25-03-81 ओम शान्ति अव्यक्त बापदादा मधुबन


"महानता का आधार संकल्प, बोल और कर्म की चेकिंग"

आज बापदादा अपने चरित्र भूमि, कर्म-भूमि, वरदान भूमि, महान तीर्थ भूमि, महान यज्ञ भूमि के सर्व साथियों से मिलने आये हैं। मधुबन निवासी अर्थात् महान पावन धरनी निवासी। इस धरनी पर आने वालों का भी महान पार्ट है तो सोचो रहने वालों का कितना महान पार्ट है! महान आत्माओं का निवास स्थान भी महान ही गाया जाता है। जब आने वाले भी अपने को भाग्यशाली अनुभव करते हैं, अनेक अनुभवों की स्वयं में अनुभूति करते हैं तो रहने वाले का अनुभव क्या होगा! जो रहते ही ज्ञान सागर में हैं, ऐसी आत्मायें कितनी श्रेष्ठ हैं! ऐसे सब मधुबन निवासी अपने को इतना महान अनुभव करते हो? जैसे टाप का स्थान है, ऐसे ही स्थिति भी टाप की रहती है। नीचे तो नहीं आते हो? मधुबन निवासियों को कितने प्रकार की लिफ्ट की गिफ्ट है, उसको जानते हो? कभी गिनती की है? वा इतनी है जो गिनती नहीं कर सकते हो? मधुबन की महिमा के गीत सभी गाते हैं। लेकिन मधुबन निवासी वह गीत गाते हैं? मधुबन वासियों का चित्र दूर-दूर रहने वाले भी अपने दिल में कितना श्रेष्ठ चित्र खींचते हैं, यह जानते हो? ऐसा चित्र चैतन्य में अपना तैयार किया है? जैसे स्थूल पहाड़ी है वैसे सदा ऊंची स्टेज की पहाड़ी पर रहते हो? ऐसी ऊंची स्टेज जहाँ पुरानी दुनिया के वातावरण का कोई प्रभाव आ नहीं सकता। ऐसी स्टेज पर रहते हो कि नीचे आ जाते हो?नीचे आने की आवश्यकता है? मधुबन को डबल लकीर है। एक तो मधुबन निवासी मधुबन की लकीर के अन्दर हैं। और दूसरा सदा श्रीमत की लकीर के अन्दर हैं। तो डबल लकीर के अन्दर हो। डबल लकीर के अन्दर रहने वालों की स्टेज कितनी श्रेष्ठ होगी। आज बापदादा अपने भूमि निवासियों से मिलने आये हैं। बाप की चरित्र भूमि है ना। तो भूमि निवासियों से विशेष स्नेह होगा ना।

बिचारे आज के भक्त तो भूमि की मिटटी मस्तक में लगाने के लिए तरस रहे हैं और आप सदा वहाँ निवास करते हो तो कितने भाग्यशाली हो! दिल तख्तनशीन तो सब हैं लेकिन मधुबन निवासी चुल्ह पर भी हैं तो दिल पर भी हैं। डबल हो गया ना। सबसे ताजा माल मधुबन निवासियों को मिलता है। सबसे बढ़िया अनुभवों की पिकनिक मधुबन निवासी करते हैं। सबसे ज्यादा मिलन महफिल मधुबन निवासी करते हैं। सबसे ज्यादा चारों ओर के समाचारों के नालेजफुल भी मधुबन निवासी हैं। मधुबन निवासियों से मिलने सभी को आना पड़ता है। तो इतना श्रेष्ठ भाग्य, और वर्णन कौन करता है? बाप बच्चों का भाग्य वर्णन कर रहे हैं। मधुबन निवासियों का कितना श्रेष्ठ भाग्य है! अगर एक बात भी सदा याद रखो तो नीचे कभी आ नहीं सकते। अब जितनी बाप ने मधुबन निवासियों के भाग्य की महिमा की, उतनी ही महान आत्मा समझकर चलते हो? मधुबन की महिमा सुनकर फारेनर्स भी देखो खुश हो रहे हैं। इन सबके मन में उमंग आ रहा है कि हम भी मधुबन निवासी हो जावें। आज फारेनर्स जैसे गैलरी में बैठे हैं। गैलरी में बैठकर देखने में मजा होता है। कब मधुबन निवासी देखने वाले कभी फारेनर्स देखने वाले। मधुबन निवासियों के लिए सिर्फ एक ही बात स्मृति में रख समर्थ बनने की है। वह कौन सी? जिस एक बात में सब समया हुआ है।

