19-02-12 ओम शान्तिअव्यक्त बापदादामधुबन


 ‘‘घर का गेट खोलने के लिए बेहद की वैराग्य वृत्ति द्वारा देह-अभिमान के मैं का त्याग करो, बर्थ डे पर दृढ़ता द्वारा कहना और करना एक कर सफलतामूर्त बनो’’

आज बापदादा चारों ओर के बच्चों को देख हर्षित हो रहे हैं। चारों ओर से यही दिल का आवाज आ रहा है वाह बाबा वाह! और बाप की दिल से यही आवाज है वाह बच्चे वाह! आज सभी उमंग-उत्साह से दिव्य जन्म की खुशी मना रहे हैं। आज खुशी मना भी रहे हैं और साथ में बाप भी बच्चों की खुशी मना रहे हैं। आज का ही यह विचित्र जयन्ती का दिन है जो बाप और बच्चों का इकठ्ठा दिव्य जन्म का दिन है। तो आप सभी भी मुबारक दे भी रहे हो और ले भी रहे हो क्योंकि बाप ने जन्म लिया ही है यज्ञ रचने के लिए। तो यज्ञ में ब्राह्मण बच्चे ही चाहिए। तो यह एक ही जयन्ती है जो बाप और बच्चों की इकठ्ठी जयन्ती है इसीलिए इस शिव जयन्ती को हीरे तुल्य जयन्ती कहा जाता है। तो बाप देख रहे हैं कि एक-एक बच्चा कितने स्नेह से मुबारक देने आये हैं और बाप भी मुबारक देने आये हैं। यह जयन्ती अति स्नेह की जयन्ती है। स्नेही बच्चे, स्नेही बाप और स्नेही जयन्ती है।

बापदादा के पास चारों ओर के देश विदेश सब बच्चों का स्नेह पहुंच रहा है। बाप एक-एक स्नेही बच्चे को पदमगुणा स्नेह भरी मुबारक दे रहे हैं। यह स्नेह हर बच्चे को सहज कर्मयोगी बनाने वाला है। यह स्नेह सदा सहज बनाने वाला है। शक्तिशाली बनाने वाला है। बापदादा का अकेला जन्मदिन नहीं है क्योंकि बाप सदा ही बच्चों के साथ रहने वाले हैं। साथ रहेंगे, साथ चलेंगे, साथ राज्य करेंगे। आप सबका भी यही वायदा है ना! साथ रहना है, साथ उड़ना है और साथ राज्य करना है!

बापदादा को आज आपके भक्त भी विशेष याद आ रहे हैं क्योंकि आपके भक्तों ने जो आपने किया है वह कॉपी बहुत अच्छी की है क्योंकि द्वापर में परमधाम से पहले-पहले आये हैं तो पहला जन्म सदा सतोप्रधान होता है इसलिए उन्होंने कॉपी बहुत अच्छी की है। तो आज के दिन बच्चों के साथ आपके भक्त भी याद आ रहे हैं। वतन में तो आज अमृतवेले से बहुत बच्चों की रौनक थी। हर बच्चा समझता था कि मैं बापदादा को अपनी मुबारक दूं और बापदादा ने भी हर बच्चे की मुबारक अति स्नेह से स्वीकार की। तो वतन में आज यह मेला लगा हुआ था। एक तरफ आप बच्चे थे, दूसरी तरफ एडवांस में गये हुए आपके साथी साथ में आये हुए थे। बापदादा ने देखा कि आपकी दादियां और अनन्य भाई की लिस्ट बहुत बड़ी थी। एक-एक दादियाँ बापदादा को भी मुबारक दे रहे थे लेकिन साथ में आप सब भाग्यवान बच्चों को भी मुबारक दे रहे थे। तो वतन में आज मुबारकों का मेला था। सभी एडवांस पार्टी के विशेष दादियाँ और भाई आप विशेष निमित्त साथी रहने वाली आत्माओं को याद करते हुए बहुत दिल से मुबारक दे रहे थे। तो आप सबको बापदादा सबकी तरफ से भी मुबारकें दे रहे हैं। स्वीकार किया? सभी का विशेष बहिनें और भाईयों का एक ही आवाज था कि अभी घर का गेट कब खोलेंगे! तो विशेष दीदी दादी कह रही थी कि हमारी सखियों को, भाईयों को हमारे तरफ से यही कहना कि घर चलने के लिए कौन सी तारीख फिक्स की है? सब इकठ्ठे चलेंगे ना! अलग-अलग तो नहीं जायेंगे? दरवाजा खोलने के लिए सभी इकठ्ठे हाज़र हो जायेंगे। तो वह डेट मांग रहे थे। बापदादा मुस्कराये क्योंकि बाप भी चाहते हैं कि अभी गेट को खोलने के लिए सभी बच्चों को बेहद की वैराग्य वृत्ति चाहिए। यही चाबी है गेट खोलने की। बापदादा तो सदा कहते रहते हैं कि बेहद के वैरागी बन वेस्ट संकल्प और वेस्ट समय दोनों को मिलकर जल्दी से जल्दी त्याग करना अर्थात् बेहद के वैरागी बनना क्योंकि बापदादा ने देखा है कि सबसे बड़ा विघ्न देह अभिमान है। इस देह अभिमान को त्यागना चलते-फिरते देही अभिमानी बनना, यही बेहद का वैराग्य है।

