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AVYAKT MURLI

27 / 05 / 74

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27-05-74   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन

विश्व-कल्याण के निमित्त बनी आत्माओं के वचन भी सदा कल्याणकारी

अपने मधुर महावाक्यों द्वारा आत्माओं को महान् बना कर विश्व परिवर्तन करने वाले, आत्माओं की कर्म-कहानी को जानने वाले तथा रहमदिल विश्व पिता शिव बोले:-

आवाज़ में आने और आवाज़ से परे होने में कितना अन्तर है क्या इसके सभी अनुभवी बन चुके हो? (माइक में कुछ आवाज़ क्लियर नहीं था) देखो आवाज़ अगर यथार्थ नहीं है तो अच्छा नहीं लगता है ना? यन्त्र में जरा भी खिटखिट है तो ऐसी आवाज़ पसन्द नहीं करते हो ना? ऐसे ही आपका यह यन्त्र, मुख भी माइक है। इस मुख द्वारा भी जब कभी यथार्थ व युक्ति-युक्त बोल नहीं निकलते हैं, तो उसी समय सबको क्या अनुभव होगा या उस समय आपको मालूम नहीं पड़ता है क्या? जब स्थूल यन्त्र का आवाज़ भी पसन्द नहीं करते हो, तो नेचुरल मुख द्वारा निकला हुआ बोल व आवाज़ स्वयं को भी और सर्व को भी ऐसे ही अनुभव होना चाहिए। अगर यह महसूस करो, तो इस घड़ी से क्या परिवर्तन हो जाएगा, क्या जानते हो? इस घड़ी से सदा काल के लिए व्यर्थ बोल, विस्तार करने के बोल, समय व्यर्थ करने के बोल और अपनी कमज़ोरियों द्वारा अन्य आत्माओं को संगदोष में लाने वाले बोल सब समाप्त हो जावेंगे। महान् आत्माओं के हर बोल को महावाक्य कहा जाता है। महावाक्य अर्थात् महान् बनाने के महावाक्य। महावाक्य विस्तार के नहीं होते। जैसे वृक्ष के अन्दर बीज महान है और उसका विस्तार नहीं होता है लेकिन उसमें सारा सार होता है, ऐसे ही महावाक्य में विस्तार नहीं होता, किन्तु उसमें सार होता है, क्या ऐसे सार-युक्त, युक्ति-युक्त, योग-युक्त, शक्ति-युक्त, स्नेह-युक्त, स्वमान-युक्त और स्मृति-युक्त बोल बोलते हो?

जैसे आजकल की दुनिया में जो विनाशी पद धारण करने वाली विशेष आत्मायें हैं, वह भी अपने हर बोल को चैक कर फिर ही बोलती हैं कि कहीं मेरे द्वारा ऐसा कोई एक बोल भी न निकले, कि जो देश में व साथियों में संघर्ष का आधार बने। ऐसे ही विश्व का कल्याण करने के श्रेष्ठ कार्य में निमित्त बनी आप श्रेष्ठ आत्माएं हो; आपकी विश्व में विशेष स्थिति है। आपको यह भी चैक करना है कि मेरे द्वारा जो भी बोल निकलते हैं, क्या वह सर्व के व स्वयं के प्रति कल्याणकारी हैं? व्यर्थ की तो बात ही छोड़ दो। लेकिन अभी की स्टेज के अनुसार ऐसा कोई भी शब्द मुख से नहीं निकलना चाहिए जिसमें कल्याण का कार्य समाया हुआ न हो। पहले भी सुनाया था कि आप विशेष आत्माओं के हर बोल के महत्व का यादगार, अब तक भी भक्ति मार्ग में चलता आ रहा है -- वह कौन-सा है? आपके हर बोल के महत्व का यादगार भक्ति मार्ग में कौन-सा है? गीता तो ज्ञान का यादगार है-प्रैक्टिकल लाइफ में वह महत्व वर्णन करते हैं। देखो, आजकल की भी जो महान् आत्मायें हैं, तो भक्त लोग उनके हर बोल के पीछे सत्य वचन महाराज कहते हैं। चाहे व्यर्थ हो और चाहे गपोड़ा भी लगता हो फिर भी समझते हैं कि ये महान आत्माओं के बोल हैं, तो यह महत्व रखते हैं। सत्य वचन महाराज का यह यादगार कब से आरम्भ हुआ? पहले यथार्थ प्रैक्टिकल में चलता है, फिर भक्तिमार्ग में सिर्फ यादगार रह जाता है, यथार्थ नहीं होता है, तो जब भक्तिमार्ग में भी हर बोल का महत्व इतना अभी तक भी है, जो अन्तिम घड़ी तक भी देख व सुन रहे हो तो ऐसे महत्व वाले बोल जिसमें सत्यता तथा विश्व का कल्याण हो, क्या ऐसे हर बोल निकलते हैं? दिन प्रतिदिन नम्बरवार पुरूषार्थ अनुसार जो महारथी व महावीर बन रहे हैं, उन्हीं के मुख से निकलने वाले, हर बोल सत्य हो जावेंगे। अभी नहीं होते हैं, क्योंकि अभी तक व्यर्थ और साधारण बोल ज्यादा निकलते हैं।

