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AVYAKT MURLI

19 / 04 / 73

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19-04-73   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन

 

प्रत्यक्षता का पुरूषार्थ

 

निकृष्ट से श्रेष्ठ तथा भाग्यहीन से भाग्यवान् बनाने वाले शिवबाबा बोले

क्या आप अपने को बापदादा के समीप रहने वाले पद्मापद्म भाग्यशाली, श्रेष्ठ आत्माएं समझते हो? जो जिसके समीप रहने वाले होते हैं, उन में समीप रहने वाले के गुण स्वत: और सहज ही आ जाते हैं। इसीलिए कहा जाता है कि संग का रंग अवश्य लगता है। तो आप आत्माएं, जो सदा बापदादा के समीप अर्थात् श्रेष्ठ संग में रहती हो, उन के गुण व संस्कार तो अवश्य बापदादा के समान ही होंगे? निरन्तर श्रेष्ठ संग में रहने वाले आप वत्स अपने में सदैव वह रूहानी रंग लगा हुआ अनुभव करते हो? क्या आप वत्स स्वयं को हर समय रूहानी रंग में रंगी हुई आत्माएं समझते हो? जैसे स्थूल रंग स्पष्ट दिखाई देता है, वैसे ही कुसंग में रहने वाली आत्माओं का मायावी रंग भी छिप नहीं सकता। बोलो, दिखाई देता है ना?

वत्सों ने सिर हिला कर कहा - हाँ।

तब वैसे ही श्रेष्ठ संग में रहने वालों का रूहानी रंग भी सभी को दिखाई देना चाहिए। कोई भी देखे तो उनको यह मालूम हो कि यह रूहानी रंग में रंगी हुई आत्माएं हैं। ऐसे सभी को मालूम होता है या अभी गुप्त हो? यह रूहानी रंग गुप्त ही रहना है क्या? प्रत्यक्ष कब होना है? क्या अन्त में प्रत्यक्ष होंगे? वह डेट कौन-सी होगी? अन्त की डेट सभी की प्रत्यक्षता के आधार पर है। ड्रामा प्लान अनुसार आप श्रेष्ठ आत्माओं के साथ पश्चाताप का सम्बन्ध है। जब तक पश्चाताप न किया है तब तक मुक्तिधाम जाने का वरसा भी नहीं पा सकते। इसीलिए जो निमित्त बनी हुई हैं उन से ही तो पूछेंगे ना? निमित्त कौन है? आप सभी हो ना? अभी अपने ही आगे अपने सम्पूर्ण स्टेज प्रत्यक्ष नहीं है तो औरों के आगे कैसे प्रत्यक्ष होंगे? क्या अपनी सम्पूर्ण स्टेज आप को श्रेष्ठ दिखाई देती है वह हाथ उठाओ। वास्तव में सम्पूर्ण स्टेज तो नॉलेज से सभी जानते हैं। लेकिन अपने-आप को क्या समझते हो? समीप के हिसाब से उस समान बनेंगे ना? तो अपनी सम्पूर्ण स्टेज दिखाई देती है?

मैं कौन हूँ? यह पहेली हल नहीं हुई है क्या? कल्प पहले मैं क्या थी, वह अपनी सम्पूर्ण स्टेज भूल गये हैं क्या? औरों को तो 5000 वर्ष की बात पहले याद दिलाती हो। पहले-पहले जब आते हैं तो पूछती हो ना कि पहले कभी मिले थे? जब औरों को कल्प पहले वाली बातें याद दिलाती हो तो याद दिलाने वालों को अपने-आप की तो याद होगी ना? दर्पण स्पष्ट नहीं है? जब दर्पण स्पष्ट होता है और पॉवरफुल  होता है तो जो जैसा है वह वैसे ही दिखाई देता है। आप विशेष आत्माएं और सर्व श्रेष्ठ आत्माएं क्या अपनी श्रेष्ठ स्टेज को देख नहीं पातीं? इतनी ही देरी है, विनाश के आने में, जब तक आप निमित्त बनी हुई आत्माओं को अपने सम्पूर्ण स्टेज का स्पष्ट साक्षात्कार हो जाए। अब बताओ विनाश में कितना समय है? जल्दी होना है कि देरी है?