तो सभी कहते तो हैं मेरा बाबा, मीठा बाबा, प्यारा बाबा। जब दिल से कहते हैं मेरा तो यह देह अभिमान जो मैंके रूप में आता है, बाप सदा कहते हैं कि यह मैंका भान जो आ जाता है, मैं जो करता हूँ, मैं जो कहता हूँ, वही ठीक है। एक मैं है कामन, मैं आत्मा हूँ और यह मेरा शरीर है। दूसरा महीन मैं, जो सुनाया मैंने यह किया, मैं यह कर सकता हूँ, मैं ही ठीक हूँ, यह महीन मैं इसको खत्म करना है। यह देह अभिमान इस रूप में आता है। तो आज बापदादा ने यह महीन मैं जो कभी बाप की विशेषता को भी मेरा मानकर मैंका भान रखते हैं, इसको समाप्त करना। देखो, यादगार जो बनाते हैं उसमें भी जब बलि चढ़ाते हैं तो खुद नहीं बलि चढ़ते हैं लेकिन किसको बलि चढ़ाते हैं? बकरे को। बकरे को क्यों ढूंढा? क्योंकि बकरा मे मे ही करता है। भक्तों ने कॉपी तो बहुत अच्छी की है। तो आज के दिन यह देह अभिमान का मैं क्या पुरूषार्थ करके समाप्त कर सकते हो? बर्थ डे पर आये हो बाप के, तो कोई सौगात तो देंगे ना! तो बाप को और सौगात नहीं चाहिए, यह महीन मैंपन, यही बाप कहते हैं आज के जन्मदिन पर बाप को सौगात दे दो। दे सकते हो? देना है? है हिम्मत? हिम्मत है? हाथ उठाओ। हाथ उठाके तो खुश कर दिया। तो हाथ उठाया, तो सौगात दे दी ना! दी हुई सौगात कोई वापस लेता है क्या? कई बच्चे कहते हैं बाबा हम चाहते नहीं हैं लेकिन आ जाती है। कारण क्या? कारण अगर पूछे तो जवाब बहुत अच्छा देते हैं। कहते हैं जानते भी हैं, मानते भी हैं लेकिन क्या करें वापस आ जाता है। सोचो! दी हुई चीज़ अगर आपके पास आ जाए तो क्या दी हुई चीज़ अपने पास रखेंगे? तो अगर आपने दिल से दी, अगर वापस आ भी जाती, तो रखेंगे अपने पास? कारण क्या है? बाप से प्यार है ना तो प्यार के कारण जो बाप कहते हैं वह करने चाहते हैं, यह बाप के पास भी रिजल्ट आती है लेकिन क्या है, दृढ़ता कम है, दृढ़ता को यूज़ करो। संकल्प करते हो लेकिन एक है संकल्प करना, दूसरा है दृढ़ संकल्प करना। तो बार-बार किये हुए संकल्प में दृढ़ता लाना, यह अटेन्शन कम है। दृढ़ता सफलता की चाबी है। तो आज क्या करेंगे? संकल्प करेंगे या दृढ़ संकल्प करेंगे? अगर आपका दृढ़ संकल्प है तो उसकी निशानी है दृढ़ता सफलता की चाबी है। तो चाबी लगाने में कोई कमी रह जाती है इसीलिए सम्पूर्ण सफलता नहीं मिलती है।

