02-11-04   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


स्व-उपकारी बन अपकारी पर भी उपकार करो, सर्व शक्ति, सर्व गुण सम्पन्न सम्मान दाता बनो

आज स्नेह के सागर अपने चारों ओर के स्नेही बच्चों को देख हर्षित हो रहे हैं। चाहे साकार रूप में सन्मुख हैं, चाहे स्थूल रूप में दूर बैठे है लेकिन स्नेह, सभी को बाप के पास बैठे हैं - यह अनुभव करा रहा है। हर बच्चे का स्नेह बाप को समीप अनुभव करा रहा है। आप सभी बच्चे भी बाप के स्नेह में सम्मुख पहुँचे हो। बापदादा ने देखा कि हर एक बच्चे के दिल में बापदादा का स्नेह समाया हुआ है। हर एक के दिल में मेरा बाबा इसी स्नेह का गीत बज रहा है। स्नेह ही इस देह और देह के सम्बन्ध से न्यारा बना रहा है। स्नेह ही मायाजीत बना रहा है। जहाँ दिल का स्नेह है वहाँ माया दूर से ही भाग जाती है। स्नेह की सबजेक्ट में सर्व बच्चे पास हैं। एक है स्नेह, दूसरा है सर्वशक्तिवान बाप द्वारा सर्वशक्तियों का खज़ाना।

तो आज बापदादा एक तरफ तो स्नेह को देख रहे हैं, दूसरे तरफ शक्ति सेना की शक्तियों को देख रहे हैं। जितना स्नेह समाया हुआ है उतना ही सर्व शक्तियां भी समाई हुई है? बापदादा ने सभी बच्चो को एक जैसी सर्व शक्तियाँ दी है, मास्टर सर्वशक्तिवान बनाया है। किसको सर्वशक्तिवान, किसको शक्तिवान नहीं बनाया है हाजिर कहे, जिस भी शक्ति का आह्वान करो, जैसा समय, जैसी परिस्थिति वैसे शक्ति कार्य में लगा सको। ऐसे अधिकारी आत्मायें बने हो? क्योंकि बाप ने वर्सा दिया और वर्से को आपने अपना बनाया, अपना बनाया है ना! तो अपने पर अधिकार होता है। जिस समय जिस विधि से आवश्यकता हो, उस समय कार्य में लग जाए। मानो समाने के शक्ति की आपको आवश्यकता है और आर्डर करते हो समाने की शक्ति को, तो आपका आर्डर मान जी हाजिर हो जाती है? हो जाती है तो कांध हिलाओ, हाथ हिलाओ। कभी-कभी होती है या सदा होती है? समाने की शक्ति हाजिर होती है लेकिन 10 बारी समा लिया और 11 वें बारी थोडा नीचे ऊपर होता है? सदा और सहज हाजिर हो जाए, समय बीतने के बाद नहीं आवे, करने तो यह चाहते थे लेकिन हो गया, यह ऐसा नहीं हो। इसको कहा जाता है सर्व शक्तियों के अधिकारी। यह अधिकार बापदादा ने तो सबको दिया है, लेकिन देखने में आता है कि सदा अधिकारी बनने में नम्बरवार हो जाते हैं। सदा और सहज हो, नेचुरल हो, नेचर हो, उसकी विधि है, जैसे बाप को हजूर भी कहा जाता है, कहते हैं हजूर हाजिर है। हाजिर हजूर कहते हैं। तो जो बच्चा हजूर की हर श्रीमत पर हाजिर हजूर कर चलता है उसके आगे सर्व शक्तियाँ भी हजूर हाजिर करती है। हर आज्ञा में जी हाजिर, हर कदम में जी हाजिर। अगर हर श्रीमत में जी हाजिर नहीं हैं तो हर शक्ति भी हर समय हाजिर हक नहीं कर सकती है। अगर कभी-कभी बाप की श्रीमत वा आज्ञा का पालन करते हैं, तो शक्तियां भी आपका कभी-कभी हाजिर होने का आर्डर पालन करती है। उस समय अधिकारी के बजाए अधीन बन जाते हैं। तो बापदादा ने यह रिजल्ट चेक की, तो क्या देखा? नम्बरवार हैं। सभी नम्बरवन नहीं है, नम्बरवार हैं और सदा सहज नहीं हैं। कभी- कभी सहज हो जाते, कभी थोडा मुश्किल शक्ति इमर्ज होती है।

