मम्मा मुरली मधुबन           

021. Rachana Aur Rachaita Ka Gyan


 

रिकॉर्ड :

आने वाले कल की तुम तस्वीर हो.......
ओम शांति। दुनिया को नाटक भी कहते हैं, खेल फिर ड्रामा कहो, नाटक कहो, खेल कहो बात एक ही है। इसको नाटक क्यों कहते हैं यह भी समझना है और नाटक जो होता है वह एक ही कहानी होती है। खेल देखते हो ना, ड्रामा, पिक्चर पर जाते हो फिर ड्रामा की जो स्टोरी होती है वह एक ही होती है और वह स्टोरी शुरू होती है फिर कैसे पूरा हुआ उसके बीच बीच में क्या हुआ, फिर उसमें बहुत बाय प्लॉट्स बीच-बीच में दिखाते हैं लेकिन स्टोरी एक ही होती है । इसी तरह से यह भी हमारी जो वर्ल्ड है ना, इसको भी नाटक कह सकते हैं जिसमें हम सब एक्टर्स हैं। अभी हम एक्टर्स हैं तो हम एक्टर्स को हमारे इस नाटक का पता होना चाहिए ना कि यह किस स्टोरी पर शुरू होता है और यह पार्ट कहां से शुरू हुआ और कहां तक यह पूरा होता है और उसमें समय प्रति समय किस किस एक्टर्स का कैसे-कैसे पार्ट होते हैं और यह सभी बातों का और इसका डायरेक्टर, क्रिएटर कौन है और इस नाटक का हीरो एंड हीरोइन पार्ट किसका है इन सब बातों का भी नॉलेज होना चाहिए ना, खाली नाटक कह दिया तो उससे तो काम नहीं होगा ना । नाटक है तो नाटक के हम एक्टर्स भी है, नाटक में तो हम है ना। यह दुनिया कहो या नाटक कहो तो नाटक में कौन है हम एक्टर्स है ना तो हम एक्टर्स हैं तो हम एक्टर्स को पता होना चाहिए न कि इस नाटक के हीरो एंड हीरोइन कौन हैं और इसका डायरेक्टर क्रिएटर कौन है और हम एक्टर्स हैं तो हमारा पार्ट पहले क्या शुरू हुआ, स्टोरी कैसे शुरू हुई, कहां इसकी एंड होती है तो इसके शुरुआत का और इसके अंत का सब मालूम होना चाहिए। तो इन सब बातों की जानकारी होनी चाहिए ना। अगर कोई एक्टर हो ड्रामा का और हम उससे पूछें कि इसकी क्या स्टोरी है, यह कहां से शुरू होता है, कहां पूरा होता है , अगर वह कहे हमें मालूम नहीं है तो उसको क्या कहा जाएगा। कहेंगे यह तो इलिटरेट है । इसको इतना पता नहीं है कहता है मैं एक्टर हूं इस ड्रामा का इस नाटक का और इससे पूछा जाता है कि तुम एक्टर हो, तेरा पार्ट क्या है, कहां से शुरू हुआ कहां भला पूरा होता है, इस ड्रामा का डायरेक्टर कौन है, क्रिएटर कौन है यानी जिसने बैठ करके यह बनाया और इसमें हीरो एंड हीरोइन पार्ट किसके हैं, क्या-क्या कौन-कौन और एक्टर्स का पार्ट है और क्या है यह बातें अगर उनसे पूछी जाएं और वो कहे हमें मालूम नहीं है तो कहेंगे तुम एक्टर हो करके और तुम्हें मालूम नहीं है, ये तो इलिटरेट है । तो इसी तरह से अभी हम अभी जबकि एक्टर है इस दुनिया के कहो या नाटक के कहो तो हमको इन बातों की जानकारी होनी चाहिए ना कि हम एक्टर्स है तो