==============================================================================

AVYAKT MURLI

18 / 01 / 99

=============================================================================

     18-01-99   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन

 

वर्तमान समय के प्रमाण वैराग्य वृत्ति को इमर्ज कर साधना का वायुमण्डल बनाओ

आज स्नेह के सागर बापदादा अपने अति स्नेही बच्चों से मिल रहे हैं। आज का दिन विशेष स्नेह का दिन है। अमृतवेले से लेकर चारों ओर के बच्चे स्नेह की लहरों में लहरा रहे हैं। हर एक बच्चे के दिल का स्नेह दिलाराम बाप के पास पहुँच गया। बापदादा भी सभी बच्चों को स्नेह के रेसपान्स में स्नेह और समर्थ-पन का वरदान दे रहे हैं। आज के दिन को बापदादा यज्ञ की स्थापना में विशेष परिवर्तन का दिन कहते हैं। आज के दिन ब्रह्मा बाप गुप्त रूप में बैकबोन बन अपने बच्चों को साकार रूप में विश्व के मंच पर प्रत्यक्ष किया। इसलिए इस दिवस को बच्चों के प्रत्यक्षता का दिन कहा जाता है, समर्थ दिवस कहा जाता है, विल पावर देने का दिवस कहा जाता है। ब्रह्मा बाप गुप्त रूप में कार्य करा रहा है। अलग नहीं है, साथ ही है सिर्फ गुप्त रूप में करा रहा है। यह अव्यक्ति दिवस बच्चों के कार्य को तीव्र गति में लाने का दिवस है। अभी भी हर एक बच्चे की छत्रछाया बन पालना का कर्त्तव्य कर रहे हैं। जैसे माँ बच्चों के लिए छत्रछाया होती है ऐसे ही अमृतवेले से लेकर ब्रह्मा माँ चारों तरफ के बच्चों की रेख-देख करते रहते हैं। साकार में निमित्त बच्चे हैं लेकिन भाग्य विधाता ब्रह्मा माँ हर बच्चे के भाग्य को देख बच्चों को विशेष शक्ति, हिम्मत, उमंग-उत्साह की पालना करते रहते हैं। शिव बाप तो साथ में है ही लेकिन विशेष ब्रह्मा का पालना का पार्ट है।

आज के दिन भाग्य विधाता ब्रह्मा हर बच्चे को विशेष स्नेह के रिटर्न में वरदान का भण्डार भण्डारी बन बाँटते हैं। जो बच्चा जितना अव्यक्त स्थिति में स्थित हो मिलन मनाते हैं उस हर एक बच्चे को जो वरदान चाहिए वह सहज प्राप्त होता है। वरदानों का खुला भण्डार है, जो चाहिए, जितना चाहिए उतना प्राप्त होने का श्रेष्ठ दिवस है। स्नेह का रिटर्न होता है - सहज वरदान की गिफ्ट। तो गिफ्ट में मेहनत नहीं करनी पड़ती है, सहज प्राप्ति होती है। गिफ्ट मांगी नहीं जाती है, स्वत: ही प्राप्त होती है। पुरूषार्थ से वरदान के अनुभूति की प्राप्ति अलग चीज़ है लेकिन आज के दिन ब्रह्मा माँ स्नेह के रिटर्न में वरदान देते हैं। तो आज के दिन सभी ने सहज वरदान प्राप्त होने की अनुभूति की? अभी भी सच्चे दिल के स्नेह का रिटर्न वरदान प्राप्त कर सकते हो। वरदान प्राप्त करने का साधन है - दिल का स्नेह। जहाँ दिल का स्नेह है, वो स्नेह ऐसा खज़ाना है जिस खज़ाने द्वारा, बापदादा द्वारा जो चाहे अविनाशी वरदान प्राप्त कर सकते हो। वह स्नेह का खज़ाना हर बच्चे के पास है? स्नेह का खज़ाना है तब तो पहुँचे हो ना! स्नेह खींचकर लाया है और स्नेह में रहना बहुत सहज है। पुरूषार्थ की मेहनत नहीं करनी पड़ती क्योंकि स्नेह का अनुभव हर आत्मा को होता ही है। सिर्फ अब जो बिखरा हुआ स्नेह था, कुछ कहाँ, कुछ कहाँ था, वह बिखरा हुआ स्नेह एक के ही साथ जोड़ लिया है क्योंकि पहले अलग-अलग सम्बन्ध था, अब एक में सर्व सम्बन्ध हैं। तो सहज सर्व स्नेह एक से हो गया। इसलिए हर एक कहता है मेरा बाबा। तो स्नेह किससे होता है? मेरे से। सभी कहते हैं ना मेरा बाबा, या दादियों का बाबा है? महारथियों का बाबा है? सबका बाबा है ना! आज के दिन कितने बार हर एक बच्चे ने दिल से कहा - मेरा बाबा, मेरा बाबा। सभी ने मेरा-बाबा, मेरा-बाबा कह रूह-रूहान की ना! सारा दिन क्या किया? स्नेह के पुष्प बापदादा को अर्पित किये। बापदादा के पास स्नेह के पुष्प बहुत बढ़िया से बढ़िया पहुँच रहे थे। स्नेह तो बहुत अच्छा रहा, अब बाप कहते हैं स्नेह का स्वरूप साकार में इमर्ज करो। वह है समान बनना। अभी यह समान बनने का लक्ष्य तो सभी के पास है, अभी साकार में लक्षण दिखाई दें। जिस भी बच्चे को देखें, जो भी मिले, सम्बन्ध-सम्पर्क में आये, उन्हों को यह लक्षण दिखाई दें कि यह जैसे परमात्मा बाप, ब्रह्मा बाप के गुण हैं, वह बच्चों के सूरत और मूरत से दिखाई दें। अनुभव करें कि इनके नयन, इनके बोल, इन्हों की वृत्ति वा वायब्रेशन न्यारे हैं। मधुबन में आते हैं तो बाप ब्रह्मा के कर्म साकार में होने के कारण भूमि में तपस्या, कर्म और त्याग के वायब्रेशन समाये हुए होने के कारण यहाँ सहज अनुभव करते हैं कि यह संसार न्यारा है क्योंकि ब्रह्मा बाप और विशेष बच्चों के वायब्रेशन से वायुमण्डल अलौकिक बना हुआ है। ऐसे ही जो बच्चा जहाँ भी रहता है, जो भी कर्मक्षेत्र है, हर एक बच्चे से बाप समान गुण, कर्म और श्रेष्ठ वृत्ति का वायुमण्डल अनुभव में आये, इसको बापदादा कहते हैं - बाप समान बनना। जो अभी तक संकल्प है बाप समान बनना ही है, वह संकल्प अभी चेहरे और चलन से दिखाई दे। जो भी सम्बन्ध-सम्पर्क में आये उनके दिल से यह आवाज निकले कि यह आत्मायें बाप समान हैं। (बीचबी च में खांसी आ रही है) आज माइक खराब है, मिलना तो है ना। यह भी तो माइक है ना, यह माइक नहीं चलता तो यह माइक भी काम का नहीं। कोई हर्जा नहीं यह भी मौसम का फल है।

