31-12-2001   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


"इस नये वर्ष में सफलता भव के वरदान द्वारा बाप और स्वयं की प्रत्यक्षता को समीप लाओ"

आज नव युग का रचता अपने मास्टर नव युग रचता बच्चों से नव वर्ष मनाने के लिए आये हैं। नव वर्ष मनाना, यह तो विश्व में सभी मनाते हैं। लेकिन आप सभी नव युग बना रहे हो। नव युग की खुशी हर बच्चे के अन्दर है। जानते हो कि नव युग अभी आया कि आया। दुनिया वालों का नव वर्ष एक दिन मनाने का है और आप सबका नव युग पूरा ही संगमयुग मनाने का है। नव वर्ष में खुशी मनाते, एक-दो को गिफ्ट देते हैं। वह गिफ्ट भी क्या है! थोड़े समय के लिए वह गिफ्ट है। नव युग रचता बाप आप सब बच्चों के लिए कौन-सी गिफ्ट लाते हैं? गोल्डन गिफ्ट, जिस गोल्डन गिफ्ट अर्थात् गोल्डन युग में सब स्वत: ही गोल्ड हो जाता है, नया हो जाता है। थोड़े समय के बाद नया वर्ष शुरू होगा लेकिन सब नया नहीं हो जायेगा। आपके नव युग में प्रकृति भी नई बन जायेगी। आत्मा भी नये वस्त्र (शरीर) धारण करेगी। हर वस्तु नई अर्थात् सतोप्रधान गोल्डन एज वाली होगी। तो नये वर्ष को मनाते आपके मन में, बुद्धि में नया युग ही याद आ रहा है। नव युग याद है ना, कि आज के दिन नया वर्ष याद है?

बापदादा पहले मुबारक देते हैं नव युग की फिर साथ में मुबारक देते हैं नये वर्ष की, क्योंकि आप सब नव वर्ष मनाने के लिए आये हो ना! मनाओ, खूब मनाओ। अविनाशी गिफ्ट जो बापदादा द्वारा मिली है, उसकी अविनाशी मुबारक मनाओ। सदा ही एक-दो को शुभ भावना की मुबारक दो। यही सच्ची मुबारक है। मुबारक जब देते हो तो स्वयं भी खुश होते हो और दूसरे भी खुश होते हैं। तो सच्चे दिल की मुबारक है - एक-दो के प्रति दिल से शुभ भावना, शुभ कामना की मुबारक। शुभ भावना ऐसी श्रेष्ठ मुबारक है जो कोई भी आत्मा की कैसी भी भावना हो, अच्छी भावना वा अच्छा भाव न भी हो, लेकिन आपकी शुभ भावना उनका भाव भी बदल सकती है, स्वभाव भी बदल सकती है। वैसे स्वभाव शब्द का अर्थ ही है स्व (सु) अर्थात् शुभ भाव। हर समय हर आत्मा को यही अविनाशी मुबारक देते चलो। कोई आपको कुछ भी दे लेकिन आप सबको शुभ भावना दो। अविनाशी आत्मा के अविनाशी आत्मिक स्थिति में स्थित होने से आत्मा परिवर्तित हो ही जायेगी। तो इस नये वर्ष में क्या विशेषता करेंगे? स्वयं में भी, सर्व में भी और सेवा में भी। जब नया वर्ष नाम है तो कोई नवीनता करेंगे ना! तो क्या नवीनता करेंगे? हर एक ने अपना नवीनता का प्लैन बनाया है या अभी सिर्फ नया वर्ष मना लेंगे? मिलन मनाया, नया वर्ष मनाया, नवीनता का क्या प्लैन बनाया?

