31-03-10   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


पूर्वज और पूज्य के स्वमान में रह मन्सा द्वारा सर्व की पालना करो, पूरे वृक्ष को सकाश दो

आज बापदादा अपने चारों ओर के पूर्वज और पूज्य आत्माओं को देख रहे हैं। पूर्वज आत्मायें अपने को समझते हो ना। पूज्य आत्माओं का निवास कहाँ हैं? अपने झाड़ को सामने लाओ उसमें देखो, आपका स्थान कहाँ है? जानते हो कि आप पूर्वजों का स्थान जड़ में है। झाड़ के जड़ में भी है, तना में भी है। तो जड़ के द्वारा ही सारे वृक्ष को पालना मिलती है। तो आप इस सारे वृक्ष के टाल टालियां वा पत्तों की पालना करने वाले, सकाश देने वाले पूर्वज हो। पूर्वज के साथ पूज्य भी हो। तना द्वारा लास्ट पत्ते को भी सकाश मिलती है। तो अपने को सारे वृक्ष को सकाश देने वाले अनुभव करते हो? नशा रहता है कि हम पूर्वज सर्व आत्माओं रूपी टाल टालियां या पत्तों को सकाश दे रहे हैं! जैसे ब्रह्मा बाप को ग्रेट ग्रेट ग्रैण्ड फादर कहते हैं तो उनके आप बच्चे साथी भी मास्टर ग्रेट ग्रेट ग्रैण्ड फादर हो। सारे वृक्ष के आत्माओं की आप पूर्वज आत्माओं की तरफ आकर्षण है। आप पूर्वज आत्मायें उन्हों की पालना शक्तियों द्वारा करते। जैसे आप सभी पूर्वज आत्माओं की पालना बाप ने की तो बाप ने कैसे की? शक्तियों द्वारा। वैसे आप भी पूर्वज के नाते से शक्तियों द्वारा उन्हों की पालना करने वाले हो। आजकल देखते हो कि सभी आत्मायें दु:खी हैं, पुकार रही हैं, अपने-अपने देवी देवताओं को, आओ हमारी रक्षा करो। हमें शान्ति दो, हमें शक्ति दो। ओ क्षमा के सागर पूर्वज हमें पालना दो। तो यह आवाज आप पूर्वज आत्माओं के कानों में सुनाई दे रहा है? अनुभव करते हो कि हम ही पूर्वज हैं? सारे वृक्ष में देखो जो भी अन्य धर्म वाली आत्मायें भी हैं तो वृक्ष में टाल टालियां होने के कारण वह भी आपको उसी नजर से देखते हैं। उन्हों के भी पूर्वज आप ही हो। कोई भी धर्म वाली आत्माओं से आप जब मिलते हो तो यह समझते हो कि यह भी हमारे ही वृक्ष की टाल टालियां हैं! वह भी जब आपसे मिलते हैं तो समझते हैं कि यह अपने हैं! अपनेपन का अनुभव उन आत्माओं को भी हो रहा है और होना है। तो इतना नशा, इतना अन्दर से आप लोगों के पास रहम आता है? वह चिल्ला रहे हैं रहम करो तो अभी समय अनुसार आप सभी पूर्वज आत्माओं को मन्सा द्वारा शक्तियों की पालना करनी है। उन्हों को आवश्यकता है। तो जितना आप अपने पूर्वज के नशे में रहेंगे उतना ही आप द्वारा उन्हों की पालना होगी। वैसे भी देखो किसी की भी पालना लौकिक में भी बड़ों से होती है। वही उन्हों के शरीर के खाने पीने, पढ़ाई जो सोर्स आफ इनकम है, उनका प्रबन्ध करते हैं। तो जैसे बाप ने आप सभी बच्चों की भिन्न-भिन्न शक्तियों से पालना की है वैसे अभी आपका कार्य है सारे वृक्ष के टाल टालियों और पत्तों की पालना करना। ऐसा उमंग आप पूर्वज आत्माओं को आता है? नशा है पूज्य भी हो। देखो, सारे ड्रामा में जितनी आप आत्माओं की कायदे प्रमाण पूजा होती है उतनी पूजा कोई भी महात्मा, धर्म पिता की नहीं होती। आपकी पूजा नियम प्रमाण आरती होना, भोग लगना, ऐसी किसकी भी नहीं होती। गायन देखो आपका कायदे प्रमाण कीर्तन होता है। किसी का भी ऐसे गायन नहीं होता। तो आप पूर्वज के साथ पूज्य भी हो। ड्रामा में आप जैसा पूजन और गायन किसी का भी नहीं है।

