14-12-97   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


व्यर्थ और नेगेटिव को अवाइड कर अवार्ड लेने के पात्र बनो

आज बापदादा अपने परमात्म प्यार के पात्र आत्माओं को देख रहे हैं। परमात्म प्यार आनंदमय झूला है जिस सुखदाई झूले में सदा झूलते रहते हैं। परमात्म प्यार अनेक जन्मों के दु:खों को एक सेकण्ड में समाप्त कर देता है। परमात्म प्यार सर्व शक्ति सम्पन्न है, जो निर्बल आत्माओं को शक्तिशाली बना देता है। ऐसे श्रेष्ठ परमात्म प्यार के आप कितनी थोड़ी सी आत्मायें पात्र हो। ऐसी श्रेष्ठ पात्र आत्माओं को बापदादा देख-देख हर्षित होते हैं। जैसे बाप हर्षित होते हैं वैसे बच्चे भी हर्षित होते हैं लेकिन नम्बरवार। बापदादा तो यही हर बच्चे को दिल से वरदान देते हैं कि सदा परमात्म प्यार के झूले में झूलने वाले अविनाशी रत्न भव। इस प्यार के झूले से मन रूपी पांव नीचे नहीं करो क्योंकि सारे विश्व की आत्माओं से परम आत्मा के लाडले हो, प्यारे हो। तो बापदादा यही बच्चों को दुआयें देते हैं इसी परमात्म प्यार में लवलीन रहो। ऐसे लवलीन आत्माओं के पास कोई भी पर-स्थिति वा माया की हलचल आ नहीं सकती। नीचे पांव रखते हो तो माया भी भिन्न-भिन्न खेल खेलने आती है, भिन्न-भिन्न रूप धारण कर आकर्षित करती है। लवलीन आत्माओं के सर्व शक्तियों के आगे माया आंख उठाकर भी नहीं देख सकती। आपका तीसरा नेत्र, ज्वालामुखी नेत्र माया को शक्तिहीन कर देता है। तो आप सब जो विशेष आत्मायें हो, सभी ब्राह्मणों को बापदादा द्वारा जन्मते ही तीसरा नेत्र मिला हुआ है। लेकिन बाप देखते हैं कभी-कभी बच्चों का तीसरा नेत्र बहुत मेहनत का पुरूषार्थ करते-करते थक जाता है और थकने के कारण बंद हो जाता है। माया को भी देखने की आंख बहुत दूरादेशी वाली है, दूर से देख लेती है। अभी तो माया भी समझ गई है कि अब हमारा राज्य गया कि गया, इसलिए माया से घबराओ नहीं। खुशी-खुशी से, सर्व शक्तियों के आधार से उनको विदाई दो। आने का चांस नहीं दो, विदाई दो। वह भी ब्राह्मण आत्माओं से, श्रेष्ठ आत्माओं से वार करतेकरते थक गई है। आप खुद कमजोरी के कारण माया का आह्वान करते हो, वह थक गई है लेकिन आप आह्वान करते हो तो वह भी चांस ले लेती है। अभी शक्तिहीन हो गई है। आप सबका अनुभव क्या कहता है? अभी माया में पहले जैसी शक्ति है? उसमें शक्ति है या आप शक्तिशाली हो? वह ट्रायल तो करेगी क्योंकि आप ही आह्वान करते हो तो वह चांस क्यों नहीं देगी। कमजोर बनते क्यों हो? बाप का यह क्वेश्चन है कि मास्टर सर्वशक्तिवान हो या नहीं? सभी मास्टर सर्वशक्तिवान हो? कभी-कभी सर्वशक्तिवान हो या सदा सर्वशक्तिवान हो? क्या हो? सदा शक्तिशाली हो? तो माया को कह दें कि अभी जाओ? आप उसे नहीं बुलाना। बाप माया को कहते हैं अभी समाप्त करो। तो माया बाप को कहती है कि मुझे आह्वान करते हैं। तो बाप क्या करे? अगर किसी भी प्रकार की कमजोरी चाहे मन में, चाहे वचन में, चाहे सम्बन्ध-सम्पर्क में आती है तो समझो माया को आह्वान किया। उसको भी आह्वान का वायब्रेशन बहुत जल्दी पहुंचता है।

