30-01-1980       ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा       मधुबन


"स्नेह, सहयोग और शक्ति स्वरूप के पेपर्स की चेकिंग और रिजल्ट"

आज बाप-दादा चारों ओर के श्रेष्ठ बच्चों को देख रहे हैं। चारों ओर के बच्चों का एक ही स्नेह और याद का संकल्प है। अच्छे-अच्छे सर्विस एबुल, सहजयोगी बच्चे बाप-दादा के सदा साथ हैं। दूर होते हुए भी स्नेह के आधार पर अति समीप हैं। आज बाप-दादा हरेक बच्चे के स्नेह, सहयोग और शक्ति स्वरूप की श्रेष्ठ मूर्त देख रहे थे। आदि से अब तक तीनों ही विशेषताओं में विशेष कितने मार्क्स रहे हैं? स्नेह में तीन बातें विशेष देखीं

1. अटूट स्नेह - परिस्थितियाँ वा व्यक्ति स्नेह के धागे को तोड़ने की कितनी भी कोशिश करें लेकिन परिस्थितियों और व्यक्तियों की ऊँची दीवारों को भी पार कर सदा स्नेह के धागे को अटूट रखा है। कारण व कमज़ोरी की गाँठ बार-बार नहीं बाँधी है। ऐसा अटूट स्नेह है।

2. सदा सर्व सम्बन्धों से प्रीति की रीति प्रैक्टिकल में निभाई है। एक सम्बन्ध की भी प्रीति निभाने में कमी नहीं।

3. स्नेह का प्रत्यक्ष रिटर्न अपने स्नेही मूर्त द्वारा कितनों को बाप का स्नेही बनाया है। सिर्फ ज्ञान के स्नेही नहीं या प्योरिटी के स्नेही या बच्चों के जीवनपरिवर्त न के स्नेही नहीं या श्रेष्ठ आत्माओं के स्नेही नहीं, लेकिन `डायरेक्ट बाप के स्नेही'। आप अच्छे हो, ज्ञान अच्छा है, जीवन अच्छा है - यहाँ तक नहीं, लेकिन बाप अच्छे-से-अच्छा है। इसको कहा जाता है बाप के स्नेही बनाना। तो स्नेह में इन तीन बातों की विशेषता देखी।

2. सहयोग में - मुख्य बात 1. निष्काम सहयोगी हैं? 2. सहयोग में मनसा- वाचा-कर्मणा, सम्बन्ध और सम्पर्क में इन सभी रूप के सहयोगी सदा रहे हैं? 3. ऐसे योग्य सच्चे सहयोगी कितने बनाये हैं?

3. शक्ति स्वरूप

1. मास्टर सर्वशक्तिवान बने हैं या शक्तिवान।

2. समय पर शक्तियों के शस्त्र का लाभ ले सके कि शस्त्र लॉकर में पड़े हुए हैं।

3. स्व की शक्तियों की प्राप्ति द्वारा औरों को मास्टर सर्वशक्तिवान कहॉ तक बनाया है?

इन तीन बातों की विशेषता चेक कर रहे थे। सुनाया ना आजकल पेपर्स चेक हो रहे हैं। तो आज यह पेपर चेक हुआ। रिजल्ट क्या हुई? तीनों की टोटल मार्क्स में फुल पास, पास और रहम करके पास करने वाले, तीनों नम्बरवार रहे। फुल पास वाले आधे से भी कम। पास वाले 70% और रहम के पास करने वालों की भी लम्बी लिस्ट थी। अब आगे क्या करना हैं?

यह रिजल्ट है बाप के स्वरूप की। अभी भी बाप के रूप में चैक कर रहे हैं। लेकिन फाइनल रिजल्ट में बाप के साथ-साथ धर्मराज भी होंगे। उस फाइनल रिजल्ट के लिए अभी सिर्फ एक मार्जिन है। लास्ट चान्स है। वह कौन-सा?

1. एक तो दिल के अविनाशी वैराग द्वारा अपनी बीती हुई बातों को, संस्कार रूपी बीज को जला दें। यह जलाने का यज्ञ रचें।

2. यह जलाने के साथसाथ अमृतवेले से रात तक ईश्वरीय नियमों और मर्यादाओं को सदा पालन करने का व्रत लें।

3. निरन्तर महादानी बन, पुण्य आत्मा बन प्रजा को दान करें। ब्राह्मणों को सदा सहयोग देने का पुण्य करें। अविनाशी दान-पुण्य का कार्य चलता रहे। चाहे मनसा द्वारा, चाहे वाणी द्वारा या सम्बन्ध व सम्पर्क द्वारा। ऐसे हाई जम्प देने वाला डबल लाइट बन, श्रेष्ठ पुरूषार्थ द्वारा उड़ता पंछी बन रिजल्ट तक पहुँच सकता है। तो फाइनल रिजल्ट तक ऐसे पुरूषार्थ करने का चान्स है। समझा। इसलिए चेकिंग हो रही है कि सुनकर, समझकर लास्ट चान्स लें।