तो बापदादा अभी सभी बच्चों से यह प्रत्यक्षता चाहते हैं। जैसे वाणी द्वारा प्रत्यक्षता करते हो तो वाणी का प्रभाव पड़ता है, उससे भी ज्यादा प्रभाव गुण और कर्म का पड़ता है। हर एक बच्चे के नयनों से यह अनुभव हो कि इन्हों के नयनों में कोई विशेषता है। साधारण नहीं अनुभव करें। अलौकिक हैं। उन्हों के मन में क्वेश्चन उठे कि यह कैसे बनें, कहाँ से बनें। स्वयं ही सोचें और पूछें कि बनाने वाला कौन? जैसे आजकल के समय में भी कोई बढ़िया चीज़ देखते हो तो दिल में उठता है कि यह बनाने वाला कौन है! ऐसे अपने बाप समान बनने की स्थिति द्वारा बाप को प्रत्यक्ष करो। आजकल मैजारिटी आत्मायें सोचती हैं कि क्या इस साकार सृष्टि में, इस वातावरण में रहते हुए ऐसे भी कोई आत्मायें बन सकती हैं! तो आप उन्हों को यह प्रत्यक्ष में दिखाओ कि बन सकता है और हम बने हैं। आजकल प्रत्यक्ष प्रमाण को ज्यादा मानते हैं। सुनने से भी ज्यादा देखने चाहते हैं तो चारों ओर कितने बच्चे हैं, हर एक बच्चा बाप समान प्रत्यक्ष प्रमाण बन जाए तो मानने और जानने में मेहनत नहीं लगेगी। फिर आपकी प्रजा बहुत जल्दी-जल्दी तैयार हो जायेगी। मेहनत, समय कम और प्रत्यक्ष प्रमाण अनुभव करने से जैसे प्रजा का स्टैम्प लगता जायेगा। राजे-रानी तो आप बनने वाले हैं ना! बापदादा एक बात का फिर से अटेन्शन दिला रहे हैं कि वर्तमान वायुमण्डल के अनुसार मन में, दिल से अभी वैराग्य वृत्ति को इमर्ज करो। बापदादा ने हर बच्चे को चाहे प्रवृत्ति में है, चाहे सेवाकेन्द्र पर है, चाहे कहाँ भी रहते हैं, स्थूल साधन हर एक को दिये हैं, ऐसा कोई बच्चा नहीं है जिसके पास खाना, पीना, रहना इसके साधन नहीं हो। जो बेहद के वैराग्य की वृत्ति में रहते हुए आवश्यक साधन चाहिए, वह सबके पास हैं। अगर कोई को कमी है तो वह उसके अपने अलबेले-पन या आलस्य के कारण है। बाकी ड्रामानुसार बापदादा जानते हैं कि आवश्यक साधन सबके पास हैं। जो आवश्यक साधन हैं वह तो चलने ही हैं। लेकिन कहाँ-कहाँ आवश्यकता से भी ज्यादा साधन हैं। साधना कम है और साधन का प्रयोग करना या कराना ज्यादा है। इसलिए बापदादा आज बाप समान बनने के दिवस पर विशेष अण्डरलाइन करा रहे हैं - कि साधनों के प्रयोग का अनुभव बहुत किया, जो किया वह भी बहुत अच्छा किया, अब साधना को बढ़ाना अर्थात् बेहद की वैराग्य वृत्ति को लाना। ब्रह्मा बाप को देखा लास्ट घड़ी तक बच्चों को साधन बहुत दिये लेकिन स्वयं साधनों के प्रयोग से दूर रहे। होते हुए दूर रहना - उसे कहेंगे