मम्मा मुरली मधुबन 25-04-65


कल्प वृक्ष का ज्ञान

रिकॉर्ड:-

दुनिया रंग रंगीली बाबा दुनिया रंग..........

ज्ञान... सृष्टि रूपी वृक्ष को अभी जान गए हो ना अच्छी तरह से, क्योंकि यह मनुष्य सृष्टि वृक्ष वैरायटी है। अनेक धर्म और अनेक ही, हर एक धर्म का हर एक का अपना अपना। तो यह सब वैरायटी संसार कहा जाता है इसको। एक ना मिले दूसरे से। तो यह संसार अभी वृद्धि को पाकर कर करके अभी, फिर है वृद्धि भी तो कम होंगी ना। कोई चीज बढ़ती है तो फिर उसकी एंड भी होनी है। ऐसे नहीं है कि वृद्धि होते होते होते होते वृद्धि ही चलती रहेगी, नहीं। जो चीज बढ़ती है उसको फिर घटना भी है। तो यह मनुष्य सृष्टि रूपी सारी चक्कर को अभी बुद्धि में समझा है। और अभी जानते हैं कि यह भी वृद्धि को पाया हुआ वृक्ष, अभी इसकी एंड जाएगी। ऐसे नहीं है कि अभी और आगे वृद्धि होती चले नहीं। अभी वृद्धि को पा चुका है अभी इसका अंत होकर करके फिर नई दुनिया कहो या फिर वह सुख की दुनिया कहो जिसमें फिर संख्या थोड़ी। अभी जभी वृद्धि को पाता है तो संख्या बहुत है। अभी जभी वृद्धि को पाना होता है तो दुख भी वृद्धि को पाता है। जब संख्या थोड़ी है जिसको सतयुग कहा जाता है तब फिर ऐसा नहीं कहेंगे कि उसी टाइम है फिर सुख की दुनिया है। तो फिर यह सभी चीजें अभी बुद्धि में हैं इसीलिए अभी यह वृद्धि को पाया हुआ, दुखों को ही बढ़ने का है लेकिन यह जब वृद्धि पूरी होंगी तो यह दुख का भी अंत का समय पूरा रहेगा। और फिर सुख की दुनिया और उसमें जरूर है जो इतने धर्मों की और इतनी संख्या की वृद्धि जो पीछे पीछे हुई है तो जरूर है कि यह इतने अनेक धर्म भी तो फिर नष्ट होंगे ना। फिर इसके नाम निशान नहीं होंगे तो यह सभी चीजें कैसी वृद्धि को पार्टी है। ऐसे नहीं कहेंगे कि शुरू से ही सब कुछ है नहीं नहीं। अगर शुरू से ही सब कुछ तो फिर अपना अपना टाइम नहीं देते। देखो जैसे क्रिश्चियनिटी है तो उसका भी तो टाइम है ना, कि भाई इसको 1965 वर्ष हुए अभी तो जरूर है शुरू जो चीज हुई है इतने वर्षों से फिर उसका कुछ टाइम भी होगा जहां पूरा होगा। ऐसे नहीं की चली है तो चलती ही रहेंगी या कहेंगे शुरू से ही है सब, नहीं। सब शुरू से होते तो उसका अंदाजा क्यों करते, ऐसे नहीं कहेंगे कि दुनिया की शुरुआत 1965 बरस से हुई है, दुनिया को तो कहते हैं ना बहुत काल हुए, लेकिन यह धर्म का टाइम है भाई यह क्रिश्चियनिटी कब से चालू हुई? भाई इतने टाइम से, यह बुद्धिस्म धर्म कब से चालू हुआ? भाई इतने टाइम से, यह इस्लामी धर्म कब से हुआ? भाई इतना टाइम, तो टाइम है ना उनका। तो इसका मतलब है उसके पहले यह चीजें नहीं थी, तो यह जो चीजें नहीं थी, हुई है फिर इसको ना भी होना है ना। ऐसे नहीं है कि है तो फिर चलेंगे, नहीं। जैसे शुरू हुई है वैसे उसको पूरा भी होना है। तो फिर पूरा होने का भी तो समय होगा ना। फिर टाइम होगा तो यह सभी चीजें बुद्धि में है कि तुम का टाइम भी अभी आकर करके पूरा हुआ है, और सबका एक साथ टाइम पूरा होता है। ऐसे नहीं है कि इस्लामी धर्म का पूरे होने का अपना टाइम है, पूरा होना एंड सब की है, लेकिन शुरू होना अपने अपने टाइम पर है जैसे वृक्ष का, इसीलिए इसकी