीछे वाले होंगे? हाथ उठाओ। अच्छा 85 परसेन्ट होगा? (किसी ने कहा 98 परसेन्ट है) मुबारक है, मुख में गुलाबजामुन खा लो क्योंकि देख तो रहे हो, जानते भी हो, कि हो जाना ही है। हो जायेंगे नहीं, होना ही है। गे, गे नहीं करो, हो जायेंगे, देख लेंगे.. कोशिश करेंगे... अब यह भाषा परिवर्तन करो। जो भी संकल्प करो, चेक करो कितनी परसेन्ट निश्चय और सफलतापूर्वक है? अभी चेक करने की स्पीड तीव्र करो। पहले चेक करो फिर कर्म में आओ। ऐसे नहीं जो भी संकल्प आया, जो भी बोल में आया, जो भी संबंध सम्पर्क में हुआ, नहीं। जो वी.वी. आई.पी. होते हैं उनकी चेकिंग कितनी होती है, पता है ना। हर चीज़ पहले चेक होती है फिर कदम रखते हैं। तो अभी दो घण्टे चार घण्टे के बाद चेकिंग नहीं चलेगी। पहले चेकिंग फिर कदम क्योंकि आप तो सृष्टि ड्रामा के, आजकल के वी.वी.आई.पी. जो हैं, वह तो एक जन्म के हैं। वह भी थोड़े समय के लिए हैं। और आप ब्राह्मण सो फरिश्ते कितने भी वी.वी. लगा दो, इतने हो। देखो, आप अपने आगे वी.वी.वी. लगाते जाओ, आपने अपने चित्र तो देखे हैं ना जो पूजे जा रहे हैं, वह देखे है ना। चलो मन्दिर नहीं देखे फोटो तो देखे हैं, अभी भी उन्हों की कितनी वैल्यु है। कितने बड़े-बड़े मन्दिर बनाते हैं और आपका चित्र जो है वह तो तीन फुट में आ जाता है, तो कितना आपकी वैल्यु है। जड़ चित्र की भी वैल्यु है। है ना! वैल्यु है ना! आपके चित्र का दर्शन करने के लिए कितनी क्यु लगती है। और चैतन्य में कितने वी.वी.आई. पी. हो। तो कदम उठाने के पहले चेक करो, करने के बाद चेक किया, वह कदम तो गया। वह कदम फिर आपके हाथ में नहीं आयेगा। अज्ञानकाल में भी कहते हैं, सोच समझकर काम करो। काम करके सोचो नहीं। पहले सोचो फिर करो। तो अपने स्वमान की सीट पर रहो। जितना पोजीशन में रहते तो आपोजीशन नहीं हो सकती। माया की आपोजीशन तब होती है जब पोजीशन में नहीं रहते हो। तो अभी बापदादा का क्वेश्चन है, सबका लक्ष्य तो है सम्पूर्ण बनने का, सम्पन्न बनने का। लक्ष्य है या थोड़ा-थोड़ा बनने का है? लक्ष्य है? सबको है तो हाथ उठाओ। सम्पूर्ण बनना है, अच्छा। कब तक? आप लोगों से क्वेश्चन करते हो ना, स्टूडेन्ट से भी टीचर्स क्वेश्चन करती हैं ना- आपका क्या लक्ष्य है? तो आज बापदादा विशेष टीचर्स से पूछते हैं। 30 वर्ष वाले बैठे हैं ना। तो 30 वर्ष वालों को कल ही आपस में बैठकर प्रोग्राम बनाना चाहिए। मीटिंग तो बहुत करते हो। बापदादा देखते हैं मीटिंग, सीटिंग, मीटिंग सीटिंग। लेकिन अब ऐसी मीटिंग करो, कि कब तक सम्पन्न बनेंगे? और सब फंक्शन मनाते हो, डेट फिक्स करते हो, फलाना प्रोग्राम फलानी डेट, इसकी डेट नहीं है?जितने साल चाहिए उतने बताओ। क्यों? बापदादा क्यों कहते हैं? क्योंकि बाप से प्रकृति पूछती है कि कब तक विनाश करें? तो बापदादा क्या जवाब दें। बापदादा बच्चों से ही पूछेंगे ना। कब तक? आज की विशेष टॉपिक है कब तक? डबल फारेनर्स बैठे हैं ना, तो डबल पुरूषार्थ होगा ना। कमाल करो।

फारेनर्स एक्जैम्पुल बनो। बस ब्राह्मण परिवार के आगे, विश्व के आगे सम्पन्न और सम्पूर्ण। सर्व शक्तियां, सर्वगुण से सम्पन्न अर्थात् सम्पूर्ण, सर्व हो। मन्सा, वाचा, संबंध-सम्पर्क। चार ही में। चार में से अगर एक में भी कमज़ोर रह गये, तो सम्पन्न नहीं कहेंगे। चार बातें याद है ना - मन्सा, वाचा, सम्बन्ध-सम्पर्क में कर्म आ गया। चार ही बातों में। ऐसे नहीं मन्सा वाचा में तो हम ठीक हैं, सम्बन्ध-सम्पर्क में थोड़ा है। सुनाया ना - जिसके सामने भी जायें, चाहे जिसके भी सम्पर्क में जायें वह अनुभव करे कि यह मेरा है। मेरे के ऊपर हुज्जत होती है ना। दूसरे के ऊपर इतना हल्कापन नहीं होता है, थोड़ा भारी होता है लेकिन अपने के ऊपर हल्कापन होता है। तो सबसे हल्के, ऐसे नहीं सिर्फ अपने जोन में हल्के, अपने सेन्टर में हल्के, नहीं। अगर जोन में हल्के या सेन्टर में हल्के, तो विश्वराजन कैसे बनेंगे? न विश्वकल्याणकारी बन सकते हैं, न विश्वराजन बन सकते हैं। राजन का अर्थ यह नहीं है कि तख्त पर बैठें, राजधानी में रॉयल फैमिली में भी राज्य अधिकार है, राज्य का। तो क्या करेंगे? कब तक के प्रश्न का उत्तर देंगे ना ? मीटिंग करेंगे? मीटिंग करके फाइनल करना। ठीक है? अच्छा।

सभी ठीक हैं, उमंग आता है कि करना ही है होना ही है? बापदादा उमंग उल्लास दिलाता है। माया देखती है उमंग उल्लास में हैं तो कुछ-न-कुछ कर लेती है क्योंकि उसका भी अभी अन्तिमकाल नजदीक है ना। तो वह अपने अस्त्र-शस्त्र जो भी हैं वह यूज करती है और ऐसी पालना करती है जो समझ नहीं सकते हैं कि यह माया की पालना है, माया की मत है या बाप की मत है, उसमें मिक्स कर देते हैं। यह फरिश्तेपन में या पुरूषार्थ में विशेष जो रूकावट होती है, उसके दो शब्द ही हैं जो कामन शब्द हैं, मुश्किल भी नहीं हैं और सभी यूज भी करते हैं अनेक बार। वह क्या है? मैं और मेरा। बापदादा ने बहुत सहज विधि पहले भी बताई है, इस मैं और मेरे को परिवर्तन करने की। याद है? देखो, जिस समय आप मैं शब्द बोलते हो ना, उस समय सामने मैं हूँ ही आत्मा, मैं शब्द बोलो और सामने आत्मा रूप को लाओ। मैं शब्द ऐसे नहीं बोलो, मैं, आत्मा। यह नेचुरल स्मृति में लाओ, मैं शब्द के पीछे आत्मा लगा दो। मैं आत्मा। जब मेरा शब्द बोलते हो तो पहले कहो मेरा बाबा, मेरा रूमाल, मेरी साड़ी, मेरा यह। लेकिन पहले मेरा बाबा। मेरा शब्द बोला, बाबा सामने आया। मैं शब्द बोला आत्मा सामने आई, यह नेचर और नेचुरल बनाओ। सहज है, ना कि मुश्किल है। जानते ही हो मैं आत्मा हूँ। सिर्फ उस समय मानते नहीं हो। जानना 100 परसेन्ट है, मानना परसेन्टेज में है। जब बॉडी कान्सेस नेचुरल हो गया, याद करना पड़ता है क्या मैं बॉडी हूँ ? नेचरल याद है ना। तो मैं शब्द मुख के पहले तो संकल्प में आता है ना। तो संकल्प में भी मैं शब्द आवे तो फौरन आत्मा स्वरूप सामने आये। सहज नहीं है यह अभ्यास करना। सिर्फ मैं शब्द नहीं बोलना, आत्मा साथ में बोलना, पक्का हो जायेगा। है ना पक्का। दूसरे को भी कोई बुलायेगा तो आप ऐसे ऐसे करेंगे। तो मैं आत्मा हूँ। आत्मा का संसार बापदादा। आत्मा का संस्कार ब्राह्मण सो फरिश्ता, फरिश्ता सो देवता। तो क्या करेंगे, यह मन की ड्रिल। आजकल डाक्टर्स भी कहते हैं ड्रिल करो, ड्रिल करो। एक्सरसाइज। तो यह एक्सरसाइज करो। मैं आत्मा। मेरा बाबा। क्योंकि समय की गति को ड्रामानुसार स्लो करना पड़ता है। होना चाहिए क्रियेटर को तीव्र, क्रियेशन को नहीं लेकिन अभी के प्रमाण समय तेज जा रहा है। प्रवृति एवररेडी है सिर्फ आर्डर के लिए रूकी हुई है। ड्रामा का समय ही आर्डर करेगा ना। स्थापना वाले अगर एवररेडी नहीं होंगे तो विनाश के बाद क्या प्रलय होगी? होनी है प्रलय? कि विनाश के बाद स्थापना होनी ही है? तो स्थापना के निमित्त बने हुए अभी समय प्रमाण एवररेडी होने चाहिए। बापदादा यही देखने चाहते हैं, जैसे ब्रह्मा बाप अर्जुन बना ना, एक्जैम्पुल बना ना। ऐसे ब्रह्मा बाप को फॉलो करने वाले कौन बनते हैं? स्वयं को भी देखो, समय को भी देखो। बापदादा ने पहले भी कहा कि वर्तमान समय आप सभी ब्राह्मण सो फरिश्ते आत्माओं को निमित्तभाव और निमार्कणभाव, इन दोनों शब्दों को अण्डरलाइन करना है। इसमें बॉडी कान्सेस का मैंपन खत्म हो जायेगा। मेरापन भी खत्म हो जायेगा। निमित्त हूँ और निमार्कण स्वभाव। जितना निमार्कण होते हैं ना उतना मान मिलता है। क्योंकि जो निमार्कण होता है ना वह सबका प्यारा बन जाता है। और जब प्यारा बन जाता है तो मान तो आटोमेटिकली मिलेगा। तो निमित्त और निमार्कणभाव और भावना, शुभभावना। भाव और भावना दो चीज़ें होती हैं तो निमित्त और निमार्कणभाव और भावना हर एक के प्रति शुभभावना, शुभकामना। कैसा भी हो, आपके निमित्त निमार्कणभाव और शुभभावना वायुमण्डल ऐसा बनायेगी, जो सामने वाला भी वायब्रेशन से बदल जायेगा। कई बच्चे रूहरिहान करते हैं ना तो कहते हैं हमने एक मास से शुभ भावना रखी, वह बदलता ही नहीं है। फिर थक जाते हो, दिलशिकस्त हो जाते हैं। अभी उस बिचारे की जो वृत्ति है या दृष्टि है वह है ही पत्थर जैसी, उसमें थोड़ा तो टाइम लगेगा ना। अच्छा मानो वह नहीं बदलता है तो आप अपने को तो ठीक रखो ना। आप तो अपनी पोजीशन में रहो ना। आप क्यों दिलशिकस्त हो जाते हो। दिलशिकस्त नहीं हो। अच्छा वह नहीं बदला तो मैं भी उसके साथ बदल न जाऊँ। दिलशिकस्त हो जाना, वह पावरफुल हुआ जो उसने आपको बदल लिया। आप अपने स्वमान की सीट क्यों छोड़ते हो? वेस्ट थोट्स भी नहीं उठना चाहिए, क्यों? क्यों कहा और वेस्ट थोट्स का दरवाजा खुला। वह दरवाजा बन्द बहुत मुश्किल होता है। इसीलिए क्यों नहीं सोचो, पॉवरफुल होकर वायब्रेशन देते रहो। आप अपनी सीट छोडकर क्यों दिलशिकस्त हो जाते हो? याद रखा ना पोजीशन से नीचे नहीं आओ, फिर बहुत आपोजीशन हो जाती है। व्यक्ति-व्यक्ति में आपोजीशन हो जाती है, स्वभाव संस्कार में आपोजीशन हो जाती है, विचारों में आपोजीशन हो जाती है इसलिए पोजीशन में रहो। तो कल क्या करेंगे? याद है? बापदादा का प्यार है ना, तो बापदादा समझते हैं सब ब्रह्मा बाप समान बन जायें। क्या बाप के आगे आपोजीशन नहीं आई, ब्रह्मा बाप के आगे आपोजीशन नहीं हुई, माया की भी हुई, आत्माओं की भी हुई, प्रकृति की भी हुई, लेकिन ब्रह्मा बाप ने पोजीशन छोड़ी? नहीं छोड़ी ना। तभी फरिश्ता बना ना। तो अभी एक दो को अपने को तो फिरिश्ता समझकर चलो। मैं फरिश्ता हूँ, सब फरिश्ते हैं। न मेरा, पुराने संसार संस्कार से नाता, न इन कोई ब्राह्मणों का। बस खत्म। यह भी फरिश्ता यह भी फरिश्ता उसी नजर से देखो। वायुमण्डल फैलाओ। अच्छा।

डबल फारेनर्स हैं ना तो डबल नशा चढ़ा रहे हैं। आज चांस मिला है ना! यह भी देखो भारतवासियों की सहानुभूति है आपसे। आपको चांस देके खुद नीचे बैठे हैं, देखो। नीचे बैठने वालों को बापदादा त्याग का भाग्य जमा कर ही रहा है। अच्छा। अभी क्या करना है? सभी जैसे अभी अभी बहुत मीठा मुस्कुरा रहे हो। ऐसे ही सदा रहना। कभी भी किसी से भी बात करो ना, मुस्कुराओ जरूर। आपके मुस्कुराने से उसका आधा दुख तो दूर हो जायेगा। चैरिटी बिगन्स एट होम। किसी से भी बोलो, साथी से ब्राह्मण से चाहे अज्ञानी से, मुस्कुराता चेहरा, रूहे गुलाब। सीरियस होके नहीं बोलो, क्या कर रहे हो, क्यों कर रहे हो, नहीं। मुस्कुराके बोलो। मुस्कुराने का स्टॉक है? खत्म तो नहीं हो गया? मुस्कुराया हुआ चेहरा, कितना अच्छा लगता है। जोश वाला चेहरा दूसरा देखके ही हट जाना चाहता है। और मुस्कुराने वाले चेहरे के नजदीक जाने चाहेंगे। तो आपको अभी का मुस्कुराता हुआ चेहरे का फोटो निकालकर देवें। वह फोटो अपने साथ रखेंगे, कागज का रखेंगे या दिल का? अच्छा।

(76 देशों से आये हैं - कई ग्रुप भी हैं - जैसे सर्व अफ्रीका कोर ग्रुप) - अच्छी सेवा कर रहे हैं, बापदादा को समाचार मिला था कि निर्विघ्न फास्ट सेवा हो रही है। जैसे अफ्रीका ने सन्देश देने का फास्ट किया है, ताली तो बजाओ। मुबारक हो। ऐसे सभी को करना आवश्यक है। प्लैन बनाओ सेवाका। बनाओ लेकिन सेवा करो तो बोझवाली सेवा नहीं करो। कई बच्चे सेवा के बाद इतने थक जाते हैं तो कोई मालिश-पालिस वाला चाहिए। सेवा यथार्थ वह है जिसमें खुशी मिले, हल्कापन हो। प्राप्ति होती है ना। प्राप्ति में थकावट होती है क्या? कई बच्चे पुरूषार्थ भी ऐसा करते हैं भारी पुरूषार्थ मेहनत का। फाउण्डेशन है मुहब्बत स्नेह। बाप और बच्चे का स्नेह, सेवा से आत्माओं को बाप से स्नेह का फल मिलता है। तो सेवा भी करते हैं तो भारी रूप नहीं, हल्का। सेवा बोझवाली नहीं है सेवा हल्का बनाने वाली है। पुरूषार्थ भी मेहनत से नहीं करो। बापदादा को मेहनत अच्छी नहीं लगती। हैं मास्टरसर्वशक्तिवान और मेहनत कर रहे हैं। अच्छा लगता है? न पुरूषार्थ में न सेवा में। तो बापदादा ने देखा, इन्हों की रिजल्ट का समाचार सुना। उमंग-उत्साह से कर रहे हैं और विशेषता यह है कि अपने आपस में ही हैण्डस निकालके आगे बढ़ रहे हैं। नहीं तो कई कहते हैं सेवा बहुत हैं, हैण्डस नहीं हैं। हैण्डस होवें तो सेवा बढ़ जाये लेकिन इन्होंने यह माँगनी नहीं की, यह विशेषता है। अपने ही हैण्ड तैयार किये, कैसे भी किये, किये। अपने ही हैण्डस तैयार किये और बढ़ते जा रहे है। फास्ट वृद्धि की है ना? क्या विशेषता सुनाई थी, जितनी जोन में सेवा नहीं हुई है उतनी अभी हुई है। फास्ट हुई है ना, मुबारक हो। अच्छा कर रहे हैं।

पीस आफ माइंड ग्रुप - अच्छा किया। अभी जो ग्रुप आया उनको पालना करना। जैसे स्थापना की ना तो पालना भी करते रहना। कनेक्शन नहीं तोड़ना, कुछ न कुछ उन्हों को भेजते रहो, कनेक्शन जोड़ते रहो। ठीक है ना। बापदादा ने समाचार सुना है तो यह जो करते हैं - कॉल आफ टाइम, कॉल आफ टाइम वाले कुछ न कुछ भेजते रहते हैं। तो कनेक्शन रख रहे हैं ना, ऐसे आप सभी भी कनेक्शन रखते रहो। चलो पहले सम्पर्क में आये, फिर संबंध में आवे, फिर संबंध में आते-आते ब्राह्मण बन जायेंगे। तो आगे बढ़ाते रहो उन्हों को। बीच-बीच में उन्हों को बुलाके चाहे भिन्न-भिन्न देश के वहाँ बुलाया लेकिन आप उसकी जिम्मेवारी लो, बुलाया क्या उसकी रिजल्ट है, तब आगे बढ़ेंगे। प्रोग्राम अच्छे करते हो लेकिन पालना कम हाती है। पालना न मिलने से, क्या है जन्म तो ले लिया लेकिन बढ़ते नहीं हैं। आयु बिचारों की वही रहती है, आयु आगे बढ़ती नहीं है तो ऐसे करना। लेकिन किया अच्छा है। बापदादा तो वतन में बैठे भी देखते हैं समाचार भी सुनते हैं। समाचार बापदादा को बहुत अच्छा लगता है, थकता नहीं है। तो मुबारक हो। सन्देश देने वाले सन्देशवाहक बनें, इसकी मुबारक हो। ताली बजाओ। (पीस आफ माइन्ड के कुछ सैम्पुल बैठे हैं, बापदादा ने सबको आगे बुलाया - टोटल 6 हैं।) यह देखो कितना अच्छा एक्जैम्पुल है, तो दिल से आप सभी को यह सब ब्राह्मण आत्मायें पीसफुल बनने की मुबारक दे रहे हैं। पीसफुल बनने की मुबारक। अभी नया जन्म हुआ ना। तो बर्थ डे हो गई आज। तो आपके बर्थ डे की मुबारक दे रहे हैं। अच्छा, तो देखो सेवा की तो फल भी मिला। अच्छा।

इन्टरफेथ कोर ग्रुप - अच्छा इन्टरफेथ वाले। अच्छा है। यह सेवाधारी होके आये हैं। अच्छा है सबको सन्देश देने में यह भी क्यों रह जाएं। तो अच्छा किया। इस ग्रुप को भी बुलाया। और विशेष बापदादा ने देखी कि इन्टरनेशनल रूप में किया। देश और विदेश ने मिलके एक संकल्प लेके किया यह बहुत अच्छा किया। और सक्सेस भी हुआ तो इन्टरनेशनल प्रोग्राम सक्सेस किया इसकी मुबारक है। और आगे भी इस ग्रुप को बढ़ाते रहना क्योंकि यह तो आपके साथी हैं ना, आध्यात्मिक तो है ना। इन्हों में से एक भी परिवर्तन होके माइक बनें तो बहुत सेवा कर सकता है। तो अच्छा किया बापदादा खुश है। और सभी भी खुश, तभी तो ताली बजाई। आगे बढ़ाते रहना। छोड़ नहीं देना। जैसे यह कॉल आफ टाइम करते रहते हैं ना ऐसे करते रहना। आगे बढ़ाते रहना। अच्छा।

जानकी फाउण्डेशन और वैल्यु ट्रेनिंग ग्रुप - बहुत अच्छा बापददादा ने देखा नये-नये विधि द्वारा सन्देश पहुँचाने का कार्य अच्छा है क्योंकि आजकल हेल्थ कान्सेस तो सबसे ज्यादा हैं। तो इस विधि से एक किताब भी दिखाया था बापदादा को, वह भी अच्छा सेवा के निमित बनेगा। लेकिन जैसे नाम है फाउण्डेशन, वैसे ही याद और सेवा का फाउण्डेशन कम्बाइन्ड करते हुए जानकी फाउण्डेशन को आगे बढ़ाते रहना। ठीक है ना। हाँ क्योंकि आपकी सेवा विस्तार में बहुत आगे बढ़ सकती है। बढ़ रही है और बढ़ती रहेगी। वैल्यु का बुक देखा था। अच्छे उमंग-उत्साह से सेवा करने का फल प्रत्यक्ष मिलता है। जितना आगे बढ़ते जायेंगे उतने नजदीक आते जायेंगे। यह सब तरफ किया है। जो भी फाउण्डेशन है अलग-अलग वह इस फाउण्डेशन में समीप आते जायेंगे। थकते तो नहीं हैं ना। डबल सेवा करते हो ना जॉब भी करते हो, यह भी करते हो। तो डबल सेवा, डबल विदेशी इसकी डबल मुबारक हो। बहुत अच्छा।

आई.टी.ग्रुप- अच्छा यह देश विदेश इकठ्ठा है। कोई नया प्लैन बनाया है? नया वेबसाइट बनाया है और मुरली का नया सिस्टम शुरू किया है। उसके अलावा नया ईमेल का सिस्टम बनाया है। क्योंकि इससे आवाज तो चारों ओर फैल सकता है। इसको एकाग्र होके नये-नये प्लैन बनाते जाओ और बढ़ते जाओ। क्योंकि देश विदेश दोनों का कनेक्शन है ना। जितना इस डिपार्टमेंट को आगे बढ़ाते जायेंगे उतना एक स्थान पर बैठे बहुतों को सन्देश दे सकेंगे। यह बहुत अच्छा साधन मिला है। साधन द्वारा सन्देश देने का कार्य यही आपके डिपार्टमेंट की साधना हो जायेगी। अच्छा किया है। यह मोहिनी हैण्डिल करती है, अच्छा है। देखो वह पीस वाला करती, वह कॉल आफ टाइम करती, अच्छी सीट ली है। बापदादा डबल विदेशियों को भिन्न-भिन्न सेवा की मुबारक के साथ दुआयें भी दे रहे हैं। दुआयें हों। (दादी भी दुआयें दे रही हैं।)

ट्रेवलर फिल्म ग्रुप- यह फिल्म बना रहे हैं। अच्छा है क्योंकि आजकल कलचरल प्रोग्राम भी सबको पसन्द आता है। पूरा कोर्स करा लेते हो, कलचरल में ही सारा कोर्स हो जाता है। यह बहुत अच्छा है। बापदादा को पसन्द है। देखा भी है। अच्छा कर रहे हो। आप कहेंगे अभी दिखायेंगे। लेकिन बापदादा ने देख लिया है। इन साधनों द्वारा तो फिर भी देख लेंगे लेकिन बापदादा के पास आपसे भी बहुत बड़ी मशीनरी है उसमें देख लिया है। अच्छा कर रहे हैं करते रहेंगे, बाप को प्रत्यक्ष करते ही रहेंगे। बहुत अच्छा, मुबारक हो।

मिडिल इस्ट सेवा में बहुत आगे जा रहे हैं:- बहुत अच्छे-अच्छे रतन हैं। एक-एक की विशेषता अपनी अपनी है। करावनहार करा रहा है और आप बच्चे निमित्त बनके कर रहे हैं। सब अच्छे उमंग-उत्साह का सर्टिफिकेट दादियों द्वारा मिला है इसकी तो बहुत-बहुत मुबारक हो। लेकिन इसका कारण क्या? जिस भी सेवा स्थान का सेवा का वृद्धि होती है और निर्विघ्न होते हैं उसका कारण क्या होता है? जानते हो? पालना। कई सेन्टर्स में वी.आई.पी की सेवा बहुत अच्छी करते हैं लेकिन स्टूडेन्ट की पालना कम करते हैं| इसीलिए स्टूडेन्ट बढ़ते नहीं हैं। और स्टूडेन्ट रेग्युलर सेवा के उमंग-उत्साह में नहीं रहेंगे, क्लास करेंगे, जो कहेंगे वह करेंगे लेकिन अपने उमंग-उत्साह में नहीं आयेंगे। तो यह रिजल्ट है पालना की। मुबारक हो। सभी जो भी टीचर्स निमित्त बैठी हैं वह जितनी वी.आई.पी. का अटेन्शन रखते हो, उतनी पालना स्टूडेन्ट की भी रखो। स्टूडेन्ट में नवीनता लाओ, कोई न कोई नवीनता लाने से उमंग-उत्साह बढ़ेगा। बहुत बिजी हो जाते हो सेवा में फिर थक जाते हो, फिर पालना इतनी रूचि से नहीं करते हो। पहले तो राजधानी तैयार करो। वह तो स्टूडेन्ट से ही होगी ना। दिल से पालना करो। एक-एक की कमज़ोरी हटाने की मेहनत करो। खुशी की मेहनत करो, बोझ वाली नहीं क्योंकि क्लास के स्टूडेन्ट जितना ज्यादा बढ़ेंगे उतनी राजधानी जल्दी तैयार होगी। जो सहयोगी हैं, उनको संबंध में लाओ स्टूडेन्ट बनाओ। अच्छा है, टीचर्स की महिमा सुनी थी बहुत अच्छी सेवा कर रहे हैं, अच्छे प्लैन बना रहे हैं। टीचर्स हाथ उठाओ। अच्छा, आपको लाख गुणा बधाई हो।

अभी एक मिनट ऐसा पावरफुल सर्वशक्तियाँ सम्पन्न विश्व की आत्माओं को किरणें दो जो चारों ओर आपके शक्तियों का वायब्रेशन विश्व में फैल जाये। अच्छा। चारों ओर के ब्राह्मण सो फरिश्ते बच्चों को, सदा स्वदर्शन द्वारा स्व को चेक और चेंज करने वाले, ब्रह्मा बाप को फॉलो करने वाले फरमानबरदार बच्चों को, सदा डबल लाइट बन सेवा और पुरूषार्थ करने वाले फरिश्ते आत्माओं को, सदा अपनी पोजीशन की सीट पर सेट हो आपोजीशन को समाप्त करने वाले मास्टर सर्वशक्तिवान बच्चों को, संगमयुग का प्रत्यक्ष फल अनुभव करने वाले बाप के समीप बच्चों को बापदादा का यादप्यार और नमस्ते।

दादियों से:- दादियों को देखकर खुश होते हैं ना। बस दादी की मुस्कुराती मूरत और दृष्टि बहुत सुखदाई है। आप जब मुस्कुराकर मिलती हो, दृष्टि देती हो ना तो सब बहुत खुश हो जाते हैं। मुस्कुरा रही है। बापदादा ने तो कहा है सदैव चेहरा मुस्कुराना चाहिए सभी का। मुस्कुराने के बिना कभी भी नहीं हो। देखो दादी कह रही है मुस्कुरायेंगे नहीं तो मुश्किलातें आ जायेंगी। (दादी सिर्फ इशारा करती है) दादी फरिश्ता बन रही है ना, फरिश्तेपन की स्टेज आ रही है। मुस्कुराने में सबकुछ आ जाता है। बहुत भाषण किया है ना, जब से जन्म लिया है तब से भाषण किया है, क्लास कराये हैं, अभी स्लोगन मुआफिक बोलती है। फरिश्ता बनकर डांस करती है। फरिश्ता और क्या करता है? उड़ता है और डांस करता है। अच्छा। डबल फारेनर्स ने कहा है कल से 85 परसेनट बन जायेंगे। दादी तो है 95 परसेन्ट। कापी करो बस। कोई सीरियस बने ना तो उसको टाइटल देना - गैस का गुब्बारा बन गया। गैस का गुब्बारा होता है ना, तो जब गम्भीर हो जाते हैं तो गैस भर जाता है व्यर्थ संकल्पों का। कोई को बोलना नहीं गुब्बारा, नहीं तो और गैस भर जायेगा। शुभ भावना रखना। इन्हों को ही तो बनना है और कौन बनेगा।

तीनों बड़े भाईयों से:- तीनों ही आपस में एक संकल्प करके चल रहे हैं, एक ही संकल्प तीनों का। हाँ जी, हाँ जी, सबकी दुआयें आपको मिल रही हैं। मिलती हैं ना। अच्छा है पाण्डवों में भी एक्जैम्पुल तो हैं ना। बहुत अच्छा। (सोमनाथ वालों की याद दी - वहाँ भी सेवा अच्छी हो रही है)। उन्हों को भी सेवा के याद की मुबारक। (प्रेजीडेंट हमेशा बाबा का सन्देश पूछता है कि बाबा ने क्या सन्देश दिया है) उनको याद रहता है कि सन्देश आया है। देखो यह एक ही प्रेजीडेंट हैं जिसमें तीन सत्ता हैं - साइंटिस्ट भी है, राजनेता भी है और धर्म में भी रूचि है। जितने भी प्रेजीडेंट आये हैं, और प्रेजीडेंट ऐसा नहीं हुआ है। तो इसका भी पार्ट है। आध्यात्मिक रास्ते में रूचि है इसीलिए आध्यात्मिक रास्ते का साथी है।

विदेश की बड़ी बहिनों से - अच्छा - यह डबल सेवाधारियों की सेवा के निमित्त बने हुए हैं। अच्छा है। बापदादा के पास समाचार तो आता ही रहता है और सभी अच्छी तरह से सम्भाल भी रहे हैं। चक्कर भी लगाते रहते हो। बापदादा को अच्छा लगता है, आपस में जब मिलते हो, प्लैन बनाते हो, तो संगठन की शक्ति को प्रयोग करते हो, यह बहुत अच्छा है क्योंकि हर एक की विशेषता अपनी-अपनी है। विचार कोई समय किसी का बहुत अच्छा निकल आता है, तो आपस में मिलते रहते हो, मीटिंग करते हो यह बापदादा को अच्छा लगता है। अभी आप लोगों को पहले फरिश्तेपन के नजदीक आना पड़ेगा क्योंकि आप साकार रूप में एक्जैम्पल हो। साकार में अभी आप भी एक्जैम्पुल हो, निमित्त हो। तो जैसी आपकी रफ्तार होगी वैसे औरों को भी हिम्मत मिलेगी। उमंग आयेगा। सब पुराने हैं। साकार बाप की पालना का रिटर्न है फॉलो ब्रह्मा बाबा। सबमें अव्वल नम्बर, तभी तो अव्वल आत्मा बनी ना। सारे ड्रामा में अव्वल नम्बर आत्मा। तो फॉलो ब्रह्मा बाप। और सबका प्यार और दुआयें कितनी मिलती हैं। अपना पुरूषार्थ तो है लेकिन दुआयें भी मिलती हैं। जिसके निमित्त बनते हैं उनकी दुआयें मिलती हैं, यह भी लिफ्ट है, आप लोगों को ईश्वरीय गिफ्ट भी है। (मौरीशियस में रिट्रीट प्लेस बन रहा है) अच्छा बन रहा है, सेवा बहुत अच्छी होगी। अच्छा।

(डबल विदेशी भाई बहिनों ने बापदादा के पास निम्नलिखित 7 बातों का चार्ट सन्देशी द्वारा भेजा, जिसकी रिजल्ट पर आगे के पुरूषार्थ का इशारा दिया है)

(1) स्व परिवर्तन की रफ्तार क्या है?

