25-02-06   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


"आज उत्सव के दिन मन के उमंग-उत्साह द्वारा माया से मुक्त रहने का व्रत लो, मर्सीफुल बन मास्टर मुक्तिदाता बनो, साथ चलना है तो समान बनो"

आज चारों ओर के अति स्नेही बच्चों की उमंग-उत्साह भरी मीठी-मीठी यादप्यार और बधाईयाँ पहुँच रही हैं। पदमगुणा बधाईयाँ दे रहे हैं। आज के दिन की विशेषता जो सारे कल्प में नहीं है वह आज है जो बाप और बच्चों का जन्म दिन साथ-साथ है। इसको कहा जाता है विचित्र जयन्ती। सारे कल्प में चक्र लगाके देखो ऐसी जयन्ती कभी मनाई है! लेकिन आज बापदादा बच्चों की जयन्ती मना रहे हैं और बच्चे बापदादा की जयन्ती मना रहे हैं। नाम तो शिव जयन्ती कहते हैं लेकिन यह ऐसी जयन्ती है जो इस एक जयन्ती में बहुत जयन्ती समाई हुई हैं। आप सभी को भी बहुत खुशी हो रही है ना कि हम बाप को मुबारक देने आये हैं और बाप हमको मुबारक देने आये हैं क्योंकि बाप और बच्चों का इकठ्ठा जन्म दिन होना यह अति प्यार की निशानी है। बाप बच्चों के सिवाए कुछ कर नहीं सकते और बच्चे बाप के सिवाए नहीं कर सकते। जन्म भी इकट्ठा है और संगमयुग में रहना भी इकठ्ठा है क्योंकि बाप और बच्चे कम्बाइन्ड हैं। विश्व कल्याण का कार्य भी इकट्ठा है, अकेला बाप भी नहीं कर सकता, बच्चे भी नहीं कर सकते, साथ-साथ है और बाप का वायदा है - साथ रहेंगे, साथ चलेंगे, साथ चलेंगे ना। वायदा है ना। इतना प्यार बाप और बच्चों का देखा है? देखा है वा अनुभव कर रहे हो? इसलिए इस संगमयुग का महत्व है और इसी मिलन का यादगार भिन्न-भिन्न मेलों में बनाया हुआ है। इस शिव जयन्ती के दिन भक्त पुकार रहे हैं - आओ। कब आयेंगे, कैसे आयेंगे, यही सोच रहे हैं और आप मना रहे हैं।

बापदादा को भक्तों के ऊपर स्नेह भी है, रहम भी आता है, कितना कुछ प्रयत्न करते हैं, ढूंढते रहते। आपने ढूंढा? या बाप ने आपको ढूंढा? किसने ढूंढ़ा? आपने ढूंढा? आप तो फेरे ही पहनते रहे। लेकिन बाप ने देखो, बच्चों को किसी भी कोनों में खो गये, आज भी देखो भारत के अनेक राज्यों से तो आये हो लेकिन विदेश भी कम नहीं है, 100 देशों से आ गये हैं। और मेहनत क्या की? बाप का बनने में मेहनत क्या की? मेहनत की? की है मेहनत? हाथ उठाओ जिसने मेहनत की, बाप को ढूंढने में भक्ति में किया लेकिन जब बाप ने ढूँढ लिया, फिर मेहनत की? की मेहनत? सेकण्ड में सौदा कर दिया। एक शब्द में सौदा हो गया। वह एक शब्द क्या? ‘‘मेरा’’। बच्चों ने कहा ‘‘मेरा बाबा’’, बाप ने कहा ‘‘मेरे बच्चे’’। हो गये। सस्ता सौदा है या मुश्किल? सस्ता है ना! जो समझते हैं थोड़ा-थोड़ा मुश्किल है वह हाथ उठाओ। जो मुश्किल समझते हैं वह हाथ उठाओ। कभी-कभी तो मुश्किल लगता है ना! या नहीं? है सहज लेकिन अपनी कमज़ोरियाँ मुश्किल अनुभव कराती हैं। बापदादा