तो बापदादा ऐसी आप पूज्य और पूर्वज आत्माओं को देख कितना खुश होते हैं! बाप के दिल से बार-बार यह गीत बजता वाह मेरे सर्व वृक्ष के पूर्वज और पूज्य आत्मायें वाह! तो आजकल बापदादा आप सभी बच्चों को जो आपका स्वमान है, बाप समान सम्पन्न सम्पूर्ण बनने का, वही रूप देखने चाहते हैं। उसके लिए एक बात बच्चों को ध्यान में रखनी है, बापदादा ने देखा कि सभी बच्चे पुरूषार्थ बहुत अच्छा भी करते हैं लेकिन सदा शब्द हर एक को अपने पुरूषार्थ में एड करना है। अटेन्शन देना है। बापदादा बच्चों से पूछते हैं कि जैसे बापदादा आप सभी बच्चों को श्रेष्ठ स्वमानधारी आत्मा के रूप से देखते हैं वैसे आप अपने को भी ऐसे स्वमानधारी समझते हो? तो बापदादा ने देखा जवाब में क्या कहते? रहते तो हैं, लक्ष्य तो यही है, हाथ भी उठाते हैं, फिर धीरे से कहते कभी-कभी हो जाता है। तो बापदादा अभी कभी-कभी शब्द को समाप्त करने चाहते हैं क्योंकि समय समाप्त होने के समीप आ रहा है। और लाने वाले कौन? बच्चे बाप से पूछते हैं बाबा आप टाइम बता दो, 20 वर्ष हैं, 16 वर्ष हैं, 10 वर्ष है, कितना है? और बाप फिर बच्चों से प्रश्न पूछते हैं कि समय को समीप लाने वाले कौन हैं? अकेला बाप लायेगा? बाप ने स्थापना की, अकेला किया? यज्ञ रचा बिना ब्राह्मणों के यज्ञ रचा? बाप बच्चों के साथ है। बच्चे भी कहते हैं बाबा हम अभी भी आपके साथ हैं, चलेंगे भी आपके साथ। तो बाप बच्चों से पूछते हैं कि समय को समीप लाने वाले बच्चे आप ही डेट फिक्स करो। किसको डेट फिक्स करनी है? बाप को या बाप के साथ आप और बाप दोनों को?

