24-02-2002   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


बाप को प्रत्यक्ष करने के लिए अपनी व दूसरों की वृत्ति को पॉजिटिव बनाओ

आज विश्व कल्याणी बापदादा अपने चारों ओर के बच्चों को देख हर्षित हो रहे हैं। हर एक बच्चे के मन के उमंग देख भी रहे हैं और सुन भी रहे हैं। सभी के मन में लक्ष्य एक ही है कि जल्दी से जल्दी बाप समान बनें। लक्ष्य को देख, हिम्मत को देख, श्रेष्ठ संकल्प को देख बापदादा खुश हैं। साथ-साथ यह भी देख रहे हैं कि लक्ष्य सबका बहुत ऊँचे ते ऊंचा है लेकिन प्रत्यक्ष रूप में लक्षण नम्बरवार हैं। लक्ष्य और लक्षण समान होना अर्थात् बाप समान बनना। जो सेवा की स्टेज पर निमित्त बच्चे हैं, वह सदा एक ही संकल्प में रहते कि बाप को प्रत्यक्ष कैसे करें, कब होगा! ऐसे संकल्प चलता है ना? बाप फिर बच्चों से पूछते हैं, कि बच्चे आप सभी सम्पन्न, सम्पूर्ण स्वरूप में स्वयं कब प्रत्यक्ष होंगे? बाप का क्वेश्चन है बच्चों प्रति कि वह डेट भी फिक्स की है? कि वह डेट फिक्स नहीं होनी है?

डबल फारेनर्स कहते हैं कोई भी प्रोग्राम की डेट एक साल पहले फिक्स किया जाता है, ऐसे कहते हैं ना! तो बाप कहते हैं स्वयं को प्रत्यक्ष करने की डेट फिक्स की है? मीटिंग्स तो बहुत की हैं ना! करते ही रहते हैं। आज फलानी मीटिंग है, कल फलानी। अभी भी कितने मीटिंग वाले आये हैं, तीन मीटिंग वाले आज भी बैठे हैं। यह तो बहुत अच्छा, लेकिन इस मीटिंग की डेट कौन-सी है? जो सोचें वही बोल हो, वही कर्म हो। संकल्प, बोल और कर्म तीनों श्रेष्ठ लक्ष्य प्रमाण हो। बापदादा देखते हैं कि यह सर्व विश्व कल्याण के निमित्त बने हुए बच्चे, सर्व आत्माओं के कल्याणकारी प्रत्यक्ष रूप में स्टेज पर कब आयेंगे? हर एक गुप्त पुरूषार्थ में हैं, लगन में हैं, यह भी बापदादा देखते हैं। लेकिन इस विशेष संकल्प की लगन में मगन कब होंगे? लगन तो 67 है लेकिन निरन्तर इस संकल्प को सम्पन्न करने में मगन रहना अर्थात् निरन्तर इसी संकल्प को पूर्ण करने के प्रैक्टिकल स्वरूप में हो। अभी संकल्प और प्रत्यक्ष कर्म में अन्तर है। होना तो है ही और करना भी बच्चों को ही है। बाप तो बैकबोन है ही।