(2) अपने स्वमान में निरन्तर स्थित रहकर दूसरों को सम्मान देता हूँ?

(3) सर्व से दुआयें ली और दी?

(4) सर्व खज़ानों का स्टॉक कहाँ तक जमा किया?

(5) अपने मन को सेकण्ड में एकाग्र और निरन्तर एकरस कर सकता हूँ?

(6) बिन्दू बन, बिन्दू को याद कर सेकण्ड में फुलस्टॉप लगा सकता हूँ?

(7) पिछले 6 महीनों से खुशी, शान्ति और शक्ति की किरणें फैलाके ज्ञान सूर्य बना?



15-11-05   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


सच्चे दिल से बाप व परिवार के स्नेही बन मेहनत मुक्त बननेका वायदा करो और फायदा लो

आज बापदादा अपने चारों ओर के श्रेष्ठ स्वराज्य अधिकारी, स्वमानधारी बच्चों को देख रहे हैं। बाप ने बच्चोंको अपने से भी ऊँचा स्वमान दिया है। हर एक बच्चे को पाँव में गिरने से छुड़ाए सिर का ताज बना दिया। स्वयं कोसदा ही प्यारे बच्चों का सेवाधारी कहलाया। इतनी बड़ी अथॉरिटी का स्वमान बच्चों को दिया। तो हर एक अपने कोइतना स्वमानधारी समझते हैं? स्वमानधारी का विशेष लक्षण क्या होता है? जितना जो स्वमानधारी होगा उतना हीसर्व को सम्मान देने वाला होगा। जितना स्वमानधारी उतना ही निमार्कण, सर्व का स्नेही होगा। स्वमानधारी की निशानीहै - बाप का प्यारा साथ में सर्व का प्यारा। हद का प्यारा नहीं, बेहद का प्यारा। जैसे बाप सर्व के प्यारे हैं, चाहे एकमास का बच्चा है, चाहे आदि रत्न भी है लेकिन हर एक मानता है मैं बाबा का, बाबा मेरा। यह निशानी है सर्व केप्यारेपन की, श्रेष्ठ स्वमान की, क्योंकि ऐसे बच्चे फालो फादर करने वाले हैं। देखो बाप ने हर वर्ग के बच्चों को, छोटेबच्चों से लेके, बुजुर्ग समान बच्चों को स्वमान दिया। यूथ को विनाशकारी से विश्वकल्याणकारी का स्वमान दिया।महान बनाया। प्रवृत्ति वालों को महात्मायें, बड़े-बड़े जगतगुरू उनसे भी ऊँचा, प्रवृत्ति में रहते, पर-वृत्ति वाले महात्माओंका भी सिर झुकाने वाला बनाया। कन्याओं को शिव शक्ति स्वरूप का स्वमान याद दिलाया, बनाया। बुजुर्ग बच्चोंको ब्रह्मा बाप की हमजिन्स अनुभवी का स्वमान दिया। ऐसे ही स्वमानधारी बच्चे हर आत्मा को ऐसे स्वमान से देखेंगे।सिर्फ देखेंगे नहीं लेकिन सम्बन्ध-सम्पर्क में आयेंगे। क्योंकि स्वमान देहअभिमान को मिटाने वाला है। जहाँ स्वमानहोगा वहाँ देह का अभिमान नहीं होगा। बहुत सहज साधन है, देह अभिमान को मिटाने का - सदा स्वमान में रहना।सदा हर एक को स्वमान से देखना। चाहे प्यादा है, 16 हजार की माला में लास्ट नम्बर भी है लेकिन लास्ट नम्बरमें भी ड्रामानुसार बाप द्वारा कोई न कोई विशेषता है। स्वमानधारी विशेषता को देख स्वमान देते हैं। उनकी दृष्टि में,वृत्ति में, कृति में, हर एक की विशेषता समाई हुई होती है। जो भी बाप का बना वह विशेष आत्मा है, चाहे नम्बरवारहै लेकिन दुनिया के कोटों में कोई है। ऐसे अपने को सभी विशेष आत्मा समझते हो? स्वमान में स्थित रहना है। देह-अभिमान में नहीं, स्वमान।

बाप को हर एक बच्चे से प्यार क्यों है? क्योंकि बाप जानते हैं मेरे को पहचान, मेरे बने हैं ना। चाहे आज इस मेलेमें भी पहली बार आये हैं, फिर भी बाबा कहा, तो बाप के प्यार के पात्र हैं। बापदादा को चारों ओर के सर्व बच्चे सर्वसे प्यारे हैं। ऐसे ही फालो फादर। कोई भी अप्रिय नहीं, सर्व प्रिय हैं। देखो, जो भी बच्चे मेरा बाबा कहते हैं, तोमेरापन किसने लाया? स्नेह ने। जो भी यहाँ बैठे हैं, वह समझते हो कि स्नेह ने बाप का बना लिया। बाप का स्नेहचुम्बक है, स्नेह के चुम्बक से बाप के बन गये। दिल का स्नेह, कहने मात्र स्नेह नहीं। दिल का स्नेह इस ब्राह्मणजीवन का फाउण्डेशन है। मिलने क्यों आते हो? स्नेह ले आया है ना! जो भी सभी बैठे हैं, आये हैं, क्यों आये हो?स्नेह ने खींचा ना। स्नेह भी कितना है? 100 परसेन्ट है वा कम है?जो समझते हैं स्नेह में हम 100 परसेन्ट हैं,वह हाथ उठाओ। स्नेह में 100 परसेन्ट। थोड़ा भी कम नहीं? अच्छा। तो इतना ही स्नेह आपस में ब्राह्मणों में है?इसमें हाथ उठायें? इसमें परसेन्टेज है। जैसे बाप का सभी से स्नेह है, ऐसे ही बच्चों का भी सर्व से स्नेह, सर्व केस्नेही। दूसरे की कमज़ोरी को देखो नहीं। अगर कोई संस्कार के वशीभूत है, तो फालो किसको करना है? वशीभूतवाले को? आप वशीभूत मन्त्र देने वाले हो, वशीभूत से छुड़ाने वाला मन्त्र, छुड़ाने वाले हो ना! या देखने वाले हो?कि दिखाई दे देता है? अगर कोई खराब चीज़ दिखाई भी देती है, तो क्या करते हैं? देखते रहते हैं या किनारा करलेते हैं? क्योंकि बापदादा ने देखा कि जो दिल के स्नेही हैं, बाप के दिल के स्नेही, सर्व के स्नेही अवश्य होंगे। दिलका स्नेह बहुत सहज विधि है सम्पन्न और सम्पूर्ण बनने की। चाहे कोई कितना भी ज्ञानी हो, लेकिन अगरदिल का स्नेह नहीं है तो ब्राह्मण जीवन में रमणीक जीवन नहीं होगी। रूखी जीवन होगी। क्योंकि ज्ञान में स्नेह बिनाअगर ज्ञान है तो ज्ञान में प्रश्नउठते हैं क्यों, क्या! लेकिन स्नेह ज्ञानसहित है तो स्नेही सदा स्नेह में लवलीन रहतेहैं। स्नेही को मेहनत करनी नहीं पड़ती याद करने की। सिर्फ ज्ञानी है, स्नेह नहीं है तो मेहनत करनी पड़ती है। वहमेहनत का फल खाता, वह मुहब्बत का फल खाता। ज्ञान है बीज लेकिन पानी है स्नेह। अगर बीज को स्नेह का पानीनहीं मिलता तो फल नहीं निकलता है।तो आज बापदादा सर्व बच्चों के दिल का स्नेह चेक कर रहे थे। चाहे बाप से, चाहे सर्व से। तो आप सभी अपनेको क्या समझते हैं? स्नेही हैं? हैं स्नेही? जो समझते हैं दिल के स्नेही हैं, वह हाथ उठाओ। सर्व के स्नेही? सर्वके स्नेही? अच्छा - बाप के तो दिल के स्नेही हैं, सर्व के स्नेही हैं? सर्व के? हर एक समझता है - यह मेरा भाई-बहन है? हर एक समझता है यह मेरा है? समझता है? कि कोई-कोई समझता है? जैसे बाप के स्नेह में सभी हाथउठाते हैं, हाँ बाप के स्नेही हैं ऐसे आप हर एक के लिए हाथ उठायेंगे, कि हाँ यह सर्व के स्नेही हैं? यह सर्टीफिकेटमिलेगा? क्योंकि बापदादा ने पहले भी कहा था कि सिर्फ बाप से सर्टीफिकेट नहीं लेना है, ब्राह्मण परिवार से भीलेना है क्योंकि इस समय बाप धर्म और राज्य दोनों साथ-साथ स्थापन कर रहे हैं। राज्य में सिर्फ बाप नहीं होंगे,परिवार भी होगा। बाप के भी प्यारे, परिवार के भी प्यारे।ज्ञानी बने हो लेकिन साथ में स्नेही भी जरूरी है। स्वमान में रहना और सम्मान देना, यह दोनों जरूरी हैं। बापने ब्राह्मण जन्म लेते ही हर एक बच्चे को सम्मान दिया, तब तो ऊँचे बनें। इस एक जन्म में सम्मान देना है और साराकल्प उसकी प्रालब्ध सम्मान प्राप्त होता है। आधाकल्प राज्य अधिकारी का सम्मान मिलता है, आधाकल्प भक्ति मेंभक्तों द्वारा सम्मान मिलता है। लेकिन इसका, सारे कल्प का आधार है इस एक जन्म में सम्मान देना, सम्मान लेना।

देखो आज इस सीजन का पहला मिलन है। चारों ओर से सब बच्चे स्नेह से इकट्ठे हुए हैं। तो जो पहले बारी आयेँ हैं, वह हाथ उठाओ। बहुत आये हैं। पहले बारी आये हैं और पहला चांस लिया है, तो पहले चांस लेने वालों कोमुबारक है। सभी को अपने परिवार में वृद्धि देख करके खुशी होती है ना। वाह हमारे भाई! वाह हमारी बहिनें पहुँचगये! बापदादा को भी बहुत खुशी होती है। बिछुड़े हुए बच्चे फिर से अपना अधिकार लेने के लिए पहुँच गये हैं। तोसभी खुश हैं या बहुत-बहुत-बहुत खुश हैं? बहुत-बहुत खुश।अच्छा-डबल फारेनर्स भी आये हुए हैं। होशियार हैं डबल फारेनर्स। कोई भी टर्न छोड़ते नहीं हैं। अच्छा है।चांस लेने वाले को चांसलर कहते हैं। तो चांस लेने में होशियार हैं। डबल फारेनर्स को विशेष बापदादा एक बात कीविशेष मुबारक देते हैं। कौन सी? जो कहाँ-कहाँ बिखर गये, देश भी बदल गया, धर्म भी कईयों का बदल गया,कल्चर भी बदल गया लेकिन बदलते हुए पहचानने की आँख बहुत तेज निकली, जो भिन्न होते भी पहचानने मेंहोशियार निकले। पहचान लिया, बाप को अपना बना दिया। परिवार को अपना बना लिया। ब्राह्मण कल्चर को अपनाबना लिया। तो होशियार निकले ना! और बापदादा सदा यह विशेषता देखते हैं कि बाप से भी प्यार है लेकिन सेवा सेभी बहुत प्यार है। सेवा से प्यार होने के कारण बहुत बिजी होते हो ना! डबल सेवा करते हो। डबल भी नहीं, तीनसेवा करते हो, एक लौकिक जॉब, एक ज्ञान की सेवा और साथ में बापदादा ने मैजारिटी को देखा है कि सेन्टर मेंभी कर्मणा सेवा में सहयोगी बनते हैं। तो बापदादा जब देखते हैं तीनों तरफ की सेवा में बच्चे बिजी रहते हैं, खुश होतेहैं और दिल ही दिल में मुबारक देते रहते हैं। अभी-अभी भी बापदादा देख रहे हैं चारों ओर विदेश में कोई रात में,कोई दिन में मिलन मना रहे हैं। अच्छी पुरूषार्थ की गति को बढ़ाने के लिए आपको दादी भी अच्छी मिली है। है नाऐसे? जरा सी कोई कमी देखती है, फौरन क्लास पर क्लास कराती है। किसी भी बच्चे को, चाहे देश वाले चाहेविदेश वालों को, किसी भी सबजेक्ट में मेहनत लगती है, उसका मूल कारण है दिल का स्नेह। स्नेह माना लवलीन।याद करना नहीं पड़ता, याद भुलाना मुश्किल होता। अगर मेहनत करनी पड़ती है तो कारण है दिल के स्नेह कोचेक करो। कहाँ लीकेज तो नहीं है? चाहे लगाव कोई व्यक्ति से, चाहे व्यक्ति की विशेषता से, चाहे कोई साधन से,सैलवेशन से, एकस्ट्रा सैलवेशन, कायदे प्रमाण सैलवेशन ठीक है, लेकिन एकस्ट्रा सैलवेशन से भी प्यार होता है,लगाव होता है। वह सैलवेशन याद आती रहेगी। उसकी निशानी है - कहाँ भी लीकेज होगी तो सदा जीवन में किसी भी कारण से सन्तुष्टता की अनुभूति नहीं होगी। कोई न कोई कारण असन्तुष्टता का अनुभव करायेंगे। और सन्तुष्टताजहाँ होगी उसकी निशानी सदा प्रसन्नता होगी। सदा रूहानी गुलाब के मुआफिक मुस्कराता रहेगा, खिला हुआरहेगा। मूड आफ नहीं होगी, सदा डबल लाइट। तो समझा मेहनत से अभी बच जाओ। बापदादा को बच्चों कीमेहनत नहीं अच्छी लगती। आधाकल्प मेहनत की है, अभी मौज करो। मुहब्बत में लवलीन हो, अनुभव के मोती ज्ञानसागर के तले में अनुभव करो। सिर्फ डुबकी लगाकर निकल नहीं आओ सागर से, लवलीन रहो।सभी ने वायदा तो किया है ना! कि साथ रहेंगे, साथ चलेंगे? किया है, वायदा किया है? साथ चलेंगे या पीछे-पीछे आयेंगे? जो साथ चलने के लिए तैयार हैं वह हाथ उठाओ। तैयार हैं, सोचकर उठाओ, तैयार हैं अर्थात् बापसमान हैं। कौन साथ चलेगा? समान साथ चलेगा ना! तो चलेंगे? एवररेडी? पहली लाइन एवररेडी? एवररेडी?कल चलने के लिए आर्डर करें, चलेंगे? अच्छा प्रवृत्ति वाले चलेंगे? बच्चे नहीं याद आयेंगे? मातायें चलेंगी? मातायेंतैयार हैं? याद नहीं आयेगी? टीचर्स को सेन्टर याद आयेगा, जिज्ञासु याद आयेंगे? नहीं याद आयेगा? अच्छा।सभी निर्मोही हो गये हो? फिर तो बहुत अच्छी बात है। फिर तो मेहनत नहीं करनी पड़ेगी ना।

आज बापदादा सभी को चाहे सम्मुख बैठे हैं, चाहे दूर बैठे भी बाप के दिल में बैठे हैं, सभी को आज का दिन मेहनत मुक्त बनाने चाहते हैं। बनेंगे? ताली तो बजा दी, बनेंगे? कल से कोई दादियों के पास नहीं आयेगा। मेहनतनहीं करायेंगे? मौज से मिलेंगे। जोनहेड के पास नहीं जायेंगे, कम्पलेन नहीं करेंगे, कम्पलीट। ठीक है? अभी हाथ उठाओ। देखो सोच के हाथ उठाना, ऐसे नहीं उठा लेना। पहली लाइन नहीं उठा रही है। आप लोगों ने उठाया। कोई कम्पलेन नहीं। कोई मेरा मेरा नहीं, कोई मेरा नहीं। मैं भी नहीं, मेरा भी नहीं, खत्म। देखो वायदा तो किया है,अच्छा है मुबारक हो लेकिन क्या है, वायदे का फायदा नहीं उठाते हो। वायदा बहुत जल्दी कर लेते हो लेकिन फायदा उठाने के लिए रोज एक तो रियलाइजेशन दूसरा रिवाइज करो, वायदे को रोज रिवाइज करो क्या वायदा किया?अमृतवेले मिलने के बाद वायदा और फायदा दोनों के बैलेन्स का चार्ट बनाओ। वायदा क्या किया? और फायदा क्या उठा रहे हैं? रियलाइज करो, रिवाइज करो, बैलेन्स हो जायेगा तो ठीक हो जायेगा।बापदादा को पता है मीटिंग वालों ने वायदा किया है। मीटिंग वाले उठो। अच्छा पक्का वायदा किया? या फाइल के लिए वायदा किया? फाइल के लिए किया या फाइनल किया? फाइनल किया? ताली बजाओ। अच्छी तरह सेबजाओ। बहुत अच्छा किया, बैठ जाओ। देखो, इतने भी फाइनल हो जायेंगे तो पीछे नम्बर तो जरूर फाइनल होजायेंगे क्योंकि आप विशेष सेवा के आधारमूर्त निमित्त हो और सेवा की सफलता स्व सेवा से ही होती है। स्व की सेवाविश्व की सेवा का आधार है। तो इतने सब वायदा और फायदा उठाने वाले ही हैं, तो आपका निमित्त भाव औरों कोभी सहयोग देगा। बार-बार रियलाइज करना। दिल से रियलाइज करना, क्या करना है, क्या नहीं करना है। `ना को 21 जन्म के लिए आलमाइटी गवर्मेन्ट की सील लगा देना। और हाँ जी, हाँ जी करते रहना। मास्टर सर्वशक्तिमानहैं, जो चाहे वह कर सकते हैं, इतनी अथॉरिटी बाप द्वारा मिली हुई है। पहले कोई भी संकल्प, बोल, कर्म करने केपहले बाप समान है या नहीं? यह चेक करो फिर प्रैक्टिकल में लाओ। जब आपका विवेक हाँ करें, हाँ जी तभी प्रैक्टिकलमें लाओ। समान बनना है तो समान करना भी है। चलना भी है। बापदादा तो हर बच्चे को बहुत-बहुत बड़ी बड़ीउम्मीदों से देखते हैं कि यही बनने हैं, बने थे और अवश्य बनना ही है। सिर्फ दो शब्द याद रखना - निमित्त औरनिमार्कण। इसमें मैं, मेरा दोनों ही खत्म हो जायेगा। निमित्त हूँ और निमार्कण बनना ही है।

आप जो 70 वर्ष मना रहे हो, यह समाचार भी सुना। विदेश भी तैयारी कर रहे हैं और देश वाले भी कर रहे हैं।यही मीटिंग की ना! तो बापदादा इस 70वें वर्ष को किस विधि से मनाने चाहते हैं। सभी को उमंग है ना मनाने का?उमंग है? माताओं को है, डबल विदेशियों को है? मनाना है? सेवा का प्रोग्राम तो आप बनाते ही हो और बनायेंगेभी, इसमें तो होशियार हो। बापदादा ने देखा है प्लैन बहुत अच्छे अच्छे बनाते हैं बापदादा को पसन्द हैं। बापदादाक्या चाहते हैं? बापदादा सिर्फ एक शब्द चाहता है - एक शब्द है - सफल करो, सफल बनो। जो भी खज़ाने हैं,शक्तियाँ हैं, संकल्प हैं, बोल हैं, कर्म भी शक्ति है, यह समय भी खज़ाना है, शक्ति है, खज़ाना है। सबको सफलकरना है। चाहे स्थूल धन, चाहे अलौकिक खज़ाने, सबको सफल करना है। सफलतामूर्त का सर्टिफिकेट लेना हीहै। सफल करो और सफल कराओ। अगर कोई असफल करता है, तो बोल द्वारा शिक्षा द्वारा नहीं, अपने शुभभावना,शुभकामना और सदा शुभसम्मान देने द्वारा सफल कराओ। सिर्फ शिक्षा नहीं दो, अगर शिक्षा देनी भी पड़ती हैलेकिन क्षमा और शिक्षा, क्षमा रूप बनकर शिक्षा दो। मर्सीफुल बनो, रहमदिल बनो। आपका मर्सीफुल रूप अवश्यशिक्षा का फल दिखायेगा। देखो आजकल साइंस वाले भी पहले आपरेशन करते हैं, लेकिन पहले क्या करते हैं?पहले सुला देते हैं। पीछे काटते हैं, पहले ही नहीं काटते हैं,टिंचर भी लगाते हैं, पहले फूँक देते हैं फिरटिंचर लगातेहैं। तो आप भी पहले मर्सीफुल बनो, फिर शिक्षा दो तो प्रभाव डालेगी नहीं तो क्या होता है? आप शिक्षा देने लगतेहो वह पहले ही आपसे ज्यादा शिक्षक है। तो शिक्षक, शिक्षक की शिक्षा नहीं मानता। जो प्वाइंट आप देंगे, ऐसे नहींकरो, ऐसे करो, उसके पास कट करने की 10 प्वाइंट होंगी। इसीलिए क्षमा और शिक्षा साथ-साथ हो, तो इस70वें वर्ष का थीम है - सफल करो, सफल कराओ। सफलतामूर्त बनो। सब सफल करो। डबल लाइट बनना है नातो सफल कर लो। संस्कार को भी सफल करो। जो ओरीज्नल आपके आदि संस्कार, देवताई संस्कार, अनादिसंस्कार आत्मा के उसको इमर्ज करो। उल्टे संस्कारों का संस्कार करो। आदि अनादि संस्कार इमर्ज करो। अभीसभी की कम्पलेन विशेष एक ही रह गई है, संस्कार नहीं बदलते, संस्कार नहीं बदलते। तो 70वें वर्ष में कुछ तोकमाल करेंगे ना। तो यह परिवर्तन की विशेषता दिखाओ। ठीक है ना।70वें वर्ष में करना है ना? करना है, करेंगे?करेंगे या हुआ ही पड़ा है? सिर्फ निमित्त बनना है। अच्छा|बापदादा सभी बच्चों को देख गीत गाते हैं - वाह! बच्चे वाह! अच्छा - अभी क्या करना है?