वैराग्य। लेकिन कुछ है ही नहीं और कहे कि हमको तो वैराग्य है, हम तो हैं ही वैरागी, तो वह कैसे होगा। वह तो बात ही अलग है। सब कुछ होते हुए नॉलेज और विश्व-कल्याण की भावना से, बाप को, स्वयं को प्रत्यक्ष करने की भावना से अभी साधनों के बजाए बेहद की वैराग्य वृत्ति हो। जैसे स्थापना के आदि में साधन कम नहीं थे, लेकिन बेहद के वैराग्य वृत्ति की भट्ठी में पड़े हुए थे। यह 14 वर्ष जो तपस्या की, यह बेहद के वैराग्य वृत्ति का वायुमण्डल था। बापदादा ने अभी साधन बहुत दिये हैं, साधनों की अभी कोई कमी नहीं है लेकिन होते हुए बेहद का वैराग्य हो। विश्व की आत्माओं के कल्याण के प्रति भी इस समय इस विधि की आवश्यकता है क्योंकि चारों ओर इच्छायें बढ़ रही हैं, इच्छाओं के वश आत्मायें परेशान हैं, चाहे पद्मपति भी हैं लेकिन इच्छाओं से वह भी परेशान हैं। वायुमण्डल में आत्माओं की परेशानी का विशेष कारण यह हद की इच्छायें हैं। अब आप अपने बेहद की वैराग्य वृत्ति द्वारा उन आत्माओं में भी वैराग्य वृत्ति फैलाओ। आपके वैराग्य वृत्ति के वायुमण्डल के बिना आत्मायें सुखी, शान्त बन नहीं सकती, परेशानी से छूट नहीं सकती। आप वृक्ष की जड़ हैं, ब्राह्मणों का स्थान वृक्ष में कहाँ दिखाया है? जड़ में दिखाया है ना! तो आप फाउण्डेशन हैं, आपकी लहर विश्व में फैलेगी इसलिए बापदादा विशेष साकार में ब्रह्मा बाप समान बनने की विधि, वैराग्य वृत्ति की तरफ विशेष अटेन्शन दिला रहा है। हर एक से अनुभव हो कि यह साधनों वश नहीं, साधना में रहने वाले हैं। होते हुए वैराग्य वृत्ति हो। आवश्यक साधन यूज़ करो लेकिन जितना हो सकता है उतना दिल के वैराग्य वृत्ति से, साधनों के वशीभूत होकर नहीं। अभी साधना का वायुमण्डल चारों ओर बनाओ। समय समीप के प्रमाण अभी सच्ची तपस्या वा साधना है ही बेहद का वैराग्य। सेवा का विस्तार इस वर्ष में बहुत किया। इस वर्ष चारों ओर बड़े-बड़े प्रोग्राम किये और सेवा से सहयोगी आत्मायें भी बहुत बने हैं, समीप आये हैं, सम्पर्क में आये हैं, लेकिन क्या सिर्फ सहयोगी बनाना है? यहाँ तक रखना है क्या? सहयोगी आत्मायें अच्छी-अच्छी हैं, अब उन सहयोगी क्वालिटी वाली आत्माओं को और सम्बन्ध में लाओ। अनुभव कराओ, जिससे सहयोगी से सहज योगी बन जाएँ। इसके लिए एक तो साधना का वायुमण्डल और दूसरा बेहद की वैराग्य वृत्ति का वायुमण्डल हो तो इससे सहज सहयोगी सहज योगी बन जायेंगे। उन्हों की सेवा भले करते रहो लेकिन साथ में साधना, तपस्या का वायुमण्डल आवश्यक है।