देखते हैं भक्त भी जो सच्चे भक्त हैं, स्वार्था भक्त नहीं, सच्चे भक्त, आज के दिन बड़े प्यार से व्रत रखते हैं। आप सबने भी व्रत तो लिया है, वह थोड़े दिनों का व्रत रखते हैं और आप सबने ऐसा व्रत रखा है जो एक अभी का व्रत 21 जन्म कायम रहता है। वह हर वर्ष मनाते हैं, व्रत रखते हैं, आप कल्प में एक बार व्रत लेते हो जो 21 जन्म न मन से व्रत रखना पड़ता, न तन से व्रत रखना पड़ता है। व्रत तो आप भी लेते हो, कौन सा व्रत लिया है? पवित्र वृत्ति, दृष्टि, कृति, पवित्र जीवन का व्रत लिया है। जीवन ही पवित्र बन गई। पवित्रता सिर्फ ब्रह्मचर्य व्रत की नहीं, लेकिन जीवन में आहार, व्यवहार, संसार, संस्कार सब पवित्र। ऐसा व्रत लिया है ना? लिया है? कंधा हिलाओ। लिया है? पक्का लिया है? पक्का या थोड़ा-थोड़ा कच्चा? अच्छा, एक महाभूत काम, उसका व्रत लिया है या और चार का भी लिया है? ब्रह्मचारी तो बने लेकिन चार जो पीछे हैं, उसका भी व्रत लिया है? क्रोध का व्रत लिया है कि वह छूट है? क्रोध करने की छुट्टी मिली है? दूसरा नम्बर है ना तो कोई हर्जा नहीं, ऐसे तो नहीं? जैसे महा भूत को, महाभूत समझकर मन-वाणी-कर्म में व्रत पक्का लिया है, ऐसे ही क्रोध का भी व्रत लिया है? जो समझते हैं हमने क्रोध का भी, बाल बच्चे पीछे भी हैं- लोभ मोह अहंकार, लेकिन बापदादा आज क्रोध का पूछ रहे हैं, जिसने क्रोध विकार का पूर्ण व्रत लिया है, मन्सा में भी क्रोध नहीं, दिल में भी क्रोध की फीलिंग नहीं, ऐसा है? आज शिव जयन्ती है ना! तो भक्त व्रत रखेंगे तो बापदादा भी व्रत तो पूछेंगे ना! जो समझते हैं कि स्वप्न में भी क्रोध का अंश आ नहीं सकता, वह हाथ उठाओ। आ नहीं सकता। है? आता नहीं है? आता नहीं है? नहीं आता है? अच्छा, इन्हों का फोटो निकालो, जिन्होंने हाथ उठाया उनका फोटो निकालो। अच्छा है क्यों? क्योंकि आपके हाथ से बापदादा नहीं मानेगा, आपके साथियों से भी सर्टीफिकेट लेंगे। फिर प्राइज देंगे। अच्छी बात है क्योंकि बापदादा ने देखा कि क्रोध का अंश भी ईर्ष्या, जैलसी यह भी क्रोध के बाल बच्चे हैं। लेकिन अच्छा है हिम्मत जिन्होंने रखी है, उनको बापदादा अभी तो मुबारक दे रहे हैं लेकिन बाद में सर्टीफिकेट के बाद में फिर प्राइज देंगे क्योंकि बापदादा ने जो होम वर्क दिया, उसकी रिजल्ट भी बापदादा देख रहे हैं।

आज बर्थ डे मना रहे हो, तो बर्थ डे पर क्या किया जाता है? एक तो केक काटते हैं, तो अभी दो मास तो हो गये, अभी एक मास रहा है, इस दो मास में आपने व्यर्थ संकल्प का केक काटा? वह केक तो बहुत सहज काट लेते हो ना, आज भी काटेंगे। लेकिन वेस्ट थॉट्स का केक काटा? काटना तो पड़ेगा ना! क्योंकि साथ चलना है, यह तो पक्का वायदा है ना! कि साथ हैं, साथ चलेंगे। साथ चलना है तो समान तो बनना पड़ेगा ना! अगर थोड़ा बहुत