यह महा उत्सव तो बहुत अच्छे मना रहे हो। लेकिन उत्साह सदा रहे इसलिए उत्सव मना रहे हो। इस वर्ष बहुत उत्सव मना रहे हो ना? (इस ग्रुप में ईश्वरीय सेवा के आदि रत्न भाईयों का सम्मान समारोह तथा टीचर्स बहिनों की सिल्वर जुबली का कार्यक्रम रखा गया है) हर ग्रुप में उत्सव मना रहे हैं तो बाप समझते हैं कि यह वर्ष उत्सव मनाना अर्थात् माया को विदाई देना। ऐसे नहीं गोल्डन चुन्नी पहनकर बैठ जाओ, गोल्डन चुन्नी पहनना माना गोल्डन एजड बनना। दृश्य तो बहुत अच्छा लगता है लेकिन सदा गोल्डन स्थिति की चुन्नी वा दुपट्टा पड़ा रहे। ऐसे नहीं दुपट्टा उतरा, उत्सव पूरा हुआ और जैसे थे वैसे रहे। यह उत्साह दिलाने का फंक्शन है। तो जिन्होंने उत्सव मनाया है या मनाने के लिए आये हैं वह हाथ उठाओ। बापदादा खुश है। खूब मनाओ लेकिन मनाना अर्थात् बनना और बनाना। उत्सव मनाने समय अपने आपको अन्डरलाइन करो सदा याद और सेवा के उत्साह में रहने वाली आत्मा हूँ। बापदादा को भी दृश्य अच्छा लगता है। तो यह वर्ष बापदादा माया को विदाई देने का वर्ष मनाने चाहते हैं। तो ऐसा उत्सव मनायेंगे ना? कल जो मनायेंगे, ऐसा ही मनायेंगे ना? सिल्वर जुबली मनायेंगे ना? गोल्डन जुबली हो, सिल्वर जुबली हो लेकिन है तो उत्सव ना! ऐसे नहीं सोचना कि हम तो सिल्वर जुबली वाले हैं, पहले गोल्डन वाले बनें फिर हम बनें। ऐसे नहीं सोचना। और जिन्होंने नहीं भी मनाया है, वह भी ऐसे नहीं समझना कि जो उत्सव मनाने वाले हैं उन्हों के लिए बापदादा कह रहे हैं। सभी के लिए कह रहे हैं। ब्राह्मण जीवन का उत्सव तो मनाया है ना! ब्राह्मण तो सभी बन गये या ब्राह्मण भी बन रहे हैं? बन गये हैं। तो ब्राह्मण जन्म का उत्सव मनाने वाली आत्मायें अर्थात् सदा उत्साह में रहना और औरों को भी उत्साह में लाना। यही ब्राह्मणों का आक्यूपेशन है। वह ब्राह्मण तो मुख से कथा करते हैं, आप ब्राह्मण मुख से भी बोलते तो उत्साह दिलाने के लिए बोलते हैं। कैसी भी आत्मा हो चाहे आपके विरोधी आत्मा हो, क्योंकि हिसाब-किताब भी यहाँ ही चुक्तू होना है। लेकिन कैसी भी आत्मा हो ब्राह्मणों का काम है उत्साह भरी कहानी सुनाना। उत्साह की बातें सुनाना। वह रोता हो, आप उन्हें उत्साह में नचा दो। जब कोई दिल में उत्साह होता है तो क्या होता है? पांव नाचने लगते हैं। जैसे यह फंक्शन करते हो ना। तो लास्ट में क्या करते हो? सब डांस करते हैं ना। यह तो पांव की डांस है। ब्राह्मण आत्मा सिवाए उत्साह दिलाने और उत्साह में रहने के बिना रह नहीं सकती। उत्साह मिटाने वाली बातें होती हैं और होंगी लेकिन बापदादा इस वर्ष में यही सब बच्चों से शुभ आश रखते हैं कि बीती सो बीती, आज तक जो भी कैसी भी आत्मायें सम्बन्ध-सम्पर्क में रही हैं, जैसी भी हैं, चाहे नेगेटिव भी हैं, सामना करने वाली भी हैं, ब्राह्मण जीवन को हिलाने वाली भी हैं लेकिन इस वर्ष में नेगेटिव और वेस्ट दृष्टिकोण समाप्त करो। स्नेह दो, शक्ति दो। अगर स्नेह नहीं दे सकते, शक्ति नहीं दे सकते तो देखते, सुनते, सम्पर्क में आते वेस्ट और नेगेटिव बातों को दिल में धारण करने में अवाइड करो। मन और बुद्धि में धारण नहीं हो, अवाइड करो। परिवर्तन करो। नेगेटिव को वा वेस्ट को परिवर्तन करके दिल में समाओ। ऐसे दोनों बातों को जो अवाइड करेगा उसको बापदादा द्वारा, ब्राह्मण परिवार द्वारा बहुत अच्छे ते अच्छा, बड़े ते बड़ा अवार्ड मिलेगा। और आत्माओं को तो अवार्ड देने वाली आत्मायें होती हैं। अवार्ड मिलता है ना? तो यह परमात्म अवार्ड है। अवाइड करो, अवार्ड लो। हिम्मत है? अच्छा।