जो भी संकल्प करो, बोल बोलो, कर्म करो, सम्बन्ध वा सम्पर्क में आओ, सिर्फ एक चेकिंग करो कि यह सब बाप समान हैं? जो मेरा संकल्प वह बाप का संकल्प है? मेरा बोल बाप का बोल है? क्योंकि सबकी यही प्रतिज्ञा है बाप से, कि जो बाप से सुना है वही सुनायेंगे। जो बाप सुनायेंगे वहीं सुनेंगे। जो बाप ने सोच के लिए दिया है वहीं सोचेंगे। यह तो सबका वायदा है ना? जब यह वायदा है तो सिर्फ यह चेकिंग करो। यह चेकिंग करना मुश्किल तो नहीं हैं ना। पहले मिलाओ फिर प्रैक्टिकल में लाओ। हर संकल्प पहले बाप समान है - यह चेक करो। पहले भी सुनाया था कि जो द्वापर युगी राज वा रजवाड़े होकर गये हैं, कोई भी चीज़ स्वीकार करेंगे तो पहले चेकिंग होती है फिर स्वीकार करते हैं। तो द्वापर के राजे आपके आगे क्या लगते हैं! आप लोग तो फिर भी अच्छे राजे बने होंगे। लेकिन गिरे हुए राजाओं की भी इतनी खातिरी होती तो आप सबका संकल्प भी बुद्धि का भोजन है। बोल भी मुख का भोजन ही है। कर्म - हाथों का, पाँव का भोजन है। तो सब चेक करना चाहिए ना। पहले करके पीछे सोंचना इसको क्या कहा जायेगा? डबल समझदार।

सिर्फ यह एक बात सदा अपना निजी संस्कार बना दो जैसे स्थूल में भी कई आत्माओं के संस्कार होते हैं, ऐसे वैसे कोई चीज़ कब स्वीकार नहीं करेंगे। पहले चेक करेंगे, देखेंगे फिर स्वीकार करेंगे। आप तो सब महान पवित्र आत्मायें हों, सर्व श्रेष्ठ आत्मायें हो। तो ऐसी आत्मायें बिना चेकिंग के संकल्प को स्वीकार कर दे , वाणी से बोल दें, कर्म को कर लें - यह महानता नहीं लगेगी। तो मधुबन निवासियों के लिए सिर्फ एक ही बात है। चेकिंग की मशीनरी तो है ना। अभ्यास ही मशीनरी है।

मधुबन वालों की महिमा भी बहुत गाते हैं। अथकपन की खुशबू तो बहुत काल से आती है। जैसे अथक पन की खुशबू आती है यह सर्टिफिकेट तो मिला है,इसके साथ और क्या ऐड करेंगे? जैसे अथक हो वैसे ही सदा एकरस। जब भी रिजल्ट देखें तो सबकी रिजल्ट एकरस अवस्था में एक नम्बर हो। दूसरा तीसरा नम्बर भी नहीं। क्योंकि मधुबन है सबको लाइट और माइट देने वाला। अगर लाइट-हाउस, माइट-हाउस ही हिलता रहेगा तो दूसरों का क्या हाल होगा! मधुबन निवासियों का सब वायुमण्डल बहुत जल्दी चारों ओर फैलता है। यहाँ की छोटी बात भी बाहर बड़े रूप में पहुँचती है। क्योंकि बड़े आदमी हो ना। सदा छत्रछाया में रहने वाले। स्वर्ग में तो प्रालब्ध मिलेगी लेकिन यहाँ भी काफी प्रालब्ध है।मधुबन निवासियों को सब बना बनाया मिलता है। एक डियूटी बजाई बाकी सब बना बनाया। कहाँ से आता है, कितना आता है, कोई संकल्प की जरूरत ही नहीं। सिर्फ सेवा करो और मेवा खाओ। 36 प्रकार के भोजन भी मधुबन वालों को बार-बार मिलते हैं। तो 36 गुण भी तो धारण करने पड़ेंगे। हरेक मधुबन निवासी को पवित्रता की लाइट के ताजधारी तो होना ही है। लेकिन डबल ताज। एक गुणों का ताज, दूसरा - पवित्रता का ताज जिस ताज में कम से कम 36 हीरे तो होने ही चाहिए।

आज बापदादा मधुबन निवासियों को खास और सभी को आम - गुणों के ताज की क्राउन-सेरीमनी करा रहे हैं। हरेक को जो भी देखे तो ताजधारी देखे। हरेक गुण रूपी रत्न चमकता हुआ औरों को भी चमकाने वाला हो। (बापदादा ने ड्रिल कराई)।