सृष्टि की मनुष्य सृष्टि की खुशामद वृक्ष के साथ क्योंकि वृक्ष में जैसे डाल-डाल टालियां अपने अपने टाइम पर आती हैं परंतु वृक्ष की सारी की आयु पूरी होंगी तो एक साथ हो जाएंगे। सब डाल टाल टालिया या जड़ जो भी है सब फाउंडेशन सबका एंड होगा तो एक साथ होगा और शुरू होगा तो अपने अपने समय पर होगा। इसलिए गीता में भी इस मनुष्य सृष्टि की खुसाबत वृक्ष के साथ की गई है, इसीलिए की गई है कि जिस तरह से वृक्ष की उत्पत्ति अपने अपने टाइम पर  यानी उनकी वृद्धि जो होती है अपने अपने समय पर वृद्धि, एक साथ नहीं होती ऐसा नहीं कि सारा ही झाड़ जो है एक साथ निकल आता है, नहीं। पहले जड़ पीछे डाल पीछे टाल पीछे टालियां, टाइम, अपने अपने समय पर, फिर एंड होती है एक साथ। क्योंकि वृक्ष की आयु पूरी होंगी तो साथ में होंगी ऐसे नहीं की टाल की यहाँ, टालियों की वहां, नम्बरवार ऐसे होंगी, न। एक साथ होंगी। तो यह सभी चीजें भी बुद्धि में रखने की है कि यह मनुष्य सृष्टि का भी उत्पत्ति या उनका कहै वृद्धि होना और फिर उसका अंत होना यह उसी तरीके से हैं जैसे वृक्ष का है। इसीलिए वृक्ष के साथ उसका यहां भी अपना दिखलाया हुआ है वृक्ष का झाड़ के ऊपर की वृद्धि ऐसे होती है जैसे वृक्ष की होती है और एंड भी जैसा वृक्ष का होता है। तो एक ही साथ तो अभी यह आकर कर करके सारा मनुष्य सृष्टि रूपी वृक्ष मानो जड़जड़ी भूत हुआ है अभी इसकी एंड। तो इसीलिए फिर एक साथ सबका सभी धर्म सभी जो कुछ है अभी सबकी एंड। और सभी धर्म वाले भी मानते हैं देखो मुसलमान भी अपने कयामत को मानते हैं, वह भी समझते हैं अभी हमारा कयामत का समय है। और अंग्रेज लोग, यह क्रिश्चियन लोग भी मानते हैं अपना सिग्रीकेशन तो वो भी समझते हैं उनके भी हिसाब से अभी उनका टाइम है। वह अपना बतलाते हैं 2000 बरस की, तो हमारी भी क्रिश्चियनिटी का टाइम इतना है तो उसमें बाकी देखो थोड़ा टाइम। और हिंदू भी प्रलय नाम का लेते तो है लेकिन वह प्रलय समझते हैं एकदम प्रलय हो जाएंगी, प्रलय का मतलब यह नहीं है कि एकदम से नाश हो जाएंगे नहीं। यह सृष्टि कभी बिल्कुल नष्ट होती ही नहीं है। मनुष्य सृष्टि अनादि है बाकी इसी तरह से वृद्धि को पाती है और इसी तरीके से फिर कम पड़ती है। तो अभी वृद्धि को पाकर करके अभी आप पूरी हुई है बाकी भी जो थोड़ा बहुत वृद्धि को, अभी देखो स्पीड चल रही है ना वृद्धि की बहुत तेजी से जितना भी बाकी पा रही है। पाने की है वह पा रही है बाकी हां एंड भी निशानी भी आ गई है कि अभी दुनिया का अंत आ चुका है। तो निशानियां सब खड़ी है, दिखाई पडती है ना अच्छी तरह से कि अभी नजर नहीं पड़ती है? की दुनिया के एंड कि ये निशानियां है और इधर हमारी वृद्धि का भी अंत का समय का अभी टाइम आकर करके पहुंचा है। तो यह सभी नजर पड़ती है ना अच्छी तरह से? या अभी नहीं समझ में आता है कि नहीं यह तो दुनिया का चला ही आया है, वैसे ही चलता चलेगा नहीं। यह दुनिया का भी चेंज होने का है। दुनिया तो चलती चलेंगे ऐसे नहीं दुनिया नहीं होंगी लेकिन दुनिया का परिवर्तन बाहर ही है अभी। तो यह सभी चीजें बुद्धि में रखने की है उस अनुसार अभी क्या होने का है उसके लिए हमको क्या करने का