हमारी एक्टिंग कहां से शुरू हुई, कब से शुरू हुई और कहां इसकी एंड होती है । आखिर नाटक है तो नाटक का शुरू भी होना है और उसकी एंड भी होनी है, और शुरू है तो एंड भी जरूर है । ऐसे भी नहीं है शुरू हुआ है तो चलता ही चलेगा चलता ही चलेगा तो जो चीज शुरू होती है उसकी एंड भी होती है और जिसकी एंड है उसको फिर शुरू भी होना है तो यह सारी चीजों को समझने का है ना । तो अभी बैठ करके देखो जो नाटक का रचता, क्रिएटर डायरेक्टर है, जो जानता है कि किस तरह से हम एक्टर्स, यह हमारी एक्टिंग कब से शुरू हुई और वह स्टोरी का पहला जो भाग है यानी पहली शुरुआत कहां से हुई वह सभी बातें बैठकर के समझाते हैं परंतु हम एक्टर्स होते यह देखो भूल गए हैं । अभी बाप आ करके बतलाते हैं देखो तुम इलिटरेट हो गए हो, तुमको अपना पता नहीं है। एक्टर्स हो परंतु एक्टर्स होते तुम जानते नहीं हो कि हम कहां से, कब यह खेल शुरू हुआ। अगर कोई पूछे कि भाई शुरू कब हुआ, ये कब पूरा होता है और ना बता सके तो क्या कहेंगे। तो अभी बाप बैठ करके समझाते हैं कि यह शुरू कहां से हुआ, इसमें मुख्य मुख्य एक्टर्स कौन हैं और सभी एक्टर्स में हीरो एंड हीरोइन पार्ट किसका है यह सभी बातें बैठकर के समझाते हैं । तो अभी देखो नॉलेज में है जो रोज आते हो और सुनते हो, समझते हो उन्हों को मालूम है कि हां इसका पहला पहला डायरेक्टर और क्रिएटर कौन है। जानते हो वही क्रिएटर कहेंगे सुप्रीम सोल परमपिता परमात्मा । वह भी एक्टर है परंतु उनकी एक्टिंग कौन सी है डायरेक्टरपन की। वह भी एक बार आता है ना इधर वह भी एक्टर बनता है परंतु उनकी एक्टिंग कौन सी है इस ड्रामा का अथवा खेल का डायरेक्टर । तो देखो अभी डायरेक्टर बन करके अथवा क्रिएटर बन करके वह एक्ट कर रहे हैं । ऐसे कई खेल होते हैं ना तो उसमें उसके डायरेक्टर भी पार्ट लेते हैं फिर उस खेल में भी डायरेक्टरपन का पार्ट अदा करते हैं। देखो पिक्चर में भी कभी पिक्चर दिखाते हैं देखे हैं, ऐसे खेल बहुत होते हैं तो दिखाते हैं भाई फलाने आदमी पिक्चर देखने गए तो पिक्चर में पिक्चर दिखाते हैं तो फिर हां उसमें दिखलाएंगे ना कि वही पिक्चर का डायरेक्टर फिर डायरेक्टर उसमें भी दिखलाएंगे तो डायरेक्टर होकर के पार्ट अदा कर रहे हैं । हैं एक्टर परंतु उसने डायरेक्टर का पार्ट अदा किया है तो इसी तरह से परमात्मा भी एक्टर है , अभी एक्टिंग पर आया हुआ है परंतु वह एक्टर का कौन सा पार्ट है उसका डायरेक्टर का। वो डायरेक्टर और क्रिएटर का एक्टर बनता है अर्थात उसकी एक्टिंग का पार्ट डायरेक्टर और क्रिएटर का होता है । तो अभी वह बैठकर के डायरेक्टर स्वयं बतलाता है एक्टिंग, पार्ट एक्ट करके और समझाते हैं कि मैं डायरेक्टर हूं इस रचना का। कैसे, वह