तो आज इस वर्ष के मिलन का लास्ट है। तो बापदादा ने देखा कि बच्चे भी चाहते हैं कि हम भी अभी अपने राज्य में चले। अब घर जाना है यह भी गीत गाते रहते हैं, मन में। अब घर जाना है, अब रिटर्न जरनी करनी है। इसके लिए बापदादा ने पहले ही कहा कि सारा समय अपने को कोई न कोई सेवा में बिजी रखो। बापदादा ने देखा है सेवा की रूचि, सेवा का उमंग-उत्साह अभी भी बच्चों में है। अच्छी सेवा के समाचार भी बापदादा सुनते हैं। लेकिन बापदादा तीव्रगति में आगे बढ़ने के लिए बच्चों को विशेष अटेन्शन दिलाते हैं कि सिर्फ एक वाचा की सेवा नहीं, सेवा करते हो तो एक ही समय पर तीन सेवायें इकट्ठीकरो - मनसा द्वारा सकाश दो, वाचा द्वारा ज्ञान दो और कर्मणा अर्थात् अपने सम्पर्क द्वारा, सम्बन्ध द्वारा, चेहरे द्वारा ऐसी सेवा करो जो उसका भी प्रभाव साथ-साथ सेवा में हो। एक समय में तीन सेवा इकट्ठीकरो क्योंकि अभी आत्मायें सेवा के लिए चाहती हैं, कुछ फर्क हो। कुछ बदलना चाहिए। तो एक समय पर तीनों सेवा कर सकते हो? कर सकते हो? चेक करते हो कि जिस समय वाणी की सर्विस करते उस समय मन्सा द्वारा और कर्मणा अर्थात् सम्पर्क-सम्बन्ध द्वारा भी सेवा हो रही है! होती है साथ-साथ? जो समझते हैं कि हम एक ही समय में तीन सेवा करते हैं, वह हाथ उठाओ। करते हैं, तीनों सेवा? अच्छा, पहली लाइन कम उठा रही है क्यों? क्यों? पहली लाइन सोच रही है? यह मधुबन वाले करते हैं? मधुबन वाले हाथ उठाओ, करते हैं तो हाथ उठाओ। एक ही समय तीन सेवा। तो अभी अटेन्शन प्लीज। कभी कभी नहीं। क्या होता है? सेवा तो करते हैं लेकिन सेवा में साथ-साथ अपने में और साथियों में सन्तुष्टता क्योंकि सेवा का फल है सन्तुष्टता वा खुशी। तो चेक करो सेवा तो की लेकिन पहले भी सुनाया कि सेवा की खुशी तब होती है जब स्वयं साथी और वायुमण्डल जब सभी सन्तुष्टता के वायब्रेशन में हो। सेवा के सफलता की तीन बातें विशेष सुनाई थी, याद होगी। पहला नम्बर सेवा अर्थात् निमित्त भाव। दूसरा - निर्माण भावना। तीसरा - निर्मल वाणी। भाव, भावना और स्वभाव। यह सभी साथ-साथ सेवा में है तो स्वयं भी सन्तुष्ट और साथी भी सन्तुष्ट और जिन्हों की सेवा की वह भी आगे बढ़ते जायें। निमित्त भाव वाले बाप के तरफ सम्बन्ध जोड़ेंगे। अगर निमित्त भाव नहीं तो बाप के नजदीक इतने नहीं आयेंगे। तो जब भी सेवा करते हो तो यह चेक करो कि भाव, भावना और स्वभाव ठीक रहा? और आजकल बापदादा ने देखा कि जो मूल बात है, बापदादा की। हर एक को और अपने को चाहे कहाँ भी सेवा के लिए जाते हो, तो यह चेक करो कि साथी सन्तुष्ट रहे? क्योंकि सेवा की सफलता है सन्तुष्टता का फल प्राप्त हो। खुशी प्राप्त हो। साथ-साथ एक बात बापदादा इशारा देते हैं कि चलते फिरते, संगठन में भी रहते हो, कोई न कोई साथ में सेवा में होता ही है, तो एक दो को आत्मा के रूप में देखो। आत्मा के रूप में देखते भी हैं, अभ्यास भी करते हैं, लेकिन जब आत्मा देखते हो तो आत्मा के ओरीज्नल संस्कार से देखते हो? या जो मिक्स संस्कार हैं, वह भी दिखाई देते हैं? आत्मा देखो इसमें पास हो, लेकिन किस संस्कार से देखते हो? क्या आत्मा के ओरीज्नल संस्कार से कनेक्शन में आते हो? या वर्तमान संस्कार भी आते हैं सामने?तो बाप कहते हैं कि आज से किसी को भी एक तो आत्मा रूप में देखो लेकिन आत्मा के जो ओरीज्नल संस्कार हैं उस रूप में देखो। तो कभी भी आपस में जो कभी कभी बातें हो जाती हैं, वह नहीं होंगी। अभी आत्मा रूप में देखते हो लेकिन जो साथ में वह भी आ जाता है, वर्तमान संस्कार। तो आपस में जो सम्पूर्ण स्थिति होनी चाहिए, उसमें दूरी पड़ जाती है। तो ओरीज्नल संस्कार वाली आत्मा देखो। तो यह जो अभी संगठन में रूकावट आती है वह रूकावट खत्म हो जायेगी।

यह ब्राह्मण परिवार श्रेष्ठ परिवार है। परिवार की बहुत महिमा है। यह ईश्वरीय परिवार बार-बार नहीं मिलता। कल्प में एक ही बार यह ईश्वरीय परिवार मिला है, इतना बड़ा परिवार सारे कल्प में कभी नहीं मिलता। परिवार की भी विशेषता को जानना और परिवार में चलना, एक महान सबजेक्ट है। पहले भी सुनाया था कि इस ज्ञान का फाउण्डेशन है निश्चय और निश्चय में चार बातें हैं। बाप, दादा साथ में है ही और नॉलेज में, ड्रामा में, परिवार में सभी में निश्चय है। तो निश्चय बुद्धि हो, सहज पुरूषार्थी बन जाते हो। जैसे बापदादा में निश्चय है ऐसे परिवार में भी निश्चय आवश्यक है। जैसे देखो जब आप कोई भी बात की पैंकिग करते हो तो क्या करते हो? चार ही तरफ टाइट करते हो ना, एक तरफ भी अगर टाइट नहीं किया तो हलचल होती है। ऐसे ही बाप, नॉलेज, नॉलेज में भी विशेष ड्रामा और परिवार। अगर चार ही बातें मजबूत नहीं हैं तो विघ्न आते हैं। विघ्नों को पार करने में अटेन्शन देना पड़ता है। इसलिए परिवार की पहचान, परिवार से प्यार, एक दो को समझना, यह बहुत आवश्यक है।

तो पूर्वज हो, पूज्य हो, तो यह बातें भी अपने में या साथियों में लानी है। क्या भी हो, नम्बरवार तो हैं ना! लेकिन ब्राह्मण परिवार का विशेष कार्य है दुआ देना, दुआ लेना। कई बच्चे कहते हैं कि दूसरा क्रोध करता है, अभी दुआ लेगा कैसे! दुआ तो लेगा नहीं, क्रोध करेगा। बापदादा कहते हैं अच्छा संस्कार वश वह बददुआ देता है, आप दुआ देने चाहते हो लेकिन वह बददुआ देता है, लेकिन बददुआ दी लेने वाला कौन? लेने वाले आप हो या वह है? वह देने वाला है आप लेने वाले हैं। तो उसकी बददुआ आपने ली क्यों? अगर आत्मा को ओरीज्नल संस्कार से देखो तो आपको रहम आयेगा। स्वयं भी सेफ रहो, बददुआ लो नहीं, लेने वाले आप हो। न दो न लो।