आज सद्गुरूवार है ना? तो आज वतन में रूह-रिहान चल रही थी। कौनसी रूह-रिहान? वर्तमान स्टेज कहाँ तक नम्बरवार पुरूषार्थियों की चल रही है? इसमें रिजल्ट क्या निकली होगी? पहले प्रश्न की रिजल्ट में मैजारिटी 50% से ज्यादा नहीं निकले। वह पहला प्रश्न कौन-सा? इस वर्ष का जो महत्व सुनाया था और डायरेक्शन दिया था कि यह वर्ष विशेष रूप में याद की यात्रा में रहना है वा अव्यक्त स्थिति में स्थित रहते हुए वरदान प्राप्त करने हैं? तो डायरेक्शन प्रमाण जो वर्ष के आदि में अटेन्शन और स्थिति रही वह अभी है? जो अव्यक्त वातावरण व रूहानी अनुभव पहले किये क्या वही रूहानी स्थिति अभी है? स्टेज में व अनुभव में फर्क है? जैसे सभी सेवा-केन्द्रों का आकर्षणम य, वातावरण, जो आप सभी को भी आकर्षण करता रहा, वही क्या सर्विस करते हुए नहीं बन सकता है? इस प्रश्न के रिजल्ट में सुनाया कि 50% भी रिजल्ट नहीं था।

दूसरे प्रश्न में रिजल्ट 60% ठीक थी। वह कौन-सा प्रश्न? सर्विस की रिजल्ट वा उमंग उत्साह में रिजल्ट बहुत अच्छी है। लेकिन बैलेन्स कहाँ है? अगर बैलेन्स ठीक रखो तो बहुत शीघ्र ही मास्टर सक्सेसफुल हो कर अपनी प्रजा और भक्तों को ब्लिस (Bliss) देकर इस दु:ख की दुनिया से पार कर सकेंगे। अभी भक्तों की पुकार स्पष्ट और समीप नहीं सुनाई देती है क्योंकि आपको स्वयं ही अपनी स्टेज स्पष्ट नहीं हैं। यह है दूसरे प्रश्न की रिजल्ट।

तीसरा प्रश्न है, सम्पर्क वा सम्बन्ध में स्वयं अपने आप से सन्तुष्ट वा अन्य आत्माएं कहाँ तक सन्तुष्ट रहीं, सर्विस में वा प्रवृत्ति में। सेवा-केन्द्र भी प्रवृत्ति है ना? तो प्रवृत्ति में व सर्विस में सन्तुष्टता कहाँ तक रही? इसमें माइनॉरिटी पास हैं। मैजॉरिटी 50-50 है। अभी है, अभी नहीं है। आज है, कल नहीं है। इसको 50-50 कहते हैं। इन तीनों प्रश्नों से चलते हुए वर्ष की रिजल्ट स्पष्ट है ना? सुनाया था कि इस वर्ष में विशेष वरदान ले सकते हो? लेकिन एक मास ही वरदानी-मास समझ अटेन्शन रखा। अब फिर धीरे-धीरे समयानुसार वरदानी-वर्ष भूलता जा रहा है।