बापदादा हर एक बच्चे को इस वर्ष के लिए विशेष यही इशारा देते हैं कि समय प्रमाण अभी सब बच्चों को चाहे यहाँ साकार में सम्मुख बैठे हैं, चाहे देश, विदेश में विज्ञान के साधन द्वारा सुन रहे हैं, देख रहे हैं, बापदादा भी सभी को देख रहे हैं। सभी बड़े आराम से, मजे से देख रहे हैं। तो सर्व विश्व के, बापदादा के अति प्यारे अति मीठे बच्चों को बापदादा यही इशारा देते हैं कि अभी अपने इस ब्राह्मण जीवन में अमृतवेले से लेकर रात तक बचत का खाता बढ़ाओ, जमा का खाता बढ़ाओ। हर एक अपने कार्य के प्रमाण अपना प्लैन बनावे, जो भी ब्राह्मण जीवन में खज़ाने मिले हैं, उस हर एक खज़ाने की बचत वा जमा का खाता बढ़ाओ क्योंकि बापदादा ने आज वर्ष के अन्त तक चारों ओर के बच्चों की रिज़ल्ट देखी। क्या देखा, जान तो गये हो। टीचर्स भी जान गई हैं। डबल फारेनर्स भी जान गये हैं। महारथी भी जान गये हैं। जमा का खाता जितना होना चाहिए उतना.... क्या कहें? आप खुद ही बोलो, क्योंकि बापदादा जानते हैं कि सर्व खज़ाने जमा करने का समय सिर्फ अब संगम है। इस छोटे से युग में जितना जमा किया उसी प्रमाण सारा कल्प प्रालब्ध प्राप्त करते रहेंगे। जो आप सबका स्लोगन है ना - कौन-सा स्लोगन है? अब नहीं तो... पीछे क्या है? अब नहीं तो कब नहीं। यह स्लोगन दिमाग में तो बहुत याद है। लेकिन दिल में, याद में भूलता भी है तो याद भी रहता है। सबसे बड़े से बड़ा खज़ाना इस ब्राह्मण जीवन की श्रेष्ठता का आधार है - संकल्प का खज़ाना, समय का खज़ाना, शक्तियों का खज़ाना, ज्ञान का खज़ाना, बाकी स्थूल धन का खज़ाना तो कामन है। तो बापदादा ने देखा जितना आप हर एक ब्राह्मण श्रेष्ठ संकल्प के खज़ाने द्वारा स्वयं को वा सेवा को श्रेष्ठ बना सकते हो, उसमें अभी और अण्डरलाइन लगानी पड़ेगी।

आप ब्राह्मणों के एक श्रेष्ठ संकल्प में, शुभ संकल्प में इतनी शक्ति है जो आत्माओं को बहुत सहयोग दे सकते हो। संकल्प शक्ति का महत्त्व अभी और जितना चाहो उतना बढ़ा सकते हो। जब साइंस का साधन राकेट, दूर बैठे जहाँ चाहे, जब चाहे, जिस स्थान पर पहुँचाने चाहे, एक सेकण्ड में पहुँचा सकते हैं। आपके शुभ श्रेष्ठ संकल्प के आगे यह राकेट क्या है! रिफाइन विधि से कार्य में लगाके देखो, आपके विधि की सिद्धि बहुत श्रेष्ठ है। लेकिन अभी अन्तर्मुखता की भट्ठी में बैठो। तो इस नये वर्ष में अपने आप सर्व खज़ानों की बचत की स्कीम बनाओ। जमा का खाता बढ़ाओ। सारे दिन में स्वयं ही अपने प्रति अन्तर्मुखता की भट्ठी के लिए समय फिक्स करो। आपेही आप कर सकते हो, दूसरा नहीं कर सकता है।

बापदादा प्रत्यक्षता वर्ष के पहले इस वर्ष को सफलता भव का वर्ष कहते हैं। सफलता का आधार हर खज़ाने को सफल करना। सफल करो, सफलता प्राप्त करो। सफलता प्रत्यक्षता को स्वत: ही प्रत्यक्ष करेगी। वाचा की सेवा बहुत अच्छी की लेकिन अब सफलता के वरदान द्वारा बाप की, स्वयं की प्रत्यक्षता को समीप लाओ। हर एक ब्राह्मणों की जीवन में सर्व खज़ानों की सम्पन्नता का आत्माओं को अनुभव हो। आजकल की आत्मायें आपके अनुभवी मूर्त द्वारा अनुभूति करने चाहती हैं। सुनने कम चाहती हैं, अनुभूति ज़्यादा चाहती हैं। अनुभूति का आधार है - खज़ानों का जमा खाता। अभी सारे दिन में बीच-बीच में यह अपना चार्ट चेक करो, सर्व खज़ाने जमा कितने किये? जमा का खाता निकालो, पोतामेल निकालो।

एक मिनट में कितने संकल्प चलते हैं? संकल्प की फास्ट गति है ना। कितने सफल हुए, कितने व्यर्थ हुए? कितने समर्थ रहे, कितने साधारण रहे? चेक करने की मशीन तो आपके पास है ना या नहीं है? सबके पास चेकिंग मशीन है? टीचर्स के पास है? आपके सेन्टर्स पर जैसे कम्प्यूटर है, -मेल है वैसे यह चेकिंग मशीन है? डबल फारेनर्स के पास है? चलती है या बन्द पड़ी है? पाण्डवों के पास चेकिंग मशीन है? सबके पास है, कोई के पास नहीं हो तो अप्लीकेशन डालो। जैसे कहाँ आफिस खोलते हो तो पहले ही सोचते हो कि आफिस बनाने के पहले, आजकल के जमाने में कम्प्यूटर चाहिए, -मेल चाहिए, टाइप मशीन चाहिए, कापी निकालने वाली मशीन चाहिए। चाहिए ना? तो ब्राह्मण जीवन में, आपके दिल के आफिस में यह सब मशीन हैं या नहीं हैं?