सभी लवलीन स्टेज पर स्थित हो ना! एक बाप दूसरा न कोई। इसी अनुभूति में कितना अतीन्द्रिय सुख है! सर्व गुणों से सम्पन्न श्रेष्ठ स्थिति अच्छी लगती है ना। इसी स्थिति में दिन और रात भी बीत जाये फिर भी सदा इसी में रहने का संकल्प रहेगा। सदा इसी स्मृति में समर्थ आत्मा रहो।

बापदादा निरंतर बच्चों से मिलन मनाते रहते हैं और मनाते रहेंगे। अनेक बच्चे होते भी हरेक बच्चे के साथ बाप मिलन मनाते ही हैं। क्योंकि शरीर के बन्धन से मुक्त बाप औरा दादा दोनों एक सेकेण्ड के अन्दर अनेकों को भासना दे सकते हैं।

दीदी जी के साथ - रायल फैमली बन चुकी है या अभी बन रही है? राज्य कारोबार चलाने वाले निकल चुके हैं या अभी निकलने हैं? एक हैं चलानेवाले, एक हैं कारोबार में आनेवाले। जो तख्त नशीन होंगे वह राज्य चलाने वाले। और जो सम्बन्ध में होंगे वह हैं राज्य कारोबार में आने वाले। तो राज्य कारोबार चलाने वाले भी अभी बन रहे हैं ना। राज्य कारोबार चलाने वालों की विशेषता क्या होगी? तख्त पर तो सब नहीं बैठेंगे, तख्त वालों के सम्बन्धी तो बनेंगे लेकिन तख्त पर बैठने वालों की तो लिमिट है ना। रायल फैमली में आनेवाले और राज्य सिंहासन पर बैठने वाले उन्हों में भी अन्तर होगा। कहलायेंगे तो वह भी नम्बर वन, नम्बर टू विश्वमहाराजन की रायल फैमली। लेकिन अन्तर क्या होगा? तख्तनशीन कौन होंगे, उसके भी कोई कायदे होंगे ना। इस पर सोचना।

संगमयुग पर तो दिलतख्त के अधिकारी सबको बाप बनाते हैं। भविष्य में राजे-महाराजे तो बनेंगे लेकिन फर्स्ट नम्बर वाला तख्त जो फर्स्ट लक्ष्मी नारायण वाला होगा उसके तख्तनशीन कौन होंगे? छोटे-छोटे तख्त और राज्य दरबार तो लगेगी लेकिन विश्व-महाराजन के तख्त का विशेष आधार है- हर बात में, हर सब्जेक्ट में बाप को पूरा फालो करने वाले। अगर एक भी सब्जेक्ट में फालो करने में कमी पड़ गई तो फर्स्ट तख्त के अधिकारी नहीं बन सकते। नर से नारायण, नारी से लक्ष्मी पद पा लेंगे लेकिन फर्स्ट नम्बर का ताज और तख्त उसके लिए बापदादा दोनों को हर बात में फालो करना पड़े। तब तख्त भी फालो में मिलेगा। हर बात में, हर संस्कार में, हर संकल्प में फालो फादर करना है। इसके आधार पर नम्बर भी बनेंगे। तख्त वहीं मिलेगा लेकिन उसमें भी नम्बर होंगे। सेकेण्ड लक्ष्मी-नारायण और आठवाँ लक्ष्मी-नारायण अन्तर तो होगा ना। यह फालो में अन्तर पड़ जाता है। इसमें भी गुह्य रहस्य है। महाराजा बनना और महारानी बनने का भी रहस्य है। बापदादा भी राजधानी देखते रहते हैं। कौन-कौन किस राज्य के अधिकारी बनते हैं। किस रेखाओं के हिसाब से बनते हैं, यह भी राज है ना।

फालो फादर की भी बड़ी गुह्य गति है। जन्म में फालो फादर। बचपन जीवन में फालो फादर। युवा जीवन में फालो फादर। सेवा की जीवन में फालो फादर। फिर अन्तिम जीवन में फालो फादर। स्थापना के कार्य के साथ और सहयोग में कितने समय से कितने परसेन्ट में फालो किया? पालना के कार्य में कहाँ तक फालो किया? अपने और औरों के विघ्न विनाशक कार्य में कहाँ तक फालो किया? यह हिसाब की मार्क्स मिलाकर फिर टोटल होता है। टोटल के हिसाब से फाइनल नम्बर होता है।