बैठ करके समझाते हैं कि जो नई पहली-पहली एक्टर की आदि होती है वह मेरे से होती है। ऐसे नहीं एक्टर है ही नहीं, दुनिया तो अनादि है लेकिन इसकी शुरुआत मैं बैठकर के करता हूं कैसे, कि जो प्यूरीफाइड मनुष्य अथवा सतयुगी दुनिया है अथवा जिसको पहली नई दुनिया कहेंगे तो न्यू वर्ल्ड मैं क्रिएट करता हूं । अभी देखो यह कहानी का पहला पहला जो टाइम है वह कैसे शुरू होता है अभी यहां से शुरू होता है कि डायरेक्टर क्रिएटर कैसे नई रचना, मनुष्य कैसे रचते हैं । अभी देखो यह रच रहे हैं । रचते जा रहे हो ना? अभी आप सब जो भी पवित्रता को धारण करके और प्रैक्टिकल उसके फरमान के ऊपर, डायरेक्टर के डायरेक्शंस के ऊपर चल रहे हैं वह उनकी मुख वंशावली मानो अभी नई दुनिया उसने रची । अभी यह नए एक्टर्स, नई दुनिया के नए एक्टर्स अभी यह रचे हैं जो बैठकर के अभी प्यूरीफाइड बन रहे हैं । तो अभी उन्हीं के द्वारा फिर वह एक्टर्स का फिर कैसे अनेक जन्मों का यह चक्कर चलता है वह बैठकर के बाप समझाते हैं कि यह पवित्र हुए मनुष्य फिर यह जाकर के दूसरे जन्म में इन्हों की फिर किंगडम देवी देवताओं के जेनरेशंस में चलती है । फिर वह किंगडम भी दो युग सूर्यवंशी चंद्रवंशी उसी में चलती है। फिर वह सूर्यवंशी चंद्रवंशीयों का जब एक्टर्स का पार्ट पूरा होता है तब फिर, वह फिर थोड़े नीचे गिरते हैं अथवा वाम मार्ग में देवताऐं जब आते हैं अथवा गिरते हैं तो फिर दूसरे धर्म का फिर आता हैं। इसी तरीके से फिर नंबरवार हर एक फिर इब्राहम फिर बुद्ध फिर क्रिश्चियन यह सभी धर्म के स्थापक फिर आ करके अपना अपना धर्म स्थापन करते हैं। अभी देखो मुख्य-मुख्य एक्टर्स का बैठकर के समझाते हैं इसी तरह से कि यह होता होता वह जो पहला आदि सनातन धर्म जो परमात्मा ने स्थापन किया उनका वह नीचे गिरते आते हैं और दूसरे भी जो स्थापन हुए हैं, अभी अंत में आ करके उनका भी लास्ट स्टेज सबका होता है तभी फिर मैं आ करके फिर जो पहला आदि सनातनी देवी-देवता धर्म है ना उसकी फिर आकरके सेप्लिंग लगाता हूं । इसी तरह से यह सारा ड्रामा आदि से अंत तक पूरा हो करके फिर आदि, फिर अंत फिर आदि इसी तरह से यह फिर चलता रहता है । अभी यह ऐसा कितना बार चला होगा इसकी कोई गिनती नहीं है । कोई कहे यह पूरा हो करके यह शुरू हुआ फिर पूरा हो करके फिर शुरू हुआ ऐसा कितना बार हुआ है इसकी कोई गिनती नहीं है । इनको कहेंगे हम अनेक बार यानी अनगिनत बार। तो इनकी कोई गिनती नहीं बाकी हां आदि कहां से हुई, शुरू कहां से हुआ, फिर इसकी एंड कहां होती है यह बैठकर के बाप समझाते हैं m तो अभी बैठ करके हम एक्टर्स को यह सारी नॉलेज दे रहे हैं जिससे अभी हम जानते हैं कि हम एक्टर्स हैं। तो पहली एक्टिंग किसकी चलती है