31-12-02   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


इस नये वर्ष में सर्व खज़ाने सफल कर सफलतामूर्त बनने की विशेषता दिखाओ

आज नव युग रचता, नव जीवन दाता बापदादा नव वर्ष मनाने आये हैं। आप सभी भी नव वर्ष मनाने आये हो वा नव युग मनाने के लिए आये हो? नव वर्ष तो सभी मनाते हैं लेकिन आप सभी नव जीवन, नव युग और नव वर्ष तीनों ही मना रहे हो। बापदादा भी त्रिमूर्ति मुबारक दे रहे हैं। नव वर्ष की एक दो को मुबारक देते हैं और साथ में कोई न कोई गिफ्ट भी देते हैं। गिफ्ट देते हो ना! लेकिन बापदादा ने आप सबको कौन सी गिफ्ट दी है? गोल्डन दुनिया की गिफ्ट दी है। सभी को गोल्डन दुनिया की गिफ्ट मिल गई है ना! जिस गोल्डन दुनिया में, नव युग में सर्व प्राप्तियां हैं। याद है अपना राज्य? कोई अप्राप्ति का नाम-निशान नहीं है। ऐसी गिफ्ट सिवाए बापदादा के और कोई दे नहीं सकता। सारे विश्व में अगर कोई बड़े ते बड़ी सौगात देंगे भी तो क्या देंगे? बड़े ते बड़ा ताज वा तख्त दे देंगे। जब स्थापना हुई थी, (आगे-आगे बैठे हैं स्थापना वाले) तब आदि में ही ब्रह्मा बाप बच्चों से पूछते थे कि अगर आपको आजकल की कोई भी रानी ताज और तख्त देवे तो आप जायेंगे? याद है ना! तो बच्चे कहते थे इस ताज और तख्त को क्या करेंगे, जब बाप मिल गया तो यह क्या! तो इस गोल्डन वर्ल्ड की गिफ्ट के आगे कोई भी गिफ्ट बड़ी नहीं हो सकती। कई बच्चे पूछते हैं वहाँ क्या-क्या प्राप्ति होगी? तो बापदादा कहते हैं प्राप्तियों की लिस्ट तो लम्बी है लेकिन सार रूप में क्या कहेंगे! अप्राप्त कोई नहीं वस्तु, जो जीवन में चाहिए वह सब प्राप्त होंगे। तो ऐसी गोल्डन गिफ्ट की अधिकारी आत्मायें हो। अधिकारी हैं ना! डबल विदेशी अधिकारी हैं? (हाथ हिलाते हैं) सभी राजा बनेंगे? राजा बनेंगे, अच्छा। इतने तख्त तैयार करने पड़ेंगे। बापदादा कहते हैं वह तख्त तो तख्त है, सर्व प्राप्ति हैं लेकिन इस संगमयुग का स्वराज्य उससे कम नहीं है। अभी भी राजा हो ना! प्रजा हो या रॉयल फैमिली हो? क्या हो? एक ही बाप है जो फलक से कहते हैं कि मेरा एक-एक बच्चा राजा बच्चा है। राजा हो ना! राजयोगी हो कि प्रजा योगी हो? इस समय सब दिलतख्तनशीन, स्वराज्य अधिकारी राजा बच्चा हो। इतना रूहानी नशा रहता है ना? क्योंकि इस समय के स्वराज्य से ही भविष्य राज्य प्राप्त होता है। यह संगमयुग बहुतबहुत- बहुत अमूल्य श्रेष्ठ है। संगमयुग को बापदादा और सभी बच्चे जानते हैं, खुशी-खुशी में संगमयुग को नाम क्या देते हैं? मौजों का युग। क्यों? यहाँ संगम जैसी मौज सारे कल्प में नहीं है। कारण? परमात्म मिलन की मौज सारे कल्प में अब मिलती है। संगमयुग का एक एक दिन क्या है? मौज ही मौज है। मौज है ना? मौज है, मूंझते तो नहीं हो ना! हर दिन उत्सव है क्योंकि उत्साह है। उमंग है, उत्साह है कि अपने सर्व भाई बहनों को परमात्मा पिता का बनायें। सेवा का उमंग-उत्साह रहता है ना! यह करें, यह करें, यह करें... प्लैन बनाते हो ना! क्योंकि जो श्रेष्ठ प्राप्ति होती है तो दूसरे को सुनाने के बिना रह नहीं सकते हैं। इसी संगमयुग की प्राप्ति गोल्डन वर्ल्ड में भी होगी। अभी के पुरूषार्थ की प्रालब्ध भविष्य गोल्डन वर्ल्ड है। तो संगमयुग अच्छा लगता है या सतयुग अच्छा लगता है? क्या अच्छा लगता है? संगम अच्छा है ना? सिर्फ बीच-बीच में माया आती है। थोड़ा-थोड़ा कभी-कभी मूंझ जाते हैं। कई बच्चे सहज योग को मुश्किल योग बना देते हैं, है नहीं लेकिन बना देते हैं। वास्तव में है बहुत सहज, मुश्किल लगता है? जिसको मुश्किल लगता है वह हाथ उठाओ। सदा नहीं, कभी कभी मुश्किल है? या सहज है? जो मुश्किल योगी हैं वह हाथ उठाओ। मुश्किल वाले हाथ उठाओ। मातायें मुश्किल योगी हो या सहज होगी? कोई मुश्किल योगी है? हाथ नहीं उठायेंगे, सारी सभा में कैसे उठायेंगे!