तो बापदादा देख रहे थे कि सबसे तीव्रगति की सेवा है - वृत्ति द्वारा वायब्रेशन फैलाना वृत्ति बहुत तीव्र राकेट से भी तेज है। वृत्ति द्वारा वायुमण्डल को परिवर्तन कर सकते हो। जहाँ चाहो, जितनी आत्माओं के प्रति चाहो वृत्ति द्वारा यहाँ बैठे-बैठे पहुँच सकते हो। वृत्ति द्वारा दृष्टि और सृष्टि परिवर्तन कर सकते हो। लेकिन एक बात वृत्ति द्वारा सेवा करने में रूकावट डाल रही है, वृत्ति द्वारा वायब्रेशन फैलता है। आपके जड़ चित्र अब तक, लास्ट जन्म तक वायब्रेशन द्वारा सेवा कर रहे हैं ना! देखा है ना! मन्दिर देखे हैं ना! डबल फारेनर्स ने मन्दिर देखे हैं? नहीं देखे हों तो देख लेना क्योंकि आपके ही मन्दिर हैं ना! कुमारियां आपके मन्दिर हैं या इन्डिया वालों के मन्दिर हैं? सभी के मन्दिर हैं, अच्छा। मुबारक हो। मन्दिर की मूर्तियां प्रत्यक्ष रूप में वायब्रेशन द्वारा सेवा कर रहे हैं अर्थात् आप आत्मायें मन्दिर की मूर्तियां सेवा कर रही हैं। कितने भक्त वायब्रेशन द्वारा अपनी सर्व इच्छायें पूर्ण कर रहे हैं। तो हे चैतन्य मूर्तियां, अब अपने शुभ भावना की वृत्ति, शुभ कामनाओं की वृत्ति से वायुमण्डल में वायब्रेशन फैलाओ। लेकिन, लेकिन कहना अच्छा नहीं लगता लेकिन कहना पड़ता है। पाण्डव लेकिन शब्द अच्छा लगता है? नहीं अच्छा लगता। लेकिन, लेकिन है या खत्म हो गया? इसके लिए सबसे सहज विधि है पहले हर एक अपने अन्दर चेक करो - एक सेकण्ड में चेक कर सकते हो। अभी-अभी करो। सेकण्ड देवें क्या? कि बोलने में सेकण्ड मिल गया। अभी अपने अन्दर चेक करो - मेरी वृत्ति में किसी आत्मा के प्रति भी कोई निगेटिव वायब्रेशन है? अगर विश्व का वायुमण्डल परिवर्तन करना है, लेकिन अपने मन में किसी एक आत्मा के प्रति भी अगर व्यर्थ वायब्रेशन वा सच्चा वायब्रेशन भी निगेटिव है तो वह विश्व परिवर्तन कर नहीं सकेगा। बाधा पड़ता रहेगा, समय लग जायेगा। वायुमण्डल में पावर नहीं आयेगी। कई बच्चे कहते हैं वह है ही ऐसा ना! है ही ना! तो वायब्रेशन तो होगा ना! बाप को भी ज्ञान देते हैं, बाबा आपको पता नहीं है, वह आत्मा है ही ऐसी। लेकिन बाप पूछते हैं कि वह खराब है, रांग है, होना नहीं चाहिए लेकिन खराब को अपने वृत्ति में रखो, क्या यह बाप की छुट्टी है? जो समझते हैं यह बाप की छुट्टी नहीं है, वह एक हाथ उठाना। टी.वी. में दिखाओ। (दादी को) आप देख रही हो ना! अच्छा। याद रखना हाथ उठाया था। डबल फारेनर्स ने हाथ उठाया! बापदादा की टी.वी. में तो आ ही रहा है। जब तक हर ब्राह्मण आत्मा के स्वयं की वृत्ति में कैसी भी आत्मा के प्रति वायब्रेशन निगेटिव है तो विश्व कल्याण प्रति वृत्ति से वायुमण्डल में वायब्रेशन फैला नहीं सकेंगे। यह पक्का समझ लो। कितनी भी सेवा कर लो, रोज़ आठ-आठ भाषण कर लो, योग शिविर करा लो, कई प्रकार के कोर्स करा लो लेकिन किसी के प्रति भी अपनी वृत्ति में कोई पुराना निगेटिव वायब्रेशन नहीं रखो। अच्छा वह खराब है, बहुत गलतियां करता है, बहुतों को दु:ख देता है, तो क्या आप उसके दु:ख देने में जिम्मेवार बनने के बजाए, उसको परिवर्तन करने में मददगार नहीं बन सकते! दु:ख में मदद नहीं करना है, उसको परिवर्तन करने में आप मददगार बनो। अगर कोई ऐसी