हीरो एंड हीरोइन पार्ट किसका हो गया, जो वो सूर्यवंशी चंद्रवंशी राजे बने और जिनको बैठ करके अभी बना रहे हैं तो मुख्य पार्टधारी तो हो गए ना जिसको एडम एंड ईव कहो, आदम एंड हवा जो अपने-अपने में कहते हैं या ब्रह्मा और सरस्वती फिर वही जा करके लक्ष्मीनारायण बनते हैं तो कहेंगे मुख्य पार्ट फिर वह कैसे नीचे गिरते हैं तो उसकी वंशावली भी नीचे आती है फिर दूसरों को टर्न मिलता है इसी तरीके से यह सब चलते हैं परंतु पहली पहली रचना तो उनको गिनेंगे ना, उसके बाद फिर यह सब दूसरी रचना चली। तो उस रचना के बाद यह दूसरा पीछे नंबर आए सब धर्म इब्राहिम, बुद्ध और यह अब । तो यह सारा वृतांत बैठकर के बाप समझाते हैं कि किस तरह से मैं आ करके यह ह्यूमन वर्ल्ड क्रिएट करता हूं और इसका आदि अथवा शुरुआत कैसे करता हूं तो यह सभी बातें बैठकर के समझाते हैं । तो देखो नाटक की स्टोरी कहां से शुरू हुई, कहां पूरी होती है उसके बीच का दूसरे दूसरे का यह बाय प्लॉट्स कैसे चलते हैं यह सभी वृतांत बैठकर के बाप समझाते हैं। तो अभी देखो बुद्धि में है ना यह सारा नाटक कैसे चलता है। बाकी ऐसे नहीं है कि बस यह नाटक है, ऐसे ही चलता रहता है बस ऐसे ही। नहीं, नाटक है तो नाटक में हम एक्टर्स हैं तो एक्टर्स को पता होना चाहिए ना कि इसकी आदि, अंत और फिर किस किस एक्टर्स का पार्ट है। इसमें मुख्य मुख्य पार्ट अदा करने वाले कौन हैं, यह सभी बातों का ज्ञान होना चाहिए । वो नहीं लिखते भी हैं मुख्य मुख्य पार्ट में एक्टर्स कौन है, किस किस के द्वारा इसमें एक्टिंग होगी, यह सभी बतलाते हैं तो पता होना चाहिए ना इस नाटक का भी कि उसके मुख्य मुख्य एक्टर्स कौन है और कभी-कभी उनका किस-किस पार्ट में आना होता है तो यह सभी वृतांत अभी बाप बैठकर के समझाते हैं इसलिए अभी सारे नाटक की स्टोरी का अभी मालूम है कि यह कैसे है । अभी आ करके यह नाटक पूरा होने पर है । वह तो तीन घंटे में पूरा होता है इसको तो 5000 वर्ष लगते हैं नाटक को पूरा होने में, तो शुरू हुआ है तो अभी 5000 वर्ष अभी इसके पूरे होने पर हैं तो बाकी उसमें थोड़े बरस हैं तो बस अभी उसकी तैयारी है अभी उसका लास्ट समय आ करके पहुंचा है उसी में अभी ये नाटक पूरा हो करके फिर जो शुरू था जैसे फिर वैसे ही रिपीट होगा। तो यह सारा वृत्तांत बुद्धि में होना चाहिए और इसी को ही फिर कहा जाता है ज्ञान तो अगर हम हैं एक्टर्स तो एक्टर्स को यह नॉलेज अथवा ज्ञान होना चाहिए सारा बुद्धि में और जिसके जानने से फिर हमको अभी पता चलता है कि हम जो पहले थे ना वैसे फिर बनते हैं । अभी हम आ करके लास्ट स्टेज में पहुंचे हैं तो यह दुनिया का भी सारा यह स्टेजिस का कैसे चलता है फिर नाटक कहो या दुनिया कहो बात तो एक ही