है, वह उपाय बैठकर करके अभी बाप समझाते हैं। जो कहा है कि मैं आता हूं सत्य धर्म स्थापन करने के लिए तो बाप ने कौन सा धर्म स्थापन किया, यह कोई जानता नहीं है। भले भारतवासी गाते हैं गीता में कहते भी हैं अब आया है अधर्म नाश करके सतयुग स्थापन करने परंतु कोई बता थोड़ी सकता है कि भगवान ने कौन सा धर्म स्थापन किया है। अगर पूछा जाए कि भाई क्राइस्ट में कौन सा धर्म स्थापन किया तो बहुत बता भी देंगे हां भाई क्रिश्चियन धर्म तो इसने स्थापन किया तो भाई बुद्ध धर्म बुद्ध ने स्थापन किया इस्लामी धर्म फलाने स्थापन किया अपने धर्म स्थापक का नाम बताएंगे लेकिन परमात्मा ने जो कहा कि मैं आकर करके धर्म स्थापन करता हूं उसका नाम क्या है कोई बताए, लेकिन जानते नहीं हैं। अभी अपन समझते हैं कि हां, उसने यह देवी देवता धर्म की स्थापना की तो देवी-देवता धर्म किसने स्थापन किया? उसे हम परमपिता परमात्मा ने आकर कर कर के देवी-देवता धर्म स्थापन किया और उसी टाइम पर ही दुनिया स्वर्ग थी। दूसरे जो भी धर्म आए हैं तो दुनिया स्वर्ग तो नहीं है ना, तो स्वर्ग का टाइम है जब देवी-देवता धर्म था और परमात्मा ने आकर करके वह धर्म ही स्थापन किया है और धर्मों का नष्ट। तो जरूरी है कि विनाश करें तभी तो हां स्थापना और यह काम उनका ही हो सकता है। इसीलिए उसको लिब्रेटर कहा जाता है वो एक है बाकी जो भी धर्म स्थापक हैं उनको लिब्रेटर नहीं कहा जाता क्योंकि वह कोई वापस नहीं ले जाते हैं वह तो आते हैं संख्या को बढ़ाते हैं। वह आने से उन्हों की संख्या बढ़ती है और बाप आता है तो संख्या को है वापस ले जाता है सबको और फिर वह बाकी संख्या उनकी जनरेशन जो होती हैं जो सदा सुखदाई बनती है। तो यह हिसाब भी सारा समझना है। समझने का हे बहुत वर्ल्ड की सारी जेनरेशंस कैसे चलती है और यह कैसे उत्पत्ति होती है इसका एंड कैसे होता है अभी कौन सा टाइम है तो यह अभी वह चेंज आने का समय है। सब धर्म पहले नहीं थे, फिर तो नहीं होंगे ना फिर भी तो अपने टाइम पर फिर क्राइस्ट आएगा, फिर यह क्रिश्चियनिटी स्थापन करेगा लेकिन अभी ना होवे तभी तो फिर अपने टाइम पर होना तो यह वर्ल्ड हिस्ट्री रिपीट भी होती है अपने अपने टाइम प।र फिर सबको आना है, यह रिपीट भी कैसे होती है और इसका शुरू होना हर एक चीज का अपना अपने टाइम पर पूरा होना है तो यह सारी हिस्ट्री को समझना है। तो वर्ल्ड की हिस्ट्री को भी समझना है उनके साथ इंडिविजुअल हम आत्मा का भी सारा चक्कर कैसे चलता है इन सब बातों को समझना है। बाकी ऐसे नहीं है कि बस आया, गया, खाया पिया चलो तो यह सारा जन्म यह चलता ही रहता है, नहीं। यह सभी हिसाब से ऐसी बातें कैसे चलते हैं उनके हिसाब को भी समझता है ना। इसीलिए बाप बैठकर करके समझाते है। इसको भी समझाने की जरूरत क्यों है? क्योंकि इसके जानने से हमको पता चलता है कि हमारा सबसे श्रेष्ठ धर्म अथवा हमारा सबसे श्रेष्ठ कर्म की प्रारब्ध कौन सी है। तो तभी तो मालूम पड़ता है ना, कि सब श्रेष्ठ धर्म कौन सा था। भाई वही देवी देवता उनके कौन से लक्षण हैं? वह कौन आ करके बनाता है? उसके लिए क्या पुरुषार्थ रहा है? वह बैठकर करके बात समझाते हैं, अभी हम उसका सौभाग्य