भी आत्मा है जो आप समझते हैं, बदलना नहीं है। चलो, आपकी जजमेंट में वह बदलने वाली नहीं है, लेकिन नम्बरवार तो हैं ना! तो आप क्यों सोचते हो यह तो बदलने वाली है ही नहीं। आप क्यों जजमेंट देते हो, वह तो बाप जज है ना। आप सब एक दो के जज बन गये हो। बाप भी तो देख रहा है, यह ऐसे हैं, यह ऐसे हैं, यह ऐसे हैं....। ब्रह्मा बाप को प्रत्यक्ष में देखा कैसी भी बार-बार गलती करने वाली आत्मा रही लेकिन बापदादा (विशेष साकार रूप में ब्रह्मा बाप) ने सर्व बच्चों प्रति याद-प्यार देते, सर्व बच्चों को मीठे-मीठे कहा। दो चार कडुवे और बाकी मीठे...क्या ऐसे कहा? फिर भी ऐसी आत्माओं के प्रति भी सदा रहमदिल बने। क्षमा के सागर बने। लेकिन अच्छा आपने अपनी वृत्ति में किसी के प्रति भी अगर निगेटिव भाव रखा, तो इससे आपको क्या फायदा है? अगर आपको इसमें फायदा है, फिर तो भले रखो, छुट्टी है। अगर फायदा नहीं है, परेशानी होती है..., वह बात सामने आयेगी। बापदादा देखते हैं, उस समय उसको आइना दिखाना चाहिए। तो जिस बात में अपना कोई फायदा नहीं है, नॉलेजफुल बनना अलग चीज़ है, नॉलेज है - यह रांग है, यह राइट है। नॉलेजफुल बनना रांग नहीं है, लेकिन वृत्ति में धारण करना यह रांग है क्योंकि अपने में ही मूड आफ, व्यर्थ संकल्प, याद की पावर कम, नुकसान होता है। जब प्रकृति को भी आप पावन बनाने वाले हो तो यह तो आत्मायें हैं। वृत्ति, वायब्रेशन और वायुमण्डल तीनों का सम्बन्ध है। वृत्ति से वायब्रेशन होते हैं, वायब्रेशन से वायुमण्डल बनता है। लेकिन मूल है वृत्ति। अगर आप समझते हो कि जल्दी-जल्दी बाप की प्रत्यक्षता हो तो तीव्रगति का प्रयत्न है सब अपनी वृत्ति को अपने लिए, दूसरों के लिए पॉजिटिव धारण करो। नॉलेजफुल भले बनो लेकिन अपने मन में निगेटिव धारण नहीं करो। निगेटिव का अर्थ है किचड़ा। अभी-अभी वृत्ति पावरफुल करो, वायब्रेशन पावरफुल बनाओ, वायुमण्डल पावरफुल बनाओ क्योंकि सभी ने अनुभव कर लिया है, वाणी से परिवर्तन, शिक्षा से परिवर्तन बहुत धीमी गति से होता है, होता है लेकिन बहुत धीमी गति से। अगर आप फास्ट गति चाहते हो तो नॉलेजफुल बन, क्षमा स्वरूप बन, रहमदिल बन, शुभ भावना, शुभ कामना द्वारा वायुमण्डल को परिवर्तन करो। देखो, प्रत्यक्ष देखा है आप सबने, मधुबन में जो भी आते हैं, सबसे ज्यादा प्रभाव किस बात का पड़ता है? वायुमण्डल का। यहाँ भी चाहे सभी नम्बरवार हैं लेकिन ब्रह्मा बाप की कर्मभूमि है, बापदादा की वरदान भूमि है, वह वायुमण्डल परिवर्तन कर देता है। अनुभव है ना! तो वायब्रेशन द्वारा वायुमण्डल बनाना, यह है तीव्रगति का दिल का छाप। वायुमण्डल दिल में छप जाता है। सुनी हुई बातें भूल सकती हैं लेकिन वायुमण्डल का दिल पर छाप लग जाता है, वह भूल नहीं सकता। ऐसे है? तो बापदादा सुनते रहते हैं, प्रत्यक्षता कब होगी, आपस में रूहरूहान तो अच्छी करते हो। अच्छा है। बोलो, पाण्डव अभी क्या करेंगे? वायुमण्डल पावरफुल बनाना। चाहे सेवाकेन्द्र हैं, चाहे जो भी स्थान हैं, प्रवृत्ति में हो तो भी वायुमण्डल पावरफुल। चारों ओर का वायुमण्डल अगर सम्पूर्ण निर्विघ्न, रहमदिल, शुभ भावना, शुभ कामना वाला बन जायेगा तो प्रत्यक्षता में कोई देरी नहीं।