जैसे कोई लेख या आर्टिकल लिखते हैं अथवा किसी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित करवाते हैं, तो लिखने वाले बाद में फिर से चैक करते हैं कि जो लिखा गया है, वह ठीक व प्रभावशाली है; जो लक्ष्य व टॉपिक है, क्या उसी के अनुसार है? ऐसे आप भी अमृतवेले से लेकर रात्रि तक प्रैक्टिकल मन, वाणी, कर्म इन तीनों का एक लेख या लेखा  लिखते हो अर्थात् ड्रामा में कर्म द्वारा नूँधते हो। रात को अपनी हर रोज की प्रैक्टिकल नूँध व लेखनी को चैक करो कि कितनी समर्थ अर्थात् प्रभावशाली रही और कितनी व्यर्थ रही, क्या ऐसी चैकिंग करते हो?

बापदादा के पास हर एक बच्चे की हर घड़ी की तीनों रूपों में अर्थात् मन्सा, वाचा, कर्मणा से की हुई प्रैक्टिकल नूँध इमर्ज होती है जिससे रिज़ल्ट क्या दिखाई देती है? अब तक 75% बच्चों की आधी रिज़ल्ट व्यर्थ बोल व साधारण बोल में दिखाई देती है। इस हिसाब से अगर, अभी से ही सत्य वचन महाराज हो जावे, तो कई आत्माओं के पुरूषार्थ को हल्का करने के व पुरूषार्थ को साधारण बनाने के निमित्त बन जाओ। इसलिए अब यह वरदान ड्रामा अनुसार सबको प्राप्त नहीं है। बहुत थोड़ी आत्मायें हैं, उनको भी बहुत थोड़ा-सा अर्थात् 25% ऐसा श्रेष्ठ वरदान प्राप्त होना प्रारम्भ हुआ है। इसलिए अपनी ज़िम्मेवारी समझ व महत्व समझ हर बोल पर इतना अटेन्शन रखो। आप लोग साधारण रीति से बोलेंगे लेकिन आप महान आत्माओं के बोल सत्य होने के कारण कई आत्माओं का अकल्याण हो जाता है। इसलिए भक्ति में भी वरदान के साथ-साथ आप का भी गायन है। आप देते नहीं हैं, लेकिन ऐसी व्यर्थ चलन व व्यर्थ बोल अकल्याण के निमित्त ऑटोमेटीकली बन जाते हैं। अर्थात् सुनने वाली व देखने वाली साधारण आत्मा आपके बोल और कर्म द्वारा गिरती कला में अर्थात् पुरूषार्थ हीन की स्थिति में चली जाती हैं। इस प्रकार वह आप द्वारा श्रापित हो जाती हैं।

विश्व के कल्याण के निमित्त अगर आत्मायें न चाहते हुए व न सोचते हुए साधारण रीति से भी किसी आत्मा को श्रापित करने के कार्य में निमित्त बन जाती हैं, तो उसको क्या कहेंगे? वरदानी कहेंगे क्या? तो इतना अटेन्शन और महीन चैकिंग वर्तमान समय बहुत आवश्यक है। क्योंकि अभी आप लोगों का श्रेष्ठ जीवन विश्व की सेवा के प्रति है। अभी तक स्वयं की सेवा के प्रति व स्वयं के परिवर्तन के प्रति व स्वयं के संस्कार और स्वभाव वश अपने आप को ही बनाने और बिगाड़ने के प्रति हो, तो अभी वह समय बीत गया। अब हर श्वांस, हर संकल्प, हर सेकेण्ड, हर कर्म, सर्व-शक्तियाँ, सर्व ईश्वरीय संस्कार, श्रेष्ठ स्वभाव व सर्व प्राप्त हुए खजाने विश्व की ही सेवा के प्रति हैं। अगर अभी तक भी स्वयं के ही प्रति लगाते हो तो फिर प्रालब्ध क्या मिलेगी? मास्टर रचयिता बनेंगे या रचना? रचना स्वयं के प्रति ही होती है, परन्तु रचयिता, रचना के प्रति होता है। जो अभी ही मास्टर रचयिता नहीं बनते तो वह भविष्य में भी विश्व के मालिक नहीं बनते।

