मम्मा मुरली मधुबन

रचना और रचयिता का ज्ञान - 2
 


रिकॉर्ड :
आने वाले कल की तुम तस्वीर हो, नाज करेगी दुनिया तुम पर दुनिया की तकदीर हो….
आज की बदतकदीर, ऐसे कहेंगे इसका मतलब है कि आज हमारी दुनिया की वह स्थिति है, जिस दुनिया को कहते ही हैं दुःख और अशांति की दुनिया तो दुःख अशांति क्या है बदतकदीर कहेंगे ना । परंतु ऐसे नहीं कहेंगे कि कोई हमारी सदा ही ऐसी दुनिया है । नहीं, दुनिया हमारी तकदीर वाली भी थी । तकदीर का मतलब ही है हम मनुष्य सदा सुख और शांति वाले थे । तो आज बद तकदीर है दुनिया की, मानो बहुत अभी देरी नहीं है, अभी बहुत निकट आकर के पहुंचे हैं मानो कल को तकदीरवान बनने के हैं यानी इस जन्म के बाद परन्तु बनेंगे तभी जब हम इस जन्म में अपने कर्मों को श्रेष्ठ बनाएंगे । यह है उस बाप का फरमान जो हमारे परम पिता परम पूज्य बाप है ना, यह हम नहीं कहते हैं उसने सुनाया है, वह आप लोगों को सुनाते हैं अभी पिता क्या कहते हैं । अच्छा, यह चित्र ले आना तो सहज समझाएं, एक इशारे में ये करुना, हाँ श्री राम ले आओ कोई भी ले आओ । हाँ यहाँ यह इजी समझाया आपको, कल की तकदीर और आज की, यह दिखाई पड़ता है ना, देखो यह हम थे, यह दूसरे नहीं हैं, यह मनुष्य की स्टेटस है तो हम ऐसे थे । ऐसे का मतलब यह नहीं देखना है, यह हमारी लाइफ ऐसी थी । हमारी लाइफ ये थी मानो सिंबल, निशान है की प्रैक्टिकल हमारी लाइफ क्या थी । हम मनुष्य नर और नारी, नारी भी थी, लक्ष्मी नारायण जिन्हें कहते थे यह राजधानी थी, यह दुनिया थी इस लाइफ की, जिसमें हम एवर हेल्थी एवर वेल्दी एवर हैप्पी समझते हो न तो यह हमारी लाइफ थी । यह जो कृष्णा और राधा, मानते हैं न मंदिरों में, ये लक्ष्मी नारायण तो यह छोटापन है इन्हीं का । यह लक्ष्मी का छोटापन राधा तो छोटे पन में उनका नाम राधा है और श्री नारायण का छोटेपन में नाम कृष्ण है फिर जब स्वयंबर करते हैं यह राधा कृष्ण तो उनका नाम हो जाता है लक्ष्मी नारायण यह इनकी छोटी लाइफ है छोटापन जैसे आप लोग जो आप शादीशुदा हो तो छोटेपन में लड़की का और लड़के का अपना अपना नाम सब अलग है, पीछे जब संबंध होता है तो रिवाज होता है कि लड़की जब आती है तो अपने ससुर घर में उसका नाम दूसरा होता है, आप लोगों में भी होगा परन्तु पता नहीं किसी में ना भी हो ये रसम लेकिन वहाँ रिवाज था की यह दोनों का नाम बदली होता है लेकिन है एक ही लाइफ जैसे आप की छोटेपन की लाइफ और बड़ेपन की लाइफ, पर लाइफ तो एक ही है ना । तो यह छोटापन कृष्ण राधे और उन्हीं का ही बड़ा बन यह लक्ष्मी नारायण तो यह है वास्तव में यह हमारे सूर्यवंशी चंद्रवंशी राजे महाराजे जिसको रामराज्य कहा है और जो श्री लक्ष्मी श्री नारायण का राज्य हुआ है । अभी यह जो कृष्ण की बात मूंझ गई है न जो कई समझते हैं की यह कृष्ण द्वापर मे था और द्वापर में आकर के परमात्मा ने इसके तन में ऐसे ही समझो, आकर के गीता सुनाई, अधर्म नाश और धर्म स्थापना के लिए, ऐसे मानते आए हो ना । गीता मैं ऐसा ही है न कि द्वापर के अंत में