इसलिए जितना ही इस वरदानी वर्ष में वरदान लेने की स्मृति में रहेंगे तो सहज वरदान भी प्राप्त होंगे, और यदि विस्मृति हुई तो विघ्नों का सामना भी बहुत करेंगे। इसलिए चारों ओर सर्व ब्राह्मण परिवार की आत्माओं के आगे सर्वप्रकार के विघ्नों को मिटाने के लिए जैसे पहले मास में याद की वा लगन की अग्नि को प्रज्वलित किया वैसे ही अभी ऐसा ही अव्यक्त वातावरण बनाना। एक तरफ वरदान दूसरी तरफ विघ्न। दोनों का एक-दूसरे के साथ सम्बन्ध है। सिर्फ अपने प्रति विघ्न-विनाशक नहीं बनना है। लेकिन अपने ब्राह्मण-कुल की सर्व-आत्माओं के प्रति विघ्न-विनाश करने के लिए सहयोगी बनना है ऐसी स्पीड तेज करो। बीच-बीच में चलते-चलते स्पीड ढीली कर देते हो। इसलिए प्रत्यक्षता होने में भी ड्रामा में इतनी देर दिखाई दे रही है। तभी तो स्वयं को भी प्रत्यक्ष कर सकेंगे। अपने में सर्वशक्तिवान का प्रत्यक्ष रूप अनुभव करो। एक दो शक्ति का नहीं, सर्वशक्तिवान् का। मास्टर सर्वशक्तिवान् हो, न कि दो चार शक्तिवान् की सन्तान हो? सर्वशक्तिवान् को प्रत्यक्ष करो। अच्छा।

मास्टर ब्लिसफुल, मास्टर नॉलेजफुल, मास्टर सक्सेसफुल, सर्व श्रेष्ठ, सदा रूहानी संग के रंग में रहने वाले विशेष आत्माओं को याद-प्यार और नमस्ते।

इस मुरली की विशेष बातें

जैसे कुसंग में रहने वाली आत्माओं का मायावी रंग छिप नहीं सकता वैसे ही श्रेष्ठ संग में रहने वाली आत्माओं का रूहानी रंग भी दिखाई देना चाहिए। कोई भी देखे तो उनको यह मालूम हो कि ये रूहानी रंग में रंगी आत्माएं हैं।

28-06-73   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन

 

योगयुक्त होने से स्वत: युक्ति- युक्त संकल्प, बोल और कर्म होंगे

  

सदा विजयी बनाने वाले, मरणासन्न आत्माओं को जी-दान देने वाले, सदा श्रेष्ठ कर्म करने और करवाने वाले योगेश्वर शिवबाबा बोले:-

जैसे जिसमानी मिलिट्री को मार्शल ऑर्डर करते हैं - एक सेकेण्ड में जहाँ हो, जैसे हो, वहाँ ही खड़े हो जाओ। अगर वह इस ऑर्डर को सोचने में व समझने में ही टाइम लगा दे तो उसका रिजल्ट क्या होगा? विजय का प्लान प्रैक्टिकल में नहीं आ सकता। इसी प्रकार सदा विजयी बनने वाले की विशेषता यही होगी एक सेकेण्ड में अपने संकल्प को स्टॉप कर लेना। कोई भी स्थूल कार्य व ज्ञान के मनन करने में बहुत बिज़ी हैं लेकिन ऐसे समय में भी अपने आप को एक सेकेण्ड में स्टॉप कर लेना।

