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AVYAKT MURLI

21 / 06 / 74

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21-06-74   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन

महान् पद की बुकिंग के लिये महीन रूप से चैकिंग आवश्यक

लॉ एण्ड ऑर्डर वाले, विश्व-राज्य की स्थापना करने वाले, सर्व-शक्तियों व सर्व-गुणों रूपी खजाने से मालामाल करने वाले, त्रिमूर्ति के रचयिता शिव बाबा बोले:-

आज सभी तकदीरवान विशेष आत्माओं की विशेषता को देख रहे हैं। कोई-कोई अपनी विशेषता को भी यथार्थ रीति से नहीं जानते हैं, कोई-कोई जानते हैं लेकिन वे अपनी विशेषता को कार्य में नहीं लगा सकते और कोई-कोई जानते हुए भी उस विशेषता में सदा स्थित नहीं रह सकते। वे कभी विशेष आत्मा बन जाते हैं या कभी साधारण आत्मा बन जाते हैं। कोटों में कोऊ अर्थात् पूरे ब्राह्मण परिवार में से बहुत थोड़ी आत्मायें अपनी विशेषता को जानती भी हैं, विशेषता में रहती भी हैं और कर्म में आती भी हैं। अर्थात् अपनी विशेषता से ईश्वरीय कार्य में सदा सहयोगी बनती हैं। ऐसी सहयोगी आत्मायें बापदादा की अति स्नेही हैं। ऐसी आत्मायें सदा सरलयोगी व सहजयोगी व स्वत:योगी होती हैं। उनकी मूर्त में सदा ऑलमाइटी अथॉरिटी की समीप सन्तान की खुमारी और खुशी स्पष्ट दिखाई देती है अर्थात् सदा सर्व-प्राप्ति सम्पन्न लक्षण - उनके मस्तक से, नैनों से और हर कर्म में अनुभव होता है। उनकी बुद्धि सदा बाप समान बनने की, एक ही स्मृति में रहती है। ऐसी आत्माओं का हर कदम बाप-दादा के कदम पिछाड़ी कदम ऑटोमेटिकली स्वत: चलता ही रहता है।

ऐसी आत्माओं में मुख्य तीन बातें दिखाई देंगी। कौन-सी? तीनों सम्बन्ध निभाने वाले त्रिमूर्ति स्नेही आत्मायें तीन बातों से सम्पन्न होंगी। बाप के सम्बन्ध से उनमें क्या विशेषता होगी?-फरमानबरदार। शिक्षक के रूप से क्या होगी? शिक्षा में वफादार और ईमानदार चाहिये। सतगुरू के सम्बन्ध में आज्ञाकारी। तो यह तीनों विशेषतायें ऐसी त्रिमूर्ति स्नेही आत्माओं में स्पष्ट दिखाई देंगी। अब इन तीनों में अपने को देखो कि कितने परसेन्ट है। क्या सारे दिन की दिनचर्या में तीनों ही सम्बन्धों की विशेषतायें दिखाई देती हैं? इनसे ही अपनी रिज़ल्ट को जान सकते हो। कोई-कोई तो बाप के स्नेही या विशेष शिक्षक के स्नेही या सतगुरू के स्नेही बनकर चल भी रहे हैं, लेकिन बनना त्रिमूर्ति-स्नेही है। तीनों की परसेन्ट पास की होनी चाहिये। एक बात में पास विद ऑनर हो जाओ और दो बातों में मार्क्स कम हो जाए, तो रिज़ल्ट में बाप के समीप आने वाली आत्माओं में न आ सकेंगे। इसलिए तीनों में ही अपनी परसेन्टेज को ठीक करो।

