31-12-15 ओम् शान्ति अव्यक्त बापदादा मधुबन


ड्रामा में संगम का यह मिलन बहुत-बहुत अमूल्य और न्यारा प्यारा है, यह भी अचानक की लाटरी है जो भाग्यवान बच्चों को ही मिलती है

आज सभी दिल के दुलारे हर एक बच्चा अपने दिल के दुलारे बाप से मिलन मना रहे हैं। बापदादा भी चारों ओर के एक-एक बच्चे को देख खुश हो रहे हैं वाह मेरे नयनों में समाया हुआ हर एक बच्चा है क्योंकि हर एक में कोई न कोई विशेषता है जिस विशेषता से बच्चे और बाप का मिलन हो रहा है। कहाँ से भी आये हो लेकिन है सभी बाप के लाडले। हर एक बड़े प्यार से वाह बाबा वाह! कहकर मिलन मना रहे हैं। हर एक बच्चा चाहे आगे बैठे हैं चाहे पीछे। पीछे वाले खास हाथ उठाओ। कितना हर एक के चेहरे पर बाप और बच्चे के मिलन की खुशी न॰जर आ रही है। हर एक की दिल से यही बोल निकल रहे हैं वाह बाबा वाह! आपने यह मिलन का जो साकार में सम्मुख सामने मिलन का मौका दिया, हर एक बच्चा सम्मुख मिलन का गोल्डन चांस ले रहा है। बाप भी बच्चों से मिलन का मौका देख कितना हार्षित हो रहा है। इतनी बड़ी सभा देख बाप भी बार-बार कहते वाह बच्चे वाह! यह मिलन कितना महान है। कहाँ कहाँ से बच्चे मिलन मनाने पहुंच गये हैं। यह बाप और बच्चों का मिलन कितना प्यारा और न्यारा है। हर एक के नयनों में बाप और बच्चे के मिलन का आनंद उनके नयनों में समाया हुआ है। यह सारी सभा का एक-एक बच्चा गीत गा रहे हैं वाह बाबा वाह! और बाप भी गीत यही गा रहे हैं वाह मेरे बच्चे वाह! ड्रामा में यह बाप और बच्चों का मिलन कितना प्यारा है। हर एक बच्चे के दिल से यही गीत सुनाई दे रहे हैं वाह बाबा, वाह आपका दुलार, वाह आपके नयनों का मिलन! यह मिलन सदा दिल में छप गया है। जब चाहे तब इस सीन को इमर्ज करें तो कितने सुख की फीलिंग आती है। दिल से गीत निकलता है वाह बाबा आपकी रूहानी न॰जर, एक-एक बच्चा देखकर कितना हार्षित हो रहा है। ऐसा मिलन सामने से बाप वाह बच्चे वाह कहके मिलन मना रहे हैं। हर एक के नयन इस मिलन में इतने खुश हैं जो हर एक समझता है कि यह साकार दुनिया में साकार रूप में बाप और बच्चों का मिलन वन्डरफुल है। हर एक की दिल कह रही है वाह बाबा वाह! हमने तो सोचा नहीं कि ऐसे बाबा का मिलन हो सकता है, यह मिलन तो बहुत-बहुत-बहुत प्यारा है। यह मिलन तो स्वप्न में भी न था कि ऐसे मिलन हो सकता है। लेकिन यह बाप और बच्चों का मिलन, बच्चे बाप को देखकर प्रसन्न हो गये, वाह बाबा वाह! और बाप भी एक-एक बच्चे को देख कितना खुश हो रहा है, वाह! वाह! वाह! की धुन चल रही है। हर एक के खुशी की लहर, उनकी शक्ल पर चमक रही है। सबके मुख से यही आवाज निकल रहा है वाह बाबा वाह! आज तो आपने मिलन का स्वरूप अनुभव करा दिया। हर एक की दिल से सारे हाल में एक ही आवाज आ रहा है वाह मीठा बाबा वाह! ऐसा मिलन देख सभी इस मिलन के नशे में मगन आत्मायें न॰जर आ रही हैं। सबसे एक ही आवाज है वाह बाबा वाह! हर एक का दिल यही बोल रहा है, सारी सभा के दिल का गीत बड़ा मधुर चल रहा है। यह गीत कितना प्यारा है। साकार रूप में यह मिलन बहुत अमूल्य है। ड्रामा में यह मिलन संगमयुग का बहुत प्यारा और न्यारा है। हर एक के दिल में मेरा बाबा, मेरा बाबा, मेरा बाबा यही है। यहाँ सामने अगर आके देखो तो सबके मस्तक चमक रहे हैं। लाइट पड़ रही है क्योंकि बाप और बच्चे का मिलन साकार में इतना समीप यह देख करके सब अपने को अति भाग्यवान अनुभव कर रहे हैं। बच्चे बाप के साथ होते भी अपने साथियों से मिलने का चांस देख इसमें ऐसे लगे हुए हैं जैसे कोई अचानक लाटरी मिल जाए। यह मिलन एक्जैम्पुल है संगमयुग में बाप और बच्चों के मिलन का और वह भी साकार रूप में मिलन, यह तो किसके स्वप्न में भी नहीं था लेकिन अब सबकी दिल में यह मिलन सदा के लिए समाया हुआ है। हर एक के दिल में क्या है! यह मिलन डायरेक्ट बाप और बच्चे का मिलन यह सोचो कितना महान है। सब इसी दिन का इन्तजार करते थे। ऐसे साकार रूप में मिलन यह बड़ा अमूल्य मिलन है। तो ऐसे मिलन मनाओ जो बाद में इस मिलन का स्वरूप समाया हुआ दिल में वह बार बार दिखाई दे, अनुभव हो कि अभी भी मिलन मना रहे हैं। बाप और बच्चों का मिलन कितना प्यारा है और कितनी खुशी होती है। बाबा मेरा मेरे से मिल गया।