अभी चारों ओर पावरफुल तपस्या करनी है, जो तपस्या मन्सा सेवा के निमित्त बनें, ऐसी पावरफुल सेवा अभी तपस्या से करनी है। अभी मन्सा सेवा अर्थात् संकल्प द्वारा सेवा की टचिंग हो, उसकी आवश्यकता है। समय समीप आ रहा है, निरन्तर स्थितियाँ और निरन्तर पावरफुल वायुमण्डल की आवश्यकता है। बाप समान बनना है तो पहले बेहद की वैराग्य वृत्ति धारण करो। यही ब्रह्मा बाप की अन्त तक विशेषता देखी। न वैभव में लगाव रहा, न बच्चों में.. सबसे वैराग्य वृत्ति। तो आज के दिन का बाप समान बनने का पाठ पक्का करना। बस ब्रह्मा बाप समान बनना ही है। ऐसा दृढ़ निश्चय अवश्य आगे बढ़ायेगा।

बाकी सभी बच्चे सोचते होंगे कि आज प्राइज़ मिलना है। अभी देखो चारों ओर के बच्चे तो हैं नहीं, तो सिर्फ आप आये हुए को प्राइज़ दें! प्राइज तो है ही परन्तु बापदादा कहते हैं - हर एक सारे वर्ष में सर्व बन्धनों से मुक्त रहे! लिस्ट निकाली थी ना। कितने बंधन निकाले थे? (18) अच्छा तो 18 ही बंधन से स्वप्न तक भी मुक्त, स्वप्न में भी कोई बंधन की रूप-रेखा न आई हो, इसको कहा जाता है - मुक्त। तो हाथ तो बहुत सहज उठाते हैं, बाबा को पता है हाथ उठवायेंगे तो बहुत प्रकार के हाथ उठेंगे लेकिन फिर भी बापदादा कहते हैं कि जिस चेकिंग से आप हाथ उठाने के लिए तैयार हैं, बापदादा को पता है कितने तैयार हैं, कौन तैयार हैं। अभी भी और अन्तर्मुखी बन सूक्ष्म चेकिंग करो। अच्छा कोई को दु:ख नहीं दिया, लेकिन जितना सुख का खाता जमा होना चाहिए उतना हुआ? नाराज़ नहीं किया, राज़ी किया? व्यर्थ नहीं सोचा लेकिन व्यर्थ के जगह पर श्रेष्ठ संकल्प इतने ही जमा हुए? सबके प्रति शुभ भावना रखी लेकिन शुभ भावना का रेसपान्स मिला? वह चाहे बदले नहीं बदले, लेकिन आप उससे सन्तुष्ट रहे? ऐसी सूक्ष्म चेकिंग फिर भी अपने आपकी करो और अगर ऐसी सूक्ष्म चेकिंग में पास हो तो बहुत अच्छे हो। ऐसी पास आत्मायें अपने-अपने सेवाकेन्द्र पर चारों ओर सेन्टर पर अपना नाम, रिज़ल्ट सब बातों में कितना परसेन्ट रहा? सुख कितने को दिया? राज़ी कितने रहे? नाराज़ को राजी किया? कि जो राज़ी है उसको ही राज़ी किया? तो यह सब चेकिंग करके पास विद् ऑनर हैं, तो अपना नाम, अपने टीचर को लिख करके दो और टीचर जो छोटे-छोटे सेन्टर हैं, उन्हों के ऊपर जो बड़ी बहिनें मुकरर हैं, वह उन्हों से पास करावें फिर ज़ोन के पास सब नाम आवें। ज़ोन के पास सब नाम इकट्ठे करो फिर वह ज़ोन वाली ऐसी पास वाली आत्माओं के नाम मधुबन में भेजें, फिर इनाम मिलेगा। फिर ताली बजायेंगे। जो ऐसे पास विद् ऑनर होंगे उसको तो प्राइज़ मिलना ही चाहिए, वह मिलेगी लेकिन सच्ची दिल से, सच्चे बाप को अपना सच्चा पोतामेल बताना और प्राइज़ लेना क्योंकि बापदादा के पास सबके संकल्प तो पहुँचते हैं ना। तो जो हाथ उठाने वाले हैं ना, उसमें बापदादा ने देखा कि मिक्स बहुत हैं और बिना समझ के हाथ उठा देते हैं। तो कोई मिक्स वाले हाथ उठा दें और बापदादा प्राइज़ नहीं देवे तो अच्छा नहीं है। इसलिए कायदे-प्रमाण अगर पास विद् ऑनर हैं तो उसकी तो बहुत-बहुत महिमा है और ऐसे का नाम तो सभी ब्राह्मणों में प्रसिद्ध होना चाहिए ना। अच्छा है, मैजारिटी ने मेहनत अच्छी की है, अटेन्शन रहा है परन्तु सम्पूर्ण की बात है। जिन्होंने मेहनत की है, उन्हों को आज प्राइज़ के बजाए मुबारक दे रहे हैं। फिर प्राइज़ देंगे। ठीक है ना! अच्छा