बापदादा ने पहले भी सुनाया कि बापदादा के पास प्रकृति भी आती है कहने के लिए कि मैं एवररेडी हूँ, समय भी ब्राह्मणों को बार-बार देखता रहता है कि ब्राह्मण तैयार हैं? बार-बार ब्राह्मणों का चक्कर लगाता है। तो बापदादा पूछते हैं, हाथ तो बहुत अच्छे उठाते हो, बापदादा भी खुश हो जाते हैं। अब ऐसे एवररेडी बनो जो हर संकल्प, हर सेकण्ड, हर श्वास जो बीते वह वाह, वाह हो। व्हाई नहीं हो, वाह, वाह हो। अभी कोई समय वाह-वाह होता है, कोई समय वाह के बजाए व्हाई हो जाता है। कोई समय बिन्दी लगाते हैं, कोई समय क्वेश्चन मार्क और आश्चर्य की मात्रा लग जाती है। आप सबका मन भी कहे वाह! और जिसके भी सम्बन्ध-सम्पर्क में आते हो, चाहे ब्राह्मणों के, चाहे सेवा करने वालों के वाह! वाह! शब्द निकले। अच्छा।

इस सीज़न के लास्ट टर्न में कितने मास हैं, (तीन मास)। तो तीन मास के बाद बापदादा हर एक बच्चे के बचत का एकाउन्ट चेक करेगा। ठीक है? जो समझते हैं तीन मास में चेक कराने के लिए तैयार हो जायेंगे, वह एक हाथ उठाओ। तैयार हो जायेंगे? कितने परसेन्ट में तैयार होंगे? उमंग अच्छा हिम्मत और मेहनत में आपको मुबारक हो है। कोई नहीं उठा रहे हैं, सोच रहे हैं क्या? तीन मास में एकाउन्ट चेक होगा। आप अपना एकाउन्ट चेक करना, फिर बापदादा चेक करेगा। बापदादा को तो देरी नहीं लगती। यहाँ तो एकाउन्ट में कितना माथा लगाना पड़ता है। लगाना पड़ता है ना? थक जाते हैं। बापदादा को मालूम पड़ता है, हो जायेगी मालिश। मधुबन वाले एकाउन्ट रखने में तो होशियार हैं ना? सब वाह, वाह हो जायेगा। कोई बात नहीं।

बापदादा टीचर्स को देखकर बहुत खुश होता है। (सभी ने ताली बजाई) तालियां तो बहुत अच्छी बजाई। वैसे तो आप सब टीचर हो ना, या यह टीचर्स ही टीचर हैं। जब कोर्स कराते हो वा मैसेज देते हो तो क्या बनते हो? टीचर बनते हो ना? बापदादा इस वर्ष में एक नवीनता देखने चाहते हैं, सुनायें। करेंगे? पाण्डव करेंगे? पक्का? पक्का करेंगे? कुछ भी हो जाए करना पड़ेगा। तैयार हैं? सभी पाण्डव तैयार हैं? यूथ भी तैयार हैं? बापदादा सुनाये करेंगे? मातायें करेंगी? (सभी ने कहा हाँ जी) अच्छा है, बापदादा बच्चों की हिम्मत पर मुबारक दे रहे हैं। अभी सुनो एक बात, दो हाथ की ताली नहीं बजाओ, एक हाथ की ताली बजाओ। घमसान हो जाता है ना?

तो आज ग्रेट-ग्रेट ग्रैण्ड फ़ादर ब्रह्मा बाप की एक शुभ आशा रही, ब्रह्मा बाप बोले कि मेरे ग्रेट ग्रेट ग्रैण्ड सन्स को विशेष एक बात कहनी है, वह क्या? कि सदा हर बच्चे के चेहरे पर, सदा एक तो रूहानियत की मुस्कराहट हो, सुना! अच्छी तरह से कान खोल के सुनना। और दूसरा - मुख में सदा मधुरता हो। एक शब्द भी मधुरता के बिना नहीं हो। चेहरे पर रूहानियत हो, मुख में मधुरता हो और मन-बुद्धि में सदा शुभ भावना, रहमदिल की भावना, दातापन की भावना हो। हर कदम में फालो फादर हो। तो यह कर सकते हो? टीचर्स यह कर सकते हो? यूथ कर सकते हो? (ज्ञान सरोवर में देशविदेश के यूथ की रिट्रीट चल रही है) बापदादा के पास यूथ ग्रुप की रिज़ल्ट बहुत अच्छी आई है। पदमगुणा मुबारक हो। अच्छा रिज़ल्ट है। अनुभव भी अच्छे किये हैं, बापदादा खुश हुए। बापदादा ने अनुभव भी सुने। सुनी सुनाई नहीं, डायरेक्ट बापदादा ने आपके अनुभव सुने, लेकिन अभी इन अनुभवों को अमर भव के वरदान से अविनाशी रखना। कुछ भी हो जाए लेकिन अपने रूहानी अनुभवों को सदा आगे बढ़ाते रहना। कम नहीं करना। तीन मास के बाद मधुबन में आओ, नहीं आओ। तीन मास के बाद फारेन से तो आयेंगे नहीं लेकिन अपना एकाउन्ट रखना और बापदादा के पास भेजना, बापदादा राइट करेगा। या जो होगा वह परसेन्टेज़ देंगे। ठीक है? हाँ, एक हाथ की ताली बजाओ। अच्छा।