बापदादा हर एक बच्चे को बाप समान देखने चाहते हैं। नम्बरवार नहीं देखने चाहते हैं और आप सभी का लक्ष्य भी है बाप समान बनने का। समान बनने का लक्ष्य है वा नम्बरवार बनने का लक्ष्य है? अगर पूछेंगे तो सब कहेंगे समान बनना है। तो चेक करो - एक सर्व शक्तियाँ हैं? सर्व पर अण्डरलाइन करो। सर्व गुण है? बाप समान स्थिति है? कभी स्वयं की स्थिति, कभी कोई परस्थिति विजय तो नहीं प्राप्त कर लेती' पर स्थिति अगर विजय प्राप्त कर लेती है तो उसका कारण जानते हो ना? स्थिति कमज़ोर है तब परिस्थिति वार कर सकती है। सदा स्व स्थिति विजयी रहे, उसका साधन है सदा स्वमान और सम्मान का बैलेन्स। स्वमानधारी आत्मा स्वत: ही सम्मान देने वाला दाता है। वास्तव में किसी को भी सम्मान देना, देना नहीं है, सम्मान देना मान लेना है। सम्मान देने वाला सबके दिल में माननीय स्वत: ही बन जाता है। ब्रह्मा बाप को देखा - आदि देव होते हुए, ड़ामा की फर्स्ट आत्मा होते हुए सदा बच्चों को सम्मान दिया। अपने से भी ज्यादा बच्चों का मान आत्माओं द्वारा दिलाया। इसलिए हर एक बच्चे के दिल में ब्रह्मा बाप माननीय बने। तो मान दिया या मान लिया? सम्मान देना अर्थात् दूसरे के दिल में दिल के स्नेह का बीज बोना। विश्व के आगे भी विश्व कल्याणकारी आत्मा हैं, यह तब अनुभव करते जब आत्माओं को स्नेह से सम्मान देते हो।

तो बापदादा ने वर्तमान समय में आवश्यकता देखी सम्मान एक दो को देने की। सम्मान देने वाला ही विधाता आत्मा दिखाई देता है। सम्मान देने वाले ही बापदादा की श्रीमत (शुभ भावना, शुभ कामना) मानने वाले आज्ञाकारी बच्चे हैं। सम्मान देना ही ईश्वरीय परिवार का दिल का प्यार है। सम्मान वाला स्वमान में सहजही स्थित हो सकता है। क्यों? जिन आत्माओं को सम्मान देता है उन आत्माओं द्वारा जो दुआयें दिल की मिलती है, वह दुआओं का भण्डार स्वमान सहज और स्वतः ही याद दिलाता है। इसलिए बापदादा चारों ओर के बच्चों को विशेष अण्डरलाइन करा रहे हैं - सम्मान दाता बनो।

बापदादा के पास जो भी बच्चा जैसा भी आया, कमज़ोर आया, संस्कार के वश आया, पापों का बोझ लेके आया, कड़े सस्कार लेकर आया, बापदादा ने हर बच्चे को किस नजर से देखा! मेरा सिकीलधा लाडला बच्चा है, ईश्वरीय परिवार का बच्चा है। तो सम्मान दिया और आप स्वमानधारी बन गये। तो फॉलो फादर। अगर सहज सर्वगुण सम्पन्न बनना चाहते हो तो सम्मान दाता बनो। समझा! सहज है ना? सहज है या मुश्किल है? टीचर्स क्या समझती हैं, सहज है? कोई को देना सहज है, कोई को मुश्किल है या सभी को देना सहज है? आपका टाइटल है - सर्व उपकारी। अपकार करने वाले पर भी उपकार करने वाले। तो चेक करो - सर्व उपकारी दृष्टि, वृत्ति, स्मृति रहती है? दूसरे पर उपकार करना, स्वयं पर ही उपकार करना है। तो क्या करना है? सम्मान देना है ना! अलग- अलग बातों में धारणा करने के लिए जो मेहनत करते हो, उससे छूट जायेंगे क्योकि बापदादा देख रहे हैं, कि समय की गति तीव्र हो रही है। समय इन्तजार कर रहा है, तो आप सभी को इन्तजाम करना है। समय का इन्तजार समाप्त करना है। क्या इन्तजाम करना है? अपने सम्पूर्णता और समानता की गति तीव्र करनी है। कर रहे हैं नहीं, तीव्रगति को चेक करो - तीव्रगति है?

