24-10-13 ओम शान्ति अव्यक्त बापदादा मधुबन


वर्तमान वायु मण्डल प्रमाण मनसा शक्ति द्वारा पावरफुल सकाश देने की सेवा करो, वृति द्वारा व्रतियों का परिवर्तन करो

हर एक बच्चे का प्यार बाप को मिल रहा है। प्यार के रेस्पोंड में बापदादा भी हर बच्चे को पदमगुना प्यार दे रहे है। हर एक बच्चा स्नेह में समाया हुआ है। बापदादा भी स्नेही बच्चों को देख बार-बार दिल में कहते हैं वाह बच्चे वाह ! बाप को बच्चों के बिना सुना-सुना लगता है और बच्चों को बाप के बिना सुना-सुना लगता है।

आज हर बच्चे के मस्तक में बाप का स्नेह समाया हुआ है। बाप का दिल कहता एक-एक बच्चा वाह बच्चे वाह है। आज विशेष डबल विदेशी बच्चों का मिलन दिन है। तो बापदादा विदेश की सेवा में सन्तुष्ट है। भारत की सेवा भी कम नहीं है लकिन आज दिन के प्रमाण बापदादा ने देखा कि विदेश की सेवा भी अच्छी विस्तार को पा रही है। अच्छे-अच्छे बिछड़े हुए बच्चे अपना वर्सा लेने आ गए हैं। समय अपने नज़ारे दिखा रहा है लकिन बच्चे अपनी सेवा में आगे बढ़ रहे हैं चाहे देश, चाहे विदेश। बापदादा बच्चों की सेवा में खुश है और हर श्रेष्ट कार्य की रिजल्ट को देख दिल से कहते वाह बच्चे वाह! डबल विदेशी भी चारों और सन्देश देने में, परिचय देने में कम नहीं हैं और भारत के बच्चे भी सेवा में कम नहीं। बापदादा दोनों की सेवा देख खुश है। साथ-साथ मन की स्थिति में नंबरवार हैं। अभी बापदादा यही चाहते हें स्व स्थिति और सेवा की स्थिति दोनों में तीव्र हो। बापदादा यही चाहते हैं कि हर बच्चा सदा अचल अडोल आगे से आगे बढ़ता जाए। दुनिया के वायुमण्डल प्रमाण अभी बच्चों को मेजोरिटी पावरफुल सकाश से वायुमण्डल को परिवर्तन करने की मनसा शक्ति की इस समय आवश्यकता है। मनसा शक्ति को और पावरफुल कर मनसा शक्ति द्वारा आजकल के प्रभाव को परिवर्तन करने पर ओर ज्यादा अटेंशन देना आवशयक है। आजकल के हिसाब से सुनने सुनाने की शक्ति के बजाय वृति द्वारा व्रतियों बदलने की आवश्यकता है। बापदादा ने देखा वृतियां बदलने की शक्ति को और ज्यादा कार्य में लगाना है।

तो आज डबल फोरेनेर्स का विशेष दिन है। बापदादा विशेष डबल फोरेनेर्स को पदमगुना शाबाश दे रहे हैं। क्यों ? देशवाले भी कम नहीं हैं लकिन विदेश के वातवरण अनुसार सेवा की वृधि अच्छी कर रहे हैं इसिलिये आज विशेष उन्हों का दिन है। बापदादा ने सारे विदेश के देशों में चक्र लगाते हुए देखा कि मेजोरीटी सेवा का अटेंशन अच्छा है। भारत भी कम नहीं है, भारत वाले भीभिन्न-भिन्न प्रोग्राम्स, भिन्न-भिन्न उमंग-उत्साह के साधन बना रहे हैं। बापदादा सर्विस को देख दोनों तरफ खुश है लकिन अभी के वातावरण प्रमाण मनसा शक्ति द्वारा वायुमंडल को परिवर्तन करने की आवश्यकता है। बाकी बापदादा बच्चों का उमंग देख खुश है।

आप सभी भी चाहे भारत चाहे विदेश दोनों भी हर बच्चा अपने स्व-उन्नति और सेवा की उन्नति देख खुश हैं ? अभी मनसा शक्ति द्वारा वाइब्रेशन चेंज करना, वातावरण चेंज करना उसकी आवश्यकता है। यह सुनने सुनाने से नहीं होगा लकिन अंपने मन की शुभ कामना, मनुष्यों की वृति को, द्रष्टि को, कृति को परिवर्तन कर सकती है। तो आज बापदादा एक-एक बच्चे को विदेश चाहे देश हर बच्चे को सेवाओं के वृधि की मुबारक दे रहे हैं। अच्छा।

विदेशवाले आपस में भी अच्छा संगठन करके सेवाओं की लेनदेन कर के अच्छा आगे बढ़ रहे हैं।मधुबन में अच्छा चांस मिलता है। आपस में मिलनेका, आपस में रूहरिहान करने कावा सेवा के प्लान बनाने का, बापदादा सब देखते हैं कैसे बच्चे आपस में संगठन बनाके सेवा को आगे बढ़ा रहे हैं। बापदादा मुबारक दे रहे हैं। भारत भी कम नहीं है। बापदादा दोनों को देखते रहते है। सेवा का उमंग उत्साह दोनों तरफ अच्छा है। रिजल्ट भी अच्छी है, बापदादा खुश है। अभी स्वराज्य अधिकारी बनने की विधि को प्रैक्टिकल में अनुभव करना, इस तरफ भी अटेंशनअत देना है। आज आवश्यकता है मन की शक्ति द्वारा परिवर्तन करने की। मन की वृतियों को परिवर्तन करने की। अभी चारों और जैसे भ्रष्टाचार, भ्रष्टाचार की बातें चल रही हैं अभी इस वातावरण की मन की शक्ति द्वारा परिवर्तन कर सब के मन में परमात्म याद का उमंग-उत्साह पैदा करो। अच्छा। अभी क्या करना है।

1) यूरोप, मिडिल ईस्ट - एक-एक रत्न महान और महावीर है, बापदादा एक-एक महावीर बच्चे को विशेष दिल का याद्प्यार दे रहे हैं। अच्छा है, संगठन बढ़ता जा रहा है इसकी बधाई है। अच्छा।

2) ऑस्ट्रेलिया-एशिया - अच्छा संगठन है। बापदादा एक-एक बच्चे को देख, एक-एक बच्चे के दिल में गुण गा रहे हैं। वाह बच्चे वह !

3) अमेरिका-कैर्रेबियन सहित - बापदादा एक-एक बच्चे देख, उनके भाग्य को देख वाह हर एक का भाग्य, देख-देख खुश होते हैं। हर एक की महिमा एक दो से आगे है। बहुत अच्छा संगठन में मिलके आये हैं, जितने कदम उठाये उतने पदम् इकठठे किये इसलिए एक-एक बच्चे को जितने भी बैठे हैं, चाहे देश चाहे विदेश वाले एक-एक बच्चे को बापदादा पदमगुना मुबारक दे रहे हैं।

4) अफ्रीका-मौरिशियस - हाथ हिलाओ। सदा आगे बढनेवाले और बढ़ाने वाली आत्मा हो। बापदादा हर बच्चे का वर्तमान और भविष्य देख हर्षित हो रहे हैं। सदा आगे बढ़ते और बढाते रहना। कोई भी अगर थोडा भी कमज़ोर होता है तो उनको अपने सहयोग द्वारा चाहे स्वयं चाहे बड़ों से सहयोग दिलाते रहना। परोपकारी बन स्व उपकार और पर-उपकार दोनों को अटेंशन में रखते आगे से आगे बढ़ रहे हैं, ये चैक करते, बढ़ते भी रहना और बढाते भी रहना। बाकी बापदादा विदेश के ग्रुप को टोटल देख करके खुश है कि वृधि को प्राप्त कर विधि पूर्वक उड़ रहे हैं, उड़ते रहेंगे।

5) रशिया - टीचर्स, उनके लिए तो ताली बजाओ। टीचर्स अर्थात् जिनके फीचर्स से बापदादा दिखाई दे। उनके नयनों से उनके हर बोल से मेरा बाबा, प्यारा बाबा अनुभव हो। टीचर्स को नहीं देखें लेकिन टीचर्स में बापदादा दिखाई दे। ऐसे है भी और बापदादा हर टीचर को यही कहते कि आगे बढ़ो और आगे बढाते बाप समान बनाते चलो। वाह टीचर्स वाह! मेहनत का फल देख रहे हैं। आपकी मेहनत का फल दिखाई देता है। बहुत अच्छा। अभी यही हर एक में कोशिश करो कि हर एक के फीचर्स में फ्यूचर दिखाई दे। आशा के दीप दिखाई दें। अभी हमारा राज्य आया कि आया। यह उमंग उत्साह हर एक के फीचर्स में दिखाई दे। बहुत अच्छा।

पहली बार आनेवाले डबल विदेशी - भले पधारे अपने घर में आये। बापदादा को ख़ुशी होती है कि बिछड़े हुए बच्चे अपना वर्सा लेने अपने घर में पहुँच गये। सबकी तरफ से, सारे परिवार की तरफ से आप सबको लाख-लाख बधाईयाँ हो, बधाईयाँ हो।

टीचर्स की टीचर कौन? बापदादा तो है लेकिन बापदादा के आप भी (दादी जानकी) साथी हो। अच्छा अटेंशन तो रखते हैं। चाहे भारत की टीचर्स, चाहे विदेश की, सब टीचर्स को आज बापदादा दिल का प्यार दे रहे हैं। अच्छा। आज तो डबल फॉरेनर्स का दिन है ना। बापदादा को ख़ुशी है सदा खुश तो है लेकिन ख़ुशी में ख़ुशी है। आप सभी भारतवासी बच्चों को फोरेन की सेवा देख ख़ुशी होती है ना! होती है? बापदादा को होती है। क्यों? विश्व का पिता है ना। भारत का ही पिता नहीं है, सिर्फ भारत नहीं लेकिन विश्व पिता है। विश्व पिता को प्रत्यक्ष करनेवाले निमित्त यह भिन्न-भिन्न फोरेन के बच्चे हैं। तो बापदादा आज एक-एक बच्चे को बधाइयां दे रहे हैं, वाह सेवाधारी बच्चे वाह! अच्छा।

(बापदादा दृष्टि देते वापस चले गए, फिर से आह्वाहन किया गया)

दादियों से - आँख मिचौली हो गयी (दादी जानकी जी ने कहा, बाबा आपने इतनी ख़ुशी दी मैं क्या दूं) आपने सब दे दिया। कुछ है ही नहीं, सब दे दिया।

विदेश की बहिनों से - अच्छी फुलवाड़ी बनायीं है बापदादा को पसंद है। अच्छे उमंग उत्साह में चल रहे हैं। आप सबकी मेहनत का फल अच्छा निकला है।

सभी को विशेष यादप्यार। सेवा की मुबारक हो। सदा आगे बढ़ते रहना, बढ़ाते रहना।

कमलमणि दादी से - ठीक हैं अभी उठ जाओ। पलंग पर नहीं जाना। बैठ के सेवा करो।

रुक्मणि दादी से - ठीक हैं ना। जितना तबियत को चला सको उतना चलाओ। ज्यादा काम नहीं लो। थोडा बिच-बिच में आराम करो क्योंकि अभी तो टाइम पड़ा हैं ना और उसमे आपको सेवा करनी है। संभाल भी करो, सेवा भी करो। संभालो अच्छी तरह से।

चंद्रा बहन (मौरिशिअस) - अच्छा पार्ट बजाया। ठीक हैं ना। हर रोज़ अमृत्वेले उठकर वाह बाबा, वाह मेरा बाबा वाह करती रहो। शरीर में ताकत जितनी भी है बैठे-बैठे सेवा करो। क्लास नहीं कराओ लेकिन पर्सनल सेवा करो। निर्विघ्न हैं।

मोहिनी बहन - अभी आयु है इसलिए चलेंगी।

चार्ली भाई - अच्छी सेवा कर रहे हो। (गायत्री बहन ने आंटी की वा परिवार की याद दी) बापदादा का भी जिगरी प्यार उन्हों को देना। अच्छी है। जितनी ताकत है उतना अच्छा अपने को चला रही है और जितना भी रहती है उतनी मनसा सेवा अच्छी कर रही है। सेवा के बिना रहनेवाली नहीं है। अच्छी है। अच्छा।

दीपावली निमित्त बापदादा ने सबको बधाई दी - विश्व के चारों ओर के मीठे-मीठे सिकिलधे बच्चों को याद प्यार और गुड नाईट। आनेवाली दीपावली, आप तो चैतन्य दीपक हो, तो आनेवाली दीपावली की भी आप जागती ज्योत दीपकों को बहुत-बहुत मुबारक हो। चारों ओर के बच्चों को, चाहे देह चाहे विदेश एक-एक बच्चे को बाप दिवाली की मुबारक दे रहे हैं। ओ.के.। ओ.के.। सदा ओ.के.। क्या फिकर हैं! फिकर आवे तो बाप को दे दो। आप सदा ओ.के.। सभीं का लक्ष्य है कि हम दीपावली के दीपक सदा जग रहे हैं और जगते रहेंगे और अपने राज्य में जाके वहाँ भी दीपावली मनाएंगे। अपना राज्य याद है ना। आया की आया

(यहाँ की दीपावली और वहाँ की दीपावली में अंतर क्या होगा - निर्वैरभाई)

वहाँ की सजावट ही न्यारी और प्यारी होगी। सजावट और प्यार, दिल का प्यार। ऐसे तो रूसा हुआ भी दीपक जगा देता है लेकिन वहाँ सब ख़ुशी-ख़ुशी से दीपक जागते, मौज मनाते, मौज ही राज्य है। यहाँ तो मज़बूरी से भी जगाते हैं। (वहाँ पर आपको दिवाली मनाने का निमंत्रण है) देखेंगे। करेंगे नहीं, देखेंगे दूर से। आप जगायेंगे, बाप देखेगा। (बापदादा वहाँ साथ में आकर दिवाली मनाएं तो और अच्छा होगा) वहाँ बच्चों का पार्ट है। अच्छा।

सभी चारों ओर के मीठे - मीठे सिकिलधे बच्चों को आज का यादप्यार और दीपावली का भी यादप्यार।

ओम् शान्ति।


15-11-13   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


कोई भी बात आये उसे बाप को देकर आप मुस्कराते रहो

सभी खुशनुमा बच्चों को देख बापदादा बहुत-बहुत खुश हो रहे हैं। वाह मेरे खुशनसीब, खुशनुमा बच्चे वाह। सभी के दिल में बापदादा समाया हुआ है। हर बच्चे के चेहरे से स्नेह की खुश्बू आ रही है। सदा हर बच्चा खुश आबाद रहने वाली आत्मायें है। बापदादा एक-एक बच्चे की मुस्कराती हुई सूरत को देख खुश है। सदा ऐसे ही मुस्कराते खुशी में नाचते बढ़ते चलो, बढाते चलो। हर बच्चे के मस्तक में बापदादा चमकते हुए सितारे को देख रहे हैं। अच्छा।

आज़ सर्व बच्चों की याद की आकर्षण बापदादा को पहुंच रही है। सदा खुश है और सदा खुश रहेंगे। कोई भी बात आये, बात बाप को दे दो और आप मुस्कराते रहो। अच्छा। आज शरीर के कारण सभी बच्चों को आहूवान से बापदादा सबसे मिलन मना रहे हैं। अच्छा। आज शरीर के कारण छोटी सी मुलाकात हो रही है। चारों और के बच्चे सुन भी रहे हैँ और नयनों से मिलन भी मना रहे हैं। बापदादा बच्चों के मिलन को देख कितने खुश होते हैं, वह हर एक बच्चा जान सकते हैं। अच्छा।

आज का ग्रुप बिशेष जो आये हैं, हाथ उठाओ, (कर्नाटक जोन के सेवाधारियों सहित 15 हजार भाई बहिनें आये हैं) जो अभी आये हैं। सभी को मुबारक है, मुबारक है, मुबारक है। अच्छा। बापदादा चारों और के बच्चे जो चात्रक हो सुन रहे हैं देख रहै हैं उन सभी को बहुत बहुत याद प्यार दे रहे हैं। आप सभी को तो सन्मुख यादप्यार मिल रहा है। लेकिन चारों और के बच्चे बहुत स्नेह पूर्वक आश लगाकर बैठते हैँ। उन आशा रखने वाले बच्चों को जैसे बच्चे देख रहे हैं वैसे बापदादा भी देख रहे हैं। सभी से बापदादा नयनों का मिलन मना रहे है। अच्छा।

निमित्त बने हुए चाहे पाण्डव हैँ , चाहे शक्तियां है, सभी सहयोगी और स्नेही बन अपना अपना कार्य कर रहे हैँ और करते रहेंगे।

(मोहिनी बहन , मुन्नी बहन 7 दिन के लिए दुबई जा रहे है) बनाया है तो जाना ही है। (आपकी मदद तो चाहिए) मदद देने के लिए बंधा हुआ है। (दादी जानकी जी ने विदेश के बहिनों की याद दी)

जिन्होंने भी यादप्यार भेजा है उन सबको बापदादा दष्टि देते हुए यादप्यार दे रहें हैं।

ओम् शान्ति।


 

30-11-13   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


प्राणप्यारे अव्यक्त बापदादा के अति स्नेही, सदा अव्यक्त मिलन की चात्रक आत्मायें, बापदादा के प्यार में समाई हुई, संगमयुगी सर्वश्रेष्ठ ब्राह्मण कुल भूषण भाग्यवान आत्मायें, ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद स्वीकार करना जी।

बाद समाचार - आज 30 नवम्बर, 2013 को अव्यक्त मिलन के यू .पी. सेवा टर्न में भारत तथा विदेश से लगभग 15000 भाई बहिनें अपने शान्तिवन में पहुँचे हुए हैं। ड्रामा की कल्प पहले की नूंध प्रमाण आज अव्यक्त बापदादा का मिलन, व्यक्त में दादी गुल्जार जी के द्वारा होना था, लेकिन आपरेशन के बाद दादी जी को काफी कमज़ोरी महसूस हो रही थी इसलिए मुम्बई से आबू आना नहीं हुआ।

आज सभी अमृतवेले से बापदादा की यादों में खोये हुए थे। बहुत अच्छा शान्त अव्यक्त वातावरण था। शाम को 4 बजे से डायमण्ड हाल में सभी अव्यक्त स्थिति द्वारा अव्यक्त मिलन की अनुभूति के लिए पहुँच गये। पहले सूर्य भाई ने विशेष योग कमेन्ट्री के साथ अव्यक्त अनुभूतियों के प्रति अपनी प्रेरणायें दी। फिर 6 से 7 बजे तक बहुत शक्तिशाली योग चला तथा अव्यक्त बापदादा की रिवाइज मुरली सभी ने सुनी व वीडियो द्वारा देखी। 7 बजे सभी दादियाँ मुख्य भाई बहिनें स्टेज पर आये, उसके पश्चात् मुम्बई में गुल्जार दादी ने बापदादा को भोग स्वीकार कराया (वीडियो कॉन्फ्रेसिंग द्वारा सभी ने पूरा दृश्य देखा) फिर सभी के प्रति गुल्जार दादी ने बापदादा का सन्देश सुनाया -:

ओम् शान्ति। आप सबकी यादप्यार लेते हुए मैं बाबा के पास वतन में पहुँची। बाबा अपने कमरे में गद्दी पर बैठे थे और मैं जब बाबा के सामने गई तो बापदादा ने बहुत मीठा मुस्कुराते मिलन मनाया और कहा आओ मेरे दिल का हार, आज किसकी याद लाई हो? मैंने कहा बाबा आज तो आपके सिकीलधे यू पी वाले बच्चे आपसे मिलन मनाने आये हैं। तो ऐसे लगा जैसे बापदादा अपने कमरे में बैठे हुए भी वहाँ नहीं हैं। जैसे बाबा सभी बच्चों को बहुत-बहुत मीठी-मीठी दृष्टि देते मिलन मना रहे थे और बैठे हुए सब बच्चे बहुत-बहुत प्यार से मिलन मना रहे थे। फिर बाबा बोले, सभी बच्चे बापदादा के दिल के हार हो। बाबा जब हर एक बच्चे को दृष्टि दे रहे थे, तो दृष्टि देते हुए ऐसा लगा जैसे बाबा एक-एक को जिसको भी देख रहे हैं ना, उनसे कुछ बोल रहे हैं। हम तो वह नहीं सुन सकी लेकिन बाबा की जो सूरत और मूरत है, वह एक-एक को जैसे गले भी लगा रहे हैं लेकिन गले लगाते हुए जैसे अपने में समा रहे हैं। यह सीन पहले देखी। फिर बाबा बोले, बच्चों का बाप से प्यार और बाप का बच्चों से प्यार यह भी संगमयुग का विशेष भाग्य है। बाप हर बच्चे को देख चाहे लास्ट है, चाहे फर्स्ट है लेकिन बापदादा हर बच्चे को ऐसे देख रहे थे जैसे कोई अपनी चीज़ होती है तो उसको कितने प्यार से देखते हैं, हाथ से ऐसे प्यार करते हैं। ऐसे बाबा भी जैसे एक-एक को दृष्टि द्वारा ही ऐसे प्यार कर रहा था, जैसे रूबरू प्यार कर रहा है और सभी को फीलिंग भी जो आ रही थी, वह यही आ रही थी जैसे बाबा हमसे सम्मुख मिल रहे हैं। सबके नयनों में पानी भरा हुआ था। गिरता नहीं था लेकिन समाया हुआ था। हम भी देख रहे थे, बाबा कैसे एक-एक बच्चे से मिलन मना रहे हैं। उसके बाद बाबा ने बोला, देखो बच्चे संगमयुग पर बाप का पार्ट चल रहा है लेकिन जानने वाले आप सिकीलधे बच्चे हैं और एक-एक को बाबा नम्बरवार ऐसी मीठी दृष्टि दे रहे थे जैसे एक-एक से कुछ बात कर रहे हैं। तो हमने बाबा को कहा बाबा आप तो बातें कर रहे हैं लेकिन हम तो सुनते नहीं। तो बाबा ने कहा, यह जो आये हुए बच्चे हैं ना, उन्हों के दिल का आवाज, दिल की आश बाबा ही जाने। एक-एक बच्चा देखो, बाबा को कैसे देख रहा है। जैसे कोई प्यासी होता है। बाबा बोले, देखो ड्रामा में यह भी नूंधा हुआ था लेकिन हर एक बच्चे के दिल का समाचार बाबा जाने, और कोई नहीं जान सकते। बाबा जाने एक-एक बच्चे के दिल में अभी क्या चल रहा है! बाप खुश भी होता है कि हर एक बच्चे का बाप से कितना जिगरी प्यार है और बाप का तो है ही। बाबा ने कहा देखो, बाबा का प्यार नहीं होता तो आप लोगों को कहाँ से ढूँढ़ा, कोई फारेन से आया है, कोई इन्डिया के भिन्न-भिन्न स्थानों से। सबको बाबा ने ढूँढ़ा ना। तो इतना बाबा का प्यार है जो मेरे बच्चे गुम हो गये थे, उनको ढूंढ करके अपने पास बुला लिया। ऐसे कहते बाबा दृष्टि देते गये, सभी सुनते हुए जैसे प्यार में समाये हुए थे। उसके बाद बाबा ने कहा बच्ची मैंने आये हुए ग्रुप में एक-एक को दृष्टि भी दी है और होवनहार बच्चे कह करके यादप्यार भी दिया है। बाबा छोड़ता नहीं है, जैसे बच्चे बाबा को छोड़ते नहीं हैं, वैसे बाबा भी बच्चों के प्यार को छोड़ते नहीं हैं और बाबा देख रहा है कि आये हुए जो बच्चे हैं, उन्हों के दिल में डबल बातें चल रही हैं। एक तो प्यार आ रहा है बस बाबा मिला, बाबा मिला, क्योंकि सीन देख रहे हैं। और दूसरी बात यह है कि समझ भी रहे हैं कि हम आये हैं, बाबा कहाँ है, मैं कहाँ हूँ। लेकिन एक-एक का प्यार बाप के दिल में समा गया है। ऐसे बाबा ने बोला फिर मेरे को कहा बच्ची अभी समय हो गया है इसलिए जाना तो होगा ही। 

देखो, बाबा ने अपने एक-एक सिकीलधे बच्चे को कहा यह भट्ठी में आये हैं ना। तो बाबा एक-एक को भट्ठी का तिलक लगाता है। तो बाबा ने तिलक लेके खड़े होकर जैसे एक-एक के मस्तक में वह तिलक लगाया। बाबा ने कहा आपकी भट्ठी का उद्घाटन हो गया। फिर जो नये आये हैं उन्हों को भी बाबा ने विशेष प्यार दिया। आज कौन आये हैं नये! (नये भाई बहिनों को खड़ा किया) नये बच्चे तो बाबा के बहुत सिकीलधे हैं। बाबा उन्हें सिकीलधा, सिकीलधा कहते हैं। तो बाबा ने आप एक-एक बच्चे को बहुत मीठी दृष्टि दी और यादप्यार भी दिया और कहा एक-एक बच्चे को मेरी तरफ से ऐसे (भाकी) करके यादप्यार देना। सभी को बाप की तरफ से भाकी पहन रहे हैं क्योंकि हमने वहाँ देखा, तो मैं यहाँ ही कर सकती हूँ। तो सभी को बाप की तरफ से मीठी मीठी भाकी। 

हैलो। हमारी मीठी दादी जानकी भी बैठी हैं, रतनमोहिनी दादी भी बैठी हैं। मधुबन वाले भी सभी बहुत स्नेह में बैठे हैं। वह शक्लें उनकी बोल रही हैं।

(दादी जानकी ने कहा) दादी क्या बताऊँ, बाबा वन्डरफुल है, आप भी कम नहीं हो। कैसे भी करके आपने हमारे दिल की भावना को, प्यार को बाबा के पास लेकर गई और बाबा ने हमारे साथ प्यार से मिलन मनाया। बाबा कहता ड्रामा में जो हो रहा है, उस सबमें कल्याण है। हम कहते बाबा आप कितने मीठे प्यारे हो। बाबा मीठा है और हमको मीठा बनाने के लिए इतनी मीठी बातें सुनाकर हमको मोह लेता है, शान्त कर देता है। दादी आपने बाबा का सन्देश सुनाकर हमारे दिल को ताकत दे दी। अभी दादी क्या बताऊँ दिल का हाल। आप बाम्बे में बैठी हैं। आप वहाँ बैठे भी बाबा को छोड़ा नहीं, हमने भी नहीं छोड़ा। बाबा को प्यार करो ना।

(गुल्जार दादी) सभी प्यार दे रहे हैं, वह बाबा देख रहे हैं। बाबा के साथ आप भी साथ-साथ याद रहती हैं। मोहिनी बहन आप बहुत अच्छी तरह से अपने को ठीक ठाक करके बैठी हैं। हम आपकी तबियत में आगे बढ़ते बढ़ते देख बहुत खुश होते हैं। जिंदा रहो, आबाद रहो।

निर्वैर भाई ने मुम्बई से सबको याद दी:- ओम् शान्ति। सभी बहिनों और भाईयों को ओम् शान्ति। जो सभा में उपस्थित हैं जो देश विदेश में सुन रहे हैं सबको ओम् शान्ति। दादी आपका शुभ संकल्प बाबा ने सुना और दादी जी को ऐसी हिम्मत भी दे दी, स्वास्थ्य भी दे दिया जो दादी खास तैयार हो करके यहाँ आपके सामने आ गई। बहुत अच्छा लग रहा है, सभी भाई बहिनों को देख करके। जो आये हैं उनको देख करके। ईश्वरीय परिवार कितना विशेष परिवार है। ईश्वरीय परिवार का संगठन कितना विशेष है। इस संगठन के फल स्वरूप ही सारे विश्व का कल्याण होना है, यही बाबा बच्चों से चाहते हैं। तो सभी को मुबारक हो, मुबारक हो। करूणा भाई को विशेष थैंक्स जो यहाँ भाईयों को भेजा जो हम यहाँ से मिल रहे हैं।

दादी जानकी ने कहा:- शुक्रिया आपका और शुक्रिया नीलू बहन का, योगिनी बहन नीलू बहन सबका शुक्रिया।

डॉ. अशोक मेहता:- ओम् शान्ति। हमारी बहुत प्यारी दादी एकदम अच्छी है और आपके सामने मिलन मना रही हैं। दादी जी एकदम स्वस्थ हैं और बहुत अच्छी रिकवरी है। दादी जी जल्दी आपके बीच पहुँच जायेंगी।

योगिनी बहन:- दादी हम ऐसे फील कर रहे हैं जैसे बापदादा यहाँ पधारे हैं। पूरा डायमण्ड हाल यहाँ दिखाई दे रहा है। दादी जानकी ने कहा बाबा ने आपको निमित्त बनाकर हम सबको मुलाकात करा दी। नीलू बहन दादी का बहुत ध्यान रखती है। (यहाँ बाबा के लिए 21 प्रकार का भोग बनाया है)

गुल्जार दादी ने कहा:- सभी भाई बहिनें जो मधुबन निवासी हैं, उन एक-एक भाग्यवान मधुबन निवासी भाई बहिनों को यादप्यार।

निर्वैर भाई:- दादी सभी की जो दिल है ना, जो सब चाहते हैं अवश्य बाबा सुन रहा है और बाबा बच्चों की बात सदा रखता है। दादी जी बिल्कुल स्वस्थ होकर मधुबन वापस आ जायेंगी। बाबा के सभी प्रोग्राम बहुत बहुत सुन्दर होंगे। दादी सभी डाक्टर्स ने दादी के स्वास्थ्य के बारे में बताया है कि स्वास्थ्य बहुत अच्छा है। दादी बहुत वर्षों तक ईश्वरीय सेवा का कार्य आगे बढ़ायेंगी।

गुल्जार दादी:- आप सबको दुआओं से, आप सबके शुभ संकल्प से, बाबा की मदद से हम जल्दी से जल्दी ठीक होके मधुबन पहुचेंगी। दादी आपको गले लगा रहे हैं। 

विश्व के सभी भाई बहिनों प्रति बड़े भाईयों वा दादियों का सन्देश:-

रमेश भाई:- बाबा ने हम सबको "नथिंगन्यु" का पाठ पक्का कराया है। तो नथिंगन्यु के हिसाब से ही आज का प्रोग्राम चला। मुझे यह बहुत अच्छा लगा। जैसे यहाँ प्रोग्राम होता था तो दूसरे सेन्टर पर देखते थे, ऐसे आज यहाँ वालों ने मुम्बई से सारा प्रोग्राम देखा। करनकरावनहार बाबा का यह सीन जो देखा वह ड्रामा प्लैन अनुसार बाबा ने बहुत अच्छा अनुभव कराया। बाबा कहते रहे हैं जो अव्यक्त स्थिति में रहकर बाबा को याद करेंगे तो बाबा अव्यक्त अनुभव करायेंगे। तो आप सबको भी आज के दिन की बहुत बहुत बधाईयाँ हो। बाबा के ज्ञान के हिसाब से कोई नया नहीं है। कल्प पहले वाले जो भी बाबा के बच्चे यहाँ आये हैं, उन सब नये पुराने बाबा के बच्चों को बधाईयाँ मुबारक हो।

बृजमोहन भाई:- हमारा प्यारा बाबा कल्याणकारी है और समय के अनुसार हमको मंज़िल के नजदीक ले जाने के लिए प्यार कर रहा है। हम 44 वर्ष से इस आदत मे पड़ गये हैं कि बाबा आयेंगे और हम उनसे मिलेंगे। बाबा ने बताया है मैं किसलिए आता हूँ? आप ऊपर चलें। तो आज का अनुभव कितना अच्छा था। हम सब गुल्जार दादी के माध्यम से बाबा से मिले। उन्होंने बताया कैसे बाबा हर एक बच्चे से बात कर रहे हैं, बाबा हर बच्चे से मिल रहे हैं, उनको शक्ति दे रहे हैं, सन्तुष्ट कर रहे हैं और दादी ने जो यह बताया कि हर एक की आँखें गीली थी। तो सचमुच अनुभव हो रहा था कि हम सबकी आँखें गीली हो रही हैं। समय के अनुसार बाबा यही चाहते हैं कि हम अव्यक्त मिलन ऐसे मनायें जैसे हम सामने मना रहे हैं। इतने सारे भाई बहन जो जगह जगह से आये हैं, उनको रिंचकमात्र भी महसूस न हो कि बाबा नहीं आये! तो बाबा ने बहुत विचित्र रूप से मिलन मनाया। यह भी अनुभव बहुत अच्छा था। सारे विश्व के भाई बहन टेलीविजन से ही देखते हैं। बहुत अच्छा अनुभव कराने वाला यह मिलन था। बापदादा जो इशारा दे रहे हैं समय अनुसार हमें इस प्रकार से मिलन मनाना होगा, और शान्ति की शक्ति की जो मुरली सुनी, उसका अनुभव हम सबको करना होगा। हम सब आगे बढ़ते रहें और यह कार्य जल्दी से पूरा करें।

दादी रतनमोहिनी:- अभी तो हम सबने अनुभव किया, बाबा देखो बच्चों की दिल कैसे भी पूरी कर लेते हैं। तो बाप हम बच्चों पर कितना रहमदिल है। बाबा ने समझा बच्चे आये हैं और ऐसा न हो बच्चे निराश होकर जाएं, बाबा सदा बच्चों की आशाओं को पूर्ण करते हैं। बाबा ने जो हमारे में आशायें रखी हैं, बाबा हमें जल्दी-जल्दी सम्पन्न बनाने चाहते हैं। बाबा को इतना प्यार से याद रखो, इतना बाबा की बातों को स्वयं में समाओ जो बाबा कहते हैं, जैसा कहते हैं, ऐसा हम जल्दी से जल्दी सम्पन्न बनकर बाबा को प्यार का सबूत दें, तो देखो बाबा हमको कितना प्यार से गोदी में बिठाकर उड़ाते रहेंगे। इन्हीं शुभ भावनाओं के साथ आज के दिन को याद करते हुए, स्वयं को सम्पन्न बनाने का सम्पूर्ण पुरुषार्थ करते हुए सदा बाप की शुक्रिया मानते चलें।

दादी जानकी:- सारी विश्व हमारे सामने हैं, हम विश्व के सामने हैं। यह वन्डरफुल ड्रामा है। मैं बाबा का कितना शुक्रिया मानूं। मेरा बाबा, मीठा बाबा आपने हमारे जीवन की यात्रा सफल करने के लिए आदि से अब तक कितना साथ दिया है। बाबा ने वरदान में कहा था बच्ची सदा साथ है और साक्षी हो करके पार्ट बजा रही हो। यह दो शब्द जीवन यात्रा में इतना साथ दे रहे हैं, बाबा मेरे साथ हैं, कोई मिनट सेकेण्ड भी ऐसा नहीं है, अकेली नहीं हूँ। छोटी सी आत्मा है, उसमें 84 जन्मों का पार्ट भरा हुआ है।

जो आज मुरली में बाबा ने सेवा के प्रकार बताये, सभी सेवायें करने का बाबा ने भाग्य दिया है जो आज यह नहीं लगता कि इस आत्मा से बाबा ने यह सेवा नहीं कराई है। जो भी बाबा डायरेक्शन देता है, समझाता है, वह जाकर किसको नहीं समझाया तो बाबा नाश्ता करने नहीं देगा। ज्ञान का भोजन कानों से सुना है, मुख में ब्रह्मा भोजन खाया है, उसकी शक्ति हम सबको चला रहा है। हमारा साथी, सहारा, सहयोगी बाबा है, बाबा का साथ न होता तो हम अकेली आत्मा परमधाम में कैसे जाती।

जैसे घर जाना है, साथ में जाना है, बाबा के साथ जायेंगी, बारात में नहीं जायेंगी। साथ में जाना रॉयल्टी है। बाबा मेरा साथी है, मैं साथ जायेंगी। अभी टाइम थोड़ा है, टाइम की बहुत वैल्यु रखना है कोई भी समय विनाशकाल आया कि आया। हम विनाशकाले निश्चय बुद्धि से विजयी होकर वैजयन्ती माला में आ रहे हैं। निश्चय बुद्धि से, निश्चित भावी पर अडोल रहकर सुख, शान्ति, आनंद, प्रेम सम्पन्न जीवन बना रहे हैं। आप सबने अनुभव किया, बाबा कुछ भी मिस करने नहीं देता है। यह भी बाबा की कमाल है। अच्छा।

ओम् शान्ति।


 

15-12-13   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


प्राणप्यारे अव्यक्त मूर्त मात पिता बापदादा के अति लाडले, सदा बापदादा के प्यार में समाये हुए देश विदेश के सर्व ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न याद स्वीकार करना जी।

बाद समाचार- आप सभी आज विशेष बापदादा का आह्वान करने निमित्त अपने-अपने स्थानों पर चात्रक बन साकार में अव्यक्त मिलन मनाने की आश लगाकर बैठे होंगे। लेकिन ड्रामा की भावी, बापदादा समय प्रति समय हम बच्चों की स्थिति को अचल अडोल बनाने और अव्यक्त वतनवासी बन अव्यक्त रूप से मिलन मनाने का विशेष इशारा देते आ रहे हैं तो उसी प्रमाण आज हम सब अनुभव कर रहे हैं। दादी गुल्लार का स्वास्थ्य ठीक होते भी काफी कमज़ोरी महसूस कर रही थी, फिर भी बहुत हिम्मत करके सभा के बीच में पधारी और बापदादा के आह्वान का गीत भी बजा, लेकिन थोड़े समय में दादी ने उस आलमाइटी को स्वयं में धारण करने की असमर्थी महसूस की, तो दादी को स्टेज से कमरे में लेकर गये। फिर हम सभी बापदादा के अवतरण का पिछला वीडियो देखते रहे। जो आप डायरेक्ट देखने, सुनने वालों ने भी देखा होगा। सभी दादियाँ और मुख्य भाई स्टेज पर योग कराते रहे। गुजरात के भाई बहिनों की सेवा का टर्न था, देश विदेश से करीब 20-21 हजार भाई बहिनें शान्तिवन में पहुंचे हुए थे। दोनों हॉल फुल थे। सभी बहुत एकाग्रचित हो, पावरफुल वायुमण्डल में बापदादा के अव्यक्त महावाक्य वीडियो द्वारा सुन रहे थे। थोड़ी देर के बाद फिर से सन्देश आया कि दादी जी सभा में आ रही हैं। दादी जी फिर से जब सभा में पधारी तो सारा हाल तालियों से गूंजने लगा। सभी खुशी में झूमने लगे। फिर दादी ने बापदादा को भोग स्वीकार कराया और बापदादा सभा के बीच आ गये और बहुत प्यार से हाथ लहराते सभी को वरदानी दृष्टि दी। उसके बाद मधुर महावाक्य उच्चारण किये।