रह भी गया हो, दो मास तो पूरे हो गये, तो आज के दिन बर्थ डे मनाने कहाँ-कहाँ से आये हो। प्लेन में भी आये हो, ट्रेन में भी आये हो, कारों में भी आये हो, बापदादा को खुशी है कि भाग-भाग करके आये हो। लेकिन बर्थ डे पर पहले गिफ्ट भी देते हैं, तो जो एक मास रहा हुआ है, होली भी आने वाली है। होली में भी कुछ जलाया ही जाता है। तो क्या जो थोड़ा बहुत वेस्ट थॉट्स बीज है, अगर बीज रहा हुआ होगा तो कभी तना भी निकल आयेगा, कभी शाखा भी निकल आयेगी। तो क्या आज के उत्सव के दिन मन के उमंग उत्साह से, मन का उमंग-उत्साह, मुख का नहीं मन का, मन के उमंग उत्साह से जो थोड़ा बहुत रह गया हो, चाहे मन्सा में, चाहे वाणी में, चाहे सम्बन्ध-सम्पर्क में, क्या आज बाप के बर्थ डे पर बाप को यह गिफ्ट दे सकते हो? दे सकते हो मन के उमंग-उत्साह से? फायदा तो आपका है, बाप को तो देखना है। जो उमंग उत्साह से, हिम्मत रखते हैं, करके ही दिखायेंगे, बेस्ट बनके दिखायेंगे, वह हाथ उठाओ। छोड़ना पड़ेगा, सोच लो। बोल में भी नहीं। सम्बन्ध-सम्पर्क में भी नहीं। है हिम्मत? हिम्मत है? मधुबन वालों में भी है, फारेन वालों में भी हैं, भारतवासियों में भी है क्योंकि बापदादा का प्यार है ना तो बापदादा समझते हैं सब इकट्ठे चलें, कोई रह नहीं जाये। जब वायदा किया है, साथ चलेंगे, तो समान तो बनना ही पड़ेगा। प्यार है ना! मुश्किल से तो नहीं हाथ उठाया? बापदादा इस संगठन का, ब्राह्मण परिवार का बाप समान मुखड़ा देखने चाहते हैं। सिर्फ दृढ़ संकल्प की हिम्मत करो, बड़ी बात नहीं है लेकिन सहनशक्ति चाहिए, समाने की शक्ति चाहिए। यह दो शक्तियाँ, जिसमें सहनशक्ति है, समाने की शक्ति है, वह क्रोधमुक्त सहज हो सकता है। तो आप ब्राह्मण बच्चों को तो बापदादा ने सर्व शक्तियाँ वरदान में दी हैं, टाइटल ही है मास्टर सर्वशक्तिवान। बस एक स्लोगन याद रखना, अगर एक मास में समान बनना ही है तो एक स्लोगन याद रखना, वायदे का है - न दु:ख देना है, न दु:ख लेना है। कई यह चेक करते हैं कि आज के दिन किसको दु:ख दिया नहीं है, लेकिन लेते बहुत सहज हैं। क्योंकि लेने में दूसरा देता है ना, तो अपने को छुड़ा देते हैं, मैंने थोड़ेही कुछ किया, दूसरे ने दिया, लेकिन लिया क्यों? लेने वाले आप हो या देने वाले? देने वाले ने गलती की, वह बाप और ड्रामा जाने उसका हिसाब-किताब, लेकिन आपने लिया क्यों? बापदादा ने रिजल्ट में देखा है कि देने में सोचते हैं फिर भी लेकिन ले बहुत जल्दी लेते हैं। इसलिए समान बन नहीं सकेंगे। लेना नहीं है कितना भी कोई दे, नहीं तो फीलिंग की बीमारी बढ़ जाती है। इसलिए अगर छोटी छोटी बातों में फीलिंग बढ़ती है तो वेस्ट थॉट्स खत्म नहीं हो सकते और बाप के साथ कैसे चलेंगे! बाप का प्यार है, बाप आपको छोड़ नहीं सकता, साथ लेके ही जाना है। मंजूर है? पसन्द है ना? पसन्द है तो हाथ उठाओ। पीछे पीछे तो नहीं आना है ना! अगर साथ चलना है तो गिफ्ट देनी ही पड़ेगी। एक मास सब अभ्यास करो, न दु:ख लेना है न दु:ख देना है। यह नहीं कहना मैंने दिया नहीं, उसने ले लिया, कुछ तो होता है। परदर्शन नहीं करना, स्व-दर्शन। हे अर्जुन मुझे बनना है।