दूसरी बात थी कि सभी ज़ोन वालों को मार्च तक माइक लाना है, सभी को याद तो है। तो पहले मार्च में बापदादा ज़ोन वालों से रिजल्ट लेंगे, किसने और किस क्वालिटी का माइक तैयार किया। आप कहेंगे यह माइक है लेकिन होगा छोटा माइक। समझो जिस नगर का माइक निकला, उसी नगर का माइक है, ज़ोन का भी नहीं है, तो उसको छोटा माइक कहेंगे ना। तो ऐसा कौन सा माइक तैयार किया है, वह बापदादा पूछेंगे। अगर कोई ज़ोन वाले लास्ट में नहीं भी आ सके तो अपनी चिटकी लास्ट टर्न में लिखकर भेजें, आवें तो ज़ोन के हेडस् को निमन्त्रण है। अगर नहीं आ सकते हैं, न आने का कोई ऐसा कारण है तो अपनी चिटकी भेज देंगे तो भी चलेगा। फिर बापदादा उन सभी माइक के संगठन का प्रोग्राम रखेंगे, जिसमें सभी तरफ के माइक स्टेज पर आयेंगे। उन्हों का विशेष प्रोग्राम रखेंगे, ऐसे नहीं कि मार्च में माइक भी लेकर आवें। माइक को वहाँ ही रहने दो, आप आना। जो माइक है उन्हों को तो धूमधाम से मंगायेंगे ना। उन्हों की स्वागत भी तो अच्छी करनी है ना। तो उन्हों का स्पेशल प्रोग्राम रखेंगे और फिर प्राइज़ देंगे नम्बरवन, टू, थ्री। ठीक है। ज़ोन वालों को स्पष्ट हुआ? मार्च में रिज़ल्ट लानी है। अच्छा।

अभी क्या याद रखा? कौन सी बात को अण्डरलाइन किया? बेहद का वैराग्य। अभी आत्माओं को इच्छाओं से बचाओ। बिचारे बहुत दु:खी हैं। बहुत परेशान हैं। तो अभी रहमदिल बनो। रहम की लहर बेहद के वैराग्य वृत्ति द्वारा फैलाओ। अभी सभी ऊँचे ते ऊँचे परमधाम में बाप के साथ बैठ सर्व आत्माओं को रहम की दृष्टि दो। वायब्रेशन फैलाओ। फैला सकते हैं ना? तो बस अभी परमधाम में बाप के साथ बैठ जाओ। वहाँ से यह बेहद के रहम का वायुमण्डल फैलाओ। (बापदादा ने ड्रिल कराई) अच्छा।

चारों ओर के सर्व अति स्नेही बच्चों को, सर्व चारों ओर के साधना करने वाले श्रेष्ठ आत्माओं को, बापदादा को सारे दिन में बहुत प्यारे-प्यारे, मीठे-मीठे दिल के गीत सुनाने वाले, रूह-रूहान करने वाले शक्तियों के, गुणों के वरदान से झोली भरने वाले, बापदादा को सबके गीत, खुशी के गीत स्नेह के गीत, रूहानी नशे के गीत, मीठी-मीठी बातें बहुत-बहुत दिल को लुभाने वाली सुनाई दी और बापदादा भी सुनने और मिलने में लवलीन थे। तो ऐसे दिल के सच्चे, दिल के आवाज़ सुनाने वाले बच्चे महान हैं और सदा महान रहेंगे, ऐसे मीठेमीठे बच्चे सदा बेहद के वैराग्य वृत्ति को अपनाने वाले, दृढ़ निश्चय बुद्धि बच्चों को बापदादा एक के बदले पद्मगुणा रिटर्न स्नेह दे रहे हैं। दिलाराम के दिल पर रहने वाले सभी बच्चों को बहुत-बहुत यादप्यार और नमस्ते।

जो बाहर भी सुन रहे हैं उन्हों को भी बाबा देख रहे हैं और बापदादा दूर नहीं देखते हैं लेकिन सभी तरफ के बच्चों को सम्मुख देख यादप्यार और मुबारक और याद सौगात वा याद पत्रों का रिटर्न कर रहे हैं कि सदा उड़ती कला में उड़ने वाले बच्चे सदा आबाद हैं, सदा ही आबाद रहेंगे। अच्छा।

दादी जी से

आज के दिन को स्मृति दिवस कहते हैं, तो स्मृति में क्या रहा? समर्थ का वरदान याद रहा? आपको तो डायरेक्ट विल कर ली ना? अच्छा पार्ट बजा रही हो। बापदादा देख रहे हैं, वृद्धि भी बहुत हो रही है और यह वृद्धि भी सेवा का सबूत ही है। तो बच्चों की सेवा को देख बापदादा तो खुश होते हैं। बाप गुप्त हो गये, अभी सभी के मुख पर क्या है? अभी तो सभी के मुख पर सामने बच्चे ही हैं। ब्रह्माकुमारियां बहुत अच्छा काम कर रही हैं तो अभी बच्चे प्रत्यक्ष हुए। अभी बाप प्रत्यक्ष होना है। बाप ने पहले बच्चों को प्रत्यक्ष किया। अभी बाप प्रत्यक्ष होंगे तो फिर तो समाप्ति हो जायेगी ना। इसलिए पहले बच्चे प्रत्यक्ष हो रहे हैं फिर बाप होंगे। फिर भी बहुत अच्छा, सेवा का उमंग-उत्साह अच्छा है, अभी निर्विघ्न बनाने की ज्यादा लहर फैलाओ। यह भी लहर फैल जायेगी तो सहज हो जायेगा।

