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AVYAKT MURLI

23 / 01 / 74

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23-01-74   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन

 

अब शक्ति सेना नाम को सार्थक बनाओ

 

निर्बल आत्मा को शक्ति देने वाले शक्तिदाता, चढ़ती कला की ओर ले जाने वाले रूहानी पण्डे और सब आधारों से निराधार बनाने वाले निराकार शिव बाबा शक्तियों के संगठन को सम्बोधित करते हुए बोले:-

क्या आप अपने को शक्ति सेना की वारियर (योद्धा) समझती हो? जैसे आपके संगठन का नाम है-शक्ति-सेना, क्या वैसी आप अपने को शक्ति समझती हो? यह नाम तो आपका परिचय देता है, क्योंकि यह कर्त्तव्य के आधार पर है। शक्ति सेना का अर्थ है -- सर्व-शक्तियों से सम्पन्न आत्माओं का संगठन। तो प्रश्न है कि जैसे नाम परिचय सिद्ध करता है तो क्या वैसे प्रैक्टिकल में कर्त्तव्य भी हैं?

सर्व-शक्ति सम्पन्न बनने की युक्ति बताते हुए बाबा बोले-सदा यह स्मृति में रखो कि बाप1 का नाम2 क्या है और बाप की महिमा क्या है? फिर उसके बाद यह विचार करो, कि जो बाप का काम3 है, क्या वही मेरा भी काम है? अगर बाप के नाम को सिद्ध करने वाला काम न किया, तो बाप का नाम बाला4 कैसे करोगी?

1. परमपति परमात्मा; 2. गुणवाचक नाम 3. सर्व का कल्याण करने का दिव्य कर्म; 4. उच्च; प्रसिद्ध) यह सोचो, कि बाप की यह जो महिमा है, कि वह सर्वशक्तिवान है तो वैसा ही मेरा भी स्वरूप हो, क्योंकि बाप की महिमा के अनुसार ही तो अपना स्वरूप बनाना है। बाप सर्वशक्तिमान हो और बच्चे शक्तिहीन; बाप नॉलेजफुल (ज्ञानसागर) हो और बच्चे अनपढ़-यह शोभेगा क्या?

यह देखना है कि हर सेकेण्ड चढ़ती कला की तरफ हैं? एक सेकेण्ड भी चढ़ती कला के बजाय ठहरती कला न हो, गिरती कला की तो बात ही नहीं। आप हो पण्डे। अगर पण्डे ठहरती कला में आ गये वा रूक गये तो आपके पीछे जो विश्व की आत्माएं चलने वाली हैं वे सब रूक जावेंगी। अगर इंजन ठहर जाय तो साथ ही डब्बे तो स्वत: ही ठहर जावेंगे। आप सबके पीछे विश्व की आत्मायें हैं। आप लोगों का एक सेकेण्ड भी रूकना साधारण बात नहीं है, क्या इतनी ज़िम्मेवारी समझ कर चलती हो? विशेष स्थान पर और विशेष स्थान के रूप में सबकी नजरों में हो न? तो जब ड्रामानुसार विशेष स्थान पर विशेष पार्ट बजाने का चान्स मिला है तो अपने विशेष  पार्ट को महत्व दे चलना चाहिए न? अगर अपना महत्व न रखेंगे, तो अन्य भी आपका महत्व नहीं रखेंगे। इसलिये अब अपने पार्ट के महत्व को जानो। हमारे ऊपर कोई ज़िम्मेवारी नहीं, अब यह संकल्प भी नहीं करना है। आप लोगों को देखकर कोई सौदा करता है, तो सौदा कराने वाले आप हो न?