सेवा का टर्न इन्दौर जोन का है:- बहुत सेवाधारी आये हैं। संगठन अच्छा है। जो सेवा की, दिल के स्नेह सेसेवा की है, उसका प्रत्यक्ष फल भी खुशी अनुभव की? खुशी मिली? सेवा का फल है, प्रत्यक्षफल है खुशी औरभविष्य सेवा का फल पुण्य जमा हुआ। पुण्य का खाता बढ़ गया। तो वर्तमान भी फल मिला और भविष्य भी जमा होगया। अच्छा है हर जोन को चांस मिलता है, विशेष चांस मिलने से वायुमण्डल का फायदा, यज्ञ सेवा के पुण्य काखाता और सेवा से सर्व ब्राह्मणों से सम्बन्ध-सम्पर्क का ईश्वरीय प्यार का नाता बढ़ता है। तो बहुत अच्छा कर रहे हैंऔर कल से तो समाप्ति भी शुरू हो जायेगी। तो बहुत अच्छा किया, सेवा का बल सदा के लिए भरके जाना। अच्छाहै। मातायें भी हैं, कुमारियाँ भी हैं, सब सेवाधारी हैं। पाण्डव तो हैं ही हैं। पाण्डव हाथ उठाओ। पाण्डव ज्यादा हैं। मातायें हाथ उठाओ। कुमारियाँ हाथ उठाओ।जो सेवा का चांस लिया है, तो जो वायदा करके जा रहे हो उसका फायदा विशेष सेवा के रिटर्न में देते रहना।वायदे का फायदा उठाना। सिर्फ वायदा नहीं, फायदा। अच्छा।

इन्दौर-नडियाद होस्टल की कुमारियाँ भी हैं:- नडियाद की थोड़ी हैं। नडियाद की कुमारियाँ ठीक हैं।स्व-उन्नति, सेवा की उन्नति दोनों ही हो रही है? अच्छा है, कुमारियाँ ट्रेनिंग करती हैं और भी ट्रेनिंग की कुमारियाँ आई हैं ना। नडियाद वाली भी आगे आ जाओ। अच्छा। इन सभी कुमारियों ने चाहे नडियाद में हैं, चाहे मधुबन मेंहैं, अभी तो मधुबन की हैं ना। तो सभी ने लक्ष्य पूरा रखा है? लक्ष्य क्या रखा है? सफलतामूर्त बनने का। समस्यानहीं बनना है, समाधानमूर्त बनना है। वायुमण्डल के प्रभाव में नहीं आना है। अपने वायुमण्डल का प्रभाव डालना है,इतनी ताकत भरी है ? आपको वायुमण्डल की मदद नहीं मिले तो क्या करेंगी? अपना वायुमण्डल दिखायेंगी? इतनीताकत है? फिर तो ताली बजाओ, मुबारक हो। बहुत अच्छा, देखो आपका चित्र तो इसमें आ रहा है, यह फोटोनिकल रहा है। तो बापदादा हर मास आपके निमित्त से रिपोर्ट लेगा। मुबारक भी देगा। क्योंकि सफलतामूर्त, सफलताके अधिकारी हैं। तो सफलता के अधिकारी बनना है ना। अच्छा है, एक बात की तो मुबारक है अभी, कि हिम्मत रखकरके आ गई हो। तो आपकी हिम्मत के कदम पर बापदादा की पदमगुणा मदद है ही है। दिलशिकस्त नहीं होना,दिलखुश। अगर कोई भी समस्या आवे ना, तो उसी समय बाप के आगे रख देना, अपने दिल में नहीं रखना। बाबाआप लो, हम तो समाधान स्वरूप हैं। ठीक है? अच्छी हिम्मत वाली हो, और हिम्मत सदा रखती रहना। अच्छा।

कटक में बहुत अच्छा मेगा प्रोग्राम रहा, पुरी में भी बहुत अच्छा प्रोग्राम रहा:- प्रोग्राम तो सब अच्छे कर रहे हो, सन्देश का जो कार्य करना है वह सन्देश तो सबको पहुँच रहा है, सबको पतापड़ता है कि ब्रह्माकुमारियाँ भी हैं और ब्रह्माकुमारियाँ यह कार्य करने चाहती हैं, यह भी मालूम पड़ता जाता है। लेकिनबापदादा की जो पुराने-पुराने बड़े-बड़े सेन्टर चल रहे हैं, उनके प्रति जो शुभ आशा है वह अभी तक पूर्ण नहीं कीहै। यह बापदादा का उलाहना है। वारिस क्वालिटी वा सेवा से भी ऐसे पुरूषार्थ में तीव्र क्वालिटी, वह बापदादा केसामने और अधिक आनी चाहिए। वी.आई.पी. भी आते हैं लेकिन वी.आई.पी. भी वी.वी.आई.पी. बन जायें, वी.आई.पी.,वी.आई.पी. नहीं रहें, आई.पी., आई.पी. नहीं रहें, ब्राह्मण जीवन का अनुभव करें। क्वान्टिटी तो हो रही हैं अभीक्वालिटी का गुलदस्ता हर एक जोन में निकलना चाहिए। हर एक जोन को चारों ओर के ऐसे उम्मींदवार आत्माओंकी विशेष पालना कर समीप सम्बन्ध में लाना है। प्लैन तो बनाते हो अभी इस प्लैन को तीव्र गति दो। क्योंकि कम-से-कम अपने राज्य के पहले जन्म की पावरफुल संख्या, कभी-कभी आने वाले, कभी-कभी नियम वाले नहीं, पक्के जोविन करने वाले वन तारीख, वन जन्म में आने वाले हों, ऐसा गुलदस्ता तैयार करो। चाहे प्रजा भी बने लेकिन प्रजाभी विशेष होगी। प्रजा भी मालिक का अधिकार रखेगी क्योंकि पहले जन्म की शोभा पहले जन्म का भभका तो अलगहोता है ना। तो हर एक जोन अपनी रिजल्ट निकाले, प्रोग्राम तो बहुत किया है, उसकी मुबारक हो। बापदादा उसकोअच्छा समझते हैं, सफल करते हैं, उमंग-उत्साह में आते हैं, और बड़ों-बड़ों के सम्बन्ध-सम्पर्क में आते हैं, यहअच्छा कर रहे हैं लेकिन रिजल्ट निकालो। कम-से-कम डेढ लाख, लाख आते हैं उनमें से कुछ तो विन करने वाले हों। तो ऐसा प्रोग्राम बनाओ और पुराने सेन्टर वारिस क्वालिटी नये-नये निकालो, जो पुराने हैं उनको तो मुबारकमिलती है, नये-नये वारिस क्वालिटी तैयार करो। रॉयल फैमिली, रॉयल सम्बन्ध-सम्पर्क वाले भी तो चाहिए ना।अच्छा।

अभी एक मिनट, एक मिनट मशहूर है ना! तो एक मिनट जो सभी ने मेहनत मुक्त का वायदा किया है, किया हैना ? किया है? फोटो निकालो। तो अभी एक मिनट के लिए अपने दिल से इस वायदे को दृढ़ता का अण्डरलाइनलगाओ। अपने मन में पक्का करो। अच्छा।

सर्व चारों ओर के स्वमानधारी बच्चों को, सदा बाप के दिल के स्नेही, सर्व के स्नेही श्रेष्ठ आत्माओं को, सदामेहनत मुक्त, जीवनमुक्त अनुभव करने वाले तीव्र पुरूषार्थी बच्चों को सदा वायदा और वायदे का फायदा लेने वाले,बैलेन्स रखने वाले ब्लिसफुल बच्चों को, सदा मौज में रहने वाले, मौज में औरों को भी रहाने वाले, ऐसे संगमयुगी श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी बच्चों को बापदादा का यादप्यार और दिलाराम के दिल की दुआयें स्वीकार हों। यादप्यारऔर नमस्ते।

दादियों से:- ठीक है ना। सभी आप लोगों को देखकर खुश होते हैं। बाप और बच्चों, दोनों को देखकर खुशहोते हैं। दोनों समान। सभी के सिकीलधे हो। सभी का दादियों से विशेष प्यार है ना! बहुत प्यार है। क्योंकि जोनिमित्त बनते हैं, तो निमित्त बनने वालों के ऊपर जिम्मेवारी भी होती है, तो स्नेह भी इतना होता है क्योंकि सबके प्यारऔर दुआओं की उनके जीवन में लिफ्ट मिल जाती है। आप भी जो निमित्त बनते हो उन्हों को भी लिफ्ट मिलती हैलेकिन लिफ्ट की गिफ्ट को कायम रखें तो बहुत फायदा हो सकता है। यह एकस्ट्रा वरदान मिलता है। किसी भीकार्य के लिए, ईश्वरीय कार्य में, यज्ञ सेवा में, विशेष निमित्त बनता है उसको दुआयें और प्यार दोनों की लिफ्ट मिलतीहै। प्यार एक ऐसी चीज़ है जो क्या से क्या बना देती है। आज दुनिया में भी किसी से पूछो क्या चाहिए? कहेंगे प्यारचाहिए। शान्ति चाहिए, वह भी प्यार से मिलेगी। तो प्यार, आत्मिक प्यार सबसे श्रेष्ठ है।(फ्रांस वालों ने बहुत याद दी है ) बापदादा भी बच्चों को विशेष सेवा में परिवर्तन की मुबारक देते हैं। (मार्क नेबहुत मेहनत की है) खास मुबारक हो, ताली बजाओ। देखो जो पुराना गवर्मेन्ट का रिकार्ड था, कल्ट का, वह सभीजगह मिट जायेगा। अच्छी हिम्मत रखी। हिम्मत की मदद मिलती है। योग किया ना दिल से, तो योग का फल मिला,बल मिला। बापदादा भी खुश है। परिवार भी खुश है तब तालियां बजाई ना।

दादी जी से बाबा पूछ रहा है:- तबियत खराब है, बुखार है क्या? यह तो बहादुर है, देखो ठण्डा है या गर्महै? खेल दिखा रही है। तबियत की कमज़ोरी हो जाती है। अभी तो ताकत आ रही है। सभी को कहो मैं ठीक हूँ।बोलो, ठीक हूँ। (मैं बिल्कुल ठीक हूँ) सभी का प्यार है ना।देखो साकारअव्यक्त हुए और व्यक्त में निमित्त बनाया।ऐसे टाइम पर निमित्त बनना, कितनी हिम्मत की बात है। ऐसे टाइम पर हिम्मत दिखाने वाले को सारे आयु तक मददमिलती है। अच्छा।



30-11-05   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


"समय की समीपता प्रमाण स्वयं को हद के बन्धनों से मुक्त कर सम्पन्न और समान बनो"

आज चारों ओर के सम्पूर्ण समान बच्चों को देख रहे हैं। समान बच्चे ही बाप के दिल में समाये हुए हैं। समान बच्चों की विशेषता है वह सदा निर्विघ्न, निर्विकल्प, निमार्कण और निर्मल होंगे। ऐसी आत्मायें सदा स्वतन्त्र होती हैं, किसी भी प्रकार के हद के बन्धन में बंधायमान नहीं होती। तो अपने आप से पूछो ऐसी बेहद की स्वतन्त्र आत्मा बने हैं! सबसे पहली स्वतन्त्रता है देहभान से स्वतन्त्र। जब चाहे तब देह का आधार ले, जब चाहे देह से न्यारे हो जाए। देह की आकर्षण में नहीं आये। दूसरी बात - स्वतन्त्र आत्मा कोई भी पुराने स्वभाव और संस्कार के बन्धन में नहीं होगी। पुराने स्वभाव और संस्कार से मुक्त होगी। साथ-साथ किसी भी देहधारी आत्मा के सम्बन्ध-सम्पर्क में आकर्षित नहीं होगी। सम्बन्ध-सम्पर्क में आते न्यारे और प्यारे होंगे। तो अपने को चेक करो - कोई भी छोटी सी कर्मेन्द्रियाँ बन्धन में तो नहीं बांधती? अपना स्वमान याद करो - मास्टर सर्वशक्तिवान, त्रिकालदर्शी, त्रिनेत्री, स्वदर्शन चक्रधारी, उसी स्वमान के आधार पर क्या सर्वशक्तिवान के बच्चे को कोई कर्मेन्द्रिय आकर्षित कर सकती? क्योंकि समय की समीपता को देखते अपने को देखो - सेकण्ड में सर्व बन्धनों से मुक्त हो सकते हो? कोई भी ऐसा बन्धन रहा हुआ तो नहीं है? क्योंकि लास्ट पेपर में नम्बरवन होने का प्रत्यक्ष प्रमाण है, सेकण्ड में जहाँ, जैसे मन-बुद्धि को लगाने चाहो वहाँ सेकण्ड में लग जाये। हलचल में नहीं आये। जैसे स्थूल शरीर द्वारा जहाँ जाने चाहते हो, जा सकते हो ना। ऐसे बुद्धि द्वारा जिस स्थिति में स्थित होने चाहो उसमें स्थित हो सकते हो? जैसे साइंस द्वारा लाइट हाउस, माइट हाउस होता है, तो सेकण्ड में स्विच आन करने से लाइट हाउस चारों ओर लाइट देने लगता है, माइट देने लगते हैं। ऐसे आप स्मृति के संकल्प का स्विच आन करने से लाइट हाउस, माइट हाउस होके आत्माओं को लाइट, माइट दे सकते हो? एक सेकण्ड का आर्डर हो अशरीरी बन जाओ, बन जायेंगे ना। कि युद्ध करनी पड़ेगी? यह अभ्यास बहुतकाल का ही अन्त में सहयोगी बनेगा। अगर बहुतकाल का अभ्यास नहीं होगा तो उस समय अशरीरी बनना, मेहनत करनी पड़ेगी। इसलिए बापदादा यही इशारा देते हैं - कि इस अभ्यास को सारे दिन में कर्म करते हुए भी अभ्यास करो। इसके लिए मन के कन्ट्रोलिंग पावर की आवश्यकता है। अगर मन कन्ट्रोल में आ गया तो कोई भी कर्मेन्द्रिय वशीभूत नहीं कर सकती। अभी सर्व आत्माओं को आपके द्वारा शक्ति का वरदान चाहिए। आत्माओं की आप मास्टर सर्वशक्तिवान आत्माओं के प्रति यही शुभ इच्छा है कि बिना मेहनत के वरदान द्वारा, दृष्टि द्वारा, वायब्रेशन द्वारा हमें मुक्त करो। अभी मेहनत करके सब थक गये हैं। आप सब तो मेहनत से मुक्त हो गये हो ना! कि अभी भी मेहनत करनी पड़ती है? सुनाया था - मेहनत से मुक्त होने का सहज साधन है दिल से बाप के अति स्नेही बन जाना। आप ब्राह्मण आत्माओं का जन्म का वायदा है, याद है वायदा? जब बाप ने अपना बनाया, ब्राह्मण जीवन दी तो ब्राह्मण जीवन का आप सबका वायदा क्या है? एक बाप दूसरा न कोई। याद है वायदा? याद है? कांध हिलाओ। अच्छा हाथ हिला रहे हैं। याद है पक्का या कभी-कभी भूल जाता है? देखो 63 जन्म तो भूलने वाले बने, अब यह एक जन्म स्मृति स्वरूप बने हो। तो बाप बच्चों से पूछ रहे हैं बचपन का वायदा याद है? कितना सहज करके दिया है - एक बाप में संसार है। एक बाप से सर्व सम्बन्ध हैं। एक बाप से सर्व प्राप्तियां हैं। एक ही पढ़ाने वाला भी है और पालना करने वाला भी है। सबमें एक है। चाहे परिवार भी है, ईश्वरीय परिवार लेकिन परिवार भी एक बाप का है। अलग-अलग बाप का परिवार नहीं है। एक ही परिवार है। परिवार में भी एक दो में आत्मिक स्नेह है, स्नेह नहीं आत्मिक स्नेह। बापदादा याद दिला रहे हैं, जन्म के वायदे। और क्या वायदा किया? सभी ने बड़े उमंग-उत्साह से बाप के आगे दिल से कहा, सबकुछ आपका है। तन-मन-धन सब आपका है। तो दी हुई चीज़ बाप की अमानत के रूप में बाप ने कार्य में लगाने के लिए दिया है, आपने बाप को दे दी, दे दी है ना? या वापस थोड़ा-थोड़ा ले लेते हो? वापस लेते हो तो अमानत में ख्यानत हो जाती है। कोई-कोई बच्चे कहते हैं, रूहरिहान करते हैं ना तो कहते हैं मेरा मन परेशान रहता है, मेरा मन आया कहाँ से? जब मेरा तेरे को अर्पण किया, तो मेरा मन आया कहाँ से? आप सभी तो बिन कौड़ी बादशाह हो गये, अभी आपका कुछ नहीं रहा, बिन कौड़ी हो गये लेकिन बादशाह हो गये। क्यों? बाप का खज़ाना वह आपका खज़ाना हो गये, तो बादशाह हो गये ना। परमात्म खज़ाना वह बच्चों का खज़ाना। तो बापदादा वायदे याद दिला रहे हैं। तेरे में मेरा नहीं करो। बाप कहते हैं - जब बाप ने आप सबको परमात्म खज़ानों से मालामाल कर दिया, जिम्मेवारी बाप ने ले ली, किन शब्दों में? आप मुझे याद करो तो सर्वप्राप्ति के अधिकारी हो ही। सिर्फ याद करो। और आपने कहा हम आपके, आप हमारे। यह वायदा है ना! तो बाप कहते हैं खज़ानों को सदा स्व प्रति और सर्व आत्माओं के प्रति कार्य में लगाओ। जितना कार्य में लगायेंगे उतना ही खज़ाना बढ़ता जायेगा। सर्वशक्तियों का खज़ाना, सर्व शक्तियाँ कार्य में लगाओ। सिर्फ बुद्धि में नॉलेज नहीं रखो मैं सर्वशक्तिवान हूँ, लेकिन सर्व शक्तियों को समय प्रमाण कार्य में लगाओ और सेवा में लगाओ।

बापदादा ने मैजॉरिटी बच्चों के पोतामेल में देखा है दो शक्तियाँ अगर सदा याद रहें और कार्य में समय पर लगाओ तो सदा ही निर्विघ्न रहो। विघ्न की ताकत नहीं है आपके आगे आने की। यह बाप की गैरन्टी है। वैसे तो सर्वशक्तियाँ चाहिए लेकिन मैजारिटी देखा गया कि सहनशक्ति और रियलाइजेशन की शक्ति, रियलाइज करते भी हो लेकिन उसको प्रैक्टिकल में स्वरूप में लाने में अटेन्शन कम है। इसलिए जिस समय रियलाइज करते हो उस समय चलन और चेहरा बदल जाता है। बहुत अच्छे उमंग-उत्साह में आते हो। हाँ रियलाइज किया लेकिन फिर क्या हो जाता है? अनुभवी तो सभी हैं ना ! फिर क्या हो जाता है? उसको हर समय स्वरूप में लाना, उसकी कमी हो जाती है। क्योंकि यहाँ स्वरूप बनना है। सिर्फ बुद्धि से जानना अलग चीज़ है, लेकिन उसको स्वरूप में लाना, इसकी आवश्यकता है। कभी-कभी बापदादा को कोई-कोई बच्चों पर रहम भी आता है, बाप समझते हैं बच्चे से मेहनत नहीं होती है तो बच्चे के बजाए बाप ही कर ले। लेकिन ड्रामा का राज़ है जो करेगा वह पायेगा। इसलिए बापदादा सहयोग जरूर देता है लेकिन करना फिर भी बच्चे को ही पड़ता है।

बापदादा ने देखा है बच्चे संकल्प बहुत अच्छे-अच्छे करते हैं। अमृतवेले बापदादा के पास अच्छे-अच्छे संकल्पों की बहुत-बहुत मालायें आती हैं। यह करेंगे, यह करेंगे, यह करेंगे...., बापदादा भी खुश हो जाते हैं, वाह! बच्चे वाह! फिर करने में कमज़ोर क्यों बन जाते हैं? इसका कारण देखा गया - ब्राह्मण परिवार में संगठन का वायुमण्डल। कहाँ-कहाँ वायुमण्डल कमज़ोर भी होता है, उसका असर जल्दी पड़ जाता है। फिर उन्हों की भाषा बतायें क्या होती है? भाषा बड़ी मीठी होती है, भाषा होती है यह तो चलता है, यह तो होता है.. ऐसे समय पर क्या संकल्प करो! यह होता है, यह चलता है, यह अलबेलापन लाता है लेकिन उस समय इस भाषा को परिवर्तन करो कि बाप का फरमान क्या है? बाप की पसन्दी क्या है? बाप किस बात को पसन्द करता है? बाप ने यह कहा है? किया है? अगर बाप याद आ गया तो अलबेलापन समाप्त हो, उमंग-उत्साह आ जायेगा। अलबेलापन भी कई प्रकार का आता है। आप लोग आपस में क्लास करना, लिस्ट निकालना, एक है साधारण अलबेलापन, एक है रॉयल अलबेलापन। तो अलबेलापन दृढ़ता नहीं लाता है और दृढ़ता सफलता का साधन है। इसलिए संकल्प तक रह जाता है लेकिन स्वरूप में नहीं आता। तो आज क्या सुना? वायदे याद कराये हैं ना! वायदे इतने अच्छे अच्छे करते, बापदादा इतना खुश हो जाते वायदे सुनके। लेकिन जितने वायदे करते हो ना उतना फायदा नहीं उठाते। तो बापदादा यही चाहते हैं, पूछते हैं ना बाप क्या चाहते हैं हमसे? तो बापदादा यही चाहते हैं कि समय से पहले सब एवररेडी बन जाओ। समय आपका मास्टर नहीं बने। समय के मास्टर आप हो इसलिए यही बापदादा चाहता है कि समय के पहले सम्पन्न बन विश्व की स्टेज पर बाप के साथ-साथ आप बच्चे भी प्रत्यक्ष हो। अच्छा।

जो नये नये बच्चे आये हैं मिलने के लिए, वह हाथ उठाओ। बड़ा हाथ उठाओ, लम्बा। अच्छा - बापदादा नय नये बच्चों को देख खुश होते हैं कि भाग्यवान बच्चे अपना भाग्य लेने के लिए पहुँच गये हैं। इसलिए मुबारक हो, मुबारक हो। अभी जो भी नये बच्चे आये हैं उनमें से देखेंगे कमाल कौन करके दिखाता है? भले आये पीछे हैं लेकिन आगे जाके दिखाओ। बापदादा के पास तो सब रिजल्ट पहुंचती है। अच्छा।

सेवा का टर्न दिल्ली-आगरा का है:- अच्छा दिल्ली वाले उठो, हाथ हिलाओ। बहुत अच्छा किया है, चांस लिया है। टीचर्स भी बहुत आई हैं। अच्छा है। टीचर्स को देखकर बापदादा खुश होते हैं। क्यों? बाप की गद्दी के अधिकारी बने हो। बापदादा टीचर्स को सदा भाई कहते हैं। बाप समान सेवाधारी बने और प्रवृत्ति में रहने वाले जो भी आये हैं, कुमारियाँ भी आई हैं, कुमार भी आये हैं। अभी देहली में कोई नवीनता करके दिखाओ। मेगा प्रोग्राम भी हो गये, कानफरेन्स भी बहुत हुई, वर्गों के प्रोग्राम भी बहुत हुए हैं, अभी नवीनता क्या करनी है? कोई नया प्लैन बनाया है दिल्ली वालों ने? बनाया है? बना रहे हैं? बापदादा के पास वर्गों की सेवा की रिपोर्ट आती है लेकिन हर एक वर्ग ने जो इतना वर्ष सेवा की है, उसमें फास्ट तीव्र पुरूषार्थी ग्रुप कितना निकला हर वर्ग का, वह नहीं लाया है। गुलदस्ता नहीं लाया है अभी। चलो बड़ी माला को छोड़ो, गुलदस्ता तो लाओ। हर एक वर्ग के कोई ऐसे एक्जैम्पुल चाहिए जो माइक भी हो और माइट भी हो सिर्फ माइक नहीं, माइट भी हो माइक भी हो। जिसका अनुभव सुनकर औरों में भी उमंग आ जाए। बापदादा हर वर्ग का चाहता है। जो ग्रुप वर्ल्ड में सेवा के योग्य बन जाये। अच्छा है, दिल्ली वाले दिल्ली को राजधानी बनाना है, तो पहले तो दिल्ली में ऐसा वायुमण्डल पैदा करो। दिल्ली का आवाज तो चारों ओर सहज ही फैलता है, यह तो बात है ही। अच्छा किया है, चांस लिया है। आधा क्लास तो दिल्ली दिखाई दे रहा है। अभी नवीनता, दूसरे बारी कोई नवीनता लेके ही आना, सिर्फ दिल्ली को ही नहीं कह रहे हैं, कोई भी जोन कोई नया प्लैन बनाके आये उसको बापदादा एक्स्ट्रा स्नेह शक्ति का वरदान देंगे। जो कर रहे हैं वह तो कर रहे हैं, नया कोई प्लैन हो। यह यात्रा निकालना, फार्म भराना, यह बहुत हो चुका। अभी कोई नया प्लैन बनाओ। कान्रेन्सफ भी बहुत हो गई, प्रोग्राम भी बहुत हो गये। सोचो। दिल्ली को नम्बरवन होना चाहिए क्योंकि दिल्ली में सबकी नजर है। और देखो ड्रामानुसार सेवा का आदि स्थान दिल्ली रहा। चाहे जमुना किनारा ही था लेकिन आरम्भ तो हुआ ना। जमुना किनारे पर राज्य करना है, तो जमुना किनारे पर ही सेवा आरम्भ की। अभी इसमें भी नम्बरवन लो। हैं, अच्छे अच्छे हैं, नया प्लैन बनाने वाले हैं, बापदादा देखते हैं, है। देख रहे हैं। तो मुबारक हो दिल्ली वालों को, लेकिन नया प्लैन लगायेंगे तो पदमगुणा मुबारक देंगे।

950 यूथ आये हैं:- अच्छा, बड़ा ग्रुप आया है। बापदादा ने समाचार तो सुना। यात्रा का प्लैन बना रहे हैं। लेकिन बापदादा यह चाहते हैं कि जो भी सब जोन हैं, जहाँ तहाँ जोन हैं, और सारे ब्राह्मण परिवार के यूथ कितने हैं, और क्या-क्या उन्हों में परिवर्तन आया है, वह प्रैक्टिकल नाम, स्थान और परिवर्तन, उसका प्रैक्टिकल लिखित हो जो गवर्मेन्ट को दिया जाए। गवर्मेन्ट तो खुद यूथ को बुलायेगी लेकिन पहले चारों ओर के यूथ के नाम स्थान और परिवर्तन शार्ट में, लम्बा चौड़ा नहीं, परिवर्तन का बुक, नाम स्थान का बुक हो, जो उन्हों को दिखाया जाए। फिर वह यूथ को आपेही निमन्त्रण देंगे। तो ऐसा प्लैन बनाओ। अभी कितने आये हैं? (950) तो थोड़े हैं ना! हजारों के करीब यूथ होंगे। उनका एक बुक बनाओ अच्छा, परिवर्तन सहित क्योंकि लोग सिर्फ यह नहीं देखते परिवर्तन क्या हुआ और उसमें परिपक्व हैं? यह रिजल्ट चाहिए। क्योंकि गवर्मेन्ट यूथ के पीछे खर्चा भी बहुत कर रही है। परिवर्तन की कोई कमाल दिखाओ। अच्छा है, फिर भी बापदादा ने देखा है कि यूथ वर्ग कुछ न कुछ कार्य करता रहता है। अटेन्शन है सेवा का। इसलिए परिवर्तन करके दिखाओ। ट्रेनिंग की है ना! यह सब ट्रेनिंग में आये हैं ना! तो ट्रेनिंग को प्रैक्टिकल में रिजल्ट में दिखाना फिर सारा परिवार आपको मुबारक देगा। अच्छा।

डबल विदेशी:- अच्छा है डबल विदेशी स्व पर और सेवा पर अटेन्शन अच्छा दे रहे हैं। लेकिन सिर्फ इसमें एक मात्रा लगानी है। अण्डरलाइन करनी है, जो परिवर्तन का संकल्प लेते हो और अच्छा उमंग-उत्साह, हिम्मत से लेते हो, सिर्फ इसको अण्डरलाइन करते जाओ, करना ही है। बदलना ही है। बदलकर विश्व को बदलना है। यह दृढ़ता की अण्डरलाइन बार-बार करते जाओ। बाकी बापदादा खुश है, वृद्धि भी कर रहे हैं और सेवा और स्व के ऊपर अटेन्शन भी है। लेकिन पूरा टेन्शन नहीं गया है, अटेन्शन है थोड़ा बीच-बीच में टेन्शन भी है, वह समाप्त करना ही है। बाकी हिम्मत अच्छी है। हिम्मत की मुबारक है, सभी जो भी बैठे हैं बाप सहित आपके हिम्मत की मुबारक दे रहे हैं। ताली बजाओ। अच्छा। आप तो यहाँ बैठे हो लेकिन बापदादा को दूर बैठे बहुत बच्चों का यादप्यार मिला है, और बापदादा एक-एक बच्चे को नयनों में समाते हुए बहुत-बहुत दिल की दुआयें दे रहे हैं। चाहे भारत से, चाहे विदेश से, बहुत बच्चों की याद आ रही है, पत्र आते हैं, ईमेल आते हैं, सब बाबा के पास पहुँच गये हैं। अच्छा।

बापदादा एक सेकण्ड में अशरीरी भव की ड्रिल देखने चाहते हैं, अगर अन्त में पास होना है तो यह ड्रिल बहुत आवश्यक है। इसलिए अभी इतने बड़े संगठन में बैठे एक सेकण्ड में देहभान से परे स्थिति में स्थित हो जाओ। कोई आकर्षण आकर्षित नहीं करे। (ड्रिल) अच्छा।

चारों ओर के तीव्र पुरूषार्थी बच्चों को, सदा स्व-परिवर्तन और विश्व परिवर्तन की सेवा में तत्पर रहनेवाले विशेष आत्माओं को, सदा ब्रह्मा बाप समान कर्मयोगी, कर्म की, कर्मेन्द्रियों की आकर्षण से मुक्त आत्माओं को, सदा दृढ़ता को हर संकल्प, हर बोल, हर कर्म में स्वरूप में लाने वाले बाप के समीप और समान बच्चों को बापदादा का दिल की दुआयें और दिल का यादप्यार स्वीकार हो और नमस्ते।

दादी जी से:- तन्दरूस्त हो गई। अभी बीमारी गई। बीमारियाँ महारथियों से विदाई लेने के लिए आती हैं। अन्दर ही अन्दर कमार्कतीत बनने का रिहर्सल कर रही है। (दादी जानकी कह रही हैं दादी बेफिकर बादशाह है) आप फिकर वाली हैं क्या? आप भी बेफिकर। दोनों ही पार्ट अच्छा बजा रही हैं। देखो, सबसे बड़े ते बड़ा जिम्मेवारी का ताज पहनने वाली निमित्त तो बनी ना। यह सब साथी हैं, पूँछ नहीं हैं। आप लोगों को देखके उमंग-उत्साह आता है ना। (अभी क्या नया करना है? बाबा ही कुछ प्रेरणा दे) बापदादा ने सुनाया कि हर वर्ग का गुलदस्ता जो माइक भी हो और माइट भी हो। सिर्फ माइक और सम्पर्क वाला नहीं, सम्बन्ध में भी नजदीक हो, ऐसा गुलदस्ता निकालो। फिर वह ग्रुप निमित्त बनेगा सेवा करने के। वह माइक बनेगा और आप माइट बनेंगी। उनके जिगर से निकले बाबा, तभी प्रभाव पड़ेगा। उन्हों को सम्बन्ध में नजदीक लाओ। कभी-कभी होता है ना, तो नशा थोड़ा कम हो जाता है। सम्बन्ध सम्पर्क में जहाँ भी आवें वहाँ सम्बन्ध और सम्पर्क रहे तो ठीक हो जायेंगे। अच्छा।