सभी बच्चे फलक से कहते हैं मेरा बाबा। कहते हैं, मेरा बाबा? मेरा बाबा है कि दादियों का बाबा है? मेरा बाबा है ना! हर एक कहेगा पहले मेरा। ऐसे है? यह सिन्धी लोग सभी बैठे हैं ना! मेरा बाबा है या दादी जानकी का है? दादी प्रकाशमणि का है? किसका है? मेरा है? मेरा है? सारा दिन क्या याद रहता है? मेरा ना! बाप कहते हैं बहुत सहज युक्ति है जितने बार मेरा- मेरा कहते हैं, सारे दिन में कितने बार मेरा शब्द कहते हो? अगर गिनती करो तो बहुत बार मेरा शब्द बोलते हो। जब मेरा शब्द बोलते हो तो बस मेरा कौन? मेरा बाबा। मुश्किल है? कभी-कभी भूल तो जाते हो? बापदादा कोई नया शब्द नहीं देता है, जो सदैव कार्य में लाते हो मैं और मेरा, तो मैं कौन और मेरा कौन! कई बच्चे मुश्किल पुरूषार्थ क्यों करते? सिर्फ सोचते हैं बिन्दू सामने आ जाए, बिन्दु-बिन्दु-बिन्दु.... और बिन्दु खिसक जाती है। बिन्दु तो है लेकिन कौन-सी बिन्दु? मैं कौन हूँ, यह अपने स्वमान स्मृति में लाओ तो रमणीक पुरूषार्थ हो जायेगा सिर्फ ज्योति बिन्दु कहते हो ना तो मुश्किल हो जाता है। सहज पुरूषार्थ, मौज का पुरूषार्थ करो।