अभी बापदादा ने जो डेट दी, वह बापदादा को याद है। हिसाब तो पूछेंगे ना! हर एक ने अपना एकाउन्ट तो रखा है ना! तो एकाउन्ट में बापदादा यही चेक करेंगे - वृत्ति में, दृष्टि में, बोल में रहमदिल, शुभ भावना और शुभ कामना वाली आत्मा कितने परसेन्ट में रही? अभी भी 15 दिन तो होंगे ना! ज्यादा हैं। अच्छा, जिसने नहीं भी किया हो तो 15 दिन भी कर लेना, तो भी पास कर लेंगे। बीती को बिन्दी लगाना और रहम के सिन्धु बन जाना। क्षमा के सिन्धु बन जाना।

(बापदादा ने ड्रिल कराई) सुना सभी ने! अच्छा। तीन मीटिंग वाले जो आये हैं, स्पार्क वाले एक हाथ उठाओ। अच्छा। बहुत अच्छा। अभी इसी विषय पर रिसर्च करो, वायुमण्डल कैसे प्रैक्टिकल में श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ बना सकते हैं! रिसर्च कर रहे हो ना! ऐसा वायुमण्डल बनाने के लिए क्या-क्या बुद्धि में रखना है, क्या-क्या कर्म में करना है, सम्बन्ध-सम्पर्क में करना है। अच्छा है अपने आपको बिजी रखते हो, अच्छी बात है। लेकिन बापदादा यह प्रैक्टिकल अनुभव देखने चाहते हैं कि कैसे प्रैक्टिकल किया और उसका परिणाम क्या निकला? अगर बीच में कुछ भी रूकावट आई तो क्या आई? यह अनुभव प्रैक्टिकल करके देखो, सिर्फ प्वाइंट्स नहीं निकालना, यह करना है, यह करना है। नहीं। करो। अनुभव करके एक्जैम्पुल बनकर दिखाओ और वह एक्जैम्पुल औरों को भी सहयोग देगा। ठीक है ना! यह (रमेश भाई) निमित्त है ना! अच्छा है। अभी भी 15 दिन पड़ा है, अभी लास्ट नहीं हुआ है। अभी बहुत गया, लेकिन थोड़ा रहा है तो स्पार्क वाले ऐसा प्रैक्टिकल करके देखो और औरों को दिखाओ। ठीक है? कर सकेंगे? हो सकेगा? अच्छा, ठीक है, बहुत अच्छा। अच्छा।

दूसरी मीटिंग है ट्रांसपोर्ट की - ट्रांसपोर्ट वाले तो सबको सुख देंगे। ट्रांसपोर्ट वाले हाथ उठाओ। अच्छा। बहनें, बहनों के बिना तो गति नहीं है। तो ट्रांसपोर्ट वाले क्या करेंगे? सिर्फ यात्रा करायेंगे? ट्रांसपोर्ट वाले ऐसे आपस में प्रोग्राम बनाओ जो किसी भी आत्मा को कम से कम समय में दु:ख की दुनिया से पार करके थोड़े समय के लिए भी शान्ति की यात्रा करा सको। चलो, परमधाम तक तो पहुँचना मुश्किल है लेकिन दु:ख के दुनिया की शान्ति की यात्रा तो कर सकते हैं। वह प्लैन तो बहुत बनाओ, चारों प्रकार की यात्राओं वालों को बापदादा का सन्देश तो पहुँचा रहे हो, पहुँचायेंगे ही; क्योंकि कोई भी वर्ग रह नहीं जाये ना। यह अच्छा है जो वर्गो की इन्वेन्शन निकाली है, यह अच्छी है, उलहना नहीं मिलेगा। कोई भी वर्ग रह नहीं जायेगा, हर एक अपने वर्ग को आगे बढ़ाने का उमंग तो रखते हैं ना! यह बहुत अच्छा है। लेकिन अभी जो भी वर्ग बने हैं, कितने समय से वर्ग चल रहे हैं, डेढ़ दो साल हो गये या ज्यादा हो गये? (10-12 साल) वर्गो की सेवा को 10-12 साल हो गये, अच्छा। बहुत टाइम हो गया है। वर्ग वालों के लिए बापदादा का एक संकल्प है। बापदादा ने 2-3 बार कहा है लेकिन हुआ नहीं है कि हर वर्ग ने जो भी जितने समय में भी सेवा की है, उस एक-एक वर्ग के विशेष सर्विसएबुल चाहे सहयोगी हैं, चाहे हाफ योगी हैं, कभी-कभी आते हैं, रेग्युलर नहीं है, ऐसे कोई हर वर्ग वाले कम से कम 5 तो सब वर्ग के सामने आने चाहिए। मधुबन में वह सभी देखें कि वर्ग वालों ने, चाहे 10-12 हों लेकिन 5 तो लाओ पक्के, अच्छे सहयोगी, सेवा के निमित्त बनने वाले 5-5 तो निकल सकते हैं या नहीं! निकल सकते हैं तो लाओ। (कब लायें?) वह दादियों के ऊपर हैं। (बापदादा के प्रोग्राम में लायें?) वह फिर ऐसे बापदादा से मिलने के लायक हों, 5 तो निकल ही सकते हैं। ज्यादा नहीं कहते, 5 बस। तो यह दादियां पास करेंगी।