देखो, बापदादा ने देखा रिपोर्ट में, सन्तुष्टता की रिपोर्ट अभी भी नहीं थी, मैजारिटी की। इसीलिए बापदादा फिर एक मास के लिए अण्डरलाइन कराते हैं। अगर एक मास अभ्यास कर लिया तो आदत पड़ जायेगी। आदत डालनी है। हल्का नहीं छोड़ना, यह तो होता ही है। इतना तो चलेगा, नहीं। अगर बापदादा से प्यार है तो प्यार के पीछे क्या सिर्फ एक क्रोध विकार को कुर्बान नहीं कर सकते? कुर्बान की निशानी है - फरमान मानने वाला। व्यर्थ संकल्प अन्तिम घड़ी में बहुत धोखा दे सकता है क्योंकि चारों ओर अपने तरफ दु:ख का वायुमण्डल, प्रकृति का वायुमण्डल और आत्माओं का वायुमण्डल आकर्षण करने वाला होगा। अगर वेस्ट थॉट्स की आदत होगी तो वेस्ट में ही उलझ जायेंगे। तो बापदादा का आज विशेष यह हिम्मत का संकल्प है, चाहे विदेश में रहते, चाहे भारत में रहते, है तो बापदादा एक के बच्चे। तो चारों ओर के बच्चे हिम्मत और दृढ़ता रख सफल मूर्त बन विश्व में यह एनाउन्स करें कि काम नहीं, क्रोध नहीं, हम परमात्म बच्चे हैं। दूसरों से शराब छुड़ाते, बीड़ी छुड़ाते, लेकिन बापदादा आज हर एक बच्चे से क्रोधमुक्त, काम विकार मुक्त इन दो की हिम्मत दिलाके स्टेज पर विश्व को दिखाने चाहते हैं। पसन्द है? दादियों को पसन्द है? पहली लाइन वालों को पसन्द है? मधुबन वालों को पसन्द है? मधुबन वालों भी पसन्द है। फॉरेन वालों को भी पसन्द है? तो जो पसन्द चीज़ होती है उसे करने में क्या बड़ी बात है। बापदादा भी एकस्ट्रा किरणें देगा। ऐसा नक्शा दिखाई दे कि यह दुआयें देने वाला और दुआयें लेने वाला ब्राह्मण परिवार है। क्योंकि समय भी पुकार रहा है, बापदादा के पास तो एडवांस पार्टी वालों की भी दिल की पुकार है। माया भी अभी थक गई है। वह भी चाहती है कि अभी हमें भी मुक्ति दे दो। मुक्ति देते हैं लेकिन बीच-बीच में थोड़ी दोस्ती कर देते हैं क्योंकि 63 जन्म दोस्त रही है ना! तो बापदादा कहते हैं हे मास्टर मुक्तिदाता अभी सबको मुक्ति दे दो। क्योंकि सारे विश्व को कुछ न कुछ प्राप्ति की अंचली देनी है, कितना काम करना है। क्योंकि इस समय, समय आपका साथी है, सर्व आत्माओं को मुक्ति में जाना ही है, समय है। दूसरे समय में अगर आप पुरूषार्थ भी करो, तो समय नहीं है, इसलिए आप दे नहीं सकते। अब समय है इसलिए बापदादा कहते हैं पहले स्व को मुक्ति दो, फिर विश्व की सर्व आत्माओं को प्राप्ति, मुक्ति देने की अंचली दो। वह पुकार रहे हैं, आपको क्या दु:खियों की पुकार का आवाज