ब्रह्मा बाप बोले - ``साकार रूप द्वारा पालना हुई, अव्यक्त रूप द्वारा पालना हो रही है। अब जैसे साकार पालना वालों को समय-प्रति-समय बहुत चान्स मिले। अब अव्यक्त पालना वालों को भी यह लास्ट चान्स का विशेष हक मिलना चाहिए। इसलिए अव्यक्त पालना वालों को और साकार आकार दोनों की पालना वालों को, दोंनों की चेकिंग में मार्क्स देने में थोड़ा अन्तर रखा गया है। शुरू वालों के पेपर्स और अव्यक्त पालना वालों के पेपर चेक करने में पीछे वालों को 25% एकस्ट्रा मार्क्स हैं। इसलिए लास्ट चान्स जो चाहे सो ले सकते हैं। अभी सीट्स की सीटी नहीं बजी है। इसलिए चान्स लो और सीट लो।

'' कर्नाटक वाले सीट लेने में वैसे भी होशियार है। जैसे यहाँ नज़दीक सीट लेना चाहते हो वैसे फाइनल भी नज़दीक सीट ले लो। कर्नाटक वाले राजी सहज होते हैं ना। सदा ज्ञान के राजों में चलने वाले हैं - नाराज भी नहीं होते।

ऐसे सदा राजयुक्त, योगयुक्त, युक्तियुक्त कर्म करने वाले, ऐसे सदा श्रेष्ठ आत्माओं को, सदा सर्व शक्तिवान बाप के संग के रंग में रहने वाले, ऐसी रूहानी रूहों को, महादानी, महापुण्य आत्मा बच्चों को बाप-दादा का याद-प्यार और नमस्ते।

विदेश सेवा में सफलता मूर्त बनने के लिए बाप-दादा का इशारा- विदेश की सेवा में विशेष साइलेन्स की शक्ति ज्यादा सफल रहेगी। क्योंकि वहाँ की आत्मायें एक सेकेण्ड की शान्ति के लिए भी जगह-जगह भटकती हैं। तो ऐसी भटकती हुई आत्माओं को एक तो शान्ति और दूसरा रूहानी स्नेह दो। स्नेह से शान्ति का अनुभव कराओ। प्रेम का भी अभाव है और शान्ति का भी अभाव है इसलिए जो भी प्रोग्राम करो उसमें पहले तो बाप के सम्बन्ध के स्नेह की महिमा करो और फिर उस प्यार से आत्माओं का सम्बन्ध जोड़ने के बाद शान्ति का अनुभव कराओ। चाहे ड्रामा करो, चाहे भाषण करो, लेकिन भाषण भी ऐसे हों जैसे प्रेम स्वरूप और शान्त स्वरूप। दोनों का बैलेन्स हो। मुख्य टॉपिक यह हो, बाकी भिन्न-भिन्न रूप हो। भाषण से भी वही अनुभव कराओ और ड्रामा से भी वही अनुभव कराओ तो वैराइटी प्रकार से एक ही अनुभव कराने से छाप लगती है। चाहे छोटे-छोटे प्रोग्राम रखो या बड़ा। लेकिन बड़ा प्रोग्राम करने के पहले सम्पर्क समीप का, वैराइटी प्रकार की आत्माओं का बनाना है। तो क्या होगा? वैराइटी प्रकार की आत्माओं की सेवा करने से हर प्रकार की आत्मायें उसमें शामिल हो जायेंगी। सहयोगी बन जायेंगी और प्रोग्राम की रौनक हो जायेंगी। वैसे भी वैराइटी अच्छी लगती है ना। तो वैराइटी वर्ग वालों का सम्पर्क और सम्बन्ध पहले से ही बनाने से कोई भी कार्य सफल हो जाता है। बाकी जो फॉरेन सर्विस के प्रति निमित्त बने हुए हैं उनको बाप-दादा विशेष सेवा और स्नेह के रिटर्न में पदमगुणा याद प्यार दे रहे हैं।

2. नॉलेज रूपी चाबी लगाने से भाग्य का खज़ाना प्राप्त हो सकता है - इस संगमयुग पर भाग्य बनाने की नॉलेज रूपी चाबी मिलती है। चाबी लगाओ और जितना भाग्य बनाना चाहो उतना भाग्य का खज़ाना ले लो। सभी चाबी लगाने में तो होशियार हो ना। चाबी मिली और मालामाल बन गये। जितना मालामाल बनते जाते हैं उतना स्वत: ही खुशी रहती है। तो सभी ऐसे अनुभव करते हो कि जैसे कोई झरने से पानी निकलता रहता है वैसे खुशी का झरना सदा बहता ही रहे - अखुट और अविनाशी। बाप-दादा भी सदा सभी के भाग्य का सितारा देख हर्षित होते हैं।