26-10-75   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


विकारी देह रूपी साँप से सारी कमाई खत्म

सर्व प्राप्तियों का अधिकार दिलाने वाले, बीती को बीती कर वर्तमान और भविष्य के हर संकल्पों को श्रेष्ठ बनाने वाले और आत्माओं के कर्मों की कर्म-कहानी को जानने वाले धर्मराज शिव बाबा बोले :-

बाप-दादा सब बच्चों को देख रहे हैं कि हर-एक ने यहाँ आने पर कोर्स किया है? कोर्स किया है ना। कोर्स के बाद फिर रिवाइज़ कोर्स चला। रिवाइज के बाद अब अन्तिम कोर्स है रियलाइजेशन कोर्स। अर्थात् जो कुछ सुना, जो पाया, जो बाप के चरित्र देखे उसी प्रमाण अपने में समाया कितना और गँवाया कितना? सिर्फ सुनने वाले बने या स्वयं सम्पन्न बने? समर्थ बने या सिर्फ अन्य श्रेष्ठ आत्माओं व बापदादा के गुणगान करने वाले बने? ज्ञान-स्वरूप, याद-स्वरूप, दिव्य गुण सम्पन्न स्वरूप और सदा सेवाधारी स्वरूप बने या इन सबके सिर्फ सुमिरण वाले बने? ज्ञान तो बहुत ऊँचा है, योग बड़ा श्रेष्ठ है, दिव्य-गुण धारण करना आवश्यक है और सेवा करना मुझ ब्राह्मण का फर्ज है, ऐसा सिर्फ सुमिरण करते हो या स्वरूप भी बने हैं? इसी प्रकार से अपने आप को रियलाइज करना, यह है लास्ट कोर्स। जैसे दीपावली पर पुराना पोतामेल समाप्त कर नया शुरू करते हैं और अपने रजिस्टर्स चेक करते हैं ऐसे आप सबको भी आदि से अन्त तक अर्थात् आज तक अपना रजिस्टर चेक करना है, कि हर सब्जेक्ट में कितनी मार्क्स ली हैं? समय के प्रमाण जबकि मंज़िल सामने दिखाई दे रही है, डबल लक्ष्य स्पष्ट है - वर्तमान संगमयुगी फरिश्तेपन का लक्ष्य और भविष्य देवता स्वरूप का लक्ष्य। जैसे लक्ष्य स्पष्ट है वैसे लक्षण स्पष्ट दिखाई देते हैं? विश्व-परिवर्तन के पहले क्या स्वयं में परिवर्तन हुआ अनुभव होता है? ऐसी चेकिंग की है?

बापदादा ने सर्व बच्चों के रजिस्टर चेक किये। जिन्होंने अपनी कर्म-कहानी लिखी उनकी रिजल्ट भी देखी। तो क्या देखा - कई आत्माओं ने भय और लज्जा के वश लिखी ही नहीं है। लेकिन बापदादा के पास निराकारी और साकारी बाप के रूप में हर बच्चे का रजिस्टर आदि से आज तक का स्पष्ट है। इसको तो कोई मिटा नहीं सकता है। अब तक के रजिस्टर की रिजल्ट में विशेष तीन प्रकार की रिजल्ट हैं - एक छिपाना; दूसरा - कहीं-न-कहीं फँसना; तीसरा- अलबेलेपन में बहाना बनाना। बहानेबाजी में बहुत होशियार हैं। अपने आप को व अपनी गलती को छिपाने के लिए बहुत वन्डरफुल बातें बनाते हैं। आदि से अब तक ऐसी बातों का संग्रह करें तो आजकल के शास्त्रों समान बड़े शास्त्र बन जायें। अपनी गलती को गलती मानने के बजाय उसे यथार्थ सिद्ध करने में व झूठ को सच सिद्ध करने में आजकल के काले कोट वाले वकीलों के समान हैं, माया से लड़ने के बजाय ऐसे केस लड़ने में बहुत होशियार हैं। लेकिन यह याद नहीं रहता कि अभी अपने को सिद्ध करना अर्थात् बाप द्वारा जन्म-जन्मान्तर के लिए सर्व-सिद्धियों की प्राप्ति से वंचित होना है। सिद्ध करने वालों में जिद्द करने के संस्कार ज़रूर होते हैं। ऐसी आत्मा सद्गति को नहीं पा सकती। अब तक मैजॉरिटी पहले पाठ अर्थात् पहली बात - पवित्र दृष्टि और भाई-भाई की वृत्ति में फेल हैं। अब तक इस पहले फरमान पर चलने वाले फरमाँबरदार बहुत थोड़े हैं। बार-बार इस फरमान का उल्लंघन करने के कारण अपने ऊपर बोझ उठाते रहते हैं। इसका कारण यह है कि पवित्रता की मुख्य सब्जेक्ट का महत्व नहीं जानते हैं, उसके नुकसान की नॉलेज को नहीं जानते।

कोई भी देहधारी में संकल्प से व कर्म से फंसना, इस विकारी देह रूपी साँप को टच करना अर्थात् अपनी की हुई अब तक की कमाई को खत्म करना है। चाहे कितना भी ज्ञान का अनुभव हो या याद द्वारा शक्तियों की प्राप्ति का अनुभव किया हो या तन-मन-धन से सेवा की हो, लेकिन सर्व प्राप्तियाँ इस देह रूपी साँप को टच करने से इस साँप के विष के कारण, जैसे विष मनुष्य को खत्म कर देता है, वैसे ही यह साँप भी अर्थात् देह में फँसने का विष सारी कमाई को खत्म कर देता है। पहले की हुई कमाई के रजिस्टर पर काला दाग पड़ जाता है जिसको मिटाना बहुत मुश्किल है। जैसे योग-अग्नि पिछले पापों को भस्म करती है वैसे यह विकारी भोग भोगने की अग्नि पिछले पुण्य को भस्म कर देती है। इसको साधारण बात नहीं समझना। यह पाँचवीं मंज़िल से गिरने की बात है। कई बच्चे अब तक अलबेलेपन के संस्कार-वश इस बात को कड़ी भूल व पाप कर्म नहीं समझते हैं। वर्णन भी ऐसा साधारण रूप में करते हैं कि मेरे से चार पाँच बार यह हो गया, आगे नहीं करूँगा। वर्णन करते समय भी पश्चाताप का रूप नहीं होता, जैसे साधारण समाचार सुना रहे हैं। अन्दर में लक्ष्य रहता है कि यह तो होता ही है मंज़िल तो बहुत ऊँची है, अभी यह कैसे होगा?