नहीं आता? अगर अपने में ही बिजी होंगे तो आवाज सुनने नहीं आता। बार-बार गीत गा रहे हैं - दु:खियों पर कुछ रहम करो...। अभी से दयालु, कृपालु, मर्सीफुल संस्कार बहुतकाल से नहीं भरेंगे तो आपके जड़ चित्र में मर्सीफुल का, कृपा का, रहम का, दया का वायब्रेशन कैसे भरेगा। डबल फॉरेनर्स समझते हैं, आप भी द्वापर में मर्सीफुल बनके सबको मर्सी देंगे ना! जड़ चित्रों द्वारा। आपके चित्र हैं ना या इन्डिया वालों के हैं। फॉरेनर्स समझते हैं कि हमारे चित्र हैं? तो चित्र क्या देते हैं? चित्रों के पास जाके क्या माँगते हैं? मर्सी, मर्सी की धुन लगा देते हैं। तो अभी संगम पर आप अपने द्वापर कलियुग के समय के लिए जड़ चित्रों के वायुमण्डल भरेंगे तब आपके जड़ चित्रों के द्वारा अनुभव करेंगे। भक्तों का कल्याण तो होगा ना! भक्त भी हैं तो आपकी वंशावली ना। आप सभी ग्रेट ग्रेट ग्रैण्ड फादर की सन्तान हो तो भक्त हैं, चाहे दु:खी हैं, लेकिन हैं तो आपकी ही वंशावली। तो रहम नहीं आता आपको? आता तो है लेकिन थोड़ा-थोड़ा और कहाँ बिजी हो जाते हो।

अभी अपने को अपने पुरूषार्थ में समय ज्यादा नहीं लगाओ। देने में लगाओ, तो देना लेना हो जायेगा। छोटी-छोटी बातें नहीं, मुक्ति दिन मनाओ। आज का दिन मुक्ति दिवस मनाओ। ठीक है? हाँ पहली लाइन ठीक है? ठीक है? मधुबन वाले? आज मधुबन वाले बहुत प्यारे लग रहे हैं क्योंकि मधुबन को फॉलो बहुत जल्दी करते हैं। हर बात में मधुबन को फॉलो जल्दी करते हैं तो मधुबन वाले मुक्ति दिवस मनायेंगे ना तो सभी फॉलो करेंगे। आप मधुबन निवासी सभी मास्टर मुक्ति दाता बन जायें। बनना है? अच्छा बहुत हैं। अच्छा, बहुत अच्छे अच्छे हैं। उम्मींदवार हैं। क्योंकि मधुबन वाले नियरेस्ट हैं, तो नियरेस्ट वाले डियरेस्ट भी होते हैं। मधुबन वाले डियरेस्ट हो ना। नियरेस्ट और डियरेस्ट भी हो। ऐसे नहीं, आप नहीं हो। आप भी डियरेस्ट हो लेकिन यह नियरेस्ट रहते हैं। तो रहने का लाभ है तो करने का भी तो लाभ लेंगे ना। अच्छा। टीचर्स हाथ उठाओ। बहुत टीचर्स हैं। टीचर्स को तो बापदादा गुरूभाई कहते हैं। तो गुरूभाई क्या करेंगे? फॉलो। अच्छा।

आज बर्थ डे की चारों ओर से आये हुए, चाहे कार्ड भेजे हैं, चाहे कम्प्युटर द्वारा, ईमेल द्वारा भेजा है, जिन्होंने भी बर्थ डे की मुबारक भेजी है, उन सभी एक-एक बच्चे को नाम सहित, कोई अपना नाम नहीं भूलना, सबका नाम बापदादा के दिल पर है। तो हर एक अपना रेसपान्ड बहुत बहुत बड़ी दिल से स्वीकार करना। सौगातें भी छोटीमोटी भेजी हैं, कईयों ने तो 70-70 चीज़ें भेजी हैं, खुली दिल से मनाया है। उन सभी को 70 बार तो क्या, 70 पदमगुणा बार मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो। बापदादा के दिल की दुआयें अनेक बार की, अनगिनत बार की स्वीकार हो। अच्छा। अभी क्या करना है?