"सदा खुशनुमा रहने वाले खुशकिस्मत बच्चों को बहुत-बहुत-बहुत-बहुत यादप्यार। सदा खुश रहना और खूब खुशी बांटना। एक एक को बापदादा विशेष प्यार दे रहे हैं और सदा सर्व के प्यारे देहभान से न्यारे बाप को दिल में समाते हर कदम उठाना। देश चाहे विदेश सबके, एक एक बच्चे को बापदादा का यादप्यार स्वीकार हो। सर्व के साथ गुजरात निवासियों को भी सारे विश्व की आत्माओं के साथ यादप्यार।"

ओम् शान्ति।


 

31-12-13   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


पुराने वर्ष की विदाई के साथ स्वपनमात्र भी जो कमज़ोरी है उसे छोडने तथा उमंग-उल्हास से गुण धारण करने का दृढता सम्पन्न संकल्प करके सदा वाह वाह रहना, रोज अमृतवेले उस संकल्प को दोहराना तो बापदादा की एक्स्ट्रा मदद मिलेगी

बापदादा सभी बच्चो को देख खुश हो रहे है। मैजारिटी सभी बच्चे खुशनुमा दिखाई दे रहे है। हर एक के दिल मे बापदादा समाया हुआ है। जैसे बच्चे स्नेह के प्लेन मे पहुंचे हुए है बापदादा भी हर बच्चे की स्नेही-मूर्त देख खुश हो रहे है। वाह स्नेही बच्चे वाह! हर एक बच्चे के मस्तक मे चमकती हुई खुशी दिखाई दे रही है। तो हर एक खुशनुमा बच्चे को देख बाप भी दिल मे गीत गा रहे हैं वाह बच्चे वाह! हर एक के मस्तक मे चमकती हुई बिन्दी आत्मा दिखाई दे रही है। हर एक के दिल मे दिलाराम दिखाई दे रहे हैं। बापदादा भी हर बच्चे को देख देख खुश हो रहे है और दिल मे गीत गा रहे है वाह बच्चे वाह! हर एक के दिल मे स्नेह समाया हुआ है।

सभी आज पुराने वर्ष को विदाई दे नया वर्ष नयनो मे समाया हुआ है। बापदादा पूछते है सभी ने आज के दिन अपने मे कोई न कोई विशेषता धारण कर और साधारणता को छोडा है? नये वर्ष मे अपने मे कोई न कोई विशेषता जो पुरुषार्थी जीवन मे आवश्यक है, वह संकल्प में, स्मृति मे लाया है? पुराना छोड नया धारण किया? हर एक ने अपने संस्कारो मे कुछ नवीनता सोची है? या धारण की है? छोडना भी आता है, धारण करना भी आता है।

बापदादा को हर एक के चेहरे में अभी इस समय स्नेह की, मिलन की झलक दिखाई दे रही है। आप सभी ने भी आज के सारे दिन मे कुछ छोडा, कुछ धारण किया? बापदादा मैजारिटी बच्चो को इस समय खुशनुमा देख रहे है और गीत कौन सा गा रहे है? वाह बच्चे वाह! आज के दिन हर एक बच्चे को कुछ छोडना भी है और कुछ नया गुण धारण करना है। सोचो, क्या छोडना है और क्या लेना है? बापदादा सभी बच्चो के चेहरे मे सदा बेफिक्र बादशाह की झलक देखने चाहते है। अटेबान है लेकिन आज के विशेष दिन दिल मे कुछ छोड़ना भी है, कुछ धारण करना भी है। कर सकते है? हाथ उठाओ जो कर सकते है नहीं, करेगे? अभी से सभी के मस्तक मे उमंग की लहरे देख रहे है। तो यह उमंग अभी का सदा रहे, यह विशेष ध्यान रखना। अपने दिल मे कोई न कोई विशेष उमंग लाओ और यह उमंग सदा चेक करना कि उमंग, उमंग रहा या बदली हुआ? कभी भी बापदादा यही चाहते है हर बच्चे के सूरत मे उमंग मे सदा कोई न कोई गुण धारण करने का उमंग हो, अगर गुण धारण करेगे तो अवगुण तो खत्म हो जायेगा ना। तो बापदादा खुश है कि सभी बच्चे कोई न कोई विशेष कमज़ोरी जो अब तक चाहते नही लेकिन आ जाती है, उसी संकल्प को, धारणा को आज और अभी के दिन दृढ संकल्प द्वारा छोड सकते हो? सकते हो? जो छोड़ सकते है वह हाथ उठाओ। अच्छा हाथ तो उठा रहे है, हिम्मत रखी है और मदद बाप की साथ है। सभी ने अपने दिल से जो छोडने चाहते है लेकिन संकल्प मे रह जाती है, उसको आज दृढ़ संकल्प से बाप को दे सकते हो? दे सकते हो? हाथ उठाओ। दे सकते हो फिर वापस नही लेना। उसके लिए बापदादा विशेष अमृतवेले विशेष मदद देगे क्योकि बापदादा को हर बच्चे से दिखाई देता है कि कोई बात छोडने चाहते है लेकिन. लेकिन मे तो बहुत बाते है। लेकिन आज जो भी जिसमे कमज़ोरी हो, नही है तो मुबारक है। अगर जरा सा स्वपनमात्र भी हो तो आज के दिन दृढसंकल्प से बाप को दे दो। देना आता है ना! संकल्प करो, यह दृढसंकल्प आज का अगर किया तो आज का दृढ संकल्प करने मे आप हर एक को एकस्ट्रा मदद मिलेगी। सुबह अमृतवेले, अमृतवेला करने के बाद संकल्प को चेक करना और दिल से दृढ संकल्प करना तो बापदादा की एकस्ट्रा मदद मिलेगी। सच्ची दिल से, ऐसे नही देखता हूँ होता है या नही होता है! सच्ची दिल से अगर संकल्प करेगे तो कुछ न कुछ एकस्ट्रा मदद मिलेगी क्योंकि नया वर्ष शुरू हो रहा है। बापदादा चाहते है हर बच्चा नया वर्ष आरम्भ होते सवेरे उठके अपने दिल से, कहने से नही, दिल से पुरुषार्थ करेंगे तो मदद भी मिल जायेगी। दृढ संकल्प करो कल सुबह को, दृढता सम्पन्न छोडने का संकल्प करना क्योकि बापदादा देखते है संकल्प सब करते है, लेकिन संकल्प के साथ रोज उस कमज़ोरी को बाप को देंके दृढ़ संकल्प करना, उमंग उल्हास का गुण धारण करके करना ही है, यह दृढ़ संकल्प करके, करके ही दिखाना, करना ही है, इसमे अगर कोई की मदद चाहिए, महारथियो की तो मदद भी ले सकते हो।

आज का दिन दृढ़ता का दिन मनाओ। होना ही है, करना ही है। करेगे नही, करना ही है, इसमे बापदादा आपके मददगार है। उमंग को ढीला नही करना, रोज दोहराना। बाप को दे दो कमज़ोरी, दी हुई चीज़ वापस नही ली जाती। बापदादा देख रहे है कि मैजारिटी बच्चे चाहते है लेकिन अपनी कमज़ोरी बाप को दे दो, दी हुई चीज़ कभी वापस नहीं ली जाती। बापदादा खुश है कि सभी बच्चे मैजारिटी चाहते है लेकिन चाहना के साथ जो शक्ति चाहिए उस शक्ति के तरफ अटेंशन कम देते है। हो जायेगा. यह बीच मे विध्न डालता है। दृढता संकल्प के साथ मे रखो। तो आज के दिन पुराना वर्ष जा रहा है, नया आयेगा, तो हर एक कुछ न कुछ दृढसंकल्प अपने दिल मे करो, छोडना है अपने दिल मे सोचो लेकिन रोज अमृतवेले के बाद उसको चेक करो तो जो संकल्प किया वह दृढ है? क्योकि इसमें अलबेलापन भी आता है। तो आज के दिन कोई न कोई श्रेष्ठ धारणा अपने दिल में करो और रोज अमृतवेले उसको दोहराओ, दिया हुआ वापस नही लेना क्योकि बापदादा अभी आगे चल करके जो समय आने वाला है, उस समय को देख हर एक संकल्प मे हर रोज दृढ़ता चाहिए, रिजल्ट देखो जो संकल्प किया वह कहाँ तक पूरा हुआ? अगर परसंटेज भी हल्की हुई, पहले उमंग बहुत होता है पीछे थोडा- थोडा ढीला हो जाता है वह ढीला होने नही देना। करके ही दिखाना है, यह दृढ़ संकल्प करना। मास्टर सर्वशक्तिवान है साधारण नही है। तो कल के दिन कोई न कोई दृढ़ संकल्प सामने लाना और रोज अमृतवेले दोहराना, चेक करना। बापदादा की मदद लेना।

तो सभी खुशनुमा अभी तो देखने मे आ रहे हैं। अभी- अभी सभी खुशनुमा है, हाथ उठाओ। तो जैसे अभी है ना, वैसे अपनी स्थिति को दोहराना। अभी बापदादा का साथ है, ऐसे दिल मे सदा साथ रखना। दिल का दिलाराम है। तो सभी आज कोई न कोई स्व-उन्नति अपने हिसाब से चेक कर संकल्प मे रखो और रोज उसको सुबह अमृतवेले के बाद दोहराना। अच्छा।

सभी दिलखुश है ना! जैसे अभी दिलखुश हैं, अभी दिलखुश हैं ना! है खुश हाथ उठाओ। तो यह समय याद करना। जैसे अभी दिलखुश है इस दिलखुश समय को दोहराते रहो। और बापदादा सभी बच्चो का फोटो निकालेगा। वह फोटो साधारण नही होता है। तो सदा खुश, सदा खुश रहेगे? पक्का? कितना पक्का? खुशी को जाने ही नही देना ना। खुश रहना, खुशी बांटना। ब्रह्माकुमार, ब्रह्माकुमारिया हो। आपका टाइटिल क्या है। तो यह याद रखना ब्रह्माकुमार हूँ या ब्रह्माकुमारी हूँ। साधारण नही हूँ। ब्रह्मा बाप को जाना, भले देखा नही लेकिन जान तो लिया ना। मेरा बाबा, जितना बाप मे मेरापन लाएंगे, मेरा बाबा मेरा बाबा, उतना सहज याद होती जायेगी क्योकि मेरी बात कभी भूलती नही है। तो बाप को मेरा बनाओ और मेरा भूले नही। तो बापदादा यही चाहते है, सुबह को उठके अपनी शक्ल देखना, मन की शक्ल, यह शक्ल नही। मन की शक्ल देखना, बाप के दिलपसन्द है? अच्छा। सभी बच्चो को देख बापदादा भी खुश होते है, वाह बच्चे वाह! सब वाह वाह हो ना। हो? वाह वाह हो? दो-दो हाथउठाओ। तो सदा रहेंगे या अभी? सदा वाह वाह। बाप सदा वाह वाह लगता है ना तब तो याद करते हो। तो बाप वाह वाह तो बच्चे भी वाह वाह। सुबह को उठके याद करना मै कौन सा बच्चा हूँ? वाह वाह बच्चा हूँ। अच्छा। सदा वाह वाह रहेगे ना! इसमे अटेंशन देना है इसका हाथ उठाओ। सुबह को उठते ही यह वाह वाह शब्द याद करना। बाप देखे वाह वाह। अच्छा।

अभी सभी आये हुए बच्चो को बापदादा विशेष दृष्टि दे रहे है किस बात के लिए? वाह वाह रहने के लिए। रहेंगे? रहेंगे? हाथ उठाओ। रहेगे। तो वाह वाह शब्द भूलना नहीं। यह सभा मे हाथ उठाया यह भूलना नही। मै कौन? वाह वाह। इजी है ना। हूँ ही वाह वाह, तो क्या होगा? खुश। कुछ भी बात हो जाए, आई और गई आप क्यो उसको पकड़ लेते हो? कोई बात ठहरती नही है, चली जाती है। आप क्यो पकड़ लेते हो? तो कल से रोज अमृतवेले अपना चेहरा देखना, अन्दर का चेहरा, बाहर का नही। चेक करना वाह वाह है? क्यो? बापदादा वाह वाह तो बच्चे क्या होगे? वाह वाह! बस वाह वाह शब्द याद रखना। अगर कभी मूड आफ हो ना, वाह वाह शब्द याद रखना। अच्छा।

बापदादा मिला ना! बाप को भी बच्चो के सिवाए चैन नही आता। बापदादा सारे परिवार को अमृतवेले चक्कर लगाते दृष्टि देते है। बापदादा को चक्कर लगाने मे कितना टाइम चाहिए? क्योकि बच्चो से प्यार है ना! तो रोज अमृतवेले के बाद देखना बापदादा चक्कर लगायेगा, देखेगे सभी को। तो क्या दिखाई देगे? वाह वाह! यह वाह वाह शब्द भूलना नही। वाह वाह! अच्छा - जो भी बच्चे जहाँ भी है, बापदादा सभी को वाह वाह बच्चे कह करके चक्र लगाके देख रहा है। तो अमृतवेले उठके सदा याद करना, मै कौन? वाह वाह बच्चे। कोई भी बात हो ना, वह वाह वाह मे समा देना। बात नही रखना। बाप और आप बस। अच्छा। गुडनाइट।

आज बापदादा ने गुडनाइट की। आप आपस में गुडनाइट करके सोना। सभी बच्चो को जो जहाँ बैठे है, जहाँ चल रहा है, लेकिन सभी को बापदादा देख रहा है। कितने मे चक्कर लगा सकते है। सभी को चारों तरफ के बच्चों को बापदादा गुडनाइट कर रहे है।

सेवा का टर्न महाराष्ट्र का, महाराष्ट्र आंध्र और वाम्बे से 13 हजार आये हैं:- अच्छा है नाम ही महाराष्ट्र है तो महान ही होगे ना। हैं सिर्फ थोड़ा- थोड़ा भूल जाते है, बाकी हैं। अच्छा गुडनाइट। आप जाके खाके सोना, बाकी गुडनाइट याद रखना।

डबल विदेशी भाई बहिनें और सिंधी भाई वहिने भी आये हैं, करीब 500:- देख लिया। बहुत अच्छे स्नेही है। सहयोगी भी है, स्नेही भी है। अच्छा।

पहली बार वहुत आये हैं:- (बापदादा ने हाथ हिलाके सभी को दृष्टि दी)

अच्छा, चारो ओर के देश विदेश सभी को बापदादा सामने से यादप्यार दे रहे है। बापदादा के सामने एक सेकण्ड मे सभी इमर्ज हो जाते है, तो सभी तरफ बापदादा चक्कर लगाते सारे ब्राह्मण परिवार को यादप्यार दे रहे है।

नीलू बहन से:- इसने अच्छी सेवा की है। इसकी सेवा का लाभ सभी को मिल रहा है। सारे सेन्टर्स के ब्राह्मणो को मिल रहा है, और प्यार से करती है। प्यार इसके दिल में सभी के लिए बहुत होता है। (आप आते रहो, हम प्यार से सेवा करते रहेगे) ठीक है। खुश तो है! सदा खुश है। 

मोहिनी वहन का कल जन्म दिन है:- मुबारक हो। आगे बढने की मुबारक हो।

जो भी आये है सभी को खास मुबारक है। 

निवैंर भाई से:- सभी ने अच्छी सेवा की। सेवा का मेवा सबको मिल रहा है। 

रमेश भाई से:- (नारी शक्ति पर सीरियल बनाया है) ठीक है, देखेगे। (बहुतो ने याद दी है) जिसने याद दिया है उन सबको नाम लेके कहना बापदादा ने याद दी है। 

डा. बनारसी भाई से:- इसने भी रथ की सेवा बहुत अच्छी की है। दिल से सेवा करते हो, यह भी सबको भासना आती है। पेशंट को भासना आती है।

ओम् शान्ति।


 

18-01-14   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


ब्रह्मा बाप की विशेष शिक्षा - बापदादा दोनों के स्मृति स्वरूप बन, फॉलो फादर करो"

आज के दिन सभी के मन में विशेष ब्रह्मा बाप की याद समाई हुई है। आज के दिन विशेष यादगार है ब्रह्मा बाप के साकार से अव्यक्त रूप में पार्ट बजाने का, तो अमृतवेले से लेके बापदादा ने देखा हर बच्चे के मन में विशेष ब्रह्मा बाप आँखों में समाये हुए थे। आज के दिन ही यादगार में ब्रह्मा बाप अव्यक्त रूप में पार्ट बजाने के निमित्त बने। साकार रूप में बाप के साथ मिलन मनाने वाले बच्चे थोड़े थे, उन्हों के मस्तक में ब्रह्मा बाप के चरित्र और बोल, वरदान स्मृति में हैं। भल वह थोड़े थे अभी वृद्धि ज्यादा है लेकिन अभी भी अव्यक्त रूप में पालना दे रहे हैं। ब्रह्मा बाप को याद करते साकार रूप में पार्ट बजाने की प्रेरणा लेने वाले, साथी बनने वाले थोड़े थे लेकिन अब आप सब साथी बने हो। भले साकार रूप में नहीं देखा लेकिन अब अव्यक्त रूप में पालना ले रहे हैं। तो ब्रह्मा बाबा के अव्यक्त रूप में पालना लेने वाले हाथ उठाना। नहीं, साकार में नहीं थे, अव्यक्त में आये हैं वह हाथ उठाओ। अव्यक्त ब्रह्मा अब भी कितनी पालना दे रहे हैं, अव्यक्त रूप में। शिव बाप तो साथ में है लेकिन ब्रह्मा बाबा भी अभी आकार रूप में पालना दे रहे हैं क्योंकि ब्रह्मा बाप का साकार तन में होने कारण स्थापना में बहुत अच्छे से अच्छा पार्ट बजाया, ब्रह्मा बाप के साथ ब्राह्मण भी थे, जो ब्रह्मा के समय साकार में थे, वह हाथ उठाना। थोड़े थे। अभी आये हुओं में थोड़े हैं और भी हैं जो टर्न बाई टर्न आते हैं। 