यह तो अन्डरस्टुड (समझ) है कि अगर स्थापना की तैयारी कम है, तो विनाश की तैयारी कैसे होगी? इन दोनों का आपस में कनेक्शन (सम्बन्ध) है न? समय पर तैयार हो ही जावेंगे, यह समझना भी राँग (गलत) है। अगर बहुत समय से महाविनाश का सामना करने की तैयारी का अभ्यास न होगा तो उस समय भी सफल न हो सकेंगे। इसका बहुत समय से अभ्यास चाहिए; नहीं तो इतने वर्ष अभ्यास के क्यों दिये गये हैं? बहुत समय का कनेक्शन है, इसलिए ही ड्रामानुसार बहुत समय पुरूषार्थ के लिए भी मिला है। बहुत समय की प्राप्ति के लिये बहुत समय से पुरूषार्थ भी करना है, क्या ऐसे बहुत समय का पुरूषार्थ है? साइंस वालों को महाविनाश के लिये ऑर्डर करें? एक सेकेण्ड की ही तो बात है, इशारा मिला और किया। क्या ऐसे ही शक्ति-सेना तैयार है? एक सेकेण्ड का इशारा है--सदा देही-अभिमानी। अल्पकाल के लिये नहीं, सदा काल के लिए हो जाओ। ऐसा इशारा मिले तो आप क्या देही अभिमानी हो जावेंगे या फिर उस समय साधन ढूढेंगे, प्वाइन्टस् सोचेंगे या अपने को ठहराने की कोशिश करेंगे? इसलिए अभी से ऐसा पुरूषार्थ करो। मिलिट्री को तो अचानक ही ऑर्डर मिलते हैं न?

अपने आप प्रोग्राम बनाओ और स्वयं ही स्वयं की उन्नति करो। प्रोग्राम बनेगा तो कर लेंगे, यह भी आधार मत रखो। भट्ठी बनेगी तो तीन दिन अच्छे बीतेंगे, इसमें तो संगठन का सहयोग मिलता है। लेकिन यह आधार भी नहीं। कभी सहयोग मिल सकता है और कभी नहीं भी मिल सकता है। अभ्यास निराधार का होना चाहिए। अगर चान्स मिल जाता है, तो अच्छा ही है। न मिलने पर भी, अभ्यास से हटना नहीं चाहिए। प्रोग्राम के आधार पर, अपनी उन्नति का आधार बनाना, यह भी कमज़ोरी है। यह तो अनादि प्रोग्राम मिला हुआ है न? वह क्यों नहीं याद रखते हो? हर वक्त भट्ठी में रहना है, यह तो अनादि प्रोग्राम मिला हुआ है न? अच्छा!

जैसा अपना नाम वैसा काम करने वाले, बाप का नाम बाला करने वाले, एक सेकेण्ड में आर्डर मिलने पर तैयार हो जाने वाले और निराधार होकर पुरूषार्थ करने वाले रूहानी सैनानियों को बापदादा का याद-प्यार और नमस्ते।

28-01-74   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन

महिमा को स्वीकार करने से रूहानी ताकत में कमी

 

एक बच्चे को मनोहर शिक्षायें देते हुए रूहानी पिता परमात्मा शिव बोले:-

बच्चे तुम युद्ध-स्थल पर उपस्थित रूहानी योद्धा हो, फिर कहीं योद्धापन भूल अपनी सहज-सुखाली जीवन बिताते हुए अपने जीवन के प्रति साधन और सम्पत्ति लगाते हुए समय व्यतीत तो नहीं कर रहे हो? जैसे वारियर को धुन लगी ही रहती है विजय प्राप्त करने की, क्या ऐसी मायाजीत बनने की लगन, अग्नि की तरह प्रज्वलित है? बच्चे! अब आपके सामने सेवा का फल साधनों के रूप में और महिमा के रूप में प्राप्त होने का समय है। इसी समय अगर यह फल स्वीकार कर लिया तो फिर कर्मातीत स्टेज का फल, सम्पूर्ण तपस्वीपन का फल और अतीन्द्रिय सुख की प्राप्ति का फल प्राप्त न हो सकेगा।

 

 

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QUIZ QUESTIONS

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 प्रश्न 1 :- आज बाबा ने शक्ति सेना का क्या अर्थ बताया, साथ ही सर्व-शक्ति सम्पन्न बनने की क्या युक्ति बताई है?

 प्रश्न 2 :- चढ़ती कला और ठहरती कला के लिए आज बाबा ने क्या महावाक्य उच्चारित किये हैं?

 प्रश्न 3 :- प्रोग्राम और आधार प्रति बाबा ने बच्चों को क्या समझानी दी है?

 प्रश्न 4 :- आज बाबा ने बच्चों को कौन कौन से टाइटल्स के द्वारा याद प्यार दी है?

 प्रश्न 5 :- आज रूहानी पिता ने सेवा के फल प्रति क्या मनोहर शिक्षा दी है?