अब सम्पूर्ण स्थिति की स्टेज व सम्पूर्ण परिणाम (फाइनल रिज़ल्ट) का समय नजदीक आ रहा है। रिज़ल्ट आऊट बाप-दादा मुख द्वारा नहीं करेंगे या कोई कागज़ व बोर्ड पर नम्बर नहीं लिखेंगे। लेकिन रिज़ल्ट आऊट कैसे होगी? आप स्वयं ही स्वयं को अपनी योग्यताओं प्रमाण अपने-अपने निश्चित नम्बर के योग्य समझेंगे और सिद्ध करेंगे। ऑटोमेटिकली उनके मुख से स्वयं के प्रति फाइनल रिज़ल्ट के नम्बर न सोचते हुए भी, उनके मुख से सुनाई देंगे और चलन से दिखाई देंगे। अब तक तो रॉयल पुरूषार्थियों की रॉयल भाषा चलती है, लेकिन थोड़े समय में रॉयल भाषा रीयल हो जायेगी। जैसेकि कल्प पहले का गायन है रॉयल पुरूषार्थियों का-कितना भी स्वयं को बनाने का पुरूषार्थ करें, लेकिन सत्यता रूपी दर्पण के आगे रॉयल भी रीयल दिखाई देगा। तो आगे चलकर ऐसे सत्य बोल, सत्य वृत्ति, सत्य दृष्टि, सत्य वायुमण्डल, सत्य वातावरण और सत्य का संगठन प्रसिद्ध दिखाई देगा। अर्थात् ब्राह्मण परिवार एक शीश महल बन जायेगा। ऐसी फाइनल रिज़ल्ट ऑटोमेटिकली आऊट होगी।

अभी तो बड़े-बड़े दाग भी छुपाने से छुप जाते हैं, क्योंकि अभी शीश-महल नहीं बना है, जो कि चारों ओर के दाग स्पष्ट दिखाई दे जावें। जब किनारा कर लेते, तो दाग छिप जाता अर्थात् पाप दर्पण के आगे स्वयं को लाने से किनारा कर छिप जाते हैं। छिपता नहीं है, लेकिन किनारा कर और छिपा हुआ समझ स्वयं को खुश कर लेते हैं। बाप भी बच्चों का कल्याणकारी बन अनजान बन जाते हैं जैसे कि जानते ही नहीं। अगर बाप कह दे कि मैं जानता हूँ कि यह दाग इतने समय से व इस रूप से है तो सुनाने वाले का क्या स्वरूप होगा? सुनाना चाहते भी मुख बन्द हो जायेगा, क्योंकि सुनाने की विधि रखी हुई है। बाप जब कि जानते भी हैं, तो भी सुनते क्यों हैं? क्योंकि स्वयं द्वारा किये गये कर्म व संकल्प स्वयं वर्णन करेंगे, तो ही महसूसता की सीढ़ी पर पाँव रख सकेंगे। महसूस करना या अफसोस करना या माफी लेना बात एक हो जाती है। इसलिए सुनाने की अर्थात् स्वयं को हल्का बनाने की या परिवर्तन करने की विधि बनाई गई है। इस विधि से पापों की वृद्धि कम हो जाती है। इसलिये अगर शीश महल बनने के बाद, स्वयं को स्पष्ट देख कर के स्पष्ट किया तो रिज़ल्ट क्या होगी, यह जानते हो? बाप-दादा भी ड्रामा प्रमाण उन आत्माओं को स्पष्ट चैलेन्ज देंगे, तो फिर क्या कर सकेंगे? इसलिए जब महसूसता के आधार पर स्पष्ट हो अर्थात् बोझ से स्वयं को हल्का करो, तब ही डबल लाइट स्वरूप अर्थात् फरिश्ता व आत्मिक स्थिति स्वरूप बन सकेंगे। अच्छा!