जैसे वे लोग यदि बहुत तेजी से दौड़ रहे हैं वा कश्म-कश के युद्ध में उपस्थित हैं, वे ऐसे समय में भी स्टॉप कहने से स्टॉप हो जायेंगे। इसी प्रकार यदि किसी समय यह संकल्प नहीं चलता है अथवा इस घड़ी मनन करने के बजाय बीज रूप अवस्था में स्थित हो जाना है। तो सेकेण्ड में स्टॉप हो सकते हैं? जैसे स्थूल कर्मेन्द्रियों को एक सेकेण्ड में जैसे और जहाँ करना चाहें वह कर सकते हैं, अधिकार है न उन पर? ऐसे बुद्धि के ऊपर और संकल्पों के ऊपर भी अधिकारी बने हो? फुलस्टॉप वर्ना चाहो तो कर सको क्या ऐसा अभ्यास है? विस्तार में जाने के बजाय एक सेकेण्ड में फुलस्टॉप हो जाय ऐसी स्थिति समझते हो? जैसे ड्राइविंग का लाइसेन्स लेने जाते हैं तो जानबूझ कर भी उनसे तेज स्पीड करा के फिर फुलस्टॉप कराते हैं व बैक कराते हैं। यह भी प्रैक्टिस है ना? तो अपनी बुद्धि को चलाने और ठहराने की भी प्रैक्टिस करनी है। कमाल तब कहेंगे जब ऐसे समय पर एक सेकेण्ड में स्टॉप हो जायें। निरन्तर विजयी वह जिसके युक्ति-युक्त संकल्प व युक्ति-युक्त बोल व युक्ति-युक्त कर्म हों या जिसका एक संकल्प भी व्यर्थ न हो। वह तब होगा जब यह प्रैक्टिस होगी मानो कोई ऐसी सर्विस है जिसमें फुल विजयी होना होता है तो ऐसे समय भी स्टॉप करने का अभ्यास करो।

अभी समय ऐसा आ रहा है जो सारे भंभोर को आग लगेगी। उस आग से बचाने के लिए मुख्य दो बातें आवश्यक हैं। जब विनाश की आग चारों ओर लगेगी उस समय आप श्रेष्ठ आत्माओं का पहला कर्त्तव्य है-शान्ति का दान अर्थात् सफलता का बल देना। उसके बाद क्या चाहिए? फिर जिसको जो आवश्यकता होती है वह पूर्ण की जाती है। आप लोगों को ऐसे समय उनकी कौन-सी आवश्यकता पूर्ण करनी पड़ेगी? उस समय हरेक को अलग- अलग शक्ति की आवश्यकता होगी। कोई को सहन करने की शक्ति की आवश्यकता होगी, किसी को समेटने की शक्ति की आवश्यकता होगी, किसी को निर्णय करने की शक्ति की आवश्यकता होगी और कोई को मुक्ति की आवश्यकता होगी। जिसकी जो आशा होगी वह पूर्ण करने के लिये बाप के परिचय द्वारा एक सेकेण्ड में अशान्त आत्मा को शान्त कराने की शक्ति भी उस समय आवश्यक होगी। तो यह सभी शक्तियाँ अभी से ही इकट्ठी करनी हैं, नहीं तो उस समय जी-दान कैसे दे सकेंगे? सारे विश्व की सर्व- आत्माओं को शक्तियों का दान देना पड़ेगा। इतना स्टॉक जमा करना है जो स्वयं भी अपने को शक्ति के आधार पर चला सकें और दूसरों को भी दे सकें। कोई भी वंचिज न रहे। एक आत्मा भी यदि वंचित रही तो बोझ किस पर होगा? जो निमित्त बने हुए हैं - जी-दान देने के लिये। तो अपनी हर शक्ति के स्टॉक को चेक करो। जिनके पास शक्तियों का स्टॉक जमा है वही लक्की स्टार्स के रूप में विश्व की आत्माओं के बीच चमकते हुये नजर आयेंगे। तो अब ऐसी चेकिंग करनी है।

अमृत वेले से उठकर अपने को अटेन्शन के पट्टे पर चलाना है। पटरी पर गाड़ी ठीक चलेगी ना? तुम्हारे ऊपर सारे विश्व की जिम्मेवारी है, सिर्फ भारत की नहीं। श्रेष्ठ आत्माओं का हर कर्म महान् है ना? तो यह चेकिंग करनी है। सारे दिन में कोई ऐसा बोल तो नहीं बोला? व मन्सा में कोई व्यर्थ संकल्प तो नहीं चला या कोई कर्म राँग तो नहीं हुआ? हर संकल्प पर पहले से ही अटेन्शन रहे। योग-युक्त होने से ऑटोमेटिकली युक्ति-युक्त संकल्प, बोल और कर्म होगा। अच्छा।