आज सभी तरफ अच्छा वायुमण्डल था (सभी स्नेह में डूबे हुए थे) दिन का महत्त्व होता है। इस दिन का भी महत्त्व है। (दादी जानकी ने खास याद दिया है)

 

=============================================================================

QUIZ QUESTIONS

============================================================================

 

 प्रश्न 1 :- दिल का स्नेह एक खज़ाना किस प्रकार है ?

 

 प्रश्न 2 :- बापदादा ने समान बनने के लक्ष्य के साकार लक्षण कौन से बताए है ?

 

 प्रश्न 3 :- गुण और कर्म द्वारा प्रत्यक्षता का क्या प्रभाव पड़ता है ?

 

 प्रश्न 4 :- बापदादा ने कौन सी एक बात का अटेन्शन दिलाया है ?

 

 प्रश्न 5 :- बापदादा ने कौन सी सूक्ष्म चेकिंग करने के लिए कहा है ?

 

       FILL IN THE BLANKS:-    

 

(सच्ची, प्रत्यक्ष, अव्यक्त, अन्त, स्वप्न, बाप, समर्थ, वैभव, बंधन, विल, वरदान, बच्चों, सहज, मुक्त, प्राइज़)

 

1           आज के दिन ब्रह्मा बाप गुप्त रूप में बैकबोन बन अपने बच्चों को साकार रूप में विश्व के मंच पर ____ किया। इसलिए इस दिवस को बच्चों के प्रत्यक्षता का दिन कहा जाता है, ____ दिवस कहा जाता है, ____ पावर देने का दिवस कहा जाता है।

 

2           जो बच्चा जितना ____ स्थिति में स्थित हो मिलन मनाते हैं उस हर एक बच्चे को जो ____ चाहिए वह ____ प्राप्त होता है।

 

3           यही ब्रह्मा बाप की ____ तक विशेषता देखी। न ____ में लगाव रहा, ____ में.. सबसे वैराग्य वृत्ति। तो आज के दिन का बाप समान बनने का पाठ पक्का करना।

 

4           अच्छा तो 18 ही बंधन से ____ तक भी मुक्त, स्वप्न में भी कोई ____ की रूप-रेखा न आई हो, इसको कहा जाता है - ____

 

 5   जो ऐसे पास विद् ऑनर होंगे उसको तो प्राइज़ मिलना ही चाहिए, वह मिलेगी लेकिन ____ दिल से, सच्चे ____ को अपना सच्चा पोतामेल बताना और ____ लेना क्योंकि बापदादा के पास सबके संकल्प तो पहुँचते हैं ना।

 

सही गलत वाक्यो को चिन्हित करे:-】【

 

1      :- बापदादा भी सभी बच्चों को स्नेह के रेसपान्स में स्नेह और समर्थ-पन का वरदान दे रहे हैं।

 

2      :-  स्नेह का रिटर्न होता है -अविनाशी वरदान की गिफ्ट।

 

3      :- वायुमण्डल में आत्माओं की परेशानी का विशेष कारण यह बेहद की इच्छायें हैं।

 

4      :- समय समीप के प्रमाण अभी सच्ची तपस्या वा साधना है ही बेहद का वैराग्य।

 

 5   :- बस ब्रह्मा बाप समान बनना ही है। ऐसा दृढ़ निश्चय अवश्य आगे बढ़ायेगा। 

 

============================================================================

QUIZ ANSWERS

============================================================================

 

 प्रश्न 1 :- दिल का स्नेह एक खज़ाना किस प्रकार है ?

   उत्तर 1 :- बाबा ने कहा वरदान प्राप्त करने का साधन है - दिल का स्नेह।

          .. जहाँ दिल का स्नेह है, वो स्नेह ऐसा खज़ाना है जिस खज़ाने द्वारा, बापदादा द्वारा जो चाहे अविनाशी वरदान प्राप्त कर सकते हो।

          . वह स्नेह का खज़ाना हर बच्चे के पास है? स्नेह का खज़ाना है तब तो पहुँचे हो ना! स्नेह खींचकर लाया है और स्नेह में रहना बहुत सहज है।

          .. पुरूषार्थ की मेहनत नहीं करनी पड़ती क्योंकि स्नेह का अनुभव हर आत्मा को होता ही है। सिर्फ अब जो बिखरा हुआ स्नेह था, कुछ कहाँ, कुछ कहाँ था, वह बिखरा हुआ स्नेह एक के ही साथ जोड़ लिया है क्योंकि पहले अलग-अलग सम्बन्ध था, अब एक में सर्व सम्बन्ध हैं। तो सहज सर्व स्नेह एक से हो गया। इसलिए हर एक कहता है मेरा बाबा।

 

 प्रश्न 2 :- बापदादा ने समान बनने के लक्ष्य के साकार लक्षण कौन से बताए है ?