रहमदिल बाप के रहमदिल बच्चे, श्रेष्ठ और सदा स्पष्ट, दर्पण रूप, दिव्य-मूर्त, ज्ञान-मूर्त, सदा हर्षित-मूर्त, सर्व आकर्षण से दूर, रूहानी आकर्षण-मूर्त, दिव्य गुण-मूर्त सर्व आत्माओं के कल्याणकारी, कल्याण के आधार-मूर्त, ऐसी महान् आत्माएं और सर्विसएबुल आत्माओं को बापदादा का याद-प्यार और गुडनाइट व नमस्ते।

                      मुरली का सार

1. महान आत्माओं के हर बोल को महावाक्य कहा जाता है। महावाक्य अर्थात् महान बनाने के महावाक्य। ऐसे महावाक्यों में विस्तार न होकर सार होता है।

2. संगमयुग में आप ब्राह्मणों के बोल के महत्व का यादगार भक्ति मार्ग में सत्य वचन महाराज के रूप में अभी तक चला आ रहा है।

3. आप लोग अमृतवेले से लेकर रात्रि तक प्रैक्टिकल मन, वाणी व कर्म तीनों का एक लेख या लेखा लिखते हो। रात्रि को रोज अपनी प्रैक्टिकल नूँध व लेखनी को चैक करो कि वह कितनी समर्थ रही और कितनी व्यर्थ रही?

 

 

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QUIZ QUESTIONS

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 प्रश्न 1 :- "यथार्थ और युक्तियुक्त बोल" के संदर्भ में बाबा मुरली में क्या समझानी दे रहे है ?

 प्रश्न 2 :- विनाशी पद धारण करने वाली विशेष आत्मायें को हर बोल को चैक करने के संदर्भ में बाबा ने मुरली में क्या समझाया हैं ?

 प्रश्न 3 :- महान आत्माओं के बोल द्वारा साधारण आत्मायें श्रापित कैसे हो जाती हैं ? बाबा ने मुरली में क्या समझानी दी है ?

 प्रश्न 4 :- सम्पूर्ण स्थिति की स्टेज व सम्पूर्ण परिणाम (फाइनल रिजल्ट) के संदर्भ में बाबा के क्या महावाक्य हैं ?

 प्रश्न 5 :- "महावाक्य" की क्या महानता बाबा ने मुरली में आलेखी हैं ?

 

 

       FILL IN THE BLANKS:-    

{ महत्व, महसूसता, सत्य, यादगार, रचना, पुरुषार्थ, सत्यता, रियल, कर्म, रॉयल, महारथी, रचयिता, संकल्प, भक्त्ति मार्ग }

 1   आप विशेष आत्माओं के हर बोल के _____ का ______, अब तक भी ________ चलता आ रहा है।

 2  दिन प्रतिदिन नम्बरवार _______ अनुसार जो ______ व महावीर बन रहे हैं, उन्ही के मुख से निकलने वाले, हर बोल _____ हो जावेंगे।

 3  ______ स्वयं के प्रति ही होती है, परन्तु _______ रचना के प्रति होता है।

 4  स्वयं द्वारा किये गये ______ _____ स्वयं वर्णन करेंगे, तो ही _______ की सीढ़ी पर पाँव रख सकेंगे।

 5  ______ पुरुषार्थियों का-कितना भी स्वयं को बनाने का पुरुषार्थ करें, लेकिन _______ रूपी दर्पण के आगे रॉयल भी ________ दिखाई देगा।

 

 

सही गलत वाक्यो को चिन्हित करे:-

  1  :- अब हर श्वास, हर संकल्प, हर सेकन्ड, हर कर्म, सर्व-शक्तियां, सर्व ईश्वरीय संस्कार, श्रेष्ठ स्वभाव व सर्व प्राप्त हुए खजाने स्वयं की ही सेवा के प्रति हैं।

 2  :- गीता तो भक्त्ति का यादगार है - प्रैक्टिकल लाइफ में वह महत्व वर्णन करते हैं।

 3  :- ऐसे ही विश्व का कल्याण करने के श्रेष्ठ कार्य मे निमित बनी आप श्रेष्ठ आत्माएं हो, आपकी विश्व मे विशेष स्थिति है।

 4  :- विश्व के कल्याण के निमित आत्मायें न चाहते हुए व न सोचते हुए साधारण रीति से भी किसी आत्मा को श्रापित करने के कार्य मे निमित बन जाती हैं।

 5   :- अभी तक स्वयं की सेवा के प्रति व स्वयं के परिवर्तन के प्रति व स्वयं के संस्कार और स्वभाव वश अपने आप को ही बनाने और बिगाड़ने के प्रति हो, तो अभी वह समय बीत गया।

 

 

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QUIZ ANSWERS

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 प्रश्न 1 :- "यथार्थ और युक्तियुक्त बोल" के संदर्भ में बाबा मुरली में क्या समझानी दे रहे है ?