है। तो दुनिया की यह लास्ट स्टेज है अब फिर जो उसकी पहली स्टेज थी तो आज की दुनिया और फिर कल की दुनिया, तो कल ही कहेंगे ना अभी निकट आ करके खड़ी हुई है जैसे की अभी कल की दुनिया, कल क्या थे आज क्या हुए हैं फिर कल क्या होंगे अभी जानते हैं कि जो कल थे, देखो कितने ऊंचे थे आज क्या हो गए हैं फिर वह कल को होने वाले हैं तो अभी जैसे आज और कल का दुनिया का सारा नॉलेज हो गया l कि आज दुनिया क्या है, कल क्या थी और फिर कल मैं क्या होने की है उसको हम अभी जानते हैं कि फिर वही होने की है जो थी । तो अभी फिर कैसे होगी और कैसे क्या होगा उनका सारा वृतांत बैठकर के बाप समझा रहे हैं और अपन भी उसी फिर स्टेज पर आने के लिए पुरुषार्थ रखते हैं। है तो हम ही ना, आत्मा का सारा सर्कल हम ही तो आत्माएं पुनर्जन्म के चक्कर में आने वाले जो हैं वही तो इसी चक्कर, एक्टर्स भी तो हम ही बनते हैं ना। ऐसे नहीं है कि अभी की आत्माएं और वहां की आत्माएं कोई दूसरी थी । आत्माएं अनेक जन्मों का चक्कर लेती नीचे आती हैं, आत्माओं को ही प्यूरीफाइड होकर अपने स्टेज में आने का है बाकी ऐसे नहीं वह फिर नई आत्माएं कोई स्टॉक से आएंगे। यही हम आत्माएं प्यूरीफाइड होती हैं और प्यूरीफाइड हो करके फिर अपनी स्टेज को लेंगे तो यह सभी चीजों को समझने का है जो सारी दुनिया का वृतांत है। तो यह वर्ल्ड हिस्ट्री एंड ज्योग्राफी जैसे कि कौन-कौन आए, किस किस तरह से पार्ट बजाया । जैसे स्कूल में भी बतलाते हैं ना हिस्ट्री भी होती है और जोग्राफी भी होती है । जो lग्राफी कहते हैं स्थान और यह सब बतलाते हैं और हिस्ट्री होती है भाई मनुष्य फलाने ने क्या किया, उसने क्या किया उनका, तो बाप भी बैठकर के हिस्ट्री भी और यह सारी कि कैसे यह सब भारत अविनाशी खंड है और कहां पहले कैसे था पीछे देखो अभी उसका अंत कैसे होता है तो यह दूसरे खंड अफ्रीका अमेरिका यह सब पीछे-पीछे हुए हैं। इनके धर्म इनके राज्य भी पीछे-पीछे हुए हैं पहले नहीं थे, यह सब पीछे हुए हैं । पहला कौन सा था, यह भारत का था, प्राचीन भारत को ही कहा जाता है, परंतु प्राचीन का भी कोई अर्थ नहीं समझते हैं। कई समझते हैं प्राचीन का माना पुराना परंतु आज से जो पुराना था वही तो नया था ना। पुराने का मतलब यह नहीं है कि पुराना, नहीं पुराना मतलब आज से बहुत टाइम, कहते हैं ना लोंग लोंग एगो वो इंग्लिश में भी कहते हैं लोंग लोंग एगो । तो लोंग लोंग एगो क्या था, बहुत बहुत पहले। बहुत बहुत पहले क्या था , दुनिया नई थी या पुरानी थी क्या कहेंगे। आज से लोंग लोंग एगो क्या था, दुनिया बहुत पुरानी थी या नई थी? नई थी क्योंकि यह आज पुरानी है। तो ऐसे नहीं कहेंगे कि बहुत पुराने जमाने में तो माना पहला कोई पुराना