सुनाया, पढ़ने वाले गीता समझते हो ना, तो ऐसे ही समझते आए हो और हम भी ऐसे ही समझते थे लेकिन अभी परमात्मा ने क्या सुनाया है की यह तो द्वापर का तो सर्वगुण संपन्न सोलह कला संपूर्ण को कहेंगे ना । सर्वगुण संपन्न सोलह कला संपूर्ण, संपूर्ण निर्विकारी, ऐसा मनुष्य द्वापर के अंत में तो था ही नही । अभी उसमें परमात्मा आया और आ करके सुनाया, एक तो ऐसा मनुष्य नहीं था, दूसरी यह भी चीज समझने की है कि अगर इस द्वापर में बैठकर के सुनाया अधर्म विनाश और धर्म स्थापना का नॉलेज सुना करके परमात्मा ने अधर्म नाच किया तो फिर कलयुग क्यों आया? यह भी क्वेश्चन है ना कि द्वापर के अंत के बाद क्या हुआ ? द्वापर के अंत के बाद तो कलयुग चालू हो गया, अभी अगर भगवान ने आकर करके अधर्म नाश करने का काम चलाया तो भगवान का अधर्म नाश कहाँ हुआ और ही कलयुग शुरू हो गया, यह तो और ही भगवान आया और ही हमारे लिए मुसीबत पैदा की । अगर धर्म स्थापन करना था तो द्वापर के बाद गोल्डन एजेड वर्ल्ड हो जानी चाहिए, फिर कलयुग नहीं होना चाहिए लेकिन द्वापर के अंत के बाद तो कलयुग हो गया ना । अभी कलयुग ही चल रहा है ना, तो भगवान ने जो धर्म स्थापन किया वह कहाँ गया, भगवान वाला धर्म । तो यह समझने की बात है यह भूल है । अभी यह शास्त्रों में भूल है कि द्वापर के अंत में जो गीता सुनाई तो यह महाभारी महाभारत युद्ध द्वापर के अंत का नहीं है । अगर द्वापर के अंत में आकर के उसने अधर्म विनाश और धर्म का स्थापन किया तो वो धर्म भी होना चाहिए न और अभी कलयुग क्यों हो गया ? भगवान् आया और कलयुग बनाया तो ऐसी तो चीज अच्छी नहीं है न । ऐसा भगवान फिर आया ही क्यों जो हमारे लिए कलयुग बनाया तो यह चीज नहीं है, तो द्वापर में वह आया नहीं । वह कहता है मेरा टाइम ही है आने का जबकि अधर्म के अंत का समय है । तो अधर्म के अंत का पीरियड कौन सा है, कोई विचारवान सुनाए तो अधर्म के अंत का टाइम कौन सा कहेंगे? आप बताइए भूपाल जी, अधर्म के अंत का कौन सा टाइम? गोल्डन एज आने का और कलयुग के अंत का तो कलयुग का अंत, उसको कहा जाएगा अधर्म पीरियड का अंत क्योंकि कलयुग माना ही है तमोप्रधान वर्ल्ड, उसी का नाम ही कलयुग है, गोल्डन एजेड माना सतयुगी सतोप्रधान वर्ल्ड तो अगर परमात्मा को आना चाहिए, विचार की बात है, यह विवेक की बात है थोड़ा समय शास्त्रवाद को भुला करके और विवेक से अगर काम लिया जाए तो आप सोचिए कि भगवान आया अधर्म नाश करने के लिए तो अगर अधर्म नाश करने के लिए आया तो उसको कब आना चाहिए? अधर्म का नाश होना कब हो सकता है जबकि कलयुग का अंत हो ना, तभी तो कलयुग का नाश और सतयुग आने का टाइम है तभी आकर के गोल्डन एजड वर्ल्ड बनाए क्योंकि इस चक्कर को तो चलना ही है ना गोल्डन, सिल्वर, कॉपर एंड आयरन, ऐसे नहीं है कि कॉपर में आकर के गोल्डन कर देवें पीछे, नहीं कॉपर एज के बाद आयरन एज को तो अवश्य आना ही है इसीलिए अगर परमात्मा को आकर के अधर्म नाश करना है तो जब अधर्म की पीरियड पूरी होने पर है तभी वह आकर के अधर्म का