तो आज बापदादा बच्चों का भी बर्थ डे है, बाप का भी बर्थ डे है। तो यह तो विशेष दिन है ना! सारे कल्प में बाप बच्चों का एक समय जन्म यह इसी बर्थ डे की विशेषता है। तो आज के दिन बाप यही चाहते हैं कि हर बच्चा आज अपने दिल में दृढ़ता को लाके यह दृढ़ संकल्प करे कि हमें व्यर्थ संकल्प और व्यर्थ समय, क्योंकि अगर सारे दिन को अटेन्शन से चेक करो तो बीच-बीच में समय और संकल्प व्यर्थ जाता है। बापदादा तो सबका रजिस्टर देखते हैं ना! उसको बचाना अर्थात् समाप्ति का समय समीप लाना। तैयार हो? कि अभी भी कहेंगे आ जाते हैं क्या करें? व्यर्थ का काम है आना, आपका काम क्या है, बिठाना? तो बिठा देते हो तभी तो उसने भी घर बना दिया है। वह भी समझ गये हैं कि दृढ़ता नहीं है इसलिए आज के स्नेह के दिन सबके दिल में अभी क्या है? अमृतवेले से लेके आज दिल में बार-बार क्या आ रहा है? मेरा बाबा, मेरा बाबा, मेरा बाबा। बाप के दिल में भी है मेरे बच्चे, मेरे बच्चे, मेरे बच्चे..। तो जैसे मैजारिटी बाप की याद में रहे हैं। दिन का प्रभाव है, बापदादा ने नोट किया। स्नेह के दिन होने के कारण बार-बार सभी को मेरा बाबा, मेरा बाबा काफी समय याद रहा है। ऐसे है? इसमें हाथ उठाओ। आज के दिन की बात है। मेरा बाबा याद रहा? और कुछ याद रहा? नहीं। ऐसे ऐसे हाथ कर रहे हैं, बहुत अच्छा। तो अगर रोज़ बार-बार चेक करो संगम का हर दिन बाप के स्नेह का दिन है। जैसे आज विशेष दिन होने के कारण ज्यादा याद रहा ना! ऐसे सदा अमृतवेले यह स्मृति में रखो कि यह संगम का एक-एक दिन कितना महान है। एक छोटे से जन्म में 21 जन्म की प्राप्ति गैरन्टी है। तो एक-एक दिन का कितना महत्व हुआ! कहाँ 21 जन्म और कहाँ यह छोटा सा एक जन्म।

तो बापदादा आज आप बच्चों से बर्थ डे की यही सौगात चाहते हैं। देंगे सौगात? देंगे? हाथ उठाओ। दृढ़ निश्चय का हाथ। देखेंगे, करेंगे नहीं। करना ही है। कुछ भी हो जाए त्याग तो त्याग। यह त्याग नहीं लेकिन भाग्य है। तो आज का दिन अगर सही हाथ उठाया तो महत्व का दिन है ना! अभी से आपके चेहरे पर व्यर्थ की समाप्ति और सदा स्मृति स्वरूप की झलक चेहरे और चलन में आनी चाहिए। यह माया के जो शब्द हैं ना! क्या, क्यों, कब, कैसे... यह समाप्त हो जाएं तब चेहरा और चलन सेवा करेंगे। अभी ज्यादा प्रभाव भाषणों का है। बापदादा खुश है भाषण बहुत अच्छे कर रहे हैं लेकिन दिनप्रतिदिन अभी जैसे यह भाषणों द्वारा, वाणी द्वारा सेवा का उमंग अच्छा रखा और सफलता भी पाई। ऐसे ही अभी समय प्रमाण आपकी ज्यादा सेवा चेहरे और चलन से होगी। उसका अभ्यास, जैसे भाषणों का अभ्यास करते-करते होशियार हो गये हो ना! ऐसे अभी चेहरे और चलन से किसी को खुशी का वरदान दो, यह अभ्यास करो क्योंकि समय कम मिलेगा इसलिए समय और संकल्प का महत्व रखते हुए आगे बढ़ते जाओ। होना सब अचानक है इसलिए बर्थ डे तो याद रहता है ना! बर्थ डे आना है, आना है कितना समय याद आया? बापदादा आना है, आना है, मिलना है यह कितने समय से याद रखा? अब यह संकल्प करो, दृढ़ता से व्यर्थ समय और संकल्प को समाप्त करना है। मेरा बाबा, मेरा बाबा दिल में समाते, कहना अलग ची ज़ है लेकिन दिल में समाना, दिल की बात कभी भूलती नहीं है। मुख की बात भूल सकती है लेकिन दिल की बात अच्छी या व्यर्थ दोनों नहीं भूलती है। तो आज बापदादा को सौगात तो दी ना बाप को। दो-दो हाथ उठाओ। अरे वाह! यह फोटो निकालो। बापदादा सिर्फ हाथ को नहीं देखते, बापदादा आपके दिल को देख रहे हैं।

