31-12-96   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


नये वर्ष में अनुभवी मूर्त बन, सबको अनुभवी बनाओ

(शान्तिवन डायमण्ड जुबली हाल के उद्घाटन अवसर पर) आज नज़र से निहाल करने वाले बापदादा आप सभी अति स्नेही, सहयोगी, स्नेह में लवलीन बच्चों को देख रहे हैं। हर एक बच्चे के मस्तक में, दिल में स्नेह का सबूत दिखाई दे रहा है। (हाल में पीछे वाले भाई बहिनों से) आप सोचेंगे कि हम पीछे वाले तो दिखाई नहीं देते हैं लेकिन बापदादा के नयनों में ऐसी अनोखी टी.वी. है जिससे दूर की चीज़ भी सामने दिखाई दे रही है। चाहे कहाँ भी कोने में बैठे हो लेकिन बाप के सामने हो। अभी तो फिर भी आराम से बैठे तो हो ना। (तालियां बजाई) आज बहुत उमंग-उत्साह और खुशी है ना तो तालियों से दिखा रहे हैं। लेकिन बापदादा आपके दिल की खुशी को जानते हैं। बापदादा देख रहे हैं कि हर एक बच्चे को सहयोग का सबूत देने में बहुत खुशी होती है इसलिए हजारों भुजायें दिखाई हैं। तो भुजायें सहयोग की निशानी हैं। बापदादा जानते हैं एक-एक बच्चे ने चारों ओर चाहे देश में, चाहे विदेश में सभी ने चाहे धन से, चाहे मन से, चाहे तन से सहयोग अवश्य दिया है। और आज आप सबके सहयोग का सबूत आप आराम से बैठ देख भी रहे हो, सुन भी रहे हो। अभी ज्यादा ताली नहीं बजाओ। आपके खुशी की, मन की तालियां बापदादा के पास पहुंच गई हैं।

देखो आज दो विशेषतायें हैं। एक इस शान्तिवन को जो सभी ने उमंग- उत्साह से बनाया है उसका बापदादा के साथ-साथ आप बच्चे भी उद्घाटन कर रहे हैं और आज ड्रामानुसार नया वर्ष भी शुरू होने वाला ही है इसलिए बापदादा सभी बच्चों को अपनी दोनों बाहों में समाते हुए दोनों बातों की मुबारक दे रहे हैं। और जैसे अभी इस समय साकार रूप में बाप के साथ उमंग-उत्साह और खुशी में झूम रहे हो ऐसे ही नये वर्ष में सदा अव्यक्त रूप में साथी समझना, अनुभव करना - यह साथ का अनुभव बहुत प्यारा है। बापदादा को भी बच्चों के बिना अच्छा नहीं लगता है। (माइक बंद हो गया) पहला-पहला अनुभव है ना इसलिए यह भी ड्रामा में खेल समझना, कोई भी बात नीचे ऊपर नहीं समझना। अच्छा है और अच्छा ही रहेगा। बहुत अच्छा, बहुत अच्छा करते-करते आप भी अच्छे बन जायेंगे और ड्रामा की हर सीन भी अच्छी बन जायेगी क्योंकि आपके अच्छे बनने के वायब्रेशन कैसी भी सीन हो नेगेटिव को पॉजिटिव में बदल देगी, इतनी शक्ति आप बच्चों में है सिर्फ यूज़ करो। शक्तियां बहुत हैं, समय पर यूज़ करके देखो तो बहुत अच्छे-अच्छे अनुभव करेंगे।