जमाना था। आज से भले वो टाइम बहुत आगे का है परंतु दुनिया नई थी इसीलिए ऐसे कहेंगे कि वह प्राचीन माना पुरानी दुनिया नहीं या पुराना भारत नहीं, नया भारत, आज पुराना है यानी ओल्ड है। तो आज के दुनिया को अथवा भारत को ओल्ड कहेंगे और वह जो था प्राचीन तो प्राचीन भारत माना नया भारत । तो कई इस बात को भी नहीं समझते हैं कि प्राचीन भारत का मतलब है नया भारत और आज है पुराना भारत। तो भारत देखो पुराना हो गया है ना तब तो देखो दुःख और अशांत, पुराने में क्या होगा, दुख और अशांति तो नया भारत नई दुनिया । तो अभी देखो बाप आ करके नया भारत और नई दुनिया बना रहे हैं । खाली भारत नहीं, भारत जब नया था तो दुनिया नई थी, ऐसे नहीं दुनिया पुरानी था भारत नया हो, ऐसा हो ही नहीं सकता । देखो यह पुरानी दुनिया में भारत जो बनाया है नया वो देख लो ना न्यू दिल्ली फलाने फलाने नाम तो रख दिए हैं लेकिन न्यू कहां है, वह दुःख अशांति और वह सब जो नया था वही नया है।आज तो करके इमारतें बनाई हैं, अशोका होटल फलाने, फलाने, तो उसको कहते हैं न्यू दिल्ली, वह तो इमारते बनाई है ना लेकिन लाइफ में वह जो चीजें थीं, भारत हमारे लाइफ में जो ऊंचा था और जिसको ही नया भारत कहा जाता था वह तो चीज नहीं है ना। उसी को नया कहते थे प्राचीन चीज वो थी, तो उसी समय नया भारत तो नई दुनिया थी यानी दुनिया ही नई थी, आज पुराना भारत है तो दुनिया भी पुरानी है । अभी पहले नया भारत तो दुनिया भी नई इसीलिए बाप आ करके भारत जो अविनाशी खंड है और प्राचीन अपना देश है, अभी देश हो गया क्योंकि दूसरे देशों में यह भी एक टुकड़ा हो गया है। लैंड में देखो उसका एक टुकड़ा है ना परंतु वास्तव करके नहीं तो सारी वर्ल्ड, सारी पृथ्वी पर एक भारत का राज्य था जिसको कहा जाता था प्राचीन भारत। ये भारतवासी नहीं जानते हैं कि यह भारत जो प्राचीन तो सारी पृथ्वी के ऊपर एक का ही राज्य था भारत का उसको प्राचीन भारत कहते थे। ऐसे नहीं दूसरे देशों के बीच में यह भी एक टुकड़ा उसको भारत कहते थे, नहीं। वह जो प्राचीन भारत था तो सारी पृथ्वी के ऊपर उनका पावर था, इतना भारत ऊंचा था और उसी समय भारत को प्राचीन भारत का जो नाम गाया हुआ है, गोल्डन स्पैरो और यह सभी उसको कहते हैं उसी टाइम की बात है जब सारी पृथ्वी और सबके ऊपर उसका कंट्रोल था। एक राज्य एक धर्म था सारी वर्ल्ड के ऊपर तो वो जो दुनिया थी ना, नया भारत और नई दुनिया उसी टाइम पूरा सुख था अभी कहां है इसलिए बाप कहते हैं अभी फिर सब डिस्ट्रक्शन करके फिर एक राज्य एक धर्म और प्राचीन वही नया भारत नई दुनिया बनाता हूं समझा। तो अभी चलेंगे ना उसमें, ऐसे दुनिया और ऐसी भारत जिसको गोल्डन स्पैरो और जिसमें कोई दुःख नहीं, कभी रोग नहीं, कभी