तो आज के दिन की सौगात अपने को भी दी और बाप को भी दी। अगर आपका व्यर्थ समय और संकल्प बच गया तो आपका दिन कैसे बीतेगा? सदा खुशनसीब और खुशनुमा बन जायेंगे। तो अभी संकल्प को अमृतवेले बापदादा से मिलन मनाने के बाद यह रोज़ स्मृति में लाना और सारे दिन में बीच-बीच में चेक करना। बापदादा टाइम फिक्स नहीं करते लेकिन आप अपना टाइम फिक्स करो। बीच-बीच में चेक करना तो जो बापदादा के आगे बर्थ डे पर वायदा किया वह वायदा निभा रहे हैं? यह अपने आपसे चेक करना। चाहते तो सभी हैं। बापदादा आज शक्लें देख रहे हैं कि चाहते हैं हाँ करेंगे, करेंगे, करेंगे लेकिन यह वेस्ट आ जाता है ना तो बाप से किया हुआ वायदा भी भुला देता है। तो वेस्ट खत्म। एक मिनट अभी भी एक मिनट पावरफुल आत्मा बन संकल्प करो वेस्ट को खत्म करना ही है। अच्छा।

बापदादा एक भी बच्चे को अपने समान बनाने के बिना रहने नहीं चाहता। प्यार है ना! देखो प्यार की निशानी आज का दिन है। बाप और बच्चे का सारे कल्प में ऐसा दिन नहीं होता जो बाप और बच्चे का जन्म ही एक दिन हो। बाप का एक-एक बच्चे से दिल का प्यार है कि मेरा बच्चा, परमात्मा का बच्चा, जो संकल्प करो वह संकल्प सफल हो। एक-एक संकल्प में शक्ति हो, कहना और करना एक हो। कहा अर्थात् हुआ। शुद्ध संकल्प हो। तो व्यर्थ स्वत: ही खत्म हो जायेगा क्योंकि एडवांस पार्टी डेट चाहती है। तो आपकी बड़ी-बड़ी दादियां हैं, बड़े-बड़े भाई हैं, प्यार तो है ना उन्हों से। कितना याद करते हैं? दादी को, दीदी को, चन्द्रमणि को। सभी के नाम लेते जाओ। सभी को याद करते हैं। तो वह जो चाहती हैं वह करके बताओ ना। तो आज का संकल्प क्या रहा? कहना और करना एक हो। ठीक है! तो आज चारों ओर के बच्चों को बापदादा बर्थ डे की सौगात यही दे रहे हैं ‘‘कहना और करना’’ एक करो। दृढ़ता की सौगात आज के दिन की बापदादा हर बच्चे को दे रहे हैं। शुभ कार्य दृढ़ता से सफल करो।

बाकी जो भी आज पहले बारी आये हैं, वह उठो। हाथ हिलाओ। बापदादा आने वाले बच्चों को आ गये, जान लिया मेरा बाबा, इसकी बहुत-बहुत मुबारक दे रहे हैं। बापदादा को खुशी है फिर भी हलचल जो होनी है उसके पहले पहुंच गये हो, इसकी मुबारक हो। अभी आने वाला हर बच्चा यह संकल्प करो दृढ़, साधारण संकल्प नहीं, दृढ़ संकल्प करो कि तीव्र पुरूषार्थी बनना ही है। तीव्र, साधारण नहीं। तो आने वाले अपने राज्य में आ जायेंगे इसलिए साधारण संकल्प का समय पूरा हुआ। अभी तीव्र पुरूषार्थ का समय है, चांस है, फिर भी चांस लेने वाले चांसलर तो बन गये। तो बापदादा हर बच्चे को देख खुश है और हर बच्चे को कह रहे हैं कि तीव्र पुरूषार्थ करेंगे तो साथ जायेंगे, साथ रहेंगे। तो मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो।