यह नया हाल और नया वर्ष तो इसमें क्या करेंगे? नये वर्ष में कुछ नवीनता करेंगे ना। तो यह वर्ष अनुभवी मूर्त बन औरों को भी अनुभव कराने का वर्ष है। समझा - क्या करना है? अनुभव करना है। वाणी द्वारा वर्णन तो करते ही हो लेकिन हर बच्चे को हर शक्ति का, हर गुण का अनुभव करना है। अनुभवी मूर्त हो ना! अनुभवी मूर्त हो या वाणी मूर्त हो? अनुभवी हो भी लेकिन इस वर्ष में कोई भी ऐसा बच्चा नहीं कहे कि मुझे इन बातों का तो अनुभव है, लेकिन इस बात का अनुभव बहुत कम है। ऐसा कोई बच्चा न रहे क्योंकि ज्ञान का अर्थ ही है सिर्फ समझना नहीं लेकिन अनुभव करना और जब तक अनुभव नहीं किया है तो औरों को भी अनुभवी नहीं बना सकते। अगर वाणी तक है, अनुभव तक नहीं है तो जिन आत्माओं की सेवा के निमित्त बनते हो वह भी वाणी द्वारा बहुत अच्छा, बहुत अच्छा, कमाल है-यहाँ तक आते हैं। अनुभवी हो जाएं - वह कोटों में कोई, कोई में भी कोई हैं और प्रत्यक्षता का आधार अनुभव है। अनुभव वाली आत्मायें कभी भी वायुमण्डल वा संग के रंग में नहीं आ सकती हैं। सिर्फ वाणी के प्रभाव वाले कभी नाचेंगे और कभी सोच में पड़ जायेंगे, अनुभव अर्थात् पक्का फाउण्डेशन। आधा अनुभव है तो आधा फाउण्डेशन पक्का है, उसकी निशानी है वह छोटी बड़ी बातों में हिलेगा, अचल नहीं होगा क्योंकि आने वाली बातें वा समस्यायें प्रबल हो जाती हैं, इसलिए अधूरे फाउण्डेशन वाले लड़खड़ाते हैं, गिरते नहीं हैं लेकिन लड़खड़ाते हैं तो पहले इस वर्ष में अपने अनुभवी मूर्त के फाउण्डेशन को पक्का करो। कई बच्चे आज बहुत फास्ट चलते हैं और कल थोड़ा सा चेहरा बदला हुआ होता है, कारण? अनुभव का फाउण्डेशन पक्का नहीं है। अनुभव वाली आत्मायें कितनी भी बड़ी समस्या को ऐसे हल करेंगी जैसे कुछ हुआ ही नहीं। आया और अपना पार्ट बजाया लेकिन साक्षी होकर, न्यारे और प्यारे होकर खेल समान देखेंगे। बात नहीं खेल, मनोरंजन। मनोरंजन अच्छा लगता है ना? तो कोई भी बात हो, आप के लिए बड़ी बात तब लगती है जब फाउण्डेशन जरा भी कच्चा है। चाहे 75 परसेन्ट पक्का है, चाहे 90 परसेन्ट पक्का है तो भी हिलने का चांस सम्भव है। बापदादा को बच्चों की मेहनत अर्थात् युद्ध करना अच्छा नहीं लगता। मेहनत क्यों? युद्ध क्यों? क्या योगी के बजाए योद्धे बनने वाले हो या योगी आत्मायें हो? युद्ध करने वाले संस्कार चन्द्रवंश में ले जायेंगे और योगी तू आत्मा के संस्कार सूर्यवंश में ले जायेंगे। तो क्या बनना है सूर्यवंशी या चन्द्रवंशी बनना है? सूर्यवंशी बनना है तो युद्ध खत्म। इस वर्ष में युद्ध खत्म हुई? इसमें हाँ नहीं कहते हो? कहने से कहते हो? बापदादा तो न देखते हुए भी बच्चों की रिजल्ट देख लेते हैं, हर समय की रिजल्ट नयनों के सामने नहीं लेकिन दिल में आ ही जाती है। यहाँ साकार वतन में जब आप थोड़ा-थोड़ा या बहुत हिलते हो तो बाप को वहाँ वतन में अनुभव होता है कि कोई हिल रहा है। इसलिए जैसे शान्तिवन की खुशी है, हाल की खुशी है ऐसे बापदादा और इतने बड़े संगठन के बीच यह वायदा करो कि इस वर्ष में हलचल से परे हो अचल-अडोल बनना ही है, बनेंगे नहीं, बनना ही है। ऐसे है? ऐसे जो समझते हैं बनना ही है, सोचेंगे, करेंगे, देखेंगे - यह नहीं, वह हाथ उठाओ। अच्छा-मुबारक हो और जिन्होंने किसी भी कारण से नहीं उठाया, ऐसे नहीं हो सकता कि नहीं बनेंगे लेकिन कोई कारण से नहीं उठाया हो तो वह उठाओ। शर्म आता है उठाने में, तो सोचो जब हाथ उठाने में शर्म आता है तो करने के टाइम भी शर्म करना। सोचना कि यह शर्म करने की बात है, तो नहीं होगी। पक्के हो जायेंगे क्योंकि कई बच्चे बारबार पूछते हैं, चाहे निमित्त बच्चों से या रूहरिहान में बापदादा से एक ही क्वेश्चन करते हैं, बाबा विनाश की डेट बता दो। सभी का क्वेश्चन है ना? अच्छा बापदादा कहते हैं डेट बता देते हैं - चलो दो हज़ार में पूरा होगा तो क्या करेंगे? यह कोई डेट नहीं दे रहे हैं, मिसअन्डरस्टैण्ड नहीं करना। बापदादा पूछ रहे हैं कि समझो 2 हज़ार तक आपको बताते हैं तो क्या करेंगे? अलबेले बनेगे या तीव्र पुरुषार्थी बनेंगे? तीव्र पुरुषार्थी बनेंगे! और बापदादा कहते हैं कि इस वर्ष में हलचल होगी तो फिर क्या करेंगे? और तीव्र पुरूषार्थ कर लेंगे? या थोड़ा-थोड़ा डेट कोन्सेस हो जायेंगे, गिनती करते रहेंगे कि इतना समय पूरा हुआ, एक मास पूरा हुआ, एक वर्ष पूरा हुआ, बाकी इतने मास हैं! ..... तो डेट कोन्सेस बनेंगे या सोल कोन्सेस बनेंगे? क्या करेंगे? अलबेले नहीं बनेंगे? यह तो नहीं सोचेंगे कि अभी तो 4 वर्ष पड़े हैं? क्या हुआ, लास्ट वर्ष में कर लेंगे - ऐसे अलबेले नहीं बनेंगे या थोड़ा-थोड़ा बन जायेंगे? आप नहीं भी बनेंगे तो माया सुन रही है, वह ऐसी बातें आपके आगे लायेगी जो अलबेलापन, आलस्य बीच-बीच में आयेगा, फिर क्या करेंगे? इसीलिए बापदादा ने पहले भी सुनाया है कि डेट कोन्सेस नहीं बनो लेकिन हर समय अन्तिम घड़ी है, इतना हर घड़ी में एवररेडी रहो। अच्छा मानों बापदादा कहते हैं 2 हजार के बाद होगा, चलो आपने मान लिया, रीयल नहीं है लेकिन मान लिया तो आप दो हजार में सम्पूर्ण बनेंगे और दूसरों को कब बनायेंगे? सतयुग में बनायेंगे क्या? बनाने वाले थोड़े हैं और बनने वाले बहुत हैं, उन्हों के लिए भी समय चाहिए या नहीं? अगली सीजन में भी पूछा था कि कम से कम सतयुग आदि के 9 लाख बने हैं? नहीं बने हैं तो विनाश कैसे हो? किस पर राज्य करेंगे? पुरानी आत्माओं के ऊपर राज्य करेंगे? नई आत्मायें तो तैयार हुई नहीं और विनाश हो जाए तो क्या करेंगे? इसलिए बापदादा ने यह काम अपने बच्चे जो ज्योतिषी हैं ना, उन्हों के ऊपर ही रखा है। जो ज्योतिषी कर सकते हैं, वह बाप क्यों करेगा! फिर भी बाप के बच्चे हैं, उन्हों को कमाने दो। उन्हों की कमाई का साधन यही है। अगर किसको बहुत जल्दी हो तो उन बच्चों से पूछो। बाप नहीं बतायेगा।