  उत्तर 1 :- "यथार्थ और युक्तियुक्त बोल" के संदर्भ में बाबा मुरली में समझानी दे रहे है कि जब स्थूल यन्त्र का आवाज भी पसन्द नहीं करते हो, तो नेचुरल मुख द्वारा निकला हुआ बोल व आवाज स्वयं को भी और सर्व को भी ऐसे ही अनुभव होना चाहिए। अगर यह महसूस हो जाये तो उस घड़ी से परिवर्तन हो जाएगा कि :

          ❶ सदा काल के लिए व्यर्थ बोल समाप्त हो जावेंगे।

          ❷ विस्तार करने के बोल समाप्त हो जावेंगे।

          ❸ समय व्यर्थ करने के बोल समाप्त हो जावेंगे।

          ❹ अपनी कमजोरियों द्वारा अन्य आत्माओ को संगदोष में लाने वाले बोल सब समाप्त हो जावेंगे।

          

 प्रश्न 2 :- विनाशी पद धारण करने वाली विशेष आत्मायें को हर बोल को चैक करने के संदर्भ में बाबा ने मुरली में क्या समझाया हैं ?

 उत्तर 2 :- विनाशी पद धारण करने वाली विशेष आत्मायें को हर बोल को चैक करने के संदर्भ में बाबा ने मुरली में समझाया हैं कि :

         ❶ आपको यह चैक करना है कि मेरे द्वारा जो भी बोल निकलते हैं क्या वह सर्व के व स्वयं के प्रति कल्याणकारी है ?

          ❷ व्यर्थ की तो बात ही छोड़ दो।

          ❸ अभी की स्टेज के अनुसार ऐसा कोई भी शब्द मुख से नहीं निकलना चाहिए जिसमें कल्याण का कार्य समाया हुआ न हो।

          ❹ बोल जिसमें सत्यता तथा विश्व का कल्याण हो, ऐसे हर बोल हो।

 

 प्रश्न 3 :- महान आत्माओं के बोल द्वारा साधारण आत्मायें श्रापित कैसे हो जाती हैं ? बाबा ने मुरली में क्या समझानी दी है

 उत्तर 3 :- महान आत्माओं के बोल द्वारा साधारण आत्मायें श्रापित होने के संदर्भ में बाबा ने मुरली में समझाया हैं कि :

          ❶ आप लोग साधारण रीति से बोलेंगे लेकिन आप महान आत्माओं के बोल सत्य होने के कारण कई आत्माओं का अकल्याण हो जाता हैं।

          ❷ आप देते नहीं हैं, लेकिन ऐसी व्यर्थ चलन व व्यर्थ बोल अकल्याण के निमित ऑटोमेटिकली बन जाते हैं।

          ❸ सुनने वाली व देखने वाली साधारण आत्मा आपके बोल और कर्म द्वारा गिरती कला में अर्थात पुरुषार्थ हीन की स्थिति में चली जाती हैं। इस प्रकार वह आप द्वारा श्रापित हो जाती हैं।

 

 प्रश्न 4 :- सम्पूर्ण स्थिति की स्टेज व सम्पूर्ण परिणाम (फाइनल रिजल्ट) के संदर्भ में बाबा के क्या महावाक्य हैं ?

  उत्तर 4 :- सम्पूर्ण स्थिति की स्टेज व सम्पूर्ण परिणाम (फाइनल रिजल्ट) के संदर्भ में बाबा के महावाक्य हैं :

          ❶ सम्पूर्ण स्थिति की स्टेज व सम्पूर्ण परिणाम (फाइनल रिजल्ट) का समय नजदीक आ रहा है।

          ❷ रिजल्ट आउट बाप-दादा मुख द्वारा नहीं करेंगे या कोई कागज व बोर्ड पर नम्बर नहीं लिखेंगे।

          ❸ आप स्वयं ही स्वयं को अपनी योग्यताओं प्रमाण अपने-अपने निश्चित नम्बर के योग्य समझेंगे और सिद्ध करेंगे।

         ❹ ऑटोमेटिकली उनके मुख से स्वयं के प्रति फाइनल रिजल्ट के नम्बर न सोचते हुए भी, उनके मुख से सुनाई देंगे और चलन से दिखाई देंगे।