पाण्डवों ने जिन्होंने फंक्शन मनाया, उन्हों में हिम्मत है? अवार्ड लेंगे? सभी ने हाथ उठाया, आज की डेट अन्डरलाइन करना। आज कौन सी डेट है? (14 दिसम्बर) तो हर मास की 14 तारीख अपने को चेक करना। अच्छा - सिल्वर जुबली वाले जो समझते हैं अवार्ड लेंगे, वह हाथ उठाओ। ऐसे देखा-देखी नहीं उठाओ। शर्म के कारण नहीं उठाओ। बापदादा चांस देते हैं, अगर कोई में हिम्मत नहीं है तो नहीं उठाओ, कोई हर्जा नहीं। बापदादा और सकाश देगा, ऐसी कोई बात नहीं है। ऐसे कोई हैं जो समझते हैं और थोड़ी हिम्मत चाहिए? कोई सिल्वर जुबली वाली टीचर्स ऐसी हैं? चलो यहाँ हाथ नहीं उठाओ, शर्म आता हो तो लिखकर देना। जब फंक्शन मनाओ तब देना, समझते हो हमको एक्स्ट्रा हिम्मत चाहिए, तो उसके लिए विशेष ट्युशन रखेंगे। जो पढ़ाई में कमजोर होता है तो क्या करते हैं? ट्युशन रखते हैं ना? अच्छा। मधुबन वाले हाथ उठाओ। खड़े हो जाओ। मधुबन वाले चांस अच्छा लेते हैं। अच्छा - मधुबन वाले अवार्ड लेंगे? सभी ने उठाया? ट्युशन नहीं चाहिए? बहादुर हैं। अच्छा - बापदादा हिसाब लेंगे। मुबारक हो मधुबन वालों को।

बाकी जो कोने-कोने से स्नेही, सहयोगी, सम्बन्ध में रहने वाले नये पुराने बच्चे आये हैं, उन्हों को विशेष बापदादा एक तो आने की मुबारक देते हैं, दूसरा मर्यादा में चलने की भी मुबारक देते हैं। कम से कम एक साल तो नये भी मर्यादापूर्वक चले हैं तब यहाँ पहुंचे हैं। कोई चतुर भी होंगे लेकिन मैजारिटी तो मर्यादा को पालन करने वाले हैं। तो प्रवृत्ति में रहते मर्यादा में चलने वाली, मर्यादा रखने वाली आत्माओं को मर्यादा की भी मुबारक है।

अच्छा - मातायें हिम्मत रखती हो कि हम माया को विदाई देंगे? अगर हाँ तो एक हाथ की ताली बजाओ। अच्छा - प्रवृत्ति वाले पाण्डव, हिम्मत है? अवार्ड लेना है? एक हाथ की ताली बजाओ। बापदादा को भी खुशी होती है, देखो बेहद का हाल, बेहद का नशा चढ़ाता है ना। आराम से बैठने की जगह तो है ना? अभी आपका उल्हना होगा कि दूर से देख नहीं सकते हैं। लेकिन अभी तो फिर भी आप बहुत आराम से बैठकर सुन तो सकते, टी.वी. में देख तो सकते। जब 9 लाख तैयार करेंगे तो क्या होगा? फिर बैठने की जगह मिलेगी? इसीलिए जो जितना पहले आया वह भाग्यवान है। तो जैसे अभी आप लोग अपने से पहले वालों का भाग्य गाते हो कि आप बहुत अच्छे हैं। ऐसे बापदादा कहते हैं कि अभी जो आप आये हो ना, उन्हों को भी पीछे वाले कहेंगे, आप बहुत भाग्यवान हैं। वृद्धि तो होनी है ना? नहीं तो राजधानी कैसे बनेगी?