नाश और गोल्डन एजेड आकर के स्थापन करता है, क्रिएट करता है क्योंकि उनके बिना गोल्डन एज और कोई ला नहीं सकता है क्योंकि गोल्डन लाने के लिए प्योरिटी चाहिए और प्योरिटी को लाने के लिए सिवाय उसी परमपिता परमात्मा के और कोई पावर दे नहीं सकता है । इसीलिए उसने जो कहा है अधर्म विनाश और धर्म स्थापन उसको कहा जाएगा कलयुग आयरन एज की एंड और गोल्डन एज की आदि उसका कॉनफ्लुएंस, उसी कनफ्लुएंस एज पर परमात्मा आते हैं । तो यह चीज समझने की है लेकिन परमात्मा अभी उसी समय, आर्यन एज में ऐसा मनुष्य तो हो ही नहीं सकता है, द्वापर एज में भी नहीं हो सकता है परंतु द्वापर एज तो टाइम ही नहीं है उसके आने का और आयरन एज में तो ऐसा मनुष्य है ही नहीं । अगर ऐसा मनुष्य पहले से ही है सर्वगुण संपन्न तो भगवान को आकर के बाकी क्या करना है और एक अकेला थोड़े ही होगा, होगा तो उसकी वंशावली होगी । अगर कलयुग में एक मनुष्य है तो ऐसे तो बहुत मनुष्य होंगे अकेला तो नहीं होगा ये ऐसा, ऐसा भी तो नहीं ना । जरूर उसके साथ उसकी वंशावली भी चाहिए तो ऐसा मनुष्य आयरन एजेड वर्ल्ड में हो ही नहीं सकता है, जब है ही आयरन एजट वर्ल्ड उसमें ऐसा कहाँ से आया तो इसीलिए इस के (कृष्ण के) तन में नहीं, अभी यह है सचमुच तो उस सतयुग का, गोल्डन एजेड का, यह है छोटेपन की मनुष्य की लाइफ फिर ये है बड़ेपन की तो इसको कृष्ण और यह श्री लक्ष्मी नारायण और यह राधे-कृष्ण, तो यह है सतयुग का सर्वगुण संपन्न । अभी परमात्मा आया कलयुग में तो कलयुग में यह परमात्मा निराकार जिसको कहते हैं, यह सुप्रीम सौल, अभी अगर इसको आना है और आकर के कलयुग में नॉलेज देना है तो कलयुगी मनुष्य मिलेगा ना इसीलिए कहते हैं मैं आता हूँ कोई साधारण तन में, तो वह बतलाते हैं कि मैं साधारण तन में आता हूँ । मैं इस में आकर के नॉलेज सुनाता हूँ सिर्फ नॉलेज देने के लिए आता हूँ, ऐसा नहीं इसमें पहले से में हूँ । इसमें अपनी सोल तो है ना, जैसे सब में अपनी सोल है लेकिन मैं टेम्पोरेरी आता हूँ जैसे आप लोगों ने देखा होगा ना, कभी कोई इविल सोल भी आ करके बोलती है, देखा है कभी किन्हो ने कभी इविल सोल किसमें आ करके बोलती हैं इसीलिए मैं सुप्रीम सोल हूँ ना, तो मैं सुप्रीम सोल आ करके यह जो मेरे पास नॉलेज है वह आ करके देता हूँ । तो मैं आकर के नॉलेज देता हूँ कलयुग के अंत में तो कलयुग के अंत में तो तमो प्रधान शरीर मिलेगा ना, ऐसा कहाँ से मिलेगा, ऐसा मिलेगा जैसे अभी हम हैं साधारण, ऐसा ही कोई शरीर मिलेगा तो उसको आकर के इस तन द्वारा जिसका फिर नाम रखता है जब यह इसको अडॉप्ट करता है परमात्मा तो इसका नाम रखता है, पहले इसका नाम दूसरा है परंतु जब यह अडॉप्ट करता है, जब इसका आधार लेता है तो इसका नाम रखता है ब्रह्मा । ब्रह्मा का मतलब है उसका अर्थ है कि उसके द्वारा आकर के, क्योंकि कहा जाता है ना ब्रह्मा द क्रिएटर, ब्रह्मा कहा जाता है उसको जिससे रचना रची जाती है तो इसीलिए इनका नाम रखा क्योंकि इससे अभी नई रचना शुरू करते हैं यानी प्योरिटी