आज मुबारक का दिन है तो और खुशखबरी बापदादा ने सुनी, देखी भी। छोटे-छोटे बच्चे ताजधारी बनके बैठे हैं। आपको तो ताज मिलेगा, इन्हों को अभी मिल गया है। खड़े हो जाओ। देखो, ताजधारी ग्रुप देखो। बच्चे सदा दिल के सच्चे। सच्ची दिल वाले हो ना! अच्छा है बच्चों की रिज़ल्ट भी बापदादा ने अच्छी देखी। मुबारक हो। अच्छा।

डबल फारेनर्स - इन्हों के पत्र और चिटकियाँ भी देखी। उमंग की चिटकियां हैं। लेकिन एक बात बापदादा ने देखी, जो चिटकियों में कोई- कोई में हैं। कोई ने तो बहुत अच्छे उमंग-उत्साह से परिवर्तन भी लिखा है, उमंग भी लिखा है लेकिन कोई-कोई ने थोड़ा-सा अपना अलबेलापन दिखाया है। अलबेले कभी नहीं बनना। अलर्ट। एक बापदादा को अलबेलापन नहीं अच्छा लगता और दूसरा दिलशिकस्त होना नहीं अच्छा लगता। कुछ भी हो जाए दिल बड़ी रखो। दिलशिकस्त छोटी दिल होती है। दिलखुश बड़ी दिल होती है। तो दिलशिकस्त नहीं बनना, अलबेला नहीं बनना। उमंग-उत्साह में सदा उड़ते रहना। बापदादा को डबल विदेशियों में अरब-खरब जितनी उम्मीदें हैं। डबल फारेनर्स ऐसा जलवा दिखायेंगे जो इन्डिया की आत्मायें चकित हो जायेंगी। आना है, वह भी दिन आना है, जल्दी आना है। आना है ना? वह दिन आने वाला है ना? आयेगा वह दिन? (जल्दी-जल्दी आयेगा) हाँ जी तो बोलो। बापदादा इन एडवांस मुबारक की थालियां भरकर दे रहे हैं। इतनी हिम्मत बापदादा डबल फारेनर्स में देख रहे हैं, ऐसे है ना? फारेन में जो कर्म, जो बोल, जो वृत्ति, जो विधि हम करेंगे, हमें देख सर्व करेंगे बहुत उम्मीदें हैं। अच्छा है। यूथ भी अच्छे हैं, प्रवृत्ति वाले भी बहुत हैं, कुमारियां भी बहुत हैं, कमाल ही कमाल है। ठीक है? यह सिन्धी परिवार बोलो, क्या कमाल करेंगे? निमित्त मात्र सिन्धी हैं लेकिन हैं ब्राह्मण। क्या करेंगे, बोलो? (बाबा का नाम रोशन करेंगे) कब करेंगे? (इस वर्ष में) आपके मुख में गुलाबजामुन। हिम्मत वाले हैं। (आपका वरदान साथ में है) वरदाता ही साथ में है तो वरदान क्या बड़ी बात है। अच्छा।

जो भी इस कल्प में पहली बार आये हैं, वह उठो। जो पहली बार आये हैं, उन बच्चों को बापदादा कहते हैं कि आये पीछे हैं लेकिन जाना आगे है, इतना आगे बढ़ो जो सब आपको देख करके खुश होवें और सबके मुख से यही शब्द निकले - कमाल है, कमाल है, कमाल है। ऐसी हिम्म्त है? पहली बार आने वालों में हिम्मत है ना! नया वर्ष मनाने आये हो, तो नये वर्ष में कोई कमाल करेंगे ना! फिर भी बापदादा को सभी बच्चे अति प्यारे हैं। फिर भी बहुत अक्ल का काम किया है, टू लेट के पहले आ गये हो। अभी फिर भी इस हाल में बैठने की सीट तो मिली है ना! रहने का पलंग या पट तो मिला है ना! और जब टू लेट का बोर्ड लग जायेगा तो क्यू में खड़ा करना पड़ेगा। इसीलिए फिर भी अच्छे समय पर बापदादा को पहचान लिया, यह अक्ल का काम किया। अच्छा।