इस नये वर्ष में पुरूषार्थ भी श्रेष्ठ हो लेकिन श्रेष्ठ के साथ पहले सहज हो। सहज भी हो और श्रेष्ठ भी हो यह हो सकता है? दोनों साथ हो सकता है? डबल फारेनर्स बोलो, हो सकता है? तो बापदादा देखेंगे। बापदादा तो चेक करते रहते हैं ना! तो मुश्किल योगी कौन-कौन बनता है! सहज योगी का यह मतलब नहीं है कि अलबेलेपन का पुरूषार्थ हो। श्रेष्ठ भी हो और सहज भी हो। तो पाण्डव सहज योगी हैं? सहजयोगी जो हैं वह हाथ उठाओ। देखना टी.वी. में आ रहा है। मुबारक हो। तो यह वर्ष कोई के आगे कोई मुश्किलात नहीं आयेगी क्योंकि सहज योगी हो। अलबेले नहीं बनना। समय प्रमाण इस नये वर्ष में सभी को विशेष यह लक्ष्य रखना है कि जो भी खज़ाने प्राप्त हैं - समय है, संकल्प हैं, गुण हैं, ज्ञान है, शक्तियां हैं... सबसे बड़ा खज़ाना संकल्प है - श्रेष्ठ संकल्प, शुद्ध संकल्प। इन सभी खज़ानों को हर रोज सफल करना है। खूब बांटो। दाता के बच्चे मास्टर दाता बनो। खूब बांटों। क्यों? सफल करना अर्थात् सफलता को प्राप्त करना। तो यही इस वर्ष की विशेषता सदा कायम रखना। सफल करना है और सफलता है ही है। सभी कहते भी हो ना कि सफलता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है। है अधिकार? तो सफल करो और सफलता प्राप्त करो। कोई भी कार्य करो, कोई न कोई खज़ाना सफल करते जाओ और सफलता का अनुभव करते चलो। सोचो - सफलता का अधिकार आप ब्राह्मण आत्माओं के सिवाए और किसका अधिकार हो सकता है! क्यों? क्योंकि बाप ने आपको सफलता भव का वरदान दिया है। बापदादा सदा कहते हैं कि एक-एक ब्राह्मण आत्मा सफलता का सितारा है। सफलता स्वरूप है। सफलता कि सितारे हो ना या मेहनत के सितारे हो? बापदादा सभी बच्चों को सफलता का सितारा इसी स्वरूप में देखते हैं। याद है ब्रह्मा बाप ने आदि में कितने समय में सब सफल किया? अन्त तक अपना समय सफल किया, चाहे कर्मातीत भी बन गये फिर भी कितने पत्र लिखे! समय सफल किया ना! लास्ट दिन भी मुख से महावाक्य उच्चारण किये। लास्ट दिन तक सब सफल किया इसीलिए सफलता को प्राप्त हो गये। तो फालो फादर। वास्तव में संगमयुग का एक-एक संकल्प, एक-एक सेकण्ड सफल करना ही सफलता मूर्त बनना है। सभी निश्चय से कहते हैं ना कि ब्रह्मा बाप से तो हमारा बहुत प्यार है। तो प्यार की निशानी है जो बाप को प्रिय था वह बच्चों को प्रिय हो। समय, संकल्प और सर्व खज़ाने सफल हो। व्यर्थ नहीं हो। प्यार की निशानी फालो फादर। ब्रह्मा बाप ने विशेषता क्या दिखाई? जो सोचा वह सेकण्ड में किया। सिर्फ सोचा नहीं, सिर्फ प्लैन नहीं बनाया, प्रैक्टिकल में करके दिखाया। तो ऐसे है? फालो करने वाले हैं ना? अच्छा है।

आज बहुत ही आ गये हैं न्यु ईयर मनाने के लिए। अच्छा है। अगर हाल छोटा पड़ गया तो दिल तो बड़ी है। देखो दिल बड़ी है तो समा गये है ना? (आज सभा में 18-19 हजार भाई बहनें बैठे हैं) सभी बाहर बैठे हुए भी सुन रहे हैं ना? बाहर बैठने वाले सुन रहे हैं, वह तो दिखाई नहीं देंगे। बापदादा ने सुना कि फारेन में सबसे ज्यादा आस्ट्रेलिया वाले 12 बजे बैठते हैं। रात के 12 बजे बैठते हैं और 4 बजे अमृतवेला करके उठते हैं। तो बापदादा ने भी आज आस्ट्रेलिया को याद किया। सुन रहे हैं। यहाँ आस्ट्रेलिया वाले हैं हाथ उठाओ। त्रिमूर्ति मुबारक पहले आस्ट्रेलिया को फिर सभी को।

इस वर्ष का लक्ष्य तो बताया - सफल करो, सफलता है ही। यह सभी ने पक्का किया? सफल करना है। व्यर्थ नहीं। संगमयुग समर्थ युग है, सफलता का युग है, व्यर्थ का नहीं है। व्यर्थ के 63 जन्म समाप्त हुए। अब यह छोटा सा युग सफल करने का युग है। अगर समय सफल करेंगे तो भविष्य में भी आधाकल्प का पूरा समय राज्य अधिकारी बनेंगे। अगर कभी-कभी सफल करेंगे तो राज्य अधिकारी भी कभी-कभी बनेंगे। समय सफल की प्रालब्ध यह है। श्वांस सफल कर रहे हो तो 21 जन्म ही स्वस्थ रहेंगे। चलते-चलते हार्टफेल नहीं होगी। किसकी हार्ट रूक जाती, किसकी नलियां बन्द हो जाती, वह नहीं होगी।