जब मास्टर ऑलमाइटी अथॉरिटी हो, तो व्यर्थ संकल्पों को मिटाने में भी अथॉरिटी बनो। जब वर्ल्ड आलमाइटी की सन्तान कहलाते हो, तो क्या आप अपने संस्कार, स्वभाव वा संकल्पों पर विजयी बनने की अथॉरिटी नहीं बन सकते? अथॉरिटी जिसके अन्दर सब पर लॉ एण्ड ऑर्डर हो तब ही विश्व पर ला एण्ड ऑर्डर वाला राज्य चला सकेंगे। विश्व के पहले स्वयं को लॉ एण्ड ऑर्डर में चला सकते हो? अगर अभी से लॉ एण्ड ऑर्डर में चलने के संस्कार दिखाई नहीं देते, तो भविष्य में विश्व पर भी राज्य नहीं चला सकते। चलने वाले ही चलाने वाले बनते हैं। चलने में कमजोर हो और चलाने की उम्मीद रखें, यह तो स्वयं को खुश करना है। पहले अपने आप से पूछो:मेरे संकल्प, मेरे लॉ एण्ड ऑर्डर में हैं? मेरा स्वभाव लॉ एण्ड ऑर्डर में है? अगर लॉ-लेस है तो क्या मास्टर ऑलमाइटी अथॉरिटी कहलाने के अधिकारी हो सकते हैं? ऑलमाइटी अथॉरिटी कभी किसी के वशीभूत नहीं हो सकते। क्या ऐसे बने हो?

अभी पुरूषार्थियों के स्वयं की चैकिंग का समय चल रहा है। चैकिंग के समय चैक  नहीं करेंगे, तो अपनी तकदीर को चेंज नहीं कर सकेंगे। जो जितने महीन रूप से स्वयं की चैकिंग करते हैं, उतना ही भविष्य महान् पद की प्राप्ति की बुकिंग होती है। तो चैकिंग करना-अर्थात् बुकिंग करना, ऐसे करते हो? या कि जब बुकिंग समाप्त हो जायेगी फिर करेंगे? सबसे श्रेष्ठ बुकिंग कौन-सी है? अष्ट रत्नों की सीट कौन-सी है? क्या एयर-कण्डीशन्ड सीट ली है? एयर-कन्डीशन के लिए कन्डीशन्स  हैं। जैसे एयर-कण्डीशन में, जब जैसे चाहे, वैसे एयर की कन्डीशन कर सकते हैं। ऐसे ही अपने को, जहाँ चाहो, जैसे चाहो वैसे सैट कर सको, तो एयर कण्डीशन की सीट ले सकते हो। इसके लिए सर्व खजाने जमा हैं? कौन-से सर्व खजाने? खजाने सुनाने में तो सब होशियार हो, जैसे सुनाने में होशियार हो, ऐसे ही जमा करने में भी होशियार हो जाओ। सर्व खजाने जमा चाहिये। अगर एक कम है, तो एयरकण्डीशन सीट नहीं मिलेगी फिर तो फर्स्ट डिवीजन में आ सकते हो। अभी अपनी बुकिंग देखो। अभी तो आपको फिर भी चान्स है। लेकिन जब चान्स समाप्त हो जायेगा, तो फिर क्या करेंगे? इसलिए अब मुख्य पुरूषार्थ चाहिये। हर समय, हर बात में, हर सब्जेक्ट में और हर सम्बन्ध की विशेषता में, स्वयं को चैक करना है। समझा!

ऐसे त्रिमूर्ति स्नेही, स्वयं के और विश्व के नॉलेज में त्रिकालदर्शी, तीसरे नेत्र द्वारा स्वयं की सूक्ष्म चैकिंग करने वाले, बाप-दादा के सदा समीप, स्नेही और सदा सहयोगी रहने वाले, लॉ एण्ड ऑर्डर में सदा चलने वाले विशेष आत्माओं को बापदादा का याद-प्यार गुडनाइट और नमस्ते। ओम शान्ति।

इस मुरली का सार

1. तकदीरवान विशेष आत्माएं अपनी विशेषताओं को जानते हुए, ईश्वरीय कार्य में सदा सहयोगी बनती हैं। उनकी बुद्धि सदा बाप-समान बनने की एक ही स्मृति में रहती हैं।

2. त्रिमूर्ति स्नेही आत्मा बाप के सम्बन्ध में फरमानबरदार, शिक्षक के रूप में वफादार व ईमानदार और सतगुरू के सम्बन्ध में आज्ञाकारी होगी।

3. वर्तमान समय स्वयं को लॉ एण्ड ऑर्डर में चला सकने वाला मास्टर ऑलमाइटी अथॉरिटी ही भविष्य में विश्व पर लॉ एण्ड ऑर्डर वाला राज्य चला सकता है।

4. महीन रूप से अपनी चैकिंग करने वाला ही, भविष्य में महान् पद की बुकिंग करा सकता है।