कोई अकाल मृत्यु नहीं। अकाले नहीं मरेंगे, अभी तो मर जाते हैं ना , बैठे बैठे चलते कोई एक्सीडेंट हुआ, यहां कोई ठिकाना ही नहीं रहता हैं ना। तो नहीं, मरने का जीने का सबका बल तो उसको कहा जाता है कि वह ताकत थी , तो फिर से वही लाइफ चाहते हो ना? तो अभी उसी लाइफ को पाने के लिए तो फिर पुरुषार्थ रखो । मुफ्त में थोड़ी ही मिलेगी, कुछ तो मेहनत करनी पड़ेगी ना ऐसे नहीं है कि मुफ्त में मिलेगी। परमात्मा तो आए हैं बनाने के लिए, तो जो डायरेक्टर क्रिएटर है वह तो आया है क्रिएट करने के लिए परंतु फिर भी हमको इंडिविजुअली मेहनत करनी है ना। हम करेंगे तब ऐसी दुनिया में अपना अधिकार लगा सकेंगे, आएंगे, नहीं तो फिर हम करेंगे नहीं तो पाएंगे कैसे, बीज बोएंगे तो पाएंगे । तो जो बोलेंगे वह पाएंगे, बोएंगे नहीं तो पाएंगे कैसे तो इंडिविजुअली बोना है । यह कर्म क्षेत्र है ना इस खेत में कर्मों से बोना। कर्म हमारा बोता है और हम जो कर्म होते हैं वह हम फल पाते हैं इसलिए हमको बाप बैठ करके कर्मों से बोने का सिखला रहे हैं कि कैसे कर्म बो, जैसे वह सिखलाते हैं ना खेत में खेती भी सीख जाते हैं कैसे बीज डालो, कैसे क्या उसका भी ट्रेनिंग देते हैं । तो बाप भी आ कर के हमारे को कर्म की खेत के लिए, कर्मों को कैसे बोए उसकी ट्रेनिंग दे रहे हैं कि अपने कर्मों को ऊंच बनाओ, बीज अच्छा बनाओ, क्योंकि बीज अच्छे डालो तो फल अच्छा मिलेगा इसीलिए अभी इस कर्मों के खेत में कैसे बोए, हम बीज अच्छे कैसे बने यानी कर्म को अच्छा करें ना पहले । जब कर्म अच्छा होगा फिर वो जब बोएंगे तो उसका फल अच्छा मिलेगा अगर बुरा कर्म होगा बीज में ताकत नहीं होगी तो कर्मों में तो कर्म बुरे बोएंगे तो फल क्या पाएंगे, यह जो खा रहे हो, रो रहे हो । अब जो खाते हो उसमें ही रो रहे हो ना दुःख और अशांति में। देखो रोग हुआ, यह हुआ वह हुआ, सब बातें दुखी करती है ना मनुष्य को इसीलिए बाप कहते हैं अभी तुम्हारे कर्म को मैं ऊंची क्वालिटी का बनाता हूं जैसे बीज भी ऊंची क्वालिटी का होगा तो उस क्वालिटी को बोएंगे तो उसका फल अच्छा निकलेगा, अगर बीज अच्छा नहीं, बीज समझते हो ना सीड, तो सीड अच्छी क्वालिटी का नहीं होगा तो फिर अच्छी क्वालिटी का हमको फल नहीं मिलेगा तो हमारे कर्म की भी अच्छी क्वालिटी चाहिए ना । तो अभी हमको बैठ करके हमारे कर्म को बाप अच्छी क्वालिटी वाला बनाते हैं अथवा क्वालिफाइड बनाते हैं, तो बना करके फिर हमारे कर्म को ऊंच क्वालिटी, श्रेष्ठ क्वालिटी को फिर कहते हैं उसे बोएंगे तो श्रेष्ठ क्वालिटी की श्रेष्ठ फल मिलेगा, फिर ऐसा फल खाना देवी देवता सदा सुख के हो करके सदा सुख पाना तो ऐसा पाना चाहिए ना । तो अपना अभी सीड, कर्मों का सीड जो है, बीज