सेवा का टर्न यू.पी. जोन का है, साथ में बनारस क्षेत्र का नेपाल भी है:- सभी फायदा अच्छा उठाते हैं। जोन को टर्न मिलता है ना तो खुली दिल से सेवा के लिए आ जाते हैं और बापदादा भी खुश होते हैं कि सभी को टाइम टू टाइम गोल्डन चांस मिलता है। तो सेवा में बहुत मजा आया? कमाई जमा की? कितने जन्मों के लिए कमाई जमा की? 21 जन्मों की कमाई जमा की। अच्छा चांस लेते हो। यू.पी. आदि सेन्टरों में एक है। जब सेवाकेन्द्र खुले हैं, तो चुने हुए नामग्रामी सेन्टरों में यू.पी. का सेन्टर था। एक जोन बन गया। एक सेन्टर से जोन बन गया। अभी यू.पी. क्या कमाल करेगी? यू.पी. में साधू सन्त महात्मायें बहुत हैं, एक तरफ यात्रू हैं, एक तरफ महात्मायें हैं, एक महात्माओं का झुण्ड, ग्रुप जैसे कुछ समय पहले हरिद्वार का ग्रुप आया था, चाहे थोड़े थे, लेकिन महामण्डलेश्वर थे ऐसे पूरी यू.पी. बनारस ऐसा ग्रुप बनाओ जो वह ग्रुप मधुबन तक पहुंच जाये। (सबसे पहले बनारस से ही ग्रुप पहुँचा था) थोड़े आये ना, अभी ग्रुप बनाके लाओ। सारे यू.पी. के इकट्ठे करके अच्छा ग्रुप बनाकरके लाओ जो उन्हों का स्नेह मिलन चले। यह तो हो सकता है ना! तो कब तक लायेंगे? क्योंकि समय पर तो कोई भरोसा नहीं। अभी तो एक ही समय पर तीन प्रकार की सेवा करनी है। मन्सा भी, वाणी भी और सम्बन्ध-सम्पर्क द्वारा अर्थात् चेहरे द्वारा भी। ऐसी फास्ट सेवा करेंगे तब विश्व आपके गुण गायेगा। तो सुना यू.पी. वालों को क्या करना है? पाण्डव सुन रहे हैं? हाथ उठाओ पाण्डव बहुत हैं। तो करो कोई कमाल। कमाल करके दिखाना। बाकी अच्छा, वृद्धि हो रही है और आगे भी वृद्धि होती रहेगी। अच्छा - सभी को सन्तुष्ट करने का पुण्य जमा कर लिया। सन्तुष्टता द्वारा बहुत पुण्य जमा होता है। तो सन्तुष्ट रहे, सन्तुष्ट किया, सेवा दी और पुण्य जमा किया। तो सब खुश। फास्ट पुरूषार्थ है ना, स्लो नहीं, फास्ट। अच्छा। बापदादा को पसन्द आया। इतने संगठन में आये और सन्तुष्ट किया उसकी मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो।

डबल विदेशी 1500 आये हैं, 100 देशों से:- कमाल है डबल विदेशियों की। देखो जब विदेश में स्थापना हुई तो कहते थे जिज्ञासु 5 ही आते हैं, ज्यादा नहीं आते। अभी कितने फैल गये हो। टोटल विदेश में कितने सेवाकेन्द्र हैं? (500) अभी तो यह सोचते नहीं ना, जिज्ञासु कैसे बनें, वी.आई.पी. कैसे आवें, अब तो नजर घुमाते हो तो वी.आई.पी. आ जाते हैं। अभी वी.आई.पी. क्या हैं, सम्बन्ध में लाओ और वी.आई.पी. आ जाते हैं क्योंकि आप वी.वी.वी.आई.पी. हो गये ना तो वह वी.आई.