समझा - इस वर्ष क्या करना है? अनुभवी मूर्त। कई बच्चे रूहरिहान में बहुत ही मीठी-मीठी रूहरिहान करते, कहते हैं - क्या करें बाबा, इतना तो हो गया है, बाकी इतना आप कर लो। राज्य हम करेंगे लेकिन सम्पूर्ण आप बना दो। ऐसे होगा? बाप मददगार जरूर है और अन्त तक रहेंगे, यह गैरन्टी है लेकिन किसके मददगार? जो पहले हिम्मत का पांव आगे करते हैं, फिर बाप मदद का दूसरा पांव उठाने में सम्पूर्ण मदद करते हैं। हिम्मत का पांव उठाओ नहीं और सिर्फ कहो बाबा आप कर लो, बाबा आप कर लो। तो बापदादा भी कहेगा देखेंगे, पहले पांव तो रखो। एक पांव भी नहीं रखेंगे तो कैसे होगा! इसलिए इस वर्ष में हर समय यह चेक करो कि हिम्मत के पांव मजबूत हैं? बाप को कहने के पहले यह चेक करो। हिम्मत का पांव बढ़ाया और मदद नहीं मिले, यह असम्भव है। सिर्फ थोड़ा सा हिम्मत का पांव बढ़ाओ, इसीलिए गाया हुआ है पहला शब्द क्या आता है? हिम्मते बच्चे मददे बाप ,इसको उल्टा नहीं करो - मददे बाप और फिर हिम्मत बच्चों की। बाप तो मुस्कुराते रहते हैं, वाह मेरे लाड़ले बच्चे वाह! निश्चय से हिम्मत का पांव जरा भी आगे करेंगे तो बाप पदमगुणा मदद के लिए हर एक बच्चे के लिए हर समय तैयार है।