तो आज ब्रह्मा बाप के दिन अमृतवेले से सभी के दिल में शिवबाबा के साथ ब्रह्मा बाप याद रहा है। साकार में ब्रह्मा बाप की पालना लेने वाले हाथ उठाना। लम्बा उठाओ लम्बा। थोड़े हैं, थोड़े हैं। चलो आगे अभी अव्यक्त ब्रह्मा की पालना ले रहे हैं इसीलिए अपने को कहलाते हो ब्राह्मण। साकार ब्रह्मा के साथ पार्ट बजाना यह भी भाग्य की निशानी है लेकिन अब भी सभी बच्चों की बापदादा दोनों मिलके सेवा कर रहे हैं। कितने भाग्यवान हैं। बापदादा बच्चों का भाग्य देख वाह बच्चे वाह ! का गीत गाते हैं। लेकिन अब भी दोनों ही मिलके बापदादा दोनों ही बच्चो की सेवा कर रहे हैं। तो ब्रह्मा बाप की पालना का विशेष पार्ट है, फालो बापदादा दोनों को करो क्योंकि सभी दिल से याद करते हैं ब्रह्मा बाप को और साथ-साथ आज के विशेष दिन पर सभी के मन में अमृतवेले से लेके बापदादा दोनों की शिक्षायेँ बार-बार स्मृति में आती रही हैं। ब्रह्मा बाप की विशेष शिक्षा है - स्मृति स्वरूप बापदादा के बनो। अकेले बाप भी नहीं, अकेले ब्रह्मा बाप भी नहीं। दोनों को याद करो। दोनों की पालना आगे से आगे बढ़ा रही है। तो आज विशेष दिन के हिसाब से विशेष ब्रह्मा बाप की याद सबके दिल में है और फालो फादर कर रहे हैं क्योंकि साकार में आपके समान ब्रह्मा बाप भी रहा। तो ब्रह्मा बाप सदैव कहता है बापदादा दोनों को फालो करो। जैसे ब्रह्मा बाबा साकार में रहते, साकार में पार्ट बजाते बच्चों से भी और बाहर की सेवा में भी, ऐसे आप भी फालो ब्रह्मा बाबा करो। और बापदादा ने देखा बच्चे दोनों को फालो कर चल रहे हैं। बापदादा दिल में रोज अमृतवेले उन सिकीलधे बच्चों को, जो फालो करने वाले हैं उन्हों को विशेष यादप्यार देते हैं। वाह बच्चे वाह ! का वरदान देते हैं। 

तो आज के दिन जैसे ब्रह्मा बाप की विशेषता देखी है या सुनी है, ऐसे ही फालो कर रहे है हैं ना ! ब्रह्मा बाप की आप जैसे साकार में होते सर्व सम्बन्धों में आते प्रैक्टिकल लाइफ सुनी या देखी, तो ब्रह्मा बाप ने आज विशेष बापदादा दोनों को फालो करने वाले बच्चों को सामने लाके विशेष यादप्यार दी है। तो ब्रह्मा बाप की याद स्वीकार की ! ब्रहुत-बहुत दिल से प्यार दिया है। प्यार माना फालो फादर का वरदान मिलना। तो सब बापदादा को फालो कर रहे हैं ना। कर रहे हैं हाथ उठाओ। भले देखा नहीं ब्रह्मा बाप को साकार में लेकिन चरित्र सुनकर ब्रह्मा बाप से दिल में मिलन मनाते फालो कर रहे हैं। ब्रह्मा बाप भी बच्चों पर खुश है। तो फालो को कभी नहीं छोड़ना, बाप दादा दोनों को फालो करो क्योंकि ब्रह्मा बाप ने आप ही जैसा साकार रूप में पार्ट बजाया और पास हो गये। आज का यादगार ब्रह्मा बाप के पास होने का है। फालो फादर है ना। है? फालो करते हो ब्रह्मा और शिवबाबा को? जो फालो कर रहे हैं वह हाथ उठाओ। अच्छा सभी उठा रहे है हैं। बहुत-बहुत बधाई हो, बधाई हो। 

आज अमृतवेले अव्यक्त ब्रह्मा बाप ने विशेष दिल से अति स्पेह रूप से एक एक बच्चे को बहुत स्नेह से इमर्ज कर, साकार में इमर्ज कर बहुत यादप्यार दिया है। आपने देखा इतना प्यार साकार रूप में बाप देता जो देखते ही दिल में सम्पूर्ण बनने का उमंग-उत्साह आ जाये। तो आप सबके मन में ब्रह्मा बाप समान साकार में पार्ट बजाने का स्मृति में रहता है ना ! देखा नहीं, सुना तो है ना ! ब्रह्मा बाप ने साकार में क्या क्या किया। कैसे प्रीति की रीति निभाई। सेवा भी की प्रीति की रीति भी निभाई। फालो फादर करने वाले हो ना ! हाथ उठाओ जो करने वाले हैं, कर रहे हैं। कर भी रहे हैं, कर रहे हैं क्योंकि ब्रह्मा बाप से सबका प्यार है। भले साकार में नहीं देखा लेकिन ब्रह्मा बाप की पालना सुनते ही फालो करने का संकल्प दिल में आता है। 

तो आज ब्रह्मा बाप का विशेष यादगार दिन है और ब्रह्मा बाप ने सभी बच्चों को हर जोन को इमर्ज किया। जोन में तो आप सब होंगे ना। तो एक एक को यादप्यार दिया। याद मिली? हाथ उठाओ। बहुत प्यार से याद किया वाह बच्चे वाह ! सिकीलधे बच्चे वाह ! और अभी भी ब्रह्मा बाप तो अव्यक्त रूप में मिलते रहते हैं। तो सभी बापदादा के पालना में चल रहे हैं ना ! कि कभी-कभी मिस भी करते हैं? जो चल रहे हैं, अटेन्शन है, ब्रह्मा बाप और शिव बाप दोनों में फालो करने का उमंग उत्साह है वह हाथ उठाओ। अच्छा। भले ब्रह्मा बाप को कई बच्चों ने देखा नहीं है लेकिन जानते तो हैं ना हमारा बाप। ब्रह्मा बाप को याद करते सहज साकार में पालना में ताकत आती है। कईयों को मुश्किल लगता है ना ! आज की दुनिया में फालो करना मुश्किल भी लगता है लेकिन ब्रह्मा बाप ने कितना पार्ट एक्यूरेट बजाया। ऐसे ही फालो फादर। ब्रह्मा बाप ने भी तो सामना किया लेकिन पास हो गये। तो आप सबका भी यह दृढ़ संकल्प है कि अन्त तक पार्ट बजाते पार्ट में पास होना ही है, हुआ ही पड़ा है। हुआ पड़ा है कि होना है ! हुआ पड़ा है निश्चय है ना ! हमारी विजय पाने की मौसम है, संगमयुग की विशेषता है। तो समय की विशेषता को यूज करते चलो। वरदान है संगमयुग को, बापदादा को फालो करने का। तो सभी वरदान यूज करते हैं, हाथ उठाओ। ब्रह्मा बाप और शिव बाप, बापदादा का वरदान चला रहा है। 

आज तो ब्रह्मा बाप का यादगार दिन है। तो सुबह से लेके ब्रह्मा बाप को सालों साल साकार में पालना करने का अटेन्शन रहा ना। ब्रह्मा बाप ने कैसे किया। कितना प्यार निराकार बाप से लिया और दिया। तो आज ब्रह्मा बाप को देखने वाले तो कम हैं लेकिन जिन्हों ने ब्रह्मा बाप को साकार में देखा वह लम्बा हाथ उठाओ। अच्छा। यह सब, मैजारिटी यह तरफ (बहिनों की तरफ) पीछे आये हैं। हाँ जो ब्रह्मा बाप के समय में आये वह हाथ उठाओ। पीछे आने वाले हाथ नहीं उठा रहे हैं। तो आज ब्रह्मा बाप ने विशेष सभी बच्चों को चाहे पुराने चाहे नये दोनों को बहुत-बहुत दिल से याद दी है। आ गये ब्रह्मा बाप सामने। सामने आ गया, हाथ उठाओ। सभी के दिल में आ गया क्योंकि चित्र तो सबने देखा है। 

तो आज का दिन याद तो साथ-साथ बापदादा दोनों आते हैं लेकिन आज विशेष दिन के कारण जिन्होंने पालना ली है ब्रह्मा बाप द्वारा उन्हों को याद ज्यादा आती है। तो ब्रह्मा बाप ने जो साथ रहे, प्रैक्टिकल पालना ली उन्हों को विशेष याद सिर पर हाथ घुमाके ऐसे करते दी है, दी तो सभी को है लेकिन पहले उन्हों को दिया फिर सभी को दिया। तो आज ब्रह्मा बाप का दिन होने के कारण विशेष ब्रह्मा बाप की याद आप हर एक को ब्रह्मा बाप ने दी है। अच्छा। अब तो समय हुआ है, आज कौन मिलना है

सेवा का टर्न इन्दौर जोन का है, होस्टल की कुमारियां भी आई हैं, टोटल 7 हजार आये हैं:- बहुत अच्छा। बहुत करके इन्दौर वाले आये हैं। इन्दौर वाले हाथ उठाओ। मुबारक हो। अच्छा है। सन्देशी जब भी वतन में जाती है तो ब्रह्मा बाप खास बच्चों को वाह बच्चे वाह करके याद करते हैं। अच्छा - इन्दौर वाले सब पुरुषार्थ में आगे से आगे हैं ना ! कोई पीछे नहीं रहना। पीछे रहने वालों को प्राप्ति भी तो पीछे होगी ना, इसलिए सदा नम्बरवन। हमेशा हर कार्य में नम्बरवन जाना ही है। चाहे अभी इन्दौर जान है लेकिन आये तो सभी जोन हैं तो खास आज इन्दौर को और सभी को ब्रह्मा बाप की तरफ से विशेष यादप्यार है। इन्दौर वाले हाथ उठाओ। बहुत अच्छा पार्ट बजाया, सर्विस का फल स्वयं भी लिया औरों को भी दिया, अच्छा किया। 

डबल विदेशी 400 आये हैं:- खास डबल विदेशियों को डबल यादप्यार स्वीकार हो। बापदादा को विश्व कल्याणी प्रसिद्ध करने में विदेशी निमित्त बने हैं। पहले भारत कल्याणी थे अभी विश्व कल्याणी नाम प्रसिद्ध है। तो विदेश ने कमाल की ना ! बापदादा भी विशेष विदेशी बच्चों को दिल से आफरीन देते हैं। पहचान तो लिया लेकिन सेवा भी कर रहे हैं। विदेश की सेवा हमेशा सुनते रहते हैं। अच्छे उमंग-उत्साह से आगे बढ़ रहे हैं और बढ़ते रहेंगे। (ताली बजाओ

कलकत्ता के ग्रुप ने तीनों स्थानों पर फूलों का अच्छा क्षृंगार किया है:- जिन्होंने फूलों का क्षृंगार किया वह अभी हैं। अच्छा। भले आये, जी आये। बापदादा बच्चों को देख के खुश होते हैं। अपने घर में आये हैं ना। यह तो सेवा के कारण अलग-अलग गये हैं। बाकी हैं तो सभी मधुबनवासी। अच्छा। 

बापदादा को तो हर एक बच्चा दिल में समाया हुआ है। चाहे कहाँ भी रहते हैं देश में या विदेश में। लेकिन दिलाराम के दिल में समाया हुआ है। अच्छा। 

दादी जानकी से:- (लण्डन जा रही हैं इसलिए खुश है) सदा खुश है। बाप साथ देंगे। 

निर्वैर भाई से:- तबियत ठीक है। हिसाब पूरा हुआ। अभी वह हिसाब तो पूरा हुआ। सेवा हुई। अच्छा। 

मोहिनी बहन से:- खुश रहती हो खुशी चला रही है। बाप की याद के साथ खुशी भी चला रही है। 

बृजमोहन भाई से:- (ओ.आर.सी. वालों की और मोहित भाई की याद दी) उसको याद देना, टोली भेज देना। 

रमेश भाई से:- तबियत ठीक है। 

गोलक भाई से:- ठीक है। सदा ठीक रहना ही है और कोई सवाल ही नहीं। (सभी के लिये) सब ठीक रहने वाले हैं।

ओम शान्ति


 

31-01-14   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


अचानक के पहले अलर्ट रह स्वयं को पावरफुल बनाओ, खुशमिजाज रह संतुष्टता का वायुमण्डल बनाओ साथ-साथ हर एरिया में सन्देश देने का कार्य पूरा करो, अब कोई का भी उल्हना रह न जाये

आज की सभा स्नेही और स्मृति स्वरूप के स्थिति में स्थित दिखाई दे रही है। हर एक के मन में विश्व कल्याण का उमंग उत्साह समाया हुआ है। चाहे सम्मुख हैं चाहे दूर हैं लेकिन सारा ब्राह्मण परिवार दिल के स्नेह में समाया हुआ है। यह स्नेह, परमात्मा और आत्मा के मिलन का स्नेह अति न्यारा और अति प्यारा है। आज बापदादा चारों ओर बच्चों को समर्थ रूप में देख रहे हैं। जहाँ समर्थ है वहाँ व्यर्थ स्वत: ही समाप्त हो जाता है। समर्थ बाप और समर्थ बच्चे, यह समर्थ आत्मा और परमात्मा का मिलन अति प्यारा और न्यारा है और यह मिलन सिर्फ संगम पर ही मिलता है। परमात्मा और आत्माओं का यह साकार मिलन कोटों में कोई आत्माओं को अनुभव होता है। यह परमात्मा और आत्माओं का मिलन कल्प में अब संगम पर ही होता है और वह सौभाग्यशाली क्या पदम भाग्यशाली आत्मायें आप सम्मुख मिलन मना रहे हैं। सबके दिल में इस समय यही मिलन का भाग्य प्राप्त होता है। सबके मन में मेरा बाबा, मेरापन है।

बापदादा अभी इस समय यही चाहते हैं कि और भी आत्माओं को यह अनुभव कराओ मेरा बाबा और वर्से का अधिकारी बनाओ। आज संसार में दुःख अशान्ति या अल्पकाल का सुख फैला हुआ है। उन आत्माओं को सदा के सुख शान्ति का थोड़ा सा भी अनुभव जरूर कराओ क्योंकि इस समय ही अनुभव करा सकते हो। इस समय को वरदान है आत्माओं को परमात्मा से मिलाने का। सारे कल्प में आत्मा परमात्मा का मिलन, परिचय, सम्बन्ध, वर्सा इस समय ही प्राप्त होता है। तो अब हर एक बच्चे को, जो अधिकारी हैं उन्हों को सदा उन आत्माओं के ऊपर तरस आना चाहिए कि कोई भी आत्मायें चाहे देश, चाहे विदेशी वंचित रह नहीं जाये। आपका विशेष कार्य यही है कि किसी भी प्रकार से कोई एरिया ऐसी नहीं रह जाये जो उल्हना दे हमें परिचय ही नहीं मिला। सर्विस तो चारों ओर कर रहे हो लेकिन कोई भी आसपास की एरिया रह नहीं जाये, उल्हना नहीं मिले, हमारा बाबा आया और हमको पता नहीं पड़ा। यह जिम्मेवारी आप निमित्त बने हुए बच्चों की है। जहाँ तक हो सकता वहाँ सन्देश जरूर दे दो। नोट करो। कौन सी एरिया रही हुई है! जो उल्हना रह नहीं जाये कि हमें तो पता नहीं पड़ा। पता देना आपका कर्तव्य है, जाने नहीं जाने, वह जानें। तो हर एक अपनी एरिया के आसपास चेक करो कोई भी एरिया सन्देश के बिना रह नहीं जाए। भाग्य हर एक का खुद है लेकिन सन्देश देना आप भाग्यवान आत्माओं का कर्तव्य है। हर एक को अपनी एरिया या आसपास की एरिया को चेक करना चाहिए कि हमारी एरिया का वह उल्हना रह नहीं जाये कि हमें तो पता ही नहीं पड़ा। चाहे छोटा गांव है, चाहे बड़ा गांव है, शहर है, सन्देश देना आप भाग्यवान आत्माओं का काम है, यह चेक करो हमारे आसपास की एरिया में सन्देश पहुँचा है? किसी भी एरिया का उल्हना नहीं रह जाए क्योंकि मैजारिटी मुख्य शहरों में पहुँच तो गये हो लेकिन फिर भी चेक कर लो कोई भी एरिया रह नहीं जाये जो आपको उल्हना देवे हमारा बाप आया और हमें पता नहीं दिया। चेक तो करते हो, बापदादा देखते हैं फिर भी अपनी-अपनी एरिया जहाँ तक पहुँच सकते हो और कोई नहीं पहुंचा है वहाँ सन्देश देना आपका कर्तव्य है। चाहे छोटी एरिया है लेकिन आपके एरिया के नजदीक है तो आप नोट करो, छोटी-छोटी एरिया वाले भी आपको उल्हना दे सकते हैं, हमारा बाप आया हमको मालूम पड़ा, हमारा बाप है क्योंकि सबका बाप है ना, तो आपने क्यों नहीं बताया! इसलिए चेक करो अपनी एरिया के चारों ओर सन्देश पहुंचा है? फिर आपकी जिम्मेवारी पूरी हुई। ऐसे नहीं हो कि छोटी एरिया है, लेकिन उस एरिया के हैं तो बच्चे ना! किसी को भी भेज के कम से कम पता तो पड़े कि हम सबका बाप आया है। चाहे किसी भी प्रोग्राम से अपनी एरिया को सारा पूरा करो, अगर छोटी एरिया तो कोई छोटे को भेजो लेकिन वंचित नहीं रह जाए क्योंकि समय अचानक आना है, बताके नहीं आयेगा। अपना चारों ओर सन्देश देने का कर्तव्य अवश्य देखो। मानो आपकी एरिया में कोई सेवा नहीं है, एरिया में तो जो साथी एरिया वाले हैं उनको बताके उन्हों को निमित्त बनाओ, कोई आत्मा रह नहीं जाये। सन्देश मिलना चाहिए, बाकी उन्हों का भाग्य। तो हर एक अपनी एरिया को चेक करना, चाहे छोटी ही गली है, साधारण लोग हैं, लेकिन बच्चा तो है ना, बाप आया है यह पता तो होना चाहिए। चाहे किसी भी रीति से करो, उल्हना नहीं रह जाए कि हमें तो पता ही नहीं पड़ा। यह आप लोगों का फर्ज है क्योंकि कोई भी हालत अचानक किसी समय भी आ सकती है। अपना फर्ज पूरा करो। चाहे किसी को भी भेजो लेकिन उल्हना नहीं रह जाए हमको तो पता ही नहीं पड़ा। किस एरिया के तो नजदीक होगा ना क्योंकि अचानक कुछ भी खिटखिट शुरू हो सकती है। अपना फर्ज आसपास का एरिया देख चेक करो कोई रही हुई तो नहीं है! अगर दूसरे की एरिया है तो उससे राय करो, ऐसे बिना राय के नहीं करो, राय करो और पूरा करो क्योंकि अचानक कुछ भी हो सकता है इसलिए आज बापदादा चाहे देश, चाहे विदेश सभी बच्चों को इशारा दे रहे हैं कि अपनी एरिया को चेक करो, राय करके बड़ों से उस द्वारा कराओ लेकिन रह नहीं जाये। मीटिंग करते हो ना, उसमें एक दो से राय कर सकते हैं। बापदादा यही कहते हैं कि समय अचानक आना है इसलिए कर लेंगे, हो जायेगा, यह कोई कोई का संस्कार होता है, तो रह नहीं जाये। यह बापदादा सभी को इशारा दे रहे हैं। अपनी एरिया को चेक करो। अगर दूसरा कोई करने चाहे तो उससे भी कराओ क्योंकि समय पर कोई भरोसा नहीं, छोटी- छोटी बातें तो अचानक हो ही जाती हैं। आप अपनी एरिया को देख लो, आसपास जितनी भी आपकी एरिया बनती है वहाँ सन्देश रहा हुआ तो नहीं है! उल्हना तो नहीं मिलेगा!