पी. कुछ भी नहीं हैं। बापदादा को खुशी है कि भिन्न-भिन्न देश रूपी वृक्ष की डालियां एक चन्दन का वृक्ष बन गये। अभी 500 कलचर है क्या! एक है ना! एक ही ब्राह्मण कलचर हो गया। परिवार को देखकर कितनी खुशी होती है। इतने विदेश से एक समय आयेंगे, यह संकल्प पूरा हो गया है। बापदादा सेवा से खुश हैं। मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो। और बापदादा ने सुना कि बहुत बड़ा प्रोग्राम बना रहे हैं। टॉपिक भी बापदादा को पसन्द है और जो आपस में मीटिंग्स की है, उसका भी सार बापदादा ने सुना है। अच्छी हिम्मत रख रहे हैं, और जहाँ हिम्मत है वहाँ सफलता तो है ही है। प्लैन बहुत अच्छे-अच्छे बनाये हैं और यह भी अच्छा करते हैं देखो सभा के बीच में सज रही हैं ना कुमारियाँ। (कुमारियों ने ताज पहना हुआ है) ऐसे हो जाओ तो सभी देखें। हाँ सभी देखो, देखो कितने अच्छे लगते हैं। इस ग्रुप की सेवा भी अच्छी होती है। लेकिन कुमारियाँ ताजधारी तो अच्छी लग रही हो, अभी ऐसी कमाल करके दिखाओ जो इन्डिया में कुमारियों का झुण्ड फॉरेन वाला, कुछ प्रत्यक्षता करके दिखाये क्योंकि फॉरेन की कुमारियाँ या कुमार यूथ हो गये ना, तो फॉरेन के भी इतनी कुमारियाँऔर कुमार परिवर्तन हुए हैं, इनका भी ऐसा फाइल बनाओ जो यहाँ के वी.आई.पी को दिखायें। जैसे यहाँ बनाया है ना यूथ का। यहाँ अच्छा बनाया है, वह देखना। उससे भी बढ़िया बनाना। लेकिन बनाया अच्छा है। स्पष्ट हो जाता है। प्रैक्टिकल परिवर्तन जो बदले नहीं, आज परिवर्तन का अनुभव फाइल में वी.आई.पी को दिखावें और कल वह बदल जाये, ऐसे नहीं करना। पक्के। निश्चयबुद्धि विजयी, ऐसा ग्रुप बनाना। और फाइल बनाना। बहुत सेवा करेगा। क्योंकि बापदादा का, ब्रह्मा बाप का आदि से यह संकल्प रहा है कि विदेश वाले देश को जगायेंगे। तो कमाल करेंगे। बाकी बापदादा सेवा से खुश हैं और भी बढ़ाओ। जैसे यहाँ लंका वाले बना रहे हैं। ऐसे अपने आस पास की एरिया में भी कल्याण करते जाओ। बापदादा जो निमित्त बने हैं, लंकावाले, उन्हों को भी मुबारक दे रहे हैं। अच्छी सेवा का प्लैन बना रहे हैं और आगे बढ़ रहे हैं। उसके लिए ताली बजाओ। अच्छा - बढ़ रहे हैं और सदा बढ़ते रहेंगे। अच्छा।

जो पहले बारी आये हैं, चाहे भारत वाले चाहे विदेश वाले वह उठो। बहुत अच्छा, अपने घर में आये हो, उमंग-उत्साह से आज का उत्साह मनाने आये हो, मना रहे हो। तो सभी बच्चों को, एक-एक को बहुत-बहुत मुबारक हो, मुबारक हो। सभी यही लक्ष्य रखो कि भले आये लास्ट हैं, लेकिन जाना फास्ट और फर्स्ट है, ऐसी कमाल करके दिखाओ। अच्छा है। यह ग्रुप भी अच्छा आया है। (जापान से कुछ नये वी.आई.पी. आये हैं) फॉरेन सेवा में पहला-पहला यहाँ ही शुरू हुआ है - जापान वाले लकी हो। पहले-पहले ब्राह्मण परिवार जापान में ही आये हैं। दादी को याद है ना। तो जापान सेवा का आदि स्थान रहा। कितना लक है। आपको सभी मिलके मुबारव दे रहे हैं। बहुत अच्छा बैठ जाओ। अच्छा अभी क्या करेंगे?