अच्छा - नये वर्ष में और क्या करेंगे? अभी तक सेवा की एक बात रही हुई है, कौन सी? गीता का भगवान तो हो जायेगा, लेकिन बापदादा ने अगले वर्ष हर ज़ोन को कहा था कि स्नेही, सहयोगी, सम्पर्क वाले तो बहुत बने हैं और बनेंगे लेकिन अभी वारिस निकालो। वारिस कम निकालते हैं क्योंकि बापदादा हर सेवाकेन्द्र की रोज़ की रिजल्ट देखते हैं। तो चारों ओर की रिजल्ट में वारिस कम हैं। स्नेही, सहयोगी अच्छे हैं लेकिन उन्हों को आगे बढ़ाओ या कोई भी नयों को, लास्ट वालों को फास्ट करके वारिस क्वालिटी बाप के सामने लाओ। कोई-कोई निकलते हैं लेकिन गिनती करने वाले हैं। जब चाहते हो कि 2000 तक परिवर्तन हो, चाहते तो सभी ऐसे ही हो तो वारिस कितने बनाये हैं? सतयुग की प्रजा भी रॉयल चाहिए। वह कम है। प्रजा बनी है, यह जो अभी अनेक प्रकार की कांफ्रेंस की है वा बाहर की स्टेज पर जो भी प्रोग्राम्स मिले हैं, इस वर्ष में प्रभाव और प्रजा - यह रिजल्ट अच्छी है। लेकिन बापदादा क्या चाहते हैं? अभी वारिस क्वालिटी तैयार करो। यहाँ वारिस तैयार करेंगे तब एडवान्स पार्टी भी प्रत्यक्ष होगी और बाप के नाम का, प्रत्यक्षता का नगाड़ा चारों ओर बजेगा। अभी तक की रिजल्ट में कहते हैं कि यह भी अच्छा काम कर रहे हैं या कोई-कोई कहते हैं कि यही कर सकते हैं, लेकिन परम आत्मा की तरफ अटेन्शन जाए, परम आत्मा का यह कार्य चल रहा है, वह अभी इनकागनीटो (गुप्त) है। बच्चे अपनी शक्ति से, स्नेह से बाप को प्रत्यक्ष करने का अच्छा पुरूषार्थ कर रहे हैं लेकिन अभी जब तक स्नेही हैं, सहयोगी हैं तब तक बाप की प्रत्यक्षता मैदान पर नहीं आई है। अच्छा है - यहाँ तक हुआ है, लेकिन सबके मुख से यह निकले कि बस अभी समय आ गया, बाप आ गया, तब विनाश भी आयेगा। तो बाप कहते हैं कि बाप से नहीं पूछो कि विनाश कब होगा? बाप आपसे पूछते हैं कि आप कब तैयार होगे? पर्दा खोलें, तैयार हो? कि पर्दा खुलेगा और तैयार होते रहेंगे? कम से कम 16108 पक्के-पक्के रत्न तो प्रत्यक्ष करो, माला तो बनाओ। बाप भी देखे तैयार हैं? इतनी मार्जिन है, ज्यादा नहीं कह रहे हैं। 9 लाख नहीं कह रहे हैं, 16108 की माला बनाओ। तो इस वर्ष बनाना, देखेंगे कि 16108 की निर्विघ्न, अचल माला तैयार है या अभी थोड़ा-थोड़ा लड़खड़ाते हैं? थोड़ा-थोड़ा खेल दिखाते हैं? पाण्डव क्या समझते हो? बोलो, तैयार हो? दादियां तो बोलती हैं - हाँ। सभी शक्तियों की हाँ है? 16108 तैयार हैं? अच्छा 18 तारीख को माला बनाकर देना। हाथ उठवायेंगे तो आधी सभा कहेगी 16 हज़ार में हैं। जो समझते हैं कि हम 16 हजार में हैं, वो दादियों को अपनी चिटकी लिखकर देना कि मैं 16 हज़ार में हूँ या 108 में? फिर दादियाँ पास करेंगी। ऐसे नहीं समझना कि चिटकी दे दी है, पहले यह पास करेंगी फिर बापदादा पास करेंगे, फिर फाइनल रिजल्ट बतायेंगे। अच्छा।

इस वर्ष में और क्या करेंगे? बापदादा ने एक रिजल्ट सभी बच्चों की देखी। सिर्फ यहाँ वालों की नहीं, चारों ओर के बच्चों की एक बात की रिजल्ट देखी, वह कौन सी बात? जमा का खाता किसने कितना जमा किया है? चाहे मन्सा में, चाहे वाचा से, चाहे कर्मणा से, चाहे सम्बन्ध-सम्पर्क से - आप सभी का चैलेन्ज है, अपने को ही नहीं लेकिन विश्व के आगे बोलते हो कि एक जन्म में 21 जन्म का जमा करना है। यह बोलते हो ना! जानते हो ना? तो एक जन्म में 21 जन्मों का जमा करना है तो कितना करना पड़े?