(मोहिनी बहन के घुटने का आपरेशन बहुत अच्छा हो गया है, आपको बहुत-बहुत दिल से याद दी है) उसको कहना कि बापदादा ने भी आपकी हिम्मत पर बहुत-बहुत दिल से दुआयें और यादप्यार दी है। सबका प्यार भी है। अच्छा।



15-12-05   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


नये वर्ष में स्नेह और सहयोग की रूपरेखा स्टेज पर लाओ, हर एक को गुण और शक्तियों की गिफ्ट दो

आज परमात्म बाप अपने चारों ओर के परमात्म प्यार के अधिकारी बच्चों को देख रहे हैं। यह परमात्म प्यार विश्व में कोटों में से कोई को प्राप्त होता है। यह परमात्म प्यार नि:स्वार्थ प्यार है क्योंकि एक परमात्मा पिता ही निराकार, निरहंकारी है। मनुष्य आत्मा शरीरधारी होने के कारण कोई न कोई स्वार्थ में आ ही जाती है। परमात्म बाप ही अपने बच्चों को ऐसा नि:स्वार्थ प्यार देते हैं। परमात्म प्यार ब्राह्मण जीवन का विशेष आधार है। ब्राह्मण जीवन का जीवनदान है। अगर ब्राह्मण जीवन में परमात्म प्यार का अनुभव कम है, तो प्यार के बिना जीवन रमणीक नहीं, सूखा जीवन हो जाता है। परमात्म प्यार ही जीवन में सदा साथ भी देता और साथी बन सदा सहयोगी रहता। जहाँ प्यार है, साथ है वहाँ सब कुछ बहुत सहज और सरल हो जाता है। मेहनत का अनुभव नहीं होता है। ऐसा अनुभव है ना! परमात्म प्यारे कोइ भी व्यक्ति वा साधनों की आकर्षण में नहीं आ सकते क्योंकि परमात्म आकर्षण, परमात्म प्यार ऐसा अनुभव कराता जो सदा प्यार के कारण लवलीन रहते हैं, जिसको लोगों ने परमात्मा में लीन होना समझ लिया। परमात्मा में लीन नहीं होता लेकिन परमात्म प्यार में लवलीन हो जाता।

बापदादा चारों आरे के बच्चों को देखतें हैं - परमात्म प्यारे तो सभी बने हैं लेकिन एक है लवली बच्चे दुसरे हैं लवलीन बच्चे। तो अपने आपसे पूछो लवली तो सभी हैं, लेकिन लवलीन कहाँ तक रहते हैं? लवलीन बच्चों की निशानी है वह सदा परमात्म फरमान में सहज चलते हैं। फरमान में भी रहते और देहभान से कुर्बान भी रहते हैं क्योंकि प्यार में कुर्बान होना मुश्किल नहीं है। सबसे पहला फरमान है - योगी भव, पवित्र भव। बाप का बच्चों से प्यार होने के कारण बाप बच्चों को मेहनत करते देख नहीं सकते क्योंकि बाप जानते हैं 63 जन्म बहुत मेहनत की, अभी यह अलौकिक जन्म मेहनत से मुक्त हो अतीन्द्रिय सुख की मौज मनाने का है। तो मौज मना रहे हो कि मेहनत करनी पड़ती है? प्यार में फरमान पर चलना मेहनत नहीं लगती। अगर मेहनत करनी पड़ती है तो प्यार की परसेन्टेज कम है। कहाँ न कहाँ प्यार में कुछ न कुछ लीकेज है। दो बातों की लीकेज महेनत कराती है - एक पुराने संस्कार का आकषर्ण्। संसार में सम्बन्ध, पदार्थ सब आ जाता है। और दूसरा- पुराने संस्कार की आकर्षण। यह पुराना संसार और पुराने संस्कार अपने तरफ आकर्षित कर देते हैं। तो परमात्म प्यार में परसेन्टेज हो जाती है। चेक करो - इन दोनों लीकेज से मुक्त हैं? याद करो आप आत्मा के अनादि संस्कार और आदि संस्कार क्या थे और अभी अन्त के ब्राह्मण जीवन के संस्कार क्या हैं? अनादि भी हैं, आदि भी हैं और अन्त में भी श्रेष्ठ संस्कार हैं। यह पुराने संस्कार मध्य के हैं, न अनादि हैं, न आदि हैं, न अन्त के हैं। लेकिन लक्ष्य क्या है सभी का? किसी भी बच्चे से पूछो तो एक ही उत्तर देते हैं लक्ष्य है बाप समान बनने का। यही है ना! है तो हाथ उठाओ। यही लक्ष्य है पक्का? या बीच-बीच में बदली हो जाती है? तो बाप बच्चों से पूछते हैं कि बाप और दादा दोनों के समान संस्कार कौन से हैं? सदा बाप हर आत्मा के प्रति उदारचित्त रहे हैं। हर आत्मा के प्रति स्नेह और सम्मान स्वरूप में सहयोगी रहे हैं। ऐसे स्वयं भी अपने को हर आत्मा के प्रति सहयोगी अनुभव करते हो? सहयोग दे तो सहयोगी बनें, नहीं। स्नेह दे तो स्नेही बनें, नहीं। जैसे ब्रह्मा बाप हर बच्चे के प्रति सहयोगी बनें, स्नेही बनें, ऐसे सर्व के सदा स्नेही और सहयोगी। इसको कहा जाता है समान बनना। अगर कोई भी बच्चे को मेहनत करनी पड़ती है, संस्कार परिवर्तन करने में, उसका कारण क्या है? ब्रह्मा बाप ने अपने ऊपर अटेन्शन रखा लेकिन मेहनत नहीं की, संस्कार परिवर्तन में मेहनत का कारण है - लवली बने हैं लवलीन नहीं बने हैं। बापदादा तो हर बच्चे को लवली बच्चे समझते हैं, जानते भी हैं, जन्मपत्री हर एक का जानते हैं। परिवार भी क्या कहेंगे? लवली हैं। बापदादा हर बच्चे को एक ही पढ़ाई, एक ही पालना, एक ही वरदान सदा देते हैं। चाहे लास्ट नम्बर भी जानते हैं फिर भी बापदादा किसी भी बच्चे का अवगुण, कमज़ोरी संकल्प में भी नहीं रखते। लाडला है, सिकीलधा है, मीठा-मीठा है.... इसी दृष्टि और वृत्ति से देखते क्योंकि बापदादा जानते हैं इसी वृत्ति और श्रेष्ठ दृष्टि से कमज़ोर महावीर बन जायेगा। ऐसे ही अपने श्रेष्ठ वृत्ति और शुभभावना, शुभकामना द्वारा किसी का भी परिवर्तन कर सकते हो। जब आपने चैलेन्ज किया है कि प्रकृति को भी परिवर्तन करके दिखायेंगे तो क्या आत्माओं का परिवर्तन नहीं कर सकते! प्रकृतिजीत बनते हो तो आत्मा, आत्मा की श्रेष्ठ भावना से, कल्याण की कामना से परिवर्तन नहीं कर सकते हैं ?

अभी नया वर्ष शुरू होने वाला है ना - तो नये वर्ष में सर्व बेहद के ब्राह्मण परिवार के बीच एक दो के प्रति अपने शुभभावना, श्रेष्ठ कामना द्वारा हरेक एक दो के परिवर्तन करने में सहयोगी बनो, चाहे कमज़ोर है, जानते हो इसके संस्कार में यह कमज़ोरी है लेकिन आप स्नेह और सहयोग की शक्ति द्वारा सहयोगी बनो। एक दो को सहयोग का हाथ मिलाओ। इस सहयोग के हाथ मिलाने का दृश्य ऐसा बन जायेगा जैसे हाथ में हाथ स्नेह का मिलाना, सहयोग का मिलाना, माला बन जाये। शिक्षा नहीं दो, स्नेह भरा सहयोग दो। न्यारा नहीं बनो, किनारा नहीं करो, सहारा बनो क्योंकि आपका यादगार विजयमाला है। हर एक मणका, मणके के साथी सहयोगी है तब माला का चित्र बना है। तो सभी बापदादा से पूछते हैं नये साल में क्या करना है? सन्देश देने का कार्य तो बहुत किया, कर रहे हैं, करते रहेंगे। अब सन्देश-वाहकों के सहयोग और स्नेह की रूपरेखा स्टेज पर लाओ। महादानी बनो, अपने गुणों का सहयोगी बनो, बनाओ। ऐसे अपने गुणों का, हैं तो परमात्म गुण लेकिन जो अपने में बनाया है, उस गुण की शक्ति से उन्हों की कमज़ोरी दूर करो। यह कर सकते हैं? कर सकते हैं या मुश्किल है? टीचर्स बताओ, कर सकते हैं? कर सकते हैं या करना ही है? करना ही है? कोई कमज़ोर नहीं रहे, क्योंकि कोटों में कोई है ना! चाहे लास्ट दाना भी है, है तो कोटों में कोई। आपका टाइटिल ही है - मास्टर सर्वशक्तिवान। तो सर्वशक्तिवान का कर्तव्य क्या है? शक्ति की लेन-देन करना। बाप द्वारा मिला हुआ गुण आपस में लेन-देन करो। यही सहयोग की गिफ्ट एक दो में दो। नये वर्ष में एक दो को गिफ्ट देते हैं ना! तो इस वर्ष में एक दो में गुणों की गिफ्ट दो। अगर कल्याण की भावना रखेंगे तो जैसे भाषण करके सन्देश देते हो ना, वाणी द्वारा वैसे अपने कल्याण की भावना द्वारा, कल्याण की वृत्ति द्वारा, कल्याण के वायुमण्डल द्वारा यह गुणों की गिफ्ट दो, शक्तियों की गिफ्ट दो। कमज़ोर को सहयोग देना, यह समय पर गिफ्ट देना है, गिरे हुए को गिराओ नहीं, चढ़ाओ, ऊँचा चढ़ाओ। यह ऐसा है, यह ऐसा है..., नहीं। यह प्रभु प्यार के पात्र है, कोटों में कोई आत्मा है, विशेष आत्मा है, विजयी बनने वाली आत्मा है, यह दृष्टि रखो। अभी वृत्ति, दृष्टि, वायुमण्डल चेंज करो। कुछ नवीनता करनी चाहिए ना! कमज़ोरी देखते, देखो नहीं, उमंग दो, सहयोग दो। ऐसा ब्राह्मण संगठन तैयार करो तो बापदादा विजय की ताली बजायेगा। आप भी बार-बार तालियाँ बजाते हो ना, बापदादा मुबारक हो, बधाई हो, ग्रीटिंग्स हो, उसकी तालियाँ बजायेगा। आप भी साथ में ताली बजायेंगे ना। अभी ताली बजाई तो अच्छा किया लेकिन विश्व के आगे ताली बजे। सबके मुख से यह आवाज निकले, हमारे ईष्ट आ गये। हमारे पूज्य आ गये। लक्ष्य पक्का है ना! पक्का है लक्ष्य, करना ही है? या देखेंगे, प्लैन बनायेंगे! करना ही है, प्लैन क्या, करना ही है। अभी सभी इन्तजार कर रहें हैं। अभी इन्हों का इन्तजार समाप्त करें प्रत्यक्ष हाने का इन्तजाम करें, देखे प्रकृति भी अभी कितनी तंग हो रही है। तो प्रकृति को भी शान्त बना दो। आप प्रत्यक्ष हो जायेंगे तो विश्व शान्ति स्वत: हो जायेगी। अच्छा।

इस बारी भी नये-नये बच्चे बहुत आये हैं। अच्छा है। बापदादा खुश होते हैं कि जो भी कोने-कोने में छिपे हुए कल्प पहले वाले बच्चे हैं, वह पहुँच रहे हैं। अभी पीछे आने वाले भी ऐसा लक्ष्य रखो समय कम है इसलिए तीव्र पुरूषार्थ द्वारा नम्बर आगे ले सकते हो। अभी भी टूलेट का बोर्ड नहीं लगा है, लेट का लगा है। इसलिए जितना पुरूषार्थ करने चाहो उतना आगे बढ़ सकते हो। तो पहले बारी आने वाले हाथ उठाओ। अच्छा। सभी ने, जिन्होंने भी हाथ उठाया है, तीव्र पुरूषार्थ करना है ना! अभी ढीले पुरूषार्थ का समय गया, चलने का गया, अभी उड़ने का समय है। तो डबल लाइट बनके उड़ो। जो भी बनने चाहो, बन सकते हो। उलाहना नहीं देना - बाबा हमको पीछे बुलाया, अभी भी डबल लाइट बनके उड़ सकते हो। इतना उमंग है? जिन्होंने हाथ उठाया, इतना उमंग है? जिसको इतना उमंग है, आगे जाकर ही दिखाना है, वह हाथ उठाओ। बापदादा तो इन्हें एडवांस मुबारक दे रहे हैं। अच्छा।

गुजरात की ही सेवा है, गुजरात वाले ही मिलन मनाने आये हैं:- गुजरात वाले जो भी हैं, चाहे आये हैं, चाहे सेवा में आये हैं, वह हाथ उठाओ। बहुत हैं, बहुत अच्छा। अच्छा चांस लिया है। गुजरात को बापदादा कहते हैं, सिन्धी में कहावत है जो चुल पर वह दिल पर। तो सबसे नजदीक में नजदीक गुजरात है। जो नजदीक होता है ना, उसको कहा जाता है शडपंथ पर है, बुलाओ और पहुँच जाये। तो ऐसे एवररेडी है ना गुजरात, कभी भी बुलायें आ जाओ, तो आ जायेंगे? ऐसे है? परिवार को नहीं देखेंगे क्या करेंगे, आ जायेंगे? एवररेडी हैं। अच्छा है गुजरात, साकार ब्रह्मा के प्रेरणा से स्थापन हुआ है। गुजरात ने गुजरात को निमन्त्रण नहीं दिया, ब्रह्मा बाप ने गुजरात को खोला है। तो गुजरात के ऊपर विशेष ब्रह्मा बाप की नजर पड़ी हुई है। और गुजरात ने पुरूषार्थ भी किया है, सेन्टर अच्छे खुले हैं। कितने सेन्टर हैं? 300 सेवाकेन्द्र, उपसेवाकेन्द्र हैं और 3 हजार गीता पाठशालाये हैं। अच्छा सबसे ज्यादा सेंटर किस जोन के हैं? (बम्बई-महाराष्ट्र) अच्छा। महाराष्ट्र वाले आये हैं ? (आज नहीं आये हैं ) सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में हैं गुजरात सेवा तो अच्छी कर रहे हैं। गुजुरात का विस्तार तो अच्छा है। अभी क्या करना है। विस्तार तो है विस्तार तो अच्छा किया है, अभी गुजरात वाले नम्बरवन वारिस तैयार करें। कम से कम जो बड़े सेवाकेन्द्र हैं, जो पुराने वारिस हैं, वह तो हैं ही लेकिन नया कोई वारिस निकालो। चलो एक-एक तो निकालो, क्योंकि माला में मणके वही बनेंगे जो वारिस क्वालिटी होंगे। तो माला तो तैयार करना है ना। 16108 की भी माला बनी हुई है। अभी अगर बापदादा बोले 108 की माला बनाओ, तो बना सकते हो? बन सकती है? दादियाँ बतावें, 108 की माला बन सकती है? (दादीजी ने कहा बन सकती है।) तैयार हैं? 108 की माला तैयार हो गई है? (हाँ बाबा तैयार है) अच्छा लिखकर दिखाना। तैयार है तो बहुत अच्छा, मुबारक है। अच्छा 16 हजार की, आधे तक बनी है? (आधा तो क्या उनसे भी ज्यादा बनी है) अच्छा है ना। देखो गुप्त रूप में बनी है और आपकी दादी ने देख ली है। अच्छा है। अभी आपसे सभी पूछेंगे कि मेरा माला में नाम है? अच्छा है। ऐसी शुभभावना, शुभउम्मीदें तैयार ही कर लेती हैं। अभी सभी ने सुना ना, अपने को चेक करना मैं उस माला में एवररेडी हूँ? अच्छा। और क्या करना है?

कैड ग्रुप:- अच्छा है, यह भी आवाज फैलाने का साधन बहुत अच्छा है क्योंकि प्रैक्टिकल सबूत देखते हैं ना और बिना खर्चे के मैडिटेशन द्वारा ठीक हो जाना, तो सबको बहुत अच्छा लगता है अभा धीरे-धीरे इसकी वृद्धि करते जाओ। सुना है, कर रहे हैं और सफलता भी मिल रही है और भी मिलती रहेगी बाकी बापदादा इस कार्य के लिए निमित्त बनने वालों को मुबारक दे रहे हैं। आफिशियल गवर्मेन्ट तक पहुँच रही है और भी फैलाते रहेंगे तो मेडीटेशन का महत्व बढ़ता जायेगा। बाकी बापदादा को यह विधि पसन्द है। अच्छा।

डबल विदेशी:- डबल विदेशी तो सदा डबल पुरूषार्थ करते होंगे ना! पुराना संसार और पुराने संस्कार का नामोनिशान नहीं रहे, यह है डबल पुरूषार्थ। तो ऐसा डबल पुरूषार्थ चल रहा है ? चलता है ? कंधा तो हिलाओ। जिसका अटेन्शन है इस डबल पुरूषार्थ पर वह हाथ उठाओ। अच्छा-फिर तो प्रत्यक्षता विदेश से होगी। डबल पुरूषार्थ करनेवालों की विजय प्रत्यक्ष हो जायेगी। बापदादा को खुशी है कि डबल फारेनर्स सेवा और पुरूषार्थ दोनों तरफ अटेन्शन दे आगे बढ़ रहे हैं। बढ़ रहे हैं इसकी मुबारक है लेकिन आगे इस अटेन्शन में और भी तीव्रता लाओ। जिस भी सेन्टर पर जायें वहाँ ऐसा अनुभव हो जैसे मधुबन का वायुमण्डल। अब हर एक स्थान ऐसे वायुमण्डल का अनुभव करावे। जैसे मधुबन में कोई भी आता है, प्रभावित होकर ही जाता है किसी भी बात में, ऐसे कोई भी आत्मा आवे, किसी न किसी बात में ऐसे प्रभावित होके जाये जो बार-बार आता ही रहे। आगे बढ़ता रहे। बाकी अटेन्शन है, पुरूषार्थ भी है, लक्ष्य भी है अब प्रैक्टिकल ऐसा प्रभावित हो जो कोई भी आने के बिना, बनने के बिना रह नहीं सके। अच्छा है, हर टर्न में विदेशी आते हैं, इससे भी मधुबन अच्छा सुन्दर लगता है। इन्टरनेशनल हो जाता है ना! विजयी हैं और विजय का तिलक सदा अपने मस्तक पर प्रत्यक्ष दिखाई दे यह और थोड़ा विजय का तिलक स्पष्ट करो। जो भी देखे विजय का चमकता हुआ तिलक दिखाई दे। कितने बार विजयी बने हैं? अनेक बार बने हैं, अभी भी बने हैं, फिर भी बनते रहेंगे। तो दोनों बातों में विजयीभव का वरदान चलन और चेहरे से दिखाई दे। निश्चय और नशा तो है ही! हम नहीं विजयी बनेंगे तो कौन बनेगा, यह नशा है ना ! निश्चय भी है, नशा भी है। अभी एक दो के सहयोगी बन विजय का झण्डा विश्व के आगे लहराओ। क्योंकि डबल विदेशियों के संस्कार हैं जो करना है वह पूरा करना है, अधूरा नहीं। तो इसमें भी सम्पन्न बनना ही है। ठीक है। पक्का है ना! कच्चा तो नहीं ना! अच्छा। आजकल विश्व में दो बातें विशेष चलती हैं - एक एक्सरसाइज और दूसरा भोजन के ऊपर अटेन्शन। तो आप भी यह दोनों बातें करते हो? आपकी एक्सरसाइज कौन सी है? शारीरिक एक्सरसाइज तो सब करते हैं लेकिन मन की एक्सरसाइज अभी-अभी ब्राह्मण, ब्राह्मण सो फरिश्ता और फरिश्ता सो देवता। यह मन्सा ड्रिल का अभ्यास सदा करते रहो। और शुद्ध भोजन, मन का शुद्ध संकल्प। अगर व्यर्थ संकल्प, निगेटिव संकल्प चलता है तो यह मन का अशुद्ध भोजन है। तो मन में सदा शुद्ध संकल्प रहे, दोनों करना आता है ना! जितना समय चाहो उतना समय शुद्धसंकल्प स्वरूप बन जाओ। अच्छा।

चारों ओर के परमात्म प्यार के अधिकारी विशेष आत्माओं को, सदा एक दो के सहयोगी बनने वाले बाप के स्नेही और सहयोगी आत्माओं को, सदा विजयी है और विजय का झण्डा विश्व में फैलाना है, इस लक्ष्य को प्रैक्टिकल में लाने वाले विजयी बच्चों को, सदा इस पुराने संसार और संस्कार के आकर्षण से परे रहने वाले बाप समान बच्चों को दिलाराम बाप का दिल से यादप्यार और नमस्ते।

दादियों से:- (दादीजी से) अच्छी खुशखबरी सुनाई। (मोहिनी बहन से) अच्छा है मुक्त होकर आ गई। सहज हो गया ना ! सब ब्राह्मणों की दुआयें भी थी। सूली से काँटा करके आ गई। बापदादा खुश है, आपकी मन्सा शक्ति का प्रमाण अच्छा है। (दादीजी से) बहुत अच्छा पार्ट बजा रही हो। आपको देखकर सभी को फरिश्ता लाइफ याद आती है। न्यारा और प्यारा।

गुजरात की मुख्य 13 बहिनों से:- अच्छे-अच्छे महावीर हैं। महावीरों का काम है विजयी बन विजयी बनाना। तो सभी अच्छी सेवा कर रहे हैं और आगे भी सेवा होती रहेगी। बापदादा बच्चों के उमंग-उत्साह को देख खुश होते हैं। अच्छा गुजरात में फैला रहे हो। और भी आगे फैलाते रहेंगे। बापदादा को सभी बच्चे आशाओं के दीपक लग रहे हैं। अच्छा है। संगठन भी अच्छा है। एक-एक की विशेषता है। अच्छा। खुश, खुशी बांटने वाले। (सरला दीदी पूछ रही हैं, दादी ने माला में किसको रखा है) आप क्या समझती हो? हम तो होंगे ही ना, ऐसे समझती हो। थोड़ा बहुत एक दो को सहयोग दे और जो कुछ भी रहा हुआ है, वह खत्म हो जायेगा। सब बाप समान बनने वाले ही हैं। (नवीनता क्या करें) सुनाया ना - एक एक सेंटर कम से कम एक वारिस तो तैयार करे। तो इस वर्ष वह लेकर आना, 21 वारिस तो लेके आना। यह शुरू करो। पहला नम्बर आओ। सभी हाँ कर रहे हैं। वारिस की क्वालिफिकेशन जानते हैं ना। यह सब बाबा के ही बनायेंगे ना, अपना तो बनायेंगी नहीं। अच्छा।



31-12-05   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


"नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो"

आज बापदादा चारों ओर के चाहे सम्मुख हैं, चाहे दूर बैठे दिल के समीप हैं, सर्व को तीन मुबारक दे रहे हैं। एक नवजीवन की मुबारक है, दूसरी नवयुग की मुबारक है और तीसरी आज के दिन वर्ष की मुबारक है। आप सभी भी नये वर्ष की मुबारक देने और मुबारक लेने आये हो। वास्तव में सच्ची दिल के खुशी की मुबारकें आप ब्राह्मण आत्मायें लेते भी हो, देते भी हो। आज के दिन का महत्व है। विदाई भी है और बधाई भी है। विदाई और बधाई का संगमयुग है। आज के दिन को कहेंगे संगम का दिन है। संगम की महिमा बहुत बड़ी है। आप सभी जानते हो कि संगमयुग की महिमा के कारण आजकल पुराने और नये वर्ष के संगम को कितना धूमधाम से मनाते हैं। संगमयुग की महिमा के कारण ही इस पुराने नये वर्ष के संगम की महिमा है। जहाँ दो नदियां मिलती हैं, संगम होता है, उनकी भी महिमा है। जहाँ नदी सागर का संगम होता है उसकी भी महिमा है। लेकिन सबसे बड़ी महिमा इस संगमयुग की है, पुरूषोत्तमयुग की है, जहाँ आप ब्राह्मण भाग्यवान आत्मायें बैठे हो। यह नशा है ना ! अगर आपसे कोई पूछे आप किस समय पर हो? क्या कलियुग में रहते हो, सतयुग में रहते हो? तो क्या फलक से कहेंगे? हम इस समय पुरूषोत्तम संगमयुग में रहते हैं। आप कलियुगी नहीं हो, संगमयुगी हो। और इस संगमयुग की विशेष महिमा क्यों है? क्योंकि भगवान और बच्चों का मिलन होता है, मेला होता है, मिलन होता है, जो किसी भी युग में नहीं होता। तो मेला मनाने आये हो ना ! आप कहाँ-कहाँ से आये हो मिलन मेला मनाने के लिए। कभी स्वप्न में भी सोचा था कि ड्रामा में मुझ आत्मा का ऐसा भी भाग्य नूंधा हुआ है। था और है - आत्मा का परमात्मा से मिलने का। बाप भी हर एक बच्चे के भाग्य को देख हर्षित होते हैं। वाह! भाग्यवान बच्चे वाह! अपने भाग्य को देख दिल में अपने प्रति वाह! मैं वाह! वाह! मेरा भाग्य वाह ! वाह! मेरा बाबा वाह ! वाह ! मेरा ब्राह्मण परिवार वाह ! यह वाह, वाह के गीत ऑटोमेटिक दिल में गाते रहते हो ना।