महावाक्यों का सार

1. सदा विजयी बनने वाले की विशेषता यही होगी कि वह एक सेकेण्ड में अपने संकल्प को स्टॉप कर लेगा।

2. निरन्तर विजयी के युक्ति-युक्त संकल्प, युक्ति-युक्त बोल व युक्ति- युक्त कर्म हों, एक संकल्प भी व्यर्थ न हो। यह तब होगा जब अपनी बुद्धि को चलाने और ठहराने की प्रैक्टिस की होगी।

3. महाविनाश के समय आप श्रेष्ठ आत्माओं का पहला कर्त्तव्य है शान्ति का दान देना और फिर हरेक आत्मा की आवश्यकतानुसार शक्तियों का दान देना।

4. श्रेष्ठ आत्माओं का हर कर्म महान् होता है।

 

 

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QUIZ QUESTIONS

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 प्रश्न 1 :- संपूर्ण स्टेज की प्रत्यक्षता के विषय में बापदादा क्या समझानी दे रहे हैं?

 प्रश्न 2 :- आज वतन में रूह रिहान करते हुए बापदादा कौन से प्रश्नों की रिजल्ट देख रहे हैं?

 प्रश्न 3 :- "अपने में सर्वशक्तिवान का प्रत्यक्ष रूप अनुभव करो" इस विषय में बापदादा क्या समझानी दे रहे हैं?

 प्रश्न 4 :- सदा विजयी बनने के लिए बापदादा कौन सा अभ्यास करने की समझानी दे रहे हैं?

 प्रश्न 5 :- विनाश की आग जब लगेगी, श्रेष्ठ आत्माओं के कर्तव्य क्या होंगे?

 

       FILL IN THE BLANKS:-    

( श्रेष्ठ, समान, संस्कार, आकर्षण, अटेन्शन, सर्विस, बोल, वातावरण, संकल्प, प्रैक्टिस, अटेन्शन, मन्सा, लक्की, संकल्प, स्टार्स )

 

 1   संग का रंग अवश्य लगता है। तो जो आत्माएं सदा बापदादा के समीप अर्थात् ____ संग में रहती हैं, उन के गुण व _____ तो अवश्य बापदादा के _____ ही होंगे।

 2  जैसे सभी सेवा-केन्द्रों का आकर्षणमय ______, जो आप सभी को भी ______ करता रहा, वही _____ करते हुए बन सकता है।

 3  निरन्तर विजयी के युक्ति-युक्त ______, युक्ति-युक्त ___ व युक्ति- युक्त कर्म हों, एक संकल्प भी व्यर्थ न हो। यह तब होगा जब अपनी बुद्धि को चलाने और ठहराने की ______ की होगी।

 4  सारे दिन में कोई ऐसा बोल तो नहीं बोला व _____ में कोई व्यर्थ संकल्प तो नहीं चला या कोई कर्म राँग तो नहीं हुआ- हर ______ पर पहले से ही ______ रहे।

 5  अपनी हर शक्ति के _____ को चेक करो। जिनके पास शक्तियों का स्टॉक जमा है वही ____ ____ के रूप में विश्व की आत्माओं के बीच चमकते हुये नजर आयेंगे।

 

सही गलत वाक्यो को चिन्हित करे:-

 

 1  :- श्रेष्ठ संग में रहने वालों का रूहानी रंग भी कईयों को दिखाई देना चाहिए।

 2  :- अभी भक्तों की पुकार स्पष्ट और समीप नहीं सुनाई देती है क्योंकि स्वयं ही अपनी स्टेज स्पष्ट नहीं हैं।

 3  :- तुम्हारे ऊपर सारे विश्व की जिम्मेवारी है, सिर्फ भारत की नहीं। साधारण आत्माओं का हर कर्म महान् होता है।

 4  :- यह सभी शक्तियाँ कल से ही इकट्ठी करनी हैं, नहीं तो उस समय जी-दान नहीं दे सकेंगे।

 5  :- योग-युक्त होने से ऑटोमेटिकली युक्ति-युक्त संकल्प, बोल और कर्म होगा।

 

 

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QUIZ ANSWERS

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 प्रश्न 1 :- संपूर्ण स्टेज की प्रत्यक्षता के विषय में बापदादा क्या समझानी दे रहे हैं?