वह अच्छा बनाओ और अच्छा फिर बोना सीखो। बनाओ अच्छा फिर बोना सीखो, वह बैठकरके अभी बाप सीखा रहे हैं, वो अभी बना रहे हैं। आज बद तकदीर है दुनिया कल तकदीर वान बनने की है। अभी हम इस बद तकदीर वान दुनिया में अभी अपनी तकदीर बना रहे हैं, बना रहे हो ना? प्रालब्ध, तो अभी यह हम कर रहे हैं तदबीर , तदबीर का मतलब है पुरुषार्थ। इस तस्वीर से फिर हमारी तकदीर, प्रालब्ध कैसी बनेगी वह तो अभी जानते हो ना। तो यह तदबीर अपनी तकदीर बनाएगी तो आज जो तदबीर कर रहे हो यानी पुरुषार्थ कर कर रहे हो वो कल तुम्हारी तकदीर बनेगी तो तस्वीर अच्छी करनी है ना। अच्छा कर्म श्रेष्ठ करेंगे तो फिर तकदीर अच्छी बनेगी । स्वर्ग नाम देखो सब नाम तो कहते हैं परंतु जानते नहीं है ना वो बिचारे नाम बस ऐसे ही। वह दुनिया कैसी थी, हम ही उसी दुनिया में थे, हमारी ही दुनिया थी और हमने किस पुरुषार्थ से वह पाई थी किस तदबीर से वह पाई थी वह नहीं जानते हैं खाली ऐसे ही नाम रखे हैं बस। हेवेन हेवेन कोई मरता है तो भी कहते हैं हेवन गयाहेवनली अबोड में गया, गया नहीं गया खाली है हेवन को याद करते हैं तो क्या हुआ तो अभी तो प्रैक्टिकल हम प्रैक्टिकल स्वर्गवासी बनते हैं। पृथ्वी की सबकी वागे हाथ में यानी यह तत्व आदि भी हमारे कंट्रोल में होंगे, डिसऑर्डर में काम नहीं करेंगे अर्थक्वेक और यह सभी आदि यह सब नहीं होंगे , आर्डर में चलेंगे क्योंकि हम खुद आर्डर में होंगे ना मनुष्य इसीलिए कहते हैं एक दिन यह सब वागें तुम्हारे हाथ में होंगी तो वह वागें ले रहे हो ना? वागें कैसे लेनी है यही तदबीर से कर्म श्रेष्ठ से, कर्म ही अच्छे ना होंगे तो कहां से मिलेगी, कभी नहीं मिलेगी । (रिकॉर्ड: इक दिन होंगे जमी आसमा चांद सितारे हाथों में, होगी उस दिन बागडोर भारत की तुम्हारे हाथों में ) लड़ते झगड़ते रहते हैं यह बागडोर है ? ये लड़ना झगड़ना जमीन का टुकड़ा वो ले गया, यह ले गया लड़ते रहते हैं यह बागडोर है, जमीन आसमान चांद सितारे इसकी वागें तुम्हारे हाथ में होंगी अभी कहां है हाथ में, जमीन के ऊपर लड़ते रहते हैं वागें हैं हाथ में? वह मिलिट्री वाला , नहीं कहां है वह लड़ते रहते हैं देखो । तो कहते हैं अभी इस तरीके से ही हम जमीन आसमान, सारा आसमान और सारी जमीन के मालिक बनेंगे। अभी कहां है, जमीन टुकड़े-टुकड़े हुई पड़ी है , पार्टीशन पाकिस्तान नजदीक बैठा है एकदम टुकड़ा टुकड़ा परंतु एक टुकड़ा थोड़े ही है ये तो सारी पृथ्वी सब तो सारी पृथ्वी हमारे हाथ थी भारत वो था असुल, प्राचीन भारत वह चीज थी परंतु भारतवासी थोड़े ही जानते हैं वह तो थोड़े टुकड़े के ऊपर ही लड़ रहे हैं वह नहीं समझते हैं हमारे को सारी पृथ्वी ही मिलने की है परंतु मिलेगी इस पावर से ।