तो आज इस संगम के समय अपने अन्दर सोच लिया है कि किस-किस बातों को विदाई देनी है? सोचा है सभी ने? सदाकाल के लिए विदाई देनी है क्योंकि सदाकाल के लिए विदाई देने से सदाकाल की बधाईयाँ मना सकेंगे। ऐसी बधाई दो जो आपके चेहरे को देख जो भी आत्मा सामने आये वह भी बधाईयां प्राप्त कर खुश हो जाए। जो दिल से बधाई देते हैं वा लेते हैं वह सदा ही कैसे दिखाई देते हैं? संगमयुगी फरिश्ता। सभी का यही पुरूषार्थ है ना- ब्राह्मण सो फरिश्ता और फरिश्ता सो देवता। क्योंकि बाप को सब प्रकार के संकल्प वा जो भी कुछ प्रवृत्ति का, कर्म का बोझ है वह दे दिया है ना। बोझ दिया है या थोड़ा सा रह गया है? क्योंकि थोड़ा भी बोझ फरिश्ता बनने नहीं देगा और जब बाप आये हैं बच्चों का बोझ लेने के लिए तो बोझ देना मुश्किल है क्या! मुश्किल है या सहज है? जो समझते हैं बोझ दे दिया है वह हाथ उठाओ। दे दिया है? देखना सोच के हाथ उठाना। बोझ दे दिया है? अच्छा। दे दिया है? मुबारक हो। दे दिया है तो बहुत मुबारक हो। और जिन्होंने नहीं दिया है वह किसलिए रखा है? बोझ से प्रीत है क्या? बोझ अच्छा लगता है? देखो बापदादा हर बच्चे को क्या कहते हैं? ओ मेरे बेफिकर बादशाह बच्चे। तो बोझ का फिकर होता है ना! तो बोझ लेने के लिए बाप आये हैं क्योंकि 63 जन्म से बाप देख रहे हैं बोझ उठाते-उठाते सभी बच्चे बहुत भारी हो गये हैं। इसलिए जब बाप बच्चों को प्यार से कह रहे हैं बोझ दे दो। फिर भी क्यों रख लिया है? अच्छा लगता है बोझ? सबसे सूक्ष्म बोझ है पुराने संस्कार का। बापदादा ने हर बच्चे के इस वर्ष का, क्योंकि वर्ष पूरा हो रहा है ना, तो इस वर्ष का चार्ट देखा। आप सबने भी अपना-अपना वर्ष का चार्ट चेक किया होगा? तो बापदादा ने क्या देखा कि कई बच्चों को इस पुराने संसार की आकर्षण कम हुई है? पुराने सम्बन्ध की भी आकर्षण कम हुई है लेकिन पुराने संस्कार, उसका बोझ मैजारिटी में रहा हुआ है। किसी न किसी रूप में चाहे मन्सा अशुद्ध संकल्प नहीं लेकिन व्यर्थ संकल्प का संस्कार अभी भी परसेन्ट में दिखाई देता है। वाचा में भी दिखाई देता है। सम्बन्ध-सम्पर्क में भी कोई न कोई संस्कार अभी भी दिखाई देता है। तो आज बापदादा सभी बच्चों को मुबारक के साथ-साथ यही इशारा देते हैं कि यह रहा हुआ संस्कार समय पर धोखा देता भी है और अन्त में भी धोखा देने के निमित्त बन जायेगा। इसीलिए आज संस्कार का संस्कार करो। हर एक अपने संस्कार को जानता भी है, छोड़ने चाहता भी है, तंग भी है, लेकिन सदा के लिए परिवर्तन करने में तीव्र पुरूषार्थी नहीं हैं। पुरूषार्थ करते हैं लेकिन तीव्र पुरूषार्थी नहीं हैं। कारण? तीव्र पुरूषार्थ क्यों नहीं होता? कारण यही है, जैसे रावण को मारा भी लेकिन सिर्फ मारा नहीं, जलाया भी। ऐसे मारने के लिए पुरूषार्थ करते हैं, थोड़ा बेहोश भी होता है संस्कार, लेकिन जलाया नहीं तो बेहोशी से बीच-बीच में उठ जाता है। इसके लिए पुराने संस्कार का संस्कार करने के लिए इस नये वर्ष में योग अग्नि से जलाने का दृढ़ संकल्प का अटेन्शन रखो। कहते हैं ना क्या करना है इस नये वर्ष में? सेवा की तो बात अलग है लेकिन पहले स्वयं की बात है योग लगाते हो, बापदादा बच्चों को योग में अभ्यास करते हुए देखते हैं। अमृतवेले भी बहुत पुरूषार्थ करते हैं लेकिन योग तपस्या, तप के रूप में नहीं करते हैं। प्यार से याद जरूर करते हैं, रूहरिहान भी बहुत करते हैं, शक्ति भी लेने का अभ्यास करते हैं लेकिन याद को इतना पावरफुल नहीं बनाया, जो जो संकल्प करो विदाई, तो विदाई हो जाए। योग को योग अग्नि के रूप में कार्य में नहीं लगाते। इसलिए योग को पावरफुल बनाओ। एकाग्रता की शक्ति विशेष संस्कार भस्म करने में आवश्यक है। जिस स्वरूप में एकाग्र होने चाहो, जितना समय एकाग्र होने चाहो, ऐसी एकाग्रता संकल्प किया और भस्म। इसको कहा जाता है योग अग्नि। नामनिशान समाप्त। मारने में फिर भी लाश तो रहता है ना। भस्म होने के बाद नामनिशान खत्म। तो इस वर्ष योग को पावरफुल स्टेज में लाओ। जिस स्वरूप में रहने चाहो मास्टर सर्वशक्तिवान, आर्डर करो, समाप्त करने की शक्ति आपके आर्डर से नहीं माने, यह हो नहीं सकता। मालिक हो। मास्टर कहलाते हो ना ? तो मास्टर आर्डर करे और शक्ति हाजिर नहीं हो तो क्या वह मास्टर है? तो बापदादा ने देखा कि पुराने संस्कार का कुछ न कुछ अंश अभी भी रहा हुआ है और वह अंश बीच-बीच में वंश भी पैदा कर देता है, जो कर्म तक भी काम हो जाता है। युद्ध करनी पड़ती है। तो बापदादा को बच्चों का समय प्रमाण युद्ध का स्वरूप भाता नहीं है। बापदादा हर बच्चे को मालिक के रूप में देखने चाहता। आर्डर करो जी हजूर।

तो सुना इस वर्ष स्व के प्रति क्या करना है? शक्तिशाली, बेफिकर बादशाह क्योंकि सभी का लक्ष्य है, किसी से भी पूछो तो क्या कहते हैं? हम विश्व का राज्य प्राप्त करेंगे, राज्य अधिकारी बनेंगे। अपने को राजयोगी कहलाते हैं। प्रजायोगी है क्या? कोई है सारी सभा में जो प्रजायोगी हो? है? जो प्रजा योगी हो राजयोगी नहीं हो। टीचर्स कोई है? आपके सेन्टर पर कोई प्रजायोगी है? कहलाते तो सब राजयोगी हैं। हाथ कोई नहीं उठाता प्रजा योगी में। अच्छा नहीं लगता ना। और बाप को भी फखुर है। बापदादा फखुर से कहते हैं कि संगम पर भी हर बच्चा राजा बच्चा है। कोई बाप ऐसे फलक से नहीं कह सकता कि मेरा एक-एक बच्चा राजा है। लेकिन बापदादा कहते हैं कि हर एक बच्चा स्वराज्य अधिकारी राजा है। प्रजायोगी में तो हाथ नहीं उठाया ना, तो राजा हो ना! लेकिन ऐसा ढीलाढाला राजा नहीं बनना जो आर्डर करो और आवे नहीं। कमज़ोर राजा नहीं बनना। पीछे वाले कौन हो? जो समझते हैं राजयोगी हैं वह हाथ उठाओ। ऊपर भी बैठे हैं, (गैलरी में, आज हॉल में 18 हजार भाई-बहनें बैठे हैं) बापदादा देख रहे हैं, हाथ उठाओ ऊपर वाले। तो अभी यह लास्ट टर्न में शुरू हो जायेगा। तो तीन मास बापदादा देते हैं, ठीक है देवें। होमवर्क देंगे। क्योंकि यह बीच-बीच का होमवर्क भी लास्ट पेपर में जमा होगा। तो तीन मास में हर एक अपना चार्ट चेक करना तो मैं मास्टर सर्वशक्तिवान होकर किसी भी कर्मेन्द्रिय को, किसी भी शक्ति को जब आर्डर करें, जो आर्डर करें वह प्रैक्टिकल में आर्डर माना या नहीं माना? कर सकते हो? पहली लाइन वाले कर सकते हो? हाथ उठाओ। अच्छा। तीन मास कोई भी पुराना संस्कार वार नहीं करे। अलबेले नहीं बनना, रॉयल अलबेलापन नहीं लाना, हो जायेगा। बापदादा से बहुत मीठी मीठी बातें करते हैं, कहते हैं बाबा आप फिकर नहीं करो, हो जाऊँगा। बापदादा क्या करेगा? सुनकर मुस्कुरा देता है। लेकिन बापदादा इन तीन मास में अगर ऐसी बात की तो मानेगा नहीं। मंजूर है। हाथ उठाओ। दिल से हाथ उठाना, सभा के कारण हाथ नहीं उठाना। करना ही है, चाहे कुछ भी सहन करना पड़े, कुछ छोड़ना पड़े, कोई हर्जा नहीं। करना ही है। पक्का? पक्का? पक्का? टीचर्स करना है? अच्छा, यह ताज वाले बच्चे क्या करेंगे? ताज तो अच्छा पहन लिया है? करना पड़ेगा। अच्छा। देखना बच्चे हाथ उठा रहे हैं। अगर नहीं करेंगे तो क्या करें? वह भी बता दो। फिर बापदादा की सीजन में एक बार आने नहीं देंगे क्योंकि बापदादा देख रहे हैं कि समय आपका इन्तजार कर रहा है। आप समय का इन्तजार करने वाले नहीं हो, आप इन्तजाम करने वाले हो, समय आपका इन्तजार कर रहा है। प्रकृति भी, सतोप्रधान प्रकृति आपका आह्वान कर रही है। तो तीन मास में अपनी शक्तिशाली स्टेज में रहे हुए संस्कार को परिवर्तन करना। अगर तीन मास अटेन्शन रखा ना तो उसका आगे भी अभ्यास हो जायेगा। एक बारी विधि आ गई ना परिवर्तन की तो काम में आयेगा बहुत। समय का आप इन्तजार नहीं करो, कब विनाश होगा, कब विनाश होगा, सब रूहरिहान में पूछते हैं, बाहर से नहीं बोलते लेकिन अन्दर बात करते हैं पता नहीं कब विनाश होगा, दो साल में होगा 10 साल में होगा, कितना साल में होगा? आप क्यों समय का इन्तजार करो, समय आपका इन्तजार कर रहा है। बाप से पूछते हैं तारीख बता दो, थोड़ा सा वर्ष बता दो, 10 वर्ष लगेंगे, 20 वर्ष लगेंगे, कितना वर्ष लगेंगे?

बापदादा बच्चों से प्रश्न पूछते हैं कि आप सब बाप समान बन गये हो? पर्दा खोलें कि पर्दा खोलेंगे तो कोई कंघी कर रहा है, कोई फेस को क्रीम लगा रहा है, अगर एवररेडी हो, संस्कार समाप्त हो गये तो बापदादा को पर्दा खोलने में क्या देरी लगेगी। एवररेडी तो हो जाओ ना! हो जायेंगे, हो जायेंगे कहके बाप को बहुत समय खुश किया है। अभी ऐसा नहीं करना। होना ही है, करना ही है। बाप समान बनना है इसमें तो सभी हाथ उठा देते हैं, उठाने की जरूरत नहीं। ब्रह्मा बाप ने देखो साकार में तो ब्रह्मा बाप को फालो करना है ना! ब्रह्मा बाप ने त्याग, तपस्या और सेवा लास्ट घड़ी तक साकार रूप में प्रैक्टिकल दिखाया। अपनी ड्युटी शिव बाप द्वारा महावाक्य उच्चारण की ड्युटी लास्ट दिन तक निभाई। याद है ना? लास्ट मुरली। तीन शब्द का वरदान, याद है? जिसको याद है वह हाथ उठाओ।

अच्छा सभी को याद है, मुबारक हो। त्याग भी लास्ट दिन तक किया, अपना पुराना कमरा नहीं छोड़ा। बच्चों ने कितना प्यार से ब्रह्मा बाप को कहा लेकिन बच्चों के लिए बनाया, स्वयं नहीं यूज किया। और सदा अढ़ाई तीन बजे उठकर स्वयं प्रति तपस्या की, संस्कार भस्म किये तब कमार्कतीत अव्यक्त बने, फरिश्ता बने। जो सोचा वह करके दिखाया। कहना, सोचना और करना तीनों समान। फालो फादर। लास्ट तक अपने कर्तव्य में पूर्ण रहे, पत्र भी लिखे, कितने पत्र लिखे? सेवा भी नहीं छोड़ी। फॉलो फादर। अखण्ड महादानी, महादानी नहीं, अखण्ड महादानी का प्रैक्टिकल रूप दिखाया, अन्त तक। लास्ट तक बिना आधार के तपस्वी रूप में बैठे। अभी बच्चे तो आधार लेते हैं ना, बैठने का। लेकिन ब्रह्मा बाप ने आदि से अन्त तक तपस्वी रूप रखा। आंखों में चश्मा नहीं डाला। यह सूक्ष्म शक्ति है। निराधार। शरीर पुराना है, दिनप्रतिदिन प्रकृति हवा पानी दूषित हो रहा है इसलिए बापदादा आपको कहते नहीं हैं, क्यों आधार लेते हो, क्यों चश्मा पहनते हो, पहनो भले पहनो, लेकिन शक्तिशाली स्थिति जरूर बनाओ। सारी विश्व का कार्य समाप्त किया है? बापदादा आपसे प्रश्न पूछता है, आप सभी सन्तुष्ट हो कि विश्व कल्याण का कार्य पूरा हो गया है? है, जो समझते हैं कि विश्व कल्याण का कार्य समाप्त हो गया है, वह हाथ उठाओ। एक भी नहीं? तो कैसे कहते हो विनाश होगा? काम तो पूरा किया नहीं।

सभी पूछते हैं नये वर्ष में क्या करें? क्वेश्चन है। बापदादा कहते हैं सन्देश देने के मेगा प्रोग्राम तो बहुत किये हैं, बापदादा मुबारक देते हैं, किया है अच्छा किया है लेकिन सन्देश दिया है, अनुभव नहीं कराया है। इसके लिए जैसे अभी जहाँ तहाँ एक दो को उमंग उत्साह दिलाते या उमंग-उत्साह देखकरके भी उमंग-उत्साह से किया है, रिजल्ट भी अच्छी है लेकिन अब ऐसा प्लैन बनाओ जिसमें रॉयल प्रजा तो बन जाये। रॉयल प्रजा अर्थात् नजदीक कनेक्शन में आने वाले। सम्बन्ध-सम्पर्क में हैं, पहले तो 9 लाख तैयार करो, अभी 9 लाख हो गये हैं? हुए हैं? 9 लाख हुए हैं? कौन लिस्ट निकालता है? (लिस्ट अभी आयेगी, पिछले साल की 8 लाख 12 हजार है) लेकिन 9 लाख अगर तैयार हुए हैं तो किस प्रकार के तैयार हुए हैं, क्या नजदीक रॉयल प्रजा के योग्य हैं? यह भी तो चेक करना पड़ेगा ना। अच्छा, अभी पोतामेल निकालना। एक तो 9 लाख पहले जन्म की प्रजा, रॉयल फैमिली तो चाहिए ना। अगर विनाश कल कर दें तो रॉयल प्रजा तैयार है? है तैयार? कि तैयार करना पड़ेगा? ऐसे मिलायेंगे तो मिल भी जायेंगे 9 लाख, लेकिन क्वालिटी भी चाहिए, संबंध सम्पर्क वाले मिलायेंगे तो 9 लाख हो जायेगा। लेकिन बापदादा कहते हैं पहले जन्म वाली प्रजा तो अच्छे नम्बर वाली होगी ना। क्योंकि उन्हों को भी सब वन वन नम्बर मिलना है, वन नम्बर तारीख वन होगी, संवत वन होगा, राजाई वन होगी, तो ऐसी क्वालिटी पहले यह चेक करो 9 लाख तैयार हैं? रॉयल प्रजा तैयार है? रॉयल फैमिली तो तैयार होनी चाहिए। है भी, थोड़ा सिर्फ इस वर्ष में संस्कार को खत्म करना। बापदादा का यह संकल्प है कि हर सेन्टर इस योग अभ्यास का आफीशल प्रोग्राम अपने अपने सेन्टर में रखे और लक्ष्य रखे एक ही तारीख पर देश विदेश का समय मिलाकर अखबार में निकले कि ब्रह्माकुमारियों के इतने सेन्टर्स में एक ही समय यह प्रोग्राम होना है। और एम रखो सिर्फ कामेन्ट्री से योग नहीं कराओ, अनुभव कराओ। अनुभव पक्का बनाती है। एक ही समय पर हर सेन्टर पर एक ही प्रोग्राम हो। और हर एक सेन्टर अनुभव क्या किया, वह रिजल्ट लिखे। चाहे 3 दिन का प्रोग्राम कराओ चाहे एक दिन का कराओ लेकिन इकट्ठे चारों ओर जैसे थर्ड सण्डे सभी जगह रखते हो ना, अभी अनुभव कराने का प्रोग्राम चारों ओर एक समय लक्ष्य एक हो, लक्ष्य एक समय एक और चारों ओर हो। तो देश वाले भी समझेंगे कि यह विश्व में पीस के लिए इतना इक् एक समय प्रोग्राम रखा है। लक्ष्य रखो अनुभवी बनाने का। सिर्फ सुनकर चले नहीं जायें, कुछ अनुभव करके जायें। आप लोग भी बाप के बने कैसे? कुछ न कुछ अनुभव किया, चाहे प्यार किया, चाहे टोली खाके भी प्यार का अनुभव किया। बहनों के व्यवहार का अनुभव किया, बहिनों के मुस्कराने का, आजयान (खातिरी) करने का अनुभव किया, कुछ न कुछ अनुभव किया तभी बने हो। तो ऐसे अनुभवी बनाओ, अभी अखण्ड सेवा करो। बहुत सेवा रही हुई है। अच्छा।

आज के दिन मुबारक तो एक दो को दे दी ना। दूसरा क्या करते हैं? गिफ्ट देते हैं। बापदादा के पास भी कितनी गिफ्ट आई है, कार्ड आये हैं बहुत, सुन्दर-सुन्दर गिफ्ट भेजी है, आप लोग उठकर देखना। तो वास्तव में जो भी आपके पास आये खाली नहीं जाये। चाहे मन्सा से शक्ति देने की गिफ्ट दो। चाहे वाणी द्वारा ज्ञान की गिफ्ट दो, कर्म द्वारा गुणों की गिफ्ट दो। लेकिन हर एक जो भी सम्बन्ध सम्पर्क में आते हैं उनको गिफ्ट जरूर दो। खाली हाथ नहीं भेजो, आप मास्टर दाता हो, मास्टरदाता के पास आवे और खाली हाथ जावे, यह नहीं हो। अखण्ड महादानी बनो। अखण्ड कह रहे हैं, कोई न कोई सेवा करते रहो चाहे मन्सा करो, चाहे वाणी करो, चाहे कर्म करो, चाहे सम्बन्ध सम्पर्क से करो। अखण्ड सेवाधारी। कई बच्चों को बाप से रूहरिहान करते कई बच्चे सुनाते हैं कि अमृतवेले सुस्ती का वायब्रेशन थोड़ा होता है। उठते जरूर हैं लेकिन पावरफुल शक्तिशाली रूप से स्व के प्रति वा विश्व के प्रति शक्ति देना, वह थोड़ा सा थकावट की रेखा होती है। उस समय ऐसे नहीं समझो हम अपने सेन्टर के योग के कमरे में बैठे हैं, बाबा के कमरे में बैठे हैं, क्लास रूम में बैठे हैं, लेकिन ऐसे समझो विश्व की स्टेज पर बैठे हैं। हीरो पार्टधारी हैं और स्टेज पर बैठे हैं। अगर हीरो पार्टधारी थका हुआ पार्ट बजायेगा तो कैसा बजायेगा? वायुमण्डल कैसे फैलेगा? तो अमृतवेला भी पावरफुल बनाओ। नियम अच्छा निभाते हो लेकिन सुनाया ना अभी, योग सर्वशक्तियों से पावरफुल हो, योग अग्नि हो। ज्वालामुखी हो। तो यह तीन मास विशेष अमृतवेला भी नोट करना। बातें बहुत अच्छी-अच्छी करते हैं, प्यार के स्वरूप में भी होते हैं लेकिन ज्वालारूप कम होता है। अभी संस्कार का अंश मात्र भी नहीं रहे तब कहेंगे ज्वाला रूप योगी तू आत्मा। और साथ-साथ इस नये वर्ष में जो भी खज़ाने हैं, ज्ञान का खज़ाना, शक्तियों का, गुणों का, श्रेष्ठसंकल्प का खज़ाना, एक तो सफल करो और दूसरा जमा करो। जमा भी करो, सफल भी करो। क्योंकि आपका टाइटल है, वरदान है सफलता के सितारे। है ना आपका टाइटल सफलता के सितारे? सभी फलक से कहते हो सफलता हमारे गले का हार है। सफलता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है। तो सफलतामूर्त हो, सफल करो और जमा भी करो। सेवा कितनी भी करते हो लेकिन जमा का खाता हुआ या नहीं हुआ। उसकी निशानी या उसकी गोल्डन चाबी है - निमित्तभाव और निमार्कणभाव, निर्मल वाणी। तीनों हैं? तीनों में से एक भी कम है, तो सेवा कितनी भी करो जमा का खाता नहीं होता। बहुत थोड़ा, नाम मात्र। तो बापदादा ने यह भी चेक किया तो सेवा तो बहुत करते लेकिन जमा का खाता जितना होना चाहिए उतना नहीं उसका कारण, कारण तो समझते हो ना! एक तो तीन विशेषतायें, निमित्तभाव, मैंपन का भाव मिक्स हो जाता है। मैंपन आया, जमा नहीं हुआ। कितनी भी मेहनत करो, रात दिन भागदौड़, दिमाग चलाओ लेकिन निमित्तभाव, निमार्कणस्वभाव, निर्मलवाणी, यह तीन नहीं है तो जमा नहीं। बहुत में बहुत 5 परसेन्ट जमा होता है। तो यह भी चेक करना तो जमा हुआ? बापदादा बहुत सहज रास्ता बताते हैं, किसीसे भी सम्बन्ध-सम्पर्क में आते हो, चाहे लौकिक, चाहे अलौकिक पहले अपने शुभ भावना, शुभ कामना की वृत्ति को चेक करो और किससे भी मिलते हो, तो सदा आत्मा को देख करके बात करो, आत्मा से बात करते हैं, कोई अलौकिक परिवार से बात करते हो, खुशी होनी चाहिए यह कल्प पहले वाली, हर कल्प भाग्य बनाने वाली कोटों में कोई आत्मा है। उस भाव से देखो। चाहे प्यादा हो, लेकिन है तो कोटों में कोई। मेरा बाबा तो कहता है। चाहे क्रोधी भी हो, स्वभाव अच्छा नहीं हो, लेकिन आप अपना स्वभाव श्रेष्ठ रखो। आप श्रेष्ठ आत्मा के रूप में देखो, श्रेष्ठ आत्मा के स्वरूप में देखो। तभी कार्य अच्छा होगा, जमा होगा। तो होमवर्क बहुत मिला है इस वर्ष का। सभी पूछते हैं ना क्या करें, क्या करें, क्या करें। बहुत होम वर्क मिला है। फिर बापदादा नम्बरवन सब होम वर्क में पास उसको सौगात देंगे। चाहे हजार भी हों तो भी देंगे, तैयार करायेंगे सौगात। करेंगी ना? लेकिन सर्टीफिकेट लेंगे, ऐसे नहीं आप कहेंगे बाबा मान जायेगा, नहीं। साथियों से सर्टीफिकेट भी लेंगे। पहले मन का सर्टीफिकेट फिर ब्राह्मण परिवार के साथियों का सर्टीफिकेट और तीसरा है बाप का सर्टीफिकेट। तो लेंगे ना सर्टीफिकेट। हिम्मत है ना। जो समझते हैं हम सर्टीफिकेट लेकर ही छोड़ेंगे, दृढ़निश्चय है, यह तो यूथ भी उठा रहा है। यूथ ग्रुप भी उठा रहा है। अच्छा है।

डबल फारेनर्स भी उठा रहे हैं। यह सामने वाले नहीं उठा रहे हैं। हाथ लम्बा उठाओ, करके दिखायेंगे। फिर तो बहुत सौगातें तैयार करनी पड़ेंगी। आपकी तैयारी के पीछे सौगात तो कुछ भी नहीं है। पहले तो परमात्म दिलतख्त मिलेगा। लेकिन सौगात देंगे। अच्छा। अभी क्या करना है?

सेवा का टर्न, ईस्टर्न, नेपाल और तामिलनाडु जोन का है:- बापदादा ने देखा है कि जिस भी जोन को टर्न मिलता है, बड़े उमंग-उत्साह से और बहुत बड़ी संख्या में इकट्ठे होते हैं, खुशी होती है, गोल्डन चांस मिलता है ना। तो देखो कितने हैं? आधा लश्कर हाल में वही है। तीनों जोन मिलाकर 5 हजार है। देखो एरिया भी बहुत बड़ी है। 3-4 स्टेट अलग-अलग एक ही जोन में हैं। 7 स्टेट का एक जोन। अच्छा कितने भी हो लेकिन ईस्टर्न जोन की विशेषता है कि सूर्य ईस्ट से ही निकलता है। निकलता है ना? और ज्ञान सूर्य की प्रवेशता भी ईस्ट से हुआ है। अच्छा अभी बाकी क्या रहा है? एक काम रह गया है। जब दो बातें कर ली हैं, सूर्य भी उदय हुआ, ज्ञान सूर्य भी उदय हुआ लेकिन प्रत्यक्षता का झण्डा ईस्टर्न से होना चाहिए। हाँ उसके लिए कुछ करो। ऐसा प्लैन बनाओ जो प्रत्यक्षता का झण्डा आरम्भ ही ईस्टर्न से हो, फैलेगा तो विश्व में ही। यहाँ बैठकर मीटिंग करना, क्या करें, हर एक जोन समझता है हम निमित्त बनेंगे, प्रत्यक्षता का झण्डा फहराने के लिए। करो सब प्रयत्न करो लेकिन बापदादा कहते ईस्टर्न को नम्बरवन जाना चाहिए। जायेंगे? प्रत्यक्ष करना पड़ेगा। आवाज फैलाना पड़ेगा। अच्छा है| कर सकते हैं। एक-एक स्टेट में ग्रुप बनाओ, जो मन वाणी कर्म सम्बन्ध संपर्क में तीव्र पुरूषार्थी हो। फिर उन्हों का संगठन करो, एक दो में राय लो-दो तो हो जायेगा। करना तो पड़ेगा। तीव्र पुरूषार्थ करना पड़ेगा। ऐसे नहीं ठीक चल रहा है, जिज्ञासु आ रहे हैं, नहीं। लेकिन प्रत्यक्षता का झण्डा लहराने का विशेष प्रोग्राम करना पड़ेगा। यह मेगा प्रोग्राम नहीं कह रहे हैं, वह तो किया बहुत अच्छा हुआ। लेकिन प्रत्यक्षता का झण्डा हो। बहुत स्टेट हैं, मिलके कर सकते हो। करेंगे पीछे वाले? जो भी आये हैं करेंगे? कितने टाइम में करेंगे? प्लैन तो बनाओ। बापदादा प्लैन देखेगा ना। दिल्ली वाले भी सोचते हैं कि दिल्ली से प्रत्यक्षता का झण्डा हो। धरनी तो है। लेकिन प्लैन बनाओ। कैसे प्रत्यक्षता का झण्डा लहरायेंगे। उसके लिए क्या सोचा है? प्रोग्राम तो करते हो, वह तो करना ही है लेकिन यह आवाज कोई भी रेडियो खोले, कोई भी टी.वी. का स्विच खोले तो यह आवाज आवे हमारा शिवबाबा आ गया। तब कहेंगे प्रत्यक्षता का झण्डा लहराया। अच्छा मीडिया वाले सोच रहे हैं कि हम करेंगे, कोई भी करो लेकिन सभी रेडियो में, चाहे विदेश में, चाहे देश में जहाँ भी खोलें स्विच यही आवाज आवे। इसको कहते हैं प्रत्यक्षता का झण्डा। कौन करेगा? विदेश करेगा, विदेश में होगा? करो, कोई भी करो, फर्स्ट प्राइज लो। यह धूम मचनी चाहिए, आ गया, आ गया, आ गया। अच्छा है संख्या तो बहुत है, अभी करना कमाल। नम्बर तो फर्स्ट लेना अच्छा है ना। सेकण्ड थर्ड में क्या मजा। फर्स्ट। अच्छा। बहुत अच्छा पार्ट बजा रहे हैं। बापदादा ने देखा है सहयोगी एक दो के बहुत अच्छे हैं। समाचार मिलता है, जहाँ भी प्रोग्राम होता है वहाँ एक दो के सहयोगी बनके कार्य सफल कर देते हैं इसकी बापदादा विशेष मुबारक दे रहे हैं। अभी जलवा दिखाओ। एक गीत है ना आप लोगों का जलवा देखा वह तेरा हो गया। अभी यह गीत मुख से गावें, दुनिया गावे। अच्छा।

ज्युरिस्ट विंग: अच्छा| प्लैन बना रहे हैं? (गीता का भगवान सिद्ध करेंगे) प्लैन बहुत अच्छा है लेकिन गीता का भगवान सिद्ध करने के लिए पहले आपस में राय करो, प्वाइंटस निकालो, यह अच्छा है लेकिन कोई ऐसे अथॉरिटी वालों को भी साथ में मिलाओ। उनको पहले सैटिस्फाय करके उन्हों को साथी बनाओ। दो चार ऐसे साथी हों जो इस बात को सिद्ध करने में साथी बनें। गीता की अथॉरिटी रखने वालों को साथी बनाओ। (इसके लिए दो जज तैयार हैं) अच्छा है, प्लैन बनाओ, फिर दिखाना।