अभी मन्सा में जो जमा करते हो उससे एक तो आधाकल्प आपको मन्सा से वृत्ति या वायब्रेशन फैलाने की आवश्यकता नहीं है, 21 जन्म यह पुरूषार्थ करने की आवश्यकता नहीं है और दूसरा द्वापर से लेकर जो आपके चित्र भिन्न-भिन्न  रूप में पूजे जाते हैं, आपको पता नहीं है कि हम किस रूप में पूजे जाते हैं लेकिन पूज्य तो हो ना! 33 करोड़ देवताओं की मान्यता है तो आधाकल्प माननीय और पूज्यनीय बनते हो। उन जड़ चित्रों द्वारा भी आपकी मन्सा सेवा आटोमेटिक होती रहेगी। कोई भी भगत आपके जड़ चित्र के सामने आयेंगे तो उनको मन्सा वायब्रेशन से शान्ति, खुशी, शक्ति की अनुभूति होगी, यह मन्सा के जमा का प्रभाव होगा। और जो वाणी में जमा करते हैं, खाता अच्छा है, उन्हों का फिर वाणी द्वारा गायन और पूजन ज्यादा होता है। वाणी द्वारा उन्हों की महिमा और पूजा युक्तियुक्त होती है। काम चलाऊ पूजा नहीं, युक्तियुक्त पूजा होती है, क्योंकि वाणी द्वारा आप सभी उन्हों को सुख देते हो, शान्ति देते हो तो आधाकल्प आपका वाणी से बहुत युक्तियुक्त गायन होगा। एक गायन होगा और दूसरा युक्तियुक्त पूज्य बनेंगे। और कर्म द्वारा जो सदा करने वाली आत्मायें हैं, आधा दिन किया, आधा दिन नहीं किया, कभी किया, कभी नहीं किया, नहीं। लेकिन सदा और हर कर्म में अगर आपने जमा किया है, तो आपके हर कर्म की पूजा होगी। बहुत थोड़े देवताओं की हर कर्म की पूजा होती है। कभी-कभी वालों की सारे दिन में कभी-कभी होगी। और स्नेह, सहयोग वाली जो आत्मायें हैं, स्नेह से सहयोग से जो जमा करते हैं उन्हों की चाहे छोटी सी मूर्ति भी हो, मन्दिर भले छोटा हो लेकिन उस मूर्ति से स्नेह और सहयोग का वरदान प्रैक्टिकल में अनुभव होगा। समझा। अभी अपने को चेक करना कि चारों बातों में मेरा जमा का खाता कितना है? तीन में ज्यादा है, एक में कम है, या एक में ज्यादा है, तीन में कम है?

बापदादा ने जो रिजल्ट देखी तो बापदादा को पसन्द नहीं आई। अभी बैठकर क्या बतायें, इसलिए शार्ट में ही कहते हैं कि विनाश को जल्दी लाना है तो इस वर्ष से इन चारों ही बातों में जमा का खाता बढ़ाओ। कम खर्च बालानशीन बनो। वाणी से भी ज्यादा व्यर्थ जाता है, जो जरूरत भी नहीं होगी उसमें भी टाइम लगा देते हैं। मन्सा में जो सोचने की बात नहीं है, वह भी सोचने लग जाते हैं तो जमा का खाता कम हो जाता है। वेस्ट जाता है, जमा नहीं होता। तो विनाश के पहले जमा का खाता बढ़ाओ। तो बापदादा को विनाश का आर्डर देने में क्या देरी लगेगी, ताली बजाई और हुआ। यह ताली तो बजा ली ना। अभी तैयारी की ताली बजाओ। (सभी बार-बार तालियां बजा रहे हैं) आज तालियों की महफिल ज्यादा है। बापदादा बच्चों को देख करके खुश हैं। समझा इस वर्ष में क्या करना है?