तो अभी बापदादा आज का या जब तक फिर आना हो तब तक का होमवर्क देते हैं कि कभी भी किसी को आत्मा रूप में देखो तो वर्तमान संस्कार के रूप में नहीं देखो। आत्मा कहा तो आत्मा को निजी संस्कार आत्मा के जो हैं उस निजी संस्कार के रूप में, सम्बन्ध में भी आओ और दृष्टि में भी उसी दृष्टि में देखो तो यह जो विघ्न पड़ते हैं जिसके कारण पुरूषार्थ में तीव्रता नहीं आती है, तो अभी वृत्ति बदलेंगे, दृष्टि बदलेंगे तो बातें समाप्त हो जायेंगी। किसी की क्या भी बातें देखते हो, बापदादा ने पहले भी कहा है तो सदा आप ब्राह्मण परिवार का एक एक का फर्ज है शुभ भावना, शुभ कामना देना और शुभ भावना, शुभ कामना लेना। उस संस्कार से देखो और चलो। एक और भी बात बताते हैं - पहले भी बताया है तो कहाँ कहाँ संगठन में कभी कभी परदर्शन, पराचिंतन और परमत के तरफ आकर्षित हो जाते हैं। अभी इन तीन पर को काट दो, एक पर रखो वह एक पर है पर उपकार। पर उपकार करना है, पर उपकारी हैं, ब्राह्मण का स्वभाव है पर उपकारी। परदर्शन नहीं, यह पर काट दो। यह तीनों बहुत नुकसान देते हैं। इसीलिए अपना स्वमान सदा यही याद रखो कि मुझ ब्राह्मण आत्मा का स्वमान ही है पर उपकारी। तो दूसरी सीजन में बापदादा हर एक बच्चे में यह परिवर्तन देखने चाहते हैं। हो सकता है? हो सकता है? हाथ उठाओ। हाथ उठाने में तो ठीक। तो क्या करना? अच्छा है बापदादा मुबारक देते हैं, एक दो को अटेन्शन दिलाते रहना। क्या करना? रोज़ रात को सोने के पहले बापदादा को गुडनाइट करने के पहले अपने सारे दिन का पोतामेल देना। अच्छा किया या बुरा किया?जो भी किया वह पोतामेल देके और अपने बुद्धि को खाली करके गुडनाइट करना। बाप से भी और बाप की याद में ही आप भी सो जाना। आपकी नींद बहुत अच्छी होगी। पहले खाली करना अपने को, बुद्धि में कोई बात नहीं रखना, बाप के रूप में सारा पोतामेल सच्ची दिल का दे दिया तो आपको धर्मराजपुरी में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। सच्ची दिल पर साहेब राजी हो जायेगा। तो होम वर्क मिला - एक तो अपने पूर्वज और पूज्य स्वरूप की सेवा चलते फिरते कर सकते हो। बाप ने देखा यह जनक बच्ची ने तबियत खराब होते, कराची की सेवा में विशेष मन्सा सकाश दी चाहे निमित्त कोई भी है लेकिन इसने प्रैक्टिकल में किया। वहाँ की आत्माओं को सकाश मिली। और आगे-आगे उमंग में बढ़ रहे हैं। तो ऐसे बापदादा ने प्रैक्टिकल एक्जैम्पुल देखा तो आप सभी भी कर सकते हो। दु:खी को खुशी की लहर पहुंचा सकते हो। चिल्लाने वाले को, आपके ही भक्त आपको ही पुकार रहे हैं हमारी देवी हमारा देवता कब आके रहम करेंगे। आपको सुनाई नहीं देता लेकिन बाप को बहुत सुनाई देता है। हर एक ईष्ट को, आप नहीं जानते हो कि हमारे भक्त कौन से हैं लेकिन भक्त तो जानते हैं ना। वह तो पुकारते हैं और आप हर ब्राह्मण आत्मा के भक्त हैं। चाहे ढीले हों चाहे होशियार हो, भक्त आपके भी हैं। क्योंकि जड़ में बैठे हो ना तो आपका सकाश का पार्ट है। तो अभी मन्सा सेवा को बढ़ाओ। और जितना बिजी रहेंगे ना उतना निर्विघ्न रहेंगे। कर सकते हो ना! मन्सा सेवा करना जानते हो ना! जानते हो? हाथ उठाओ जानते हो। अच्छा हाथ नीचे करो। जानते हो, अच्छा जो करते रहते हैं बीच-बीच में, वह हाथ उठाओ। करते रहते हैं, अच्छा। अच्छा नियम पूर्वक करते हैं या कभी कभी? अगर कभी कभी करते हैं तो उसको रेग्युलर करो और अगर थोड़ी करते हैं उसको और बढ़ाओ। क्योंकि सारे कल्प का आधार अभी की सेवा का फल है। चाहे पुजारी बनेंगे चाहे राज्य अधिकारी बनेंगे दोनों का आधार अभी की सेवा, अभी की अवस्था, अभी का बोल, अभी का सम्बन्ध सम्पर्क है। इसलिए बापदादा यही चाहते हैं कि अगले बारी जब आयें, पहले बारी। आप सोच रहे होंगे बाप ने तो कह दिया कब तक चलेगा? इसका मतलब यह है कि आप एवररेडी रहो। इसीलिए पहले बारी सबका रिजल्ट लेंगे। जितनी परसेन्ट अभी है, उससे बढ़नी चाहिए। वैसे तो बापदादा पहले से ही कहते हैं करना है तो अभी करो। कभी नहीं। बापदादा को कभी के गीत बहुत सुनाते हैं। बहुत अच्छे अच्छे करके सुनाते हैं लेकिन बापदादा को कभी के गीत अच्छे नहीं लगते। अभी अभी के गीत अच्छे लगते। तुरत दान महापुण्य। तो समझा अगले वर्ष के लिए क्या करना है? अच्छा।