अभी बापदादा सभी को चाहे यहाँ सम्मुख बैठे हैं, चाहे देश विदेश में दूर बैठे सुन रहे हैं या देख रहे हैं, सभी बच्चों को ड्रिल कराते हैं। सभी रेडी हो गये। सब संकल्प मर्ज कर दो, अभी एक सेकण्ड में मन बुद्धि द्वारा अपने स्वीट होम में पहुँच जाओ। अभी परमधाम से अपने सूक्ष्मवतन में पहुंच जाओ। अभी सूक्ष्मवतन से स्थूल साकार वतन अपने राज्य स्वर्ग में पहुंच जाओ। अभी अपने पुरूषोत्तम संगमयुग में पहुंच जाओ। अभी मधुबन में आ जाओ। ऐसे ही बार-बार स्वदर्शन चक्रधारी बन चक्र लगाते रहो। अच्छा।

चारों ओर के लवली और लकी बच्चों को, सदा स्वराज्य द्वारा स्व-परिवर्तन करने वाले राजा बच्चों को, सदा दृढ़ता द्वारा सफलता प्राप्त करने वाले सफलता के सितारों को, सदा खुश रहने वाले खुशनसीब बच्चों को, बापदादा का आज के जन्म दिन की बाप और बच्चों के बर्थ डे की बहुत-बहुत बारकी, दुआयें और यादप्यार, ऐसे श्रेष्ठ बच्चों को नमस्ते।

दादियों से:- जन्म दिन की मुबारक। (आपको सबकी मुबारक) दादियों को देखकर सब खुश हो जाते हैं। क्यों दादियाँ प्यारी लगती हैं? क्योंकि आप सबको प्यार से सहयोग देके आगे बढ़ा रही हैं। दादियों की दिल में यही संकल्प रहता कि हर एक बाप का बच्चा बाप के आगे बहुत ऊँचे ते ऊँचे दिखाई दे। एक दो के संगठन का सहयोग मिलता है। सहयोग भी योग ही है। जब आपको दादियाँ उमंग-उत्साह बढ़ाती हैं तो आपको कौन याद आ जाता है? बाबा। तो योग हुआ ना। क्योंकि बाप की याद आ जाती है ना। तो कितनी आत्माओं की दुआयें मिलती हैं आप सबको। 21 जन्म की दुआयें इकट्ठी हो गई हैं। हो गई हैं ना? 63 जन्म फिर दुआयें देनी पड़ेंगी। किससे दुआ माँगेंगे? आपसे ही तो माँगेंगे। बस ड्रामा को देखो, बाप को देखो और सदा वाह बाबा ! वाह ड्रामा करते चलो! ठीक हैं सभी? पुराने शरीरों को चला रहे हैं। पुराने शरीर बहुत वैल्युबुल हैं। तो सभी देखो दादियाँ, सभी पुराने शरीरों को चला रही हैं। आप लोगों को भी इन्हों को देखकर हिम्मत तो आती है कि हम भी चलें। अच्छा।

बापदादा ने अपने हस्तों से झण्डा फहराया तथा सभी बच्चों को 70 वीं त्रिमूर्ति शिव जयन्ती की बधाईयाँ दी। यह जो झण्डा लहराया, यह तो लोगों की सेवा के लिए लहराया लेकिन आपके दिल में बाप के प्रत्यक्षता का झण्डा लहर रहा है। जो सदा ही लहराता रहता है। आपके दिल में जो प्रभु प्यार का झण्डा लहर रहा है, वह सारे विश्व में आपके दिल का वायुमण्डल फैल रहा है। और ऐसा दिन आना ही है जो आपके दिल के प्यार का वायुमण्डल सबको चुम्बक का काम करेगा और सभी अपने मुख से कहेंगे, आ गया, आ गया, हमारा बाबा आ गया। अभी तो यह झण्डा लहरा रहा है, अभी जल्दी प्रत्यक्षता का झण्डा लहरायेंगे। क्योंकि बाप के ऊपर हक तो सभी बच्चों का लगता है और बाप को कुछ न कुछ प्राप्ति करानी भी है तो आपको जीवनमुक्ति, उन्हों को मुक्ति, वह मुक्ति में ही खुश हैं आप जीवनमुक्ति में खुश हैं। आप डबल हैं, जीवन भी है मुक्ति भी है उन्हों को सिर्फ मुक्ति है। तो ऐसे दिल में बाप के प्यार का झण्डा फहराने वाले चारों ओर के बच्चों को मुबारक हो, मुबारक हो।