बापदादा के पास हर एक बच्चे की टी.वी. है और बापदादा कभी-कभी अचानक हर बच्चे की टी.वी. का स्विच आन करते हैं तो बहुत रमणीक दृश्य होता है। अचानक करते हैं, प्रोग्राम से करेंगे तो ठीक बैठेंगे, ठीक करेंगे लेकिन अचानक का खेल देखते हैं तो अभी भी मैजारिटी का वेस्ट खाता बहुत है। बापदादा ने पहले एक स्लोगन दिया था -कम बोलो, मीठा बोलो। याद है? सभी ने यह स्लोगन चारों ओर लिखकर भी लगाया था, लेकिन दीवारों में तो लग गया, अभी दिल में लगाओ। एडवान्स पार्टी का सब पूछते हैं, कहाँ हैं, क्या करते हैं? क्यों नहीं प्रत्यक्ष होते हैं? तो वह आत्मायें कहती हैं हम प्रत्यक्ष होंगे तो क्या हम अकेले प्रत्यक्ष होंगे कि साथ-साथ होंगे? अगर मानों एडवान्स पार्टी का पार्ट प्रत्यक्ष होता है तो कौन हैं, यह क्या है, उसमें आप नहीं होंगे? क्या सिर्फ एडवान्स पार्टी प्रत्यक्ष होगी? वह भी आपका इन्तजार कर रहे हैं कि एक साथ ताली बजायें। दूसरे तरफ विनाश का समय आपका इन्तजार कर रहा है, आप इन्तजार नहीं करो वह कर रहा है। समय तो आपकी रचना है, आप आर्डर करो तो वह तो सदा तैयार है। तो अभी अपने को अचल-अडोल बनाने की, बनने की तैयारी करो। जो भी आपके सम्पर्क-सम्बन्ध में आते हैं, मानों टीचर्स हैं या निमित्त बड़े भाई या बहनें हैं, उन्हों को अपने सम्बन्ध-सम्पर्क वाले ग्रुप को इस वर्ष में ऐसा तैयार करना है जो हर एक के मुख से निकले कि हम अनुभवी मूर्त हैं। चाहे सेन्टर पर साथी हैं, चाहे प्रवृत्ति में रहने वाले हैं, लेकिन हर एक के सहयोग से, वृत्ति से ऐसा ग्रुप तैयार करो जो कोई के भी मुख से, कोई की भी वृत्ति से ऐसा अनुभव नहीं हो कि यह अनुभवी मूर्त बनने वाली है, बनी नहीं है। समझा? ऐसे नहीं समझना कि जो सेन्टर्स के बड़े हैं, वह बने, हम तो बने नहीं। सबकी अंगुली चाहिए। चाहे भण्डारे का कार्य करने वाले भी हैं लेकिन सभी ज़िम्मेवार हैं।

अभी इस वर्ष की एन्ड में यह रिजल्ट पूछेंगे क्योंकि डायमण्ड जुबली हो गई, अभी समाप्ति के नज़दीक हैं। डायमण्ड जुबली में भी डायमण्ड नहीं बनेंगे तो कौन सी जुबली और मनायेंगे? और मनानी है कि समाप्ति करनी है? 100 वर्ष की मनानी है? मनानी हो तो फिर भले ढीले-ढाले चलो। अगर जल्दी करना है तो इस वर्ष में पहले आप तो बनो। जो रोज़ आने वाले हैं या कभी-कभी की लिस्ट में हैं, ब्राह्मण की लिस्ट में हैं वह सब तो तैयार हो जाओ, जब आप तैयार हो जायेंगे तब ताली बजायेंगे। अगर कल तैयार हो जाओ तो कल बजायेंगे। तो सभी तैयार हैं या होने ही हैं? सेन्टर पर रहने वाले वा सेन्टर पर आने वाले हर बच्चे की रिजल्ट देखेंगे कि नम्बर कौन लेता है, ठीक है? पाण्डव ठीक है? पाण्डव चुप हैं, सोच में हैं क्या?

देखो, बापदादा ने तो अपना वायदा पूरा किया, डेट पर आ गये ना। अभी आप भी डेट पर पूरा तैयार हो जाना। यह बड़ा हाल पसन्द है कि छोटा हाल ठीक है? अभी तो और वृद्धि होनी ही है। इस हाल में भी पीछे खड़ा होना पड़ेगा, आप भाग्यवान हो जो आराम से बैठे हो। जितना बड़ा बनायेंगे ना उतना छोटा होता जायेगा। अच्छा-जो इस स्थान की सेवा के निमित्त बने हैं, बापदादा उन सबको बहुत-बहुत मुबारक देते हैं। कुछ भी थोड़ा बहुत रह गया है तो सोचना नहीं, तैयार ही है। फिर भी देखो बापदादा देख रहे थे कि थोड़े समय में जितना फास्ट काम किया है, उसी प्रमाण समय को देखते हुए बहुत अच्छा प्रोग्रेस किया है और बाकी थोड़ा सा है, वह हो जायेगा। बापदादा को पसन्द है। दादी ने आप लोगों को उल्हना दिया लेकिन बापदादा मुबारक दे रहे हैं। दादी निमित्त है बनाने के, अगर नहीं कहती तो आप आज बना नहीं पाते। तो उनका काम है कहना और बापदादा का काम है मुबारक देना। नाम तो नहीं ले सकते, बहुत हैं लेकिन जो मुख्य कन्स्ट्रक्शन के निमित्त हैं, वह खड़े हो जाओ।