तो यह वर्ष विदाई और बधाई का है और इस वर्ष में विशेष जो बच्चों ने संकल्प किया है, वह प्रैक्टिकल में करने वालों को बापदादा की एक्स्ट्रा मदद भी मिलेगी। सिर्फ दृढ़ रहना। बीच-बीच में ड्रामा पेपर लेगा लेकिन संकल्प में दृढ़ रहना, संकल्प रूपी पांव हिले नहीं, अचल रहे तो बापदादा द्वारा एक्स्ट्रा मदद की अनुभूति होगी। सिर्फ लेने की शक्ति चाहिए। एक बल, एक भरोसा.. कुछ भी हो जाए, बनना ही है। यह संकल्प रूपी पांव मजबूत रखना। तो बातें आयेंगी भी लेकिन ऐसे ही अनुभव करेंगे जैसे प्लेन में बादल नीचे रह जाते हैं और स्वयं बादलों के ऊपर रहते हैं। बादल एक मनोरंजन का दृश्य बन जाता है। ऐसे कितने भी काले बादलों जैसी बातें हों, जिसमें कुछ समस्या का हल या समाधान उस समय दिखाई न भी दे लेकिन यह दृढ़ निश्चय हो कि यह बादल आये हैं जाने के लिए। यह बादल बिखरने वाले ही हैं, रहने वाले नहीं हैं। ऐसे उड़ती कला की स्टेज पर स्थित हो जाओ तो कितने भी गहरे काले बादल बिखर जायेंगे और आप दृढ़ता के बल से सफल हुए ही पड़े हैं। घबराओ नहीं, यह कैसे होगा! अच्छा होगा, क्योंकि बापदादा जानते हैं जितना समय समीप आ रहा है उतना नई-नई बातें, संस्कार, हिसाब-किताब के काले बादल आयेंगे। यहाँ ही सब चुक्तू होना है। कई बच्चे कहते हैं कि दिन-प्रतिदिन और ही ऐसी बातें बढ़ती क्यों हैं? जिन बच्चों को धर्मराजपुरी में क्रास नहीं करना है, उन्हों के संगम के इस अन्तिम समय में स्वभाव-संस्कार के सब हिसाब-किताब यहाँ ही चुक्तू होने हैं। धर्मराजपुरी में नहीं जाना है। आपके सामने यमदूत नहीं आयेंगे। यह बातें ही यमदूत हैं, जो यहाँ ही खत्म होनी हैं इसीलिए बीमारी बाहर निकलकर खत्म होने की निशानी है। ऐसे नहीं सोचो कि यह तो दिखाई नहीं देता है कि समय समीप है और ही व्यर्थ संकल्प बढ़ रहे हैं! लेकिन यह चुक्तू होने के लिए बाहर निकल रहे हैं। उन्हों का काम है आना और आपका काम है उड़ती कला द्वारा, सकाश द्वारा परिवर्तन करना। घबराओ नहीं। कई बच्चों की विशेषता है कि बाहर से घबराना दिखाई नहीं देता है लेकिन अन्दर मन घबराता है। बाहर से कहेंगे नहीं-नहीं, कुछ नहीं। यह तो होता ही है लेकिन अन्दर उसका सेक होगा। तो बापदादा पहले से ही सुना देता है कि घबराने वाली बातें आयेंगी लेकिन आप घबराना नहीं। अपने शस्त्र छोड़ नहीं दो। जो घबराता है ना तो जो भी हाथ में चीज़ होती है वह गिर जाती है। तो जब यह मन में भी घबराते हैं ना तो शस्त्र व शक्तियां जो हैं वह गिर जाती हैं, मर्ज हो जाती हैं। इसीलिए घबराओ नहीं, पहले से ही पता है। त्रिकालदर्शी बनो, निर्भय बनो। ब्राह्मण आपस में सम्बन्ध में निर्भय नहीं बनना, माया से निर्भय बनो। सम्बन्ध में तो स्नेह और निर्माण। कोई कैसा भी हो आप दिल से स्नेह दो, शुभ भावना दो, रहम करो। निर्माण बन उसको आगे रख आगे बढ़ाओ। जिसको कहा जाता है कारण रूपी नेगेटिव को समाधान रूपी पॉजिटिव बनाओ। यह कारण, यह कारण, यह कारण... कारण वा समस्या को पॉजिटिव समाधान बनाओ।