सेवा का टर्न महाराष्ट्र ज़ोन का है:- अच्छा यह सीन सभी को दिखाओ। अभी देखो महाराष्ट्र का पौना क्लास है। पुराने हैं या नये हैं लेकिन महाराष्ट्र के हैं। अच्छा जो खड़े हुए हैं उसमें जो रेग्युलर स्टूडेन्ट हैं, सेवा करने वाले हैं, सेन्टर सम्भालने वाले हैं वह बैठ जाओ। तो भी देखो नये भी कितने हैं। अच्छा जो नये हैं वह उठो और सभी बैठ जाओ। अच्छा। नयों की भी संख्या तो काफी है, बापदादा खुश होते हैं कि टूलेट के पहले आ गये हो। इसीलिए आप सभी आने वालों को मुबारक है। आने वालों को बापदादा यही वरदान देते हैं कि थोड़े समय में फास्ट पुरूषार्थ तीव्र पुरूषार्थ कर आगे बढ़ सकते हो। अगर हर समय अटेन्शन रखेंगे, परिवर्तन करने का और सारे दिन में अपने पढ़ाई और प्राप्ति इकट्ठीकरते रहेंगे तो आप भी आगे बढ़ सकते हो। चांस है। अभी टूलेट नहीं है, लेट है इसीलिए आप जितना हो सके उतना अपने चार ही सबजेक्ट में, पढ़ाई में अटेन्शन देते रहना। बाप भी देखते रहते हैं कौन-कौन लास्ट वाला भी फास्ट जाता है। ऐसे नहीं है कि नहीं जाते हैं, जाते हैं। तो बाप की तो एक एक बच्चे में यही आशा है कि हर एक बच्चा आगे से आगे जाये और अपना स्वराज्य और बापदादा के दिल का तख्त ले। अच्छा।