बाकी आप सभी बाप के सिकीलधे बच्चे जो बाप के बन गये, वह कितने सिकीलधे हैं। बापदादा भी सिकीलधे बच्चों को देख खुश होते हैं, वाह बच्चे वाह! पुरुषार्थ में थकना नहीं, कोई भी छोटी-मोटी बात आती है, मदद लो। नहीं तो किससे मदद नहीं लेनी है तो योगबल से चेक करके उसका कोई न कोई सहयोग ढूंढो।

हर एक चेक करना कि मेरी एरिया में से कोई रह तो नहीं गया कि हमको सन्देश ही नहीं मिला। आप सोंचेंगे बापदादा आज ऐसे क्यों कह रहे हैं? क्योंकि बापदादा ने देखा है कि कई बच्चों की नजदीक की एरिया जिनकी जिम्मेवारी है लेकिन वह पूरी नहीं कर रहे हैं इसलिए बापदादा इशारा दे रहे हैं कि कोई की भी एरिया रह गई हो, कारणे अकारणे तो उसका हल ढूँढो सन्देश जरूर दो। आज बापदादा इशारा दे रहा है कोई उल्हना नहीं रह जाए क्यों आप देखेंगें, उन्हों की एरिया को चेक करेंगे, उन्हों को पुरुषार्थ में चलायेंगे, उसमें भी टाइम चाहिए। तो अभी अपनी अपनी एरिया को चेक करना। कोई एरिया उल्हना नहीं दे कि हमको पता नहीं पड़ा। अगर सर्विस करने वालों की मदद चाहिए तो अपने जोन को बोलो, वह मदद करे। तो आज बापदादा सेवा का इशारा दे रहा है, सेवा के साथ और क्या इशारा है? स्वयं को सम्पन्न बनाने का। ऐसे नहीं कि सेवा में इतने बिजी हो जाओ तो स्वयं को देखने का समय नहीं मिले। स्वयं को भी देखो और समय को भी देखो। बाकी सभी खुशमिजाज रहते हो, अगर खुशमिजाज नहीं रहते तो जिसमें फेथ हो, भावना हो उससे सहयोग लो क्योंकि बापदादा जानते हैं कि छोटी-छोटी बातें किस समय भी आ सकती हैं इसलिए अपने को अलर्ट रखना, अपना फर्ज है। कोई कितना भी कहे लेकिन स्वयं, स्वयं को अलर्ट करना है।

तो आज बापदादा सेवा और स्वयं दोनों को एवररेडी करने के लिए इशारा दे रहे हैं। सन्तुष्टता का वायुमण्डल हर स्थान पर होना चाहिए। अगर असन्तुष्टता है तो किसी भी सहयोग से, क्योंकि होना है छोटा छोटा हो या बड़ा हो लेकिन उसके लिए स्वयं को पावरफुल जरूर बनना है। आज बापदादा इसी पर इशारा दे रहे हैं कि अचानक के लिए तैयार रहो। फिर ऐसे नहीं कहना यह तो पता ही नहीं था, होना है, होगा अचानक। आप सबके मन से हल्का हो जायेगा तभी होगा इसलिए बापदादा इशारा दे रहे है कि अपने आपको चेक करो। बाप समान जो बाप चाहता है, जानने में तो सब होशियार हैं, तो जो बाप चाहता है मन्सा-वाचा-कर्मणा, सम्बन्ध-सम्पर्क इन सब बातो में ऐसी अवस्था है, जो कुछ भी अचानक हो तो सामना कर सकेंगे? इंटरनल पावर आत्मा सदा अटेन्सन में रहे, सदा तीव्र पुरुषार्थी रहे। स्व परिवर्तन और चारों ओर भी परिवर्तन में सहयोगी बनने में, दोनों बात में चेक करना।

बाकी सभी ओ.के. है, हाथ उठाओ। ओ.के., .के., .के., है? अच्छा बापदादा आगे का हाथ तो देख रहे हैं, पीछे का दिखाई नहीं देता। अभी पीछे वाले उठाओ। अच्छा - सभी को बहुत-बहुत बापदादा का सिक व प्रेम सहित यादप्यार स्वीकार हो। ऐसे कोई नहीं सोचे कि हमको तो बाबा का प्यार पता ही नहीं, ऐसा है कोई। कोई है? नहीं है ना! पता तो है ना! परमात्म प्यार क्या होता है। है पता? अच्छा पता वाले हाथ उठाओ। सभी उठा रहे हैं और लम्बा उठाओ। नीचे करो। देखो, बापदादा ने देखा हाथ तो मैजारिटी उठा रहे हैं, कोई बीच में रह गया हो वैसे मैजारिटी ने उठाया है। अगर कोई अन्दर में समझे, हाथ उठाने में शर्म आवे तो भी अगर कोई विध्न है या कोई हलचल है तो अपने दादियों को या जिसमें भी आपका फेथ हो, बड़ी दादी या दादियों में उनको सुना देना, रखना नहीं अन्दर कोई न कोई इलाज ले लेना क्योंकि होना है, तो अचानक होगा। उस समय पुरुषार्थ कर नहीं सकेंगे। अभी चेक करो, कुछ भी अचानक हो जाए, हलचल हो जाए तो इतनी शक्ति है जो स्वयं को बचाये, वायुमंडल में यह प्रभाव डालें, औरों के भी मददगार बनें। यह चेक करना। समझा ना सभी ने। समझा। समझदार तो बहुत हो। नहीं, बापदादा को अच्छा लगता है। ऐसे ही नहीं कहते हैं। समझदार तो हो लेकिन कभी-कभी समय पर थोड़ा टाइम लगाते हैं। 

अच्छा। चारों ओर के बच्चों को दूर वालों को भी और नजदीक वालों को भी बहुत-बहुत मुबारक है जो अपने ऊपर अटेन्शन दे रहे हो। धोखा नहीं खाना, अटेन्शन दो, दे रहे हो और देते रहना। कोई भी मदद चाहिए तो निमित्त बने हुए द्वारा ले सकते हो। ऐसे नहीं कोई कहे किससे लेवें, निमित्त का पता है, दादियां है ना! दादें है दादियां भी है। कोई भी गलती रखना नहीं, अगर हो भी गई तो बापदादा से दिल में पश्चाताप करके उसको खत्म करना। जमा नहीं करो। बापदादा हर एक का खाता देखे तो कैसे खाता हो? .के., वेरी गुड। ऐसे है? अच्छा, इसमें हाथ उठाओ। हाथ तो सब उठा रहे हैं। देखो, आप दादी आओ, हाथ देखो। हाथ उठाओ, सब ठीक हैं? सब ठीक हैं, हॉ। आओ दादी, दादी को ले आओ। आज मोहिनी नहीं आई है क्या? अच्छा आ गई।

सेवा का टर्न पंजाब जोन का है, 8000 आये हैं:- पंजाब वालों को वरदान है। पहले-पहले अमृतसर में सेंटर खुला था तो गुरुओं का बहुत था, लेकिन पंजाब वालों ने सबके ऊपर जीत पाई और अपने सेन्टर निर्विध्न चलाने दिये, इसके लिए पंजाब वालों को बापदादा भी धन्यवाद दे रहे हैं। गुरुओं के स्थान पर सदगुरु की जीत करके दिखाई। अच्छा किया। गुरुओं की गद्दियों के बीच में ब्रह्माकुमारियों का सेंटर अमर रहा और निर्विघ्न चलता था। निर्विघ्न चला ना, पंजाबवाली टीचर्स हाथ उठाओ। अच्छा। मेहनत अच्छी की है और अभी भी पंजाब का टर्न है

मोहिनी बहन से:- ठीक है ना! (बाबा आपके वरदान से मैं ठीक हूँ) मुबारक है। ठीक है और ठीक रहेगी। भले कुछ भी हो, बाबा मेरा बाबा, यह दवाई है। अच्छी रहेंगी। कोई बात नहीं। यह बीच-बीच में होता है। अच्छा।

मुन्नी बहन से:- बहुत अच्छी मेहनत कर रही हो, उसकी सफलता है और ऐसे ही जैसे चलती हो वैसे अच्छे ते अच्छा चला रही हो, चलाती रहेगी। जो भी कोई यहाँ वहाँ से इशारा आवे वह कर लिया, बस। और अच्छा चल रहा है। 

डबल विदेशी भाई बहिनों से:- अच्छा। यह सब डबल विदेशी है। (200 आये हैं) डबल विदेशी आजकल देखा है हर ग्रुप में कुछ न कुछ होते हैं। अच्छा, अपना पार्ट बजा रहे हैं। विदेश की सेवा भी अच्छी कर रहे हैं लेकिन जितनी सेवा करते हैं ना उतना समाचार कम देते हैं। कोई ऐसा मुकरर हो जो मास दो मास के बाद सब तरफ की रिजल्ट लिखके भेजे। अच्छी सेवा में वृद्धि है, पुरुषार्थ भी अच्छा कर रहे हो। (कराची से एक भाई आया है) अच्छा है, कराची जन्म स्थान है ना। ऐसे स्थान की सौगात आवे तो कितने महान हैं। अच्छा बापदादा को समाचार मिलता है, अच्छा चल रहा है। जो भी आते हैं, इसमें कराची वाले कोई और है? एक ही है। बहुत अच्छा, अच्छा लगा ना! विदेशियों को देख बापदादा को अपना वर्ल्ड कल्याणकारी टाइटिल याद आता है क्योंकि पहले था इन्डिया अभी विदेश भी हो गया, तो इसीलिए बापदादा विदेश सेवा को सदा याद रखता है। पहले सिर्फ इन्डिया कल्याणकारी था अब विदेश चारों ओर फैला हुआ है, कोई एरिया अभी भी रही हुई है वह भी एड हो जायेगी लेकिन विदेश एड हो गया है। अच्छी मेहनत की है। रिजल्ट विदेश की भी अच्छी है। अच्छा। 

निर्वैर भाई से:- तबियत ठीक है, ठीक हो रहे हैं। हॉस्पिटल की चिंता नहीं करो। सभी से राय करके मीटिंग में फाइनल करना। सिर्फ यह सोचो कि एक हॉस्पिटल आबू के कारण खाली पड़ी है तो इतना पड़ा प्रोग्राम करेंगे तो आबू में कौन आयेंगे? हॉस्पिटल के बारे में सबकी राय पहले लो। राय लेना चाहिए कि यहाँ आबू में दूसरी हॉस्पिटल खोलें? (उसी हॉस्पिटल के साथ एडीशन करेंगे) लेकिन दूसरी होगी ना। वह प्लैन बनाना फिर देखेंगे। प्लैन दिखाना।

बृजमोहन भाई से:- (गीता के भगवान के बारे में) उसके लिए टॉपिक थोड़ी चेंज करो। (अहिंसा की टापिक आपने बताई थी वही चालू रखें?) थोडा चेंज करो। अहिंसा परमोधर्म नयी बात तो थी लेकिन आकर्षण वाली थोड़ी प्वाइंट निकालो, थोडा चेंज करो, सोचो थोड़ा। सभी सोचे जिसमें टापिक पर ही आकर्षण हो जाए, अभी यह सोचते हैं हमारा क्या जाता, क्या भी हो। लेकिन समझे हमारा भी फायदा है। ऐसे सोचो। 

पंजाब की बड़ी बहिनें:- पंजाब तो मशहूर है। पंजाब से कुमारियां अच्छी निकली हैं। भाई भी अच्छे निकले हैं। जिससे टोटल पंजाब अच्छा चल रहा है। एक दो को सहयोग देके अच्छा उन्नति को पा रहे हैं। अभी और उन्नति करो, आवाज निकालो। आवाज नहीं निकला है। (हरिद्वार में संत सम्मेलन करें) कुछ हलचल कराओ। शान्ति से सुन रहे हैं, कुछ उसका कुछ उसका मिक्स होता है लेकिन ओरिजनल क्या है, उसको थोड़ा प्रसिद्ध करो। फिर जो अपने होंगे वह निकलेंगे। क्यों वहाँ के कोई साधू जो बड़े मशहूर हैं, उनमें से कोई निकले, यह सेवा करो। वह कहें ब्रह्माकुमारियों का ज्ञान हमने जीवन में लाया, ऐसे कोई मिसाल निकालो। बैठे तो हैं सभी, चाहे कोई की भी पंजाब में मदद लो, इन्डिया की लो, सबकी ले सकते हैं। यह आवाज निकले कि ब्रह्माकुमारियां कृष्ण के बजाए शिव कहती हैं। यह आवाज निकले। यह पंजाब की सेवा है। तो यह आवाज निकलना चाहिए ना। पंजाब को प्राइज देंगे अगर यह आवाज निकालेंगे। चाहे माने नहीं माने लेकिन यह तो कहें इन्हों का यह मत है। और इस पर सभी का सोच चले। करो कोई कमाल। सभी मिलके राय करो। अच्छा है। शान्ति से चल रहा है ना, सब चुप हो गये हैं।

जालंधर की राज बहन बीमार है आ नहीं सकी है:- उसके लिए टोली ले जाओ।

जयन्ती बहन ने कहा - बाबा दादी जानकी को आपने 8 दिन के लिए लण्डन भेजा, उसके लिए बहुत-बहुत थैंक्स, सब खुश हो गये ना। ठीक है, जो ड्रामा में था वह अच्छा हुआ।

ओम् शान्ति।


 

14-02-14   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


परमात्म प्यार के पात्र बच्चे प्यार लेते और देते हुए फालो फादर कर स्वयं भी निर्विघ्न बनो और अपने नजदीक साथियों को भी निर्विघ्न बनाओ

आज प्यार के सागर चारों ओर के हर बच्चे को बहुत-बहुत-बहुत प्यार दे रहे हैं। यह परमात्म प्यार सारे कल्प में अब संगम के समय ही प्राप्त होता है। दुनिया वाले आज के दिन को प्यार का दिन कहते हैं लेकिन आप बच्चों के लिए संगमयुग का हर दिन बाप के प्यार को प्राप्त करने का है। आज दिन के यादगार प्रमाण बापदादा के सामने आप बच्चे हो लेकिन बापदादा के दिल में चारों तरफ के बच्चे चाहे फारेन में हैं, चाहे गांव में हैं लेकिन हर बच्चा बाप के दिल का दुलारा है। वैसे तो यह संगमयुग ही परमात्म प्यार के आप पात्र हो लेकिन आज विशेष आज की दुनिया के हिसाब से प्यार का दिन है तो बापदादा भी चारों तरफ के एक-एक बच्चे को बेहद का प्यार, दिल का प्यार, सदा उमंग-उत्साह में उड़ने का प्यार एक-एक बच्चे को, प्यार के पात्र बच्चों को, हर बच्चे को सामने लाए दे रहे हैं। आप तो सामने हैं साकार में लेकिन बापदादा के सामने चारों ओर के बच्चे, प्रेम के पात्र बच्चे प्यार दे और प्यार ले रहे हैं। वैसे तो आज के दिन को मनाने के कारण कहते हैं लेकिन हर बच्चा हर संगम के समय परमात्म प्यार के पात्र है। यह प्यार की पात्र आत्मायें बाप के अति प्यारे, बाप के लाडले बच्चे हैं। यह परमात्म प्यार सिर्फ संगमयुग के एक जन्म में ही प्राप्त होता है। यह प्यार अनेक जन्म के दु:ख दर्द को समाप्त कर सदा खुशी की खुराक खिलाने वाला है। हर एक बच्चा परमात्म प्यार के अधिकारी आत्मायें हैं। आज के दिन बापदादा हर बच्चे को दिल का प्यार ले भी रहे हैं, दे भी रहे हैं। आप सब भी प्रेम स्वरूप आत्मा बन अपना स्वरूप दिखाए रहे हो। हर एक बच्चे के नयनो में, मस्तक में परमात्म प्यार समाया हुआ है। अभी आप हर एक को अन्य भाई और बहिनों को परमात्म प्यार के पात्र बनाने का उमंग-उत्साह सदा दिल में रहता है।

बापदादा आज देख रहे हैं हर एक बच्चे के मन में उमंग-उत्साह है कि बाप समान बनना ही है। फॉलो फादर करने वाले हो ना! जैसे बाप का सदा हर बच्चे से चाहे पुरुषार्थ में नम्बरवार है फिर भी बाप का प्यार सदा हर बच्चे के साथ है। हर बच्चे को अमृतवेले बापदादा विशेष चारों ओर यादप्यार और शक्तियां वरदान में देते हैं। ऐसे प्रभु पात्र बच्चों का भाग्य है, अब बापदादा का एक और संकल्प है, सुनायें? सुनायें, करना पड़ेगा। करने वाले हाथ उठाओ। हिम्मत तो बहुत अच्छी है, बापदादा खुश है और हिम्मते बच्चे मददे बाप भी है। अब यह कमाल दिखाओ - हर बच्चा निर्विघ्न बन बाप समान बनें। लक्ष्य तो सबका है लेकिन बीच-बीच में कोई विघ्न थोड़ा ढीला भी कर देती है। अब बाबा यही चाहते हैं कि हर एक अपने को लक्ष्य रख करके निर्विघ्न, मन्सा, चाहे वाचा, चाहे सम्बन्ध-सम्पर्क में निर्विघ्न सदा बाप समान बन औरों को भी उमंग-उत्साह में लाकर उनके सहयोगी बन उन्हों को भी निर्विघ्न बनावे। हर एक अपने सेवा स्थान को निर्विघ्न बनाकर सभी की दुआयें ले। हर एक सेवाकेन्द्र या हर एक जहाँ भी है, घर में है, चाहे सेंटर पर हैं, यह दृढ़ संकल्प करे और करके दिखावे कि मैं निर्विघ्न हूँ और साथियों को भी निर्विघ्न बनाने की सेवा करूंगा। कम से कम हर सेंटर को अपने- अपने साथियों के सहयोगी बन निर्विघ्न बनाने की सेवा में सफल बनें। बापदादा अभी चाहे सेवाकेन्द्र, चाहे स्वयं कहाँ भी रहते हैं, स्वयं को निर्विघ्न, संकल्प मात्र भी व्यर्थ समाप्त, ऐसे बने और बनायें, यह हो सकता है?