उत्तर 1 :- बापदादा समझानी दे रहे हैं :-

          श्रेष्ठ संग में रहने वालों का रूहानी रंग भी सभी को दिखाई देना चाहिए। कोई भी देखे तो उनको यह मालूम हो कि यह रूहानी रंग में रंगी हुई आत्माएं हैं। यह रूहानी रंग प्रत्यक्ष होना चाहिए।

          ड्रामा प्लान अनुसार आप श्रेष्ठ आत्माओं के साथ पश्चाताप का सम्बन्ध है। जब तक पश्चाताप न किया है तब तक मुक्तिधाम जाने का वरसा भी नहीं पा सकते।

          अभी अपने ही आगे अपने सम्पूर्ण स्टेज प्रत्यक्ष नहीं है तो औरों के आगे कैसे प्रत्यक्ष होंगे। अपनी सम्पूर्ण स्टेज आप को श्रेष्ठ दिखाई दे। समीप के हिसाब से उस समान बनेंगे तो अपनी सम्पूर्ण स्टेज दिखाई देती है।

          आत्माएं आप विशेष आत्माएं और सर्व श्रेष्ठ आत्माएं अपनी श्रेष्ठ स्टेज को देख नहीं पातीं। इतनी ही देरी है, विनाश के आने में, जब तक आप निमित्त बनी हुई आत्माओं को अपने सम्पूर्ण स्टेज का स्पष्ट साक्षात्कार हो जाए। अन्त की डेट सभी की प्रत्यक्षता के आधार पर होगी।

 

 प्रश्न 2 :- आज वतन में रूह रिहान करते हुए बापदादा कौन से प्रश्नों की रिजल्ट देख रहे हैं?

उत्तर 2 :- बापदादा प्रश्नों की रिज़ल्ट देख रहे हैं :-

          यह वर्ष विशेष रूप में याद की यात्रा में रहना है वा अव्यक्त स्थिति में स्थित रहते हुए वरदान प्राप्त करने हैं। तो डायरेक्शन प्रमाण जो वर्ष के आदि में अटेन्शन और स्थिति रही वह अभी है जैसे सभी सेवा-केन्द्रों का आकर्षणमय, वातावरण, जो आप सभी को भी आकर्षण करता रहा, वही क्या सर्विस करते हुए नहीं बन सकता है

          सर्विस की रिजल्ट वा उमंग उत्साह में रिजल्ट बहुत अच्छी है। अगर बैलेन्स ठीक रखो तो बहुत शीघ्र ही मास्टर सक्सेसफुल हो कर अपनी प्रजा और भक्तों को ब्लिस (Bliss) देकर इस दु:ख की दुनिया से पार कर सकेंगे।

          तीसरा प्रश्न है, सम्पर्क वा सम्बन्ध में स्वयं अपने आप से सन्तुष्ट वा अन्य आत्माएं कहाँ तक सन्तुष्ट रहीं, सर्विस में वा प्रवृत्ति में। सेवा-केन्द्र भी प्रवृत्ति है ना। तो प्रवृत्ति में व सर्विस में सन्तुष्टता कहाँ तक रही।

 

 प्रश्न 3 :- "अपने में सर्वशक्तिवान का प्रत्यक्ष रूप अनुभव करो" इस विषय में बापदादा क्या समझानी दे रहे हैं?