बापदादा को एक बात पर कभी-कभी हंसी आती है। पता है कौन सी बात? जानते हो? एक तरफ तो चैलेन्ज करते हैं - बाबा हम प्रकृति जीत बनेंगे। प्रकृति को भी परिवर्तन करेंगे, यह कहते हो ना? प्रकृति को बदलेंगे ना? ऐसी चैलेन्ज करने वाले प्रकृति को परिवर्तन कर सकते हैं। लेकिन जब सम्बन्ध-सम्पर्क में कोई बातें होती हैं तो उसको समाधान नहीं कर सकते। परिवर्तन नहीं कर सकते। हंसी की बात है ना - प्रकृति जड़ है उसके लिए तो चैलेन्ज है लेकिन ब्राह्मण आत्माओं को परिवर्तन करना, वह नहीं होता है। और फिर क्या सोचते हैं? वह हो नहीं सकता, यह होना ही नहीं है। हो ही नहीं सकता, बदल ही नहीं सकता। तो प्रकृति को कैसे बदलेंगे? खुद बदलकर औरों को बदलो। चलो वह रांग है, 100 परसेन्ट रांग है। लेकिन आपका वायदा क्या है? बाप से क्या वायदा किया है? स्व परिवर्तन से विश्व का परिवर्तन करेंगे? यह वायदा है या भूल गये हैं? हाँ तो सब करते हो। कैसी भी बातें हों, बातों को बदलने के लिए मदद भले लो लेकिन यह बदलना ही मुश्किल है, यह सर्टिफिकेट नहीं दो। किसने आपको अथॉरिटी दी है सर्टिफिकेट देने की? तो यह सोचना कि यह तो होना ही नहीं है, यह तो ठीक होगा ही नहीं। किसने आपको जज बनाया? ऐसे ही जज की कुर्सी पर बैठ जाते हो? या तो वकील बनते, बहुत कायदे कानून बताते, बहस करते, ऐसा नहीं ऐसा। ऐसा नहीं ऐसा। न वकील बनो, न जज बनो। यह अथॉरिटी बापदादा ने दी नहीं है, जो निमित्त हैं उनका सहयोग लो। वह निमित्त आत्मायें भी बापदादा की राय से करती हैं। अपनी मनमत नहीं चलाती हैं।

तो इस वर्ष में यह सब बातें समाप्त करो अर्थात् मन से परिवर्तन करो, अवाइड करो, ऊपर पहुंचाया, जिम्मेवारी खत्म। आपसे परिवर्तन नहीं होता तो निमित्त आत्माओं तक पहुंचाना यह आपका फर्ज है। फिर खुद लॉ हाथ में नहीं उठाओ, तभी अवार्ड के पात्र बनेंगे। तो सदा उत्साह में रहो और उत्साह बढ़ाओ, यही स्मृति में बापदादा इमर्ज कर रहे हैं। जब स्वयं उत्साह में रहेंगे तो सभी को हाथ में हाथ अर्थात् मन के स्नेह का हाथ में हाथ ले नाचेंगे, खुश रहेंगे। स्थूल हाथ नहीं, मन से स्नेह के सहयोग का हाथ। इसको ही हाथ में हाथ मिलाना कहा जाता है। स्नेह क्या नहीं कर सकता और यह परमात्म स्नेह है, परमात्म प्यार है। वह क्या नहीं कर सकता! असम्भव ब्राह्मण डिक्शनरी में है ही नहीं। उत्साह वाला कभी भी किसी भी बात में निराश, दिलशिकस्त नहीं होता।