तो आज सभी के मन में बाप और बच्चे का अव्यक्ति मिलन क्या होता है, वह अनुभव सभी बच्चों को बापदादा करा रहे हैं। सभी ने किया, यह मिलन। साधारण बात नहीं है। यह मिलन के भाग्य को लेना, यह हर एक को मिलता है। लेकिन मिले हुए भाग्य को अनुभव में लाना, यह अनुभव भले इतने सारे हैं लेकिन रीयल में अनुभव करना, यह भाग्य की बात है। तो आज बापदादा ऐसे बच्चों का भाग्य देख रहे हैं कि कैसे दिल से मिलन मना रहे हैं, याद करते थे गीत गाके लेकिन अभी गीत क्या मिलन मना रहे हैं। यह भी हर एक का भाग्य है, जो यह भाग्य साकार में यहाँ प्राप्त होने का भाग्य है। ऐसा भाग्य भाग्यशाली ही प्राप्त करता है।

तो बापदादा आज का मिलन देख बहुत खुश है कि बच्चे साकार में मिलन मनाने का अनुभव कर रहे हैं। हर एक के मन में कौन समाया हुआ है? बाबा। मेरा बाबा, प्यारा ब्ाबा। बाप के दिल में तो सारे रात दिन बच्चे ही बच्चे हैं क्योंकि हर एक के दिल में अभी याद ही बाबा है। मिलन भी बाबा का है। तो देखो बाप ने देखा कितना बाप भोला भण्डारी है, याद किया और प्राप्ति हुई। ऐसे है! जो समझते हैं बाप से मिलन हो रहा है, वह हाथ उठाओ। बाप तो बच्चों का चेहरा देख खुश हो रहे हैं तो कितना समय अलग रहे! और अब मिलन हुआ तो कितना मिलन में लगन में मगन हैं। बापदादा भी बच्चों के मिलन में बहुत खुश है। बिछुड़ा हुआ कोई भी मिले तो कितना होता है तो यह भी अलग रहे बहुकाल परन्तु अभी यह मिलन भी हो गया। हो गया ना! हाथ उठाओ। वाह! यह सीन बाबा को बहुत अच्छी लगती है। पीछे वाला भी हाथ उठा रहा है। हर एक के मन की मौज शक्ल से दिखाई दे रही है।