तीसरी मीटिंग - इन्जीनियर्स की है, बहुत अच्छा। इन्जीनियर्स का तो काम ही है प्लैन बनाना। तो तीव्र पुरूषार्थ का कोई प्लैन बनाया कि सिर्फ सेवा का बनाया? इन्जीनियर्स को हर मास तीव्र पुरूषार्थ का कोई नया-नया प्लैन बनाना चाहिए। राय देनी चाहिए फिर फाइनल तो दादियां करेंगी। दादियां आपके साथी हैं, लेकिन इन्जीनियर्स और साइंस, विज्ञान वालों को ऐसा कोई प्लैन बनाना चाहिए जो जल्दी-जल्दी नई दुनिया आ जाए। बस यही मीटिंग करते रहेंगे, प्लैन बनाते रहेंगे, कब तक? कोई तीव्रगति के प्लैन बनाओ क्योंकि लक्ष्य तो आपके वर्ग का यही है कि ऐसे प्लैन बनें जो अपना राज्य जल्दी से जल्दी आये। तो ऐसा भी प्लैन बनाओ और सेवा में भी थोड़े समय में ज्यादा सफलता प्रत्यक्ष दिखाई दे, ऐसे प्लैन बनाओ। ऐसे प्लैन बनायेंगे ना! लास्ट टर्न में सब रिपोर्ट सुनेंगे कि हर एक वर्ग ने सफलता को तीव्र बनाने का क्या प्लैन बनाया! सिर्फ बनाना नहीं है, 15 दिन उसका अभ्यास करना है, प्रैक्टिकल में लाना है। ठीक है ना। अभी प्रैक्टिकल होना है ना! एक दो में सभी कहते हैं, बापदादा तो सबकी रूहरूहान सुनते रहते हैं। सभी कहते हैं प्रत्यक्ष हो, प्रत्यक्ष हो। लेकिन पहले प्रत्यक्ष आप तो हो जाओ। बाप भी आप द्वारा प्रत्यक्ष होगा ना! अच्छा।