 उत्तर 2 :-अभी यह समान बनने का लक्ष्य तो सभी के पास है, अभी साकार में लक्षण दिखाई दें।

          .. जिस भी बच्चे को देखें, जो भी मिले, सम्बन्ध-सम्पर्क में आये, उन्हों को यह लक्षण दिखाई दें कि यह जैसे परमात्मा बाप, ब्रह्मा बाप के गुण हैं, वह बच्चों के सूरत और मूरत से दिखाई दें। अनुभव करें कि इनके नयन, इनके बोल, इन्हों की वृत्ति वा वायब्रेशन न्यारे हैं।

          . मधुबन में आते हैं तो बाप ब्रह्मा के कर्म साकार में होने के कारण भूमि में तपस्या, कर्म और त्याग के वायब्रेशन समाये हुए होने के कारण यहाँ सहज अनुभव करते हैं कि यह संसार न्यारा है क्योंकि ब्रह्मा बाप और विशेष बच्चों के वायब्रेशन से वायुमण्डल अलौकिक बना हुआ है।

          .. ऐसे ही जो बच्चा जहाँ भी रहता है, जो भी कर्मक्षेत्र है, हर एक बच्चे से बाप समान गुण, कर्म और श्रेष्ठ वृत्ति का वायुमण्डल अनुभव में आये, इसको बापदादा कहते हैं - बाप समान बनना।

          .. जो अभी तक संकल्प है बाप समान बनना ही है, वह संकल्प अभी चेहरे और चलन से दिखाई दे। जो भी सम्बन्ध-सम्पर्क में आये उनके दिल से यह आवाज निकले कि यह आत्मायें बाप समान हैं।

 

 प्रश्न 3 :- गुण और कर्म द्वारा प्रत्यक्षता का क्या प्रभाव पड़ता है ?

   उत्तर 3 :-  तो बापदादा अभी सभी बच्चों से यह प्रत्यक्षता चाहते हैं।   

          .. जैसे वाणी द्वारा प्रत्यक्षता करते हो तो वाणी का प्रभाव पड़ता है, उससे भी ज्यादा प्रभाव गुण और कर्म का पड़ता है। हर एक बच्चे के नयनों से यह अनुभव हो कि इन्हों के नयनों में कोई विशेषता है। साधारण नहीं अनुभव करें। अलौकिक हैं।

         . उन्हों के मन में क्वेश्चन उठे कि यह कैसे बनें, कहाँ से बनें। स्वयं ही सोचें और पूछें कि बनाने वाला कौन? जैसे आजकल के समय में भी कोई बढ़िया चीज़ देखते हो तो दिल में उठता है कि यह बनाने वाला कौन है! ऐसे अपने बाप समान बनने की स्थिति द्वारा बाप को प्रत्यक्ष करो।

          ..  आजकल मैजारिटी आत्मायें सोचती हैं कि क्या इस साकार सृष्टि में, इस वातावरण में रहते हुए ऐसे भी कोई आत्मायें बन सकती हैं! तो आप उन्हों को यह प्रत्यक्ष में दिखाओ कि बन सकता है और हम बने हैं। आजकल प्रत्यक्ष प्रमाण को ज्यादा मानते हैं। सुनने से भी ज्यादा देखने चाहते हैं तो चारों ओर कितने बच्चे हैं, हर एक बच्चा बाप समान प्रत्यक्ष प्रमाण बन जाए तो मानने और जानने में मेहनत नहीं लगेगी। फिर आपकी प्रजा बहुत जल्दी-जल्दी तैयार हो जायेगी।

          .. मेहनत, समय कम और प्रत्यक्ष प्रमाण अनुभव करने से जैसे प्रजा का स्टैम्प लगता जायेगा। राजे-रानी तो आप बनने वाले हैं ना!

 

 प्रश्न 4 :- बापदादा ने कौन सी एक बात का अटेन्शन दिलाया है ?