ज्ञान के खज़ाने को भी सफल करो तो ज्ञान का अर्थ है समझ, वहाँ इतने समझदार बन जायेंगे जो कोई मन्त्रियों की जरूरत नहीं है। आजकल तो देखो शपथ लेते ही पहले मन्त्रीमण्डल बनाते हैं। वहाँ साथी होंगे लेकिन मन्त्री नहीं होगे। रायल फैमिली हर एक दरबार में बैठने वाले ताजधारी होंगे। रॉयल फैमिली कम नहीं होगी, चाहे तख्त पर नहीं भी बैठे लेकिन मर्तबा एक ही जैसा होगा। इसलिए यह नहीं सोचो कि तख्तनशीन बहुत थोड़े बनेंगे लेकिन आप लोग भी राज दरबार में राज्य अधिकारी के रूप में होंगे। आपके सिर पर भी ताज होगा और आपका पूरा अधिकार होगा। तो क्या बनेंगे? नम्बरवन या नम्बरवार? क्या बनेंगे? नम्बरवार बनेंगे या नम्बरवन बनेंगे? क्या बनेंगे? नम्बरवन या नम्बरवार? तो क्या करना पड़ेगा, पता है? हिम्मत दिखाई, यह बहुत अच्छा है। लेकिन वन नम्बर बनने के लिए पहले विन करना पड़ेगा। कर रहे हैं ना! करेंगे नहीं कहना, कर रहे हैं। दूसरे भी सुन रहे हैं। आज सुना कि पुराने सिन्ध के ब्रह्मा के साथी बहुत आये हैं। हाथ उठाओ। हिन्दी नहीं सिन्धी। बच्चे उठो, परिवार के परिवार आये हैं। अच्छा। कोई कमाल दिखायेंगे ना! क्या दिखायेंगे? (मैसेज देंगे) वह तो कर ही रहे हो। अच्छा 38 आये हैं, तो क्या कमाल करेंगे? चलो ज्यादा नहीं कहते हैं, छोटी-सी बात कहते हैं, करने के लिए तैयार हो? बच्चे भी कमाल करेंगे ना? (38 लाख बनायेंगे) पद्मगुणा मुबारक हो। आपने तो बड़ी बात बता दी लेकिन बापदादा छोटी बात कहते हैं वह एक एक, एक को लाओ। लाना है? एक, एक को लाओ। बच्चे हैं तो बच्चों को लाओ। मातायें हैं तो भाई को लायें या बहन को लायें, लेकिन एक-एक को एक लाना है। यह ग्रुप देख लो, आप इसको गाइड करना, अगले साल लेकर ही आना, डबल ग्रुप लेकर आना। बापदादा यही चाहते हैं कि जहाँ से आदि हुई, वहाँ ही प्रत्यक्षता होनी है। रहम आता है ना! ब्रह्मा बाप के देश के वासी हो तो देश वासियों से प्यार होता है।

आपके पास खज़ाने बहुत हैं, गुणों का खज़ाना कितना बड़ा है, शक्तियों का खज़ाना कितना बड़ा है। तो गुण दान, शक्तियों का दान करने वाले मास्टर दाता बनो। जो भी आये चाहे सम्बन्ध में आये, चाहे सम्पर्क में आये लेकिन उनको कोई न कोई गुण या शक्ति की गिफ्ट दे देना। कोइर् खाली हाथ नहीं जाये। और कुछ नहीं तो बाप के सन्देश के मीठे बोल, वह मीठे बोल भी गिफ्ट देना। दुनिया वाले तो कोई भी उत्सव होता है ना तो एक दो को मुख मीठा कराते हैं। लेकिन बापदादा कहते हैं मुख मीठा तो कराना ही है लेकिन अपना मीठा मुखड़ा भी दिखाना है। सिर्फ मुख मीठा नहीं, मुखड़ा भी मीठा। इतनी मधुरता जमा है ना! जो बांटो तो भी भरपूर रहो और इस खज़ाने को तो जितना बांटेंगे उतना बढ़ेगा, कम नहीं होगा। तो इस वर्ष नोट करना, जो भी आत्मा आई उसको कुछ दिया? अगर सुनने वाला नहीं है तो मीठी शक्तिशाली दृष्टि देना। लेकिन देना जरूर। खाली नहीं जाये। यह तो सहज है ना! कि मुश्किल है? यूथ ग्रुप सहज है? हाथ तो बहुत अच्छा हिला रहे हैं। यूथ ग्रुप भी अच्छा आया है।

