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Enchanted Murli - Hindi

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04 जून, 2015

स्मृति

मीठे बच्चे: जब बच्चे कहते हैं बाबा हमने आपको अपना वारिस बनाया है। बाप बच्चों पर वारी जाते हैं। बच्चे फिर कहते हैं भगवान आप जब आयेंगे तो हम आप पर वारी जाते हैं अर्थात बच्चा बनायेंगे। यह भी अपने बच्चों को वारिस बनाते हैं। बाबा को वारिस कैसे बनाऐंगे ? यह भी गहरी बात है। अपना सब कुछ एक्सचेंज करना- इसमें बुद्धि का काम है।

मीठे बाबा, आप मेरे वारिस हो। मैं आपको अपना बच्चा स्वीकार करता हूँ और स्वयं को आपके समक्ष समर्पण करता हूँ। मैं आपको तुच्छ दान देता हूँ और बदले में आप मुझे महल देते हो। इस लेन-देन से मैं आपको अपना बच्चा बनाकर सच्चे और गहरे प्रेम का अनुभव करता हूँ। जब मैं आपको अपना वारिस बनाता हूँ तो आप भी मुझे अपना वारिस बनाते हो। जब मैं अपना सबकुछ समर्पित कर देता हूँ तो आप सेकेंड में मुझे जीवनमुक्ति दे देते हो।

स्मृर्थी

ऊपर की स्मर्ती से प्राप्त होने वाली शक्ति से मैं स्वयं को निरंतर सशक्त अनुभव कर रहा हूँ। मुझमें इस बात की जागृती आ रही है कि मेरी स्मृर्ती से मेरा स्वमान बढ़ता जा रहा है। मैं इस बात पर ध्यान देता हूँ कि मेरी स्मृर्ती से मुझमें शक्ति आ रही है और इस परिवर्तनशील संसार में मैं समभाव और धीरज से कार्य करता हूँ।

मनोवृत्ति

बाबा आत्मा से: उसको वारिस बनाकर फिर अपना शरीर निर्वाह भी करना है। सिर्फ ट्रस्टी बनकर रहना है। युक्तियां बहुत बताते रहते हैं। बाप तो सिर्फ देखते हैं कि कोई पाप कर्म में तो पैसे खराब नहीं करते ? मनुष्य को पुण्य आत्मा बनाने में पैसा लगाते हैं ? सर्विस कायदेसिर करते हैं ?
मीठे बाबा, ट्रस्टीपन की वृत्ति अपनाने का मेरा दृढ़ संकल्प है। मैं अपने शरीर, मन और धन का ट्रस्टी हूँ। मैं अपने हृदय के प्रेम से इन खज़ानों को आपको सौंपता हूँ। ट्रस्टीपन की वृत्ति से मैं आपके ट्रस्ट के योग्य बन जाता हूँ। बाबा आपके कार्य का मैं ट्रस्टी हूँ। मैं इस बात का ध्यान रखता हूँ कि मैं अपनी कमज़ोरीयों पर धन खर्च नहीं करूँ। ट्रस्टीपन की वृत्ति रखने से मैं आपके अलौकिक प्रेम का अनुभव करता हूँ।

दृष्टि

बाबा आत्मा से: कर्मातीत अवस्था हो जाऐगी तो फिर सब चले जाऐंगे। शिव की बारात गाई हुई है ना। शिवबाबा आए तब हम आत्माऐं जाऐं। शिवबाबा आते ही हैं सबको ले जाने।

आज अपनी दृष्टि में मैं सब आत्माओं की घर जाने की कल्पना की मूर्ति रखूंगा। आज जब भी मैं किसी मनुष्य से सम्पर्क करूंगा तो उन्हें एक छोटी बिन्दू आत्मा के रूप में देखूंगा जो शिव की बारात में शामिल होकर घर जा रही है।

लहर उत्पन्न करना

मुझे शाम 7-7:30 के योग के दौरान पूरे ग्लोब पर पावन याद और वृत्ति की सुंदर लहर उत्पन्न करने में भाग लेना है और मन्सा सेवा करनी है। उपर की स्मृर्ति, मनो-वृत्ति और दृष्टि का प्रयोग करके विनिम्रता से निमित् बनकर मैं पूरे विश्व को सकाश दूँगा।