उत्तर 3 :- बापदादा समझानी दे रहे हैं-

           चारों ओर सर्व ब्राह्मण परिवार की आत्माओं के आगे सर्वप्रकार के विघ्नों को मिटाने के लिए जैसे पहले मास में याद की वा लगन की अग्नि को प्रज्वलित किया वैसे ही अभी ऐसा ही अव्यक्त वातावरण बनाना।

           एक तरफ वरदान दूसरी तरफ विघ्न। दोनों का एक-दूसरे के साथ सम्बन्ध है। सिर्फ अपने प्रति विघ्न-विनाशक नहीं बनना है। लेकिन अपने ब्राह्मण-कुल की सर्व-आत्माओं के प्रति विघ्न-विनाश करने के लिए सहयोगी बनना है ऐसी स्पीड तेज करो।

          बीच-बीच में चलते-चलते स्पीड ढीली कर देते हो। इसलिए प्रत्यक्षता होने में भी ड्रामा में इतनी देर दिखाई दे रही है।

          अपने में सर्वशक्तिवान का प्रत्यक्ष रूप अनुभव करो। एक दो शक्ति का नहीं, सर्वशक्तिवान् का। मास्टर सर्वशक्तिवान् हो, न कि दो चार शक्तिवान् की सन्तान हो। सर्वशक्तिवान् को प्रत्यक्ष करो।

 

 प्रश्न 4 :- सदा विजयी बनने के लिए बापदादा कौन सा अभ्यास करने की समझानी दे रहे हैं?

उत्तर 4 :- बापदादा समझानी दे रहे हैं :-

          सदा विजयी बनने वाले की विशेषता यही होगी एक सेकेण्ड में अपने संकल्प को स्टॉप कर लेना। कोई भी स्थूल कार्य व ज्ञान के मनन करने में बहुत बिज़ी हैं लेकिन ऐसे समय में भी अपने आप को एक सेकेण्ड में स्टॉप कर लेना।

          जैसे स्थूल कर्मेन्द्रियों को एक सेकेण्ड में जैसे और जहाँ करना चाहें वह कर सकते हैं, उन पर अधिकार है ऐसे बुद्धि के ऊपर और संकल्पों के ऊपर भी अधिकारी बनें।

          फुलस्टॉप करना चाहो तो कर सको ऐसा अभ्यास हो। विस्तार में जाने के बजाय एक सेकेण्ड में फुलस्टॉप हो जाय।

          अपनी बुद्धि को चलाने और ठहराने की भी प्रैक्टिस करनी है। कमाल तब कहेंगे जब ऐसे समय पर एक सेकेण्ड में स्टॉप हो जायें।

          निरन्तर विजयी वह जिसके युक्ति-युक्त संकल्प व युक्ति-युक्त बोल व युक्ति-युक्त कर्म हों या जिसका एक संकल्प भी व्यर्थ न हो। वह तब होगा जब यह प्रैक्टिस होगी मानो कोई ऐसी सर्विस है जिसमें फुल विजयी होना होता है तो ऐसे समय भी स्टॉप करने का अभ्यास करो।

 

 प्रश्न 5 :- विनाश की आग जब लगेगी, श्रेष्ठ आत्माओं के कर्तव्य क्या होंगे?

उत्तर 5 :- जब विनाश की आग चारों ओर लगेगी :-

          उस समय आप श्रेष्ठ आत्माओं का पहला कर्त्तव्य है-शान्ति का दान अर्थात् सफलता का बल देना। फिर जिसको जो आवश्यकता होती है वह पूर्ण की जाती है।

          उस समय हरेक को अलग- अलग शक्ति की आवश्यकता होगी। कोई को सहन करने की शक्ति की आवश्यकता होगी, किसी को समेटने की शक्ति की आवश्यकता होगी, किसी को निर्णय करने की शक्ति की आवश्यकता होगी और कोई को मुक्ति की आवश्यकता होगी।