अभी कुमारियों की सेरीमनी है। बहुत अच्छा लग रहा है। उठ जाओ। गुलदस्ता हिलाओ। बैठ जाओ। सभी ने देख लिया। कुमारियों के ऊपर तो बापदादा को सबसे ज्यादा नाज़ है। कुमारियां और डबल फारेनर्स कुमारियां 110 निकलें, यह बापदादा को बहुत अच्छा लग रहा है। पदम-पदम-पदम गुणा मुबारक है, कुमारियों को। अच्छा। कुमारियों से बापदादा का वैसे पर्सनल विशेष प्यार है। क्यों? कारण? कारण बापदादा समझते हैं कि विदेश में रहते कुमारी सुकुमारी बन गई, बच गई, कितनी बातों से बच गई। तो कुमारियों का बचना, बापदादा को बहुत अच्छा लगता है और देखो कुमारियों से विशेष प्यार है इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है कि कुमारी को पहलेपहले सबसे जल्दी दहेज मिलता है सेन्टर। इसमें देखो कितनी टीचर्स हैं सेन्टर्स सम्भालने वाली, इसमें जो कुमारियां सेन्टर सम्भालने वाली हैं, वह उठो। आपको तो वर, घर, दहेज सब मिल गया। तो विशेषता है ना कुमारियों की! बापदादा को खुशी होती है, एक-एक कुमारी को क्लास में अपना परिचय देना है, मैं कौन! और पक्की स्टैम्प लग जायेगी ना! तो बापदादा को कुमारियों का संगठन बहुत प्यारा है। एक-एक कुमारी कितने परिवारों का कल्याण करेगी। इन्डिया में कहते हैं कुमारी वह जो 21 कुल का कल्याण करे। बापदादा कहते हैं कुमारी, ब्रह्माकुमारी वह जो आत्माओं के 21 जन्मों का कल्याण करे। बहुत अच्छा किया। इनकी टीचर्स कौन हैं? कुमारियों की टीचर कौन? डबल फारनेर्स जो भी हैं, उन्हों ने सेवा कराई। बहुत अच्छा किया और बापदादा ने रिज़ल्ट देखी है, अच्छे उमंग-उत्साह से किया है और कराने वालों ने भी कराया है। इसीलिए पास हो, मुबारक हो। अच्छा।

डबल फारेनर्स में जो विशेष पाण्डव सेन्टर सम्भालने के निमित्त हैं, वह उठो। पाण्डवों को भी बहुत-बहुत मुबारक हो। ऐसे नहीं कि बापदादा को पाण्डव प्यारे नहीं हैं, पाण्डव तो पाण्डवपति के साथी हैं। यह तो यादगार भी बताता है। पाण्डवों का यादगार सदा ही पाण्डवपति बापदादा के साथ रहा है। लेकिन बापदादा को खुशी है कि बहुत अच्छे एक्जैम्पुल बन, सेवाधारी बन सेवा कर रहे हैं और सदा करते रहेंगे। इसलिए बाप दिलाराम दिल से धन्यवाद दे रहे हैं। अच्छा। डबल फारेनर्स की कमाल यह है कि जॉब भी करते, सेन्टर भी सम्भालते, डबल कार्य करते हैं। चाहे बहिनें हैं चाहे भाई हैं। जैसा नाम है डबल फारेनर्स वैसे काम भी डबल है। इसलिए बापदादा सभी डबल फारेनर्स को बहुत-बहुत-बहुत-बहुत याद दे रहे हैं। सुना। गुजरात के सेवाधारी - कहावत है जो समीप है वह सदा याद रहते हैं। तो सबसे समीप मुख्य स्थान गुजरात का है। अच्छा गुजरात वाले उठो। बहुत सेवाधारी हैं। गुजरात की विशेषता है - जब भी बुलाओ तो पहुँच जाते हैं। ऐसे है ना! जब भी सेवा के लिए बुलाओ आ जाते हैं। नजदीक का फायदा है। नजदीक का फायदा यह भी है कि सब मुरलियों में पहुँच जाते हैं। अच्छा।

गुजरात सेवा में तो अच्छा सदा ही रहा है और सदा ही रहने वाले हैं। संख्या भी ज्यादा है। बापदादा ने सुना कि अभी तक गुजरात में एक लाख नहीं बनाये हैं, तो यह थोड़ा सा रहा हुआ है। 9 लाख में से जो भी बड़े-बड़े ज़ोन हैं वह एक-एक लाख बनावें तो 9 लाख हो जाएं। डबल फारेनर्स भी कितने हैं, 50 हज़ार तक हैं? कितने हैं? (20 हज़ार) अभी 50 तक तो आओ। चलो इन्डिया को लाख तो फारेन वालों को 50 तो लाना चाहिए। (विदेश में भी गुजराती बहुत हैं) लेकिन हैं तो फारेनर्स ना! यह ज़रूर है कि फारेन में भी जहाँ-जहाँ गुजराती हैं या इन्डियन हैं वहाँ-वहाँ भण्डारी और भण्डारा भरपूर है। अभी-अभी बापदादा खुशखबरी डबल फारेनर्स की भी सुनते हैं कि डबल फारेनर्स को भी रहा हुआ वर्सा मिलता रहता है। तो डबल फारेनर्स को यह भी एक भविष्य बनाने का चांस अच्छा मिल रहा है। अच्छा है। समाचार तो बापदादा सब सुनते हैं। अच्छा है, हर एक की भारतवासी की, चाहे डबल फारेनर्स की विशेषतायें तो बहुत हैं लेकिन कहाँ तक सुनायें। इसलिए हर एक स्थान की कोई न कोई विशेषता है, ऐसा कोई स्थान नहीं जहाँ कोई विशेषता नहीं हो। विशेष आत्मायें हो और विशेषता है।