सेवा का टर्न यू.पी. बनारस और पश्चिम नेपाल:- यू.पी. वाले आदि स्थापना से भाग्यवान हैं क्योंकि ब्रह्मा बाप और जगदम्बा जितना समय बच्चों से मिलने गये हैं, उतना औरों के पास सिवाए बाम्बे और दिल्ली के, नहीं गये हैं। तो लकी हैं जो ब्रह्मा बाप और जगदम्बा का पांव पड़ते बच्चों को स्नेह मिला है। डायरेक्ट ब्रह्मा बाप और जगदम्बा की पालना मिली है इसीलिए यू.पी. भाग्यवान है और बापदादा ने देखा कि सेवा की एक विशेषता है कि सेवाकेन्द्र भी अच्छे खोले हैं। कई कुमारियों को टीचर बनने का भाग्य मिला है इसलिए अनेक टीचर्स सेवा में लगी हुई हैं और साथ में आवाज भी फैलाया है। बाकी बापदादा जो अभी चाहता है वह तो जानते हो कि अभी बापदादा हर ज़ोन को यही कहता है कि अभी वारिस क्वालिटी बाप के सामने लाओ। अभी बापदादा सभी ज़ोन को कहते हैं हर एक ज़ोन में या हर एक सेन्टर में वारिस क्वालिटी कितने हैं वह बापदादा के पास हर ज़ोन, डबल विदेशी भी हर स्थान के वारिस बच्चों की लिस्ट देवे क्योंकि समय समीप आ रहा है इसलिए अभी सेवा की गति फास्ट करो। रेग्युलर स्टूडेन्ट तो बहुत हैं हर ज़ोन में लेकिन वारिस क्वालिटी अर्थात् तन-मन-धन से, सम्बन्ध-सम्पर्क से हर कार्य में सहयोगी हो। सिर्फ अपने सेन्टर के सहयोगी नहीं, लेकिन यज्ञ स्नेही वारिस हो। वारिस माना सेन्टर की सेवा में बहुत अच्छा है नहीं, वारिस का अर्थ ही है स्नेह सहयोग और सेवाधारी। ऐसे हर एक ज़ोन लिस्ट भेजना। आप लोग मधुबन वाले लिस्ट देखना, मंगाना। फिर बापदादा सुनायेंगे रिजल्ट वारिस किसको कहा जाता और वारिस को क्या-क्या करना होता है! बाकी यू.पी. वाले जो अपना टर्न बजाने आये हैं, तो इस टर्न का फायदा काफी उठाया है। हर ज़ोन उठाता है यू.पी. वालों ने भी अच्छा चांस लिया है। अनेक आत्माओं को चांस दिलाया है इसकी मुबारक हो, मुबारक हो।

बापदादा हर एक बच्चे को, जो भी उठे हो हर बच्चे को बर्थ डे की मुबारक दे रहे हैं और साथ में भविष्य में तीव्र पुरूषार्थी भव का वरदान दे रहे हैं। अच्छा।

95 देशों से 1300 डबल विदेशी आये हैं:- बहुत अच्छा मधुबन का श्रंगार मधुबन में पहुंच गया है। डबल विदेशियों का मधुबन से प्यार कितना है और मधुबन वालों का भी डबल फॉरेनर्स से प्यार है। डबल फॉरेनर्स मधुबन का श्रृंगार हैं। सभी ने अच्छी रीति से जो भी कांफ्रेंस प्रोग्राम करना था, वह आराम से किया। जगह थोड़ी कम मिली है, यह भी हो जायेगा आगे। बाकी डबल फारेनर्स को बापदादा यही वरदान दे रहे हैं कि जगत अम्बा के दो शब्द बाप का कहना और बच्चे का करना, यह सदा जगत अम्बा की सौगात याद रखना। बापदादा जानता है मुरली से प्यार सबका है, बाकी परिवार से भी प्यार है। बाप से तो है ही, अभी अपने में हर धारणा, हर सेवा में सफलतामूर्त एक-एक में यह दोनों ही विशेषता हो, जो बापदादा सेवा में आप लोगों का दृष्टान्त देकर औरों को भी उमंग में लाये। ऐसा पुरूषार्थ कर एक्जैम्पुल बनो। करने में दृढ़ संकल्प से सफलता के अधिकारी हो इसलिए एक्जैम्पुल बनो। तीव्र पुरूषार्थी बनने का एक्जैम्पुल बनो, साधारण तो सभी हैं लेकिन आप तीव्र पुरूषार्थ का सैम्पुल बनो। उम्मीदवार हैं। बापदादा ने देखा डबल विदेशियों में निज़ी संस्कार होता है कि जो सोचा वह करना ही है। तो अभी तीव्र पुरूषार्थी का ऐसे सैम्पुल बनो, जो बापदादा आपका दृष्टान्त देकरके औरों को भी उमंग-उल्हास में लाये। उम्मीदवार हो। जो संकल्प करो वह कर सकते हो इसलिए बापदादा आज के दिन की पदम पदम पदम मुबारक दे रहे हैं।