डबल विदेशी 45 देशों से आये हैं:- अच्छा बच्चे भी हैं, यूथ भी हैं। डबल विदेशी को बापदादा टाइटल देते हैं डबल तीव्र पुरूषार्थी क्योंकि विदेशियों के संस्कार हैं जो सोचते हैं वह करते हैं, चाहे उल्टा हो, चाहे सुल्टा हो। करने में हिम्मत रखते हैं। तो इसी हिम्मत को आध्यात्मिक पुरूषार्थ में और सेवा में कार्य में लगाओ। बापदादा ने देखा है कि प्लैन को प्रैक्टिकल लाने में लक्ष्य अच्छा रखते हैं। तो हो सकता है कि इन्डिया को जगाने के लिए पहले आवाज विदेश से निकले। विदेश का आवाज इन्डिया में आवे यह भी हो सकता है ना! बापदादा को याद है पहले शुरू शुरू में जब इन्डिया में बड़े प्रोग्राम होते थे तो विदेश का कोई न कोई अथॉरिटी वाला आता था और वह भाषण करता था अखबारों में आता था। अभी बहुत समय से ऐसे विशेष सभा के बीच में नहीं आये हैं। अलग आये हैं। रिट्रीट होता है प्रोग्राम भी चलता है लेकिन जैसे पहले विशेष आत्मायें संगठन में बोलती थी, ऐसा अच्छा होता है। अभी 70 साल का प्रोग्राम बनायेंगे ना, उसमें कोशिश करो। क्योंकि अखबार वाले इन्ट्रेस्ट से लेते हैं। बाकी वृद्धि अच्छी हो रही है, प्रोग्राम्स भी अच्छे कर रहे हो उसकी मुबारक है। पहले संख्या वहाँ भी प्रोग्राम में कम आती थी, अभी संख्या अच्छी आती है। और अच्छे-अच्छे वारिस क्वालिटी भी निकल रही है। लेकिन तीन मास में विदेश वाले नम्बरवन लेंगे? फर्स्ट नम्बर लेंगे? जो लेंगे वह हाथ उठाओ। तीन सर्टीफिकेट लेने पड़ेंगे। हिम्मत रखो। विदेशियों के लिए सोचते हैं इन्हों का कल्चर अलग है लेकिन विदेश वाले इन्डिया से भी आगे नम्बर ले सकते हैं। महान तपस्वी बनने में नम्बरवन। हो सकता है ना! होना ही है। हो सकता है। क्योंकि विदेशियों में दृढ़ता का संस्कार है, अभी इसमें सिर्फ दृढ़ता का संस्कार यूज करो, हो जायेगा। ठीक है ना। नम्बरवन लेना है ना। अच्छा। विदेशी हर टर्न में आते हैं तो सभा सज जाती है, इन्टरनेशनल हो जाती है ना। बहुत अच्छा।

अच्छा यह सामने वाला ग्रुप (सिन्धी ग्रुप) क्या करेगा? लाइन में तो अच्छे खड़े हो, वृद्धि भी अच्छी कर रहे हो इसकी तो मुबारक है, अच्छा, बापदादा पूछते हैं कुछ समय पहले इसी ग्रुप ने कहा था, कि हम एक-एक एक ऐसा तैयार करके लायेंगे, याद है? एक-एक ने एक को तैयार किया है, अपने से भी आगे? जिसने किया है वह हाथ उठाओ और यहाँ तक लाया है वह हाथ उठाओ। अच्छा। निभाया है, मुबारक हो, उसकी बहुत बहुत मुबारक हो लेकिन अभी और भी लाना पड़ेगा। वृद्धि तो चाहिए ना और जहाँ सिन्ध में बाप आया, वहाँ के देश वाले हमजिन्स को तो जगाना है ना। तरस तो पड़ता है ना। फलक से आप कहते हो ना, शिवबाबा आया तो सिन्ध में ना। तो करना, कमाल करके दिखाना। अच्छे अच्छे हैं, कर सकते हैं। क्या कहते हैं? (अभी नहीं करेंगे तो कभी करेंगे, बाबा की बहुत बहुत दुआयें हैं तो जरूर करेंगे) ब्राह्मण परिवार में टोटल कितने सिन्धी होंगे? हिसाब में तो थोड़े हैं। (इस ग्रुप में 32 आये हैं) अभी कम से कम 100 के करीब तो लाओ। 100 नहीं ला सकते हो? (108 लायेंगे) छोटे बच्चे, छोटे बच्चों को अपने दोस्तों को लाओ। बापदादा खुश है। हिम्मत रख रहे हैं और मदद भी मिल रही है। इसलिए आप भी खुश, बाप भी खुश।

कलचरल विंग:- क्या प्लैन बनाया है? कोई ऐसे निकालो जिसका आवाज फैले। हर एक ग्रुप को माइक, माइट वाला तैयार करना है। हो जायेगा। क्योंकि आजकल तो बहुत चारों ओर कलचरल बहुत अच्छा चलता है, सभी का इन्ट्रेस्ट भी है। सिर्फ ऐसा आवाज फैलाने वाला कोई निमित्त बनेगा तो अनेकों का कल्याण हो जायेगा। बाकी अच्छा है प्रोग्राम बनाते रहते हो, करते रहते हो, जितना प्यार से करते हैं उतना अच्छा ही होता है, रिजल्ट भी अच्छी। अभी ऐसा कोई माइक निकालके लाना, जिसकी आवाज सुन करके अनेकों का कल्याण हो। बहुत अच्छा और आगे बढ़ते चलो।

इन्टरनेशनल यूथ ग्रुप :- अच्छा यूथ वाले भी आवाज फैलाने के लिए प्रोग्राम अच्छे बना रहे हैं। और स्व पुरूषार्थ के लिए भी अच्छे प्रोग्राम बना रहे हैं। बापदादा ने समाचार सुना है, खुशखबरी भी सुनी कि परिवर्तन किया है और आगे भी परिवर्तन कायम रखेंगे। फरिश्ता स्वरूप के धारणा के समीप आ रहे हैं। तो जो अपने में परिवर्तन किया, वह वहाँ जाके भी रहेगा या थोड़ा-थोड़ा कम हो जायेगा? रहेगा। जो समझते हैं सदा रहेगा, वह हाथ उठाओ। क्योंकि बापदादा ने रिजल्ट सुनी है, कि परिवर्तन रीयलाइजेशन अच्छी की है और यूथ ग्रुप ऐसा हो जाए सदा के लिए तो बहुत विश्व में नाम करेंगे। अच्छा उमंग-उत्साह दिखाया है। बापदादा बच्चों की हिम्मत और उमंग-उत्साह पर खुश है लेकिन सदा शब्द याद रखना। ब्राह्मण आत्मायें जो चाहे वह कर सकती हैं। और अभी तो बापदादा ने होम वर्क दे दिया है, देखेंगे, कितने यूथ ग्रुप इसमें नम्बर लेते हैं, प्राइज लेते हैं। लेंगे ना प्राइज? अच्छा। (33 देशों के 150 यूथ ने भाग लिया है) अच्छा है। हर वर्ष करते रहते हैं यह बहुत अच्छा है। आगे बढ़ रहे हैं यह भी अच्छा। अच्छी मेहनत की है।

इन्टरनेशनल चिल्ड्रेन ग्रुप: (बच्चों ने गीत गाया बाबा आपने कमाल कर दिया) आप भी कमाल करके दिखाना। बाप ने कमाल की, अभी आपको करनी है। बैठ जाओ।

तामिलनाडु जोन भी सेवा में आया है:- अच्छा है, है छोटा लेकिन शक्ति अच्छी है। तामिलनाडु ने एक ऐसा वी.आई.पी निकाला, निकाला तो तामिलनाडु ने, जो आज प्रेजीडेंन्ट है वह कनेक्शन में तो तामिलनाडु से आया, तो अच्छा जैसे एक निकाला ना ऐसे अभी और निमित्त बनाओ। उसका आवाज भी कुछ तो काम कर रहा है ना तो ऐसे अगर निमित्त बनाते रहेंगे तो छोटा सुभान अल्ला हो जायेगा। वैसे संख्या तो काफी है, अच्छी संख्या है। टोटल कितने हैं (12 हजार भाई बहिनें हैं) अच्छा है, छोटा भले हो लेकिन कमाल तो अच्छी की है ना, तो बापदादा को अच्छा लगता है। प्लैन बनाते जाओ, करते जाओ। सेवा में भी सहयोग अच्छा दिया है। गोल्डन चांस लिया है और गोल्डन दुनिया लाने के निमित्त बनना ही है। बहुत अच्छा। अच्छा। चारों ओर के बच्चों के कार्ड, पत्र और ईमेल द्वारा भिन्न-भिन्न साधनों द्वारा मुबारक के समाचार पहुंचे हैं, बापदादा, जिन्होंने भी मुबारक भेजी है, उन सभी को पदम-पदम गुणा मुबारक दे रहे हैं। बापदादा तो दूर बैठे बच्चों को सम्मुख ही देख रहे हैं। कितने उमंग उत्साह से अपने अपने स्थानों पर बैठे हैं, सुन रहे हैं, यह देख करके बापदादा भी खुश है, बच्चे भी खुश हैं, और मुबारक ले रहे हैं, दे रहे हैं। बापदादा ने समाचार सुना कि रात को भी दिन बना देते हैं। तो ऐसे बच्चों को कितने बार दिल की दुआयें और प्यार दें। उमंग उत्साह अच्छा है और अच्छे ते अच्छा रहेगा। अभी दूर बैठे वाले सभी अपने को प्राइज में नम्बरवन बनाना। अच्छा।

जो पहली बार आये हैं वह उठो, अच्छा है बापदादा सभी बच्चों को देख देख हर्षित हो रहे हैं। जो नये आये हैं वह और ही लास्ट सो फास्ट, फर्स्ट जाके दिखाना। अच्छा है, वृद्धि तो हो रही है। हर टर्न में नये-नये आते हैं। अभी सिर्फ अमर रहना औरों को भी अमर बनाना, अमरभव का वरदान सदा अपने आपको देते रहना। अच्छा। मातायें ज्यादा हैं, संगम पर माताओं का टर्न है। पाण्डव भी कम नहीं हैं, अच्छे हैं। अच्छा, पाण्डव बैठ जाओ, मातायें खड़ी रहो। मातायें ज्यादा हैं। अच्छा। आज तो सभी को बैठना ही है। चारों ओर के सदा उमंग-उत्साह में आगे बढ़ने वाले, सदा हिम्मत से बापदादा की पदमगुणा मदद के पात्र बच्चों को, सदा विजयी रत्न हैं, हर कल्प में विजयी बने थे, अब भी हैं और हर कल्प में विजयी हैं ही हैं। ऐसे विजयी बच्चों को सदा एक बाप दूसरा न कोई, न संसार की आकर्षण, न संस्कार की आकर्षण, दोनों आकर्षण से मुक्त रहने वाले, सदा बाप समान बच्चों को बापदादा का यादप्यार और नमस्ते।

दादियों से:- (दादी जी से) सबको दृष्टि द्वारा, अपने योगयुक्त स्थिति द्वारा सन्तुष्ट कर देती हो। सभी थोड़े टाइम में भी खुश होके जाते हैं। यह बहुतकाल की जो कमाई जमा की है ना, उसका फल मिल रहा है। (हजारों से मिलती है) अच्छा पार्ट बजा रही हो। (मोहिनी बहन ठीक होती जा रही है) होना ही है। (परदादी से) आपका जोन सबसे बड़ा है। और अच्छा जोन बड़ा भाग्यशाली है। (बेटी किसकी हूँ) नशा है इसको। और सब आपको देखकर खुश हो जाते हैं। आपकी खुशी को देखकर सब खुश हो जाते हैं। आपको मूर्ति के रूप में देखते हैं। बहुत अच्छा। (शान्तामणी दादी से) सभी अपना-अपना अच्छा पार्ट बजा रहे हैं। कुछ भी नहीं करो ना, आप लोगों की हाजिरी सब कुछ करती है। बाप का रूप देखने में आता है ना आप द्वारा तो सभी खुश हो जाते हैं। (मनोहर दादी ने मौन धारणकिया है) बहुत भाषण किये हैं, सर्विस में आलराउन्ड में इनका नाम पहले था, बापदादा ने मुरलियों में भी वर्णन किया है। थोड़ा ट्रीटमेंट करा लो ठीक हो जायेंगी, ऐसी कोई बड़ी बात नहीं है। सब याद तो करते हैं ना, आपका विशेष पार्ट कोई नहीं बजा सकता, हिस्ट्री कोई नहीं सुनाता है जैसे आप सुनाती हो, तो अपना पार्ट बजाओ। सब ठीक हो जायेगा, कोई बात नहीं। (रतनमोहिनी दादी से) यह चक्र लगाने वाली चक्रवर्ती है, अच्छा पार्ट बजा रही है, क्योंकि आदि रत्न है ना, आदि रत्न की वैल्यु होती है। आप लोगों का हाजिर होना ही बापदादा की याद दिलाता है।

2006 वर्ष के शुभ-आगमन पर रात्रि 12 बजे प्यारे अव्यक्त बापदादा ने नये वर्ष की सब बच्चों को बधाईयाँ दी।

सभी बच्चों ने बहुत-बहुत प्यार से नये वर्ष को मनाया। मनाया भी और साथ में बापदादा से वायदा भी किया कि संस्कार मिटायेंगे भी। तो मिटाना भी है और सभी को शुभ भावना, श्रेष्ठ कामना, श्रेष्ठ वायब्रेशन से मिलाना भी है। मिटाना, मिलाना और मनाना। सभी बातें हुई। अभी खूब सारा साल हर्षित रहना और सभी को हर्षित करना। मैं सन्तुष्ट आत्मा हूँ, सन्तुष्ट रहना और सन्तुष्ट करना। यही मनाना है, यही बाप का प्यार है, यही दुआयें हैं। यही यादप्यार है। सभी को नमस्ते।



18-01-06   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


संकल्प, समय और बोल के बचत की स्कीम द्वारा सफलता की सेरीमनी मनाओ निराश आत्माओं में आशा के दीप जगाओ

आज स्नेह का दिन है। चारों ओर के सभी बच्चे स्नेह के सागर में समाये हुए हैं। यह स्नेह सहजयोगी बनाने वाला है। स्नेह सर्व अन्य आकर्षण से परे करने वाला है। स्नेह का वरदान आप सभी बच्चों को जन्म का वरदान है। स्नेह में परिवर्तन कराने की शक्ति है। तो आज के दिन दो प्रकार के बच्चे चारों ओर देखे। लवली बच्चे तो सभी हैं लेकिन एक हैं लवली बच्चे दूसरे हैं लवलीन बच्चे। लवलीन बच्चे हर संकल्प, हर श्वांस में, हर बोल, हर कर्म में स्वत: ही बाप समान सहज रहते हैं, क्यों? बच्चों को बाप ने समर्थ भव का वरदान दिया है। आज के दिन को स्मृति सो समर्थ दिवस कहते हो, क्यों? बाप ने आज के दिन स्वयं को बैकबोन बनाया और लवलीन बच्चों को विश्व की स्टेज पर प्रत्यक्ष किया। व्यक्त में प्रत्यक्ष बच्चों को किया और स्वयं अव्यक्त रूप में साथी बने। आज का यह स्मृति सो समर्थ दिवस बच्चों को बालक सो मालिक बनाए सर्व शक्तिवान बाप को मास्टर सर्वशक्तिवान बन प्रत्यक्ष करने का कार्य दिया और बाप देखके खुश है कि यथायोग तथा शक्ति सभी बच्चे बाप को प्रत्यक्ष करना अर्थात् विश्व कल्याण कर विश्व परिवर्तन करने के कार्य में लगे हुए हैं। बाप द्वारा सर्वशक्तियों का वर्सा जो मिला हुआ है वह स्व प्रति और विश्व की आत्माओं के प्रति कार्य में लगा रहे हैं। बापदादा भी ऐसे मास्टर सर्वशक्तिवान बाप समान उमंग-उत्साह में रहने वाले आलराउण्ड सेवाधारी, नि:स्वार्थ सेवाधारी, बेहद के सेवाधारी बच्चों को पदम-पदमगुणा दिल से मुबारक दे रहे हैं। मुबारक हो, मुबारक हो। देश-विदेश, देश के बच्चे भी कम नहीं और विदेश के बच्चे भी कम नहीं हैं। बापदादा ऐसे बच्चों की दिल ही दिल में महिमा भी करते और गीत भी गाते वाह ! बच्चे वाह ! आप सभी वाह ! वाह ! बच्चे हो ना। हाथ हिला रहे हैं, बहुत अच्छा। बापदादा को फखुर है, बच्चों के ऊपर फखुर है- सारे कल्प में ऐसा कोई बाप नहीं है जिसका हर बच्चा स्वराज्य अधिकारी राजा हो। आप सभी तो स्वराज्य अधिकारी राजा हो ना? प्रजा तो नहीं ना। कई बच्चे जब रूहरिहान करते हैं तो कहते हैं हम भविष्य में क्या बनेंगे, उसका चित्र हमको दिखाओ। बापदादा क्या कहते हैं? पुराने बच्चे तो कहते हैं जगतअम्बा माँ चित्र देती थी हर एक को। तो हमें भी चित्र दो। बापदादा कहते हैं हर एक बच्चे को बाप ने विचित्र दर्पण दिया है, उस दर्पण में अपने भविष्य का चित्र देख सकते हो कि मैं कौन। जानते हो, वह दर्पण आपके पास है? जानते हो कौन सा दर्पण? पहली लाइन वाले तो जानते होंगे ना। जानते हैं? वह दर्पण है वर्तमान समय की स्वराज्य स्थिति का दर्पण। वर्तमान समय जितना स्वराज्य अधिकारी हैं उस अनुसार विश्व के राज्य अधिकारी बनेंगे। अब अपने आपको दर्पण में देखो स्वराज्य अधिकारी सदा हैं? वा कभी अधीन, कभी अधिकारी? अगर कभी अधीन, कभी अधिकारी बनते हैं, कभी आँख धोखा देती, कभी मन धोखा देता, कभी मुख धोखा देता, कभी कान भी धोखा दे देता है। व्यर्थ बातें सुनने का शौक हो जाता है। अगर कोई भी कर्मेन्द्रिय धोखा देती है, परवश बना देती है, इससे सिद्ध है कि बाप द्वारा जो सर्व शक्तियाँ वरदान में मिली हैं, वा वर्से में मिली हैं वह कन्ट्रोलिंग पावर, रूलिंग पावर नहीं है। तो सोचो जो स्व के ऊपर रूल नहीं कर पाते वह विश्व पर रूल कैसे करेगा? अपने वर्तमान स्थिति के स्वराज्य अधिकारी के दर्पण में चेक करो। दर्पण तो सभी को मिला है ना? दर्पण मिला है तो हाथ उठाओ। दर्पण में कोई दाग तो नहीं हो गया है? स्पष्ट है दर्पण?

बापदादा ने हर एक बच्चे को स्वराज्य अधिकारी का स्वमान दिया है। मास्टर सर्वशक्तिवान का टाइटिल सभी बच्चों को बाप द्वारा मिला हुआ है। मास्टर शक्तिवान नहीं, सर्वशक्तिवान। कई बच्चे रूहरिहान में यह भी कहते - बाबा आपने तो सर्वशक्तियाँ दी लेकिन यह शक्तियाँ कभी-कभी समय पर काम नहीं करती। रिपोर्ट करते हैं - समय पर इमर्ज नहीं होती, समय बीत जाता है पीछे इमर्ज होती हैं। कारण क्या होता? जिस समय जिस शक्ति को आह्वान करते हो उस समय चेक करो कि मैं मालिक बनके सीट पर सेट हूँ? अगर कोई सीट पर सेट नहीं होता तो बिगर सीट वाले का कोई आर्डर नहीं मानता है। स्वराज्य अधिकारी हूँ, मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ, बाप द्वारा वर्सा और वरदान का अधिकारी हूँ, इस सीट पर सेट होकर फिर आर्डर करो। क्या करूं, कैसे करूं, होता नहीं, सीट से नीचे बैठ, सीट से उतरकर आर्डर करते हो तो मानेगा कैसे! आजकल के जमाने में भी अगर कोई प्राइममिनिस्टर है, सीट पर है, और सीट से उतर गया, तो कोई मानेगा? तो चेक करो सीट पर सेट हूँ? अधिकारी होकर आर्डर करता हूँ? बाप ने हर एक बच्चे को अथॉरिटी दी है, परमात्म अथॉरिटी है, कोई आत्मा की अथॉरिटी नहीं मिली है, महात्मा की अथॉरिटी नहीं मिली है, परमात्म अथॉरिटी है तो अथॉरिटी और अधिकार इस स्थिति में स्थित होकर कोई भी शक्ति को आर्डर करो, वह जी हजूर, जी हजूर करेगी। सर्वशक्तियों के आगे यह माया, प्रकृति, संस्कार, स्वभाव सब दासी बन जायेंगे। आप मालिक का इन्तजार करेंगे, मालिक कोई आर्डर करो।

समर्थ दिवस है ना, तो बापदादा क्या-क्या समर्थियाँ हैं बच्चों में, वह रिवाइज करा रहा है। अण्डरलाइन करा रहा है। शक्तिहीन समय पर क्यों हो जाते? बापदादा ने देखा है, मैजारिटी बच्चों की लीकेज है, शक्तियाँ लीकेज होने के कारण कम हो जाती हैं और लीकेज विशेष दो बातों की है - वह दो बातें हैं- संकल्प और समय वेस्ट जाता है। खराब नहीं होता लेकिन व्यर्थ, समय पर बुरा कार्य नहीं करते हैं लेकिन जमा भी नहीं करते हैं। सिर्फ देखते हैं आज बुरा कुछ नहीं हुआ लेकिन अच्छा क्या जमा किया? गँवाया नहीं लेकिन कमाया? दु:ख नहीं दिया लेकिन सुख कितनों को दिया? अशान्त किसको नहीं किया, शान्ति का वायब्रेशन कितना फैलाया? शान्तिदूत बनके शान्ति कितनों को दी - वायुमण्डल द्वारा या मुख द्वारा, वायब्रेशन द्वारा? क्योंकि जानते हो कि यही थोड़ा सा समय है पुरूषोत्तम कल्याणकारी जमा करने का समय है। अब नहीं तो कब नहीं, यह हर घड़ी याद रहे। हो जायेगा, कर लेंगे..... अब नहीं तो कब नहीं। ब्रह्मा बाप का यही तीव्रगति का पुरूषार्थ रहा तब नम्बरवन मंज़िल पर पहुंचा। तो जो बाप ने समार्थियां दी हैं, आज समर्थ दिवस पर याद आई ना! बचत की स्कीम बनाओ। संकल्प की बचत, समय की बचत, वाणी की बचत, जो यथार्थ बोल नहीं हैं, अयथार्थ व्यर्थ बोल की बचत। बापदादा सभी बच्चों का सदा अथॉरिटी की सीट पर सेट हुआ स्वराज्य अधिकारी राजा रूप देखने चाहता है। पसन्द है? यह रूप पसन्द है ना! कभी भी बापदादा किसी भी बच्चे को टी.वी. में देखो, तो इसी रूप में देखे। बापदादा की नेचरल टी.वी. है, स्विच नहीं दबाना पड़ता। एक ही समय पर चारों ओर का देख सकते हैं। हर एक बच्चे को, कोने-कोने वाले को देख सकते हैं। तो हो सकता है? कल से टी.वी. खोलें तो क्या दिखाई देंगे? फरिश्ते की ड्रेस में, फरिश्ते की ड्रेस है चमकीली ड्रेस, चमकीली लाइट की ड्रेस, यह शरीरभान के मिट्टी की ड्रेस नहीं पहनना। चमकीली ड्रेस हो, सफलता का सितारा हो, ऐसी मूर्ति हर एक की बापदादा देखने चाहते हैं। पसन्द है ना! मिट्टी की ड्रेस पहनेंगे तो मिट्टी के हो जायेंगे ना। जैसे बाप अशरीरी है, ब्रह्मा बाप चमकीली ड्रेस में है, फरिश्ता है। फालो फादर। स्थूल में देखो कोई आपके कपड़े में मिट्टी लग जाए, दाग हो जाए तो क्या करते हो? बदल लेते हो ना! ऐसे ही चेक करो कि सदा चमकीली फरिश्ते की ड्रेस है? जो बाप को फखुर है कि हर एक बच्चा राजा बच्चा है, उसी स्वरूप में रहो। राजा बनके रहो। यह माया ऐसे आपकी दासी बन जायेगी और विदाई लेने आयेगी, आधाकल्प के लिए विदाई लेने आयेगी, वार नहीं करेगी। बापदादा सदा कहते हैं - बाप के ऊपर बलिहार जाने वाले कभी हार नहीं खा सकते। अगर हार है तो बलिहार नहीं हैं।

अभी आप सभी की मीटिंग होने वाली है ना, डेट फिक्स होती है ना मीटिंग की। तो इस बारी सिर्फ सर्विस के प्लैन की मीटिंग बापदादा नहीं देखने चाहते, सर्विस के प्लैन बनाओ लेकिन मीटिंग में सफलता की सेरीमनी का प्लैन बनाओ। बहुत सेरीमनी कर ली अब सफलता की सेरीमनी की डेट फिक्स करो। चलो सोचते हैं कि सभी कैसे होंगे! बापदादा कहते हैं कम से कम 108 रत्न तो सफलतामूर्त की सेरीमनी मनायें। एक्जैम्पुल बनें। यह हो सकता है? बोलो। पहली लाइन वाले बोलो, हो सकता है? जवाब देने की हिम्मत नहीं रखते। सोचते हैं पता नहीं करेंगे, नहीं करेंगे? हिम्मत से सब कुछ हो सकता है। दादी बतावें। 108 सफलतामूर्त बन सकते हैं? (हाँ जरूर बन सकते हैं, सफलता की सेरीमनी हो सकती है) देखो, दादी में हिम्मत है। आप सबकी तरफ से हिम्मत रख रही है। तो सहयोगी बनना। तो यह जो मीटिंग होगी ना, उसमें बापदादा रिपोर्ट लेंगे। पाण्डव बताओ ना, क्यों चुप हैं? चुप क्यों हैं? यह हिम्मत क्यों नहीं रखते? करके दिखायेंगे? ऐसे? अच्छा है, हिम्मत तो रख सकते हैं? जो समझते हैं हम तो हिम्मत रख करके दिखायेंगे, वह हाथ उठाओ। करेंगे? कोई संस्कार नहीं रहेगा? कोई कमज़ोरी नहीं रहेगी? अच्छा, मधुबन वाले भी हाथ उठा रहे हैं। वाह ! मुबारक हो, मुबारक हो। अच्छा 108 तो फिर सहज हो जायेगा। इतनों ने हाथ उठाया तो 108 क्या बड़ी बात है। डबल फॉरेनर्स क्या करेंगे? हाँ, दादी जानकी सुन रही है, उसको उमंग आ रहा है मैं बोलूं। फॉरेन की माला भी देखेंगे, ठीक है? हाथ उठाओ, ठीक है? अच्छा आज यह कितने बैठे हैं? (200) इसमें से 108 तो तैयार हो जायेंगे! ठीक है ना। इसमें करना पहले मैं। इसमें दूसरे को नहीं देखना, पहले मैं। और मैं-मैं नहीं करना, यह मैं जरूर करना। और भी काम बापदादा देता है।

आज समर्थ दिवस है ना तो समर्थता है। बापदादा एक विचित्र दीवाली मनाने चाहते हैं। आपने तो दीवाली कई बार मनाई है लेकिन बापदादा विचित्र दीवाली मनाने चाहता है, सुनायें? सुनायें? सुनायें? अच्छा। वर्तमान समय को तो देख ही रहे हो, दिन प्रतिदिन चारों ओर मनुष्य आत्माओं में निराशा बहुत बढ़ रही है। तो चाहे मन्सा सेवा करो, चाहे वाचा करो, चाहे सम्बन्ध-सम्पर्क की करो, लेकिन बापदादा निराश मनुष्यों के अन्दर आशा का दीप जगाने चाहते हैं। चारों ओर मनुष्य आत्माओं के मन में आशा के दीपक जग जायें। यह दीवाली आशा के दीपकों की बापदादा चाहते हैं। हो सकता है? वायुमण्डल में कम से कम यह आशा का दीपक जग जाए तो अब विश्व परिवर्तन हुआ कि हुआ। गोल्डन सवेरा आया कि आया। यह निराशा खत्म हो जाए - कुछ होना नहीं है, कुछ होना नहीं है। आशा के दीप जग जाएं। कर सकते हैं ना, यह तो सहज है ना या मुश्किल है? सहज है? जो करेगा वह हाथ उठाओ। करेगा? इतने सभी दीपक जगायेंगे तो दीपमाला तो हो जायेगी ना! वायब्रेशन इतना पावरफुल करो, चलो सामने पहुँच नहीं सकते हैं लेकिन लाइट हाउस, माइट हाउस बन दूर तक वायब्रेशन फैलाओ। जब साइन्स लाइट हाउस द्वारा दूर तक लाइट दे सकती है तो क्या आप वायब्रेशन नहीं फैला सकते! सिर्फ दृढ़संकल्प करो- करना ही है। बिजी हो जाओ। मन को बिजी रखेंगे तो स्वयं को भी फायदा और आत्माओं को भी फायदा। चलते-फिरते यही वृत्ति में रखो कि विश्व का कल्याण करना ही है। यह वृत्ति वायुमण्डल फैलायेगी क्योंकि समय अचानक होने वाला है। ऐसा न हो कि आपके भाई बहिनें उलाहना देवें कि आपने हमें बताया क्यों नहीं! कई बच्चे सोचते हैं अन्त तक कर लेंगे लेकिन अन्त तक करेंगे तो भी आपको उलाहना देंगे। यही उलाहना देंगे हमको कुछ समय पहले बताते, कुछ तो बना लेते। इसलिए हर संकल्प में बापदादा की याद से लाइट लेते जाओ, लाइट हाउस होके लाइट देते जाओ। टाइम वेस्ट नहीं करो, बापदादा जब देखते हैं बहुत युद्ध करते हैं, तो बापदादा को अच्छा नहीं लगता। मास्टर सर्वशक्तिवान और युद्ध कर रहा है! तो राजा बनो, सफलतामूर्त बनो, निराशा को खत्म कर आशा के दीप जगाओ। अच्छा। सभी तरफ के बच्चों के स्नेह के याद की मालायें तो बहुत पहुँच गई हैं। बापदादा याद भेजने वालों को सन्मुख देखते हुए याद का रेसपान्ड दिल की दुआयें, दिल का प्यार दे रहे हैं। अच्छा - अभी क्या करना है?