पाते हैं। हम कोई यहां क्रिस्टन बनने के लिए नहीं है, हम कोई और नहीं, हम वही सौभाग्य पाने के लिए जो सत्य धर्म परम पिता परमात्मा ने स्थापन किया है, वह अभी अपना काम कर रहा है, यह कोई धर्म स्थापित मनुष्य का काम नहीं है यह परमपिता परमात्मा का, वह आकर करके जिसने आकर करके दुनिया के ऊपर एक धर्म और एक राज्य बनाया है और बाकी राज्य और धर्म सब नष्ट किए यह उनका अभी काम चल रहा है। तो यह बुद्धि में होना चाहिए कि यह अभी कार्य उनका हो रहा है, जो अथॉरिटी है, जिसको ही वर्ल्ड ऑलमाइटी  अथॉरिटी कहा जाता है। वह अथॉरिटी का काम और वही अभी वापस ले जा रहा है। जो इस संख्या को ले जाएगा ना आत्मा भी तो इम्मोर्टल है ना, नहीं तो आत्माएं किधर जाएंगे। इतनी आत्माएं आई है, तो फिर अपने ठिकाने पर भी तो जाएंगे ना जहां से आई हैं। तो उसको घर भी पहुंचाना है ना, पहुंचाएगा कौन? पहुंचाने वाला वह है, इसीलिए परम परमपिता परमात्मा के द्वारा, उनके द्वारा और कोई पहुंचा ही नहीं सकता क्योंकि उनके लिए, ले जाने के लिए पावरफुल सोल चाहिए ना, तो सबसे है सुप्रीम सौल इसलिए उनको ही वापस ले जाना है। तो इसीलिए आकर करके बाप फिर जिस को ही गति सद्गति अभी बहुत थोड़े समझते है की गति सद्गति भी किसको कहा जाता है। अभी गति सद्गति का मतलब ही है कि आत्माओं को वापस ले जाना तो देखो वापस ले जाते हैं और फिर अपने अपने टाइम पर अपने अपने समय पर आएंगे नंबर वार। परंतु पहला नंबर उन्हों का है इसीलिए नंबर पर आने के लिए पहले नंबर में देखो यह पुरुषार्थ कर रहे हैं। और अच्छी तरह से पुरुषार्थ में लगे हो ना? अपना समझते हो ना हम किस लिए यह पुरुषार्थ कर रहे हैं? जिसके ऊपर मनुष्य के लिए कोई पुरुषार्थ है ही नहीं ऊंचे में ऊंचा पुरुषार्थ मनुष्य के ऊंचे में ऊंचा बनान यह है उस परमपिता परमात्मा का काम। तो इसीलिए देखो बाप हमको ऐसा मनुष्य बनाता है, हां.. है तो मनुष्य ऐसे नहीं कि मनुष्य के बनाने का मतलब है हमारा ना काम ना करो, यह बनाता है नहीं। लेकिन हमारी स्टेज वह ऊंची बनाता है ऐसा। इसीलिए कहते हैं मैं मनुष्य को देखो ऊंचे में ऊंचा बनाता हूं। बाकी ऐसे नहीं हमारी आंखें ,कान, नाक यह बैठ कर के बनाता है मिट्टी से। जैसे समझाते हो गोता बनाया फिर स्वस्तिका बनाया, नहीं। हम एकदम गोते हो गए ना, खाली हो गए एकदम। हमारे से वह निकल थी बल। अभी बाप आ कर करके फिर बल डालता है जिससे हमारी लाइफ फिर वह ऊंची बनती है। तो ऊंचे में ऊंचा मनुष्य, इस मनुष्य के ऊपर कोई ऊंचा है ही नहीं इसलिए आपको वह बनाता है जो मनुष्य में ऊंचे में ऊंचा मनुष्य। सबसे ऊंची मनुष्य कौन से? यही जिसमें एवर हेल्दी वेल्थी एवर  वेल्दी। कभी कोई यहां दुख है ही नहीं। कभी चलते हो उधर, हां? यह ख्याल पक्का है ना? तो पक्का ख्याल रखो। इरादा मजबूत रखो। और अंत मती हो गति जैसा.... जैसा इरादा वैसी वैसी यहां कहा जाता है अंत मत सो गति ऐसी... । ऐसी गति को पाएंगे तो ऐसे अपना धारणा बनाते रहो। और उसके लिए अपना यह पुरुषार्थ है, अथवा करम है करम करना है। ड्रामा पर मूंजने का नहीं है, कर्म करना है बाकी ड्रामा तो समझा है ना नंबरबार यह कहेंगे ड्रामा। इसको क्यों, नाटक