डबल विदेशी यूथ रिट्रीट ग्रुप - सबसे श्रेष्ठ शक्ति यूथ के लिए है - परिवर्तन शक्ति। सोचा और किया। यूथ ने वायदे बहुत किये हैं ना! बापदादा ने समाचार सुना है। सभी यूथ कौन बन गये? (सभी यूथ हाथ हिला रहे हैं) सब तिलकधारी बनकर आये हैं, जिन्होंने विशेष रिफ्रेशमेंट की है वह तिलकधारी खड़े रहो। (तिलक लगाकर बैठे हैं) अच्छी निशानी लगाई है। आत्मा चमक गई है ना? जो समझते हैं कि हमारी इस ट्रेनिंग से गोल्डन हार्ट बन गई, वह हाथ उठाओ। गोल्डन हार्ट बन गई। यह तो सबसे आगे चले गये। गोल्डन स्टार नहीं, गोल्डन हार्ट। फिर तो सफलता मूर्त हो गये। अभी गोल्डन हार्ट प्लेन में थोड़ा नीचे तो नहीं आ जायेगी, अच्छा अपने देश में जाके थोड़ा गोल्डन सिल्वर बनेंगी? नहीं बनेगी? अच्छा है। ऐसे तैयार हो जाओ जो भारत की आत्माओं को जगाओ। है हिम्मत? भारत को जगायेंगे? बहुत टेढ़े-बांके क्वेश्चन करेंगे भारत वाले। उत्तर देंगे? आप सबका फोटो टी.वी. में आ रहा है। तो आप सबको निमन्त्रण आयेगा भारत को जगाने के लिए। तो एवररेडी रहना। अगर टिकेट नहीं होगी तो मिल जायेगी। बापदादा को पता है कि डबल फारेनर्स की विशेषता है, एक साल होकर जाते हैं, दूसरे साल की तैयारी सारे वर्ष में करते जाते हैं। अच्छा है। कितने देशों के यूथ हैं? (21 देशों के) बापदादा जानते हैं कि यह गोल्डन हार्ट कमाल करेंगे। अटेन्शन अच्छा रखा है। स्व-पुरूषार्थ का अटेन्शन ज्यादा इस बारी अन्डरलाइन किया है। बापदादा खुश है। अच्छा है ग्रुप-ग्रुप बनने से अटेन्शन जाता है। सारे संगठन के बजाए ग्रुप अच्छा होता है लेकिन पॉजिटिव हो।

अच्छा-(बापदादा ग्रुप-ग्रुप उठा रहे हैं) (अन्तर्मुखी ग्रुप) अच्छा पुरूषार्थ किया है। बापदादा देखते है कि हर ग्रुप यही चाहता है कि हम आगे से आगे जायें। रीस नहीं करते, रेस करते हैं। अच्छा है, अन्तर्मुखी सदा सुखी। (शक्ति ग्रुप) - बापदादा शक्ति ग्रुप से पूछते हैं कि प्रत्यक्षता का झण्डा कब लहरायेंगे? बोलो, शक्तियां तो झण्डा लहराने वाली हैं ना! तो प्रत्यक्षता का झण्डा शक्तियां लहरायेंगी ना! अच्छा है। अभी आपस में रूहरूहान कर डेट को फिक्स करना। जैसे और डेट फिक्स करते हो वैसे यह भी डेट फिक्स करना कि प्रत्यक्षता का झण्डा कब लहरेगा? लहरायेंगे ना! (महावीर ग्रुप) महावीर ग्रुप क्या करेगा? साल के साथ-साथ सदा के लिए माया को भी विदाई देना। हो सकता है? माया को विदाई देंगे? कि आवे कोई हर्जा नहीं? महावीर का अर्थ ही है जैसे ब्रह्मा बाप ने जो कहा वह किया है, जो सोचा वह तुरत दान महापुण्य समान किया। ऐसे ही महावीर ग्रुप का यह लक्ष्य है ना! करेंगे? अच्छा है। हिम्मत तो आती है। (विदेश के छोटे बच्चों का ग्रुप) सभी ने अपनी निशानी लगाई है। (यूथ ने तिलक लगाया है, इन्होंने बैनर बनाया है, झण्डी हाथ में है।) एंजिल से देवता बन गये, कितना अच्छा है। तो देवता माना दिव्य गुण वाले। तो दिव्य गुण को कभी नहीं छोड़ना। अच्छा है। बच्चों का उमंग-उत्साह बढ़ता है। इण्डिया के बच्चे भी उठो - (भारत से 1000 बच्चे आये हैं) अच्छा है भारत और विदेश के सब देशों के मिलकरके दिल्ली को घेराव करो। दिल्ली को अपनी राजधानी बनाना है ना? तो पहले राजधानी तैयार करेंगे, तब तो राज्य करेंगे ना! ऐसा दिल्ली के चारों ओर घेराव करो जो सारे भारत के वी.आई.पी. जग जावें। भारत के बच्चे भी करेंगे ना! अच्छे हैं, भारत भी कम नहीं है। बच्चे अच्छे-अच्छे आये हैं। अच्छा।