5. अष्ट रत्नों की एयर-कण्डीशन्ड सीट की बुकिंग के लिए, सर्वशक्तियों व सर्व-विशेषताओं रूपी खजाने जमा होने ज़रूरी हैं।

26-06-74   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन

 

सर्व-सिद्धियों की प्राप्ति के रूहानी नशे में सदा स्थित रहो

 

सर्व आत्माओं की जन्मपत्री को जानने वाले, सर्व-सिद्धियों के दाता, वर्ल्ड आलमाइटी अथॉरिटी शिव बाबा बोले:-

आज ज्ञान-सूर्य बाप हर सितारे के मस्तक पर तकदीर की लकीर देख रहे हैं। लौकिक रीति में भी, भक्तों द्वारा हस्तों से जो जन्मपत्री देखी जाती है, उनमें मुख्यत: चार बातें देखते हैं। यहाँ हस्तों द्वारा तो नहीं, लेकिन मस्तक द्वारा मुख्य चार बातें देख रहे हैं-(1) एक बात यह कि बुद्धि की लाइन कितनी क्लियर है और विशाल है (2) दूसरी बात, हर समय ज्ञान-धन को धारण करने में, तन के कर्मभोग से निर्विघ्न और मन से एकरस लगन लगाने में मरजीवा जन्म से लेकर अभी तक कहाँ तक निर्विघ्न चलते आ रहे हैं? (3) तीसरी बात, इस श्रेष्ठ ब्राह्मण जन्म की स्मृति की आयु लम्बी है या छोटी है? बार-बार स्मृति अर्थात् जीना, विस्मृति अर्थात् मरने की हालत में पहुँच जाना, इसी हिसाब से आयु छोटी अथवा बड़ी गिनी जाती है। (4) मरजीवा जन्म लेते ही, स्नेह, सम्बन्ध सम्पर्क और सर्वशक्तियों में कहाँ तक तकदीरवान रहे हैं? क्या तकदीर की रेखा प्रतिशत के हिसाब से अटूट रही है और साथ-साथ पढ़ाई में व कमाई जमा करने में सदा सफलतामूर्त, रेग्युलर और पंक्चुअल कहाँ तक रहे हैं? कितनी आत्माओं के प्रति महादानी, वरदानी, कल्याणकारी बने हैं अर्थात् दान-पुण्य की रेखा लम्बी है या छोटी? इन सब बातों से हरेक सितारे के वर्तमान और भविष्य को देख रहे हैं।

आप सब अपने मस्तक की रेखाओं को जान और देख सकते हो, परन्तु कैसे? बाप-दादा के दिल-तख्तनशीन बन कर, स्मृति के तिलकधारी बनकर नॉलेजफुल और पॉवरफुल स्टेज पर स्थित हो देखेंगे तो स्पष्ट जान सकेंगे। अपनी पोज़ीशन को छोड़कर, माया की ऑपोज़ीशन  की स्थिति में व स्टेज पर स्थित होकर अपने को व अन्य आत्माओं को जब देखते हो, तब स्पष्ट दिखाई नहीं देता। पोज़ीशन कौन-सी है? आपकी अपनी पाज़ीशन कौन-सी है, जिसमें सब बातें आ जाती हैं? मास्टर आलमाइटी अथॉरिटी। सदा इसी पाज़ीशन में स्थित रहते हुए, हर कर्म को करो तो यह पोज़ीशन माया के हर विघ्न से परे, निर्विघ्न बनाने वाली है। जैसे कोई लौकिक रीति में भी जब कोई अथॉरिटी वाला होता है, तो उनके आगे कोई भी सामना करने की हिम्मत नहीं रखते हैं और अगर कोई अपनी अथॉरिटी को यूज़ करने के बजाय हर समय लूज़  रहता है, तो साधारण आदमी भी सामना करने के लिए अथवा डिस्टर्ब करने के लिए, विघ्न डालने के लिए लूज़ रहते हैं। तो यहाँ भी अपनी अथॉरिटीज़ को, प्राप्त हुई सर्व-शक्तियों को, वरदानों को यूज करने के बजाय लूज़ रहते हो। इसलिए हर समय, माया को सामना करने की हिम्मत रहती है। मन्सा में, वाचा में, कर्मणा में, सम्बन्ध में और सम्पत्ति में सब में इन्टरफियर करने की हिम्मत रखती है। किसी भी बात में छोड़ती नहीं, क्योंकि अपनी पाज़ीशन से नीचे आकर साधारण बन जाते हो।