आप सब जम्प लगा सकते हो। कोटो में कोई ऐसी कमाल दिखा सकते हैं। अब वह कोटो में कोई कौन है? वह अपने से पूछो। ऐसे नहीं कि देरी से आये हो तो नहीं कर सकते हो। कर सकते हो। इतना बड़ा जम्प लगाना पड़े, लगाओ जम्प, बापदादा एकस्ट्रा मदद भी देंगे।

पर्सनल - जैसे बाप बच्चों की श्रेष्ठता को जानते हैं वैसे आप सभी जानते हो? इतना नशा रहता है वा समझते हो कभी रहता है कभी नहीं रहता? बातों को देखते हो या बाप को देखते हो? किसको देखते हो? क्योंकि जितना बड़ा संगठन है तो बातें भी तो इतनी ही होंगी ना। बातों का होना, यह तो संगठन में होगा ही। बातों के समय बाप याद रहता है? यह नहीं सोंचो कि बातें खत्म हों तो बाप याद आवे। लेकिन बातों को खत्म करने के लिए ही बाप की याद है। बातें खत्म ही तब होंगी जब हम आगे बढ़ेंगे। ऐसे नहीं, बातें खत्म हों तब हम आगे बढ़े, हम आगे बढ़ेंगे तो बातें पीछे हो जायेंगी। रास्ता नहीं आगे बढ़ता है, चलने वाला आगे बढ़ता है। कभी रास्ता आगे बढ़ता है क्या? कोई रास्ता पार करने वाला सोचे, रास्ता आगे बढ़े तो मैं बढूँ। रास्ता तो वहीं रहेगा लेकिन उसे तय करने वाला आगे बढ़ेगा। साइडसीन नहीं आगे बढ़ेंगी लेकिन देखने वाला आगे बढ़ेगा। तो यह शक्ति है? एक बाप दूसरा न कोई' - यह पाठ मंसा वाचा कर्मणा में निरंतर याद है? दूसरा कोई व्यक्ति नहीं है, यह भी एक सब्जेक्ट है, लेकिन कोई वैभव है? कोई विघ्न है? कोई व्यर्थ संकल्प है, अगर एक बाप और दूसरा व्यर्थ संकल्प भी होगा तो दो हो गये ना! संकल्प में भी व्यर्थ न हो, बोल में भी और कुछ नहीं। आत्माओं से सम्पर्क निभाते स्मृति में बाबा। व्यक्ति वा सम्पर्क का विस्तार न हो। ऐसे हैं? आज तन पर, कल मन पर, परसों वस्तु पर कभी व्यक्ति पर, इसमें तो टाइम नहीं चला जाता है? व्यक्ति जायेगा, वैभव आयेगा, वैभव जायेगा, व्यक्ति आयेगा। यह तो लाइन होती है। क्योंकि माया जानती है, थोड़ा भी चांस आने का मिला तो वह बहुरूप से आयेगी। एक रूप से नहीं। यहाँ से वहाँ से, कोने से, छत से, बहु रूपों से, बहुत तरफ से आ जायेगी। लेकिन परखने वाला, एक बाप दूसरा न कोई इस पाठ के आधार पर उनको दूर से ही नमस्कार करायेगा। करेगा नहीं, करायेगा। तो एक बाप दूसरा न कोई यह चारों तरफ। का वातावरण हो। क्योंकि नालेज तो सब मिल गई है। कितनी पाइंटस हैं, पाइंटस होते हुए पाइंटस रूप में रहें, यह है उस समय की कमाल जिस समय कोई नीचे खींच रहा हो। कभी बात नीचे खींचेगी, कभी कोई व्यक्ति निमित्त बन जायेगा, कभी वायुमण्डल, कभी कोई चीज़, यह तो होगा। यह न हो, ऐसा हो नहीं सकता। लेकिन आप उसमें एकरस रहो, उसकी युक्ति सोचो, कोई नई इन्वेंशन निकालो। ऐसी इन्वेंशन हो जो सब वाह-वाह करें, यह अच्छी युक्ति सुनाई।

मुरली का सार

1. जो भी संकल्प करो, बोल बोलो कर्म करो, सम्बन्ध वा सम्पर्क में आओ, सिर्फ चेकिंग करो कि ये बाप समान हैं।

2. डबल ताजधारी बनो - एक गुणों का ताज, दूसरा - पवित्रता का ताज धारण करो।

3. विश्व-महाराजन के तख्त का विशेष आधार है - हर बात में, हर सब्जेक्ट में बाप को पूरा फालो करना।

3. माया कनैक्शन लूज करती है, कनफ्यूज करती है। क्यों, क्या को खत्म कर कनैक्शन ठीक करो तो सब ठीक हो जायेगा।