तो आज से देखो सभी हाथ उठा रहे हैं। पीछे वाले हाथ हिलाओ। अच्छा। तो आज से स्वयं को निर्विघ्न और जहाँ भी रहते हैं, उस स्थान को, साथियों को निर्विघ्न बनायेंगे - यह दृढ़ संकल्प करते हो अभी से? साथियों को भी बना सकते हो? इसमें हाथ उठाओ। सोच-सोच के उठा रहे हैं। जब आप विश्व परिवर्तक अपने को कहलाते हो तो विश्व के परिवर्तन के पहले जहाँ भी है उस स्थान को तो निर्विघ्न बनायेंगे ना! लक्ष्य रखो जैसे अपने को निर्विघ्न बनाया है, संकल्प में सफलता है वैसे साथियों को, वायुमण्डल को भी बनायेंगे तब तो अपना राज्य आयेगा ना! तो अभी आज के दिन बापदादा यही काम देते हैं कि खुद तो बने हैं, बापदादा खुश है लेकिन साथियों को भी निर्विघ्न बनायें क्योंकि अपना राज्य स्थापन करना है ना तो राज्य में तो सभी होंगे ना! तो संकल्प करो, साथियों की भी, जहाँ तक हो सकती है, मदद लो। मदद लेके भी बनाना है। यह संकल्प कर सकते हो? कर सकते हो हाथ उठाओ। हाथ तो सभी उठा रहे हैं? बहुत अच्छा। अच्छा है, हिम्मत है, चाहे कैसा भी है लेकिन आपका वायुमण्डल इतना पावरफुल हो जो अपने वायुमण्डल को जहाँ तक आपका वायुमण्डल है, वहाँ तक हर एक निर्विघ्न हो। यह हो सकता है? हो सकता है? जो समझते हैं हो सकता है वह हाथ उठाओ। पीछे वाले हाथ उठा रहे हो, ऐसे ऐसे करो। हाथ उठाके तो खुश कर दिया, मुबारक हो। अच्छा है संकल्प तो किया ना, करना है। क्यों? अपने साथ रहने वाले या सम्पर्क वाले उन्हों को तो साथी बनाना है ना! भले नम्बरवार बनेंगे, यह तो बाप भी जानते हैं लेकिन फर्क तो दिखाई दे ना! तो आज से विशेष संकल्प उत्पन्न करो कि अपने कनेक्शन में, नजदीक वाले उन्हों को भी निर्विघ्न बनाना है। बना सकेंगे? बना सकेंगे? बनायेंगे? पहली लाइन नहीं उठाती है। अपना राज्य तो लाना है ना। तो राज्य में साथी को लाना तो है ना, उसको छोड़ देंगे क्या? एक दो को साथ देके भी लक्ष्य रखेँगे तो हिम्मत आपकी मदद बाप की है। यह हो सकता है? हो सकता है इसमें हाथ उठाओ। हाथ तो सभी अच्छा उठाते हैं। हाथ उठा करके बापदादा को खुश कर देते हैं।

तो बापदादा टाइम देते हैं, अपने कनेक्शन में आने वालों को आप समान साथी बनाओ। चारों ओर ब्राह्मण सदा निर्विघ्न, यह हो सकता है कि मुश्किल है? जो समझते हैं हो सकता है वह हाथ उठाओ। अच्छा। यह पहली लाइन। हो सकता है? तो अगली सीजन तक टाइम देवें कि अभी? अभी हो सकता है? साथियों को आप समान बनाना है। नम्बरवार होंगे लेकिन इतना तो बनाओ जो कोई विघ्न रूप नही बनें। यह हो सकता है? विघ्न रूप नहीं बने? पहली लाइन। हो सकता है? आगे वाले? अच्छा। हिम्मत अच्छी है। तो अगली सीजन में आयेंगे तो यह खुशखबरी सुनेंगे। यह लायेंगे, जो समझते हैं हम पुरुषार्थ करके थोड़ी मेहनत भी करनी पड़ेगी लेकिन साथियों को, आसपास वालों को निर्विघ्न बनायेंगे, वह हाथ उठाओ। हाथ तो बहुत अच्छा उठा रहे हैं, शाबास हो, शाबास हो। अभी बापदादा हर मास रिजल्ट देखेंगे। कम से कम अपने नजदीक वाले साथियों को तो आप समान बनाना चाहिए ना! बना सकते हैं? बना सकते हैं? अच्छा इसमें हाथ उठाओ। हाथ तो सभी उठा रहे हैं। बापदादा आपको ऐसे सहयोगी बनाने वालों को अभी भी मुबारक दे रहे हैं, और जब फिर आयेंगे तो यह रिजल्ट देखेँगे कि हो गया। हो सकता है? हो सकता है? पहली लाइन नहीं उठाती! क्योंकि सभी निमित्त हो ना तो निमित्त को तो ध्यान देना पड़ेगा। अच्छा है, हिम्मत आपकी, मदद बाप की।

तो अभी करके बाप को दिखायेंगे ना! बापदादा देखेँगे। बापदादा जो प्रैक्टिकल साथियों को ऐसे निर्विघ्न बनायेंगे उनको बापदादा प्रेजेन्ट (इनाम) देंगे। लेकिन आप कहेंगे तो थोड़ा इंक्वायरी तो करेंगे। इसके लिए तैयार हैं? पहली लाइन। अच्छा है। हिम्मत वालों को बापदादा की मदद है और मिलती रहेगी। अच्छा।

आज का दिन प्यार का दिन है, तो प्यार में तो सब सहज हो जाता है। तो जैसे आप सभी ने हिम्मत रखी वैसे मदद भी बाप करेंगे, साथी भी मदद करेंगे तो प्रैक्टिकल में दिखाई देगा। परिवर्तन तो होना है ना। जो भी छोटी मोटी बात है ना, वह परिवर्तन आपेही कर लो। कहना नही पड़े। समझदार तो हो क्या करना है, क्या नहीं करना है! तो जो नहीं करना है वह नहीं कर लो, बस।

बापदादा अभी विश्व परिवर्तक बनने के लिए हर एक को निर्विघ्न बनना और साथियों को बनाना, यह चाहते हैं क्योंकि विश्वथ परिवर्तक हो, तो एक दो साथियों को बदलना क्या मुश्किल है! तो हर एक ध्यान रखना हमको अपना वायुमण्डल और साथियों को निर्विघ्न बनाना ही है। विश्व को बनाने वाले हो, बापदादा तो छोटा सा काम दे रहे हैं। संकल्प करते हो तो हाथ उठाओ। संकल्प करने वाले। (सभी ने हाथ उठाया) हाथ उठाके तो खुश कर दिया। मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो। अभी दूसरे बारी आयें तो खुशखबरी सुनेंगे ना। सुनेंगे, सुनेंगे? इसमें हाथ उठाओ। अपने नजदीक वाले साथियों को निर्विघ्न बनाओ, छोटा सा काम देते हैं, सभी को नहीं कहते हैं। अच्छा।

बापदादा को मजा आता है, जब बच्चे हिम्मत रखते हैं ना तो बापदादा को बहुत खुशी होती है और हिम्मते बच्चे मददे बाप, साथी तो है ही। तो अगले बारी क्या रिजल्ट देखेँगे? हर एक के साथ रहने वाले, नजदीक रहने वाले उसमें परिवर्तन है। ऐसे है ना! यह करेंगे ना? साथियों को आप समान तो बनायेंगे ना! इसमें हाथ उठाओ। हाथ उठाने में तो बहुत अच्छा है। बापदादा खुश होते हैं, हाथ उठाने की भी हिम्मत तो रखी। करने में एक दो के साथी बनना। तो सभी खुश हैं? हाथ उठाओ जो खुश हैं। जो खुशी कभी नहीं गंवाते, सदा खुश? सदा खुश? पीछे वाले सदा खुश हैं? लम्बा हाथ उठाओ। अच्छा। सदा खुश रहना और सदा खुश बनाना। मंजूर है ना! बनाना भी है क्योंकि अपना राज्य स्थापन होना है, करना है तो साथियों को तो साथ लेंगे ना! अच्छा।

ईस्टर्न जोन, तामिलनाडु, नेपाल, आसाम, बंगाल, बिहार, उड़ीसा के 17 हजार आये हैं:- (सभी को नम्बरवार उठाया) हर एक स्थान की जोन सबजोन इनचार्ज बड़ी बहिनें उठें, अभी लक्ष्य रखो कि जो भी एरिया आपको मिली है सेवा के लिए, उनको निर्विघ्न बनाना ही है। आप लोग संकल्प करो क्योंकि राजधानी स्थापन करनी है। आधाकल्प राजधानी चलेगी। तो इसके लिए थोड़ा चक्कर लगाके मेहनत करो जो हेड हैं वह सभी जगह रहके समस्याओं को हल करो। होती तो समस्यायें एक जैसी हैं लेकिन हर एक अपनी एरिया में समस्या समाप्त करके सफलतामूर्त बनें। ठीक है ना। हाथ उठाओ। अच्छा। तो अगले बार जब आयेंगें तो पूछेंगे आपकी एरिया से विघ्न समाप्त हुए? पूछें? क्योंकि बनना तो आप लोगों को ही है, जो भी बैठे हैं उन्हों को ही है, बनके बनाना है। राजधानी स्थापन होगी तो यहाँ से ही संस्कार डालेंगे ना। होगा! कोई बात नहीं है, बापदादा भी मददगार बनेंगे। कोई भी ऐसी प्रोब्लम हो तो यज्ञ में लिखकर भेजो, ठीक होगा, जैसे मदद हो सकेगी, होगी। निर्विघ्न तो बनना ही पड़ेगा। तब तो अपना राज्य स्थापन होगा। बहुत अच्छा।

डबल विदेशी भाई बहिनें 400 आये हैं:- यह डबल विदेशी, बहुत अच्छा। डबल विदेशियों को बापदादा देख करके खुश होते हैं, वाह डबल विदेशी वाह! क्योंकि आप लोगों ने बाप को विश्व पिता प्रसिद्ध किया है। भारत कल्याणी नहीं विश्व कल्याणी है। पहले थे भारत कल्याणी और अभी चारों तरफ सेवा बढ़ाने से विश्व कल्याणी प्रैक्टिकल में हैं। तो आप लोगों को बहुत-बहुत-बहुत यादप्यार और बहुत-बहुत कमाल करके आगे बढ़ने वाले बापदादा देख रहे हैं। अच्छा पुरुषार्थ कर रहे हैं। भले हर जगह भिन्न भिन्न तो होते हैं लेकिन फिर भी भारत के सिवाए विश्व पिता कहलाने के निमित्त बने हो। अच्छा है। डबल विदेशियों को बापदादा आज डबल प्यार दे रहे हैं। दूर रहते भी, देश दूर है लेकिन दिल नजदीक है। ऐसे हैं ना! हाथ उठाओ। बहुत अच्छा। बापदादा भी खुश होते हैं और आगे बढ रहे हैं, विदेशी तरक्की कर रहे हैं वहाँ, इसकी भी बधाई हो। अच्छा। एक दो के सहयोगी बनके और निमित्त जयन्ती बहन कहाँ है? यह चक्कर बहुत लगाती है। अच्छी सेवा कर रही है। साथी भी आपके अच्छे हैं। बापदादा डबल विदेशियों को डबल यादप्यार दे रहे हैं। मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो। अच्छा।

चारों ओर के बच्चों को, चाहे देश चाहे विदेश सभी बच्चों को बापदादा दिल का यादप्यार और शुभ बात सुना रहे हैं कि देखा गया है कि चारों ओर विदेश में या देश में भी सेवा के ऊपर अटेंशन अच्छा है, वृद्धि है और आगे भी वृद्धि करते रहेंगे। मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो।

मुन्नी बहन से:- सभी खुश हैं, सन्तुष्ट हैं, सेवा कर रही हो करती रहेगी।

दादी जानकी से:- (बापदादा को गुलाब के फूलों का हार पहनाया) यह हार आप सबके प्यार का है। निमित्त यह पहना रही है लेकिन आप सबका प्यार बापदादा को पहुँच गया। सभी का प्यार बापदादा को पहुंच रहा है। सभी को आगे तो नहीं ला सकते इसीलिए दूर से ही बापदादा वाह बच्चे वाह कह रहे हैं।

मोहिनी बहन:- ठीक है। अच्छी हो गई, अभी अच्छी रहेगी।

(रतनमोहिनी दादी को गुलबर्गा युनिवर्सिटी से डाक्ट्रेट की डिग्री मिलने वाली है) अच्छा है।

डा.निर्मला दीदी से:- अच्छा सम्भाल रही हो, स्थान भी अच्छा चल रहा है। मुबारक हो।

हंसा बहन से:- जो करता है उसको अन्दर ही अन्दर पुण्य के खाते का अनुभव होता है। होता है? आप दादी को सम्भाल रही हो इसमें सब आ जाता है। एक दादी की सेवा नहीं कर रही हो, अनेकों की सेवा कर रही हो।

तीनों भाईयों ने बापदादा को गुलदस्ता दिया:- ठीक है, अच्छा है। निर्विघ्न हैं सभी। सभी काम ठीक चल रहे हैं और जिसकी बातें हैं, वह भी ठीक हो रही हैं! हो रही हैं ना! मुबारक हो।

बृजमोहन भाई से:- आपने टॉपिक बदली नहीं की? (बदली की है, बापदादा को दिखाई) इससे समझ जायेंगे? जो खास गीता के बारे में था वह इससे थोड़ा छिप गया है। अभी सोचो। सोचेंगे तो ठीक हो जायेगा।

हरिद्वार में संत सम्मेलन कर रहे हैं:- अच्छा है, उन्हों को जगाओ। 

रमेश भाई से:- कारोबार ठीक है ना। 

डा. बनारसी भाई से:- सेवा ठीक कर रहे हो, मुबारक। थकता नहीं है। अच्छा है। वरदान है आपको।

ओम् शान्ति।


 

27-02-14   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


शिव अवतरण पर व्यर्थ को समाप्त करने की विशेष सौगात बाप को दो, विशेष अटेंशन देकर एक मास निर्विघ्न अवस्था की अनुभूति करो

आज सभी लाडले बच्चों को शिव अवतरण, शिव जयन्ती की मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो। आज के दिन बापदादा ने देखा कि सवेरे से लेके सभी के दिल में परमात्म अवतरण की, यादगार की बहुत-बहुत खुशी है क्योंकि बाप के अवतरण के साथ आप बच्चों का भी दिव्य जन्म हुआ है। तो बच्चे बाप को मुबारक दे रहे हैं और बापदादा आप एक-एक को आपके भी दिव्य जन्म की लाख गुणा मुबारक दे रहे हैं। हर एक के मन में जन्म से लेके अब तक सारे संगमयुग की यादें दिल में समा रही हैं। आज सबकी बुद्धि में शिव अवतरण की खुशी है और बाप को भी बच्चों के दिव्य जन्म की बहुत-बहुत खुशी है। वाह सिकीलधे मीठे मीठे बच्चे वाह! क्योंकि बाप के साथ आप बच्चों का भी यह अलौकिक दिव्य पूज्यनीय जन्म है। इस संगम पर बाप के साथ अवतरित हो अर्थात् नया जन्म लेके विश्व कल्याण के कर्तव्य के निमित्त बने हो। बाप के साथ आप बच्चे भी हर कर्तव्य में साथी हो। सभी को उमंग-उत्साह है कि इस विश्व को परिवर्तन करना ही है। दिल में उमंग है ना! उमंग है जो हाथ उठाओ। अच्छा। 

बापदादा ने भी देखा मैजारिटी बच्चों में अपना राज्य आने की बहुत खुशी है क्योंकि जानते हैं कि हमारा राज्य आया कि आया। यह शिवरात्रि सभी बच्चों को बाप के अवतरण की खुशी दिलाती है। तो आज सबके मन में शिव बाप की याद समाई हुई है। हमारा बाबा आ गया। हमारा राज्य आया कि आया। बापदादा भी बच्चों के उमंग-उत्साह को देख बच्चों के गीत गाते हैं वाह बच्चे वाह! बाप ने देखा कि विशेष सेवा में लगे हुए बच्चे दिनरात खुशी में दिल में गीत गाते हैं हमारा राज्य आया कि आया। अब उस राज्य में जाने की तैयारी जानते तो हो। 

तो आज शिवरात्रि पर हर एक अपने दिल के चार्ट को देखना कि अपने राज्य में जाने के लिए अपने में सम्पूर्णता कितनी लाई है? क्योंकि सम्पूर्ण राज्य में जाना है, जहाँ दु:ख का नामनिशान नहीं, तो अभी से अपनी दिल में सदा निर्विघ्न रहने का संस्कार देखते हो? विघ्न आने के पहले ही निर्विघ्न अवस्था की अनुभूति होती है? अभी बापदादा बच्चों में विघ्नविनाशक की विशेषता देख भी रहे हैं और देखने चाहते भी हैं। बाप का निर्विघ्न साथी बनकर चलने का पक्का संस्कार कोई-कोई बच्चों का है, अटेंशन है लेकिन अटेंशन का अर्थ है नो टेंशन, इस बात के ऊपर अच्छा ध्यान है क्योंकि अभी आप निमित्त बने हुए बच्चे निर्विघ्न अवस्था के अनुभवी बनेंगे तभी आपके निर्विघ्नता का वायब्रेशन पुरुषार्थी बच्चों को पहुँचेगा।

तो आज बापदादा देख रहे थे निर्विघ्न स्थिति कितना समय रहती है? कोई-कोई बच्चों की रिजल्ट अच्छी अटेंशन देने की देखी। उन बच्चों को बापदादा आज शिव अवतरण के दिन, यादगार है शिव अवतरण का, तो आज के दिन ऐसे निर्विघ्न रहने का लक्ष्म रखने वालों को बापदादा अवतरण के दिन की मुबारक भी देते हैं और दिलाराम दिल का प्यार भी दे रहे हैं। दिल में गीत गा रहे हैं वाह बच्चे वाह! अटेंशन देना अर्थात् टेंशन नहीं, उसकी निशानी हैं अटेंशन, टेंशन नहीं। तो आज बापदादा चेक कर रहे थे ऐसे बच्चे भी हैं लेकिन सदा अटेंशन में रहने वाले जितने बाप चाहते हैं उससे कम हैं। तो आज के अवतरण दिवस पर बाप यही चाहते हैं कि हर बच्चा अभी अपने पुरुषार्थ अनुसार अपने पास नोट करे, जो भी समय अपने अनुसार आप फिक्स करो, उतना समय निर्विघ्न रहे क्योंकि आगे चलकर निर्विघ्न का अटेंशन रखना आवश्यक है इसलिए बापदादा चाहते हैं सारे विश्व के चारों ओर के बच्चे अब अपने हिम्मत के प्रमाण फिक्स करे कि इतना समय मैं आत्मा निर्विघ्न रह सकती हूँ और अटेंशन से रहके देखे। निर्विघ्न रहना सहज है या मुश्किल है? जो समझते हैं अटेंशन से सहज है, वह हाथ उठाओ। अच्छा। हाथ उठाओ, ताकत नहीं है तो नहीं उठाओ। तो बापदादा एक मास की रिजल्ट देखने चाहते हैं, सिर्फ एक मास, ज्यादा नहीं बताते हैं। तो एक मास संकल्प में भी निर्विघ्न व्यर्थ संकल्प भी नहीं, स्टाप कहा स्टाप। अभी संकल्प के ऊपर अटेंशन की आवश्यकता है। तो चेक करना हर एक संकल्प में भी निर्विघ्न रहे? व्यर्थ संकल्प भी नहीं। क्या अपने संकल्प शक्ति पर इतना अटेंशन है? संकल्प अपनी शक्ति है ना। तो निर्विघ्न रहने का प्लैन सोचो, एक मास के लिए चेक करो जो सोचा वह हुआ? क्योंकि माया भी सुन रही है। कितनी भी वातावरण की माया हो, लेकिन वातावरण का प्रभाव मन के शुभ संकल्प में विघ्न रूप नहीं बने, इसमें सफलता हो, तो 15 दिन के अन्दर चेक करना - व्यर्थ संकल्प भी नहीं, सदा दिल में बाप समाया हुआ है? अभी कुछ समय इस बात पर, संकल्प के पुरुषार्थ पर अटेंशन देना। वाणी और कर्म तो मोटी चीज़ है लेकिन संकल्प भी व्यर्थ न हो क्योंकि एक एक संकल्प की चेकिंग आवश्यक है। भले वाचा और कर्मणा भी हैं लेकिन मन्सा शक्ति पावरफुल होने से वाचा कर्मणा में फर्क पड़ जायेगा। तो बापदादा आज मन्सा संकल्प के तरफ अटेंशन खिंचवा रहे हैं, जो निमित्त महारथी हैं अब मन्सा शक्ति के ऊपर अटेंशन दो। वाणी और कर्म तो आटोमेटिकली ठीक हो ही जायेगा। तो बापदादा आज मन्सा संकल्प के लिए इशारा दे रहे हैं क्योंकि वेस्ट थॉट्स जो आवश्यक नहीं हैं वह भी टाइम ले लेते हैं। वह समय बचाना है। हो सकता है? हो सकता है हाथ उठाओ। अच्छा। उमंग-उत्साह वाले तो बहुत हो इसकी शाबास। अभी उमंग-उत्साह को कर्म तक लाओ। इसमें भी पास हो जायेंगे क्योंकि बाप को साथ रखेंगे ना, तो बाप का साथ होने से आटोमेटिकली व्यर्थ समाप्त हो जायेगा। 