का नॉलेज दे करके इसके मुख द्वारा और फिर प्योरिटी की जनरेशंस चालू करते हैं इसीलिए इनका नाम रखा ब्रह्मा । तो मैं आया कलयुग में बात कहता है यह बाप, बाप यह है निराकार परमात्मा । हमारा पिता जो है वह यह सुप्रीम सौल निराकार, अब आया इसके तन में और आकर के नॉलेज दिया और उसी नॉलेज से हमको बैठकर के समझाते हैं, सभी मनुष्य आत्माओं को नर और नारी को जो बैठकर के ज्ञान दे करके यह स्टेटस हम नर नारियों की बनाता है, समझा, तो नॉलेज सुनाया गीता सरमोनाइजर कौन हुआ, यह, नोट यह । यह गीता सर्मोनाइजर नहीं, गीता सर्मोनईजर यह हुआ लेकिन ओरगंस चाहिए ना, यह ऐसे कैसे बोलेगा यहाँ से, यह तो निराकार है यहाँ से आवाज कैसे करेगा । इनको ओरगंस जरूर चाहिए, मनुष्य का तन जरूर चाहिए । तो इसमें आ करके बोलता है लेकिन बोलता यह है । नॉलेज फुल यह है, यह नहीं है नॉलेज फुल, यह जानता नहीं है लेकिन इसने आ करके सुनाया है, इसके भी कौन सुनते हैं ना, इसकी भी आत्मा सुनती है ना और हम भी सब सुनते हैं और उसी नॉलेज से फिर हम प्योरिटी में आकर के यह फिर दूसरे जन्म में प्योरिटी की जनरेशंस चलती हैं । तो यह है हमारी सतयुग की लाइफ जिसमें हम इस लाइफ को पा करके सदा सुखी रहते हैं बाकी ऐसा सतयुगी लाइफ का मनुष्य कलयुग में तो नहीं हो सकता है ना । यह इसका मानो सेकंड बर्थ यानी दूसरा जन्म, पुनर्जन्म जिसको कहे कि ऐसी प्रालब्ध बनाई, प्यूरीफाइड बना तो इसने जाकर के यह जन्म लिया । उसके साथ दूसरे भी वंशावली होंगी ना, एक थोड़ी अकेला होगा, राधा है फिर इसके मां-बाप होंगे, फिर उसके मां-बाप होंगे, दूसरे भी तो सखा सखियां बहुत होंगे ना, एक ही अकेला क्या करेगा । अकेला तो ना किसी में सोभे न किसी में, काम ही नहीं चल सके । नहीं, देखो राधा है तो इसके मां-बाप भी होंगे ना, यह ऊपर से थोड़े ही गिरे ऐसे ही । नहीं, जरूर इनके माँ-बाप होंगे जिन से जन्म लिया होगा । उनके भी तो मां-बाप होंगे ना, फिर उसके साथ-साथ दूसरे भी तो होंगे ना सखा सखियां वह तो बहुत ही थे ना । तो वह दूसरे भी प्रिंस प्रिंसेस होंगे ना । तो यह सभी चीजें समझने की है क्योंकि वह तो राजधानी थी उनकी पूरी वर्ल्ड थी जैसे राजा प्रजा जैसे कायदे सिर होती है तो इस लाइफ की यह है हमारी लाइफ । तो इसने गीता के भगवान ने क्या बनाया यह हमारी लाइफ बनाई, मनुष्य की यह स्टेटस मनुष्य की यह लाइफ बनाई । मानो मनुष्य को गीता के भगवान ने यह बनाया तो अभी यह बनाया ना, कृष्ण के तन में आकर के यह ज्ञान दिया परंतु भगवान ने ऐसा मनुष्य को ज्ञान दे करके और ऐसे मनुष्य को ऐसा बनाया, सेकंड जन्म से जनरेशन्स में तो अभी इसमें कृष्ण भगवान वह तो बात रही नहीं ना, यह समझने की बात है अभी इसको तो भगवान नहीं करेंगे ना । भगवान उसको कहेंगे और मनुष्य को बनाया तो मनुष्य की यह प्रालब्ध है यह स्टेटस है सर्वगुण संपन्न सोलह कला संपूर्ण, संपूर्ण निर्विकार मनुष्य । तो हमको ऐसा बनना है यह हमारी स्टेटस है इसीलिए गीता का भगवान इसको कहना रॉन्ग हो जाता है । गीता