जो पुराने पाण्डव हैं, वह उठो। पाण्डवों की महिमा भी कम नहीं है। बापदादा का टाइटल है पाण्डव पति। तो पाण्डवों की महिमा है ना, पाण्डव पति और विजयी पाण्डव गाये हुए हैं। शक्तियां वरदानी गाई हुई हैं लेकिन विजयी पाण्डव गाये हुए हैं। तो हर एक पाण्डव के मस्तक पर कौन-सा तिलक लगा हुआ है? विजय का। आप अपने मस्तक में विजय का तिलक देखते हो कि भूल जाते हो? सदा अपने मस्तक में विजयी पाण्डव, विजय का तिलक चमकता हुआ देखो। विजय हर पाण्डव का जन्म सिद्ध अधिकार है। अधिकारी हैं ना? तो बापदादा पाण्डवों को विजयी रत्न के रूप में मुबारक दे रहे हैं। बहुत अच्छे हैं, बहुत हैं। पाण्डव कम नहीं हैं।

अच्छा पुरानी मातायें जो पहले आती रही हैं, वह उठो। माताओं की विशेषता क्या है? माताओं के चरणों में यह सब बड़े-बड़े मर्तबे वाले आप सबके चरणों में झुकेंगे। यह माता गुरू जो गाया हुआ है, वह सच्चा पार्ट आप मातायें बजायेंगी। जैसे अभी कोई भी बड़ा दिन होता है ना! तो भारत माता की जय गाते हैं ना! आगे चलकर आप माताओं की जय-जय गायेंगे। इतना ऊंच मर्तबा बापदादा ने माताओं को दिया है। तो मातायें जय-जयकार का आवाज सुनेंगी। माता गुरू का जो गायन है वह प्रत्यक्ष रूप में दिखायेंगी। ऐसी मातायें हो ना! सोई हुई आत्माओं को जगायेंगी। माताओं का बहुत अच्छा पार्ट है। जिन्होंने आपकी निंदा की है वह आपका कीर्तन गायेंगे क्योंकि बाप की बन गई हैं ना! ऊँचे ते ऊँचे भगवन की साथी बन गई हो। यह रूहानी नशा है ना? तो ऐसी माताओं को बापदादा भी नमस्ते कहते हैं। अच्छा।

कुमारियों से - कुमारियां हाथ हिलाओ। कुमारियां भी बहुत हैं। अभी साधारण कुमारियां तो नहीं हो। अभी आप सभी सु-कुमारियां बन गई हैं, श्रेष्ठ कुमारियां बन गई हैं। कुमारियों के लिए बापदादा को एक दिल में उमंग है, सुनायें! कुमारियां सुनेंगी? कुमारियों के लिए गायन है - 21 पीढ़ी तारने वाली हैं, तो बापदादा कहते हैं, इस वर्ष में हर एक कुमारी 21 छोड़ो लेकिन एक-एक कुमारी एक-एक वारिस क्वालिटी निकाले, हो सकता है। है हिम्मत? कितनी कुमारियां होंगी? (लगभग 1000) तो इस वर्ष में हजार वारिस तो पैदा हो जायेंगे। (हाँ जी) इन एडवांस मुबारक हो। अभी वारिसों की माला बनायेंगे। मिक्स माल तो आता रहता है। अभी वारिसों की माला बनायेंगे। ठीक है? पहले यह ट्रेनिंग दादियों से लेना कि वारिस किसको कहा जाता है? वारिस क्वालिटी की क्वालिफिकेशन कौन-सी है? समझा! तो इस वर्ष में एक-एक, एक वारिस निकाले, फिर बापदादा वारिसों की माला बनायेंगे। इस वर्ष में कोई नवीनता करेंगे ना! तो वारिस पैदा करेंगे। दिल्ली भी करेगा, तो सब करेंगे। करना ही है? और क्या करना है? यही तो करना जिन्होंने आपकी निंदा की है वह आपके कीर्तन गायेंगे है। अभी देखेंगे जो भी वारिस तैयार करे वह मधुबन में अपना समाचार लिखना, दादी वारिस आ गया। ठीक है कुमारियां? हाँ जी तो कहो।

मधुबन निवासियों से - मधुबन वालों की सेवा का चमत्कार सभी को मधुबन में खींचता है। किसी से भी पूछो तो यही सबके मुख से निकलता है, मधुबन तो मधुबन है। सेवा में नम्बरवन, ऐसे है? नम्बरवन हैं या नम्बरवार हैं? नम्बरवन हैं। बापदादा मधुबन निवासियों को सदा नम्बरवन दृष्टि से देखते हैं। नम्बरवार नहीं, नम्बरवन। है ना नम्बरवन! दादी के पास कोई कम्पलेन नहीं। सब कम्पलीट हो रहे हैं इसलिए कम्पलेन नहीं है। अच्छे हैं, फिर भी अथक तो हैं। मधुबन के सेवाधारी सब मांगते हैं। महामण्डलेश्वर भी कहकर जाते हैं मधुबन के सेवाधारी हमको भेजो। तो नम्बरवन तो हुए ना! अच्छे हैं। पक्के भी हैं, अच्छे भी हैं। ऐसे है ना! ऐसे तो नहीं बापदादा ऐसे ही कह रहा है। बापदादा को तो अच्छे लगते हैं। बाकी कभी-कभी ज्यादा काम हो जाता है, बापदादा देखते हैं कभी-कभी ज्यादा बोझ भी पड़ जाता है। लेकिन फिर भी अमर हैं। अमर भव का वरदान मिला हुआ है। ठीक है ना! अमर हैं? अच्छा। मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो।