तो यह पाण्डव जो विशेष उत्सव मना रहे हैं, वह क्या करेंगे? हर एक पाण्डव यह दृढ़ संकल्प करो कि मुझे परिवर्तन करने की जिम्मेवारी है क्योंकि आदि पालना वाले हो ना? तो ब्रह्मा बाप ने क्या किया? जिम्मेवारी उठाई ना? या कहा यह तो बदलना ही नहीं है? यह तो होना ही नहीं है? नहीं। इतनी आत्माओं का परिवर्तन करके दिखाया ना? चलो दूसरों को नहीं देखो, अपने को तो देख सकते हो, आपका परिवर्तन तो किया? या आपकी कमजोरियां देखी? नहीं देखी। तो ब्रह्मा बाप की पालना लेने वाले निमित्त हो, फॉलो ब्रह्मा को करने के लिए। इसमें ऐसे नहीं समझो - यह तो बड़ों की जिम्मेवारी है, हम तो डायरेक्शन पर चलने वाले हैं। नहीं। स्व-परिवर्तन से सर्व के सम्बन्ध-सम्पर्क में परिवर्तन लाने की जिम्मेवारी हर छोटे बड़े की है। जब बापदादा पूछते हैं क्या बनेंगे? तो सभी क्या कहते हैं? विश्व राजन बनेंगे। छोटा-मोटा भी नहीं, विश्व महाराजा बनेंगे। तो जब विश्व महाराजा बनने की जिम्मेवारी है तो सम्बन्ध-सम्पर्क में परिवर्तन करने की जिम्मेवारी नहीं है? हर एक आत्मा बाप की पालना का रिटर्न - परिवर्तन करने में जिम्मेवार है, सहयोगी है। ऐसे है? यह ग्रुप तो पालना लेने वाला है। तो पालना लेना उसका रिटर्न है - बाप समान पालना देना, इसमें छोटे नहीं बनो। इसमें हर एक बड़ा है। चाहे एक साल वाला भी है तो भी जिम्मेवार है। तो आप तो 30 साल से पुराने हो। तो बापदादा इस ग्रुप को परिवर्तक ग्रुप कहते हैं। चलो कहाँ झुकना भी पड़े, क्या ब्रह्मा बाप को झुकना नहीं पड़ा? विरोध नहीं देखा? सबसे ज्यादा गाली तो ब्रह्मा बाप ने खाई। आपोजीशन सबसे बड़ा ब्रह्मा बाप ने देखा। अगर दो चार भी आपोजीशन में हैं तो क्या बड़ी बात है? तो समझा यह ग्रुप कौन सा है? परिवर्तक ग्रुप। ठीक है ना? नाम पसन्द है? काम पसन्द है? सिर्फ नाम नहीं, काम भी। अच्छा