का भगवान वह, गीता से जो मनुष्य को नॉलेज दिया, गीता सुनाई, जो वर्शंश सुनाएं उसका नाम हो गया ना गीता । तो जो वर्शंश सुनाएं, उसी वर्शंश से मनुष्य क्या बना ऐसा बना । तो वह है यह जो बनाया ना तो क्रिएट किया ना । यह तो उसकी क्रिएशन हो गई ना । क्रिएटर यह हो गया ना, यह क्रिएटर, वह उसकी क्रिएशन तो क्रिएशन को कैसे भगवान कहेंगे । यह तो उनका बच्चा हो गया ना मानो ऐसी संतान परमात्मा ने नई दुनिया की रची, जो ऐसी संतान रही और जिस संतान को सदा सुख प्राप्त रहा । तो यह है हम संतान, हम क्या थे । कहते हैं ना तकदीरवान, अब बदतकदीरवान बन गए तो यह है हमारी तकदीर अर्थात ये स्टेटस ये लाइफ की हमारे पास सम्पूर्ण सुख शांति थी, कभी रोग नहीं होता था कभी अकाले मृत्यू नहीं होता था, अकाले मृत्यू समझते हो न , बिगर टाइम शरीर छोड़ना । हमारे पास मरने जीने का कण्ट्रोल था यानी अपने टाइम पर शरीर छोड़न जब बाल युवा वृद्ध एज पूरी होती थी, एवरेज सवा सो डेढ़ सो वर्ष आयु थी । अभी तो देखो पचीस तीस वर्ष या अभी तो कोई ठिकाना ही नहीं है । वह एवरेज, यानी अपने टाइम पर और शरीर छोड़ने का बल था, कैसे था तो जब टाइम होता था तो अपने आप पता लगता था कि अभी हमारा टाइम है अभी इसको उतारना है । तो शरीर उतारना और पहनना जैसे ऐसा बल था, अभी तो नहीं है ना क्योंकि अभी वह कर्म की श्रेष्ठता नहीं है । तो यह हमारी लाइफ की जो स्टेज थी, वह आ करके यह बनाता है । बनाता है कलयुग के अंत में । और किसी के द्वारा तो नॉलेज सुनाएंगा ना, तो निमित्त रखा इनको क्योंकि इनकी सोल ही जाकर के, प्यूरीफाइड बन करके इस स्टेटस को पाती है, उसके फिर दूसरे भी हैं सब जो फिर बनते हैं, एक तो नहीं है ना । दूसरे भी हैं जो हम प्यूरीफाइड बन रहे हैं न तो हम भी अपनी प्रालब्ध बनाते हैं । तो इसी तरह से परमात्मा ने जो कहा है कि यदा-यदा ही जब-जब अधर्म होता है तब-तब मैं आता हूँ तो कहा है मैं इसी टाइम पर, यह अभी वही टाइम है । वह देखो वह कहा है महाभारी महाभारत लड़ाई के लिए भी तो यह मुसल आदि सब तैयार है ना । यह मिसाइल एटॉमिक बम वह मिसाइल अक्षर दिया है ना, वहाँ मूसल है, यह मुसल ही है वह गर्भ से कोई लोहा नहीं निकला था जो शास्त्रों में है कि लोहा निकला था, उससे फिर बैठ करके एक दूसरे से झगड़ करके फिर खत्म हुए थे । नहीं, यह बुद्धि की इन्वेंशन, यह जो निकले हैं एटॉमिक बोंब्स, मिसाइल्स आदि यह सब चीजें, यह बुद्धि की इंवेंशंस है, तो बुद्धि से कोई ऐसी चीज बड़ी बनी बनाई थोड़ी निकलेगी । नहीं ये इन्वेंशन निकली है ना अभी विचारों से । तो वह चीज जो निकली है उससे यदुवंश, ये यूरोपवासी यादव, यदुवंश नाश और यहाँ भारत का कुरु राज्य कहो, कोरव राज्य कहो या कांग्रेस राज्य कहो, यह राज है एक । तो अभी इसका सिविल वॉर के जरिए और उसी समय फिर पांडव सेना भी थी, पांडव का मतलब ही है जिन्होंने प्रभु के साथ, परमात्मा के साथ, सहयोग दिया था अर्थात उसके साथ संबंध रखा था । तो अभी यह है परमात्मा अपने साथ बैठकर के कहते हैं