(निर्वैर भाई) यह आपका बैकबोन है ना। सभी दिल से बोलो मुबारक हो, मुबारक हो।

इस बारी की रिजल्ट में बापदादा को सबूत मिला कि हर बच्चे का बाप से कितना स्नेह है। बाप ने कहा और बच्चों ने जी हज़ूर, जी हाजिर किया। (कान्ट्रैक्टर्स प्रति) इन्हों को समय कम मिला है, समय के अनुसार काम बहुत किया, अच्छा किया और आप सबने भी सहयोग दिया इसीलिए बापदादा एक एक का दिल में नाम ले रहा है, मुख से नहीं दिल से। देश-विदेश के सभी बच्चों को स्नेह के सबूत की मुबारक दे रहे हैं। हर बच्चे ने अपने दिल से अंगुली दी है, चाहे किस भी रूप में, लेकिन सर्व के सहयोग से यह शान्तिवन समय पर तैयार हो गया। बैठने के योग्य तो है ना। अच्छा है। बेहद का हाल है लेकिन आगे क्या करेंगे? बस इतना ही ठीक है? कई बच्चों ने बापदादा को मीठा-मीठा उल्हना भी दिया कि हमने समझा था कि अभी संख्या नहीं मिलेगी, जो आना चाहे वो आये। लेकिन संख्या तो और कम हो गई, बहुत थोड़ी संख्या मिली है। तो अभी क्या करना पड़े, सोचना। अच्छा।

टीचर्स समझती हैं ना कि और संख्या मिलनी चाहिए। टीचर्स हाथ उठाओ। टीचर्स को तो चांस अच्छा मिल जाता है एक ग्रुप में आते तो दूसरे में भी आ जाते। अभी सभी टीचर्स क्या करेंगी? रिजल्ट देंगी ना? सेन्टर को तैयार करेंगी? जो समझती हैं हो सकता है, वह हाथ उठाओ। सभी निमित्त हैं, चाहे छोटी सी कुमारी रहती है, कुमार रहते हैं, भाई रहते हैं, सब ज़िम्मेवार हैं। एक साल दिया है, एक मास नहीं दिया है, एक साल दिया है। मधुबन भी तैयार होगा ना।

मधुबन वाले हाथ उठाओ। तो पहला एक्जैम्पल कौन बनेगा? मधुबन या सभी साथ बनेंगे? बापदादा ने देखा है कि मधुबन को कॉपी करना सबको आता है। चाहे अच्छी बात हो, चाहे कोई भी बात हो लेकिन मधुबन को कॉपी करना बहुत सहज आता है। और एक स्लोगन बन गया है - मधुबन में भी तो होता है! अभी इस वर्ष में यह स्लोगन नहीं कहना, इस वर्ष का स्लोगन है, मुझे करना है। यह भी होता है, यह भी होता है, नहीं। करना ही है। मुझे करना है। अर्जुन मैं हूँ। दूसरा अर्जुन नहीं है, जिसको देखना है। मैं अर्जुन हूँ, मैं निमित्त हूँ।

अच्छा-इस मेले में जो प्रबन्ध मिला है उसमें सब सन्तुष्ट हो? सन्तुष्ट अभी भी हैं और आगे भी हो जायेंगे। तो इस वर्ष का अन्त और दूसरे वर्ष का आदि तो संगम हो गया ना। तो संगम का बापदादा सभी को टाइटल देते हैं - सन्तुष्ट आत्मायें, सन्तुष्ट मणियां। चाहे भाई हैं, चाहे बहिनें हैं लेकिन आत्मा मणी है इसलिए सभी सन्तुष्ट मणियां हैं, और सदा रहेंगी। देखना सन्तुष्टता को छोड़ना नहीं। कितना भी कोई आपके आगे कोशिश करे, आपकी सन्तुष्टता हिलाने के लिए आये लेकिन आप हिलना नहीं, सदा सन्तुष्ट। सदा मुखड़ा मुस्कुराता रहे। कभी कैसा, कभी कैसा नहीं। सदा मुस्कुराता हुआ चेहरा, अगर चेहरे में कभी थोड़ा फर्क आये तो अपने पूजने वाले चित्र को सामने रखो तो मेरा चित्र तो मुस्कुरा रहा है और मैं सोच रही हूँ। तो मुस्कुराना सन्तुष्टता की निशानी है। तो क्या बनेंगे? क्या करेंगे? सन्तुष्टमणि। चेहरे पर कभी भी और रेखायें नहीं हों, सिवाए मुस्कुराने के। उदासी को अपनी दासी बना दो। अपने चेहरे पर उसको लाने नहीं देना। आर्डर से चलाओ, नहीं आ सकती। अच्छा।

इस ग्रुप में तो सब जोन आये हैं ना। सबसे बड़ी संख्या किसकी है? (गुजरात) गुजरात वालों ने हिम्मत अच्छी की है। (महाराष्ट्र, कर्नाटक, ईस्टर्न, पंजाब, दिल्ली, नेपाल, यू.पी. आदि सभी ज़ोन से बापदादा हाथ उठवाकर मिल रहे हैं) तामिलनाडु कहाँ है? तामिलनाडु में भी बहुत अच्छी वृद्धि है।