महाराष्ट्र नाम ही महा है। पहले महा आता है ना! तो महान आत्मायें तो हो और महान आत्माओं में महान उमंग-उत्साह तीव्र पुरूषार्थ सदा बाप की आशाओं को प्रैक्टिकल में लाने का लक्ष्य और लक्षण भी है। दोनों है ना! लक्ष्य भी है और लक्षण भी है। समान है या फर्क है? जितना बड़ा लक्ष्य है उतना ही लक्षण की भी स्पीड है वा फर्क है?जो समझते हैं कि लक्ष्य ऊंचा है और लक्षण के तरफ भी अटेन्शन इतना ही है, वह हाथ उठाओ। लक्ष्य और लक्षण हैं? वह थोड़ों ने उठाया है। अभी महाराष्ट्र की एक एक आत्मा अमृतवेले बापदादा से मिलन मनाने के बाद यह अटेन्शन देना कि आज के दिन लक्ष्य और लक्षण एक करना है। यह कर सकते हो ना! और रात को बापदादा को समाचार देना कि आज के दिन लक्ष्य और लक्षण समान रहा या फर्क रहा! और दूसरे दिन खास अटेन्शन रखके जो कमी हुई ना उसको भरना। तीसरे दिन उस कमी को सदा के लिए समाप्त करना। ऐसे आगे आगे बढ़ते रहना। तो महाराष्ट्र नम्बरवन हो जायेगा ना! सबमें। चार ही सबजेक्ट में। ज्ञान, योग, धारणा.. धारणा को पहला नम्बर रखना। धारणा में नम्बरवन हो सकता है! हो सकता है? टीचर्स हो सकता है? हाथ उठाओ। करना पड़ेगा, ऐसे नहीं। जो करेंगे वह हाथ उठाओ। अच्छा है। जितनी संख्या है और टीचर्स ने हाथ उठाया है तो बापदादा वरदान देता है कि बाप भी एकस्ट्रा मदद देंगे क्योंकि महाराष्ट्र है। कमाल करके दिखाना। बाबा कहेंगे और एकस्ट्रा ताकत अनुभव करेंगे। दिल से कहना बाबा तो एकस्ट्रा मदद अनुभव होगी। बापदादा का अटेन्शन रहेगा। अच्छा है। आप करेंगे ना प्रैक्टिकल तो सबको उमंग आयेगा। कोई भी बात आवे ना, आप नहीं कर सकते हो, हिम्मत थोड़ी कम है तो एकस्ट्रा बाप को जो अपना हिम्मत कम करने वाला काम है, उसे बाबा को सुपुर्द कर दो, बाबा मैं यह नहीं कर सकती हूँ। आप ले लो। मैं यह संकल्प में भी नहीं लाऊंगी। बिल्कुल उस संकल्प को आने नहीं देना। दे दो। वापस आवे तो दिल में नहीं रखना। फिर वापस कर देना। बापदादा चाहता है कि मेरा एक एक बच्चा जो सोचे वह करके दिखावे। सोचते तो सभी अच्छा हैं, तो करना!। पाण्डव भी करेंगे ना! करेंगे? पाण्डव हाथ उठाओ करेंगे? अच्छा। फिर बापदादा बहुत एक अच्छी बात सुनायेगा, करने के बाद। अच्छा। बाकी सेवा तो अच्छी कर रहे हैं। आपने क्या सर्टीफिकेट दिया। अच्छी हो रही है सेवा।