सेवा का टर्न कर्नाटक का है, कर्नाटक वालों ने 5 मेगा प्रोग्राम किये हैं:- अच्छा, बहुत आये हैं। अच्छा मेगा प्रोग्राम किया, मुबारक हो। लेकिन हर एक मेगा प्रोग्राम से स्टूडेन्ट कितने बनें? वह रिजल्ट निकाली है? क्योंकि मेगा प्रोग्राम सन्देश देने के लिए तो अच्छा है, उलाहना नहीं मिलेगा। एक काम तो ठीक हो गया। लेकिन मेगा प्रोग्राम के बाद एड्रेस तो होती है ना! जिन भी आत्माओं की एड्रेस है उनको समय प्रति समय बुलाते रहो। सेवा करते रहो, अपने ही सेन्टर पर क्योंकि जोन में तो नहीं हो सकता है, वहाँ की वहाँ तो आ सकते हैं। उनमें से निकलेंगे। कर्नाटक की संख्या तो बहुत है। अच्छा है। सेवा की है तभी संख्या बढ़ी है लेकिन अब ऐसा गुलदस्ता बनाओ जो माइक और माइट बन सन्देश देने में साथी बन जाएँ। ऐसे कोई ग्रुप तैयार करो। सभी मैजारिटी बड़े बड़े जोन वालों ने मेगा प्रोग्राम किया है लेकिन यह समाचार नहीं आया है कि कौन से ऐसे माइक निकले जो सन्देश देने में मददगार बने हैं। क्योंकि विश्व की आत्मायें अभी भी बहुत रही हुई हैं। तो जितनी संख्या है, कर्नाटक की, हर एक स्थान पर कुछ तो ऐसी लिस्ट होनी चाहिए ना! होनी चाहिए ना! तो वह बापदादा के पास नाम आने चाहिए। रिजल्ट आनी चाहिए। मधुबन में लेकर नहीं आओ, पहले रिपोर्ट लिखकर दो कितने कितने निकले है, किस-किस प्रकार के हैं। चाहे फॉरेन में हों, चाहे देश में हो। अच्छा है। प्रोग्राम किये उसकी मुबारक है। अभी ऐसी लिस्ट भेजना, हर एक सेन्टर ऐसी लिस्ट भेजे। ठीक है ना! अच्छा है, अभी कर्नाटक में कुछ कमाल करके दिखाओ। हर सेन्टर निर्विघ्न स्वराज्य अधिकारी बन सकता है? हो सकता है? तीन मास दिये हैं, तो निर्विघ्न, सिर्फ तीन मास के लिए नहीं, सदाकाल के लिए विघ्न समाप्त। अगर संस्कार संकल्प में इमर्ज भी कब हो, वहाँ ही खत्म कर दो। कर्म में, बोल में नहीं आवे। तो ऐसी रिजल्ट दिखायेंगे कर्नाटक नम्बरवन निर्विघ्न। करेंगे? करना पड़ेगा। एक दो के सहयोगी बनकर मदद देकर भी बनाना पड़ेगा क्योंकि दो चार भी अगर निर्विघ्न नहीं बनें तो सर्टीफिकेट कैसे मिलेगा। कर्नाटक निर्विघ्न का सर्टीफिकेट तो नहीं मिलेगा ना। इसीलिए सहयोगी बन, एक दो को हिम्मत दिलाके करना पड़ेगा। तैयार हैं? टीचर्स तैयार हैं? करना पड़ेगा? देखो टी.वी. में आ रहा है। सब कर्नाटक की टीचर्स हाथ उठा रही हैं। अच्छा देखेंगे। पहली मुबारक तो दे रहे हैं और आगे देखेंगे। ठीक है ना। पीछे आगे वाले करना पड़ेगा। अपने संस्कार को इमर्ज नहीं करने देना। संकल्प में ही परिवर्तन कर देना। अच्छा है। संख्या जितनी है उतना बहुत कुछ कर सकते हैं। अच्छा है गोल्डन चांस लिया है सेवा का, तो थोड़े दिनों में बहुत अपना पुण्य जमा किया है। यज्ञ सेवा अर्थात् पुण्य का खाता जमा करना। तो अच्छे हिम्मत रख करके आये हैं और आगे भी हिम्मत रखते आगे बढ़ते रहेंगे।

मेडिकल विंग:- कोई नया प्लैन बनाया? नया प्लैन कोई बनाया? (स्वास्थ्य में मूल्यों को कैसे बढ़ायें) (उसके बारे में सारा वर्ष प्रोग्राम करेंगे) अभी प्लैन बनाया है, अभी प्रैक्टिकल करना है। इससे भी सन्देश पहुँचता है ना। अच्छा हिम्मत वाले हो ना। जो भी आये हैं सिर्फ मीटिंग नहीं की, प्रैक्टिकल करना ही है। और आप लोगों का तो डबल फायदा है। डबल दुआयें मिलती हैं। तन ठीक होता है उसकी भी दुआयें, और मन खुश होता है तो उसकी भी दुआयें। सभी में उमंग है ना! बहुत अच्छा। अच्छा है। मेडिकल में वह हार्ट का भी अच्छा चल रहा है। अब बाम्बे के हॉस्पिटल की भी रिपोर्ट अच्छी है। ऑटोमेटिक वी.आई.पी. आते रहते हैं क्योंकि पहले समझते थे ब्रह्माकुमारियाँ सोशल वर्क नहीं करती हैं, अभी समझते हैं कि ब्रह्माकुमारियाँ जो काम करती हैं उसकी रिजल्ट बहुत अच्छी निकलती है। जब से ग्लोबल हॉस्पिटल खुली है आबू में, तब से यह वायुमण्डल में फर्क आया है। आबू वाले भी बदल रहे हैं। तो अच्छा है, आपकी डिपार्टमेंट चाहे कोई स्थूल काम भी करते हो, दवाई देने का, लेकिन यह सेवा फैल रही है कि ब्रह्माकुमारियाँ डबल काम कर सकती हैं। तो अच्छा कर रहे हैं, करते रहना। कोने कोने में अपने मेडिकल द्वारा भी सबके मन में खुशी, आशा का दीपक जगाते चलो। अच्छा है, मुबारक है।

एज्युकेशन विंग:- यह विधि अच्छी बनाई है, मिलना भी हो जाता है। कनेक्शन भी हो जाती है। अच्छा है, बापदादा ने समाचार सुना था, धीरे-धीरे एज्युकेशन में भी चांस मिलता रहता है और करते रहते हैं। अभी ऐसा अच्छा कोई प्रूफ लो, जहाँ भी सेवा करते हो वहाँ का ऐसा एक्जैम्पुल स्पष्ट हो जो और देशों में भी उसकी रिजल्ट देख करके बढ़ाते रहें। एज्युकेशन और मेडीसिन दोनों ही बहुत जरूरी होती हैं। बापदादा ने तो देखा है हर वर्ग अपने वर्ग में अच्छी सेवा कर रहे हैं। हिम्मत रख रहे हैं। सहयोगी भी बन रहे हैं लेकिन अभी और थोड़ा तीव्र करो क्योंकि समय समीप आ रहा है। हर वर्ग की अपनी-अपनी विशेषता है। कम से कम अभी यह तो उल्हना उतरा कि हमारे वर्ग को आपने सन्देश ही नहीं दिया। अभी विस्तार बढ़ता जायेगा। तो अच्छा एज्युकेशन से गवर्मेन्ट का बोझ तो उतरेगा ना। यूथ ग्रुप अच्छा हो जाए तो गवर्मेन्ट भी कहेगी कि हमारे साथी तो बने हैं। अच्छा कर रहे हैं, मुबारक हो और आगे करना। अच्छा।

जो पहले बारी आये हैं वह उठो : अच्छा है, हर टर्न में देखा है मैजारिटी नये होते हैं। तो सर्विस बढ़ाई है ना, इतनों को सन्देश दिया है। जैसे आप लोगों को सन्देश मिला ऐसे आप भी और दुगना, दुगना सन्देश दो। योग्य बनाओ। अच्छा है। हर सबजेक्ट में और उमंग-उत्साह से आगे बढ़ो। अच्छा है। अच्छा - अभी लक्ष्य रखो, चलते-फिरते चाहे मन्सा, चाहे वाचा, चाहे कर्मणा सेवा के बिना भी नहीं रहना है और याद के बिना भी नहीं रहना है। याद और सेवा सदा ही साथ है ही। इतना अपने को बिजी रखो, याद में भी सेवा में भी। खाली रहते हैं तो माया को आने का चांस मिलता है। इतना बिजी रहो जो दूर से ही माया हिम्मत नहीं रखे आने की। फिर जो लक्ष्य रखा है बाप समान बनने का वह सहज हो जायेगा। मेहनत नहीं करनी पड़ेगी, स्नेही स्वरूप रहेंगे। अच्छा। आज के दिन तो स्नेह उड़ाके लाया है। स्नेह का प्लेन कितना फास्ट है? तो स्नेह में उड़के आये हैं और स्नेह में उड़ते रहना और उड़ाते रहना। बापदादा चारों ओर के बच्चों को देख रहे हैं, सभी के मन में इस समय 100 परसेन्ट उमंग-उत्साह है, करके दिखायेंगे। कोई बड़ी बात नहीं है, होना ही है। लेकिन इस समय का उमंग-उत्साह और दृढ़ संकल्प सदा साथ रखना।

बापदादा के नयनों में समाये हुए नूरे रत्न बच्चे, बाप की सर्व प्रापर्टी के अधिकारी श्रेष्ठ आत्मायें बच्चे, सदा उमंग-उत्साह के पंखों से उड़ने वाले और उड़ाने वाले महावीर महावीरनियां बच्चे, एक बाप ही संसार है इस लगन से मगन रहने वाले लवलीन बच्चों को, लवलीन बनना अर्थात् बाप समान सहज बनना। तो लवली और लवलीन दोनों बच्चों को बहुत-बहुत पदम-पदमगुणा यादप्यार और नमस्ते। अच्छा

दादी जी से:- आपकी हिम्मत देखकर बापदादा भी खुश है। शरीर का हिसाब शरीर खत्म कर रहा है। आप हिम्मत में उड़ रही हो। ठीक है। (दादियों से) आप लोग भी बहुत सभी को हिम्मत दिलाने के निमित्त हो। आपको देख करके सभी को यह उमंग आता है तो हम भी कर सकते हैं। तो अच्छा निमित्त बने हुए हो। (मोहिनी बहन से) निमित्त हो ना। (ईशू दादी से) साथ निभाने में नम्बरवन हैं। (मुन्नी बहन) जितना बाप से प्यार है ना उतना यज्ञ से भी बहुत प्यार है। अच्छा सम्भाल रही हो। भरपूर यज्ञ है, सदा भरपूर रहेगा। अच्छा। (निर्मलशान्ता दादी से, कलकत्ता वालों ने फूलों का बहुत अच्छा श्रंगार किया है) गद्दी की मालिक हो ना। अच्छी। शरीर की मालिक बनके चल रही हो। शरीर को चलाना, यह सीख गई हो। आपकी शक्ल सेवा कर रही है। अच्छा है। ग्रुप भी अच्छा है। सेवा का उमंग है, दिल है। यज्ञ का श्रृंगार हो जाता है ना। और जो दिल से करता है ना, उसका वायब्रेशन फैलता है। फूलों से भी वायब्रेशन आता है। सबको उमंग उत्साह का वायब्रेशन आता है। तो अच्छा करते हैं और बापदादा ने देखा है हर वर्ष अच्छे से अच्छा करते हैं, उमंग से करते हैं, इसकी मुबारक हो। अच्छा याद से करते हो। रेसपान्ड दिया ना। याद भेजी थी ना। वैसे तो बहुतों ने याद भेजी है, जो भी मिलता है, कहता है हमारी याद देना। सन्देशी को देते रहते हैं हमारी याद देना। तो जिन्होंने याद भेजी, उन्हों को बापदादा नाम से पर्सनल याद का रेसपान्ड दे रहा है। अच्छे हैं और अच्छे रहेंगे और अच्छे ते अच्छा बनाते रहेंगे। जो सभी बैठे हैं सब याद दे रहे हैं और सबको याद मिल रही है। (अमेरिका से अंकल, आंटी ने भी याद भेजी है) आज के दिन तो एक-एक बच्चे की एक-एक शहर से यादप्यार मिली है। कोई भी ऐसा देश नहीं है जिन्होंने यादप्यार नहीं भेजी हो। अच्छा।



03-02-06   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


"परमात्म प्यार में सम्पूर्ण पवित्रता की ऐसी स्थिति बनाओ जिसमें व्यर्थ का नामनिशान न हो"

आज बापदादा चारों ओर के अपने प्रभु प्यारे बच्चों को देख रहे हैं। सारे विश्व के चुने हुए कोटों में से कोई इस परमात्म प्यार के अधिकारी बनते हैं। परमात्म प्यार ने ही आप बच्चों को यहाँ लाया है। यह परमात्म प्यार सारे कल्प में इस समय ही अनुभव करते हो। और सभी समय आत्माओं का प्यार, महान आत्माओं का, धर्म आत्माओं का प्यार अनुभव किया लेकिन अभी परमात्म प्यार के पात्र बन गये। कोई आपसे पूछे परमात्मा कहाँ है? तो क्या कहेंगे? परमात्म बाप तो हमारे साथ ही है। हम उनके साथ रहते हैं। परमात्मा भी हमारे बिना रह नहीं सकता और हम भी परमात्मा के बिना रह नहीं सकते। इतना प्यार अनुभव कर रहे हो। फलक से कहेंगे वह हमारे दिल में रहता और हम उनके दिल में रहते। ऐसे अनुभवी हैं ना! हैं अनुभवी? क्या दिल में आता? अगर हम नहीं अनुभवी होंगे तो कौन होगा! बाप भी ऐसे प्यार के अधिकारी बच्चों को देख हर्षित होते हैं। परमात्म प्यार की निशानी - जिससे प्यार होता है उसके पीछे सब कुर्बान करने के लिए सहज तैयार हो जाते हैं। तो आप सब भी जो बाप चाहते हैं कि हर एक बच्चा बाप समान बन जाए, हर एक के चेहरे से बाप प्रत्यक्ष दिखाई दे, ऐसे बने हो ना? बापदादा की दिलपसन्द स्थिति जानते हो ना। बाप के दिलपसन्द स्थिति है ही सम्पूर्ण पवित्रता। इस ब्राह्मण जन्म का फाउण्डेशन भी सम्पूर्ण पवित्रता है। सम्पूर्ण पवित्रता की गुण को तो जानते हो? संकल्प और स्वप्न में भी रिंचक मात्र अपवित्रता का नामनिशान न हो। बापदादा आजकल के समय की समीपता प्रमाण बार-बार अटेन्शन खिंचवा रहे हैं कि सम्पूर्ण पवित्रता के हिसाब से व्यर्थ संकल्प, यह भी सम्पूर्णता नहीं है। तो चेक करो व्यर्थ संकल्प चलते हैं? किसी भी प्रकार के व्यर्थ संकल्प सम्पूर्णता से दूर तो नहीं करते? जितना-जितना पुरूषार्थ में आगे बढ़ते जाते हैं, उतना रॉयल रूप के व्यर्थ संकल्प, व्यर्थ समय तो समाप्त नहीं कर रहे हैं? रॉयल रूप में अभिमान और अपमान व्यर्थ संकल्प के रूप में वार तो नहीं करते? अगर अभिमान रूप में कोई भी परमात्म देन को अपनी विशेषता समझते हैं तो उस विशेषता का भी अभिमान नीचे ले आता है। विघ्न रूप बन जाता है और अभिमान भी सूक्ष्म रूप में यही आता, जो जानते भी हो - मेरापन आया, मेरा नाम, मान, शान होना चाहिए। यह मेरापन अभिमान का रूप ले लेता है। यह व्यर्थ संकल्प भी सम्पूर्णता से दूर कर लेते हैं क्योंकि बापदादा यही चाहते हैं - स्वमान, न अभिमान, न अपमान। यही कारण बनते हैं व्यर्थ संकल्प आने के।

बापदादा हर बच्चे को डबल मालिकपन के निश्चय और नशे में देखने चाहते हैं। डबल मालिकपन क्या है? एक तो बाप के खज़ानों के मालिक और दूसरा स्वराज्य के मालिक। दोनों ही मालिकपन क्योंकि सभी बालक भी हो और मालिक भी हो। लेकिन बापदादा ने देखा बालक तो सभी हैं ही क्योंकि सभी कहते हैं मेरा बाबा। तो मेरा बाबा अर्थात् बालक हैं ही। लेकिन बालक के साथ दोनों प्रकार के मालिक। तो मालिकपन में नम्बरवार हो जाते हैं। मैं बालक सो मालिक भी हूँ। वर्से का खज़ाना प्राप्त है इसलिए बालकपन का निश्चय और नशा रहता है लेकिन मालिकपन का प्रैक्टिकल में निश्चय का नशा उसमें नम्बरवार हो जाते हैं। स्वराज्य अधिकारी मालिक, इसमें विशेष विघ्न डालता है मन। मन के मालिक बन कभी भी मन के परवश नहीं हो। कहते हैं स्वराज्य अधिकारी हैं, तो स्वराज्य अधिकारी अर्थात् राजा हैं, जैसे ब्रह्मा बाप ने हर रोज चेकिंग कर मन के मालिक बन विश्व के मालिक का अधिकार प्राप्त कर लिया। ऐसे यह मन बुद्धि राजा के हिसाब से तो मन्त्री हैं, यह व्यर्थ संकल्प भी मन में उत्पन्न होते हैं, तो मन व्यर्थ संकल्प के वश कर देता है। अगर आर्डर से नहीं चलाते तो मन चंचल बनने के कारण परवश कर लेता है। तो चेक करो। वैसे भी मन को घोड़ा कहते हैं, क्योंकि चंचल है ना। और आपके पास श्रीमत का लगाम है। अगर श्रीमत का लगाम थोड़ा भी ढीला होता है तो मन चंचल बन जाता है। क्यों लगाम ढीला होता? क्योंकि कहाँ न कहाँ साइडसीन में देखने लग जाते हैं। और लगाम ढीला होता तो मन को चांस मिलता है। तो मैं बालक सो मालिक हूँ, इस स्मृति में सदा रहो। चेक करो खज़ाने का भी मालिक तो स्वराज्य का भी मालिक, डबल मालिक हूँ? अगर मालिकपन कम होता है तो कमज़ोर संस्कार इमर्ज हो जाते हैं। और संस्कार को क्या कहते हो? मेरा संस्कार ऐसा है, मेरी नेचर ऐसी है, लेकिन क्या यह मेरा है? कहने में तो ऐसे ही कहते हो, मेरा संस्कार। यह मेरा है? राइट है कहना मेरा संस्कार? राइट है? मेरा है? कि रावण की जायदाद है? कमज़ोर संस्कार रावण की जायदाद है, उसको मेरा कैसे कह सकते हैं। मेरा संस्कार कौन सा है? जो बाप का संस्कार वह मेरा संस्कार। तो बाप का संस्कार कौन सा है? विश्व कल्याण। शुभ भावना, शुभ कामना। तो कोई भी कमज़ोर संस्कार को मेरा संस्कार कहना ही रांग है। और मेरा संस्कार अगर मानो दिल में बिठाया है, अशुद्ध चीज़ बिठा दी है दिल में। मेरी चीज़ से तो प्यार होता है ना। तो मेरा समझने से अपने दिल में जगह दे दी है। इसीलिए कई बार बच्चों को युद्ध बहुत करनी पड़ती है क्योंकि अशुभ और शुभ दोनों को दिल में बिठा दिया है तो दोनों क्या करेंगे? युद्ध ही तो करेंगे! जब यह संकल्प में आता है, वाणी में भी आता है, मेरा संस्कार। तो चेक करो यह अशुभ संस्कार मेरा संस्कार नहीं है। तो संस्कार परिवर्तन करना पड़े।

बापदादा हर एक बच्चे को पदम-पदमगुणा भाग्यवान चलन और चेहरे में देखने चाहते हैं। कई बच्चे कहते हैं भाग्यवान तो बने हैं लेकिन चलते-फिरते भाग्य इमर्ज हो, वह मर्ज हो जाता है और बापदादा हर समय, हर बच्चे के मस्तक में भाग्य का सितारा चमकता हुआ देखने चाहते हैं। कोई भी आपको देखे तो चेहरे से, चलन से भाग्यवान दिखाई दे तब आप बच्चों द्वारा बाप की प्रत्यक्षता होगी क्योंकि वर्तमान समय मैजारिटी अनुभव करने चाहते हैं, जैसे आजकल की साइन्स प्रत्यक्ष रूप में दिखाती है ना! अनुभव कराती है ना! गर्म का भी अनुभव कराती है, ठण्डाई का भी अनुभव कराती है तो साइलेन्स की शक्ति से भी अनुभव करने चाहते हैं। जितना-जितना स्वयं अनुभव में रहेंगे तो औरों को भी अनुभव करा सकेंगे। बापदादा ने इशारा दिया ही है कि अभी कम्बाइन्ड सेवा करो। सिर्फ आवाज से नहीं, लेकिन आवाज के साथ अनुभवीमूर्त बन अनुभव कराने की भी सेवा करो। कोई न कोई शान्ति का अनुभव, खुशी का अनुभव, आत्मिक प्यार का अनुभव..., अनुभव ऐसी चीज़ है जो एक बारी भी अनुभव हुआ तो छोड़ नहीं सकते हैं। सुनी हुई ची ज भूल सकती है लेकिन अनुभव की चीज़ भूलती नहीं है। वह अनुभव कराने वाले के समीप लाती है।

सभी पूछते हैं कि अभी आगे के लिए क्या नवीनता करें? तो बापदादा ने देखा सर्विस तो सभी उमंग-उत्साह से कर रहे हो, हर एक वर्ग भी कर रहा है। आज भी बहुत वर्ग इकट्ठे हुए है नाक| मेगा प्रोग्राम भी कर लिया, सन्देश तो दे दिया, अपना उलाहना निकाल लिया, इसकी मुबारक हो। लेकिन अब तक यह आवाज नहीं फैला है कि यह परमात्म ज्ञान है। ब्रह्माकुमारियाँ कार्य अच्छा कर रही हैं, ब्रह्माकुमारियों का ज्ञान बहुत अच्छा है लेकिन यही परमात्म ज्ञान है, परमात्म कार्य चल रहा है यह आवाज फैले। मेडीटेशन कोर्स भी कराते हो, आत्मा का परमात्मा से कनेक्शन भी जोड़ते हो लेकिन अब परमात्म कार्य स्वयं परमात्मा करा रहा है, यह बहुत कम अनुभव करते हैं। आत्मा और धारणायें यह प्रत्यक्ष हो रहा है, अच्छा कार्य कर रहे हैं, अच्छा बोलते हैं, अच्छा सिखाते हैं, यहाँ तक ठीक है। नॉलेज अच्छी है इतना भी कहते हैं लेकिन परमात्म नॉलेज है... यह आवाज बाप के नजदीक लायेगा और जितना बाप के नजदीक आयेंगे उतना अनुभव स्वत: ही करते रहेंगे। तो ऐसा प्लैन और भाषणों में ऐसा कुछ जौहर भरो, जिसमें परमात्मा के नजदीक आ जायें। दिव्यगुणों की धारणा इसमें अटेन्शन गया है, आत्मा का ज्ञान देते हैं, परमात्मा का ज्ञान देते हैं, यह कहते हैं लेकिन परमात्मा आ चुका है, परमात्म कार्य स्वयं परमात्मा चला रहा है, यह प्रत्यक्षता चुम्बक की तरह समीप लायेगी। आप लोग भी समीप तब आये जब समझा बाप मिला है, बाप से मिलना है। स्नेही मैजॉरिटी बनते हैं, वह क्या समझके? कार्य बहुत अच्छा है। जो कार्य कर रही हैं ब्रह्माकुमारियाँ, वह कार्य कोइ और कर नहीं सकता, परिवतर्न् कराती हैं। लेकिन परमात्मा बोल रहा है, परमात्मा से वर्सा लेना है, इतना नजदीक नहीं आते। क्योंकि अभी जो पहले समझते नहीं थे कि ब्रह्माकुमारियाँ क्या करती हैं, क्या इन्हों की नॉलेज है, वह समझने लगे हैं। लेकिन परमात्म प्रत्यक्षता, अगर समझ सकते कि परमात्मा का ज्ञान है तो रूक सकते हैं क्या। जैसे आप भागकर आ गये हो ना, ऐसे भागेंगे। तो अभी ऐसा प्लैन बनाओ, ऐसे भाषण तैयार करो, ऐसे परमात्म अनुभूति के प्रैक्टिकल सबूत बनो। तभी बाप की प्रत्यक्षता प्रैक्टिकल में दिखाई देगी। अभी अच्छा है यहाँ तक पहुंचे हैं, अच्छा बनना है, वह लहर परमात्म प्यार की अनुभूति से होगी। तो अनुभवी मूर्त बन अनुभव कराओ। अच्छा। अभी डबल मालिकपन की स्मृति से समर्थ बन समर्थ बनाओ। अच्छा अभी क्या करना है?