रिवाज़ी रीति से यदि कोई साधारण आत्मायें भी अल्पकाल की सिद्धि प्राप्त कर लेती हैं, तो कितनी अथॉरिटी में रहती हैं। यहाँ सर्व-सिद्धियाँ प्राप्त होते हुए (1) चाहे सदा निरोगी बनने की सिद्धि (2) चाहे कोई भी प्रकृति के तत्व को वश में करने की सिद्धि (3) चाहे कोई दु:खी, निर्धन व अशान्त आत्मा को अविनाशी धनवान बनाने व सदा सुखी बनाने की सिद्धि (4) निर्बल को महा बलवान बनाने की सिद्धि (5) संकल्पों को एक सेकेण्ड में जहाँ और जैसे ठहराना चाहो वा संकल्प को अपने वश में करने की सिद्धि (6) पाँच विकारों रूपी महाभूतों को वश में करने की सिद्धि (7) नैनहीन को त्रिनेत्री बनाने की सिद्धि (8) अनेक परिस्थितियों की परेशानी में मूर्छित हुई आत्मा को स्व-स्थिति द्वारा सुरजीत करने व जी-दान देने की सिद्धि (9) भटकी हुई आत्मा को सदाकाल के लिए ठिकाना देने की सिद्धि (10) जन्मजन्मान्तर के लिए आयु लम्बी करने की सिद्धि (11) अकाले मृत्यु से बचाने की सिद्धि (12) राज्यभाग व ताज-तख्त प्राप्त करने की सिद्धि। ऐसी सर्व-सिद्धियों को विधि द्वारा प्राप्त करने वाली आत्मायें कितने नशे में रहनी चाहिए?

अपने आप को क्यों भूल जाते हो? लेना है बाप का सहारा और कर देते हो सर्वशक्तिमान से किनारा। खिवैया से किनारा कर और किनारे को अर्थात् मंज़ल जब ढूंढ़ते हो, तो मिलेगी या समय व्यर्थ जायेगा? बाप-दादा को ऐसे भोले व भूले हुए बच्चों पर रहम आता है। लेकिन कब तक? जब तक बाप द्वारा रहम लेने की आवश्यकता व इच्छा है, तब तक अन्य आत्माओं के प्रति रहमदिल नहीं बन सकेंगे? जो स्वयं ही लेने वाला है, वह देने वाला दाता नहीं बन सकता जैसे भिखारी, भिखारी को सम्पन्न नहीं बना सकता। हाँ अल्पकाल के लिए वे कुछ शक्तियों के आधार से, उन्हों पर थोड़े समय के लिए प्रभाव डाल सकते हैं। लेकिन सदा काल के लिए और सर्व में सम्पन्न नहीं बना सकते। अच्छा-अच्छा कहने तक अनुभव करा सकते हैं, लेकिन इच्छा मात्रम् अविद्या की स्टेज तक नहीं ला सकते। अच्छा-अच्छा कहने के साथ, सर्व-प्राप्ति की इच्छा समाप्त नहीं होती। क्योंकि स्वयं भी बाप द्वारा व सर्व सहयोगी आत्माओं द्वारा सहयोग, स्नेह, हिम्मत, उल्लास, उमंग की इच्छा रखने वाले और कोई भी प्रकार का आधार लेने वाले सर्व-आत्माओं के निमित्त आधार-मूर्त नहीं बन सकते। प्रकृति के व परिस्थिति के और व्यक्ति के व वैभव के अधीन रहने वाली आत्मा अन्य आत्माओं को भी सर्व अधिकारी नहीं बना सकती। इसलिए अपनी सर्व-सिद्धियों को जानकर उन्हें यूज़ करो। लेकिन निमित्त-मात्र बन कर यूज़ करो। मैं-पन भूल, श्रीमत के आधार से हर सिद्धि को यूज़ करो। अगर मैं-पन में आकर, कोई भी सिद्धि को यूज़ किया, तो क्या कहावत है? करामत खैर खुदाई। अर्थात् श्रेष्ठ-पद के बजाय, सज़ा के भागी बन जावेंगे। साक्षीपन नहीं, तो फिर सज़ा है। इसलिए सदा स्मृति-स्वरूप और सिद्धि-स्वरूप बनो। समझा?