अच्छा - टीचर्स उठो। बापदादा सदा टीचर्स को इसी नज़र से देखते हैं कि हर टीचर के फीचर्स में बापदादा के फीचर्स दिखाई दें। फेस में ब्रह्मा बाप के फीचर्स और भ्रकुटी में ज्योतिबिन्दु के फीचर, किसी भी टीचर को देखो तो सबके मुख से यही निकले कि यह तो बाप समान हैं। यह तो ब्रह्मा बाबा जैसे लगते हैं, यह तो शिव बाप जैसे लगते हैं। हैं भी और होने ही हैं। तो टीचर्स आधार मूर्त हैं। जैसे बाप के लिए कहते हैं - ब्रह्मा बाप का सदा यही स्लोगन रहा जो कर्म मैं करूंगा वह सब करेंगे। ऐसे हर एक टीचर को यही स्लोगन सदा याद रहता है कि जो कर्म, जो बोल, जो वृत्ति, जो विधि हम करेंगे, हमें देख सर्व करेंगे। बापदादा ने ब्रह्मा बाप की गद्दी आप टीचर्स को बैठने के लिए दी है। मुरली सुनाने के लिए निमित्त टीचर्स हैं, बाप की गद्दी मिली हुई है। ड्रामा ने आप टीचर्स को बहुत-बहुत ऊंचा मर्तबा दिया है।

बापदादा भी सदा टीचर्स को इसी विशेष महत्त्व से देखते हैं। महान हो, महत्त्व वाले हो। है ना ऐसे? कभी स्टूडेन्ट से सर्टीफिकेट लेवें? बापदादा तो देखते रहते हैं। (बाबा टीचर्स को पकड़ो) यह तो प्रेम में पकड़ी हुई हैं तब तो टीचर्स बनी हैं। अभी कान दादी पकड़ेगी, बाप तो प्यार में पकड़ेंगे। फिर भी हिम्मत रखकर निमित्त तो बनी हैं ना! (दादी कह रही हैं टीचर्स बहुत अच्छी हैं) बहुत अच्छी हो, मुबारक हो। अच्छे तो हैं ही। अगर टीचर्स नहीं होते तो इतने सेन्टर्स कैसे खुलते। मुबारक हो आप सबको। बापदादा तो बहुत-बहुत श्रेष्ठ नज़र से देखते हैं। टीचर्स भी बहुत आई हैं। अच्छी हैं - हिम्मत और मेहनत में मुबारक हो।

बाकी हॉस्पिटल वाले रह गये। हॉस्पिटल वालों ने अपने नये साल का उमंग-उत्साह अच्छा लिखा है और बापदादा को सदा निश्चय रहता है और निश्चिंत रहते हैं कि हॉस्पिटल अनेक आत्माओं को ब्राह्मण जीवन में लायेगी। ब्राह्मणों की सेवा भी कर रही है और ब्राह्मण भी बनायेगी। बड़े-बड़े वी.आई.पी. हॉस्पिटल का नाम सुन प्रभावित होंगे। अभी आयेंगे आपके पास। चार्ट अच्छा लिखा है और प्रतिज्ञा भी अच्छी की है। बापदादा खुश है। सबने बहुत अच्छी रूचि से किया है। अच्छा। आप सबका प्रतिज्ञा पत्र पढ़कर बापदादा खुश हुए, इसलिए मुबारक हो।

अभी जो साइंस के साधनों से देख रहे हैं वह भी खुश हो रहे हैं कि बापदादा ने हमारा नाम नहीं लिया। बापदादा कहते हैं जो भी जहाँ देख रहे हैं, सुन रहे हैं, आप भी उठ जाओ। सुनकर खुश हो रहे हैं, मुस्करा रहे हैं। बापदादा को सभी बच्चों का उमंग-उत्साह और दिल का प्यार बहुत श्रेष्ठ लगता है। देखो दिल का प्यार है तो समय प्रमाण पहुँच जाते हैं। बड़े उत्साह से सुनते भी रहते हैं, देखते भी रहते हैं, कोई देखता है, कोई नहीं भी देखता, लेकिन सुनते बहुत हैं। तो बापदादा नव युग की, नये वर्ष की एक-एक बच्चे को नाम सहित, विशेषता सहित मुबारक दे रहे हैं। वह भी हाथ उठा रहे हैं, हिला रहे हैं। अच्छा।