 

       FILL IN THE BLANKS:-    

(  विनाश, सर्वशक्तिमान, युद्ध-स्थल, वारियर, स्थापना, महत्व, शोभेगा, चान्स, मायाजीत, अनपढ़, प्रज्वलित, रूहानीयोद्धा, ड्रामानुसार )

 

 1   जब  _______ विशेष स्थान पर विशेष पार्ट बजाने का _______ मिला है तो अपने विशेष  पार्ट को _______ दे चलना चाहिए न?

 2  बच्चे तुम _______ पर उपस्थित _______ हो।

 3  बाप _______ हो और बच्चे शक्तिहीन; बाप नॉलेजफुल (ज्ञानसागर) हो और बच्चे _______ यह _______ है क्या?

 4  जैसे  _______ को धुन लगी ही रहती है विजय प्राप्त करने की, क्या ऐसी  _______ बनने की लगन, अग्नि की _______ तरह  है?

 5  यह तो अन्डरस्टुड (समझ) है कि अगर  _______ की तैयारी कम है, तो _______ की तैयारी कैसे होगी?

 

सही गलत वाक्यो को चिन्हित करे:-

 

 1  :- बाप की महिमा के अनुसार ही तो अपना स्वरूप बनाना है।

 2  :- एक सेकेण्ड का इशारा है--सदा देही-अभिमानी।

 3  :- कम समय की प्राप्ति के लिये  बहुत समय से पुरूषार्थ भी करना है।

 4  :- हर वक्त भट्ठी में रहना है, यह तो अनादि प्रोग्राम मिला हुआ है।

 5   :- हमारे ऊपर कोई ज़िम्मेवारी नहीं, अब यह संकल्प भी करना है।

 

 

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QUIZ ANSWERS

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 प्रश्न 1 :- आज बाबा ने शक्ति सेना का क्या अर्थ बताया, साथ ही सर्व-शक्ति सम्पन्न बनने की क्या युक्ति बताई है?

 उत्तर 1 :-  बाबा ने बताया:- शक्ति सेना का अर्थ  है -- सर्व-शक्तियों से सम्पन्न आत्माओं का संगठन। और बाबा सर्व-शक्ति सम्पन्न बनने की युक्ति बताते हैं कि:-

          सदा यह स्मृति में रखो कि बाप का नाम क्या है? और बाप की महिमा क्या है?

          फिर उसके बाद यह विचार करो, कि जो बाप का काम है, क्या वही मेरा भी काम है?

          अगर बाप के नाम को सिद्ध करने वाला काम न किया, तो बाप का नाम बाला4 कैसे करोगी?

          ❹ 1.परमपति परमात्मा; 2. गुणवाचक नाम 3. सर्व का कल्याण करने का दिव्य कर्म; 4. उच्च; प्रसिद्ध)

          यह सोचो, कि बाप की यह जो महिमा है, कि वह सर्वशक्तिवान है तो वैसा ही मेरा भी स्वरूप हो, क्योंकि बाप की महिमा के अनुसार ही तो अपना स्वरूप बनाना है।

 

प्रश्न 2 :- चढ़ती कला और ठहरती कला के लिए आज बाबा ने क्या महावाक्य उच्चारित किये हैं?

उत्तर 2 :-  बाबा कहते :-

          यह देखना है कि हर सेकेण्ड चढ़ती कला की तरफ हैं? एक सेकेण्ड भी चढ़ती कला के बजाय ठहरती कला न हो, गिरती कला की तो बात ही नहीं

          आप हो पण्डे। अगर पण्डे ठहरती कला में आ गये वा रूक गये तो आपके पीछे जो विश्व की आत्माएं चलने वाली हैं वे सब रूक जावेंगी।

          अगर इंजन ठहर जाये तो साथ ही डब्बे तो स्वत: ही ठहर जावेंगे।

          आप सबके पीछे विश्व की आत्मायें हैं। आप लोगों का एक सेकेण्ड भी रूकना साधारण बात नहीं है, क्या इतनी ज़िम्मेवारी समझ कर चलती हो?

 

 प्रश्न 3 :- प्रोग्राम और आधार प्रति बाबा ने बच्चों को क्या समझानी दी है?