अभी इस वर्ष नवीता क्या करेंगे? अभी बापदादा ने जो काम दिया है, वह किया नहीं है। माइक और वारिस का ग्रुप कहाँ लाया है। बापदादा यही कहते हैं वेट एण्ड सी। प्रत्यक्षता का झण्डा यह माइक लहराने में होशियार होते हैं। हैं अलग-अलग देशों में कोई-कोई माइक हैं लेकिन संगठित रूप में सामने नहीं आये हैं, अभी उन्हों को इकट्ठा करो। इकट्ठा करने से क्या होता है? एक दो को देखकरके उन्हों को उमंग आता है, उत्साह आता है। भारत में भी माइक चाहिए, तो विदेश में भी चाहिए। तैयार हो रहे हैं ना? लेकिन अभी छिपे हुए हैं, पर्दे के अन्दर हैं, अभी बाहर लाओ। बाहर लाना है ना! बहुत अच्छा।

माताओं का झुण्ड तो बहुत बड़ा है। अगर उठायेंगे तो सारा हाल छिप जायेगा। माताओं को देखकर बापदादा खुश होते हैं। क्यों खुश होते हैं? क्योंकि संगम में माताओं को ही बापदादा के द्वारा चांस मिलता है। द्वापर, कलियुग में नहीं मिला, अभी मिल रहा है। चाहे महात्माओं में भी अभी दिन प्रतिदिन ज्यादा चांस मिल रहा है। गवर्मेन्ट में भी अभी माताओं को सेवा करने का चांस मिल रहा है। बापदादा सदा कहते हैं कि यह मातायें जिस भी सेन्टर पर होंगी ना वह सेन्टर सदा फलीभूत होगा। चाहे कमायें नहीं लेकिन दिल बड़ी होती है, भावना बड़ी होती है। तो बाप भी भावना और सच्ची दिल को पसन्द करते हैं। हर ग्रुप में देखा है मातायें ज्यादा ही होती हैं। तो मातायें अभी हमजिन्स को और जगाओ। आप लाओ हाल आपेही बड़ा हो जायेगा। यह नहीं सोचो हाल अभी भर गया, कहाँ बैठेंगे, लाओ तो सब कुछ हो जायेगा। हो जायेगा ना? दादी यह तो नहीं सोचती कि क्या करेंगे? कम से कम 9 लाख बैठ सकें, इतनी प्रजा तो तैयार करेंगे या नहीं? कब करेंगे? कब करेंगे, वह डेट फिक्स करेंगे। 9 लाख लायेंगे पहले, पाण्डव लायेंगे। बापदादा हाल तैयार कर लेंगे लेकिन 9 लाख लाओ। (एक एक लाख हर वर्ष लायेंगे) ऐसा नहीं। वह तो आवें, उसकी तो मना है ही नहीं। लेकिन आखिर स्टेज पर 9 लाख तो लायेंगे या नहीं? नहीं तो राज्य किस पर करेंगे? आपके पहले जन्म में 9 लाख भी प्रजा या रॉयल फैमिली नहीं होगी तो किस पर राज्य करेंगे? मधुबन वाले क्या सोचते हैं? 9 लाख चाहिए या नहीं? 9 लाख चाहिए, मुख्य पाण्डव क्या कहते हैं? चाहिए, नहीं चाहिए? हो जायेगा। जब 9 लाख आयेंगे तो साधन स्वत: जुट जायेगा। घबराओ नहीं, हाल बनाना पड़ेगा। देखो, भविष्य बहुत-बहुत उज्जवल है। सब साधन मिल जायेंगे। बने बनाये हाल आपको मिलेंगे। बनाने नहीं पड़ेंगे। सिर्फ जो इस वर्ष का स्लोगन दिया है ना - सफल करो, सफलता है ही। अच्छा। पाण्डव हाथ हिलाओ।