डबल विदेशी :- डबल विदेशियों को बापदादा एक बात की बहुत-बहुत मुबारक देते हैं। कौन सी बात की? डबल विदेशियों में एक विशेषता देखी जो पहले अपना कल्चर बदलना मुश्किल लगता था, इन्डियन कल्चर मुश्किल लगता था लेकिन अभी यह प्रॉबलम मैजारिटी समाप्त है। अभी कई आत्माओं में जो है विदेशी लेकिन पुरूषार्थ में अच्छे हैं, उन्हों को ऐसी महसूसता आती है कि हम तो थे ही बाबा के, सेवा के लिए सिर्फ विदेश में यह जन्म लिया है। यह देखकर बापदादा को इस चेंज की खुशी है। आप में से जो समझते हैं हम तो हैं ही यहाँ के, सिर्फ सेवा के लिए यह जन्म लिया है चारों ओर सेवा के लिए। वह हाथ उठाओ। यहाँ के ही थे और यहाँ के ही रहेंगे क्योंकि वायदा है, ब्रह्मा बाबा के साथ अभी भी बापदादा के साथ जायेंगे, पक्का। साथ जायेंगे, कांध हिलाओ। और सतयुग में भी साथ आयेंगे। कांध हिलाओ। अच्छा। और द्वापर में भक्ति में भी साथ में रहेंगे। साथ ही रहेंगे ना! वह थोड़े होंगे। सारा कल्प ब्राह्मण परिवार के कोई न कोई के सम्पर्क में होंगे। यह अविनाशी नाता भिन्न-भिन्न रूप में थोड़ा दूर या नजदीक कईयों का रहेगा। तो डबल विदेशियों में की यह भी विशेष एक कमाल है, अगर समझ में बात आ जाती हैं ना तो समझने वाले डगमग नहीं होते, पक्के रहते हैं। समझ में आ जाये तो हिलते कम हैं। समझ में जब तक नहीं आयेगी तब तक क्वेश्चन भी होगा और थोड़ा हिलना जुलना होगा लेकिन समझ लिया तो पक्के चलते रहते हैं। ऐसे कई बच्चे बाबा के आंखों में समाये हुए जो हिलने वाले नहीं हैं। उड़ने वाले हैं। बापदादा सदा विदेश में चक्कर लगाने आते हैं। अमृतवेले में भी आते हैं। तो क्या देखते हैं? रिजल्ट में थोड़ा-थोड़ा मिसिंग भी होती है और कोई कोई मेहनत करते हैं। छोड़ते नहीं हैं, मेहनत करके बैठते हैं और मेहनत में बीच बीच में सफलता भी होती है। लेकिन जो नियम है उसमें मैजारिटी अच्छे रिजल्ट में हैं। बापदादा खुश है। और जो होमवर्क दिया वह किया है? जिसने किया है वह हाथ उठाओ। क्रोध छोड़ा है? क्रोध छोड़ा है? हाथ उठाओ। क्रोध नहीं किया? मन में। हाथ उठाओ। थोड़े हैं। अभी यह होम वर्क भी करते पास मार्क्स लेना। अटेन्शन है बच्चों का, बापदादा ने टोटल रिजल्ट देखी कि जब भी क्रोध करते हैं ना उस समय आधे में याद आ जाता है, हाँ। और अपने को चेक करते हैं नहीं नहीं, क्रोध नहीं करना है। लेकिन थोड़ा मन में आ जाता है। मुख को कन्ट्रोल कर लेते हैं लेकिन मन में आ जाता है। लेकिन करना है पक्का। करना है ना! पक्का है ना! सभी को यह रिजल्ट सभी की बापदादा ने सुनाई। चाहे इन्डिया चाहे विदेश। लेकिन साथ चलना है तो यह तो बाप समान बनना ही पड़ेगा ना। बातें तो आयेंगी लेकिन बातें आती हैं और चली जाती हैं आपका प्रामिस नहीं जाना चाहिए। बाकी बापदादा ने देखा कि विदेश में भी वृद्धि अच्छी हो रही है। प्रोग्रामस भी अच्छे करते हैं। पुरूषार्थ के तरफ जो निमित्त बने हुए हैं वह अटेन्शन दिलाते भी अच्छा हैं। मेहनत करते हैं। अच्छा। जो सदा खुश रहते हैं, वह हाथ उठाओ। खुश रहते हैं। खुशी तो रहती है ना! खुशी जाती तो नहीं? खुशी नहीं जानी चाहिए। क्योंकि खुशी परमात्म गिफ्ट है। परमात्म गिफ्ट सम्भाल के रखनी चाहिए। बात, बात में हो गई, खुशी क्यों जावें। बात पावरफुल या खुशी परमात्म गिफ्ट? तो यह भी कोशिश करो खुशी नहीं जाये। सदा फेस खुशनुमा रहे। खुशनुमा। रह सकती है खुशी? रह सकती है? कांध हिलाओ। रह सकती है अटेन्शन देंगे तो हो जायेगी ना। हो जायेगी? पीछे वाले? तो बापदादा सभी के लिए कह रहे हैं एक मास के बाद सभी से यह चार्ट मंगायेंगे कि एक ही मास खुश रहा? आज की तारीख याद करना। सभी को कह रहे हैं सिर्फ फॉरेनर्स को नहीं। एक मास की ट्रायल करो, कोई भी बात आवे दिल में नहीं समाना। समझना बात राइट है रांग है क्या करना है लेकिन दिल में नहीं समाना। दिल में समा जाती है तभी खुशी जाती है। समझने वाला खुश रहेगा और बात को समझके पूरी करेगा। तो एक मास का पेपर है यह। खुश रहना है। हो सकता है? यह सभी हाथ उठाओ, हो सकता है? तो बापदादा एक मास के लिए आपको इकठ्ठी मुबारक देते हैं। क्योंकि करना ही है। हो जायेगा, का पाठ नहीं, करना ही है। आखिर भी आप लोगों के ऊपर चाहे नये आये हैं या पुराने, है तो ब्राह्मण परिवार के। तो ब्राह्मण परिवार दुनिया के लिए विश्व परिवर्तक है। तो परिवर्तक परिवर्तन नहीं करेंगे तो विश्व का परिवर्तन कैसे होगा! जिम्मेवारी समझो। अलबेलापन छोड़ो। हो जायेगा, हो जायेगा नहीं। करना ही है। क्योंकि बापदादा जानते हैं कि समय आप ब्राह्मणों के रोकने से रूका हुआ है। समय को समीप लाने वाले आप हो। तो तीव्र पुरूषार्थ करो। दृढ़ संकल्प करो तो हो जायेंगे। रोज़ यह गीत याद करो अब घर चलना है। ठीक है। अच्छा।

बापदादा सभी चारों ओर के बच्चों को देख खुश भी होते हैं क्योंकि बापदादा बच्चों के सिवाए अकेला कुछ नहीं करने चाहता। इसलिए हर रोज़ बच्चों का आह्वान करते रहते हैं। तीव्र पुरूषार्थी बच्चे, मीठे बच्चे, प्यारे बच्चे अब चलो। अच्छा।