मुरली का सार

(1) सदा मास्टर आलमाइटी अथॉरिटी की पोज़ीशन में स्थित रहते हुए, यदि हर कर्म करो तो यह पोज़ीशन माया की ऑपाज़ीशन अर्थात् हर विघ्न से परे निर्विघ्न बनाने वाली बन जायेगी।

(2) प्रकृति व परिस्थिति के और व्यक्ति के वैभव के आधीन रहने वाली आत्मा कभी भी अन्य आत्माओं को स्व-अधिकारी नहीं बना सकती।

(3) अपनी सर्व-सिद्धियों को जानकर, मैं-पन को भूल निमित्त-मात्र बन कर, श्रीमत के आधार से युज़ करो।

(4) यदि साक्षीपन नहीं, तो फिर सज़ा है।

 

 

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QUIZ QUESTIONS

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 प्रश्न 1 :-  आज बाबा ने सभी तकदीरवान विशेष आत्माओं की क्या विशेषतायें देखी?

 प्रश्न 2 :-  त्रिमूर्ति स्नेही आत्मायें किन बातों से संपन्न होंगी?

 प्रश्न 3 :-  पुरूषार्थियों के चैकिंग के बारे में आज बाबा के महावाक्य क्या हैं?

 प्रश्न 4 :-  बाबा मस्तक द्वारा मुख्य किन बातें देख को रहे हैं?

 प्रश्न 5 :-  अथॉरिटी में रहने से क्या क्या सिद्धियाँ प्राप्त होते है?

 

 

       FILL IN THE BLANKS:-    

{ संकल्पों, बाप, व्यर्थ, स्वभाव, शिक्षक, वर्ल्ड, ऑलमाइटी, विघ्न, सतगुरू, निर्विघ्न, संस्कार, सहारा, ऑपाज़ीशन, सर्वशक्तिमान, किनारा }

 1   कोई-कोई तो _____ के स्नेही या विशेष _____ के स्नेही या _____ के स्नेही बनकर चल भी रहे हैं, लेकिन बनना त्रिमूर्ति-स्नेही है।

 2  जब मास्टर _____ अथॉरिटी हो, तो _____ _____ को मिटाने में भी अथॉरिटी बनो।

 3  जब _____ आलमाइटी की सन्तान कहलाते हो, तो क्या आप अपने _____, _____ वा संकल्पों पर विजयी बनने की अथॉरिटी नहीं बन सकते?

 4   सदा मास्टर आलमाइटी अथॉरिटी की पोज़ीशन में स्थित रहते हुए, यदि हर कर्म करो तो यह पोज़ीशन माया की _____ अर्थात् हर _____ से परे _____ बनाने वाली बन जायेगी।

 5  लेना है बाप का _____ और कर देते हो _____ से _____

 

 

सही गलत वाक्यो को चिन्हित करे:-

 1  :-  अगर अभी से लॉ एण्ड ऑर्डर में चलने के संस्कार दिखाई देते, तो भविष्य में विश्व पर भी राज्य नहीं चला सकते।

 2  :-   ऑलमाइटी अथॉरिटी कभी किसी के वशीभूत नहीं हो सकते।

 3  :-   प्रकृति के व परिस्थिति के और व्यक्ति के व वैभव के अधीन रहने वाली आत्मा अन्य आत्माओं को भी सर्व अधिकारी बना सकती।

 4  :-  साक्षीपन नहीं, तो फिर सज़ा है।

 5   :-  अष्ट रत्नों की एयर-कण्डीशन्ड सीट की बुकिंग के लिए, सर्वशक्तियों व सर्व-विशेषताओं रूपी खजाने जमा होने ज़रूरी हैं।

 

 

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QUIZ ANSWERS

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 प्रश्न 1 :-  आज बाबा ने सभी तकदीरवान विशेष आत्माओं की क्या विशेषतायें देखी?