डबल फॉरेनर्स को भी डबल मुबारक हो। कन्स्ट्रक्शन वालों ने जिस भी डिपार्टमेंट में काम किया है, वह उठकर खड़े हो जाओ। कन्स्ट्रक्शन वालों को बापदादा वतन में मसाज करता है।

जिन्होंने भी काम किया है वह सभी वतन में आना, वतन में मसाज होता है। अच्छा। बहुत अच्छा किया है। (इसके पीछे दादी जी और दादी जानकी जी की विशेष प्रेरणा रही है, सभी ने दादियों को मुबारक दी) सभी ने तालियां तो बजाई और बापदादा उनके लिए ताली बजा रहे हैं जो आप सारी सभा सहयोगी बनी। अच्छा।

चारों ओर के सर्व उमंग-उत्साह से आगे बढ़ने वाले, सदा इकॉनामी के अवतार बन समय, संकल्प, वाणी और कर्म को बचत के खाते में जमा करने वाले, साकार वा आकार रूप में नया वर्ष मनाने वाले सिकीलधे बच्चे, बापदादा देख रहे हैं कि चारों ओर के बच्चे, साकार में नहीं तो आकार रूप में मधुबन में ही हैं और आकार रूप में मना रहे हैं। तो सभी को बापदादा नये वर्ष की, शान्तिवन के स्थापना की मुबारक और यादप्यार दे रहे हैं। सभी सन्तुष्ट मणियों को नमस्ते।

(दादी जी तथा दादी जानकी जी ने सिन्धी सम्मेलन का समाचार बापदादा को सुनाया)

इस समय जो सभी ने मिलकर सेवा की और लास्ट में सिन्धी सम्मेलन भी किया तो भारत या विदेश दोनों में जिन्होंने भी सेवा की, निमित्त बनें, उन्हों को सच्ची ज्योत जगाने की विशेष मुबारक है। (सिन्धी सम्मेलन में आये हुए भाई- बहिनों से) जो अभी यहाँ हैं, वह खड़े हो जाओ। बीज बहुत अच्छा डाला है, फल देखते जाना। अच्छी सेवा की है। मुबारक हो।

(बापदादा ने अपने हस्तों से झण्डा फहराया, मोमबत्तियां जलाई, केक काटी और 12 बजे सभी बच्चों को नये वर्ष की बधाई के साथ याद-प्यार दी)

पुराने वर्ष को विदाई दी और नये वर्ष का आह्वान किया, आरम्भ किया। जैसे पुराने वर्ष को विदाई दी वैसे वर्ष के साथ जो इस वर्ष में कोई भी कमी रह गई हो, कमजोरी रह गई हो उसको भी सदा के लिए विदाई और सर्व गुणों का आह्वान करके नई दुनिया के स्मृति से, तीव्र गति से आगे बढ़ते चलो, पुरानी बातों को छोड़ो। पुराने को विदाई दी या कभी-कभी बुलायेंगे? नहीं ना? सदा के लिए विदाई दी? जैसे यह 96 का वर्ष अभी नहीं आयेगा। विदाई दे दी ना! अब आगे 97 आयेगा, 96 नहीं। इसलिए पुरानी कमजोरियों को स्वाहा करो। स्वाहा किया? यह डायमण्ड जुबली हाल है ना तो डायमण्ड जुबली हाल अर्थात् यज्ञ, तो यज्ञ में स्वाहा की हुई चीज़ फिर वापिस नहीं ली जाती। तो आपने स्वाहा किया? हाँ या ना? सभी ने कर लिया? थोड़ा छिपाकर तो नहीं रखा? जेब खर्च की आदत होती है ना। तो यह कमजोरियां जेब खर्च की रीति से भी नहीं रखना। क्या करें, बात ही ऐसी थी, थोड़ा सा करना पड़ा, आइवेल के लिए रखना ही पड़ता है, ऐसे नहीं। जेबखर्च भी नहीं रखना। स्वाहा तो पूरा स्वाहा। तो बीती सो बीती। और अभी से नई बातें आरम्भ हो गई। अभी से किया ना? तो सच्चा डायमण्ड बन गये। बनना पड़ेगा, देखेंगे, पक्का नहीं - यह पुरानी भाषा खत्म। अभी पुरानी बातें नहीं बोलना। पता नहीं, पता नहीं, नहीं कहना। करना ही पड़ता है, नहीं। हम जो करेंगे वो और करेगे -यह पाठ पक्का करो। ठीक है ना! तो मुबारक हो, बधाई हो। पदमगुणा बधाई हो।

अच्छा। ओम् शान्ति।