टीचर्स - टीचर्स अभी स्वयं भी सफल करो और सफल कराओ। सेवा में वृद्धि होना अर्थात् खज़ानों को सफल किया और कराया। तो इस वर्ष इस स्लोगन को प्रैक्टिकल में लाना तो स्वत: ही वृद्धि होती जायेगी। हिम्मत दिलाओ। बापदादा ने देखा है, कोई-कोई स्थान में हिम्मत कम दिलाने की शक्ति है। हिम्मत दिलाओ, हर कार्य में मन्सा में भी, वाचा में भी, सम्बन्ध-सम्पर्क में भी, कर्म में भी हिम्मत दिलाओ। टीचर्स की सीट ही है -हिम्मत में रहना और हिम्मत दिलाना। क्यों? क्योंकि टीचर्स को जो बाप की मुरली सुनाने का चांस मिला है और तख्त मिला है, यह एकस्ट्रा मदद है। तो हिम्मत और उल्हास दिलाओ। सारा क्लास रूहानी खिला हुआ गुलाब दिखाई दे। सुना टीचर्स ने। उल्हास में लाओ क्लास को।

सेवा का टर्न इन्दौर जोन का है - अच्छा इन्दौर का ग्रुप उठो। अच्छा है - सेवा के लिए डायमण्ड चांस मिला है। एक कर्मणा और दूसरा स्व-उन्नति का भी डायमण्ड चांस। अच्छा - सभी ने हिम्मत अच्छी रखी है। सेवा का उमंग भी अच्छा रहा है। सबसे बड़े ग्रुप को सम्भाला है। तो हिम्मत के रिटर्न में बापदादा का पदम-पद्मगुणा मुबारक है। सदा ही डायमण्ड बन सेवा में डायमण्ड चांस लेते रहना। अच्छा है। बहुत अच्छा। ज्युरिस्ट विंग के भाई बहनों की मीटिंग हो रही है - इन्टरनेशनल है ना। अगर इतने वकील या जज हो गये, फिर तो गीता का भगवान सिद्ध हो जायेगा। अच्छा है। बहुत अच्छा। ऐसा प्लैन बनाओ जो कोई ने नहीं किया हो, वर्ग तो बहुत बने हुए है ना! तो आपका वर्ग सबसे नम्बरवन ले लेवे। अच्छा है। ग्रुप अच्छा है। लेकिन ऐसे प्लैन बनाओ जो सांप मरे और लाठी भी नहीं टूटे। प्रत्यक्षता हो, धमाल नहीं हो, कमाल हो। अच्छा है और भी संगठन इकट्ठा करो। (प्लान बनाया है) मुबारक हो। अच्छा।

कल्चरल ग्रुप - नाचना गाना तो सभी को आता है, बाप के गुणों का गीत गाना भी आता है और खुशी में नाचना भी आता है। अच्छा है। कल्चर द्वारा भारत का कैरेक्टर प्रसिद्ध करो। हो कल्चर लेकिन कैरेक्टर सिद्ध हो जाए कि श्रेष्ठ कैरेक्टर क्या है! अच्छा है वर्ग जबसे बने हैं, अलग-अलग सेवा तो कर रहे हैं। कमाल करके दिखाना। सब कमाल करने वाले हैं ना? कमाल करना है ना! हर वर्ग को अभी नया-नया प्लैन बनाना चाहिए। यह वर्ग बनके कितना साल हो गये हैं? (20 साल) बापदादा ने सभी वर्ग वालों को कहा था, याद है कि अपने-अपने वर्ग का विशेष सेवा में माइक बने, या वारिस बनें, ऐसा संगठन तैयार करो। तो आपके कल्चरल में कौन तैयार हुआ है? लाया है? तो बाप का सन्देश देने के लिए आपकी तरफ (बाम्बे के प्रसिद्ध एक्टर परिक्षित सहानी परिवार बापदादा के सामने खड़ा है) सब अंगुली कर रहे हैं। अच्छा है। प्लैन बनायेगा। हिम्मत आपकी, मदद बाप की है ही है।