बापदादा सुनते हैं क्या-क्या करते हो? खुश होते हैं बापदादा और मधुबन के वायुमण्डल में पहुंच जाते हो इसकी भी मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो।

(देश सम्भालने वाले, सेन्टर सम्भालने वालों की मीटिंग हुई और 150 पुराने 25 साल से समार्पित टीचर्स की सेरीमनी थी) सब डिपार्टमेंट ने जो कुछ फाइनल किया है मिल करके और दादियों के सहयोग से उसके लिए खुश है कि फैसला यथार्थ किया है और आगे बढ़ते चलेंगे। ओम् शान्ति। आपकी दादी ओम् शान्ति बहुत कराती है ना। अच्छा।

बापदादा हर बच्चे को देख चाहे पीछे बैठे हैं चाहे कोने में बैठे हैं, लेकिन एक-एक बच्चे को सदा तीव्र पुरूषार्थी बन औरों को भी तीव्र पुरूषार्थी अपने संग से भी बना सकते हैं। किसी भी आत्मा को कोई सहयोग चाहिए वह दिल से सहयोग दे तीव्र पुरूषार्थी बनाते चलो। हर बच्चा तीव्र पुरूषार्थी हो। नम्बरवार नहीं, तीव्र पुरूषार्थी। कम से कम अपने सम्पर्क में रहने वाले, आने वाले हर स्थान तीव्र पुरूषार्थी स्थान हो। यही संकल्प हर एक रखे और फिर बापदादा इसकी रिजल्ट देखेंगे। जहाँ सेन्टर वाले सब तीव्र पुरूषार्थी स्वरूप में है उनको बापदादा कोई-कोई नहीं, सभी साथी हो उनको एक गिफ्ट देंगे। हो सकता है ना! कि मुश्किल है? नहीं। कम से कम अपने स्थान को तो बना सकते हैं। अपने सेवाकेन्द्र को तो बना सकते हैं। ऐसा एक्जैम्पुल अभी बापदादा देखने चाहते हैं। जैसे मोहजीत की कहानी है ना, जिसे भी मिले मोहजीत। तो सुनने में अच्छी लगती है ना। ऐसे जिसे भी देखें तीव्र पुरूषार्थी ग्रुप। लक्ष्य रखो, लक्ष्य से लक्षण आ ही जायेंगे। हर एक सेन्टर सन्तुष्टमणियों का सेन्टर हो। अच्छा।

बापदादा दिल से चाहते हैं एक बच्चा भी पीछे नहीं रह जाए। साथ में चले। पीछे-पीछे आने वाले अच्छे नहीं लगते हैं। साथ हो, हाथ हो, चलना है ना घर में। रिटर्न जरनी है। उसके लिए जैसे ब्रह्मा बाप फरिश्ता है, ऐसे फॉलो फादर। साकार में होते फरिश्ता, जिसको भी देखो फरिश्ता ही फरिश्ता, तब गेट खुल जायेगा। अच्छा। सभी बच्चों को सदा खुशनसीब, खुशनुमा स्वरूप की यादप्यार।

दादियों से:- (मैं बाबा के साथ रहूंगी, सतयुग में नहीं जाऊंगी) ब्रह्मा बाप साथ में होगा ना। आपको प्रालब्ध जो पुरूषार्थ की है, उसका अनुभव करना है। तो शिव बाप ने ही यह टाइम रखा है।

आज कुवेत की वजीहा वतन में चली गई: परमात्मा की प्यारी थी ना तो सर्व की भी प्यारी थी। और सम्बन्धियों का भी लक है जो उन्हों का भी कनेक्शन जोड़ दिया। सफल करने और कराने में नम्बरवन रही है। अच्छा।