  उत्तर 1 :-  आज बाबा ने सभी तकदीरवान विशेष आत्माओं की निम्न विशेषतायें देखी -

          ❶ कोई-कोई अपनी विशेषता को भी यथार्थ रीति से नहीं जानते हैं, कोई-कोई जानते हैं लेकिन वे अपनी विशेषता को कार्य में नहीं लगा सकते और कोई-कोई जानते हुए भी उस विशेषता में सदा स्थित नहीं रह सकते। वे कभी विशेष आत्मा बन जाते हैं या कभी साधारण आत्मा बन जाते हैं।

          ❷ कोटों में कोऊ अर्थात् पूरे ब्राह्मण परिवार में से बहुत थोड़ी आत्मायें अपनी विशेषता को जानती भी हैं, विशेषता में रहती भी हैं और कर्म में आती भी हैं। अर्थात् अपनी विशेषता से ईश्वरीय कार्य में सदा सहयोगी बनती हैं।

          ❸ ऐसी सहयोगी आत्मायें बापदादा की अति स्नेही हैं।

          ❹ ऐसी आत्मायें सदा सरलयोगी व सहजयोगी व स्वत:योगी होती हैं।

          ❺ उनकी मूर्त में सदा ऑलमाइटी अथॉरिटी की समीप सन्तान की खुमारी और खुशी स्पष्ट दिखाई देती है अर्थात् सदा सर्व-प्राप्ति सम्पन्न लक्षण - उनके मस्तक से, नैनों से और हर कर्म में अनुभव होता है।

          ❻ उनकी बुद्धि सदा बाप समान बनने की, एक ही स्मृति में रहती है।

          ❼ ऐसी आत्माओं का हर कदम बाप-दादा के कदम पिछाड़ी कदम ऑटोमेटिकली स्वत: चलता ही रहता है।

 

प्रश्न 2 :-  त्रिमूर्ति स्नेही आत्मायें किन बातों से संपन्न होंगी?

  उत्तर 2 :- तीनों सम्बन्ध निभाने वाले त्रिमूर्ति स्नेही आत्मायें तीन बातों से सम्पन्न होंगी। बाप के सम्बन्ध से उनमें क्या विशेषता होगी?- फरमानबरदार। शिक्षक के रूप से क्या होगी? शिक्षा में वफादार और ईमानदार चाहिये। सतगुरू के सम्बन्ध में आज्ञाकारी। तो यह तीनों विशेषतायें ऐसी त्रिमूर्ति स्नेही आत्माओं में स्पष्ट दिखाई देंगी।

 

 प्रश्न 3 :-  पुरूषार्थियों के चैकिंग के बारे में आज बाबा के महावाक्य क्या हैं?

 उत्तर 3 :-  पुरूषार्थियों के चैकिंग के बारे में आज बाबा के महावाक्य निम्न हैं -

          ❶ अभी पुरूषार्थियों के स्वयं की चैकिंग का समय चल रहा है।

          ❷ चैकिंग के समय चैक  नहीं करेंगे, तो अपनी तकदीर को चेंज नहीं कर सकेंगे।

          ❸ जो जितने महीन रूप से स्वयं की चैकिंग करते हैं, उतना ही भविष्य महान् पद की प्राप्ति की बुकिंग होती है।

          ❹ तो चैकिंग करना-अर्थात् बुकिंग करना, ऐसे करते हो? या कि जब बुकिंग समाप्त हो जायेगी फिर करेंगे?

 

 प्रश्न 4 :-  बाबा मस्तक द्वारा मुख्य किन बातें को देख रहे हैं?

  उत्तर 4 :-  बाबा मस्तक द्वारा मुख्य चार बातें को देख रहे हैं-

          ❶ एक बात यह कि बुद्धि की लाइन कितनी क्लियर है और विशाल है।

          ❷ दूसरी बात, हर समय ज्ञान-धन को धारण करने में, तन के कर्मभोग से निर्विघ्न और मन से एकरस लगन लगाने में मरजीवा जन्म से लेकर अभी तक कहाँ तक निर्विघ्न चलते आ रहे हैं?  

          ❸ तीसरी बात, इस श्रेष्ठ ब्राह्मण जन्म की स्मृति की आयु लम्बी है या छोटी है? बार-बार स्मृति अर्थात् जीना, विस्मृति अर्थात् मरने की हालत में पहुँच जाना, इसी हिसाब से आयु छोटी अथवा बड़ी गिनी जाती है।

          ❹ मरजीवा जन्म लेते ही, स्नेह, सम्बन्ध सम्पर्क और सर्वशक्तियों में कहाँ तक तकदीरवान रहे हैं?

 प्रश्न 5 :-  अथॉरिटी में रहने से क्या क्या सिद्धियाँ प्राप्त होते है?