अच्छा - एक सेकण्ड में मन की ड्रिल याद है? हर एक सारे दिन में कितने बार यह ड्रिल करते हो? यह नोट करो। यह मन की ड्रिल जितना बार करेंगे उतना ही सहज योगी, सरल योगी बनेंगे। एक तरफ मन्सा सेवा दूसरे तरफ मन्सा एक्सरसाइज। अभी-अभी निराकारी, अभी-अभी फरिश्ता। ब्रह्मा बाप आप फरिश्तों का आह्वाहन कर रहे हैं। फरिश्ता बनके ब्रह्मा बाप के साथ अपने घर निराकार रूप में चलना। फिर देवता बन जाना। अच्छा -

चारों तरफ से बहुत-बहुत यादप्यार चाहे कार्ड के रूप में, चाहे पत्रों के रूप में बापदादा के पास पहुंच गये हैं। बापदादा जानते हैं कि हर बच्चा यही समझते हैं मेरी याद बाबा को देना, लेकिन मिल गई है। यादप्यार देने वाले बहुत लाडले बच्चे बापदादा के सामने हैं। इसलिए बापदादा कहते हैं कि हर एक बच्चा अपने-अपने नाम से मुबारक अौर दिल की दुआयें स्वीकार करे।

आप सभी को भी नव जीवन, नव युग और नये वर्ष की बहुत-बहुत पदम-पदम-पदम-पद्मगुणा मुबारक और दिल की दुआयें हैं, यादप्यार और नमस्ते।

दादी जी, दादी जानकी जी से - आप दोनों एक मत होकरके सारे परिवार को चलाने के निमित्त बनी हो। यह सभी आपके साथी हैं। सुनाया ना - अगर सफल करते जायेंगे तो मायाजीत बन ही जायेंगे। दादियां कहती हैं कि इस साल में सभी एकमत हो जाएं। जिसको भी देखो एक हैं। जैसे दादियों के लिए कहते हो एक हैं, ऐसे आप दीदियां, दादे सब एकमत। इसका स्लोगन है अभी-अभी बालक बनो, अभी-अभी मालिक बनो। बालक के समय मालिक नहीं बनो, मालिक के समय बालक नहीं बनो। तो दादियों को यह संकल्प उठा है, वो पूरा कौन करेगा? आप सभी करेंगे ना? अगर विचारों में फर्क हो जाये तो क्या करेंगे? अच्छा। सभी को देख बापदादा खुश हो रहे हैं। एक दिन आयेगा, बहुत जल्दी आयेगा जो सब कहेंगे कि हम सभी स्व-परिवर्तन करने वाले शक्ति पाण्डव सेना हैं। स्व-परिवर्तन। पुराने साल को विदाई देने के साथ-साथ माया को भी विदाई दे दो। वह भी थक गई है। विदाई और बधाई दोनों साथ-साथ।

नया वर्ष 2003 का शुभारम्भ - 31 दिसम्बर 2002, रात्रि 12 बजे के बाद बापदादा ने सभी बच्चों को नये वर्ष की बधाई दी।

चारों ओर के बहुत मीठे, बहुत प्यारे बच्चों को पदम-पदम गुणा न्यु ईयर की मुबारक हो। यह जो घड़ी बीत गई, यह है विदाई और बधाई की घड़ी। एक तरफ विदाई देनी है, जो अपने में सम्पन्न बनने में कमी अनुभव करते हो, उसको विदाई, सदा के लिए विदाई देना और आगे उड़ने के लिए बधाई। बधाई हो, बधाई हो, बधाई हो। अच्छा

ओम् शान्ति।