चारों ओर के बच्चों को बापदादा देखकर चाहे सम्मुख बैठे हैं, चाहे कहाँ भी बैठे हैं लेकिन सभी को याद बाप है। और बाप को भी कौन याद है? चारों ओर के बच्चे याद हैं क्योंकि बाप हर बच्चों के लिए यही आशा रखते हैं कि हर बच्चा बाप समान बनना ही है। बाप की हर एक बच्चे में जो आशायें हैं वह जानता है कि नम्बरवार हैं लेकिन फिर भी अपने नम्बर अनुसार भी सम्पन्न तो बनना है ना। हर एक के पुरूषार्थ को भी देखते हैं क्या-क्या कर रहे हैं, बाप को बहुत प्यार आता है, जब मेहनत करते हैं ना तो बहुत प्यार आता है कि मेहनत से छूट जाएं। प्यार में खो जायें। जितना प्यार में खो जायेंगे उतनी मेहनत कम और बापदादा हाथ उठवाता कि बाप से प्यार है तो सभी बड़ा-बड़ा हाथ उठाते हैं। बाप भी मानते हैं कि बाप से प्यार है, प्यार में मैजारिटी पास हैं लेकिन बातों में आ जाते तो बाप को भूल जाते।

तो चारों ओर के बच्चों को बापदादा का पदम पदम गुणा प्यार और दिल का दुलार स्वीकार हो। सभी को, मालिक बच्चों को बाप लाख-लाख बधाईयां दे रहे हैं। उड़ते चलो, उड़ाते चलो। अच्छा।

नीलू बहन से:- सेवा दिल से करती है। सेवा करना अर्थात् दिल पर चढ़ना। तो बाप के दिल पर चढ़ी हुई हो। सेवा व्यर्थ नहीं जाती है। पदमगुणा बढ़ करके फायदा देती है। अच्छा है। बापदादा मुबारक दे रहे हैं।

दादी जानकी से:- आपकी डबल सेवा है। फारेन की भी है जिम्मेवारी और इन्डिया की भी है। (आपने नजर में रखा है) नजर क्या लेकिन दिल पर रखा है। अच्छा है। अटेन्शन देना ही पड़ता है।

दादियों से:- बापदादा ने देखा कि जो भी निमित्त हैं, चाहे भाई, पाण्डव चाहे शक्तियां। जो भी निमित्त बने हुए हो वह अच्छी तरह से अपना कार्य कर रहे हो और बापदादा खुश होता है जब देखते हैं कि हर एक अपनी जिम्मेवारी अच्छी तरह से सम्भाल रहे हैं। आपस में मिलजुल एक ने किया, दस ने सहयोग दिया। चल रहा है और चलता रहेगा। यज्ञ सफल है। आप भी सफलता स्वरूप हो। सभी ठीक है। बापदादा को कोई ऐसा दिखाई नहीं देता है, अच्छा दिखाई देता है। जो जो जिसके अर्थ निमित्त है वह निमित्त बन सम्भाल रहा है। बापदादा सिर्फ सम्पूर्णता की बात करता है। बाकी कार्य ठीक चल रहा है।

मोहिनी बहन से:- कुर्सा पर तो आ गई ना। ऐसे थोड़ेही छोड़ेंगी। चलेगा। अभी तो समाप्ति करनी है। चल रहा है, चलता रहेगा।

परदादी से:- अच्छा है, आप एक मूर्ति बनके यज्ञ में एक अच्छा दर्शनीय मूर्त बनी हुई हो। आपकी शक्ल को देखकर सभी खुश होते हैं।

निर्वेर भाई से:- अभी जो भी पाण्डव चाहे शक्तियां जो निमित्त बनके कार्य कर रहे हैं, वह अच्छा कर रहे हैं, अच्छा करके और आगे से आगे यज्ञ की जो महिमा है, यज्ञ के सेवा की जो वृद्धि है, बाप की प्रत्यक्षता करना, वह भी प्लैन बना रहे हो। अभी यह लक्ष्य रखो कि बाप की प्रत्यक्षता हो। सब कहें कि यह कार्य करने वाला कौन! भगवान आ गया, हमारा बाप आ गया, अभी यह भासना आवे। अभी यह कोशिश करो। ब्रह्माकुमारियों तक पहुंचे हैं। ब्रह्माकुमार-कुमारियां अच्छे हैं लेकिन प्रत्यक्षता तो होनी है ना। तो ऐसा कोई तपस्या करो, सेवा का प्लैन बनाओ जिसमें यह सिद्ध हो जाए। बाकी जो चला रहे हो वह ठीक चल रहा है। हर एक अपनी-अपनी सेवा अच्छी कर रहे हैं बाकी जो परिवर्तन लाना है, वह सभी के ध्यान पर है।

रमेश भाई, उषा बहन से:- बापदादा का तो हर कदम में वरदान है। अच्छा है दोनों अपनी तबियत का ख्याल रख रहे हो, यह अच्छा है। (एकाउन्ट का कल नया वर्ष शुरू हो रहा है) अच्छा है नये वर्ष की मुबारक हो।