है जैसा यह जैसा खेल है। शुरू कैसा होता है पूरा कैसा होता है बीच में बाय प्लांट्स कैसे आते हैं, कहानी एक ही है शुरू से लेकर करके भारत का प्राचीन जो धर्म था जब गिरता है तो पीछे दूसरे दूसरे धर्म आते हैं तो उसको नाटक एक ही है। जैसे कहानी होती है ना, कहानी एक ही होती है, एक राजा यह है, फिर वह राजा का कैसे राजाई चली गई, फिर पीछे दूसरों ने आकर करके उसके ऊपर विन किया ऐसे कहानी में चलता है ना। तो यह भी ऐसे पहले पहले हमारा एक राज्य एक धर्म था जब उसकी पावर कम हो गई तो फिर और दूसरे धर्म आए, फिर उनकी कुछ पावर ने काम किया बस ऐसे ही चलते चलते चलते फिर अंत आती है। फिर सभी धर्मों का भी एंड होता है। फिर बाप आ कर करके फिर वही प्राचीन स्थापना आदि सनातन धर्म की स्थापना करते हैं। तो कहानी उनकी है और बीच में यह सभी बाय प्लॉट आते हैं तो नाटक हो गया ना, ड्रामा हो गया। और फिर पूरा हो करके फिर रिपीट होता है, इसीलिए और को कहते हैं कि यह बना बनाया है परंतु बना बनाया जिस नियम से हैं हमको तो उस नियम पर चलना है ना। वह करना तो अपना कर्म है ना, वह खाली नाटक समझना है बुद्धि में। बस ऐसा नाटक है बाकी ऐसे नहीं कि उसमें करना एक्शन, एक्टर में तो हम को आना है तो वह अपना कर्म हमको करना ही है। हमको अपना सारा मदार उसी के ऊपर रखने का है अच्छा भोग है इसीलिए टाइम थोड़ा बचाना पड़ेगा ना, अब एक्टर्स हैं लेकिन इस एक्टर का ड्रामा कहां से शुरू होता है, कहां पूरा होता है वह एक्टर्स को मालूम तो होना चाहिए हमारा पार्ट क्या है, हम क्या बने हुए थे, अब कहां पहुंचे हैं, यह सभी बातों का नॉलेज होना चाहिए ना। तो बैठ कर करके अभी समझाते हैं, बाप भी अभी है, गोप गोपियां भी अभी हैं, और अपना सौभाग्य भी बाप से ले भी अभी रहे हैं। तो उसमें भी हमें अपने की कोई कमी नहीं डालने की पूरा अटेंशन देना है पूरा पुरुषार्थ करना है। क्या है तो यही है बाकी हां थोड़ी-थोड़ी तकदीर है, कि धनवान बना तो क्या बना, थोड़ा एक बार तो क्या हुआ। कंप्लीट तकदीर, तो तकदीर तो तदबीर, कैसा? ख्याल ऐसा ही किया है ना? पक्का? तो इस निश्चिता से और दृढ़ता से हटना नहीं है, और इसमें पूरा फिर चलना भी है। उस बनने के लिए, उस पाने के लिए, जो कुछ करना है वह तो करके रहना पड़ेगा ना। तो अपनी शक्ल दिखलाई है, तो यहां वह बनने का पुरुषार्थ रख रहे हैं? कैसे? रख रहे हो ना अच्छी तरह से? अच्छा बाप को याद करते हो ना अच्छी तरह से? और दादा दादा को समझा है ना अच्छी तरह से? बापदादा और मां की मीठे मीठे... मीठे होना? की कड़वी? पक्का? मीठी... ? अच्छा....ऐसे मीठे मीठे शिकायत है सपूत बच्चों प्रीत याद प्यार और गुड मॉर्निंग और सब टाइम गुड रखने का पूरा पुरुषार्थ रखते हो ना? कोई माया बेड का संग नहीं करना। संभल के रहना। ना कोई क्रोध, ना लोभ, ना मोह, ना अहंकार। अहंकार की तो हां., पहले ही खबरदारी रखने की है। इसीलिए इन सब बातों को संभालते रहना।कोई भी ऐसा, इनका माया का संग नहीं करना है। इसी संग से बचते रहना ,तो बचते रहते हो ना, (किसी ने कहा नहीं लोभ होता है) अरे क्यों? लोभ होना है शुद्ध, बाकी शरीर निर्वाह अर्थ तो काम करना ही है ना