सेवा का टर्न दिल्ली और आगरा का है:- (14 हजार दिल्ली और आगरा के आये हैं, टोटल सभा 24 हजार भाई बहिनों की है) अच्छा है देख लिया। इसमें भी मातायें ज्यादा है। बाप की यह शक्ति सेना कितनी पावरफुल है, यह देख रहे हैं। पाण्डव भी कम नहीं हैं लेकिन पाण्डव सभी को उमंग-उत्साह में बढ़ाने वाले हैं। माताओं के अगर पति नहीं आते तो मातायें बिचारी रह जाती हैं। कोई-कोई तो कितना भी बंधन है लेकिन वह तरीके ऐसे निकालती हैं जो बापदादा भी उनके तरीके देख खुश होते हैं। बापदादा भी जब सुनते हैं ना यह इतनी बांधेली आई कैसे! तो जब कहानियां सुनते हैं तो कहते हैं वाह मातायें वाह! इन्वेन्शन ऐसी निकालती हैं जो और किसकी बुद्धि में आ ही नहीं सकती है इसलिए संगम पर मातायें और इतनी बहादुर निकलें, कोई डर नहीं क्या होगा.., मार भी मिलेगी लेकिन बाबा मिला सब कुछ मिला। अच्छा है, देखो, कितना अन्दाज माताओं का है। सभा में देखो ना तो पौना क्लास माताओं का है। वह बहुत प्यासी रही और प्यासी को अगर पानी मिल जाए तो उसके लिए क्या होता है? अमृत। तो बापदादा बच्चों को देख खुश होते हैं, कई ऐसे मेल भी हैं जिनकी कहानी ऐसी ही है, क्योंकि उन्हों को यह पता नहीं है ना कि यह क्या ची॰ज है! तो बापदादा ऐसे बच्चों को देख करके बहुत खुश होते हैं कि वाह मेरे बहादुर बच्चे वाह!

डबल विदेशी 50 देशों से 500 आये हैं:- अच्छा है, सभी ने हिम्मत रखी है। और हिम्मत की मदद बापदादा देता है। जो डबल विदेशी इस ग्रुप में आये हैं, वह खड़े रहें। अच्छा है। खुश कितने हैं। खड़े हैं, थके हुए भी हैं लेकिन खुश हैं। अच्छा। सभी को यादप्यार तो मिलेगा लेकिन विदेशियों को खास आज यादप्यार दे रहे हैं। वैसे तो जो भी इन्डिया के भी आये हैं उन्हों के भी बंधन ऐसे ऐसे हैं जो फारेन वालों के नहीं हैं। लेकिन बाबा सिर्फ उन्हों की जो चतुराई है, कैसे बंधन को तोड़ा, कैसे फायदा उठाया, यह कहानियां देखकर बाबा भी इन्ज्वाय करता है। तो सभी खुश। सभी दो दो हाथ उठाओ। देखो, दादी (दादी जानकी को) कितना अच्छा लगता है। यहाँ स्टेज से तो और ही अच्छा लगता है। तो सभी ज्ञान के नाते से खुश हैं, प्रेम के नाते से नहीं, ज्ञान के नाते से सभी खुश हैं। अच्छा।

दादी जानकी जी बापदादा से मिल रही हैं:- भाग्य में भी इतनी आयु वाली होते भी जवान है। (दादी जी की आयु 100 साल की हो गई) (दादी ने कहा शरीर बिचारा है लेकिन शक्ति बाबा की है, बाबा चला रहा है, अब बाबा को प्रैक्टिकल सबूत देना है, आया यह भी खुशी की बात है) बाबा समझता है ना! बाबा आपसे करा रहा है। कैसी भी अवस्था हो, लेकिन आप निमित्त हो ना। (परसों हंसा लण्डन लेकर जा रही है)

