22-06-77   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


सितारों की दुनिया का रहस्य

विश्व को लाईट, माईट देने के निमित्त बने हुए सर्व चमकते हुए चैतन्य सितारों प्रति ज्ञान-सूर्य ने महावाक्य उच्चारे:-

आज बाप-दादा सर्व सितारों को चमकते हुए रूप में देख रहे हैं। चमकते सब सितारे हैं लेकिन चमकने में भी नम्बर हैं। सितारों की दुनिया अर्थात् अपनी दुनिया, देखी है? सितारों की दुनिया का गीत गाते हैं लेकिन वह कौन से सितारों की दुनिया है जिसका गायन है, इस रहस्य को भी आप सब जानते हो? हर सितारे का अपना-अपना प्रभाव दिखाते हैं। सितारों के आधार पर जन्मपत्रि और भविष्य बताते हैं। चैतन्य रूप में आप ज्ञान सितारे सारे कल्प के हर आत्मा के जन्मपत्रि के आधार मूर्त्त हो। ज्ञान सितारों के श्रेष्ठ जन्म और वर्तमान जन्म के आधार पर प्रालब्ध के जन्म, अर्थात् पूज्य पद के जन्म और पूज्य के आधार पर पुजारी के जन्म, ऐसे 84 जन्मों की कहानी के आधार पर अन्य धर्म आत्माओं के जन्म की पत्रि का आधार है। आपकी जन्मपत्री में उन्हों की जन्मपत्री नूंधी हुई है। आप हीरो और हीरोइन पार्टधारी के आधार पर सारा ड्रामा नूंधा हुआ है।

आप आत्माओं का पुजारीपन आरंभ होना और अन्य धर्म की आत्माओं की स्थापन होना, आप पूर्वज आत्माओं के आधार पर है। यह छोटी-छोटी बिरादरियाँ निकलती हैं, इसलिए यादगार रूप में भी हद के सितारों के आधार पर भविष्यदर्शा बनते हैं। क्योंकि इस समय आप त्रिकालदर्शी बनते हैं, आप चैतन्य सितारे त्रिकालदर्शी हो। हर आत्मा को भविष्य बनाने के निमित्त बने हुए हो। चाहे मुक्ति दो, चाहे जीवन्मुक्ति दो। लेकिन जीवन्मुक्ति के गेट खोलने के निमित्त ज्ञान-सूर्य बाप के साथ ज्ञान-सितारे निमित्त बनते हैं। इसलिए आपकी जड़ यादगार सितारे भी भविष्यदर्शा बने हुए हैं अर्थात् भविष्य दिखाने के निमित्त बने हुए हो। अभी जड़ यादगार हद के सितारे को देखते, अपना सितारा स्वरूप स्मृति में आता है? सितारों में भी अलग-अलग स्पीड दिखाते हैं। चक्र लगाने की स्पीड कोई की तेज गति दिखाते और कोई की धीमी गति दिखाते। कोई सितारे संगठित रूप हैं, कोई सितारे एक दो से कुछ दूरी पर दिखाते हैं, कोई बार-बार जगह बदली करते हैं और कोई पुच्छल तारे होते हैं। यह सब प्रकार की चैतन्य सितारों की स्थिति, पुरूषार्थ की स्पीड, अचल और हलचल का रूप संगठित रूप में, सेवाधारी वा सर्व स्नेही वा सहयोगी का स्वरूप, श्रेष्ठ गुणों और कर्त्तव्य का स्वरूप, यादगार रूप में दिखाया है।

सितारों का चन्द्रमा के साथ सम्बन्ध दिखाया है। कोई चन्द्रमा के समीप हैं और कोई दूर हैं। ज्ञान सूर्य की सन्तान होते हुए भी चन्द्रमा के साथ का चित्र क्यों बना हुआ है? इसका भी रहस्य है। चन्द्रमा अर्थात् बड़ी माँ, ब्रह्मा को कहा जाता है। ज्ञान सूर्य से सर्व शक्तियों की नॉलेज की लाईट जरूर लेते हैं, लेकिन ड्रामा के अन्दर पार्ट बजाने में साकार रूप में साथ आदि पिता ब्रह्मा और ब्राह्मणों का है। ज्ञान सूर्य इस चक्र से न्यारा रहता है। इसीलिए अनेक जन्मों का भिन्न नाम-रूप में, साथ चन्द्रमा और ज्ञान सितारों का रहता है। इसी कारण यादगार चित्र में भी चन्द्रमा और सितारों का सम्बन्ध है। अपने आपसे पूछो कि मैं कौनसा सितारा हूँ? संगठित रूप में सर्व के स्नेही और सदा सहयोगी बनने की स्थिति रहती है? वा संगठन में स्वभाव, संस्कार, स्थिति बदल लेते हैं, अर्थात् स्थान बदल लेते हैं? सदा चमकते हुए विश्व को रोशन करने वाले सितारे हो? वा स्वयं को स्वयं भी नॉलेज की लाईट और याद की माईट नहीं दे सकते हो? अन्य आत्माओं को लाईट और माईट के आधार पर ठहरे हुए हैं? सदा स्वयं को त्रिकालदर्शी स्थिति में स्थित रखते हो? ऐसे अपने आपको चेक करो। सुनाया था ना कि तीन प्रकार के सितारे हैं - एक है सदा लकी सितारे, दूसरे हैं सदा सफलता के सितारे, तीसरे हैं उम्मीदवार सितारे। अपने से पूछो तीनों में से मैं कौन? अपने आपको जानते हो ना - मैं कौन हूँ? पहेली हल कर ली है ना? स्वयं ही स्वयं को जज करो, समझा! अच्छा, आज मुरली चलाने नहीं आए हैं। मिलने के लिए आये हैं, यह मिलन ही कल्पकल्प की नूंध है। इस मिलन की यादगार जगह-जगह पर अनेक रूपों से मेला मनाते हैं।