सभी बच्चों के कार्ड और पत्र, नये वर्ष की मुबारकें बहुत-बहुत आई हैं। बापदादा कहते हैं बच्चे आपके कार्ड के पहले आपकी हार्ट पहुँच जाती है| बापदादा सबकी दिल को देख खुश होते हैं। चलो खर्चा तो होता है, हाँ कल के बाद यह कार्ड सब यादगार रूप में रह जायेंगे। लेकिन बापदादा इस बात पर खुश होते हैं, खर्चे को नहीं देखते हैं, बापदादा देखते हैं कि बच्चों के दिल का क्या आवाज निकलता है। क्या दिल का प्यार हाथों से कार्ड में आता है। इसलिए कार्ड बहुत अच्छा एक-दो से अच्छे से अच्छे बनाये हैं। आप लोग देखना यहाँ कार्ड रखे हैं ना! अच्छा।

ज्युरिस्ट से - जो ज्यूरिस्ट मीटिंग में आये हैं वह उठो। बापदादा की एक प्वाइंट जो रही हुई है, पता है। कौन-सी प्वाइंट रही हुई है? (गीता के भगवान की) तो इसका प्लैन कब बनायेंगे? किताब लिखा वह तो अच्छा किया, लेकिन कोई ग्रुप तैयार करो जो कहे कि हाँ यह जो बोलते हैं, वह ठीक है। कोई एक ग्रुप तो छोटा तैयार करो ना। इस वर्ष में लायेंगे ना क्योंकि जो किसने नहीं किया है, वह करके दिखाना है। यह पत्र यहाँ भरवा करके आवे कि हाँ गीता का भगवान जो आपने बताया वह बिल्कुल सही है, कोई ऐसे अथॉरिटी वालों का आवे। बाकी आम जनता के लिए गीता का भगवान कोई भी हो, कृष्ण हो या निराकार हो। कोई ऐसे अथॉरिटी वाले बोलें, सिद्ध करें, कि हाँ आपकी यह बात बहुत आवश्यक है, ऐसा ग्रुप बनाओ। बना सकते हैं कोई बड़ी बात नहीं है। धार्मिक संस्था, जो आपका धार्मिक वर्ग है और जो जस्टिस हैं, वकील हैं, ऐसे धर्म क्षेत्र वालों का ग्रुप बनाओ जो विशेष निमित्त हो। अभी महात्मायें भी तो बहुत आये थे ना। अच्छा-अच्छा तो कहके गये। अभी ऐसी बात उन्हों से लिखवाओ। दोनों ही वर्ग मिल करके करो, हो जायेगा, कोई बड़ी बात नहीं है। ऐसे तो सभी वर्ग वाले एक-दो के सहयोगी तो हैं ही, जिसका भी सहयोग चाहिए वह मिल सकता है। लेकिन कुछ करके दिखाओ। इसी से ही प्रत्यक्षता होगी। लोगों को नई बात चाहिए ना। ठीक है ना! करके दिखायेंगे। होना ही है। जब कल्प पहले हुआ है तो अब भी रिपीट तो होना ही है। भले आये। मुबारक हो। अच्छा है - जब से यह अलग-अलग वर्ग बने हैं तो सेवा में वृद्धि तो हुई है और हर एक को उमंग आता है, हम कुछ करके दिखायें, करके दिखायें। लेकिन वारिस नहीं निकाले हैं। हर एक वर्ग को वारिस निकालने चाहिए। अभी मिक्स तो आते ही रहते हैं, अभी लास्ट में वारिस की माला बनाओ। जैसे आदि में थोड़े से निमित्त वारिस बने, ऐसे अन्त में भी ऐसे वारिस क्वालिटी निमित्त बनेगी। अच्छा।

महाराष्ट्र के सेवाधारी - वैसे तो सबको मुबारक मिल गई है फिर भी जिन्होंने सेवा का बड़े से बड़ा पुण्य जमा किया है उनको सेवा के पुण्य की मुबारक हो। यह पुण्य कम नहीं है। यह भी एक जीवन में सहज जमा का खाता बढ़ जाता है क्योंकि ब्राह्मणों की प्रसन्नता, सन्तुष्टता पुण्य का खाता बढ़ाती है। तो यह भी चांस बहुत अच्छा, हर ज़ोन लेते रहते हैं, यह अच्छा है। अच्छा लगता है ना! पुण्य भी जमा होता है, नजदीक भी आना होता है, तो मुबारक हो महाराष्ट्र को। अच्छा।

विश्व के चारों ओर के सर्व सफलता मूर्त बच्चों को, सर्व सफल करने वाले तीव्र पुरुषार्थी बच्चों को, सदा अपने एकाउन्ट को चेक करने वाले चेकर और भविष्य मेकर ऐसे श्रेष्ठ आत्माओं को, सदा अपने हर कदम में बाप को प्रत्यक्ष करने वाले ग्रेट-ग्रेट ग्रैण्ड फादर के सर्व ग्रैण्ड सन्स को बाप और दादा का बहुत-बहुत-बहुत-बहुत याद-प्यार, मुबारक और नमस्ते।