मोहिनी बहन से:- सदा खुश रहती है ना। यह खुशी इसकी सेवा कर रही है, कितना भी हो लेकिन शक्ल पर हो नहीं लगता। खुशी में चलाती रहती है। सभी चलाते हैं, सभी की आयु आजकल कितनी है। (मोहिनी का 75 वां जन्म दिन है) सब जो भी बहिनें हैं, वैसे तो भाई भी हैं लेकिन अभी बहनों की बात चल रही थी। तो जो भी बहनें हैं, भाई गुप्त हैं। सेवा के कारण बहिनों का नाम हो जाता है, बाकी भाई तो हैं ही, बिना भाईयों के भी काम नहीं चलता। देखो, भाई भी कम नहीं हैं, बहिनें भी कम नहीं है। ब्राह्मण परिवार की जो भी मातायें और भाई हैं, सब बड़े काम के हैं।

(मोहिनी बहन को बापदादा ने जन्म दिन की गिफ्ट दी) ठीक है ना। अपने को चला रही है।

त्रिमूर्ति भाई:- भाई भी आये हैं वाह! वैसे अच्छी-अच्छी मातायें भी अच्छा काम करने वाली हैं। बाहर का काम नहीं लेकिन ब्राह्मणों की सेवा में मातायें अच्छा काम करती हैं। (इन्डिया गेट और लाल किले के प्रोग्राम का एलबम बापदादा को दिखाया)

(नये वर्ष 2016 के आगमन की खुशी में मोमबत्तियां जलाई गई, केक काटा गया, बापदादा ने सबको नये वर्ष की बधाई दी)

दादी जानकी जी ने कहा कि मैं कोई भी प्रकार का संकल्प नहीं चलाती हूँ। बाबा चला रहा है। वन्डर है शरीर कैसा भी है परन्तु कदम-कदम पर दिल से निकलता है मेरा बाबा। जैसे आज शक्ति आई, बाबा ने दी, मुरली सुनाने की। आज बाबा आया खुशी है। बाबा की कमाल है जो यहाँ इतना समय बैठी। मैंने अन्दर से सोचा कल सुबह को भी मुरली सुनायेंगी। तो यह बाबा की हर कदम पर मदद है। यह (हंसा) निमित्त है मेरे को ट्रेवालिंग कराने की। बाबा आया तो कितनी खुशी हुई। अभी तो नये साल में सब निमित्त बने हुए बाबा के बच्चे हर एक अपने-अपने कार्य को अच्छे से अच्छा करेंगे ही।

(बाबा छुट्टी है जाने की) छुट्टी है। अभी पूछके बना दिया है, टिकेट आ गई है। जब भी जरूरत हो जा सकती हो। अभी यही हेड है ना, अभी तो यही फैंसला करेगी कि क्या करना है!

नये वर्ष के आगमन पर सबको मुबारक:- बाबा की आज्ञा अनुसार जा रहे हैं आगे, आगे जाते रहेंगे। विजय तो निश्चित है ही। विजय दाता हमारे साथ है तो विजय कहाँ जायेगी।

सभी को बाबा की याद तो कदम कदम पर है ही और हमारे दिल में अभी निमित्त कौन बाबा ने दिया है! वह भी सबको पता है। बाबा जिसको निमित्त बनाता है, सभी उनके साथी हैं, तो कदम-कदम पर सभी साथ निभायेंगे। आज से नया साल शुरू हो रहा है। नया साल शुरू हुआ है तो उसमें नवीनता का संकल्प जरूर आता है। यह वर्ष जो शुरू हो रहा है उसमें कुछ नवीनता करनी चाहिए, जिसको जो भी संकल्प हो, कोई के नये विचार हो, कुछ नया होना चाहिए तो लिखकर भेज दो। कहने की जरूरत नहीं है। बाकी कोई नवीनता का विचार है तो वह लिखकर भेज दो तो टाइम बच जायेगा। आपका भी संकल्प काम में आ जाये तो अच्छा है इसलिए आप शार्ट में अपना संकल्प लिखके भेज देना। अच्छा। सबको नये वर्ष की बधाई।