पार्टियों से:-

सदा स्वयं को हर कर्म करते हुए तन के भी, धन के भी, प्रवृत्ति के भी ट्रस्टी समझ कर चलते हो? ट्रस्टी की विशेषता क्या होती है? एक शब्द में कहें - ट्रस्टी अर्थात् नष्टोमोहा। ट्रस्टी का किसी में मोह नहीं होता; क्यों? क्योंकि मेरापन नहीं है। मेरे में मोह जाता है। जो भी प्रवृत्ति के अर्थ साधन मिले हुए हैं वा सेवा के अर्थ सम्बन्ध होता है, उसमें मेरापन नहीं लेकिन बाप-दादा का दिया हुआ अमानत समझकर सेवा करेंगे वा साधनों को कार्य में लगाएंगे तो सहज ही ट्रस्टी बन जाएंगे। ट्रस्टी अथार्त् मैं-पन समाप्त और बाबा-बाबा ही मुख से निकले ऐसी स्थिति है? या जिन साधनों को कार्य में लगाते हो उसमें मेरापन का भान है? मेरापन है तो देहभान आता है। अगर तन के भी ट्रस्टी है तो देह का भान हो नहीं सकता। जब से जन्म हुआ तो पहला वायदा क्या किया? जो मेरा सो बाप का। मरजीवा हो गए ना? फिर मेरापन कहां से आया? दी हुई चीज़ कभी वापिस नहीं ली जाती। तो सदा देही अभिमानी बनने का अर्थात् नष्टोमोहा बनने का सहज साधन क्या हुआ? ट्रस्टी हूँ, मैं ट्रस्टी हूँ। कल्प पहले के यादगार में भी अर्जुन का जो यादगार दिखाया है - उसमें अर्जुन को मुश्किल कब लगा? जब मेरापन आया। मेरा खत्म तो नष्टोमोहा। अर्थात् स्मृति स्वरूप हो गए। मेरा पति, मेरी पत्नी, मेरा घर, मेरे बच्चे, मेरी दुकान, मेरा दफ्तर - यह मेरा-मेरी सहज को मुश्किल कर देता है। सहज मार्ग का साधन है - नष्टो मोहा अर्थात् ट्रस्टी। इस स्मृति से स्वयं और सर्व को सहज योगी बनाओ। समझा?

व्यर्थ समाप्त हो समर्थ बनने की सहज युक्ति बताते हुए बाप-दादा बोले

वैरायइटी स्थानों से आते हुए इस समय सब मधुबन निवासी हो? इस समय अपने को गुजराती, पंजाबी, यू.पी. निवासी तो नहीं समझते? सदैव अपने को परमधाम निवासी वा पार्ट बजाने लिए मधुबन निवासी समझो। मधुबन निवासी समझने से नशा वा खुशी रहती है। मधुबन में कितनी भी लकलीफ में हो, फिर भी यहाँ रहना पसन्द करते। घर में भल डनलप के गद्दे हो फिर भी यहाँ अच्छा लगता। क्योंकि मधुबन निवासी बनने से ऑटोमेटिकली सहज और निरन्तर योगी बन जाते। मधुबन की महिमा भी है। मधुबन और मधुबन की मुरली मशहूर है। इसलिए मधुबन में आना सब पसन्द करते हैं। तो सदैव अपने को मधुबन निवासी समझकर चलना। तो सहज योगी की स्थिति रहेगी। मधुबन याद आने से स्थिति सदा खुश हो जाएगी। मधुबन याद आया तो व्यर्थ संकल्प समाप्त हो समर्थ संकल्प का अनुभव याद आने से समर्थ हो जाएंगे। घर नहीं जाते हो सेवास्थान पर जाते हो। घर में जाकर भी अगर पढ़ाई और बाप को साथी बनाने वाला सदा नशे और खुशी में अटल रहेगा। सदा बाप और सेवा इसी स्मृति में रहो तो समर्थ रहेंगे। स्थिति सदा अटल रहेगी। अच्छा।

जब किसी भी प्रकार का पेपर आता है तो घबराओ नहीं। क्वेश्चन मार्क में नहीं आओ कि यह क्यों आया? इस सोचने में टाईम वेस्ट मत करो। क्वेश्चन मार्क खत्म और फुल स्टाप, तब क्लास चेन्ज होगा अर्थात् पेपर में पास हो जाएंगे। फुल स्टाप देने वाला फुल पास होगा। क्योंकि फुल स्टाप है बिन्दी की स्टेज। देखते हुए न देखो, सुनते हुए न सुनो। बाप का सुनाया हुआ सुनो, बाप ने जो दिया है वह देखो, इसी प्रैक्टिस से फुल पास होंगे। पेपर में पास होने की निशानी है - आगे बढ़ना अर्थात चढ़ती कला का अनुभव करेंगे। अतिइन्द्रिय सुख के झूले में झूलते रहेंगे। सर्व प्राप्ति का अनुभव ऑटोमेटिकली होता रहेगा। अच्छा।

सदा बाप से मिलन मनाने वाले, संकल्प, बोल और कर्म में सफलता के सितारे, सदा बाप को साथी बनाने वाले समीप सितारे, हर संकल्प से विश्व को लाईट-माईट देने वाले, सदा चमकते हुए सितारों को बाप-दादा का याद-प्यार और नमस्ते।