आज फारेन में सुन वा देख रहे हैं या नहीं? (देख रहे हैं) अच्छा है। आपके यज्ञ की स्थापना के बाद ही साइंस ने वृद्धि को प्राप्त किया है तो उसका फायदा तो कुछ लेंगे ना! लेकिन विधिपूर्वक फायदा लेना है। तो जो साइंस के साधनों द्वारा देख रहे हैं, सुन रहे हैं उन सभी बच्चों को सबसे पहले बापदादा सदा याद करते हैं। जितना-जितना याद का बल शक्तिशाली होगा उतना ऐसे ही महसूस करेंगे या कर रहे हैं जैसे बापदादा हमसे ही बात कर रहे हैं। लेकिन फिर भी मधुबन-मधुबन है।

अच्छा - अभी-अभी अपनी वृत्ति को एकाग्र कर सकते हो? कहाँ भी वृत्ति हलचल में नहीं आये। अचल, एकाग्र, शक्तिशाली रहे। (बापदादा ने ड्रिल कराई) अच्छा

चारों ओर के सर्व सर्विसएबुल बच्चों को, सदा अपने श्रेष्ठ वायब्रेशन द्वारा सेवा करने वाले तीव्रगति का पुरूषार्थ करने वाले बच्चों को सदा क्षमा के मास्टर सागर, सदा शुभ भावना, शुभ कामना द्वारा बहुत कमज़ोर आत्माओं को भी शक्तिशाली बनाने वाले ऐसे मास्टर सर्वशक्तिवान बच्चों को बापदादा का बहुत-बहुत याद-प्यार और नमस्ते।

दादी जी, दादी जानकी जी से

आप बताओ सबसे ज्यादा खुश कौन होता है? बाप खुश होते हैं या आप खुश होती हैं? (एक दो से ज्यादा) अच्छा है, बापदादा जब आप निमित्त आत्माओं की सेवा को देखते हैं तो सेवा पर बलिहार जाते हैं। सम्भालने की विधि अच्छी है। बापदादा आप दोनों का सारे विश्व के आगे स्नेह, सहयोग और एक दो में सहानुभूति देख हर्षित होते हैं। (गुलजार दादी भी है, त्रिमूर्ति हैं) वह तो निमित्त हो गई। आपको देख करके, एक दो में कहा और माना। यह मानना ही माननीय बनाता है। हाँ जी, हाँ जी करके हजूर को भी अपना बना लेते हैं। (बाबा ने कूट-कूट कर भर दिया है) 14 वर्ष की पालना में सब कूट-कूट कर डाल दिया है। (अभी भी छोड़ता नहीं है) आप छोड़ सकती हो तो बाप क्यों छोड़ेगा! बहुत अच्छा। यह साथी भी आपके अच्छे हैं। सबका साथ है तभी आगे बढ़ रहे हैं। एक छोटी का भी साथ नहीं हो तो हलचल हो जाए। सबका चाहिए ना! चाहे पाण्डव, चाहे शक्तियाँ, एक- एक का सहयोग, सफलता को प्राप्त करा रहा है। आप यह नहीं समझना हम तो सिर्फ देखने वाले हैं, नहीं। करने वाले हैं। सर्व के सहयोग से बेहद का कार्य चल रहा है। ब्रह्मा बाप ने फाउण्डेशन क्या डाला? सहयोग का फाउण्डेशन डाला, क्या अकेला बापदादा कर नहीं सकता क्या? लेकिन फाउण्डेशन सहयोग का डाला। तो सहयोग से ही संसार बदल रहा है। अच्छा। सबका सहयोग है, एक-एक रतन विशेष है।

अच्छा - ओम् शान्ति।