बाकी स्नेह से नये-नये बच्चे भी पहुँचे हैं, बापदादा नये-नये बच्चों को देख खुश होते हैं। जो पहले बारी आये हैं वह हाथ उठाओ। बहुत हैं। भले पधारे बाप के घर में, अपने घर में, मुबारक हो।

सेवा का टर्न कर्नाटक:- कर्नाटक वाले उठो। सेवा के गोल्डन चांस की मुबारक हो। देखो पहला नम्बर लिया है तो पहला नम्बर ही रहना है ना! पुरुषार्थ में, विजयी बनने में सबसे पहला नम्बर लेने वाले। दूसरा नम्बर नहीं लेना, पहला नम्बर। है हिम्मत! हिम्मत है? तो हिम्मत आपकी और हजार गुणा मदद बाप की। अच्छा चांस लिया है। अपने पुण्य का खाता बहुत-बहुत जमा कर लिया। अच्छा कर्नाटक ने मेगा प्रोग्राम किया है? नहीं किया है, क्यों? क्यों नहीं किया? कर्नाटक को सबमें पहला नम्बर लेना चाहिए। (बैंगलोर में करेंगे) अच्छा, जिन्होंने भी बडा प्रोग्राम किया है वह उठो। कितने प्रोग्राम हो गये हैं? (8 - 10 हो चुके हैं) तो बापदादा बड़े प्रोग्राम की बडी मुबारक दे रहे हैं। जोन कितने हैं! हर एक जोन को बडा प्रोग्राम करना चाहिए क्योकि आपके शहर में उल्हना देने वाले उल्हना नहीं देगे। बडे प्रोग्राम में आप एडवरटाइज भी बडी करते हो ना, चाहे मीडिया द्वारा, चाहे पोस्टर, होर्डिग आदि भिन्न-भिन्न साधन अपनाते हो तो उल्हना कम हो जायेगा। बापदादा को यह सेवा पसन्द है लेकिन लेकिन है। प्रोग्राम तो बड़े किये उसकी तो मुबारक है ही लेकिन हर प्रोग्राम से कम से कम 108 की माला तो तैयार होनी चाहिए। वह कहाँ हुई है? कम से कम 108, ज्यादा से ज्यादा 16 हजार। लेकिन इतनी जो एनर्जी लगाई, इतना सम्पत्ति लगाई, उसकी रिजल्ट कम से कम 1०8 तो तैयार हों। सबकी एड्रेस तो आपके पास रहनी चाहिए। बड़े प्रोग्राम में जो भी लाने वाले हैं, उन्हों के पास उनका परिचय तो रहता ही है तो उन्हों को फिर से समीप लाना चाहिए। ऐसे नहीं कि हमने कर लिया, लेकिन जो भी कार्य किया जाता है उसका फल तो निकलना चाहिए ना। तो हर एक बड़े प्रोग्राम करने वालो को यह रिजल्ट बापदादा को देनी है। चाहे भिन्न-भिन्न सेन्टर पर जाये, किस शहर का भी हो वहाँ जाए, लेकिन रिजल्ट निकलनी चाहिए। ठीक है ना, हो तो सकता है ना! थोडा अटेंशन देगे तो निकल आयेगे 18 तो कुछ भी नहीं हैं। लेकिन रिजल्ट बापदादा देखने चाहते हैं, कम से कम स्टूडेंट तो बने। सहयोग में आगे आवे, कौन-कौन कितने निकालते हैं, वह बापदादा इस सीजन में रिजल्ट देखने चाहते हैं। ठीक है ना? पाण्डव ठीक है? तो देखेंगे नम्बरवन कौन है? कितने भी निकालो, निकालो जरूर। क्या है, प्रोग्राम हो जाते हैं लेकिन आगे का सम्पर्क वह थोडा अटेंशन कम हो जाता है और निकालना कोई मुश्किल नहीं है। बाकी बापदादा बच्चों की हिम्मत देख खुश हैं। समझा। अच्छा -

इन्दौर हॉस्टल तथा सभा में उपस्थित सभी कुमारियों से:- बहुत कुमारियाँ आई हैं, जितनी भी कुमारियाँ आई हैं, उनमें से हैण्डस कितने निकलेंगे? कुमारियाँ बापदादा के राइट हैण्डस बन सकती हैं। गोल्डन चांस है। तो कितनी संख्या है! मालूम है, कितनी कुमारियाँ हैं। (5 -6 सौ) इन्हों का नाम नोट करना और यह रिजल्ट देखना कि इतनी सारी कुमारियों में से राइट हैण्ड कितनी बनीं! हाथ उठाओ, सेंटर पर रहने वाली नहीं उठाओ। जो राइट हैण्ड बनेगी वह हाथ उठाओ। इन्हों का वीडियो निकालो। क्योकि आप लोगों को मालूम है कि सेंटर खोलने के निमंत्रण बहुत है लेकिन हैण्डस कम हैं। तो आपकी तो माँगनी है। इसलिए कुमारियों को जल्दी से जल्दी सेवा के राइट हैण्ड बनना चाहिए। जो छोटी-छोटी है उनकी बात छोड़ो, लेकिन जो सेवा कर सकती हैं उन्हों को समय के प्रमाण जल्दी तैयार हो जाना चाहिए। दहेज आपका तैयार है, सेन्टर दहेज है, वर तो है ही और दहेज भी तैयार है। तो तैयारी करो। करेगी ना! हाँ, बडी-बड़ी तो निकल सकती है। जो समझती है जल्द से जल्दी निकल सकती है, वह हाथ उठाओ। देखो, कितनी कुमारियाँ हाथ उठा रही हैं। वीडियो निकल रहा है। अच्छा - मुबारक हो, इनएडवास मुबारक हो। अच्छा।