 उत्तर 5 :- अथॉरिटी में रहने से  निम्न सिद्धियाँ प्राप्त होते है -

          ❶ चाहे सदा निरोगी बनने की सिद्धि।

          ❷ चाहे कोई भी प्रकृति के तत्व को वश में करने की सिद्धि।

          ❸ चाहे कोई दु:खी, निर्धन व अशान्त आत्मा को अविनाशी धनवान बनाने व सदा सुखी बनाने की सिद्धि।

          ❹ निर्बल को महा बलवान बनाने की सिद्धि।

          ❺ संकल्पों को एक सेकेण्ड में जहाँ और जैसे ठहराना चाहो वा संकल्प को अपने वश में करने की सिद्धि।

          ❻ पाँच विकारों रूपी महाभूतों को वश में करने की सिद्धि।

          ❼ नैनहीन को त्रिनेत्री बनाने की सिद्धि।

          ❽ अनेक परिस्थितियों की परेशानी में मूर्छित हुई आत्मा को स्व-स्थिति द्वारा सुरजीत करने व जी-दान देने की सिद्धि।

           ❾ भटकी हुई आत्मा को सदाकाल के लिए ठिकाना देने की सिद्धि।

          ❿ जन्मजन्मान्तर के लिए आयु लम्बी करने की सिद्धि।

          ❶❶ अकाले मृत्यु से बचाने की सिद्धि।

          ❶❷ राज्यभाग्य व ताज-तख्त प्राप्त करने की सिद्धि।
 

       

       FILL IN THE BLANKS:-    

{ संकल्पों, बाप, व्यर्थ, स्वभाव, शिक्षक, वर्ल्ड, ऑलमाइटी, विघ्न, सतगुरू, निर्विघ्न, संस्कार, सहारा, ऑपाज़ीशन, सर्वशक्तिमान, किनारा }

 1   कोई-कोई तो _____ के स्नेही या विशेष _____ के स्नेही या _____ के स्नेही बनकर चल भी रहे हैं, लेकिन बनना त्रिमूर्ति-स्नेही है।

    बाप /  शिक्षक /  सतगुरू

 

 2  जब मास्टर _____ अथॉरिटी हो, तो _____ _____ को मिटाने में भी अथॉरिटी बनो।

    ऑलमाइटी /  व्यर्थ /  संकल्पों

 

  जब _____ आलमाइटी की सन्तान कहलाते हो, तो क्या आप अपने _____, _____ वा संकल्पों पर विजयी बनने की अथॉरिटी नहीं बन सकते?

    वर्ल्ड /  संस्कार /  स्वभाव

 

 4  सदा मास्टर आलमाइटी अथॉरिटी की पोज़ीशन में स्थित रहते हुए, यदि हर कर्म करो तो यह पोज़ीशन माया की _____ अर्थात् हर _____ से परे _____ बनाने वाली बन जायेगी।

    ऑपोज़ीशन /  विघ्न /  निर्विघ्न

 

 5  लेना है बाप का _____ और कर देते हो _____ से _____

    सहारा /  सर्वशक्तिमान /  किनारा

 

 

सही गलत वाक्यो को चिन्हित करे:- 】 【

 1  :-  अगर अभी से लॉ एण्ड ऑर्डर में चलने के संस्कार दिखाई देते, तो भविष्य में विश्व पर भी राज्य नहीं चला सकते।

  अगर अभी से लॉ एण्ड ऑर्डर में चलने के संस्कार दिखाई नहीं देते, तो भविष्य में विश्व पर भी राज्य नहीं चला सकते।

 

 2  :-  ऑलमाइटी अथॉरिटी कभी किसी के वशीभूत नहीं हो सकते।

 

 3  :-  प्रकृति के व परिस्थिति के और व्यक्ति के व वैभव के अधीन रहने वाली आत्मा अन्य आत्माओं को भी सर्व अधिकारी बना सकती।

  प्रकृति के व परिस्थिति के और व्यक्ति के व वैभव के अधीन रहने वाली आत्मा अन्य आत्माओं को भी सर्व अधिकारी नहीं बना सकती।

 

4  :-  साक्षीपन नहीं, तो फिर सज़ा है।

 

 5   :-  अष्ट रत्नों की एयर-कण्डीशन्ड सीट की बुकिंग के लिए, सर्वशक्तियों व सर्व-विशेषताओं रूपी खजाने जमा होने ज़रूरी हैं।