सिल्वर जुबली वाला ग्रुप क्या करेगा? यह तो हैं ही निमित्त टीचर्स। तो यह सिल्वर जुबली मनाने वाला ग्रुप सदा अपने उत्साह के फीचर्स, हर्षित, खुश रहने के फीचर्स द्वारा अनेक आत्माओं को हर्षायेंगे। टीचर्स का काम ही है, रोता कोई आवे और नाचता जावे। परेशान कोई आवे और अपनी शान में स्थिति हो जाए। परेशान का अर्थ ही है, शान से परे हो जाता है। तो टीचर्स का काम है परेशान को शान में स्थित करना। यह है सिल्वर जुबली मनाने वालों की सेवा। ऐसे नहीं खुद ही परेशान हो। कई ऐसे जिज्ञासु कहते भी हैं कि बाहर से परेशान होकर आते हैं और कभी-कभी कोई-कोई सब नहीं हैं, कोई-कोई टीचर ही परेशान होती हैं, तो हमको क्या शान में स्थित करेंगी। लेकिन नहीं, टीचर्स अर्थात् सदा अपने फीचर्स द्वारा हर आत्मा की सेवा करे। बोलने का टाइम नहीं हो, कोई हर्जा नहीं। एक सेकण्ड में अपने हर्षित दिल से, हर्षित मन से परमात्म स्नेह से (आत्मा का स्नेह नहीं) परमात्म स्नेह द्वारा, दृष्टि द्वारा उसको भी हर्षित बना दे। टीचर्स अगर कभी परेशान होते भी हो गलती से, होना नहीं चाहिए लेकिन गलती से हो भी जाते हो तो फौरन बापदादा से कनेक्शन जोड़कर, रूहरिहान करके उसी समय अपने को ठीक करो। यहाँ बापदादा से कनेक्शन करने का ड्रामा दिखाया ना? (कल बम्बई के छोटे बच्चों ने बापदादा से रूहरिहान का एक ड्रामा किया था) तो आप बापदादा से कनेक्शन नहीं कर सकते हो क्या? आपके पास वायरलेस सेट नहीं है क्या? आजकल तो सेटेलाइट है ना, वह तो फौरन हो जाता है। तो टीचर्स के पास है? सबके पास है सिर्फ समय पर यूज़ करो। समय पर सिर्फ स्मृति का स्विच आन करो बस। फिर देखो सेकण्ड में परिवर्तन होता है या नहीं। जिस समय कोई ऐसी बात हो तो यह ड्रामा याद करना। लगाना कनेक्शन। तो समझा सिल्वर जुबली वालों को क्या करना है? बापदादा को तो टीचर्स सबसे ज्यादा याद रहती हैं। क्यों? जो भी सेवा के निमित्त हैं तो ब्रह्मा बाप की भुजाएं बनकर निमित्त हैं। तो बाप समान सेवा में हैं ना। इसलिए ऐसे निमित्त सेवाधारी बापदादा को सदा याद हैं। ऐसे नहीं समझना कि जिन्हों की गोल्डन जुबली हुई वह याद हैं, आप नहीं। पहले आप। छोटों के ऊपर और ही ज्यादा स्नेह होता है। इसलिए अभी मुझे बदलना है, मुझे बिगड़ी को बनाना है, दूसरा बिगाड़े, मेरा काम है बनाना। यह शिकायत नहीं, यह बिगाड़ते हैं ना, यह करते हैं ना। नहीं। वह बिगाड़ने में होशियार हैं, आप अपने काम में होशियार हो। बिगाड़ने वाला होशियार, बनाने वाला कम क्यों? आप होशियार हो जाओ, बिगाड़ने वाला क्या भी करे। तो बिगड़ी को बनाने वाले बाप समान आप आत्मायें हो। यह काम करेंगे तो हाथ हिलाओ। करेंगे, पक्का? या वहाँ जाकर कहेंगे दादी क्या करें? शिकायत तो नहीं करेंगे? आज सब शिकायत का फाइल यहाँ शान्तिवन के डायमण्ड हाल में खत्म करके जाओ। हर्षित रहना है और हर्षित बनाना है। ठीक है ना? सिल्वर जुबली वालों से मिले ना? अब शिकायत तो नहीं होगी ना, हमसे तो मिले नहीं? आज दो ग्रुप हैं। लेकिन बाप को पाण्डव भी प्यारे हैं तो टीचर्स भी प्यारी हैं। तो क्या समझती हो? हो सकता है? कांध हिलाओ। पाण्डव हो सकता है कि होना ही है? क्या कहेंगे, हुआ ही पड़ा है? एक एक कांध हिलाओ। यही कहो हम नहीं करेंगे तो कौन करेगा। बापदादा की आशाओं के सितारे आप बच्चे हो। तो आप नहीं करेंगे तो कौन करेगा? अच्छा।

मातायें सब खुश हो? कोई तकलीफ तो नहीं हुई? (सभी ने तालियां बजाई) इन्हों को यह दो हाथ की ताली बजाना अच्छा लगता है। अच्छा पाण्डव सब ठीक हैं? कोई तकलीफ नहीं? शान्तिवन अच्छा बना है, पसन्द है? बापदादा तो खुश होते हैं कि सभी बच्चों के सहयोग से यह शान्तिवन बना है। आप सबके सहयोग से यह स्थान बना है। इसलिए शान्तिवन के सर्व सहयोगी आत्माओं को बापदादा पदमगुणा मुबारक देते हैं।