सभी तरफ से जो भी स्नेही बच्चे बापदादा को दिल में याद कर रहे हैं, वा पत्र, ईमेल द्वारा याद भेजी है, उन चारों ओर के बच्चों को बापदादा दूर नहीं देख रहे हैं लेकिन दिलतख्त पर देख रहे हैं। सबसे समीप दिल है। तो बापदादा दिल से याद भेजने वालों को और याद भेजी नहीं लेकिन याद में हैं, उन सबको भी दिलतख्तनशीन देख रहे हैं। रेसपान्ड दे रहे हैं। दूर बैठे भी नम्बरवन तीव्र पुरुषार्थी भव।

अच्छा - अभी सभी एक सेकण्ड में, एक सेकण्ड एक मिनट नहीं, एक सेकण्ड में मैं फरिश्तासो देवता हूँ - यह मंसा ड़िल सेकण्ड में अनुभव करो। ऐसी ड़िल दिन में एक सेकण्ड में बार-बार करो। जैसे शारीरिक ड़िल शरीर को शक्तिशाली बनाती, वैसे यह मन की ड़िल मन को शक्तिशाली बनाने वाली है। मै फरिश्ता हूँ, इस पुरानी दुनिया, पुरानी देह, पुराने देह के सस्कार से न्यारी फरिश्ता आत्मा हूँ। अच्छा -

चारों ओर के अति स्नेही, सदा स्नेह के सागर में लवलीन आत्माओं को, सदा सर्व शक्तियों के अधिकारी श्रेष्ठ आत्माओं को, सदा बाप समान बनने बाले बाप के प्यारे आत्माओं को, सदा स्वमान में रहने वाली हर आत्मा को सम्मान देने वाली, सर्व के माननीय माननेवाली आत्माओं को, सदा सर्व उपकारी आत्माओं को बापदादा का दिल का यावधार और दिल की दुआयें स्वीकार हो। और साथ-साथ विश्व के मालिक आत्माओं को नमस्ते।

दादिजी से:- सम्मान देने में नम्बरवन पास है। अच्छा है, सब दादियों से मधुबन की रौनक है। (सभा से) इन सभी को दादियों से रौनक अच्छी लगती है ना। जैसे दादियों की रौनक से मधुबन में रौनक हो जाती है, ऐसे आप सभी दादी नहीं, दीदियाँ और दादे तो हो। तो सभी दीदियाँ और सभी दादायें, सभी को यह सोचना है, करना है, जहाँ भी रहते हो उस स्थान में रौनक हो। जैसे दादियों से रौनक है, वैसे हर स्थान में रौनक हो क्योकि दादी के पीछे दीदियाँ तो हो ना, कम नहीं हो। दादे भी हैं, दीदियाँ भी है। तो किसी भी सेंटर पर रूखापन नहीं होना चाहिए, रौनक होनी चाहिए। आप एक-एक विश्व में रौनक करने वाली आत्मायें हो। तो जिस भी स्थान पर हो वह रौनक का स्थान नजर आवे। ठीक है ना? क्योंकि दुनिया में हद की रौनक है और आप एक एक से बेहद की रौनक है। स्वय खुशी, शान्ति और अतीन्द्रिय सुख की रौनक में होंगे तो स्थान भी रौनक में आ जायेगा क्योंकि स्थिति से स्थान में वायुमण्डल फैलता है। तो सभी को चेक करना है - कि जहाँ हम रहते हैं, वहाँ रौनक है? उदासी तो नहीं है? सब खुशी में नाच रहे हैं? ऐसे है ना! आप दादियों का तो यही काम है ना! फॉलो दीदियाँ और दादायें। अच्छा।

आज इस वर्ष के इन्डियन सीजन का आदि है। तो आप सभी आदि में आ गये हैं। अच्छा है। बापदादा ने यह हाल आपके लिए ही बनाया है। आप नहीं होते हो ना तो हाल की रौनक नहीं होती है। (बाबा आते हैं तो रौनक हो जाती है) बाबा आवे और यह नहीं हों तो! (दादी को रौनक चाहिए, अच्छा है।

ओम शान्ति ।