दिल्ली तथा सोनीपत के भवन निर्माण प्रति बापदादा के इशारे

सभी ब्राह्मण परिवार के समाचार, पत्रों द्वारा समाचार तो सब सुनते रहते हैं। तो आजकल सबके संकल्प में, सहयोग में क्या याद रहता है? कि हमारी राजधानी में, आप सबकी राजधानी कौन-सी है? मधुबन है घर और राज्य कहाँ करना है? दिल्ली में करना है, मधुबन में नहीं। मधुबन में कृष्ण का महल बनेगा या दिल्ली में बनेगा? मधुबन में नहीं बनेगा? तो राजधानी याद रहती है, सभी को राजधानी याद है? तो सभी के सहयोग से अभी राजधानी में विशेष सेवास्थान बन रहा है, आप सबने बीज डाला है? सभी ने डाला है? क्योंकि बीज डालेंगे तभी फल खायेंगे ना। बिना बीज डालने के फल कैसे खायेंगे। तो सभी ने बीज डाला है और भी डालते रहेंगे क्योंकि इस बीज से अनेक प्रकार के प्रत्यक्षता के फल निकलेंगे। इसलिए सबको अपने-अपने तरफ से सफलता वर्ष में सब सफल करना ही है। सर्व खज़ाने सफल करना है। उसके साथ बीज भी डालना है, डालते रहते हैं, डालते रहेंगे। ठीक है ना! डालते रहेंगे ना! हाथ उठाओ कि समझते हैं पूरा हो गया? जब तक सेवा है तो सेवा में बीज डालते जाओ और फिर फल भी आप सबको खाना है। जब प्रत्यक्षता का फल निकलेगा ना तो आप सब खायेंगे, सिर्फ दिल्ली वाले नहीं सब खायेंगे। बापदादा से प्यार है ना! तो सेवा से भी प्यार है। तो सेवा का फल भी बहुत प्यारा है। मानेसर की धरनी के सेवाधारी कौन-कौन आये हैं, वह उठो। अच्छा है, काम ठीक चल रहा है? ठीक चल रहा है और ठीक चलता रहेगा। बाप के सेवास्थानों को बाप का वरदान मिला हुआ ही है। होना ही है। सर्व के सहयोग से सेवा सफल होनी ही है। ठीक है ना! अच्छा है। जैसे उमंग-उत्साह से बेहद की वृत्ति से स्थान बना है, ऐसे ही बेहद की वृत्ति, दृष्टि और सेवा से सफलता भी बेहद की मिलनी है। सब बेहद होना है। तो बेहद में तो आप सभी हो ना! ऐसे कभी नहीं समझना यह दिल्ली का है, हमारा है क्योंकि प्रत्यक्षता का बीज आप सबका है। निमित्त दिल्ली है लेकिन फल आप सबको खाना है, मिल के खायेंगे। इसलिए बापदादा को भी खुशी है कि बेहद के उमंग-उत्साह से बेहद की सेवा बढ़ रही है, बढ़ती जायेगी। अच्छा। सोनीपत का भी तैयार होना है। वह भी दिल्ली है ना, चाहे कोई भी है, है तो दिल्ली ही। (लण्डन में भी डायमण्ड हाउस बन रहा है) देखो, विदेश तो हर समय जम्प देता है। विदेश जम्प नहीं देवे, यह हो ही नहीं सकता। यह डायमण्ड हाउस बना तो वहाँ भी ज़रूर होना ही चाहिए। (मिन्नी मधुबन बन रहा है) छोटे से बड़ा, व्हाइट हाउस जितना भी मिल जायेगा।

बापदादा ने बच्चों से मिलन मनाने के पश्चात नये वर्ष की मुबारक दी

चारों ओर के सफलता के सितारों को पुराने वर्ष की विदाई और नये वर्ष की बधाई के संगम समय की, संगम समय विदाई भी है, बधाई भी है। तो सदा सफल है और सफल रहेंगे। कभी भी असफलता का नाम निशान नहीं रहेगा। बापदादा के अति सिकीलधे, अति प्यारे, अति मीठे, नयनों के नूर हो। सब नम्बरवन बनना ही है, इस दृढ़ संकल्प से हर कदम बाप समान उठाते रहना, पदम गुणा, अरब-खरब गुणा मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो।

2002, 1 जनवरी, 31 दिसम्बर रात्रि 12 बजे के बाद दादी जी ने सभी से गुडमार्निंग की।

आज नये साल और पुराने साल के संगम पर बाबा ने तो वायदा कराया हम सभी वायदे को निभायेंगे और सबको बहुत-बहुत प्यार से हैप्पी न्यू ईयर, हैप्पी न्यू ईयर। गुडमार्निंग।

विदाई के समय बापदादा ने सभी बच्चों से गुडमॉर्निंग, डायमण्ड मार्निंग की।

बापदादा के बहुत-बहुत अमूल्य डायमण्डस को, डायमण्ड मार्निंग, डायमण्ड मार्निंग, डायमण्ड मार्निंग।

ओम् शान्ति