डबल फॉरेनर्स हाथ उठाओ, देखो डबल फॉरेनर्स से हर सीजन बहुत अच्छी सज जाती है। डबल फॉरेनर्स मधुबन के श्रृंगार हो। आपको देख करके सभी को बहुत खुशी होती है। क्यों खुशी होती है, जानते हो? क्योंकि आप फॉरेनर्स बहुत फॉरेन क्लचर की दीवारें तोड़कर आये हो, यह जो गीत बजता है ना - वह आप डबल फॉरेनर्स के लिए बहुत अच्छा है। भारत वालों ने दीवारें तोड़कर आने की हिम्मत रखी लेकिन डबल फॉरेनर्स ने डबल दीवारें तय करके अपना विशेष पार्ट नूंध लिया। तो जहाँ भी डबल फॉरेनर्स हैं, सुन रहे हैं, उन सबको भी बापदादा पदमगुणा मुबारक देते हैं। डबल फॉरेनर्स इस ब्राह्मण परिवार के विशेष डायमण्ड हो। तो डायमण्ड चमकता है, कितना प्यारा लगता है। ऐसे डबल फॉरेनर्स इस ब्राह्मण परिवार में ब्राह्मण युग में बहुत-बहुत चमकते हुए विशेष आत्मायें हैं। फॉरेन के पत्र भी आये हैं, तो जिन्होंने भी पत्र भेजे हैं, बापदादा के पास तो सबके दिल की बातें पहुंच ही जाती हैं। उमंग-उत्साह और तीव्र पुरूषार्थ की खुशबू अच्छी आ रही है। अभी समय जैसे जैसे बीतता जाता है, तो बापदादा देख रहे हैं कि डबल फॉरेनर्स मैजारिटी अभी नॉलेजफुल अच्छे बन गये हैं। माया को परखने की नज़र अब अच्छी तेज हो रही है। इसलिए बापदादा पत्रों से खुशबू लेते हैं और सच्ची दिल वाले हैं। गिरने की भी सच्चाई लिखते हैं तो उड़ने की भी सच्चाई लिखते हैं। साफ दिल हैं। तो जहाँ साफ दिल है, तो बापदादा सदा कहते हैं साफ दिल मुराद हांसिल। जो उमंगें, आशायें रखते हैं वह प्राप्त हो जाती हैं अर्थात् मुराद हांसिल हो जाती है। बापदादा की मदद को कैच करने में अच्छे हैं इसलिए पत्र भेजने वाले वा अपने अपने स्थान पर सुनने वाले वा चारों ओर के डबल फॉरेनर्स को बापदादा दिल से पदमगुणा यादप्यार, मुबारक दे रहे हैं। अच्छा।

बाम्बे के सेवाधारी ग्रुप हाथ उठाओ। अच्छा किया है। बाम्बे को तो बापदादा नर-देसावर कहते हैं। कमाने वाला बच्चा। बापदादा बाम्बे को सदा याद करता है। अच्छी हिम्मत से कर रहे हो, सब सन्तुष्ट हैं इसकी मुबारक। बाम्बे में अच्छे- अच्छे महारथी हैं, एक दो से आगे हैं। कोई किसी से कम नहीं है। बापदादा विशेषता के आधार से कहते हैं। अच्छी हिम्मत की। बापदादा को खुशी है कि बाम्बे सेवा की स्टेज पर आया। अच्छा लग रहा है ना? सेवा की स्टेज अच्छी है ना? अच्छा। हर एक अपने नाम से समझे कि मेरे को मुबारक और याद-प्यार स्पेशल है। सिर्फ नाम नहीं ले रहे हैं। अगर नाम लेंगे तो माला बन जायेगी। अच्छा।

चारों ओर के परमात्म प्यार के सुखमय, आनंदमय झूले में झूलने वाली लकी और लवली आत्माओं को, सदा दृढ़ संकल्प द्वारा समाधान स्वरूप श्रेष्ठ आत्माओं को, सदा परमात्म अवार्ड लेने के पात्र हीरो पार्टधारी आत्माओं को, सदा बापदादा की पालना का रिटर्न देने वाले बाप के दिलतख्त नशीन आत्माओं को बापदादा का पदमगुणा, अरब-खरब से भी ज्यादा यादप्यार और नमस्ते।

दादी जानकी तथा सर्व दादियों को दृष्टि देते हुए:-

अच्छी ड्युटी ली है? सभी को खुशी में नचाने की ड्युटी अच्छी है। अभी यही चाहिए। शिक्षा सुनने कोई नहीं चाहता। तो सभी आदि रत्न यह ड्युटी विशेष बजाओ। कोई कैसा भी हो लेकिन आपके सामने आने से खुशी में नाचना शुरू कर दे। डायरेक्ट दाता के बच्चे हो ना और पहली रचना हो। तो आदि रचना का प्रभाव तो है ना। तो बापदादा भी आदि रत्नों को विशेष स्नेह देता है स्पेशल। अभी ऐसे साथियों को तैयार करो जो वायुमण्डल फैलायें।

अच्छा। ओम् शान्ति।