अभी मेरे बनोगे तो मेरे द्वारा तुम्हारी यह राजधानी बनेगी, यह थे जिन्होंने विन करके फिर संसार के ऊपर इस राजधानी का राज्य चलाया अर्थात सदा सुख से जीवन बनी हुई है । तो यह बातें सीधी-सीधी समझने की है, समझ में आती है कि गीता का भगवान उसको कहेंगे निराकार ना कि इनको । तो यह समझना है इसीलिए यह तो हो गया इनकी संतान परमात्मा की, अभी यह तो सतयुग का प्रिंस है ना, यह प्रिंस छोटेपन की लाइफ है, यह फिर किंग है । छोटा होता है तो प्रिंस कहने में आता है फिर बड़ा होता है राजगद्दी पर बैठते हैं तो उनको किंग कहते हैं । तो यह अभी सब सीधी-सीधी बातें हैं । अभी देखो इसकी लाइफ ले गए हैं द्वापर में, छोटेपन की लाइफ ले गए हैं द्वापर में और इन्हों को कहा है कि ये सतयुग के हैं लक्ष्मी नारायण । इनकी छोटे फंकी लाइफ कहाँ है, तो आधा काट लिया है ना उनका, वह लाइफ ले गए हैं द्वापर में । द्वापर में कहाँ से आए । तो यह सारी चीजों को समझना है इसीलिए यह द्वापर के नहीं है यह सतयुग के है, यह सतयुग लाइफ के है । यह इनका ही छोटापन है, यह कोई दूसरे की लाइफ नहीं है यह इनका ही है और बड़ेपन का है श्री नारायण । तो यह सभी चीजों को समझना है लेकिन गीता का भगवान यह जो आ करके सुनाया पतित पावन, पतितों को पावन बनाने वाला यह । पावन क्या बनाता है यह, यह पावन लाइफ । यह पावन लाइफ, हम पतित । हम प्रतीत ट्रांसफर हो करके फिर इस पावन लाइफ में आते हैं तो हम पतित से पावन बनते हैं, बनाने वाला यह । यह पतित को पावन करने वाला, ऐसा नहीं है कि यह पतित पावन होने वाला, ना, यह करने वाला है, कैसे करता है, आ करके लाइट, रोशनी देता है नॉलेज देता है थ्रू ब्रह्मा ओरगंस, उनके मुख से और फिर बनाता है यह जेनेरेसंस चलती है फ्यूचर में । तो यह सभी चीजों को समझना है इसीलिए हमारी लाइफ यह निकट है, जल्दी अभी आने वाली है । इस जन्म के बाद फिर अभी हमारा यह जन्म है लेकिन आएगा वह जो ऐसी प्योर लाइफ यहाँ बनाएगा । बनाएगा नहीं तो फिर नहीं आएगा । ऐसा नहीं है कि अभी आने वाली हैं तो हम ऐसे ही बैठ जाएँ आराम से, अभी आने वाली हैं ना गोल्डन एजड वर्ल्ड इसीलिए बस हम आराम से बैठे रहैं, अपने आप आ जाएगी । नहीं, उसके लिए हमको कर्म श्रेष्ठ करना है जो भगवान ने कहा न राजयोग, कर्मयोग तो यह राजाई प्राप्त कराने के लिए बैठ कर के यह योग सिखाया है । तो अभी देखो उसमें योग सीख रहे हैं ना, देखो यह राजयोग यह राजयोग, देखते हो ना । यह राजयोग कर रहे हैं अथवा योग और ज्ञान ले रहे हैं परमात्मा के द्वारा, फिर जाकर के बनेंगे यह जो बड़े चित्र में देखा । यह हमारी स्टेटस, और यह अभी राजयोग सीख रहे हैं । यह जो अभी आप लोगों को योग और ज्ञान सिखाया जाता है यह देखो यह लाइट, यह अभी सेपलिंग लग रही है । यह राजयोग, इसको कहा जाता है राजयोग यानी ये राजाई प्राप्त करने के लिए योग, उसको कहा है राजयोग । बाकी ऐसे कई समझते हैं की आगे-आगे जो राजाए थे ना, राम को भी कोई वशिष्ठ गुरु था फिर उसको योग सिखलाता था, ये आगे-आगे