तो आज बापदादा वेस्ट थॉट्स, उसके ऊपर अटेंशन खिचवा रहे हैं क्योंकि इसमें टाइम बहुत वेस्ट जाता है। टाइम को तीव्र पुरुषार्थ में लगाना है। तो आज बापदादा व्यर्थ के ऊपर अटेंशन खींच रहे हैं क्योंकि बच्चे कहते हैं खराब संकल्प तो नहीं हैं ना! यह छोटे-छोटे व्यर्थ संकल्प हैं लेकिन कभी भी धोखा समय पर दे सकते हैं इसलिए व्यर्थ को भी कम करो। तो मन्सा वाचा और कर्मणा, कर्म (सम्बन्ध-सम्पर्क) सबमें चेक करो कि वेस्ट कितना है बेस्ट कितना है? क्योंकि इस शिव रात्रि पर बाप को कोई सौगात तो देंगे ना! देंगे? हाथ उठाओ। तो बापदादा यही सौगात चाहते हैं कि व्यर्थ को समाप्त करो। अटेंशन दो। बुराई के ऊपर तो अटेंशन है लेकिन व्यर्थ के ऊपर भी अटेंशन देना है क्योंकि व्यर्थ में समय बहुत वेस्ट जाता है। तो आज के दिन शिव जयन्ती के उपलक्ष्य में व्यर्थ के ऊपर अटेंशन देने का होमवर्क बापदादा दे रहा है। पसन्द हैं ना! पसन्द है? हाथ उठाओ। पसन्द है तो सब पास हो जायेंगे। पसन्द हैं तो पसन्द चीज़ तो दिल से की जाती है। तो मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो। मेहनत तो नहीं लगती है ना। अरे, अटेंशन से मेहनत कम हो जाती है। करके देखो, सब पास होंगे, रिजल्ट पूछेंगे ना एक मास के बाद, तो मैजारिटी पास हों। हो सकता है ना? हो सकता हैं, हाथ उठाओ। अच्छा। तो यह तो सभी हाथ उठा रहे हैं। तो बापदादा कहते हैं वाह बच्चे वाह! लक्ष्य से लक्षण स्वत: और सहज हो जायेंगे। अच्छा  

एक-एक बच्चे को बापदादा तीव्र पुरुषार्थ का इनाम देगा। पसन्द है ना! अच्छा। आज के दिन की शिव रात्रि का दिन है ना! तो आज के दिन की विशेष मुबारक है और दिल का प्यार है। आज बापदादा ने देखा डबल फारेनर्स बहुत हैं। उठो देखें कितने हैं? देखो, वाह! वाह भाई वाह! बापदादा खुश है। अटेंशन अच्छा है। बापदादा दिल की दुआयें दे रहे हैं। भारतवासियों को भी है। आजकल विदेशियों की सीजन है ना! तो बहुत तरफ से आये हैं, बापदादा देख रहे हैं कि काफी देशों से पहुँच गये हैं। (80 देशों से 1200 डबल विदेशी आये हैं) सब डबल खुश हैं ना! तन से मन से दोनों से? अच्छा है। सेवा के तरफ भी अटेंशन हैं और जितना बढ़ा सको सेवा उतनी बढ़ाते जाओ क्योंकि अचानक कुछ भी हो सकता हैं इसलिए सेवा को बढ़ाते जाओ क्योंकि अपना राज्य आना हैं ना। तो अपने राज्य में तो राज्य करेंगे ना। जितना हो सके उतना आत्माओं को बाप का परिचय तो दे दो बाप आया और चला जाए और बच्चों को पता ही नहीं पड़े, तो जितना हो सके उतना सन्देश जरूर दो। फिर पश्चाताप तो करेंगे कि बाप आया हमको सुनाया भी गया, लेकिन हम नहीं चले। आप अपना सन्देश देने का काम बढ़ाते चलो, कोई उल्हना नहीं दे हम तो पास में रहता था, हम तो एक गली में रहते थे तो भी हमको पता नहीं पड़ा। तो अच्छा है, फारेनर्स की रिजल्ट भी अच्छी है। मधुबन से प्यार है। और आपको पहले भी बताया कि आपके सेवा के बाद बापदादा विश्व सेवाधारी प्रसिद्ध हुए। आप भी जहाँ कोई रहा हुआ है, पहले भी सुनाया था, जहाँ तक हो सके सन्देश तो मिले कि हमारा बाप आया। चले नहीं चले वह उन्हों के ऊपर है लेकिन आपकी तरफ से परिचय तो मिले, फिर पश्चाताप करेंगे लेकिन मालूम तो पड़े ना! फिर भी रिजल्ट अच्छी है। बहुत अच्छा। जहाँ से भी आये हो मेहनत करके, तो मेहनत का फल आपको मिलेगा भी और जमा भी हुआ। बहुत अच्छा बैठ जाओ। डबल फारेनर्स देखो टाइटल क्या है? डबल फारेनर्स कभी भूलते नहीं होंगे, हम डबल विदेशी हैं। 

सेवा का टर्न राजस्थान जोन का हैं, 5000 आये हैं:- बापदादा ने देखा कि हर एक जोन की ड्यूटी होने के कारण अच्छी रिजल्ट है, वह जोन खास अटेंशन देता है। मैजारिटी रिजल्ट अच्छी है। आप क्या समझती हो? रिजल्ट अच्छी है ना। बहुत अच्छा यह जोन जोन को मिलता है ना तो अच्छा सेवा में सहयोगी भी हैं और जोन को भी विशेष मिलता है। दादियों का भी अटेंशन जोन पर पड़ता है। यह अच्छा लगता है ना, हाथ उठाओ। 

पहली बार बहुत आये हैं:- तो पहली बार आने वालों को पहला नम्बर लेना है क्योंकि इतना समय जो मिस किया, वह समय को पूरा करना है इसलिए तीव्र पुरुषार्थी बनना, ढीले ढाले नहीं तीव्र पुरुषार्थी। मंजूर है? तीव्र पुरुषार्थी। 

दादी रतन मोहिनी जी को डॉक्टरेट की डिग्री मिली है:- यह भी संस्था का शान है, तो ब्रह्माकुमारीज सब कुछ कर सकती है। नहीं तो सोचते हैं पता नहीं ब्रह्माकुमारियां क्या करती हैं इससे समझते हैं तो वह आलराउन्ड सब तरफ पहुँच सकती हैं। अच्छा। 

(दादी जानकी - वन्डरफुल बाबा कमाल है दिलो को सारा खींच लेता है।) दिलाराम है ना। दिलाराम के पास दिल पहुंच गई। (सभी को कैसे पता पड़ेगा) पता पड़ जायेगा। जो रहे हुए हैं उनको पता पड़ता जाता है। अभी उमंग उत्साह से रहे हुए स्थान को पहुँचाओ सभी को। आप कराओ। बाबा करा रहा है, बाप अभी भी कराता रहेगा। कहाँ जायेंगे? (शरीर की खिटपिट होती रहती है) कोई बात नहीं है। बच्चों को तो आगे बढ़ाने के निमित्त हैं क्योंकि बच्चों को ही सामना करना पड़ता है। फिर भी बच्चों द्वारा ही करना पड़ता है। 

मोहिनी बहन ने बापदादा को बधाई दी:- आपको लाख गुणा मुबारक हो। 

रमेश भाई ने कार्ड दिया:- आपको हजार गुणा, पदमगुणा मुबारक हो। 

बृजमोहन भाई से:- अटेंशन है और आगे बढ़ते चलो।

भूपाल भाई से:- ठीक है बहुत अच्छा। 

बापदादा को सभी के भेजे हुए कार्ड दिखाये:- (रशिया और नलिनी बहन का कार्ड दिखाया) उनको कहना बापदादा ने देखा। उसको फल या टोली भेजना। 

विदेश की बड़ी बहिनों से:- सभी महारथी इकट्ठे हो गये हैं देश के भी और विदेश के भी। यह संगठन अच्छा लगता है ना। (सभी देश मिलकर एक साथ कोई सेवा करे) पुरुषार्थ भी कर रहे हैं, सेवा भी कर रहे हैं और सफलता भी है। बापदादा खुश है चाहे देश वाले चाहे विदेश वाले। मेहनत कर रहे हैं और मेहनत का फल भी निकल रहा है इसलिए मुबारक हो, मुबारक हो। निमित्त तो आप लोग हो ना। बापदादा तो आपको बल देता लेकिन दुनिया के आगे तो बच्चों को ही करना है। 

(कोयम्बतूर से डाक्टर आये हैं) अभी डबल डाक्टर। सिंगल नहीं डबल डाक्टर बनना है। पक्का हो गया। पक्का। अच्छा है आगे बढ़ते जाओ। सेवा में आगे बढ़ते जाओ। आपके पास तो बना बनाया सन्देश देने का साधन है, बहुत सेवा करो। करेंगे। अच्छा है। 

बापदादा ने अपने हस्तों से शिवध्वज फहराया:-

सभी की दिल एक ही शब्द बोल रही है वाह शिव जयन्ती वाह! वाह शिवबाबा वाह!

ओम् शान्ति


 

15-03-14   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


जीवन के हर दिन होली (पवित्र) बन पवित्रता के वायब्रेशन चारों ओर फैलाना, बीती को बीती कर सफलता के वरदान को स्वरुप में लाना

सर्व होली बच्चों को होली की मुबारक हो। आप एक-एक होली बच्चा आज बापदादा के साथ होली मनाने आये हैं तो बापदादा भी सर्व होली बच्चों को होली की मुबारक दे रहे हैं। एक-एक बच्चा कितना प्यारा है यह बाप और बच्चे जानते हैं। होलिएस्ट बाप हर बच्चे को अति स्नेह से होली की मुबारक दे रहे हैं। सर्व बच्चे होलिएस्ट बाप के होली बच्चे हैं। आज के दिन हर एक बच्चा अपने होली बनने की, होली बनाने की स्थिति को जानते हैं। बाप भी एक-एक बच्चे को कहाँ तक मन्सा - वाचा- कर्मणा, सम्बन्ध-सम्पर्क में होली बने हो, पवित्र बने हो, वह बाप भी जानते आप भी जानते हो क्योंकि बापदादा को होलिएस्ट बच्चे बहुत प्यारे हैं। तो आज हर एक बच्चा होलिएस्ट बनने की मुबारक स्वीकार करे। हर होली बच्चा नम्बरवार है लेकिन बापदादा के प्यार का अधिकारी है। तो बापदादा चारों ओर के बच्चों को चाहे देश चाहे विदेश एक-एक बच्चे को बहुत दिल व जान, सिक व प्रेम से होली बनने की मुबारक दे रहे हैं। मुबारक हो, मुबारक हो।

यह भी दिन बनाये भक्ति वालो ने हैं लेकिन हर दिन को महत्व दिया है। मनाते आप भी हो, भक्त भी हैं, साधारण बच्चे भी हैं लेकिन हर बच्चे अपने-अपने रूप से मनाते आते हैं। बच्चे तो अमृतवेले से लेके बाप को मुबारक हो, मुबारक हो की लाइन्स लगा देते हैं। चारों ओर से चाहे देश से, चाहे विदेश से, चाहे गाँव से, हर बच्चा दिल से बाप को और आप सबको बहुत-बहुत मुबारक देते हैं और बापदादा बच्चों को मुबारक का रेसपान्ड बहुत-बहुत स्नेह से देते हैं।

आज अमृतवेले चारों ओर से होली मुबारक, होली मुबारक के बच्चों के दिल के गीत बाप ने सुने हैं। बाप भी अभी सम्मुख आप एक-एक बच्चे को कितने भी हैं, एकदम लास्ट बच्चे को भी मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो, दे रहे हैं। सबके चेहरे इस समय बाप के स्नेह में लगन में मगन दिखाई दे रहे हैं। बापदादा चारों ओर के बच्चों को नयनो की दृष्टि देते हुए यही मिलन मना रहे हैं बच्चे सदा हर दिन इसी मिलन के खुशी और मौज में आगे बढते चलो। जैसे दिन का नाम हैं होली, ऐसे जीवन के हर दिन होली बन अर्थात् पवित्र बन पवित्रता के वायबेशन चारों ओर फैलाते रहो।

बापदादा एक बात पर खुश हैं, क्या देखा? कि हर बच्चा बापदादा को मुबारक दे रहे हैं और भिन्न-भिन्न स्थान की मुबारकें, मुबारकों की झोली भर गई। यह मुबारक सदा याद रहे, होली मुबारक हैं। आज बापदादा ने चारों ओर के बच्चों को अमृतवेले से लेके दिल से मुबारकें दी। हर बच्चा हर सब्जेक्ट में आगे बढ़ते चलो, बापदादा हर बच्चे के साथी हैं। अभी आज के दिन बापदादा भी आये हुए सम्मुख एक-एक बच्चे को दिल की दुआओं के साथ मुबारक दे रहे हैं। मुबारक हो, मुबारक हो। होली, जो सेकण्ड बीता वह सेकण्ड के लिए क्या कहेंगे? होली, हो लिया। हर एक बच्चा अमृतवेले से लेके अपने-अपने समय प्रमाण मुबारको के गीत, दिल के गीत, मुख से गाते नही लेकिन दिल में मुबारकों के गीत बापदादा के कानो में सुनाई दिये। तो बापदादा भी एक-एक बच्चे को सम्मुख मुबारक का रेसपान्ड दे रहे हैं, हर बच्चे को दिल की दुआओं के साथ, दिल के प्यार के साथ मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो।

आज के दिन से रोज अमृतवेले अपने पुरुषार्थ प्रमाण बाप की दुआयें स्वीकार करना। बाप की दुआयें क्या हैं? बापदादा हर बच्चे को तीव्र पुरुषार्थी स्वरूप में देखने चाहते हैं। कोई भी बाते आये, बातो का काम हैं आना लेकिन आप बच्चों का काम हैं बाप के दिल की दुआयें लेना। रोज अमृतवेले अपने को बाप की दुआयें स्वीकार करना। सारा दिन ऐसे अनुभव करो कि बापदादा हमारे रक्षक बन साथ में हैं और बाप के साथ का अर्थ क्या है? बाप जो कहे, अमृतवेले जो मुरली सुनते हो उसमें याद प्यार के साथ दुआयें हैं ही। तो रोज दुआयें लेते उडते चलो और उडाते चलो। तो होली मनाना अर्थात् बीती को और वर्तमान को सदा सफलता स्वरूप बनाना हैं। सफलता स्वरूप हैं, सफलता हमारे जन्म का वरदान है। उस स्मृति से दिन को बार-बार याद करो, बापदादा का वरदान है - सफलता हर बच्चे के साथ है क्योंकि बापदादा साथ है तो सफलता सदा एक-एक बच्चे के साथ है, सिर्फ उसको प्रैक्टिकल में लाना है। है ही सफलता स्वरूप। स्वरूप ही सफलता हैं। तो आज के दिन यही वरदान स्मृति में रखना कि सफलता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है। यह स्मृति असफलता की बात को भी सफल बना देगी। तो आज के दिन को सदा सफलता स्वरूप हूँ, यह आज के दिन का बापदादा का वरदान सफलता मेंरा जन्म सिद्ध अधिकार है, यह सदा स्मृति में रखना।

तो आज होली अर्थात् बीती सो बीती। होली अर्थात् बीती। तो जो भी कुछ किया उसको आज बीती सो बीती कर आगे के लिए सफलता मेंरा जन्म अधिकार है, अमृतवेले रोज इस वरदान को स्मृति में रख सारा दिन चेक करना और सफलता स्वरूप बनना। अभी तो बहुत नॉलेजफुल बने हो, दुनिया को पैगाम देते हो और बापदादा भी हर बच्चे को यह वरदान देते हैं कि सफलता आपका जन्म का अधिकार है। तो अमृतवेले का सफलता मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है, इसको रोज स्मृति में रखना और प्रैक्टिकल में अगर कोई भी बात आवे तो सफलता के वरदान को याद करना और प्रैक्टिकल में लाना।

आज के होली के दिन का विशेष वरदान है

बाप समान, ब्रह्मा बाप समान सम्पन्न बनना ही है। फालो फादर। क्योंकि ब्रह्मा बाप साकार रूप में थे, अभी भी मददगार हैं इसलिए फालो ब्रह्मा बाप। सफलता मेरा जन्म अधिकार हैं। अधिकारी हो ना! अधिकारी हो? हाथ उठाओ। तो जहाँ सफलता अधिकार है वहाँ माया की क्या बडी बात है! माया के खेल देखते रहो, माया का काम है आना आपका काम क्या है? विजय प्राप्त करना। यह सदा याद रहे, सफलता के विजयी रत्न हूँ। हो सकता है ना! हो सकता है? सफलता के अधिकारी हैं ना! अच्छा।

आज की बहुत-बहुत-बहुत मुबारक हो। सब ठीक हैं। हाथ उठाओ। ऐसे ऐसे उठाओ। बहुत अच्छा लग रहा हैं। बापदादा भी बहुत-बहुत मुबारकों का टोकरा भरके दे रहे हैं। कुछ भी हो, याद रखना बाप की सौगात छोडना नहीं। अच्छा।

चारों ओर के देश विदेश के बच्चों को आज के दिन की मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो।

सेवा का टर्न दिल्ली और आगरा का है:- (इस टर्न में टोटल 25 हजार आये है, 14 हजार दिल्ली आगरा के हैं) बहुत अच्छा। देहली को यही वरदान है, ड़ामानुसार कि हमारे राज्य में भी दिल्ली विशेष स्थान रहेगा। जहाँ लक्ष्मी नारायण का राज्य होगा। फोरेन वाले क्या सोच रहे हैं? फोरेन वाले यह सोच रहे हैं कि हम भी दिल्ली के होंगे। कहाँ भी हो लेकिन दिल्ली तो मुख्य रहेगा तो आना जाना तो होगा ना। फंक्शन में तो आयेंगे ना! मिलते रहेंगे। डांस करते रहेगें। मजे से राज्य करते रहेगें। अभी संगमयुग का साथ वहाँ भी रहेगा। जितने नजदीक अवस्था अनुसार अभी होंगे उतना ही वहाँ भी परिवार के नजदीक होंगे। फोरेन वाले कहाँ आयेंगे? दिल्ली में आयें। सब मिल करके बहुत अच्छा राज्य करेंगे। अच्छा।

डबल विदेशी:- डबल विदेशियों ने तो आधा हाल भर दिया है। अच्छा है। अभी भारत वालों जैसा विदेशी भी हर देश से आते अपना लाभ उठाते हैं। अच्छा है। भले आये, और जाके औरों को भी साथ लायेंगे। अच्छा।

अच्छा - एक-एक बच्चे को बापदादा दिल का प्यार देते हुए गुडनाइट कर रहे हैं। अच्छा है, डबल फारेनर्स ने उन्नति अच्छी की हैं। पुरुषार्थ में भी कहाँ-कहॉ बहुत अच्छे अटेन्सन में हैं, बापदादा उन बच्चों को खास एक-एक को याद और प्यार दे रहे हैं।

दादियां - सभी अच्छा सम्भाल रहे हैं। निमित्त बनके कार्य कर रहे हैं, अच्छा कर रहे हैं, करते रहेंगे।