          ❺ अब तक तो रॉयल पुरुषार्थियों की रॉयल भाषा चलती है, लेकिन थोड़े समय मे रॉयल भाषा रियल हो जायेगी।

          ❻ आगे चलकर ऐसे सत्य बोल, सत्य वृति, सत्य दृष्टि, सत्य वायुमण्डल, सत्य वातावरण और सत्य का संगठन प्रसिद्ध दिखाई देगा।

          ❼ ब्राह्मण परिवार एक शीश महल बन जायेगा। ऐसी फाइनल रिजल्ट ऑटोमेटिकली आउट होगी।

 

 प्रश्न 5 :- "महावाक्य" की क्या महानता बाबा ने मुरली में आलेखी हैं ?

 उत्तर 5 :- "महावाक्य" की  महानता के बारे में बाबा ने मुरली में आलेखी हैं कि :

          ❶ महान आत्माओं के हर बोल को महावाक्य कहा जाता हैं।

          ❷ महावाक्य अर्थात महान बनाने के महावाक्य।

          ❸ महावाक्य विस्तार के नहीं होते।

          ❹ जैसे वृक्ष के अन्दर बीज महान है और उसका विस्तार नहीं होता है लेकिन उसमें सारा 'सार' होता है, ऐसे ही महावाक्य में विस्तार नहीं होता, किन्तु उसमे सार होता हैं।

    

 

       FILL IN THE BLANKS:-    

{ महत्व, महसूसता, सत्य, यादगार, रचना, पुरुषार्थ, सत्यता, रियल, कर्म, रॉयल, महारथी, रचयिता, संकल्प, भक्त्ति मार्ग }

 1   आप विशेष आत्माओं के हर बोल के ______ का ______, अब तक भी ________ चलता आ रहा है।  

    महत्व /  यादगार  /  भक्त्ति मार्ग

 

 दिन प्रतिदिन नम्बरवार _______ अनुसार जो ________  व महावीर बन रहे हैं, उन्ही के मुख से निकलने वाले, हर बोल _____ हो जावेंगे।

      पुरुषार्थ /  महारथी /  सत्य

 

 3  ______ स्वयं के प्रति ही होती है, परन्तु _______ रचना के प्रति होता है। 

    रचना /  रचयिता

 

 स्वयं द्वारा किये गये _____ ______ स्वयं वर्णन करेंगे, तो ही _______ की सीढ़ी पर पाँव रख सकेंगे।

    कर्म /  संकल्प  /  महसूसता

 

 5  ________ पुरुषार्थियों का-कितना भी स्वयं को बनाने का पुरुषार्थ करें, लेकिन _______ रूपी दर्पण के आगे रॉयल भी ________ दिखाई देगा।

      रॉयल /  सत्यता /  रियल

 

 

सही गलत वाक्यो को चिन्हित करे:-

1      :- अब हर श्वास, हर संकल्प, हर सेकन्ड, हर कर्म, सर्व-शक्तियां, सर्व ईश्वरीय संस्कार, श्रेष्ठ स्वभाव व सर्व प्राप्त हुए खजाने स्वयं की ही सेवा के प्रति हैं।【✖】

 

   अब हर श्वास, हर संकल्प, हर सेकन्ड, हर कर्म, सर्व-शक्तियां, सर्व ईश्वरीय संस्कार, श्रेष्ठ स्वभाव व सर्व प्राप्त हुए खजाने विश्व की ही सेवा के प्रति हैं।

 

 2  :- गीता तो भक्त्ति का यादगार है - प्रैक्टिकल लाइफ में वह महत्व वर्णन करते हैं। 【✖】

  गीता तो ज्ञान का यादगार है - प्रैक्टिकल लाइफ में वह महत्व वर्णन करते हैं।

 

 3  :- ऐसे ही विश्व का कल्याण करने के श्रेष्ठ कार्य मे निमित बनी आप श्रेष्ठ आत्माएं हो, आपकी विश्व मे विशेष स्थिति है। 【✔】

 

 4  :- विश्व के कल्याण के निमित आत्मायें न चाहते हुए व न सोचते हुए साधारण रीति से भी किसी आत्मा को श्रापित करने के कार्य मे निमित बन जाती हैं। 【✔】

 

 5   :- अभी तक स्वयं की सेवा के प्रति व स्वयं के परिवर्तन के प्रति व स्वयं के संस्कार और स्वभाव वश अपने आप को ही बनाने और बिगाड़ने के प्रति हो, तो अभी वह समय बीत गया।【✔】