          जिसकी जो आशा होगी वह पूर्ण करने के लिये बाप के परिचय द्वारा एक सेकेण्ड में अशान्त आत्मा को शान्त कराने की शक्ति भी उस समय आवश्यक होगी। सारे विश्व की सर्व- आत्माओं को शक्तियों का दान देना पड़ेगा।

          इतना स्टॉक जमा करना है जो स्वयं भी अपने को शक्ति के आधार पर चला सकें और दूसरों को भी दे सकें। कोई भी वंचित न रहे।

          एक आत्मा भी यदि वंचित रही तो बोझ उन पर होगा जो निमित्त बने हुए हैं - जी-दान देने के लिये। तो अपनी हर शक्ति के स्टॉक को चेक करो।

 

       FILL IN THE BLANKS:-    

( श्रेष्ठ, समान, संस्कार, आकर्षण, अटेन्शन, सर्विस, बोल, वातावरण, संकल्प, प्रैक्टिस, अटेन्शन, मन्सा, लक्की, संकल्प, स्टार्स )

 

 1   संग का रंग अवश्य लगता है। तो जो आत्माएं सदा बापदादा के समीप अर्थात् ____ संग में रहती हैं, उन के गुण व _____ तो अवश्य बापदादा के _____ ही होंगे।

श्रेष्ठ / संस्कार /  समान

 

 2  जैसे सभी सेवा-केन्द्रों का आकर्षणमय ______, जो आप सभी को भी ______ करता रहा, वही _____ करते हुए बन सकता है।

वातावरण /  आकर्षण /  सर्विस

 

 3  निरन्तर विजयी के युक्ति-युक्त ______, युक्ति-युक्त ___ व युक्ति- युक्त कर्म हों, एक संकल्प भी व्यर्थ न हो। यह तब होगा जब अपनी बुद्धि को चलाने और ठहराने की ______ की होगी।

संकल्प /  बोल /  प्रैक्टिस

 

 4  सारे दिन में कोई ऐसा बोल तो नहीं बोला व _____ में कोई व्यर्थ संकल्प तो नहीं चला या कोई कर्म राँग तो नहीं हुआ- हर ______ पर पहले से ही ______ रहे।

 मन्सा /  संकल्प /  अटेन्शन

 

 5  अपनी हर शक्ति के _____ को चेक करो। जिनके पास शक्तियों का स्टॉक जमा है वही ____ ____ के रूप में विश्व की आत्माओं के बीच चमकते हुये नजर आयेंगे।

स्टॉक /  लक्की /  स्टार्स

 

सही गलत वाक्यो को चिन्हित करे:-

 

 1  :- श्रेष्ठ संग में रहने वालों का रूहानी रंग भी कईयों को दिखाई देना चाहिए।

श्रेष्ठ संग में रहने वालों का रूहानी रंग भी सभी को दिखाई देना चाहिए।

 

 2  :- अभी भक्तों की पुकार स्पष्ट और समीप नहीं सुनाई देती है क्योंकि स्वयं ही अपनी स्टेज स्पष्ट नहीं हैं।

 

3  :- तुम्हारे ऊपर सारे विश्व की जिम्मेवारी है, सिर्फ भारत की नहीं। साधारण आत्माओं का हर कर्म महान् होता है।

तुम्हारे ऊपर सारे विश्व की जिम्मेवारी है, सिर्फ भारत की नहीं। श्रेष्ठ आत्माओं का हर कर्म महान् होता है।

 

 4  :- यह सभी शक्तियाँ कल से ही इकट्ठी करनी हैं, नहीं तो उस समय जी-दान नहीं दे सकेंगे।

यह सभी शक्तियाँ अभी से ही इकट्ठी करनी हैं, नहीं तो उस समय जी-दान नहीं दे सकेंगे।

 

 5  :- योग-युक्त होने से ऑटोमेटिकली युक्ति-युक्त संकल्प, बोल और कर्म होगा।