   उत्तर 4 :-बापदादा एक बात का फिर से अटेन्शन दिला रहे हैं कि वर्तमान वायुमण्डल के अनुसार मन में, दिल से अभी वैराग्य वृत्ति को इमर्ज करो। बापदादा ने हर बच्चे को चाहे प्रवृत्ति में है, चाहे सेवाकेन्द्र पर है, चाहे कहाँ भी रहते हैं, स्थूल साधन हर एक को दिये हैं, ऐसा कोई बच्चा नहीं है जिसके पास खाना, पीना, रहना इसके साधन नहीं हो। जो बेहद के वैराग्य की वृत्ति में रहते हुए आवश्यक साधन चाहिए, वह सबके पास हैं। अगर कोई को कमी है तो वह उसके अपने अलबेले-पन या आलस्य के कारण है। । जो आवश्यक साधन हैं वह तो चलने ही हैं। लेकिन कहाँ-कहाँ आवश्यकता से भी ज्यादा साधन हैं। साधना कम है और साधन का प्रयोग करना या कराना ज्यादा है। इसलिए बापदादा आज बाप समान बनने के दिवस पर विशेष अण्डरलाइन करा रहे हैं - कि साधनों के प्रयोग का अनुभव बहुत किया, जो किया वह भी बहुत अच्छा किया, अब साधना को बढ़ाना अर्थात् बेहद की वैराग्य वृत्ति को लाना।

 

 प्रश्न 5 :- बापदादा ने कौन सी सूक्ष्म चेकिंग करने के लिए कहा है ?

   उत्तर 5 :- बाबा ने कहा कि अभी भी और अन्तर्मुखी बन सूक्ष्म चेकिंग करो। अच्छा कोई को दु:ख नहीं दिया, लेकिन जितना सुख का खाता जमा होना चाहिए उतना हुआ? नाराज़ नहीं किया, राज़ी किया? व्यर्थ नहीं सोचा लेकिन व्यर्थ के जगह पर श्रेष्ठ संकल्प इतने ही जमा हुए? सबके प्रति शुभ भावना रखी लेकिन शुभ भावना का रेसपान्स मिला? वह चाहे बदले नहीं बदले, लेकिन आप उससे सन्तुष्ट रहे? ऐसी सूक्ष्म चेकिंग फिर भी अपने आपकी करो और अगर ऐसी सूक्ष्म चेकिंग में पास हो तो बहुत अच्छे हो।

 

       FILL IN THE BLANKS:-    

 

(सच्ची, प्रत्यक्ष, अव्यक्त, अन्त, स्वप्न, बाप, समर्थ, वैभव, बंधन, विल, वरदान, बच्चों, सहज, मुक्त, प्राइज़)

 

 1   आज के दिन ब्रह्मा बाप गुप्त रूप में बैकबोन बन अपने बच्चों को साकार रूप में विश्व के मंच पर ____ किया। इसलिए इस दिवस को बच्चों के प्रत्यक्षता का दिन कहा जाता है, ____ दिवस कहा जाता है, ____ पावर देने का दिवस कहा जाता है।

    प्रत्यक्ष / समर्थ / विल

 

 2  जो बच्चा जितना ____ स्थिति में स्थित हो मिलन मनाते हैं उस हर एक बच्चे को जो ____ चाहिए वह ____ प्राप्त होता है।

      अव्यक्त / वरदान / सहज

 

 3   यही ब्रह्मा बाप की ____ तक विशेषता देखी। न ____ में लगाव रहा, ____ में.. सबसे वैराग्य वृत्ति। तो आज के दिन का बाप समान बनने का पाठ पक्का करना।

      अन्त / वैभव / बच्चों

 

 4  अच्छा तो 18 ही बंधन से ____ तक भी मुक्त, स्वप्न में भी कोई ____ की रूप-रेखा न आई हो, इसको कहा जाता है - ____

      स्वप्न / बंधन / मुक्त

 

 5  जो ऐसे पास विद् ऑनर होंगे उसको तो प्राइज़ मिलना ही चाहिए, वह मिलेगी लेकिन ____ दिल से, सच्चे ____ को अपना सच्चा पोतामेल बताना और ____ लेना क्योंकि बापदादा के पास सबके संकल्प तो पहुँचते हैं ना।

      सच्ची / बाप / प्राइज़

 

सही गलत वाक्यो को चिन्हित करे:-】【

 

 1  :-  बापदादा भी सभी बच्चों को स्नेह के रेसपान्स में स्नेह और समर्थ-पन का वरदान दे रहे हैं। 

 

 2  :-  स्नेह का रिटर्न होता है -अविनाशी वरदान की गिफ्ट।

  स्नेह का रिटर्न होता है -  सहज वरदान की गिफ्ट।

 

 3  :-  वायुमण्डल में आत्माओं की परेशानी का विशेष कारण यह बेहद की इच्छायें हैं।

 वायुमण्डल में आत्माओं की परेशानी का विशेष कारण यह हद की इच्छायें हैं।

 

 4  :-  समय समीप के प्रमाण अभी सच्ची तपस्या वा साधना है ही बेहद का वैराग्य।

 

 5   :-  बस ब्रह्मा बाप समान बनना ही है। ऐसा दृढ़ निश्चय अवश्य आगे बढ़ायेगा।