मोहिनी वहन:- एक-एक को वरदान है। वरदान चला रहा है और पहुच जायेंगे साथ में। राज्य करेंगे ना साथ में। आज सब तरफ की दादिया आई हैं।

रूकमणि दादी:- अभी भले नही देखती हो लेकिन बुद्धि सालिम हैं इसीलिए अभी भी जो कुछ चलता है वह जानती भी हो, चलती भी हो, चलाती भी हो। ठीक है। मुबारक हो। अच्छा।

तीनों बड़े भाईयों से:- त्रिमूर्ति सारे यज्ञ का ध्यान रखते हैं। यह त्रिमूर्ति यज्ञ की रेख-देख करने के निमित्त बने हुए हैं और साथी भी हैं, यह भी हैं। साथी भी बहुत अच्छे हैं। जैसे चला रहे हो वह भी ठीक है और एक दो के नजदीक आओ।

संस्कार में नजदीक आओ। वैसे नजदीक हो लेकिन संस्कार मिलाने में यह भी ध्यान रखो। ऐसे लगे तीन नही हैं लेकिन एक हैं। साथी तो और भी बहुत अच्छे हैं। बापदादा के पास कोई रिपोर्ट नही हैं, अच्छे हैं लेकिन और भी अच्छा बनाना है। यज्ञ की कारोबार एकदम अच्छी चल रही है, कोई बात नही हैं, अटेन्सन दे रहे हैं और आगे भी देते रहेंगे। हर एक ने जो ड्यूटी ली है, वह अच्छी सम्भाल रहे हैं। बापदादा खुश है।

हरिद्वार में सन्त सम्मेलन होने वाला हैं, आपकी कोई प्रेरणा हो:- कभी भी ऐसे धार्मिक स्थान पर जाते हैं तो उन्हों के प्रति शुभ भावना रख उनकी महिमा भी करनी चाहिए, जो वह समझें यह हमारे को रिगार्ड देते हैं। अच्छा है।

रमेंश भाई ने बहुतों की याद दी:- सभी को कहना बापदादा ने याद दिया है।

गुजरात में सरला दीदी का अमृत महोत्सव सभी ने खूब धूमधाम से मनाया है:- अच्छा है। जन्म से ही वरदानी रही हो। अभी वरदान तो आपके गले का हार हो गये हैं इसलिए जैसे निमित्त बनके चल रहे हैं वैसे और भी आगे बढाते जाओ, बढ़ाते जाओ, बढ़ाते जाओ। अच्छा।

अमर बहन:- यह भी अच्छा साथ दे रही है। अच्छा है, दोनो ही अच्छे हैं।

अच्छा - एक-एक को बापदादा याद प्यार विशेष दे रहे हैं। स्टेज पर आयेंगे तो घमसान हो जायेगा लेकिन बापदादा दूर से ही एक-एक को दृष्टि और प्यार दे रहा है।

(बाबा अगली सीजन में आयेंगे ना)

संगमयुग है साथ रहने का, साथ चलने का, साथ राज्य करने का। बाप चाहे साकार में साथ नहीं रहेगें (शिवबाबा सतयुगी राज्य में साथ नहीं रहेगे) लेकिन साथ में आपके राज्य की प्रेरणायें देते रहेगें। (रथ को भी ठीक रखना) रथ को ठीक रखेंगे। अच्छा।

रुकमणी बहन ने दीदी निर्मलशान्ता जी की याद दी, आज दीदी का पुण्यस्मृति दिवस है:- जहाँ भी है, बच्ची खुश है आप भी खुश रहो। (बाबा पटना सेवा पर जा रही हूँ) अच्छा है आगे बढती रहो।

"द फ्यूचर आफ पावर के प्रोग्राम भारत के 35 शहरो में हुए हैं, इस उपलक्ष्य में बहुत सुन्दर केक बनाया है, जिसे बापदादा और वरिष्ठ दादियां वा भाईयों ने काटा।"


30-03-14   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


किसी भी वायुमण्डल को देखते बाप के स्नेह और सहयोग से आगे बढ़ते चलो, हर एक की विशेषता देखो, स्वयं भी तीव्र पुरुषार्थ के उमंग-उत्साह में रहो और साथियों को भी उमंग-उत्साह दिलाओ

ओम शान्ति। आज बापदादा हर बच्चे में बापदादा से दिल का कितना प्यार है, वह प्यार की सूरतें हर एक बच्चे की शक्ल से देख रहे हैं। जितना बच्चों का प्यार बापदादा से है उससे ज्यादा हर बच्चे के लिए बाप के दिल में प्यार है। यह दिल का प्यार सभी बच्चों को यथा शक्ति चला रहा है, बापदादा देख रहे हैं हर बच्चे के अन्दर बाप से, बापदादा दोनों से दिल में बहुत-बहुत प्यार है। बापदादा को भी हर बच्चे के प्रति दिल में प्यार है। हर एक के दिल में बाप की यादप्यार समाई हुई है, यह अलौकिक प्यार हर एक को चला रहा है। चाहे कहाँ भी कितने भी बच्चे हैं लेकिन बापदादा के दिल का प्यार बच्चों को चला रहा है। हर एक बच्चा बापदादा के प्यार में, परिवार के प्यार में नम्बरवार चल रहे हैं। यह अलौकिक प्यार सारे कल्प में अब संगमयुग में ही अनुभव करते हो। बापदादा भी हर बच्चे के दिल का प्यार देखकर हर एक बच्चे के प्रति दिल की दुआयें देते हैं, बच्चे सदा दिल के दिलवर द्वारा दिल का प्यार लेते हुए आगे बढ़ते चलो। बापदादा के दिल का प्यार, परिवार के दिल का प्यार हर एक आत्मा को चला रहा है और चलाता रहेगा। बापदादा हर एक बच्चे के मस्तक की रेखाओं द्वारा जानते हैं कि बाप का प्यार कैसे हर एक बच्चे को चला रहा है। अभी बापदादा हर एक बच्चे को महावीर बन चलने की दुआयें दे रहे हैं। कभी भी थकना नहीं, घबराना नहीं बाप को हर बच्चा अति प्यारा है। यह प्यार ही आगे बढ़ा रहा है और आगे बढ़ाता रहेगा। ऐसे प्रभु प्यार, दिल का प्यार हर एक नम्बरवार अनुभव कर चल रहा है और हर एक बच्चे के दिल में उमंग-उत्साह है लेकिन नम्बरवार कि बाप के समान बनना ही है। सबको उमंग है ना! बाप समान बनना है ना! बन रहे हैं और आगे भी बनेंगे। हाथ उठाओ। बाप का भी दिल से प्यार है, सदा बच्चों के गुण गाते हिं वाह बच्चे वाह! बढ़ रहे हैं और बढ़ते रहो। देखो, सारे विश्व में बापदादा के सम्बन्ध का प्रैक्टिकल में अनुभव करने वाले कितने और कौन हैं! तो आप सभी प्रत्यक्ष प्रमाण हो, दिल से प्यार है और प्यार की पालना से आगे से आगे बढ़ रहे हैं। सभी प्यार की पालना से आगे बढ़ रहे हैं या कोई बीच में विघ्न आता है तो रूकते तो नहीं है? बापदादा ने देखा आगे बढ़ने का संकल्प काफी बच्चों में है, चाहे कितनी भी छोटी-मोटी रूकावटें आये लेकिन बापदादा ने देखा मैजारिटी बच्चे बाप के प्यार और नॉलेज के आधार से अच्छे आगे बढ़ रहे हैं और बढ़ते रहेंगे। बापदादा आप बच्चों को देखकर एक बात में बहुत खुश होते, वह कौन सी बात? चाहे बातें कितनी भी आयें लेकिन निर्भय बन मैजारिटी आगे बढ़ रहे हैं। बापदादा बच्चों का लक्ष्य और लक्षण देख खुश है इसलिए कभी भी किसी भी वायुमण्डल को देख उसके प्रभाव में न आकर बाप के स्नेह और सहयोग से काफी आगे बढ़ भी रहे हैं और बढ़ते रहना। एक दो को देख उनकी विशेषता को देखो, दूसरी बातों को नहीं देखो। आगे बढ़ना ही है, बोली सबको यह लक्ष्य है आगे बढ़ना ही है! वह हाथ उठाओ। एक दो की कमज़ोरी की बातें सुनते भी जैसे नहीं सुनो। खुद को भी आगे बढ़ाओ और साथियों को भी आगे बढ़ाते चलो। बापदादा ऐसे बच्चे भी देख रहे हैं, अच्छा पुरुषार्थ कर रहे हैं लेकिन तीव्र पुरुषार्थ की लहर सदा अपने में लाते हुए औरों को भी तीव्र पुरुषार्थी की लहर में लाओ। उमंग-उत्साह में लाओ, सहयोगी बनो। पुरुषार्थहीन के वायुमण्डल में नहीं आकर उन्हों को भी उमंग उत्साह में लाओ। बीच-बीच में किसी-किसी आत्माओं को पुरुषार्थ में थकावट अनुभव होती है, बापदादा देखते हैं लेकिन स्वयं पुरुषार्थ में तीव्र रहने वाले औरों को भी पुरुषार्थ में आगे बढ़ाओ। वायुमण्डल दिनचर्या का ऐसे बनाओ जो सभी पुरुषार्थ के उमंग-उत्साह से बढ़ते भी चले, बढ़ाते भी चले क्योंकि एक दो के साथी हो ना। तो सबके प्रति शुभ भावना के आधार से बढ़ते चलो, उमंग-उल्हास अपने अनुभव का सुनाते हुए एक दो के सहयोगी बनो। 

बापदादा ने देखा मैजारिटी पुरुषार्थ की लहर में ठीक चल रहे हैं लेकिन पुरुषार्थ में ढीले साथी होने के कारण थोड़ा-थोड़ा असर पड़ जाता है, वह अटेंशन दो। हमें नम्बरवन या नम्बर आठ तक आना ही है। सबको उमंग है, आठ के अन्दर रहेंगे ना कि पीछे जायेंगे। जो समझते हैं हम विजयी बनेंगे, हैं और बनेंगे भी। वह हाथ उठाओ। हाथ तो सभी बहुत अच्छा उठाते हैं, उसका शुक्रिया हो लेकिन हाथ सदा उठाते रहना, कभी-कभी नहीं। वायुमण्डल क्या भी बनें लेकिन आप अपने वायुमण्डल से वायुमण्डल को परिवर्तन करो। वायुमण्डल में आओ नहीं, आगे बढ़ो।

और आगे बढ़ाते चलो। एक दो के साथी हैं ना! तो सदा देना अर्थात् आगे बढ़ाना। तो आगे बढ़ते चलो। अब हर एक बच्चा किस लक्ष्य में है। तीव्र पुरुषार्थी। ढीला पुरुषार्थी नहीं। ठीक हो जायेगा, ठीक हो जायेगा, यह नहीं सोचो। ठीक होना ही है क्योंकि बाप से प्यार है ना। बाप से प्यार है तो बाप को किससे प्यार है? तीव्र पुरुषार्थी बच्चों से। तो आप क्या बनेंगे? तीव्र पुरुषार्थी, जो समझते हैं तीव्र पुरुषार्थी बन औरों के भी सहयोगी बनेंगे, वह हाथ उठाओ। हाथ उठाने में तो होशियार हैं, बापदादा खुश है। हिम्मत तो रखी ना! तो हिम्मते बच्चे मददे खुदा। जरूर मदद मिलेगी। सिर्फ इच्छा रखो बस बनना ही है, करना ही है, पुरुषार्थहीन नहीं, पुरुषार्थ। बापदादा खुश होते हैं, कोई कोई बच्चा अभी भी देखते हैं पुरुषार्थ में बातें आते थोड़ा कमज़ोर बन जाते लेकिन नहीं, बहादुर बनो, बहादुर बनाओ। कम से कम जो रेग्युलर आने वाले हैं उन्हों को तीव्र पुरुषार्थ का लक्ष्य है, ऐसे नहीं है लक्ष्य नहीं है, है लक्ष्य लेकिन बीच में कोई बातें आने से थोड़ा पुरुषार्थ की बातें सोचते हैं लेकिन करने मे थोड़े ढीले पड़ जाते हैं। 

तो रोज अमृतवेले चेक करो कि मेरे पुरुषार्थ की गति तीव्र है या चल रहे हैं, पहुँच ही जायेंगे, हो ही जायेगा, ऐसे संकल्प तो नहीं रखते! तीव्र पुरुषार्थी बनो। पुरुषार्थी तो हैं लेकिन चेक करो तीव्र पुरुषार्थी हैं? बापदादा को प्रिय कौन लगते हैं? तीव्र पुरुषार्थी। तो हर एक बच्चे को क्या बनना है? तीव्र पुरुषार्थी बनना है? हाथ उठाओ। बनना है, बनना है या बनके चल रहे हो? यह लक्ष्य कभी भी नहीं छोड़ना, तीव्र पुरुषार्थी रहना ही है, औरों को भी साथ देना है। यह लक्ष्य है, जिसके दिल में यह लक्ष्य है वह हाथ उठाओ। अच्छा हाथ तो सभी उठाते हैं। चलो। थोड़ा ठण्डा है तो तीव्र कर देना क्योंकि दिनप्रतिदिन माया भी अपना काम करती रहती है। लेकिन आप सब बच्चे कौन हो? आपका टाइटल क्या है? मायाजीत। कौन मायाजीत बनने वाले हैं, वह हाथ उठाओ। सभी ने हाथ उठाया है। बापदादा को खुशी होती है कि हिम्मत तो है, हिम्मते बच्चे मददे बाप तो है ही। हिम्मत नहीं हारना। बापदादा का सहयोग पहले है। हिम्मत हारा तो सब गया। हिम्मत है तो हिम्मते बच्चे मदद बाप है ही। तो ठीक है ! हिम्मत वाले हो, वह हाथ उठाओ। कई तो दो-दो उठा रहे हैं। अच्छा है, हाथ उठाना तो सहज है लेकिन पुरुषार्थ का हाथ भी उठाना। बापदादा खुश होते हैं जब बच्चों में उमंग उल्हास की लहर होती है क्योंकि हर एक बच्चे का लक्ष्य है नम्बरवन होने का। है ना ! नम्बर टू तो नहीं बनना है ना ! जो समझते है नहीं नम्बरवन होना ही है, वह हाथ उठाओ। हाथ तो सभी उठा रहे हैं। हाथ तो अच्छा उठा रहे हैं। बापदादा खुश है आपका हाथ उठाना देख खुश है लेकिन खुश करते रहना। अच्छा है,

आज टर्न किसका है

इन्दौर और भोपाल जोन की सेवा का टर्न है:- (10 हजार हैं) आधा क्लास तो यही है। (इस टर्न में 26 हजार हैं। सबसे बड़ा ग्रुप है) तो सक्सेस है। मुबारक हो। जो टर्न वाले हैं वह हाथ उठाओ। अच्छा है। हिम्मते बच्चे मददे बाप है। अच्छा है। हमेशा हिम्मत हर कार्य में रखना चाहिए। हम नहीं करेंगे तो कौन करेगा ! हम ही तो हैं, ऐसे हैं ना ! हम ही तो हैं और बापदादा खुश होते हैं कि हिम्मत से मदद भी मिल जाती है। अच्छा है। मुबारक हो, मुबारक हो। 

डबल विदेशी भाई बहिनें:- बापदादा सभी बच्चों पर तो खुश है ही लेकिन फारेनर्स ने अच्छा सभा का भाग्य स्पष्ट किया है। डबल फारेनर्स को बाबा देख खुश है कि कोई भी ऐसा टर्न नहीं हुआ जिसमें फारेनर्स हाथ नहीं उठाये। और अच्छी संख्या में आते हैं इसलिए मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो। अच्छा। 

मधुवन निवासियों से:- अच्छा है, मधुबन वालों का निमन्त्रण होता है ना, इसलिए मधुबन वाले भी अच्छी सेवा कर रहे हैं। सेवा की रिजल्ट अच्छी है। बापदादा खुश है कि मधुबन निवासी अच्छा ध्यान हर एक डिपार्टमेंट में दे रहे हैं इसलिए मुबारक हो, मुबारक हो मधुबन वालों को। अच्छा। 

पहली बार बहुत आये हैं:- आधा क्लास पहली बारी आये हैं। अच्छी तरह से हाथ उठाओ। अच्छा। 

चारों ओर के विशेष भाई बहिनें, जो सदा डायरेक्शन पर अटल हैं, ऐसे बच्चे भी बापदादा के पास नोट हैं। जो हर कार्य में आगे बढ़ते हैं तो बापदादा नोट करते हैं, भिन्न-भिन्न कार्य में वही आत्मायें हैं जो हाथ उठाते हैं। अच्छा है। ऐसे पुरुषार्थी बच्चे भी बापदादा देखते हैं, उन्हों को विशेष बहुत-बहुत-बहुत दिल से यादप्यार स्वीकार हो। 

दादी जानकी जी ने खास याद दी है, तबियत ठीक नहीं है, कमरे में सुन रही हैं - जनक बच्ची को विशेष यादप्यार दे रहे हैं। आप सबकी तरफ से याद दे रहे हैं क्योंकि दिल तो उनकी यहाँ है, बाकी शरीर वहाँ है। सारी सभा उनके सामने है। अच्छे पुरुषार्थ में नम्बर ले रही है। तो बीमारी में भी नम्बरवन लिया है। नहीं तो कभी मिस करने वाली नहीं है। बापदादा बहुत-बहुत दिल से प्यार दे रहे हैं। आप सबको भी। (दादी जानकी कहती है बाबा ऐसा जादू कर दे जो मैं सम्मुख आ जाऊं) अभी उठना ठीक नहीं है। दर्द है ना। 

मोहिनी बहन:- यह भी हिम्मत रखती है, मुबारक हो। बढ़ाता रहेगा। 

ईश दादी:- एवररेडी है। हर कार्य में हाँ जी, हाँ जी। अच्छा है। पार्ट अच्छा बजा रही है। 

रूकमणी दादी:- ठीक है ना। अच्छी है, हिम्मत रखके इतना बढ़ी है। अच्छा है। सभी दिल्ली वालों को बहुत-बहुत मुबारक हो, हर कार्य में ध्यान रखते हैं, एवररेडी। 

(निर्वैर भाई ने कहा मीटिंग के टाइम भी बापदादा को आना है, हमारी रिक्वेस्ट है) देखेंगे। 

बृजमोहन भाई:- अच्छा चल रहा है, धीरे धीरे बढ़ेगा। 

गामदेवी सेन्टर की गोल्डन जुबली है:- गामदेवी तो फाउण्डेशन है। अच्छा चलाया है, (सबने याद दी है) सबको बहुत बहुत यादप्यार देना। 

गाडली स्ट्रडियो में डबल विदेशियों की सेवाओं का समाचार देने का बनाया है:- बहुत अच्छा। 

कलकत्ता बांगुर सेवाकेन्द्र की सिल्वर जुबली है:- सभी की तरफ से बापदादा मुबारक दे रहे हैं। मुबारक हो। (हाल के बाहर बगीचे में, कांफ्रेंस हाल में भी बहुत से भाई बहिनें बैठे हैं) चारों ओर के जहाँ जहाँ भी बच्चे देख रहे हैं, बापदादा भी आप सबको देख करके यादप्यार दे रहे हैं और गुडनाइट कर रहे हैं।