उत्तर 3 :- बाबा कहते हैं कि :-

          अपने आप प्रोग्राम बनाओ और स्वयं ही स्वयं की उन्नति करो। प्रोग्राम बनेगा तो कर लेंगे, यह भी आधार मत रखो।

          भट्ठी बनेगी तो तीन दिन अच्छे बीतेंगे, इसमें तो संगठन का सहयोग मिलता है। लेकिन यह आधार भी नहीं।  कभी सहयोग मिल सकता है और कभी नहीं भी मिल सकता है। अभ्यास निराधार का होना चाहिए।

          अगर चान्स मिल जाता है, तो अच्छा ही है। न मिलने पर भी, अभ्यास से हटना नहीं चाहिए।

          प्रोग्राम के आधार पर, अपनी उन्नति का आधार बनाना, यह भी कमज़ोरी है।

 

 प्रश्न 4 :- आज बाबा ने बच्चों को कौन कौन से टाइटल्स के द्वारा याद प्यार दी है?

उत्तर 4 :- बाबा ने जो टाइटल्स दिये वो हैं:- जैसा अपना नाम वैसा काम करने वाले, बाप का नाम बाला करने वाले, एक सेकेण्ड में आर्डर मिलने पर तैयार हो जाने वाले और निराधार होकर पुरूषार्थ करने वाले रूहानी सैनानियों को बापदादा का याद-प्यार और नमस्ते।

 

 प्रश्न 5 :- आज रूहानी पिता ने सेवा के फल प्रति क्या मनोहर शिक्षा दी है?

 उत्तर 5 :-  आज रूहानी पिता परमात्मा शिव बोले:- बच्चे!         

          अब आपके सामने सेवा का फल साधनों के रूप में और महिमा के रूप में प्राप्त होने का समय है।

          इसी समय अगर यह फल स्वीकार कर लिया तो फिर कर्मातीत स्टेज का फल, सम्पूर्ण तपस्वीपन का फल और अतीन्द्रिय सुख की प्राप्ति का फल प्राप्त न हो सकेगा।

 

      FILL IN THE BLANKS:-    

(  विनाश, सर्वशक्तिमान, युद्ध-स्थल, वारियर, स्थापना, महत्व, शोभेगा, चान्स, मायाजीत, अनपढ़, प्रज्वलित, रूहानी योद्धा, ड्रामानुसार )

 

 1   जब _______  विशेष स्थान पर विशेष पार्ट बजाने का _______ मिला है तो अपने विशेष पार्ट को _______  दे चलना चाहिए न?

ड्रामानुसार /  चान्स   महत्व

 

 2  बच्चे तुम _______ पर उपस्थित _______ हो।

युद्ध-स्थल /  रूहानी योद्धा

 

 3  बाप _______ हो और बच्चे शक्तिहीन; बाप नॉलेजफुल (ज्ञानसागर) हो और बच्चे _______ -यह _______ है क्या?

सर्वशक्तिमान /  अनपढ़ /  शोभता

 

 4  जैसे  _______ को धुन लगी ही रहती है विजय प्राप्त करने की, क्या ऐसी _______ बनने की लगन, अग्नि की तरह _______ है?

 वारियर /  मायाजीत /  प्रज्वलित

 

 5  यह तो अन्डरस्टुड (समझ) है कि अगर _______ की तैयारी कम है, तो  _______ की तैयारी कैसे होगी?

 स्थापना /  विनाश

 

सही गलत वाक्यो को चिन्हित करे:-

 

 1  :- बाप की महिमा के अनुसार ही तो अपना स्वरूप बनाना है।

 

 2  :- एक सेकेण्ड का इशारा है--सदा देही-अभिमानी।【✔】

 

 3  :- कम समय की प्राप्ति के लिये  बहुत समय से पुरूषार्थ भी करना है।

बहुत समय की प्राप्ति के लिये  बहुत समय से पुरूषार्थ भी करना है।

 

 4  :- हर वक्त भट्ठी में रहना है, यह तो अनादि प्रोग्राम मिला हुआ है ?【✔

 

 5   :- हमारे ऊपर कोई ज़िम्मेवारी नहीं, अब यह संकल्प भी करना है।

 हमारे ऊपर कोई ज़िम्मेवारी नहीं, अब यह संकल्प भी नहीं करना है।