सेवा का टर्न पंजाब जोन का है:- हाथ हिलाओ। अच्छा है जिस भी जोन को टर्न मिलता है वह खुली दिल से आ जाते हैं। अच्छा चांस ले लेते हैं। बापदादा को भी खुशी होती है कि हर एक जोन सेवा का चांस अच्छा ले लेते हैं। पंजाब को सभी कामन रीति से शेर कहते हैं, पंजाब शेर। और बापदादा कहते हैं शेर अर्थात् विजयी। तो सदा पंजाब वालों को अपने मस्तक के बीच विजय का तिलक अनुभव करना है। विजय का तिलक मिला हुआ है। यह सदा स्मृति रहे हम ही कल्प कल्प के विजयी हैं। थे, हैं और कल्प-कल्प बनेंगे। अच्छा है। पंजाब भी वारिस क्वालिटी को बाप के आगे लाने का प्रोग्राम बना रहे हैं ना! अभी बापदादा के आगे वारिस क्वालिटी लाई नहीं है। स्नेही क्वालिटी लाई है, सभी जोन ने स्नेही सहयोगी क्वालिटी लाई है लेकिन वारिस क्वालिटी नहीं लाये हैं। तैयारी कर रहे हैं ना! सब प्रकार के चाहिए ना। वारिस भी चाहिए, स्नेही भी चाहिए, सहयोगी भी चाहिए, माइक भी चाहिए, माइट भी चाहिए। सब प्रकार के चाहिए। अच्छा है, सेन्टरों में वृद्धि तो हो रही है। हर एक उमंग-उत्साह से सेवा में वृद्धि कर भी रहे हैं, अभी देखेंगे कि किस जोन में यह प्रत्यक्ष होता है - परमात्मा आ चुका है। बाप को प्रत्यक्ष कौन सा जोन करता है, वह बापदादा देख रहे हैं। फॉरेन करेगा? फॉरेन भी कर सकता है। पंजाब नम्बर ले लो। ले लो अच्छा है। सब सहयोग देंगे आपको। बहुत समय से प्रयत्न कर रहे हैं, यही है, यही है, यही है, यह आवाज फैलाने का। अभी है यह भी है, यही है नहीं है। तो पंजाब क्या करेगा? यह आवाज आ जाये यही है, यही है...। ठीक है टीचर्स? कब तक करेंगे? इस साल में करेंगे? नया साल शुरू हुआ है ना! तो नये साल में कोई नवीनता होनी चाहिए ना! यह भी है, यह तो बहुत सुन लिया। जैसे आपके मन में बस बाबा, बाबा, बाबा स्वत: याद रहता है ऐसे उनके मुख से निकले हमारा बाबा आ गया। वह भी सभी मेरा बाबा, मेरा बाबा, यह आवाज चारों कोनों से निकले, लेकिन शुरूआत तो एक कोने से होगी ना। तो पंजाब कमाल करेगा? क्यों नहीं करेंगे। करना ही है। बहुत अच्छा। इन एडवांस मुबारक हो। अच्छा।

इस ग्रुप में 6 वर्गो की मीटिंग चल रही है:- (साइंस एण्ड इंजीनियर विंग, बिजनेस विंग, धार्मिक प्रभाग, समाज सेवा प्रभाग, मीडिया प्रभाग, सुरक्षा प्रभाग) सभी उठो। (सभी अपने-अपने प्रभाग का बैनर दिखा रहे हैं) अच्छा सब बिजी हो गये हो तो सेवा में बिजी रहने की मुबारक हो। हर एक अपनी-अपनी विधि अपना रहे हैं। देखो, साइस्ं इंजनियर का बैनर देख रहे हैं, लेकिन कमाल यह है जैसे साइंस प्रत्यक्ष प्रमाण दिखा रही है, ऐसे साइलेन्स पावर। ऐसा प्रैक्टिकल में अनुभव फैलाओ जो हर एक के मुख से निकले कि साइंस तो साइंस है लेकिन साइलेन्स अपरमअपार है क्योंकि धर्मवाले आरै साइंसवाले दोनों को प्रैक्टिकल में साइलेन्स का चमत्कार नहीं लेकिन साइलेन्स का कार्य सिद्ध करके दिखाना पड़ेगा। धर्म वालों को प्रैक्टिकल में एक परमात्मा है और परमात्मा का कार्य चल रहा है यह सिद्ध करके दिखाना पड़ेगा। अनेक तरफ से बुद्धि हटकर एक तरफ लग जाए। एकाग्र बुद्धि हो जाए। जो भी विंग हैं, बापदादा ने कह दिया कि काम तो सभी कर रहे हैं, प्लैन भी अच्छे अच्छे बनाते हैं लेकिन अभी समय की रफ्तार तेज जा रही है तो समय के प्रमाण अभी ऐसा कोई प्लैन बनाओ जो सबकी बुद्धि में परमात्मा के सिवाए कुछ सूझे नहीं, मैजारिटी के मुख से बाबा, बाबा निकले। प्लैन भी अच्छे बनाये हैं, बापदादा ने सुने हैं। लेकिन अभी फास्ट करना पड़ेगा। साइन्स भी देखो, समय को, चीजों को बिल्कुल सूक्ष्म बनाती जाती है ना। तो साइलेन्स पावर कितना शक्तिशाली बना रही है यह अनुभव कराओ। जो भी वर्ग आये हैं, सभी को बापदादा मुबारक दे रहे हैं। वैसे तो मीडिया और मेडिकल यह भी आगे बढ़ रहे हैं। बापदादा ने सुना तो मीडिया भी विस्तार को प्राप्त कर रही है लेकिन मीडिया के लिए भी सुनाया था तो जिसके हाथ में अखबार आये, जिसके रेडियो का स्विच खुले, टी.वी. का स्विच खुले, आवाज आये हमारा बाबा आ गया। ऐसे नहीं और वर्ग नहीं कर रहे हैं, सब कर रहे हैं लेकिन बापदादा देख रहे हैं लेकिन कौन सा वर्ग नम्बरवन निमित्त बनता है। कौन सा जोन नम्बरवन निमित्त बनता है। चलो और तो छोड़ो लेकिन जहाँ भी प्रोग्राम करते हैं वह प्रोग्राम वाले ही सभी कहें कि बाबा आ गया, यह तो शुरू हो कि आप कहेंगे, हम अभी पुरूषार्थ कर रहे हैं, सम्पन्न बन जायेंगे जल्दी जल्दी तो यह कार्य भी हो जायेगा क्योंकि कनेक्शन है, आपका सम्पन्न बनना और प्रत्यक्षता का झण्डा लहरना। तो बापदादा ने सुनाया कि अभी वेस्ट थॉट्स यह अभी भी चलते हैं, रॉयल रूप में भी चलते, साधारण रूप में भी चलते हैं, सभी मन के मालिक बन जायें, परमात्म बालक सो मालिक। अच्छा मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो।

डबल विदेशी:- बापदादा कहते हैं कि डबल फॉरेनर्स सबसे पहले तो मधुबन का बहुत बढ़िया श्रृंगार हैं। कितना अच्छा लगता है। देश विदेश एक मत होके एकाग्र बुद्धि से विश्व सेवा कर रहे हैं। एक ही स्टेज पर सब इन्टरनेशनल हैं, काले भी तो गोरे भी, सांवले भी, सब प्रकार के एक स्टेज पर बैठते हैं। और सब एक बाप दूसरा न कोई, है? दूसरा है? व्यर्थ संकल्प हैं तो भी दूसरा है। आज बापदादा सब संकल्प की विधि को एक शुभ संकल्प बनाने चाहते हैं क्योंकि मन के संकल्प में बहुत समय से जो कमज़ोरी चलती है वह बहुत कारण से मन बुद्धि को भी सहयोगी बना देता है और मन बुद्धि में जो भी संकल्प चलता रहता है कमज़ोरी का, वह संस्कार बन जाता है। क्योंकि बहुत समय चलता है ना तो वह संस्कार का रूप हो जाता है। लेकिन मेरा संस्कार अभी कभी नहीं कहना, अगर मेरा संस्कार कहेंगे ना तो बापदादा और ब्राह्मण समझेंगे कि इसको रावण की जायदाद से प्यार है। तो डबल विदेशियों ने तो विदाई दे दी है ना! दे दी? व्यर्थ स्टॉप। समर्थ बाप, समर्थ हम, व्यर्थ खत्म। ठीक है ना - फारेनर्स की एक विशेषता है जो बाप को अच्छी लगती है, वह क्या है? अन्दर नहीं रखते हैं, सब बोल देते हैं, छिपाते नहीं है, मैजारिटी। मैजारिटी ऐसे हैं। और जो संकल्प किया दृढ़, उसको प्रैक्टिकल में लाने की भी आदत है इसीलिए डबल फॉरेनर्स शुरू करो दृढ़ संकल्प, वेस्ट खत्म, बेस्ट। ठीक है? करेंगे डबल फॉरेनर्स? करेंगे? आप में संस्कार रूप में भी है, जो संकल्प किया वह करके दिखाते हो। तो सारे फॉरेन में वेस्ट का नाम निशान न हो, न वेस्ट टाइम, न वेस्ट बोल, न वेस्ट संकल्प, न वेस्ट कर्म, न वेस्ट सम्बन्ध-सम्पर्क। ठीक है? पसन्द है? अच्छा। तो कब रिजल्ट यह आयेगी? एक्जैम्पुल बनेंगे ना! तो कब तक रिजल्ट आयेगी? कब तक यह रिजल्ट आयेगी? तीन मास में या साल में? क्या सोचती हैं? टीचर्स क्या सोचती हैं? (दादी जानकी कह रही हैं अभी शिवरात्रि आ रही है, अभी-अभी करेंगे, बाबा ने कहा, हो गया) अच्छा है देखो दृढ़संकल्प रखेंगे, करना ही है, कुछ भी हो जाए, करना ही है। (सभी कह रहे हैं शिवजयन्ती तक हो जायेगा) मुबारक हो लाख, लाख मुबारक हो। बहुत अच्छा आप सभी के मुख में गुलाबजामुन। अच्छा। जो भी उमंग-उत्साह से आगे बढ़ने चाहे वह बढ़ सकता है। ऐसे नहीं डबल फारेनर्स ने हाथ उठाया और आप सभी क्या करेंगे? इन्डिया वाले क्या करेंगे? नम्बरवन तो लेना चाहते हैं ना! सभी के दिल में यह उमंग आना चाहिए कि हमने कहा नहीं है लेकिन करके दिखायेंगे। तो इन्डिया वाले ऐसे करेंगे? हिम्मत दिखायेंगे? हिम्मत दिखायेंगे?पहली लाइन हाथ नहीं उठा रही है। हाँ मधुबन वाले भी करेंगे? मधुबन वाले बड़ा हाथ उठाओ।

मधुबन वालों के लिए बापदादा कहते हैं जो चुल पर सो दिल पर, मधुबन वालों को बहुत बड़ी लिफ्ट है। लिफ्ट पर अगर चढ़ने चाहो तो बहुत जल्दी सम्पन्न बन सकते हो। लोग तो मधुबन में आते हैं, आप मधुबन में रहते हैं। सिर्फ अलबेले नहीं बनना बस। लिफ्ट को छोड़कर सीढ़ी नहीं चढ़ो, लिफ्ट में चढ़ो। बाकी बापदादा मधुबन वालों को हर सीजन की मुबारक देते हैं। सेवा अच्छी करते हैं। लेकिन.. लेकिन है। कहें लेकिन वाला, कि प्राइवेट कहें? मधुबन वाले समझदार बहुत हैं, समझ तो गये हैं अन्दर में, इसीलिए कहते नहीं हैं। देखो, मधुबन वालों को हर साल, हर सीजन में सम्मुख मुरली सुनने का मिलता है, औरों को नहीं मिलता है। तो मधुबन वाले सभी को मुस्कराके मिलते अपने चेहरे से बाप को प्रत्यक्ष कर सकते हैं। जो मेरा बाबा कहते हैं ना, वह मेरे बाबा का चेहरे से चलन से दिखाई दे। कर भी रहे हैं, ऐसे नहीं है नहीं कर रहे हैं, कर रहे हैं। अभी और थोड़ा फास्ट करना है, बाकी कर भी रहे हैं। मधुबन का नाम सुनके जहाँ भी जाते हो ना, मधुबन वाले हैं, मधुबन वाले हैं। देखो, कितना रिगार्ड से देखते हैं। मधुबन से प्यार है, तो मधुबन निवासियों से भी प्यार है। तो अच्छा आज तो मिल लिया ना मधुबन वालों से। आज किसने कहा था मधुबन वालों से मिलना है, तो बापदादा मिला ना। तो बापदादा मिला? अच्छा।

सभी तरफ के सर्व रूहानी, गुलाब बच्चों को सदा बाप के अति प्यारे और देहभान से अतिन्यारे, बापदादा के दिल के दुलारे बच्चों को, सदा एक बाप, एकाग्र मन और एकरस स्थिति में स्थित रहने वाले बच्चों को, चारों ओर के भिन्न-भिन्न समय पर भिन्न-भिन्न स्थान में रहते भी साइंस के साधनों से मधुबन में पहुँचने वाले, सम्मुख देखने वाले, सभी लाडले, सिकीलधे, कल्प-कल्प के परमात्म प्यार के पात्र अधिकारी बच्चों को बापदादा का यादप्यार और दिल की दुआयें, पदम-पदम गुणा स्वीकार हो और साथ में डबल मालिक बच्चों को बापदादा की नमस्ते।

दादी जी से:- मधुबन का हीरो एक्टर है, सदा जीरो याद है। शरीर भले नहीं चलता, थोड़ा धीरे-धीरे चलता लेकिन सभी का प्यार और दुआयें चला रही हैं। बाप की तो हैं ही लेकिन सभी की हैं। सभी दादी को बहुत प्यार करते हो ना! देखो सभी यही कहते हैं कि दादियां चाहिए, दादियां चाहिए, दादियां चाहिए...। तो दादियों की विशेषता क्या है? दादियों की विशेषता है बाप की श्रीमत पर हर कदम उठाना। मन को भी बाप की याद और सेवा में समर्पण करना। आप सभी भी ऐसे ही कर रहे हो ना! मन को समर्पण करो। बापदादा ने देखा है, मन बड़ी कमाल करके दिखाता है। कमाल क्या करता है? चंचलता करता है। मन एकाग्र हो जाए, जैसे झण्डा ऊपर करते हो ना, ऐसे मन का झण्डा शिव बाबा, शिवबाबा में एकाग्र हो जाए, आ रहा है, समय समीप आ रहा है। कभी-कभी बापदादा बच्चों के संकल्प बहुत अच्छे-अच्छे सुनते हैं। सबका लक्ष्य बहुत अच्छा है। अच्छा। दादियाँ बहुत थोड़ी सी रह गई हैं। गिनी चुनी हुई दादियां रह गई हैं। दादियों से प्यार है ना सबको। अच्छा। (सब दादियाँ ऐसे ही चलती रहें) अभी तो हैं ही ना, अभी तो क्वेश्चन ही नहीं। अच्छा। देखो हाल की शोभा कितनी अच्छी है। माला लगती है ना! और माला के बीच में मणके बैठे हैं। अच्छा।



25-02-06   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


"आज उत्सव के दिन मन के उमंग-उत्साह द्वारा माया से मुक्त रहने का व्रत लो, मर्सीफुल बन मास्टर मुक्तिदाता बनो, साथ चलना है तो समान बनो"

आज चारों ओर के अति स्नेही बच्चों की उमंग-उत्साह भरी मीठी-मीठी यादप्यार और बधाईयाँ पहुँच रही हैं। पदमगुणा बधाईयाँ दे रहे हैं। आज के दिन की विशेषता जो सारे कल्प में नहीं है वह आज है जो बाप और बच्चों का जन्म दिन साथ-साथ है। इसको कहा जाता है विचित्र जयन्ती। सारे कल्प में चक्र लगाके देखो ऐसी जयन्ती कभी मनाई है! लेकिन आज बापदादा बच्चों की जयन्ती मना रहे हैं और बच्चे बापदादा की जयन्ती मना रहे हैं। नाम तो शिव जयन्ती कहते हैं लेकिन यह ऐसी जयन्ती है जो इस एक जयन्ती में बहुत जयन्ती समाई हुई हैं। आप सभी को भी बहुत खुशी हो रही है ना कि हम बाप को मुबारक देने आये हैं और बाप हमको मुबारक देने आये हैं क्योंकि बाप और बच्चों का इकठ्ठा जन्म दिन होना यह अति प्यार की निशानी है। बाप बच्चों के सिवाए कुछ कर नहीं सकते और बच्चे बाप के सिवाए नहीं कर सकते। जन्म भी इकट्ठा है और संगमयुग में रहना भी इकठ्ठा है क्योंकि बाप और बच्चे कम्बाइन्ड हैं। विश्व कल्याण का कार्य भी इकट्ठा है, अकेला बाप भी नहीं कर सकता, बच्चे भी नहीं कर सकते, साथ-साथ है और बाप का वायदा है - साथ रहेंगे, साथ चलेंगे, साथ चलेंगे ना। वायदा है ना। इतना प्यार बाप और बच्चों का देखा है? देखा है वा अनुभव कर रहे हो? इसलिए इस संगमयुग का महत्व है और इसी मिलन का यादगार भिन्न-भिन्न मेलों में बनाया हुआ है। इस शिव जयन्ती के दिन भक्त पुकार रहे हैं - आओ। कब आयेंगे, कैसे आयेंगे, यही सोच रहे हैं और आप मना रहे हैं।

बापदादा को भक्तों के ऊपर स्नेह भी है, रहम भी आता है, कितना कुछ प्रयत्न करते हैं, ढूंढते रहते। आपने ढूंढा? या बाप ने आपको ढूंढा? किसने ढूंढ़ा? आपने ढूंढा? आप तो फेरे ही पहनते रहे। लेकिन बाप ने देखो, बच्चों को किसी भी कोनों में खो गये, आज भी देखो भारत के अनेक राज्यों से तो आये हो लेकिन विदेश भी कम नहीं है, 100 देशों से आ गये हैं। और मेहनत क्या की? बाप का बनने में मेहनत क्या की? मेहनत की? की है मेहनत? हाथ उठाओ जिसने मेहनत की, बाप को ढूंढने में भक्ति में किया लेकिन जब बाप ने ढूँढ लिया, फिर मेहनत की? की मेहनत? सेकण्ड में सौदा कर दिया। एक शब्द में सौदा हो गया। वह एक शब्द क्या? मेरा। बच्चों ने कहा मेरा बाबा, बाप ने कहा मेरे बच्चे। हो गये। सस्ता सौदा है या मुश्किल? सस्ता है ना! जो समझते हैं थोड़ा-थोड़ा मुश्किल है वह हाथ उठाओ। जो मुश्किल समझते हैं वह हाथ उठाओ। कभी-कभी तो मुश्किल लगता है ना! या नहीं? है सहज लेकिन अपनी कमज़ोरियाँ मुश्किल अनुभव कराती हैं। बापदादा देखते हैं भक्त भी जो सच्चे भक्त हैं, स्वार्था भक्त नहीं, सच्चे भक्त, आज के दिन बड़े प्यार से व्रत रखते हैं। आप सबने भी व्रत तो लिया है, वह थोड़े दिनों का व्रत रखते हैं और आप सबने ऐसा व्रत रखा है जो एक अभी का व्रत 21 जन्म कायम रहता है। वह हर वर्ष मनाते हैं, व्रत रखते हैं, आप कल्प में एक बार व्रत लेते हो जो 21 जन्म न मन से व्रत रखना पड़ता, न तन से व्रत रखना पड़ता है। व्रत तो आप भी लेते हो, कौन सा व्रत लिया है? पवित्र वृत्ति, दृष्टि, कृति, पवित्र जीवन का व्रत लिया है। जीवन ही पवित्र बन गई। पवित्रता सिर्फ ब्रह्मचर्य व्रत की नहीं, लेकिन जीवन में आहार, व्यवहार, संसार, संस्कार सब पवित्र। ऐसा व्रत लिया है ना? लिया है? कंधा हिलाओ। लिया है? पक्का लिया है? पक्का या थोड़ा-थोड़ा कच्चा? अच्छा, एक महाभूत काम, उसका व्रत लिया है या और चार का भी लिया है? ब्रह्मचारी तो बने लेकिन चार जो पीछे हैं, उसका भी व्रत लिया है? क्रोध का व्रत लिया है कि वह छूट है? क्रोध करने की छुट्टी मिली है? दूसरा नम्बर है ना तो कोई हर्जा नहीं, ऐसे तो नहीं? जैसे महा भूत को, महाभूत समझकर मन-वाणी-कर्म में व्रत पक्का लिया है, ऐसे ही क्रोध का भी व्रत लिया है? जो समझते हैं हमने क्रोध का भी, बाल बच्चे पीछे भी हैं- लोभ मोह अहंकार, लेकिन बापदादा आज क्रोध का पूछ रहे हैं, जिसने क्रोध विकार का पूर्ण व्रत लिया है, मन्सा में भी क्रोध नहीं, दिल में भी क्रोध की फीलिंग नहीं, ऐसा है? आज शिव जयन्ती है ना! तो भक्त व्रत रखेंगे तो बापदादा भी व्रत तो पूछेंगे ना! जो समझते हैं कि स्वप्न में भी क्रोध का अंश आ नहीं सकता, वह हाथ उठाओ। आ नहीं सकता। है? आता नहीं है? आता नहीं है? नहीं आता है? अच्छा, इन्हों का फोटो निकालो, जिन्होंने हाथ उठाया उनका फोटो निकालो। अच्छा है क्यों? क्योंकि आपके हाथ से बापदादा नहीं मानेगा, आपके साथियों से भी सर्टीफिकेट लेंगे। फिर प्राइज देंगे। अच्छी बात है क्योंकि बापदादा ने देखा कि क्रोध का अंश भी ईर्ष्या, जैलसी यह भी क्रोध के बाल बच्चे हैं। लेकिन अच्छा है हिम्मत जिन्होंने रखी है, उनको बापदादा अभी तो मुबारक दे रहे हैं लेकिन बाद में सर्टीफिकेट के बाद में फिर प्राइज देंगे क्योंकि बापदादा ने जो होम वर्क दिया, उसकी रिजल्ट भी बापदादा देख रहे हैं।

आज बर्थ डे मना रहे हो, तो बर्थ डे पर क्या किया जाता है? एक तो केक काटते हैं, तो अभी दो मास तो हो गये, अभी एक मास रहा है, इस दो मास में आपने व्यर्थ संकल्प का केक काटा? वह केक तो बहुत सहज काट लेते हो ना, आज भी काटेंगे। लेकिन वेस्ट थॉट्स का केक काटा? काटना तो पड़ेगा ना! क्योंकि साथ चलना है, यह तो पक्का वायदा है ना! कि साथ हैं, साथ चलेंगे। साथ चलना है तो समान तो बनना पड़ेगा ना! अगर थोड़ा बहुत रह भी गया हो, दो मास तो पूरे हो गये, तो आज के दिन बर्थ डे मनाने कहाँ-कहाँ से आये हो। प्लेन में भी आये हो, ट्रेन में भी आये हो, कारों में भी आये हो, बापदादा को खुशी है कि भाग-भाग करके आये हो। लेकिन बर्थ डे पर पहले गिफ्ट भी देते हैं, तो जो एक मास रहा हुआ है, होली भी आने वाली है। होली में भी कुछ जलाया ही जाता है। तो क्या जो थोड़ा बहुत वेस्ट थॉट्स बीज है, अगर बीज रहा हुआ होगा तो कभी तना भी निकल आयेगा, कभी शाखा भी निकल आयेगी। तो क्या आज के उत्सव के दिन मन के उमंग उत्साह से, मन का उमंग-उत्साह, मुख का नहीं मन का, मन के उमंग उत्साह से जो थोड़ा बहुत रह गया हो, चाहे मन्सा में, चाहे वाणी में, चाहे सम्बन्ध-सम्पर्क में, क्या आज बाप के बर्थ डे पर बाप को यह गिफ्ट दे सकते हो? दे सकते हो मन के उमंग-उत्साह से? फायदा तो आपका है, बाप को तो देखना है। जो उमंग उत्साह से, हिम्मत रखते हैं, करके ही दिखायेंगे, बेस्ट बनके दिखायेंगे, वह हाथ उठाओ। छोड़ना पड़ेगा, सोच लो। बोल में भी नहीं। सम्बन्ध-सम्पर्क में भी नहीं। है हिम्मत? हिम्मत है? मधुबन वालों में भी है, फारेन वालों में भी हैं, भारतवासियों में भी है क्योंकि बापदादा का प्यार है ना तो बापदादा समझते हैं सब इकट्ठे चलें, कोई रह नहीं जाये। जब वायदा किया है, साथ चलेंगे, तो समान तो बनना ही पड़ेगा। प्यार है ना! मुश्किल से तो नहीं हाथ उठाया? बापदादा इस संगठन का, ब्राह्मण परिवार का बाप समान मुखड़ा देखने चाहते हैं। सिर्फ दृढ़ संकल्प की हिम्मत करो, बड़ी बात नहीं है लेकिन सहनशक्ति चाहिए, समाने की शक्ति चाहिए। यह दो शक्तियाँ, जिसमें सहनशक्ति है, समाने की शक्ति है, वह क्रोधमुक्त सहज हो सकता है। तो आप ब्राह्मण बच्चों को तो बापदादा ने सर्व शक्तियाँ वरदान में दी हैं, टाइटल ही है मास्टर सर्वशक्तिवान। बस एक स्लोगन याद रखना, अगर एक मास में समान बनना ही है तो एक स्लोगन याद रखना, वायदे का है - न दु:ख देना है, न दु:ख लेना है। कई यह चेक करते हैं कि आज के दिन किसको दु:ख दिया नहीं है, लेकिन लेते बहुत सहज हैं। क्योंकि लेने में दूसरा देता है ना, तो अपने को छुड़ा देते हैं, मैंने थोड़ेही कुछ किया, दूसरे ने दिया, लेकिन लिया क्यों? लेने वाले आप हो या देने वाले? देने वाले ने गलती की, वह बाप और ड्रामा जाने उसका हिसाब-किताब, लेकिन आपने लिया क्यों? बापदादा ने रिजल्ट में देखा है कि देने में सोचते हैं फिर भी लेकिन ले बहुत जल्दी लेते हैं। इसलिए समान बन नहीं सकेंगे। लेना नहीं है कितना भी कोई दे, नहीं तो फीलिंग की बीमारी बढ़ जाती है। इसलिए अगर छोटी छोटी बातों में फीलिंग बढ़ती है तो वेस्ट थॉट्स खत्म नहीं हो सकते और बाप के साथ कैसे चलेंगे! बाप का प्यार है, बाप आपको छोड़ नहीं सकता, साथ लेके ही जाना है। मंजूर है? पसन्द है ना? पसन्द है तो हाथ उठाओ। पीछे पीछे तो नहीं आना है ना! अगर साथ चलना है तो गिफ्ट देनी ही पड़ेगी। एक मास सब अभ्यास करो, न दु:ख लेना है न दु:ख देना है। यह नहीं कहना मैंने दिया नहीं, उसने ले लिया, कुछ तो होता है। परदर्शन नहीं करना, स्व-दर्शन। हे अर्जुन मुझे बनना है।

देखो, बापदादा ने देखा रिपोर्ट में, सन्तुष्टता की रिपोर्ट अभी भी नहीं थी, मैजारिटी की। इसीलिए बापदादा फिर एक मास के लिए अण्डरलाइन कराते हैं। अगर एक मास अभ्यास कर लिया तो आदत पड़ जायेगी। आदत डालनी है। हल्का नहीं छोड़ना, यह तो होता ही है। इतना तो चलेगा, नहीं। अगर बापदादा से प्यार है तो प्यार के पीछे क्या सिर्फ एक क्रोध विकार को कुर्बान नहीं कर सकते? कुर्बान की निशानी है - फरमान मानने वाला। व्यर्थ संकल्प अन्तिम घड़ी में बहुत धोखा दे सकता है क्योंकि चारों ओर अपने तरफ दु:ख का वायुमण्डल, प्रकृति का वायुमण्डल और आत्माओं का वायुमण्डल आकर्षण करने वाला होगा। अगर वेस्ट थॉट्स की आदत होगी तो वेस्ट में ही उलझ जायेंगे। तो बापदादा का आज विशेष यह हिम्मत का संकल्प है, चाहे विदेश में रहते, चाहे भारत में रहते, है तो बापदादा एक के बच्चे। तो चारों ओर के बच्चे हिम्मत और दृढ़ता रख सफल मूर्त बन विश्व में यह एनाउन्स करें कि काम नहीं, क्रोध नहीं, हम परमात्म बच्चे हैं। दूसरों से शराब छुड़ाते, बीड़ी छुड़ाते, लेकिन बापदादा आज हर एक बच्चे से क्रोधमुक्त, काम विकार मुक्त इन दो की हिम्मत दिलाके स्टेज पर विश्व को दिखाने चाहते हैं। पसन्द है? दादियों को पसन्द है? पहली लाइन वालों को पसन्द है? मधुबन वालों को पसन्द है? मधुबन वालों भी पसन्द है। फॉरेन वालों को भी पसन्द है? तो जो पसन्द चीज़ होती है उसे करने में क्या बड़ी बात है। बापदादा भी एकस्ट्रा किरणें देगा। ऐसा नक्शा दिखाई दे कि यह दुआयें देने वाला और दुआयें लेने वाला ब्राह्मण परिवार है। क्योंकि समय भी पुकार रहा है, बापदादा के पास तो एडवांस पार्टी वालों की भी दिल की पुकार है। माया भी अभी थक गई है। वह भी चाहती है कि अभी हमें भी मुक्ति दे दो। मुक्ति देते हैं लेकिन बीच-बीच में थोड़ी दोस्ती कर देते हैं क्योंकि 63 जन्म दोस्त रही है ना! तो बापदादा कहते हैं हे मास्टर मुक्तिदाता अभी सबको मुक्ति दे दो। क्योंकि सारे विश्व को कुछ न कुछ प्राप्ति की अंचली देनी है, कितना काम करना है। क्योंकि इस समय, समय आपका साथी है, सर्व आत्माओं को मुक्ति में जाना ही है, समय है। दूसरे समय में अगर आप पुरूषार्थ भी करो, तो समय नहीं है, इसलिए आप दे नहीं सकते। अब समय है इसलिए बापदादा कहते हैं पहले स्व को मुक्ति दो, फिर विश्व की सर्व आत्माओं को प्राप्ति, मुक्ति देने की अंचली दो। वह पुकार रहे हैं, आपको क्या दु:खियों की पुकार का आवाज नहीं आता? अगर अपने में ही बिजी होंगे तो आवाज सुनने नहीं आता। बार-बार गीत गा रहे हैं - दु:खियों पर कुछ रहम करो...। अभी से दयालु, कृपालु, मर्सीफुल संस्कार बहुतकाल से नहीं भरेंगे तो आपके जड़ चित्र में मर्सीफुल का, कृपा का, रहम का, दया का वायब्रेशन कैसे भरेगा। डबल फॉरेनर्स समझते हैं, आप भी द्वापर में मर्सीफुल बनके सबको मर्सी देंगे ना! जड़ चित्रों द्वारा। आपके चित्र हैं ना या इन्डिया वालों के हैं। फॉरेनर्स समझते हैं कि हमारे चित्र हैं? तो चित्र क्या देते हैं? चित्रों के पास जाके क्या माँगते हैं? मर्सी, मर्सी की ध