आज नीलू बच्ची को भी प्यार कर रहे हैं, क्यों? सम्भाल बहुत अच्छी कर रही है। है रथ की भी कमाल लेकिन साथ में इसकी भी कमाल है इसलिए आपको सबकी दुआयें मिलेंगी।

(गुल्जार दादी जी के लिए) बापदादा ने जिसको निमित्त बनाया है वह सदा निमित्त बनके कार्य कर रहे हैं, सभी आत्माओं को सुख शान्ति और शक्ति का अनुभव करा रहे हैं। इस आत्मा का भी ड्रामा में पार्ट है, विचित्र पार्ट है और दादी जो है हमेशा इस रथ को कहती थी कि रास्ते चलते फंस गई है। हर एक का पार्ट अपना-अपना अमूल्य है। मुबारक हो, मुबारक हो।

(बृजमोहन भाई आज इस टर्न में नहीं आये हैं, याद भेजी है) बाप की भी यादप्यार देना। उसको पदमगुणा मुबारक देना। (रमेश भाई ने कहा स्टूडियो का सामान आ गया है, कल रिकॉर्डिंग करेंगे) अच्छा हैं, धीरे-धीरे सब ठीक हो जायेगा। आप बेफिक्र होके करते चलो।

आज नये भण्डारे का महूर्त किया गया:- हो जायेगा, फिर भी सुख तो मिलेगा ना। (सभी मजदूर मिस्त्रियों ने भी बहुत मेहनत की है) उन्हों को यादप्यार देना। बापदादा देखते हैं, चक्र लगाते हैं, उनको टोली दिलाना। (ब्रह्मा भोजन बनाने वाले बड़ी मेहनत करते हैं) ब्रह्मा भोजन की वैसे ही महिमा है तो जो ब्रह्मा भोजन बनाने के निमित्त हैं वह तो विशेष आत्मायें हैं। कितना भी कोई भी कार्य है तो हाज़िर हो जाते हैं, इसकी बहुत बहुत मुबारक है, मुबारक है, मुबारक है।

(तीनों भाईयों को जन्म दिन की गिफ्ट) मुबारक यह है कि सदा समय पर एक दो को सहयोग दे करके कारोबार को ऐसे इज़ी चलाओ जो कोई भी मेहनत नहीं करनी पड़े और डिसकस कोई बात में नहीं करनी पड़े, सहज होता जाए। हो रहा है और थोड़ा अटेन्शन। सब मिलकर करते चलो। एक दो के विचार को रिगार्ड देते हुए फाइनल करते चलो क्योंकि विचारों में फर्क तो होता है लेकिन विचारों को मिलाना है, मिलाके सन्तुष्ट करना है और सन्तुष्टता फैलानी है।

हंसा बहन से:- जीवन दिया सेवा में, तो सेवा का मेवा नहीं मिला! मुबारक तो है तुमको। बापदादा का मिलना माना मुबारक देना। कहने की आवश्यकता ही नहीं है। आपको मुबारक सूक्ष्म में बहुत मिल रही है क्योंकि रथ को सम्भाल रही हो। यह भी (नीलू बहन) सम्भाल रही है, आप भी सम्भाल रही हो। तो वैल्यु है ना। और मुबारक रोज़ मिलती है। अमृतवेले रोज़ बापदादा मुबारक देते हैं। बहुत अच्छा कर रही हो।

बापदादा ने 76 वीं त्रिमूर्ति शिव जयन्ती के उपलक्ष्य में अपना झण्डा फहराया और सबको मुबारक दी

सभी दिल से विश्व सेवा प्रति झण्डा लहराने वाले बच्चों को बापदादा का बहुत-बहुत-बहुत-बहुत पदम पदम गुणा मुबारक हो, मुबारक हो। आपके तो दिल में शिव बाप बैठा है। दिलाराम है, हर एक के दिल का दिलाराम है और यही दिल के दिलाराम से सदा अमृतवेले मुबारक लेते रहना और चारों ओर मुबारक देते रहना। यह तो लोगों को सेवा के अर्थ जहाँ तहाँ झण्डा लहराते हैं तो उनके दिल में स्मृति आवे मेरा बाप कौन! पहचानते नहीं हैं ना! तो उन्हों को पहचान के लिए झण्डा लहराते हैं बाकी आपके तो दिल में स्वयं बाप बैठा है। इसका यादगार यहाँ आबू में ही दिलवाला मन्दिर है। तो सभी को पदम पदम पदम गुणा मुबारक है, मुबारक है, मुबारक है।