लेकिन फिर भी आज ऐसे पाप आत्मा, ज्ञान की ग्लानि कराने वालों को बापदादा वार्निंग देते हैं कि आज से भी इस गलती को कड़ी भूल समझकर यदि मिटाया नहीं तो बहुत कड़ी सज़ा के अधिकारी बनेंगे। बार-बार अवज्ञा के बोझ से ऊँची स्थिति तक पहुँच नहीं सकेंगे। प्राप्ति करने वालों की लाइन के बजाय पश्चाताप करने वालों की लाइन में खड़े होंगे। प्राप्ति करने वालों की जयजयकार होगी और अवज्ञा करने वालों के नैन और मुख हाय हाय का आवाज निकालेंगे और सर्व प्राप्ति करने वाले ब्राह्मण ऐसी आत्माओं को कुलकलंकित की लाइन में देखेंगे। अपने किये विकर्मों का कालापन चेहरे से स्पष्ट दिखाई देगा। इसलिये अब से यह विकराल भूल अर्थात् बड़ी-से-बड़ी भूल समझकर के अभी ही अपनी पिछली भूलों का पश्चाताप दिल से करके बाप से स्पष्ट कर अपना बोझ मिटाओ। अपने आप को कड़ी सजा दो ताकि आगे की सज़ाओं से भी छूट जायें।

अगर अब भी बाप से छुपावेंगे व अपने को सच्चा सिद्ध करके चलाने की कोशिश करेंगे तो अभी चलाना अर्थात् अन्त में और अब भी अपने मन में चिल्लाते रहेगे - क्या करूँ, खुशी नहीं होती, सफलता नहीं होती, सर्व-प्राप्तियों की अनुभूति नहीं होती। ऐसे अब भी चिल्लायेंगे और अन्त में हाय मेरा भाग्य कह चिल्लायेंगे। तो अब का चलाना अर्थात् बार-बार चिल्लाना। अगर अभी बात को चलाते हो तो अपने जन्म-जन्मान्तर के श्रेष्ठ तकदीर को जलाते हो। इसलिये इस विशेष बात पर विशेष अटेन्शन रखो। संकल्प में भी इस विष-भरे साँप को टच नहीं करना। संकल्प में भी टच करना अर्थात् अपने को मूर्छित करना है। तो रजिस्टर में विशेष अलबेलापन देखा। दूसरी रिजल्ट कल सुनाई थी कि किन-किन बातों में चढ़ती कला के बजाय रूक जाते हैं। तीव्र गति के बजाय मध्यम गति हो जाती है। यह है मैजॉरिटी का रिजल्ट। इसलिये अब अपने आप को रियलाइज़ करो अर्थात् अन्तिम रियलाइज कोर्स समाप्त करो। अपने आप को अच्छी तरह हर प्रकार से हर सब्जेक्ट में चेक करो। सर्व मर्यादाओं को, बाप के फरमानों को और श्रेष्ठ-मत को कहाँ तक प्रैक्टिकल में लाया है, उसको चेक करो और साथ-साथ मधुबन महायज्ञ में सदाकाल के लिये अन्तिम आहुति डालो। समझा? अभी बाप के प्रेम-स्वरूप का उल्टा एडवान्टेज नहीं उठाओ। नहीं तो अन्तिम महाकाल रूप के आगे एक भूल का हजार गुणा पश्चाताप करना पड़ेगा।

ऐसे इशारे से समझने वाले ब्राह्मण सो देवता, सर्व प्राप्ति के अधिकार प्राप्त करने वाले अधिकारी और बीती को बीती कर भविष्य और वर्तमान के हर संकल्प को श्रेष्ठ बनाने वाले, ऐसे ब्राह्मण-कुल के दीपकों को, उम्मीदवार सितारों को अपनी और विश्व की तकदीर जगाने वाले तकदीरवान आत्माओं को बापदादा का याद-प्यार और नमस्ते।

इस मुरली की विशेष बातें

1. बच्चों के कर्म-कहानी के रजिस्टर्स में विशेष तीन प्रकार की रिजल्ट हैं - एक छिपाना, दूसरा कहीं-न-कहीं फंसना, तीसरा अलबेलेपन में बहाने बनाना।

2. अभी अपने से हुई भूल को सच सिद्ध करना अर्थात् बाप द्वारा जन्मजन्मान्तर के लिए सर्व सिद्धियों की प्राप्ति से वंचित होना है।

3. कोई भी देहधारी में संकल्प से व कर्म से फंसना अर्थात् अपनी की हुई अब तक की कमाई को खत्म करना है।

5. जैसे लक्ष्य स्पष्ट है - वर्तमान संगमयुगी फरिश्तेपन का और भविष्य देवता स्वरूप का - वैसे लक्षण भी स्पष्ट दिखाई देने चाहिएं। ए प्रतिज्ञा करो कि - देह-रूपी विष भरे साँप को संकल्प में भी टच नहीं करेंगे।