बड़े-बड़े राजाओं को भी योग सीखलाते थे, उनको क्या योग की दरकार पड़ी है? वह कोई भोगी थोड़े ही हैं । प्रालब्ध तो संपूर्ण सुख की है ना । यह तो जब फिर कॉपर एज में दुःख शुरू हुआ है, दुखी हुए हैं मनुष्य, तभी फिर भगवान को याद करने की बात है । यह गुरु आदि पीछे सब आते हैं बाद में । यहाँ इनको गुरु, शास्त्र, वेद आदि का अध्ययन करने या इनका सहारा लेने की दरकार नहीं है क्योंकि वहाँ पूज्य हो गए ना, खुद ही पूज्य हैं । इनको खुद बैठ कर के किसी के पूजन आदि करने की दरकार नहीं है । इन्हीं की तो पूजा पीछे पुजारी बन कर के शुरू होती है न । तो यह सब चीजें समझने की है इसीलिए कई जो मूंझते हैं क्योंकि यह शास्त्र में थोड़ी-थोड़ी बातें ऐसी उल्टी अटक गई है ना, भाई राम को भी वशिष्ट गुरु था, यह तो गुरु लोगों ने पीछे बैठ करके राम को भी गुरु लगा दिया है, कृष्ण को भी गुरु लगा दिया, गुरु का मान बढ़ाने के लिए की भाई जब कृष्ण और राम जैसों ने भी गुरु किया तो हम जैसों को तो दस-बीस गुरु करना चाहिए न, हम तो और ही नीचे गिरे हुए हैं । उन्होंने अगर गुरु किया तो हमको तो और न कितने गुरु करने चाहिए जो हमारा बेड़ा पार करें । तो यह तो पीछे जो गुरु आए उन्होंने बैठ कर के ये सब बातें, शास्त्रकारो ने पीछे जो शास्त्र बनाए ना, तो इनके जीवन में ये बातों का फिर वह बैठकर के लगाया । परंतु यह समझना है कि सबका गुरु तो एक ही परमपिता परमात्मा हुआ ना निराकार, जो आकर के सब की गति सद्गति और सबको फिर ये स्टेटस प्राप्त कराते हैं, तो यह सारी चीजें समझनी है । निराकार को कहा जाता है हवेनली गॉडफादर, हेवेन बनाता है यानि ये हेवेनली लाइफ इसको कहेंगे । हमारी लाइफ ये बनाते हैं । तो यह है की नर नारी की लाइफ कितनी ऊंची है और वह बनाता कौन है, वह परमपिता परमात्मा । तो यह सभी चीजें समझने की है इसीलिए गीता का भगवान वह निराकार और फिर गीता से क्या पैदा हुआ, ऐसी मनुष्य की लाइफ कृष्ण कैसी, कृष्ण जैसी । बाकी कृष्ण ने सुनाया नहीं, तो यह सभी चीजों को समझना है ना । निराकार तो कहा जाता है जन्म मरण रहित और कृष्ण तो गर्भ से जन्मा ना तो उसको थोड़ी ही भगवान कहेंगे तो कृष्ण को भगवान कहना रॉन्ग है । भगवान निराकार एक है, हाँ बाकी इनकी संतान कह सकते हैं कृष्ण को, फर्स्ट संतान । पहली-पहली संतान यानी प्यूरीफाइड, उसका पहला-पहला किंग जो बना है, हाँ ऐसे कह सकते हैं । तो संतान हो गए ना तो परमात्मा ने आकर के बनाया । तो यह सभी चीजों को समझना है अभी यह तो कोई नए हो शायद जो कुछ आते हो थोड़े दिनों से तो वो शायद समझ जाएंगे परंतु कोई नए होंगे ना तो उनको जरा मुश्किल है इसीलिए फिर राय देते हैं की इनको तो टाइम लेकर के बातों को समझने से अच्छी तरह से समझ सकेंगे क्योंकि शार्ट टाइम है, तो थोड़ी टाइम में डिटेल से तो नहीं समझा सकते हैं ना । यह तो कुछ पुराने हैं जो थोड़े इशारों से समझ जाएंगे, नयों के लिए तो फिर कायदे से आकर के सुनेंगे, समझेंगे तब कुछ समझ सकेंगे अच्छा । दो मिनट साइलेंस ।